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Wednesday, 10 December 2025
माहेश्वरी बंधुओं की जंग का अखाड़ा बना पुष्कर का सेवासदन। 16 दिसंबर के हंगामे से पहले ही 14 दिसंबर को अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा ने असाधारण सभा बुलाई।
देश भर के माहेश्वरी बंधुओं की जंग का अखाड़ा अब पुष्कर स्थित सेवा सदन (माहेश्वरी धर्मशाला) बन गया है। अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के चुनाव कराने को लेकर यह संस्था दो गुटों में विभाजित हो गई है। मौजूदा अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा का दावा है कि गत 31 अगस्त की साधारण सभा में मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ा दिया गया है। जबकि असंतुष्ट गुट का कहना है कि मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल विधिवत तौर पर 9 दिसंबर समाप्त हो गया है, इसलिए राम कुमार भूतड़ा को अध्यक्ष पद पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। जब कार्यकारिणी का कार्यकाल पूरा हो जाता है, जब या तो चुनाव करा लिए जाते हैं या फिर मार्ग दर्शक मंडल की भूमिका प्रभावी हो जाती है। संस्था के चुनाव कराने को लेकर ही 16 दिसंबर को पुष्कर स्थित माहेश्वरी धर्मशाला में बड़ी संख्या में असंतुष्ट सदस्य एकत्रित हो रहे है। इस एकत्रित करने का उद्देश्य भूतड़ा पर अध्यक्ष पद से इस्तीफे का दबाव डालना है। लेकिन इस हंगामेदार एकत्रित करण के पहले ही 14 दिसंबर को अध्यक्ष भूतड़ा ने असाधरण सभा बुलाने की घोषणा कर दी है। आमतौर पर कार्यकारिणी अथवा साधारण सभा का पत्र संस्था के महामंत्री की ओर से जारी किया जाता है, लेकिन 14 दिसंबर को दोपहर एक बजे पुष्कर में होने वाली असाधाण सभा का पत्र खुद अध्यक्ष भूतड़ा ने जारी किया है। इस पत्र में लिखा गया है कि संविधान के अनुसार यदि पांच सौ आजीवन सदस्य मांग करते हैं तो असाधारण सभा बुलाई जा सकती है। 14 दिसंबर की सभा में गत 12 नवंबर को प्रबंधन कार्यकारिणी की बैठक में हुए निर्णयों पर चर्चा की जाएगी। मालूम हो कि 12 नवंबर को वीसी के जरिए संस्था की प्रबंध समिति की बैठक हुई थी। इस बैठक में अयोध्या में निर्माणाधीन धर्मशाला की प्रगति को लेकर चर्चा हुई, साथ ही अप्रैल माह में चुनाव की घोषणा पर भी विमर्श हुआ था। भूतड़ा ने जो पत्र जारी किया है उसके अनुसार अध्यक्ष की सहमति से भी किसी भी विषय को बैठक में रखा जा सकता है। स्वाभाविक है कि 14 दिसंबर की बैठक में भी बड़ी संख्या में माहेश्वरी बंधु एकत्रित होंगे। भूतड़ा के इस पत्र में यह भी जानकारी दी गई है कि दोपहर एक बजे की बैठक से पहले 11 बजे से धर्मशाला परिसर में भोजन की शुरुआत हो जाएगी। सभी सदस्य पहले भोजन करेंग और फिर दोपहर एक बजे बैठक में शामिल हों। वहीं दूसरी ओर 14 दिसंबर की असाधारण सभा के सदंर्भ में असंतुष्टों का कहना है कि रामकुमार भूतड़ा अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए जोड़ तोड़ और षडय़ंत्रण कर रहे हैं। भूतड़ा भले ही 14 दिसंबर को असाधारणसभा करें लेकिन चुनाव की मांग को लेकर 16 दिसंबर को देश भर के माहेश्वरी बंधु पुष्कर में एकत्रित होंगे। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि संस्था के चुनाव का मामला पुष्कर की अदालत में भी चला गया है। इस संबंध में अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस भी जारी किए हैं।
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प्रवासी दिवस के समारोह में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की उपस्थिति से राजस्थान की भाजपा राजनीति को समझा जा सकता है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की भी कोई भूमिका नहीं, लेकिन पंजाब के राज्यपाल कटारिया आए।
