Sunday, 19 May 2019

देश के लिए खतरे की घंटी है पश्चिम बंगाल की हिंसक घटनाएं। सेंट्रल फोर्स की मौजूदगी और चुनाव आयोग की सख्ती के बाद भी मतदान के दौरान बमबारी।
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19 मई को लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में पश्चिम बंगाल की नौ सीटों पर भी मतदान हुआ। डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी टीएमएसी के उम्मीदवार है। भतीजे को हर हाल में चुनाव जितवाने के लिए ममता सरकार ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह की सभा पर रोक लगा दी थी। 19 मई को इस्लामपुर, मथुरापुर आदि में खुलेआम बमबारी हुई। यहां तक की मीडिया कर्मियों को भी पीटा गया, ताकि हिंसक घटनाएं कैमरे में कैद नहीं हो। टीएमसी के विरोधी मतदाताओं को तो मतदान केन्द्र तक पहुंचने ही नहीं दिया गया।
लोगों को पकड़ कर मारपीट की घटनाएं तो सामान्य मानी गई। यह तब हुआ जब चुनाव आयोग ने इन नौ सीटों पर बीस घंटे पहले प्रचार पर रोक लगा दी थी। प्रदेश के गृह सचिव तक को बदल दिया गया। इतना ही नहीं मतदान केन्द्र पर बंगाल पुलिस के बजाए सेंट्रल फोर्स के जवानों की तैनाती की गई।  यदि इतनी सख्ती के बाद भी बमबारी की वारदातें हों तो बंगाल के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। सवाल ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री होने या न होने का नहीं है, अहम सवाल बंगाल के उन आपराधिक तत्वों का है जो सेंट्रल फोर्स के सशस्त्र जवानों से भी नहीं डर रहे हैं। यदि ऐसे तत्व टीएमसी के राजनीतिक कार्यकर्ता होते तो कभी ऐसी बमबारी नहीं करते। ऐसे तत्व देश को नुकसान पहुंचाने वाले हैं, जिनका मकसद भारत की एकता और अखंडता को क्षति पहुंचाना है। ऐसे तत्वों के लिए ममता बनर्जी तो सिर्फ एक मुखौटा है। ममता फिलहाल इस बात से खुश हो सकती हैं कि आपराधिक तत्व उनकी टीएमसी को जितवाने का कार्य कर रहे हैं। जब हालात नियंत्रण से बाहर जाएंगे तो ममता को भी पछताना पड़ेेगा। पश्चिम बंगाल में किन परिस्थितियों में चुनाव हुए हैं, यह बात ममता भी जानती हैं। ममता ने पूरे प्रशासनिक ढांचे का उपयोग अपनी पार्टी के लिए किया। यही वजह है कि आपराधिक तत्वों को सरकार का संरक्षण मिला हुआ है। ममता खुले आम कह रही है कि वे नरेन्द्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री नहीं बल्कि गुंडा मानती है। ममता के इस बयान से बंगाल के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। ममता ने प्रधानमंत्री के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया है, उससे सबसे ज्यादा खुशी बंगाल के आपराधिक तत्वों को हो रही है। 
एस.पी.मित्तल) (19-05-19)
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ईवीएम में दर्ज मतों की गणना के बाद होगा वीपीपेट की पर्चियों से मिलान।
तब तक परिणाम की अधिकृत घोषणा नहीं।
चुनाव आयोग ने जारी किए मतगणना के आवश्यक निर्देश।
