Friday, 19 October 2018

राममंदिर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने एक शब्द भी नहीं बोला।



राममंदिर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने एक शब्द भी नहीं बोला।
सांई बाबा का महासमाधि के शताब्दी समारोह में गिनाई अपनी सरकार की उपब्धियां।
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19 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाराष्ट्र के पुणे स्थित शिरडी के सांई बाबा के महासमाधि शताब्दी समारोह में भाग लिया। उम्मीद थी कि पीएम मोदी अयोध्या में मंदिर निर्माण के मुद्दे पर बोलेंगे। एक दिन पहले 18 अक्टूबर को ही संघ के नागपुर स्थित मुख्यालय में विजयादशमी के अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सरकार को कानून लाकर मंदिर निर्माण की नसीहत दी थी। भागवत ने साफ संकेत दिए कि देश के मतदाताओं ने मंदिर निर्माण के लिए ही चुनाव में अपनी भावना प्रकट की थी, इसलिए अब सरकार को देरी नहीं करनी चाहिए। 19 अक्टूबर को मोदी ने शिरडी में देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं तो दी, लेकिन भगवान राम के मंदिर के निर्माण पर एक शब्द भी नहीं कहा। इसके विपरीत पीएम का यह कहना रहा कि उनकी सरकार विकास पर भरोसा रखती है। यही वजह है कि आज मैं शिरडी के सांई बाबा के मंदिर से महाराष्ट्र के ढाई लाख व्यक्तियों को नए घर में प्रवेश करवा रहा हंू। प्रधानमंत्री जनआवास योजना में कांग्रेस ने पिछले शासन में 25 लाख घर बनाए। जबकि मेरी सरकार ने इस योजना में चार वर्ष में सवा करोड़ लोगों को मकान दे दिए हैं। यह फर्क है कांग्रेस और भाजपा की सरकार में। 2022 तक भारत में कोई भी परिवार बिना मकान के नहीं रहेगा। अपना घर जीवन को आसान बना देता है। मेरी सरकार राजनीतिक स्वार्थ से कोई भी कार्य नहीं करती है। साफ नीयत से ही गरीब की सेवा हो सकती है। इस मौके पर मोदी ने अपनी सरकार की आयुषमान स्वास्थ्य योजना, किसानों को एमएससी सिंचाई उज्ज्वला योजना आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। लेकिन विजयादशमी के दिन राममंदिर निर्माण पर कुछ भी नहीं कहा। 
एस.पी.मित्तल) (19-10-18)
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अजमेर में ख्वाजा साहब की दरगाह के बाहर स्वयं सेवकों के पथ संचलन का शानदार इस्तकबाल।



अजमेर में ख्वाजा साहब की दरगाह के बाहर स्वयं सेवकों के पथ संचलन का शानदार इस्तकबाल। विजयादशमी पर 2 हजार स्वयं सेवकों की कदम ताल।
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19 अक्टूबर को विजयादशमी पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवकों का पथ संचलन शहर भर में हुआ। स्टेशन रोड स्थित मोइनिया इस्लामिया स्कूल के मैदान से शुरू होकर यह पथ संचलन जब सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के सामने से गुजरा तो शनदार इस्तकबाल हुआ। संघ के बैंड की परंपरागत धुन और आवाज के बीच जब स्वयं सेवक कदम ताल करते हुए दरगाह के सामने से गुजर रहे थे, तब अनेक मुसलमानों ने पुष्प वर्षा की। भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शफीक खान के नेतृत्व में मोइन खान, जैनुलओबदीन, इशरत परवीन, सद्दाम हुसैन, जावेद शेख, फरीद  खान, अली मोहम्मद, तेजपाल सिंह, मोहम्मद आरिफ आदि ने पुष्प वर्षा कर स्वयं सेवकों का इस्तकबाल किया। संघ के प्रचार प्रभारी निरंजन शर्मा ने बताया कि संघ के स्थापना दिवस के अवसर पर दो भागों के पथ संचलन किया। बालकों के वर्ग में 500 स्वयं सेवक शामिल रहे तो व्यस्क वर्ग में 1500  स्वयं सेवकों ने भाग लिया। पथ संचलन का समापन मोइनिया स्कूल के मैदान पर ही हुआ। स्टेशन रोड, मदार गेट, नया बाजार, दरगाह बाजार, नला बाजार, केसरगंज आदि प्रमुख बाजारों में जगह-जगह लोगों ने स्वयं सेवकों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। सभी स्वयं सेवक अनुशासन में रह कर पथ संचलन कर रहे थे।
शस्त्र पुजनः
संघ की परंपरा के अनुरूप पथ संचालन से पहले स्कूल मैदान पर शस्त्र पुजन का कार्यक्रम हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जेएलएन अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डाॅ. बृजेश माथुर रहे। जबकि संघ के सहप्रांत प्रचारक शिव मुरली ने बौद्धिक दिया। मुरली का कहना रहा कि भारत की संस्कृति से ही देश की एकता और अखंडता कायम रह सकती है। आज ऐसी ताकते हावी हो रही है। जो देश की अखंडता को तोड़ना चाहती है। समारोह में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी जगदीश राणा, बसंत विजयवर्गीय, महानगर संघ चालक सुनील दत्त जैन भी उपस्थित रहे। स्वयं सेवक के तौर पर स्कूली शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी आदि भी उपस्थित थे।
एस.पी.मित्तल) (19-10-18)
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रावत समाज के प्रतिभा सम्मान समारोह में हुए हंगामे का विवाद गहराया।


