Thursday, 17 January 2019

अजमेर के कांग्रेसी कैसे है? यह मैं अच्छी तरह जनता हंू-सीएम गहलोत।

अजमेर के कांग्रेसी कैसे है? यह मैं अच्छी तरह जनता हंू-सीएम गहलोत।
फीडबैक में फीलगुड कराया। दीपक हासानी ने उठाया सिंधियों के सम्मान का मुद्दा। दुग्ध उत्पादकों अनुदान की मांग।
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राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए जिलावार कांग्रेसियों से मिलने का जो सिलसिला शुरू किया है, उसमें 16 जनवरी को अजमेर के कांग्रेसियों से भी मुलाकात की। अजमेर के कोई पांच सौ कांग्रेसियों से सायं पांच बजे मुलाकात होनी थी, लेकिन यह मुलाकात रात 8 बजे से शुरू हुई। हालांकि इससे पहले सीएम हाउस में शानदार चाय नाश्ते का इंतजाम कर दिया था। यानि फीडबैक से पहले कांग्रेसियों को सत्ता में होने का अहसास करा दिया गया। सीएम गहलोत ने मुस्कुराते हुए कहा कि अजमेर के कांग्रेसियों को मैं तीस वर्षों से जानता हंू। यहां के कांग्रेसी हमेशा चर्चा में रहते हैं। हालांकि गहलोत ने सीधे तौर पर कोई नाराजगी नहीं जताई, लेकिन प्रतीत हो रहा था कि अजमेर में विधानसभा चुनाव में कांगे्रस उम्मीदवारों की हार का सीएाम को अफसोस है। अजमेर में 8 में से 6 सीटों पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। गहलोत ने प्रभारी मंत्री प्रमोद जैन की ओर इशारा करते हुए कहा कि अच्छा है आप अजमेर में घुल मिल गए हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि अजमेर में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट द्वारा नियुक्त अध्यक्ष ही हैं और सरकार बनने से पहले तथा बाद में भी जिला कांग्रेस कमेटियां अशोक गहलोत का फोटो लगाने से परहेज करती हैं। किसी भी समारोह के मंच के बैनर पार सिर्फ पायलट का ही फोटो होतो है। इसे गहलोत का बड़ा दिल ही कहा जाएगा कि फोटो से परहेज करने वाले अजमेर के कांगे्रसियों को भी सीएम हाउस में सत्ता का अहसास करवाया। गहलोत ने अजमेर के कांग्रेसियों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया। 
नाम और जाति बताने पर रोक:
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बुलाई बैठक में प्रदेशाध्यक्ष पायलट ने यह भी कह दिया कि कोई नेता कार्यकर्ता लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार और जाति का उल्लेख नहीं करे। बैठक में शहर और देहात कांगे्रस कमेटियों के अध्यक्ष क्रमशः विजय जैन और भूपेन्द्र सिंह राठौड़ ने कोई विचार नहीं रखे और न ही किसी बड़े नेता ने कोई सुझाव दिया। अलबत्ता प्रदेश कार्य समिति के सदस्य और विधानसभा चुनाव में अजमेर उत्तर से टिकिट के दावेदार रहे दीपक हासानी ने कहा कि संगठन और सरकार को सिंधी समुदाय के सम्मान का ख्याल रखना चाहिए। सिंधी बहुल्य माने जाने वाले अजमेर उत्तर क्षेत्र से सिंधी उम्मीदवार नहीं बनाए जाने की वजह से तीन बार से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ रहा है। नसीराबाद के पूर्व विधायक महेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि मंत्रियों को हिदायत दी जाए कि वे कार्यकर्ताओं के फोन उठाएं। पूर्व विधायक डाॅ. राजकुमार जयपाल का कहना रहा कि 2 अप्रैल 2018 के भारत बंद के दौरान जिन अफसरों ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ बुरा बर्ताव किया उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाए। महेश च ौहान आदि कार्यकर्ताओं ने भी विचार रखे, लेकिन लोकसभा चुनाव को लेकर कोई गंभीर मंत्राणा नहीं हुई।
च ौधरी ने की पशुपालकों को अनुदान की मांगः
बैठक में समाप्ति पर अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचन्द्र च ौधरी ने डिप्टी सीएम सचिन पायलट से मुलाकात की। च ौधरी ने प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों दको प्रति लीटर दो रुपए अनुदान देने की मांग की। च ौधरी ने पायलट को बताया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार अनुदान  दिया था, लेकिन गत भाजपा शासन ने बंद कर दिया। पायलट ने उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। च ौधरी का कहना रहा कि यदि सरकार दुग्ध उत्पादकों को अनुदान देती है तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को लाभ मिलेगा।
एस.पी.मित्तल) (17-01-19)
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पांच वर्ष भी विधानसभा न चले तो भाजपा के विधायक तैयार हैं-कटारिया।