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19 मई को देशभर में लोकसभा चुनाव के मतदान की प्रक्रिया पूरी हो रही है। अब सबकी निगाहें 23 मई को होने वाली मतगणना पर लगी हुई है। देश के चुनावी इतिहास में यह पहला अवसर होगा, तब एक विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केन्द्र की ईवीएम मशीन में दर्ज वोटों का मिलान वीवीपेट की पॢचयों से होगा। हालांकि चुनाव आयोग ने इस बार ईवीएम को वीपीपेट से जोड़ा है। वीवीपेट पर देख कर सभी मतदाताओं ने यह सुनिश्चित किया है कि उसका वोट सही तरीके से दर्ज हुआ है। विपक्षी दलों की मांग और सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के अनुरूप चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पांच वीपीपेट की पॢचयों का मिलान ईवीएम में दर्ज मतों से होगा। अजमेर संसदीय क्षेत्र में 8 विधानसभा क्षेत्र है तो चालीस मतदान केन्द्रों पर मतों की गणना के लिए यह पक्रिया अपनाई जाएगी। राजस्थान के निर्वाचन विभाग के विशेषाधिकारी हरिशंकर गोयल ने बताया कि 23 मई को पहले संबंधित संसदीय क्षेत्र की मतगणना विधानसभा वार होगी। ईवीएम में दर्ज मतों की गणना पूरी हो जाने के बाद प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केन्द्र का रेंडम पद्धति से चयन होगा। चयन की प्रक्रिया भी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के सामने होगी। इन पांच केन्द्रों की ईवीएम के मतों का मिलान वीवीपेट की पॢचयों से होगा। वैसे तो सभी केन्द्रों पर वीवीपेट की पॢचयों के अनुरूप ही ईवीएम के वोट होंगे, लेकिन यदि किसी ईवीएम के वोटों में अंतर सामने आया तो वीवीपेट की पॢचयों के अनुरूप ही उम्मीदवारों के वोट दर्ज किए जाएंगे। जब तक वीवीपेट की पॢचयों का मिलान का का र्य पूरा नहीं होगा, तब तक परिणाम की अधिकृत घोषणा नहीं होगी। हालांकि ईवीएम के मतों की गणना की जानकारी आयोग के निर्देश के अनुरूप सार्वजनिक की जाती रहेगी। वीवीपेट की पॢचयों के 25-25 के बंडल बनाए जाएंगे, ताकि मिलान की प्रक्रिया जल्द और सरलता से पूरी हो सके। यदि किसी केन्द्र पर वोटों की संख्या ज्यादा है तो मिलान की प्रक्रिया में भी ज्यादा समय लगेगा। आयोग ने इस संबंध में निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवा दी है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वीवीपेट की पॢचयों के अनुरूप ही ईवीएम में वोट दर्ज हुए हैं। गोयल ने कहा कि ईवीएम पर सवाल उठाना बकवास है। ऐसी कोई तकनीक नहीं है जिससे ईवीएम में दर्ज मतों में फेरबदल किया जा सके। जिन मतदान केन्द्रों पर लापरवाही की वजह से मॉकपोल के वोट भी ईवीएम में दर्ज हो गए हैं, वहां पर वीवीपेट की पॢचयों से मतों की गणना होगी। 
एस.पी.मित्तल) (19-05-19)
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दूसरे दिन भी भोले बाबा की शरण में रहे प्रधानमंत्री मोदी।

दूसरे दिन भी भोले बाबा की शरण में रहे प्रधानमंत्री मोदी।
आलोचना करने वाले भी ऐसी पहल कर सकते थे।

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19 मई को जब बनारस संसदीय क्षेत्र में मतदान हो रहा था, तब यहां से भाजपा के उम्मीदवार और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भोले बाबा की शरण में थे। चूंकि मोदी ने गुजरात के अहमदाबाद में अपने मताधिकार का उपयोग कर लिया था, इसलिए 19 मई को बनारस में वोट नहीं डाला। मोदी 18 मई को ही केदारनाथ धाम पहुंच गए थे। रात भर गुफा में ध्यान करने के बाद मोदी ने सुबह एक बार फिर केदारनाथ मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके बाद मोदी बद्रीनाथ धाम आ गए। मोदी ने केदारनाथ मंदिर परिसर में पत्रकारों से संवाद भी किया। एक पत्रकार का