10 दिसंबर को जयपुर के सीतापुर में प्रवासी राजस्थान दिवस का भव्य समारोह हो रहा है। इस समारोह को लेकर राजस्थान सरकार की ओर से 10 दिसंबर को ही अखबारों में प्रथम पृष्ठ पर विज्ञापन छपवाया गया है। इस विज्ञापन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ साथ राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, पीयूष गोयल और पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के नाम का उल्लेख कर इनकी गरिमामयी उपस्थिति बताई गई है। यूं तो राजस्थान से गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुनराम मेघवाल और भागीरथ चौधरी भी केंद्रीय मंत्री हैं। लेकिन सरकार के विज्ञापन में अकेले अलवर के सांसद भूपेंद्र यादव का नाम ही केंद्रीय मंत्री के तौर पर लिखा गया है। इसी प्रकार ओम माथुर भी राजस्थान के सिक्किम में राज्यपाल है, लेकिन अखबार में सिर्फ गुलाबचंद कटारिया का ही नाम लिखा गया है। कटारिया के संवैधानिक पद पर होने के कारण अब राजस्थान की राजनीति में सीधा दखल नहीं है, लेकिन केंद्रीय मंत्री के तौर पर अकेले भूपेंद्र यादव का नाम सरकारी विज्ञापन में लिखे जाने से राजस्थान की भाजपा की राजनीति को समझा जा सकता है। भूपेंद्र यादव भाजपा के उन नेताओं में शामिल है जो लो प्रोफाइल में रह कर प्रभावी भूमिका निभाते हैं। यह सही है कि सरकारी विज्ञापन में अकेले भूपेंद्र यादव का नाम लिखने का निर्णय अकेले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का नहीं रहा। गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल और भागीरथ चौधरी के मुकाबले में सिर्फ भूपेंद्र यादव का नाम लिखा जाना यह दर्शाता है कि इतना बड़ा निर्णय दिल्ली से हुआ है। प्रवासी दिवस से पहले गत दिनों ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में संसद भवन में मुलाकात की थी। तब यह कयास लगाया गया कि मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर चर्चा हुई है, लेकिन जानकारों की माने तो इस बैठक में राजस्थान प्रवासी दिवस की तैयारियों पर पीएम मोदी के साथ चर्चा हुई। सीएम शर्मा तो चाहते थे कि इस समारोह में पीएम मोदी आए, इसके लिए विशेष आग्रह भी किया गया। जानकारों की मानें तो पीएम मोदी के सुझाव पर ही केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को समारोह में आने का निमंत्रण दिया गया। भूपेंद्र यादव भले ही राजस्थान में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को अपने संसदीय क्षेत्र अलवर तक सीमित रखते हो, लेकिन भाजपा की राजनीति में यादव का गहरा प्रभाव है। प्रवासी राजस्थानी दिवस के समारोह से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के भी कुछ समझ में आ गया होगा। समारोह में देश भर के प्रमुख उद्योगपति भाग ले रहे हैं। लेकिन इतने बड़े आयोजन में पूर्व सीएम राजे की कोई भूमिका नहीं है। समारोह के किसी भी सत्र में राजे का संबोधन नहीं रखा गया है। कोई माने या नहीं, लेकिन पूरा समारोह सीएम शर्मा पर केंद्रित है। इस समारोह के बहाने सीएम शर्मा को भी अपनी कार्यकुशलता दिखाने का अवसर मिल रहा है। कांग्रेस भले ही शर्मा के मुख्यमंत्री होने पर कटाक्ष करे, लेकिन शर्मा ने यह प्रदर्शित किया है कि राजस्थान में वे ही सबसे बड़े नेता है।
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भारत की नागरिकता लेने से पहले ही सोनिया गांधी मतदाता बन गई। काश! राहुल गांधी इस फर्जीवाड़े पर भी लोकसभा में बोलते। आखिर राहुल गांधी ने अंग्रेजी में संबोधन क्यों किया?