रावत समाज के प्रतिभा सम्मान समारोह में हुए हंगामे का विवाद गहराया। महासभा ने भाजपा विधायक सुरेश रावत प्रधान अशोक सिंह सहित पांच जनों को समाज का दोषी माना।
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राजस्थान रावत महासभा पुष्कर अजमेर के अध्यक्ष डाॅ. शैतान सिंह रावत ने 19 अक्टूबर को जो बयान जारी किया है, उससे रावत समाज का विवाद और गहरा गया है। दो दिन पहले पुष्कर के भाजपा विधायक और संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत ने दावा किया था कि समाज में अब कोई विवाद नहीं है, क्योंकि मैंने दोनों पक्षों से समझौता करवा दिया है। विधायक के इस बयान से नाराज महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. शैतान सिंह ने कहा कि 9 सितम्बर को रावत महासभा के सम्मान समारोह में जिन लोगों ने हंगामा करवाया उसमें विधायक रावत खुद जिम्मेदार हैं। ऐसे में वह समझौता करवाने वाले कौन होते हैं। रावत ने कहा कि सम्मान समारोह में हंगामे को लेकर महासभा ने 15 सदस्यी जांच कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने हंगामे के लिए पुष्कर के विधायक सुरेश सिंह रावत, पीसांगन पंचायत समिति के प्रधान अशोक सिंह रावत, मोहन सिंह रावत, पुजारी सांवर सिंह रावत तथा माणक उर्फ मदन को दोषी माना है। अब यह मामला महासभा की साधारण सभा में रखा जाएगा, तब तक यह पंाचों समाज के दोषी कहलाएंगे। जांच कमेटी ने समारोह के आयोजकों सहित समाज के प्रमुख व्यक्तियों के बयान दर्ज करने के बाद ही अपना निर्णय दिया है। इस कमेटी में तारा सिंह रावत (बोराज), भंवर सिंह रावत (कंवलाई), दीपक सिंह रावत (कानस), गुमानसिंह रावत (बोगलिया), मान सिंह रावत (सवाईपुरा), जोधासिंह रावत (सूरजकुंड), नानू सिंह रावत (बोराज), सीताराम रावत (किशनगढ़), शंकर सिंह रावत (दाता), कप्तान सिंह रावत (गनाहेड़ा) आदि शामिल हैं। महासभा के अध्यक्ष के ताजा बयान से रावत समाज का विवाद और गहराया गया है। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विवाद कुछ ज्यादा ही हो रहा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि पुष्कर स्थित कपालेश्वर महादेव मंदिर के महंत सेवानंदगिरि की उपस्थिति पर 9 सितम्बर को हंगामा हुआ था। अध्यक्ष के बयान से प्रतीत होता है कि महासभा का समर्थन महंत को मिला है। चुनाव में महंत ने भी पुष्कर से दावेदारी की है। इस संबंध में विधायक सुरेश सिंह रावत और प्रधान अशोक सिंह रावत पहले ही सभी आरोपों से इंकार कर चुके हैं। दोनों का कहना है कि 9 सितम्बर के हंगामे से हमारा कोई सरोकार नहीं है। हमने तो हमेशा समाज की एकता के लिए काम किया है। 17 अक्टूबर को भी पुलिस में दर्ज परस्पर मुकदमों को आपसी सहमति से वापस करवाया है। हम चाहते हैं कि रावत समाज में सदभावना और एकता बनी रहे।
एस.पी.मित्तल) (19-10-18)
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सचिन पायलट के आश्वासन की वजह से अजमेर जिले की 8 सीटों पर 80 से ज्यादा दावेदार