सवाल था कि आपने भोले बाबा से क्या मांगा? इस पर मोदी ने कहा कि मैं यहां कुछ मांगने नहीं आया हंू। बाबा ने मुझे देने लायक बना दिया है अब देश के लिए कुछ करने का मेरा दायित्व है। मोदी का यह जवाब दर्शाता है कि वे लोकसभा चुनाव के परिणाम को लेकर आश्वस्त है। जहां विपक्षी दलों के नेता जोड़ तोड़ की राजनीति में लगे हुए हैं, वहीं मोदी भोले बाबा की शरण में हैं। मोदी की इस धार्मिक यात्रा को लेकर कुछ राजनेता आलोचना कर रहे हैं। आलोचना करने वालों का कहना है कि मोदी धार्मिक यात्रा की आड़ में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। चूंकि लोकसभा चुनाव के अंतिम दौर का मतदान 19 मई को होना था, इसलिए मोदी ने धार्मिक यात्रा कर प्रचार पाने का प्रयास किया है। यह सही भी है कि जब मोदी 18 मई को केदारनाथ धाम गए और रात को गुफा में ध्यान लगाया तो सभी प्रचार माध्यमों पर मोदी छाए रहे। मोदी ने जिस तरह से सनातन संस्कृति के अनुरूप पूजा अर्चना की उसका असर निसंदेह 59 संसदीय क्षेत्रों के मतदाताओं पर हुआ होगा। लेकिन सवाल उठता है कि मोदी ने जो धार्मिक यात्रा की वैसी यात्रा आलोचना करने वाले राजनेता भी कर सकते थे। यदि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी किसी धार्मिक स्थल पर जाकर पूजा पाठ करते तो उन्हें कौन रोका रहा था? असल में नरेन्द्र मोदी की रणनीति का मुकाबला करने में विपक्ष विफल रहा है। जब मोदी कोई कार्य कर देते हैं तब विपक्षी दल चेतता है। लोकसभा चुनाव का प्रचार अभियान 17 मई को सायं पांच बजे समाप्त हुआ। मोदी 18 मई को केदारनाथ धाम जाएंगे इसकी रणनीति बहुत पहले से बन गई थी। चुनाव आयोग ने भले ही 17 मई की शाम को प्रचार पर रोक लगा दी हो, लेकिन केदारनाथ धाम जाने की वजह से सभी मीडिया माध्यमों पर मोदी छाए रहे। यह कहा जा सकता है कि कि रोक के बाद भी मोदी का प्रचार अभियान जारी रहा। ऐसी पहल विपक्षी दलों के नेता भी कर सकते थे। लेकिन आम चुनाव को लेकर मोदी और भाजपा ने जो रणनीति बनाई वैसी रणनीति विपक्षी दलों के नेता नहीं बना पाए। असल में गत वर्ष विपक्षी दलों ने भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने की घोषणा की थी, लेकिन लोकसभा चुनाव आते आते विपक्ष का महागठबंधन टुकड़े टुकड़े हो गया। यूपी में जहां सपा-बसपा के गठबंधन में कांगे्रस शामिल नहीं हुई वहीं पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी एकला चलो की नीति पर कायम रही। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, गुजरात आदि राज्यों में कांग्रेस प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभरी लेकिन बंगाल, उड़ीसा, तमिलनाडु, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि राज्यों में कांग्रेस की स्थिति बेहद कमजोर रही। जो राजनीतिक दल दिल्ली में राहुल गांधी के साथ मंच सांझा करते रहे, उन्होंने अपने प्रभाव वाले प्रदेश में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया। विपक्ष के टुकड़े टुकड़े हो जाने का लाभ लोकसभा के चुनाव में भाजपा को मिला है। 
एस.पी.मित्तल) (19-05-19)
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Saturday, 11 May 2019

तो क्या पाकिस्तान का पत्रकार भारत के प्रधानमंत्री की तारीफ करेगा?



तो क्या पाकिस्तान का पत्रकार भारत के प्रधानमंत्री की तारीफ करेगा?
