Friday, 13 July 2018

14 व 15 जुलाई को राजस्थान में इंटरनेट सेवाएं बंद करने पर खुद स्पष्ट नहीं है पुलिस महकमा।

14 व 15 जुलाई को राजस्थान में इंटरनेट सेवाएं बंद करने पर खुद स्पष्ट नहीं है पुलिस महकमा। दो दिन में 4 पारियों में होनी है कांस्टेबल परीक्षा।
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14 व 15 जुलाई को पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के समय राजस्थान में इंटरनेट सेवाओं को बंद रखने को लेकर पुलिस महकमा खुद स्पष्ट नहीं है। पूर्व में कहा गया था कि परीक्षा केन्द्र के पांच किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाओं को बंद रखा जाएगा। चूंकि कांस्टेबल परीक्षा प्रातः 10 से 12 और फिर सायं 3 से 5 बजे के बीच होनी है। इसलिए माना जा रहा था कि दोनों दिन दिनभर इंटरनेट सेवाएं प्रभावित रहेंगी। जिससे बैंकों और अन्य सरकारी कार्यालयों का काम काज भी ठप रहेगा। यहां तक कि आम व्यक्ति के मोबाइल भी नहीं चल पाएंगे। लेकिन वहीं 13 जुलाई को परीक्षा तैयारियों को लेकर एक प्रेस काॅन्फ्रेंस में आला अधिकारियों ने कहा कि अब इंटरनेट सेवाओं को बंद करने का निर्णय संबंधित पुलिस अधीक्षकों के विवेक पर छोड़ दिया है। अब पुलिस अधीक्षक ही स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए ही इंटरनेट को बंद करने का निर्णय लेंगे। अधिकारियों का कहना रहा कि जरुरत पड़ने पर उन्हीं इलाकों में नेट सेवाएं बंद की जाएंगी जहां परीक्षा केन्द्र हैं। यानि इंटरनेट सेवाएं राजस्थान भर में बंद नहीं रहेगी। 
कोचिंग सेंटरों पर निगरानीः
कांस्टेबल भर्ती परीक्षा को देखते हुए प्रदेश भर के कोचिंग सेंटरों पर विशेष निगरानी रखी गई है। संदेह वाले कोचिंग सेंटरों पर तो पुलिस कर्मियों को भी तैनात किया गया है।पुलिस को ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कोचिंग सेंटरों में फर्जी अभ्यर्थी तैयार किए जा रहे हैं। इस आशंका को देखते हुए ही परीक्षा केन्द्रों पर भी सुरक्षा के कड़े उपाय किए गए हैं। अभ्यर्थियों से पहले ही कहा गया है कि वे जेब वाले परिधान पहन कर नहीं आए। यहां तक कि महिला अभ्यर्थियों की चप्पल भी परीक्षा केन्द्र के बाहर ही खुलवा ली जाएगी। यानि जो नियम यूपीएससी के हैं उन सभी का पालन कांस्टेबल की लिखित परीक्षा में होगा। संबंधित शिक्षण संस्थान के कर्मचारियों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। हालांकि पुलिस ने ड्यूटी देने वाले शिक्षा कर्मियों के नाम पते टेलीफोन नम्बर आदि नोट किए हैं। इस कार्यवाही का कुछ संस्थाओं के प्रबंधकों ने विरोध भी किया। खास कर महिला शिक्षा कर्मी के घर का पता और मोबाइल नम्बर लेने पर ऐतराज जताया गया। लेकिन पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि सभी सूचनाएं गुप्त रखी जाएंगी। अलबत्ता पुलिस के अधिकारियों को यह पता ही चल गया है कि किस परीक्षा केन्द्र पर कौन सा शिक्षा कर्मी ड्यूटी दे रहा है।
15 लाख देंगे परीक्षाः
13 हजार कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए 15 लाख से भी ज्यादा अभ्यर्थियों को सूचना भेजी गई है। हालांकि अनेक अभ्यर्थियों की शिकायत है कि वेबसाइट से प्रवेश पत्र डाउनलोड नहीं हो रहा है।  

तो क्या इसी मानसिकता से शशि थरूर ने 30 वर्षों तक यूएनओ में भारत का प्रतिनिधित्व किया?