पांच वर्ष भी विधानसभा न चले तो भाजपा के विधायक तैयार हैं-कटारिया। 
इस तरह की धमकी नहीं दी जाए-सीएम गहलोत। 
अध्यक्ष सीपी जोशी ने दी चेतावनी। आखिर कैसे चलेगा सदन?
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17 जनवरी को राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल कल्याण सिंह के अभिभाषण के दौरान इतना हंगामा हुआ कि सदन के नेता व सीएम अशोक गहलोत तथा प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया तक आमने सामने हो गए। सवाल उठता है कि ऐसे हालातों में सदन कैसे चलेगा, जबकि 18 जनवरी को तो अभिभाषण पर बहस होनी है। असल में 17 जनवरी को आरएलपी के हनुमान बेनीवाल ने जो आग लगाई, उसमें गहलोत और कटारिया जैसे पुराने और अनुभवी नेता भी झुलस गए। राज्यपाल ने जैसे ही भाषण देना शुरू किया वैसे ही बेनीवाल ने मूंग खरीद का मुद्दा उठा दिया। बेनीवाल का कहना रहा कि राज्यपाल को कांगे्रस सरकार की बढ़ाई करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि मूंग खरीद बंद कर सरकार ने किसानों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया है। हंगामा बढ़ता देख राज्यपाल के अभिभाषण को पढ़ा हुआ मान लिया गया। राज्यपाल के जाने के बाद जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो बेनीवाल ने पिछले भाजपा सरकार पर भी टिप्पणी कर दी। इस पर नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने बेनीवाल पर कार्यवाही करने की मांग की। कटारिया का कहना रहा कि सदन तभी चलेगा, जब कार्यवाही होगी। भले ही पांच वर्ष तक सदन न चले। इसी दौरान प्रतिपक्ष के उपनेता राजेन्द्र राठौड़ ने सदन के नेता गहलोत को लेकर भी टिप्पणी की। इस पर गहलोत ने कहा कि सदन को न चलने देने की धमकी देना उचित नहीं है। जब विधानसभा अध्यक्ष जोशी ने खड़े होकर अपनी बात कह रहे हैं तो विपक्ष को सुनना चाहिए। गहलोत की बात को आगे बढ़ाते हुए अध्यक्ष ने कटारिया से कहा कि आप भी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। कटारिया ने कहा कि हंगामा करने और असंसदीय भाषा का उपयोग करने वाले विधायकों को चेतावनी देने से कुछ नहीं होगा। कार्यवाही होगी, तभी समझ आएगी।
कैसे चलेगा सदन?:
17 जनवरी को विधानसभा में जो कुछ भी हुआ उसे किसी भी तरह लोकतंत्र के अनुरूप नहीं माना जा सकता। पिछली बार तो 200 में से 163 सदस्य भाजपा के थे और कांग्रेस के मात्र 21 सदस्य। इसलिए सदन में एक तरफा माहौल दरहा, लेकिन इस बार 99 सदस्य कांग्रेस के तथा 73 भाजपा के हैं। दोनों दलों में दिग्गज नेता जीत कर आए हैं। अध्यक्ष की कुर्सी पर सीपी जोशी जैसे नेता बैठे हैं। हनुमान बेनीवाल जैसे विधायक तो चाहेंगे कि भापजा और कांग्रेस के विधायक आपस में उलझ जाएं। 17 जनवरी को भी बेनीवाल ने ऐसा ही किया। जोशी के लिए सदन को चलाना आसान नहीं होगा।
राज्यपाल की अस्वस्थ्यताः 
17 जनवरी को भी राज्यपाल कल्याण सिंह अस्वस्थ्यता देखने को मिली। दो अधिकारियों ने पकड़ कर विधानसभा की सीढ़ियां राज्यपाल को चढ़ाई। इसी प्रकार लौटते समय भी राज्यपाल को सीढ़ियों से उतारा गया। राज्यपाल को चलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

एस.पी.मित्तल) (17-01-19)
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छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलांे में मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध लगाया।

छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलांे में मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध लगाया।  अन्य राज्य भी अमल करें।
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छत्तसीगढ़ की कांग्रेस सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्कूलों में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यानि छत्तसीगढ़ में अब कोई भी विद्यार्थी स्कूल में मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेगा। राज्य सरकार का यह फैसला वाकई सराहनीय है। अन्य राज्यों को भी इस तरह का निर्णय लेना चाहिए। असल में स्कूली विद्यार्थियों के पास मोबाइल फोन होने से अनेक समस्याएं खड़ी हो रही हैं। जिन स्कूलों में लड़के-लड़कियां साथ साथ पढ़ते हैं उनमें तो समस्याएं कुछ ज्यादा ही है। सवाल उठता है कि जो बच्चे स्कूल में 12वीं कक्षा तक पढ़ने के लिए आते हैं उन्हें मोबाइल की क्या आवश्यकता है? कई बार यह देखा गया है कि कक्षाओं में बच्चे मोबाइल पर गैम खेलते रहते हैं या फिर चेटिंग करते हैं। स्कूली बच्चों के पास मोबाइल बेहद खतरनाक हो रहा है। माता पिता की यह मजबूरी है कि उन्हें अपने बच्चों की जिद के आगे झुकना पड़ता है। वैसे तो सबसे पहली जिम्मेदारी माता पिता की है। माता पिता को चाहिए की बच्चों को किसी भी स्थिति में मोबाइल फोन नहीं दें। अब जब छत्तसीगढ़ की सरकार ने स्कूलों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगा दिया है, तब अभिभावकों को चाहिए कि अपने बच्चों से मोबाइल फोन छीन लें। ऐसे कई मामले में सामने आए हैं जिन में मोबाइल फोन आत्महत्या का कारण भी बने हैं। स्कूल में पढ़ने वाले किसी भी विद्यार्थी को मोबाइल फोन की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन दिखावे के लिए मोबाइल फोन रखा जाता है। महंगे मोबाइल रखना शान समझा जाने लगा है। छत्तसीगढ़ की सरकार ने मोबाइल पर प्रतिबंध लगाकर समाज को एक बड़ी राहत प्रदान की है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में इस निर्णय का सख्ती के साथ पालन हो। 
एस.पी.मित्तल) (17-01-19)
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राजस्थान के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को स्वाइन फ्लू अब मौसमी बीमारी नजर आती हैं।

राजस्थान के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को स्वाइन फ्लू अब मौसमी बीमारी नजर आती हैं। अब तक चालीस मौतें। सर्वाधिक सीएम के गृह जिले जोधपुर में।
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राजस्थान में स्वाइन फ्लू रोग कहर बरपा रहा है। अब तक कोई चालीस मरीजों की मौत हो गई है तथा हजारों मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। आंकड़े बताते हैं कि एक जनवरी से अब तक रोजाना मौते हो रही हैं। स्वाइन फ्लू का सबसे ज्यादा प्रकोप प्रदेश के सीएम अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर में हैं। स्वाइन फ्लू की गंभीरता को देखते हुए तो प्राइवेट अस्पताल वाले मरीजों का इजाल भी नहीं करते हैं। ऐसे में मरीजों को सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर होना पड़ रहा है। पूरे प्रदेश में स्वाइन फ्लू को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को यह रोग मौसमी बीमारी नजर आता है। रघु का कहना है कि प्रतिवर्ष इसी मौसम में मौते होती हैं। रघु के पास गत पांच वर्षों में भाजपा सरकार के दौरान हुई मौतों की संख्या भी है। रघु इसे सामान्य बात मानते हैं। यह सही है कि भाजपा के शासन में भी स्वाइन फ्लू से मौते हुई थीं। तब कांग्रेस ने भाजपा सरकार को ही दोषी ठहराया। यही वजह रही कि प्रदेश की जता ने भाजपा को हटा कर कांग्रेस को सत्ता में बैठा दिया। जनता ने ऐसा इसलिए किया ताकि बदलते मौसम में स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियां से बचाव हो सके। भाजपा के शासन में जो रघु शर्मा स्वाइन फ्लू से हुई मौतों के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे थे वो ही रघु शर्मा अब मौसमी बीमारी की दुहाई दे रहे हैं। सवाल उठता है कि जब स्वाइन फ्लू मौसमी है तो फिर भाजपा सरकार को हत्यारी क्यों कहा गया? मौसमी बीमारी से भी लोगों की मृत्य न हो इसकी जिम्मेदारी सरकार की है। यदि चिकित्सा मंत्री भाजपा सरकार के मौतों के आंकड़े देकर अपनी विफलता छिपाने का कार्य करेंगे तो प्रदेश की जनता लोकसभा चुनाव में ही सबक सिखा देगी। अच्छा हो कि रघु शर्मा सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के मरीजों के समुचित इलाज के इंतजाम करवाएं। सत्ता हासिल करने के बाद नजरिया नहीं बदलना चाहिए।
एस.पी.मित्तल) (17-01-19)
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Wednesday, 16 January 2019