अमरीका की टाइम मैगजीन में मोदी पर प्रतिकूल टिप्पणी।
राहुल गांधी ने ट्वीट किया। 
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अमरीका की टाइल मैगजीन ने अपने एशिया संस्करण में भारत के लोकसभा चुनाव को लेकर एक स्टोरी प्रकाशित की है। मैगजीन के कवर पेज पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का फोटो छापा है और लिखा है कि मोदी भारत का प्रमुख विभाजनकारी है। यह मैगजीन भले ही अमरीका से निकलती हो, लेकिन इस स्टोरी को पाकिस्तान के पत्रकार आतिश तासीर ने लिखा है। चूंकि पाकिस्तान के पत्रकार ने कांग्रेस के नेताओं की मन की बात लिखी है, इसलिए राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर दिया है। राहुल गांधी अपने भाषणों में आरएसएस और मोदी की विचारधारा को देश से खत्म करने की बात कहते हैं। नरेन्द्र मोदी भारत के विभाजनकारी है या  नहीं, इसका पता तो 23 मई को चलेगा। लेकिन सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान का पत्रकार भारत के प्रधानमंत्री की तारीफ करेगा? क्या आतिश तासीर से यह उम्मीद की जा सकती है कि वह भारत के प्रधानमंत्री की तारीफ करें? यदि कोई पाकिस्तानी पत्रकार मोदी की तारीफ कर दे, उसका पाकिस्तान में रहना मुश्किल हो जाएगा। असल में पाकिस्तान के लोगों में देशभक्ति है और वहां के पत्रकार कभी भी उस देश के प्रधानमंत्री की तारीफ  नहीं कर सकते, जिसने हाल ही में बालाकोट पर एयर स्ट्राइक की हो। जो प्रधानमंत्री पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को मारने की बात कर रहा हो, उस प्रधानमंत्री की तारीफ पाकिस्तान का पत्रकार कैसे कर सकता है? जब मोदी अपने देश को मजबूत करने में लगे हुए तो तब पाकिस्तान का पत्रकार तो मोदी को विभाजनकारी ही कहेगा। पाकिस्तान के पत्रकार तो भारत के उन्हीं प्रधानमंत्रियों की तारीफ करेंगे, जिनके कार्यकाल में कश्मीर से चार लाख हिन्दुओं को प्रताडि़त कर भगा दिया गया। भारत का जो प्रधानमंत्री कश्मीर के अलगाववादियों से दिल्ली और लाहौर में तर्क करे उसकी तारीफ तो पाकिस्तान के पत्रकार कर सकते हैं। 
मोदी जब कश्मीर के अलगाववादियों और उनके हिमायतियों को जेल में डाल रहे है तब पाकिस्तान का कोई पत्रकार कैसे प्रशंसा कर सकता है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का टाइम मैगजीन की स्टोरी पर ट्वीट किया जाना भी गलत नहीं है। क्योंकि नरेन्द्र मोदी कह रहे हैं कि पिछले पांच वर्ष में भ्रष्टाचारियों को वे जेल के दरवाजे तक ले आए हैं। अगले पांच वर्ष में ऐसे भ्रष्टाचारी जेल के अंदर होंगे। टाइम मैगजीन के पाकिस्तानी पत्रकार का आरोप है कि मोदी ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में विकास और जनता की भलाई का कोई कार्य नहीं किया। शायद पाकिस्तानी पत्रकार आतिश तासीर को प्रधानमंत्री की मुद्रा योजना में बेरोजगारों को कम ब्याज दर पर ऋण, ग्रामीण महिलाओं को रसोई गैस का सिलेंडर, गरीब परिवारों में नि:शुल्क बिजली कनेक्शन, आयुषमान भारत योजना में गरीबों को पांच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा योजना, घर घर में शौचालय आदि योजनाओं की जानकारी नहीं होगी। ये ऐसी योजनाएं हैं जिनका लाभ पिछले पांच वर्षों में गांव ढाणी के ग्रामीणों तक पहुंचा है। चूंकि पत्रकार आतिश तासीर पाकिस्तानी सोच के पत्रकार हैं इसलिए नरेन्द्र मोदी को विभाजनकारी ही बताएंगे। 
एस.पी.मित्तल) (11-05-19)
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भीम आर्मी के प्रदर्शन के बाद मायावती भी चेती।

भीम आर्मी के प्रदर्शन के बाद मायावती भी चेती। 
अलवर गैंगरेप कांड में राजस्थान की कांग्रेस सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले। 
सरकार की नीयत पर शक। भाजपा सांसद किरोड़ी मीणा हिरासत में।