तो क्या इसी मानसिकता से शशि थरूर ने 30 वर्षों तक यूएनओ में भारत का प्रतिनिधित्व किया? इसलिए दुनिया ने थरूर को नकार दिया था।
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शशि थरूर सिर्फ कांग्रेस के सांसद नहीं है, बल्कि थरूर ने संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) में तीस वर्षों तक भारत का प्रतिनिधित्व किया। यानि कश्मीर मुद्दा हो या अन्य कोई विषय। भारत की ओर से थरूर ने देश का पक्ष रखा। अब थरूर कह रहे हैं कि यदि 2019 में भाजपा फिर से चुनाव जीतती है तो भारत हिन्दू पाकिस्तान बन जाएगा। मैं यह नहीं कहता कि तीसरी पत्नी सुनंदा पुष्कर की हत्या के आरोपी बन जाने से थरूर की मानसिक स्थिति खराब हो गई है। मेरा सवाल यह है कि क्या हिन्दू पाकिस्तान की मानसिकता के साथ ही थरूर तीस वर्षों तक यूएनओ में भारत का प्रतिनिधित्व किया? शायद ऐसा लगता है कि थरूर ने किसी मानसिकता के साथ प्रतिनिधित्व किया, क्योंकि इन्हीं दिनों में कश्मीर के अलगाववादियों ने पाकिस्तान के आतंकियों की मदद से 4 लाख हिन्दुओं को पीट पीट कर भगा दिया। सवाल उठता है कि शशि थरूर ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कश्मीर के हिन्दुओं का पक्ष क्यों नहीं रखा? अब थरूर को यह भी बताना चाहिए कि तब वे किस के दबाव में काम कर रहे थे? आज कश्मीर घाटी में जो एक तरफा माहौल हुआ है उसके पीछे शशि थरूर जैसा नेता ही है। शर्मनाक बात तो यह है कि कश्मीर घाटी पूरी तरह भारत विरोधी अलगाववादियों को सौंप कर हिन्दू पाकिस्तान बनने की बात कर रहे हैं। थरूर को पाकिस्तान के हालातों के बारे में पता नहीं है। भारत में तो सूफीवाद को आगे कर आम मुसलमान और हिन्दू अभी भी रह रहा है, लेकिन पाकिस्तान में तो मुसलमान, मुसलमान को मार रहा है। पाकिस्तान में तो पूरी तरह मुस्लिम राष्ट्र है। थरूर बताएं कि पाकिस्तान में आए दिन क्यों आतंकी हमले हो रहे हैं? आज भारत में मुसलमान जिस सुकून और सम्मान के साथ रह रहा है। उसका आधा भी पाकिस्तान में माहौल नहीं है। 70 वर्षों की आजाद में से आधा समय तो पाकिस्तान में सैनिक शासन रहा है। यदि थरूर पाकिस्तान में राजनीति करते होते तो अब तक जहन्नुम में पहुंच गए होते। थरूर के बयानों से कांग्रेस को भी राजनीतिक नुकसान हो रहा है। हालांकि कांग्रेस ने स्वयं को थरूर के बयान से अलग कर लिया है, लेकिन अच्छा हो कि कांग्रेस थरूर से किनारा कर ले। हिन्दू पाकिस्तान वाला जो बयान थरूर ने दिया उसे देखते हुए अब उनके यूएनओ के कार्यकाल की भी जांच होनी चाहिए।
एस.पी.मित्तल) (13-07-18)
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तो फिर कौन करवा रहा है खारी, डाई और बनास नदी में बजरी खनन।

तो फिर कौन करवा रहा है खारी, डाई और बनास नदी में बजरी खनन। संसदीय सचिव गौतम के गनमैन ने केकड़ी पुलिस को मुसीबत में डाला।