9 दिसंबर को देश में चुनाव सुधार विषय पर लोकसभा में राहुल गांधी ने अपने विचार रखे। राहुल गांधी ने विचारों का इसलिए भी महत्व रहा कि वह लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता है, लेकिन राहुल गांधी के संबोधन से पहले 9 दिसंबर को ही दिल्ली की एक अदालत ने उनकी माताजी श्रीमती सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया। यह नोटिस सोनिया गांधी के भारत की नागरिकता लेने से पहले मतदाता बन जाने के संबंध में जारी किया गया। सब जानते हैं कि सोनिया गांधी इटली की रहने वाली है, लेकिन राजीव गांधी के साथ विवाह करने के कारण सोनिया गांधी भारत में आ गई। सोनिया गांधी ने भारत की नागरिकता 1983 में ली, लेकिन सोनिया गांधी ने 1980 में ही भारत की मतदाता बन गई। 80 से 83 के बीच सोनिया गांधी ने अपने मताधिकार का उपयोग भी किया। यानी विदेशी नागरिक होते हुए भी सोनिया गांधी ने भारत में मतदाता की भूमिका निभाई। 9 दिसंबर को राहुल गांधी ने लोकसभा में चुनाव सुधार पर अपने विचार रखते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमले किए। राहुल गांधी ने कहा कि पहले चुनाव आयुक्त की चयन समिति में देश के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य न्यायाधीश के प्रावधान को हटवा दिया। ऐसा इसलिए किया ताकि मोदी सरकार अपने पसंद का चुनाव आयुक्त नियुक्त कर सके। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि आज देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों के कुलपति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा वाले है। मोदी सरकार ने संवैधानिक संस्थाओं को अपने नियंत्रण में कर रखा है। राहुल गांधी ने जो आरोप लगाए उसका जवाब तो भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने हाथों हाथ दे दिया। निशिकांत ने वो पूरी सूची प्रस्तुत की जो कांग्रेस सरकार में नियुक्त चुनाव आयुक्तों से संबंधित थी। यह भी बताया गया कि इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए किस प्रकार तीन जजों की वरिष्ठता को लांघकर चौथे नंबर के जज को सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बना दिया। आरोप प्रत्यारोप अपनी जगह है, लेकिन अच्छा होता कि राहुल गांधी 9 दिसंबर को अपनी माताजी श्रीमती सोनिया गांधी के मतदाता बनने के फर्जीवाड़े पर भी अपने विचार रखते। मजे की बात यह है कि कांग्रेस की ओर से 14 दिसंबर को दिल्ली में वोट चोरी के मुद्दे पर रैली की जा रही है। जबकि वोट चोरी की शुरुआत तो गांधी परिवार के घर से ही हो रखी है। विदेशी नागरिक रहते हुए भारत का मतदाता बन जाने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि गांधी परिवार ने सत्ता का कितना दुरुपयोग किया है।
अंग्रेजी में संबोधन:
राहुल गांधी, नरेंद्र मोदी की तरह भारत का प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं, लेकिन राहुल गांधी मोदी के गुणों पर अमल नहीं करते। नरेंद्र मोदी हर बार अपना भाषण हिंदी में देते हैं ताकि भारत के अधिकांश लोगों तक अपनी बात को समझाया जा सके, लेकिन राहुल गांधी ने 9 दिसंबर को चुनाव सुधार पर अंग्रेजी में भाषण दिया। जबकि देश की पांच प्रतिशत आबादी भी अंग्रेजी नहीं समझती है। यदि राहुल गांधी हिंदी में बोलते तो उनकी बात ज्यादा लोग समझ पाते।
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Saturday, 6 December 2025