तो कांग्रेस सीएम हाउस में बनाएगी लोकसभा चुनाव की रणनीति।

तो कांग्रेस सीएम हाउस में बनाएगी लोकसभा चुनाव की रणनीति। अशोक गहलोत भी चले वसुंधरा राजे की राह पर। सत्ता का दुरुपयोग करने में कोई पीछे नहीं।
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16 जनवरी को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जयपुर स्थित सरकारी आवास (सीएम हाउस) पर जयपुर ग्रामीण, राजसमंद और अजमेर संसदीय क्षेत्रों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अलग अलग बैठक हुई। इन बैठकों में मई में होने वाले लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार की गई। बैठकों में सीएम गहलोत के साथ-साथ डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे आदि नेता भी उपस्थित रहे। स्वाभाविक है कि बैठकों में शामिल हुए कांग्रेसियों को सीएम हाउस में ही सरकारी खर्चे पर हैवी चाय नाश्ता भी कराया गया। सीएम हाउस में प्रवेश के लिए प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से पहले पास उपलब्ध करवाए गए। यानि प्रदेश कांग्रेस कार्यालय और सीएम हाउस तक एक समान हो गए। सीएम हाउस भी कांग्रेस कार्यालय की तरह लगा। सीएम हाउस में यह नजारा कई दिनों तक देखने को मिलेगा, क्योंकि राजस्थान के सभी 25 संसदीय क्षेत्रों के कांग्रेसियों की बैठकें होंगी। एक संसदीय क्षेत्र से करीब पांच सौ कांग्रेसियों को सीएम हाउस बुलाया जा रहा है। कांग्रेस लोकसभा चुनाव की तैयारी कैसे करे, यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है। लेकिन कांग्रेस को खास अशोक गहलोत जैसे गांधीवादी नेता को इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि सीएम हाउस का खर्चा राजस्थान की जनता वहन करती है। जनता जो टैक्स देती है उसी से सीएम हाउस के चाय नाश्ते का भुगतान होता है। यहां तक कि सुरक्षा में लगे कर्मचारियों को वेतन भी जनता के टैक्स से दिया जाता है। ईमानदार सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि टैक्स से एकत्रित राशि का उपयोग जनता की भलाई के लिए ही हो। यदि राजनीतिक दल की बैठक जनता के खर्च से चलने वाले सीएम हाउस में होगी तो राजनीतिक ईमानदारी पर भी सवालिया निशान लगेगा। हालांकि अब आगामी पांच वर्षों तक राजस्थान में कांग्रेस का शासन रहेगा और सीएम हाउस अशोक गहलोत की मर्जी से चलेगा, लेकिन प्रदेश की जनता को अशोक गहलोत जैसे मुख्यमंत्री से राजनीतिक स्वच्छता की उम्मीद है।
वसुंधरा ने किया सबसे ज्यादा दुरुपयोग:
यूं तो सीएम हाउस का दुरुपयोग हर सत्तारूढ़ दल करता है, लेकिन सबसे ज्यादा दुरुपयोग भाजपा सरकार की सीएम वसुंधरा राजे ने किया। वसुंधरा राजे पूरे पांच वर्ष तक सीएम हाउस में नहीं रहीं। वसुंधरा सीएम हाउस का उपायोग पार्टी दफ्तर के तौर पर सीएम आॅफिस की तरह किया। प्रदेश की जनता को याद होगा कि वसुंधरा राजे प्रायोजित कार्यक्रम कर सीएम हाउस में अपना स्वागत सत्कार करवाया। भाजपा के कार्यकर्ताओं से लेकर विभिन्न संगठनों, धार्मिक संस्थाओं आदि में स्वागत करने की होड़ लग गई। खुद सीएम कभी ट्रेक्टर पर बैठी नजर आई तो कभी ग्रामीण महिलाओं के साथ नृत्य किया। सीएम हाउस के इतने दुरुपयोग के बाद भी वसुंधरा राजे की वजह से राजस्थान में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। वसुंधरा की राजनीतिक नौटंकी का तो न्यूज चैनलों पर लाइव प्रसारण होता था। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अशोक गहलोत भी वसुंधरा की राह पर चल रहे हैं। देखना है कि सीएम हाउस के दुरुपयोग का कांग्रेस का लोकसभा चुनाव में कितना फायदा होता है।
एस.पी.मित्तल) (16-01-19)
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