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अजमेर जिले के केकड़ी उपखंड के गुजरने वाली बनास, खारी तथा डाई नदी से बजरी खनन के आरोप लगते रहे हैं। अजमेर के कांग्रेसी सांसद रघु शर्मा ने भी गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया से बजरी खनन रोकने की मांग की है। शर्मा का तो आरोप है कि भाजपा के प्रभावशाली नेताओं के संरक्षण में नदियों से बजरी खनन हो रहा है। वहीं केकड़ी के भाजपा विधायक और संसदीय सचिव शत्रुघ्न गौतम का कहना है कि बजरी खनन की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वहीं केकड़ी पुलिस उपाधीक्षक राकेश पाल सिंह का दावा है कि केकड़ी उपखंड से गुजरने वाली नदियों से बजरी खनन नहीं हो रहा है। जब भी खनन की शिकायत मिलती है तो तत्काल छापामार कार्यवाही की जाती है। यही वजह है कि अब तक एक करोड़ रुपए की कीमत के ट्रेक्टर, डंपर आदि वाहन जब्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जो नदियां केकड़ी से गुजरती है उनका मार्ग टोंक और भीलवाड़ा जिले में भी आता है। हो सकता है कि अन्य मार्गों पर एकत्रित बजरी को केकड़ी क्षेत्र का दिखाया जा रहा हो।
गनमैन की शिकायत बनी मुसीबतः
केकड़ी के विधायक और संसदीय सचिव शत्रुघ्न गौतम  के गनमैन हरिराम खटीक की शिकायत अब केकड़ी पुलिस के लिए मुसीबत बन गई है। असल में गनमैन ने ही एक वीडियो केकड़ी के डीएसपी राकेश पाल सिंह को सौंपा है। इसमें सैकड़ों ट्रेक्टरों के जरिए बजरी लाई जाती है और फिर केकड़ी उपखंड में आने वाले कृष्णगोपाल कालेड़ा गांव और उसके आसपास के क्षेत्रों में संग्रहण किया जाता है। वहीं से डम्पर और ट्रेलरों में भर कर बजरी को अजमेर, कोटा, जयपुर, भीलवाड़ा आदि जिलों में ऊंची कीमत पर बेची जाती है। डीएसपी और केकड़ी के सीआई नेमीचंद च ौधरी ने माना कि संसदीय सचिव के गनमैन की शिकायत मिली थी। वीडियो के आधार पर जांच भी की गई, लेकिन मौके पर बजरी खनन और संग्रहण दोनों ही नहीं पाया गया। केकड़ी पुलिस का यह भी कहना रहा कि गनमैन और उसके चाचा का कोई विवाद भी सामने आया है।
आॅडियो की चर्चाः
केकड़ी पुलिस बजरी खनन नहीं होने के चाहे कितने भी दावे करे, लेकिन पुलिस के ही एक सिपाही के आॅडियो ने पुलिस को और मुसीबत में डाल दिया है। केकड़ी पुलिस स्टेशन से जुड़ी बघेरा पुलिस चैकी पर तैनात सिपाही इस आॅडियो में प्रति ट्रेक्टर 50 रुपए की मांग कर रहा है। सिपाही का कहना है कि यह राशि बहुत कम है। हम काम के आदमी है। जरुरत पड़ने पर बड़े बड़े काम करवा देते हैं। इस आॅडियो टेप के बारे में डीएसपी और सीआई दोनों अनभिज्ञता व्यक्त की। लेकिन कहा कि यदि किसी पुलिस कर्मी ने भ्रष्टाचार किया है। तो उसे नियमों के अनुरूप सजा मिलेगी। वहीं बघेरा पुलिस चैकी पर तैनात सिपाही दिनेश विश्नोई का कहना है कि टेप में उसकी आवाज नहीं है। असल में टेप में बघेरा चैकी पर ट्रेक्टर चालक को बुलाने वाला व्यक्ति स्वयं का नाम दिनेश विश्नोई बता रहा है।
सुरक्षा गार्ड के लिए किया था फोन-गौतमः