सचिन पायलट के आश्वासन की वजह से अजमेर जिले की 8 सीटों पर 80 से ज्यादा दावेदार। आखिर किसको किसको को संतुष्ट करेंगे?
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यूं तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की हैसियत से सचिन पायलट को राजस्थान की सभी 200 सीटों पर उम्मीदवार तय करने हैं, लेकिन पायलट के लिए अजमेर जिला सबसे ज्यादा महत्व रखता है। क्योंकि पायलट ने अजमेर में जीत और हार का स्वाद चखा है। पायलट वर्ष 2009 में अजमेर से लोकसभा का चुनाव जीते तो 2014 में पौने दो लाख मतों से हार गए। पायलट को हराने वाले भाजपा के सांसद सांवरलाल जाट के निधन के बाद इसी साल जनवरी में जब उपचुनाव हुए तो पायलट ने जीत के लिए पूरी ताकत लगी दी। भले ही पायलट स्वयं उम्मीदवार न बने हो, लेकिन रघु शर्मा को सांसद बनवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पायलट को भी पता था कि 10 माह बाद ही विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसलिए अजमेर जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में पायलट ने कांग्रेस के पूर्व विधायकों और बड़े नेताओं को जिम्मेदारी दे दी। पायलट ने स्पष्ट कहा कि उपचुनाव में आपके विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की हार होती है। तो विधानसभा चुनाव के समय टिकिट मिलना मुश्किल होगा। विधानसभा के चुनाव में टिकिट की उम्मीद तभी होगी जब लोकसभा के उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत होगी। पायलट वर्ष 2009 से 2014 के बीच जब केन्द्र में मंत्री थे, तब अजमेर में कई नेता उनके निकट आ गए। चूंकि ऐसे नेताओं ने भी उपचुनाव में कांग्रेस को जीत दिलवाई। अब सभी नेता पायलट के दम पर टिकिट मांग रही है। ऐसे नेताओं का कहना है कि जब पायलट टिकिट बांटने वाले हैं तो हमारा टिकिट तो पक्का है। यही वजह है कि अजमेर दक्षिण से हेमंत भाटी, नसीराबाद से रामनारायण गुर्जर, किशनगढ़ से राजेन्द्र गुप्ता, नाथूराम सिनोदिया, पुष्कर से डाॅ. श्रीगोपाल बाहेती, श्रीमती नसीम अख्तर, रणजीत सिंह नोसल, मसूदा से भूपेन्द्र सिंह राठौड़ व हाजी कय्यूम खान, केकड़ी से राकेश पारीक, अजमेर उत्तर से दीपक हासानी व महेन्द्र सिंह रलावता आदि ऐसे नेता हैं जो टिकिट को अपनी जेब में मान रहे हैं। इसके अतिरिक्त इन क्षेत्रों में ऐसे अनेक नेता हैं जो पायलट से दोस्ती का दम भरते हुए दावेदारी जता रहे हैं। अजमेर जिले की आठ सीटों पर अनुमान लगाया जाए तो पायलट के भरोसे 80 दावेदार हैं। देखना होगा कि पायलट किस-किस को संतुष्ट करते हैं।
शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय जैन जैसे नेता भी हंै जो यह मान कर चल रहे हैं कि पायलट बिन मांगे ही टिकिट दे देंगे। एक पूर्व मंत्री की बात पर भरोसा किया जाए तो पायलट ने कहा है कि किसी भी सीट से उन्होंने टिकिट का वायदा नहीं किया है। यही वजह है कि यह पूर्व मंत्री भी पूरी ताकत लगा कर टिकिट की मांग कर रहे हैं। दावेदार भी यह मानते है कि अजमेर जिले में पायलट की एक तरफा चलेगी। यही वजह है कि अजमेर के सभी कांग्रेसी पायलट के पास ही एप्रोच लगा रहे हैं। हालांकि इन दिनों किसी नेता का पायलट से अलग से मिलना बहुत मुश्किल है। पायलट दिल्ली में हो या जयपुर में पायलट से मिलने वालों की जबर्दस्त भीड़ रहती है। पायलट ने निजी सचिव वाले निरंजन भी नेताओं के फोन रिसीव नहीं कर रहे हैं।
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Thursday, 18 October 2018