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11 मई को बसपा प्रमुख मायावती ने अलवर के बहुचर्चित गैंगरेप कांड में सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की मांग की है। मायावती तब जागी है जब 10 मई को भीम आर्मी के संस्थापक चन्द्रशेखर के नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ताओं ने जयपुर में प्रदर्शन किया। भीम आर्मी को बसपा का प्रतिद्वदी माना जाता है। चूंकि गैंगरेप की शिकार युवती दलित परिवार से है, इसलिए मायावती ने राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर बड़ा हमला बोला है। मायावती ने आरोप लगाया कि 26 अप्रैल की घटना की रिपोर्ट पुलिस ने 4 मई तक नहीं लिखी और 6 मई को लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के दिन मामला उजागर हुआ। राजस्थान में 29 अप्रैल और 6 मई को दो चरणों में चुनाव हुए हैं। मायावती ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेकर पुलिस और कांग्रेस सरकार पर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। चुनाव को देखते हुए मामले को दबाए रखने से प्रतीत होता है कि अशोक गहलोत के नेतृत्व में चलने वाली कांग्रेस सरकार दोषियों को बचा रही है। यह मामला एक दलित महिला का नहीं है, बल्कि समाज की सभी महिलाओं के सम्मान से जुड़ा हुआ है। मायावती ने कहा कि अलवर गैंगरेप केस को लेकर सम्पूर्ण समाज में रोष व्याप्त है। 
अब तक सिर्फ एक थानेदार संस्पेंड:
जिस अलवर गैंगरेप कांड की गूंज पूरे देश में हो रही है, उसमें अब तक एक थानेदार को ही सस्पेंड किया गया है। एसपी राजीव पचार को सिर्फ अलवर से हटाया है, जबकि पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका बेहद खराब रही है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग का भी मानना है कि एसपी के आदेश के बाद भी थाने पर रिपोर्ट नहीं लिखी। 26 अप्रैल की घटना की रिपोर्ट 3 मई तक नहीं लिखा जाना यह बताता है कि पुलिस और सरकार के प्रतिनिधि आरोपियों को संरक्षण दे रहे थे। यदि सोशल मीडिया पर गैंगरेप का वीडियो वायरल नहीं होता तो पुलिस पूरे मामले को ही रफा-दफा कर देती। इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या हो सकती है कि जब पीडि़ता और उसका पति थाने पर रिपोर्ट लिखाने पहुंचा तो थानेदार ने कहा कि पुलिस अभी चुनाव में व्यस्त है। इस बीच  पांच बलात्कारी पीडि़त दम्पत्ति को वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल करते रहे। समझ में नहीं आता कि संभागीय आयुक्त से जांच करवा कर राज्य सरकार अपनी नाकामियों को क्यों छिपा रही है?
किरोड़ी मीणा हिरासत में:
दलित युवती से उसके पति के सामने गैंगरेप की घटना के विरोध में 11 मई को भाजपा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के नेतृत्व में अलवर में बड़ा प्रदर्शन किया गया। डॉ. मीणा ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने इस शर्मनाक कांड में अब तक सिर्फ एक थानेदार को सस्पेंड किया है। एसपी को हटाया जाना कोई कार्यवाही नहीं है। अब जब यह बात उजागर हो गई कि पुलिस ने लापरवाही बरती है तो दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होना चाहिए। मीणा ने कहा कि सरकार पुलिस पर कार्यवाही करने से घबरा रहा है क्योंकि लोकसभा चुनाव की वजह से सरकार उच्च निर्दोश पर ही मामले को दस दिनों तक दबाए  रखा गया। मीणा के नेतृत्व में जब सैकड़ों ग्रामीण रूपावास रेल फाटका की ओर जा रहे थे कि तभी पुलिस ने मीणा और उनके कुछ समर्थकों को हिरासत में ले लिया। पुलिस को अंदेशा था कि प्रदर्शन कारी रेल ट्रेक को जाम करेंगे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया। मीणा ने उन्हें हिरासत में लिए जाने की भी निंदा की है। 
एस.पी.मित्तल) (11-05-19)
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