मोदी सरकार ने मुझे रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिलने का अवसर नहीं दिया-राहुल गांधी। इसे कहते है गले पडऩा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलना चाहते थे, लेकिन मोदी सरकार ने उन्हें पुतिन से नहीं मिलने दिया। राहुल ने कहा कि मैं लोकसभा में प्रतिपक्ष का नेता हूं और भारत आने पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से विपक्ष के नेताओं के मुलाकात की परंपरा रही है। राहुल गांधी का कहना रहा कि मोदी सरकार विपक्ष से डरती है, इसलिए मुझे पुतिन से नहीं मिलने दिया गया। मालूम हो कि पुतिन 4 दिसंबर को भारत आए है और 5 दिसंबर को दिन भी उनका व्यस्त कार्यक्रम है। 5 दिसंबर को ही रात को राष्ट्रपति भवन में डिनर लेने के बाद पुतिन दिल्ली से रवाना हो जाएंगे। पुतिन से न मिलने को लेकर राहुल गांधी भले ही मोदी सरकार पर आरोप लगाए, लेकिन यह प्रोटोकॉल है कि किसी राष्ट्राध्यक्ष की इच्छा पर ही संबंधित देश के नेता मिल सकते हैं। जब पुतिन ने राहुल गांधी से मिलने की इच्छा ही नहीं जताई तो फिर मोदी सरकार राहुल गांधी को पुतिन से कैसे मिलवा सकती है। सवाल यह भी है कि क्या पुतिन के आने से पहले राहुल गांधी ने रूसी दूतावास में कोई प्रस्ताव दिया? जब राहुल गांधी की ओर से पुतिन से मिलने के कोई प्रयास नहीं किए गए, तब मोदी सरकार राहुल गांधी को कैसे मिलवा सकती है। यदि पुतिन अपनी भारत यात्रा में राहुल गांधी से मिलने की इच्छा जताते तो मोदी सरकार को राहुल गांधी को पुतिन से मिलवाना ही पड़ता। राहुल गांधी भले ही लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता हो, लेकिन उन्हें किसी राष्ट्राध्यक्ष से मुलाकात के प्रावधानों का ही पता नहीं है, क्या राहुल गांधी यह चाहते है कि मोदी सरकार उन्हें जबरन पुतिन से मिलवाए? लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष नेता विदेशी राष्ट्राध्यक्ष से मिल सकते हैं, लेकिन राहुल गांधी को यह पता होना चाहिए कि पुतिन रूस में लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं है। पुतिन ने तो अपनी ताकत के बल पर यह भी तय करवा लिया है कि वे चाहेंगे, तब तक रूस के राष्ट्रपति रहेंगे। यानी राष्ट्रपति का पद पुतिन अपनी मर्जी से ही छोड़ेंगे।
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अजमेर के सवा सौ मंदिरों में मंगलवार-शनिवार को नियमित हो रहा है सुंदरकांड पाठ। अब ऐसे मंदिरों के पुजारियों को उपासकों का 7 दिसंबर को सम्मान। श्री हनुमत शक्ति जागरण समिति की पहल।
श्री हनुमत शक्ति जागरण समिति की पहल पर अजमेर के सवा सौ मंदिरों में मंगलवार और शनिवार को नियमित रूप से सुंदरकांड पाठ हो रहा है। समिति के अध्यक्ष आनंद प्रकाश गोयल और महामंत्री अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि वीर हनुमान की शक्ति घर घर तक पहुंचाने के लिए ही मंदिरों में सुंदर कांड पाठ की शुरुआत की गई। आज शहर के 125 से भी ज्यादा मंदिरों में नियमित तौर पर सुंदर कांड के पाठ हो रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। इन सुंदरकांड के पाठ में मंदिर के पुजारियों और उपासकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पुजारियों और उपासकों के प्रयासों को देखते हुए ही 7 दिसंबर को अजमेर के जेएलएन अस्पताल के सामने रेडक्रॉस के सभागार में सुबह 11 बजे एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम में संबंधित मंदिरों के पुजारियों और उपासकों का सम्मान किया जाएगा। इसके साथ ही एक नेत्र चिकित्सा शिविर भी लगाया जाएगा, जिसमें कोई भी व्यक्ति अपनी आंखों की जांच नि:शुल्क करवा सकता है। इस शिविर में सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक राजेंद्र हेड़ा और श्रीमती मधु विजयवर्गीय अपनी सेवाएं देंगी। इस अवसर पर समिति की साधारण सभा भी आयोजित की गई है। इस कार्यक्रम की ओर अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829383000 पर आनंद प्रकाश गोयल से ली जा सकती है।
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