कानून लाकर अयोध्या में राम मंदिर बनाए सरकार।

कानून लाकर अयोध्या में राम मंदिर बनाए सरकार।
संघ प्रमुख का यह बयान अब भाजपा के लिए कितना मायने रखता है?
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18 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नागपुर स्थित मुख्यालय पर संघ का स्थापना दिवस मनाया गया। विजया दशमी पर होने वाले इस वार्षिक समारोह में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अब समय आ गया है, जब सरकार को कानून लाकर अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनवाना चाहिए। भागवत ने कहा कि राम मंदिर बनेगा तो देश में सद्भावना का माहौल भी बनगा। यदि राजनीति  नहीं होती तो अब तक मंदिर बन जाता। भागवत ने यह बयान तब दिया है, जब केन्द्र में नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत वाली भाजपा की सरकार चल रही है। साथ ही देश के 20 राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। सब जानते हैं कि भाजपा की सरकार बनवाने में संघ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अनुकूल परिस्थितियों के बाद भी अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनने से संघ भी चिंतित नजर आ रहा है। इसलिए संघ प्रमुख ने कानून लाकर मंदिर बनवाने की बात कही है। अब देखना होगा कि भाजपा के लिए संघ प्रमुख का बयान कितना महत्व रखता है। भाजपा पर अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि वह वोट की खातिर राम मंदिर का मुद्दा जिंदा रखती है। जब भी चुनाव होते हैं तो भाजपा के नेता मंदिर निर्माण का राग अलापने लग जाते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही आपसी सहमति की बात करते हैं। लेकिन अब भाजपा को सत्ता में बैठाने वाले संघ ने कानून बनाने की बात कह दी है। साफ है कि जब आपसी सहमति से मंदिर नहीं बन रहा है तो फिर संसद में कानून बनाना चाहिए। सवाल यह भी है कि जब इस समय केन्द्र और यूपी में भाजपा की सरकार है, तब अयोध्या में मंदिर नहीं बनेगा तो फिर कब बनेगा? यूपी के शिया समुदाय के एक बड़े वर्ग ने भी मंदिर निर्माण पर सहमति दी है। यह माना कि विवादित भूमि के मालिकाना हक का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन सरकार चाहे तो संसद में प्रस्ताव लाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। एससीएसटी एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव भी तो संसद में लगाया गया था। यह प्रस्ताव तो सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध लाई थी। राम मंदिर में तो अभी सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी नहीं आया है। मालूम हो कि मध्यप्रदेश, राजस्थान छत्तीसगढ़ सहित 6 राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, ऐसे में संघ प्रमुख की नसीहत भाजपा के लिए खास मायने रखनी चाहिए। यह पहला अवसर है जब संघ प्रमुख ने कानून बनाने की बात कही है। 
29 अक्टूबर को होनी है सुनवाईः
सुप्रीम कोर्ट में 29 अक्टूबर को राम मंदिर के विवाद पर सुनवाई होनी है। सुप्रीम कोर्ट भी पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि यह सुनवाई सिर्फ भूमि के टाइटल को लेकर है। यानि भागवत ने सुनवाई के दस दिन पहले सरकार को कानून बनाने की नसीहत दी है।
एस.पी.मित्तल) (18-10-18)
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