इस मामले में संसदय सचिव शत्रुघ्न गौतम का कहना है कि हरिराम खटीक उनका सुरक्षा गार्ड है। उसके साथ मारपीट होने पर मैंने ही पुलिस थाने भेजा था और सीआई को फोन भी किया था। लेकिन बजरी खनन के वीडियो और आॅडियो टेप की मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैंने तो बजरी खनन के खिलाफ सख्त कार्यवाही करवाई है। केकड़ी सीमा से ही टोंक की सीमा लगती है। 
ऐसे हो रहा है बजरी खननः
जानकारों की माने तो खारी, डाई और बनास नदी से रोजाना 700 ट्रेक्टर ट्राॅली बजरी खनन का कार्य कर रहे हैं। चूंकि नदी के किनारे डम्पर और ट्रेलर जैसे बड़े वाहन नहीं जा सकते इसलिए ट्रेक्टर ट्राॅली के जरिए ही अवैध खनन होता है। इन ट्रेक्टर ट्राॅलियों को भरने के लिए नदी के किनारे अनेक जेसीबी खड़ी हैं। ट्रेक्टर ट्राॅलियों से आसपास के क्षेत्र में ही बजरी का संग्रहण किया जाता है। संग्रहण केन्द्र से रोजाना 150 डम्पर कोई 20 ट्रेलर बजरी को निर्धारित स्थानों पर ले जाते हैं। जानकारों के अनुसार एक डम्पर में सात और ट्रेलर में 60 टन बजरी भरी जाती है। डम्पर को 15 हजार तथा ट्रेलर को एक लाख रुपए तक में बेचा जाता है। चूंकि इस अवैध खनन का कारोबार ऊपर तक है इसलिए कोई कार्यवाही नहीं होती। बताया जाता है कि माफिया के लोग प्रति डम्पर 3 हजार 500 और ट्रेलर के 10 हजार रुपए का भुगतान सरकारी महकमों में करते हैं। 700 ट्रेक्टर ट्राॅलियों के जरिए रोजना होने वाले बजरी खनन का अंदाजा लगाया जा सकता है इसके साथ ही विभिन्न विभागों में बंटने वाली रिश्वत की राशि का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।
एस.पी.मित्तल) (13-07-18)
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जाट तो भाजपा के भक्त है।

जाट तो भाजपा के भक्त है। केन्द्रीय मंत्री और नागौर के सांसद सीआर च ौधरी का दावा।
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केन्द्रीय उपभोक्ता मामलों के राज्यमंत्री और राजस्थान के नागौर संसदीय क्षेत्र से भाजपा के सांसद सीआर च ौधरी ने 13 जुलाई को जोधपुर दौरे में एक न्यूज चैनल को इंटरव्यू दिया। राजस्थान की जाट राजनीति के संदर्भ में च ौधरी ने कहा कि 90 प्रतिशत जाट सम्प्रदाय भाजपा के साथ है। भाजपा में जाट सम्प्रदाय के नेताओं को बहुत सम्मान मिला हुआ है। इसलिए हम तो भाजपा के भक्त हैं। चुनाव के मौके पर उम्मीदवारी के समय जातिगत आधार भी देखा जाता है, लेकिन मतदान के समय उस पार्टी का ख्याल रखा जाता है जो सबका साथ सबका विकास का उद्देश्य लेकर चलती है। राजस्थान का जाट सम्प्रदाय आज बेहद समझदार है उसे पता है कि भाजपा ही सबका विकास करती है। चूंकि राजस्थान में जाति के हिसाब से जाट बड़ा सम्प्रदाय है,इसलिए टिकिट वितरण में विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र में नरेन्द्र मोदी और राजस्थान में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में सरकारों ने प्रदेश का खूब विकास किया है। दोनों नेताओं को जाट सम्प्रदाय ही नहीं बल्कि सर्वसमाज चाहता है। 
अजमेर में उपचुनाव में जाट उम्मीदवार ही हाराः
जाट सम्प्रदाय की संख्या को देखते हुए ही अजमेर के लोकसभा के उपचुनाव में रामस्वरूप लाम्बा को उम्मीदवार बनाया गया। जाट उम्मीदवार और सत्ता की पूरी ताकत लगाने के बाद भी भाजपा की हार हो गई। यह हार आज सीएम वसुंधरा राजे को परेशान किए हुए है। इतना ही नहीं खुद सीआर च ौधरी ने भी अजमेर में प्रवास पर प्रचार किया था।
एस.पी.मित्तल) (13-07-18)
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Thursday, 12 July 2018

अजमेर में 14 जुलाई को निकलेंगे भगवान जगन्नाथ नगर भ्रमण पर।

अजमेर में 14 जुलाई को निकलेंगे भगवान जगन्नाथ नगर भ्रमण पर। आज भी जारी है वर्षों पुरानी परंपरा।
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जिस प्रकार जगन्नाथपुरी में प्रतिवर्ष नगर भ्रमण के लिए भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। उसी तर्ज पर धार्मिक नगरी अजमेर में भी 14 जुलाई को भगवान जगन्नाथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे। रथयात्रा महोत्सव के प्रमुख दीपचंद श्रीया ने बताया कि वर्षों पुरानी इस परंपरा में भगवान का ननिहाल गंज स्थित जनकपुरी समारोह स्थल में बनाया गया है। यही पर आगामी 22 जुलाई तक रोजाना धार्मिक आयोजन होंगे। 14 जुलाई को सायं 5ः30 पर भगवान की रथ यात्रा ऋषि घाटी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से आरंभ होगी और आगरा गेट, नया बाजार, चूड़ी बाजार, मदार गेट, नला बाजर, दरगाह बाजार, देहली गेट होते हुए गंज स्थित जनकपुरी में पहुंचेगी। 15 से 21 जुलाई तक जनकपुरी में पंडित हरीशचन्द्र व्यास द्वारा श्री जगन्नाथ कथा का वाचन किया जाएगा। कथा वाचन रोजना सायं 6 से 7 बजे तक होगा। इसके साथ ही कथा के बाद 15 जुलाई को एक शाम भगवान जगन्नाथ के नाम (भजन संध्या) 16 जुलाई को दिल्ली के भजन गायक राजेश लोहिया, और गौरी शंकर भजनों की प्रस्तुति देंगे। 17 जुलाई को ग्वालियर की रश्मि ओझा एक शाम बालाजी के नाम में भजनों की प्रस्तुति देंगी। 18 जुलाई को जयपुर की सुरभि चतुर्वेदी, 19 जुलाई को दिल्ली के रितु पंचाल, 20 जुलाई को गुडगांव के नरेश सैनी भजनों की प्रस्तुति देंगे। इसी प्रकार 21 जुलाई को अजमेर के गायक विलम गर्ग एक शाम खाटूश्याम के नाम में भाग लेंगे। 22 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा सायं 5ः30 पर जनकपुरी से रवाना होकर आगरा गेट, नया बाजार, चूड़ी बाजार, नला बाजार, दरगाह, देहली गेट होते हुए पुनः ऋषि घाटी स्थित जगन्नाथ मंदिर पर पहुंचेगी। महोत्सव से जुड़े शैलेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि वर्ष में एक बार ही भगवान की सवारी मंदिर से बाहर निकलती है। भगवान की प्रतिमा के दर्शन के लिए शहरवासी भ्रमण मार्ग पर एकत्रित होते हैं। महोत्सव के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नम्बर 9829099967 पर दीपचंद श्रीया तथा 7891884488 पर शैलेन्द्र अग्रवाल से ली जा सकती है।