Wednesday, 2 April 2025

न्यूज चैनलों में सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती की सबसे ज्यादा मांग। ख्वाजा साहब की दरगाह के दीवान की ओर से वक्फ एक्ट संशोधन पर मुसलमानों का पक्ष रख रहे हैं। दरगाह का संचालन भी एक्ट से होता है, लेकिन धार्मिक मामलों में दखल नहीं।

वक्फ एक्ट में संशोधन को लेकर न्यूज चैनलों पर लगातार बहस हो रही है। चैनलों की बहस में सबसे ज्यादा मांग सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती की है। चिश्ती अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह के दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन के पुत्र हैं। आबेदीन ने अपने पुत्र को ही उत्तराधिकारी घोषित कर रखा है। ऐसे में न्यूज चैनलों पर नसीरुद्दीन चिश्ती दरगाह दीवान की ओर से मुसलमानों का पक्ष रख रहे हैं। नसीरुद्दीन चिश्ती उन मुस्लिम प्रतिनिधियों में शामिल है, जिन्होंने वक्फ एक्ट के संशोधन का मसौदा तैयार करने में भूमिका रही है। यही वजह है कि चिश्ती अब खुलकर संशोधन प्रस्ताव का समर्थन कर रहे है। चिश्ती का कहना है कि नया कानून बनने से वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग नहीं हो पाएगा। मौजूदा समय में अनेक वक्फ संपत्तियों पर ऐसे लोग काबिज है जो सिर्फ अपने स्वार्थ पूरे कर रहे है। एक्ट में संशोधन समय की जरूरत है। मैं यह बात दावे से कह सकता हंू कि वक्फ संपत्तियों का लाभ सिर्फ मुसलमानों को ही मिलेगा। वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने की नीयत सरकार की नहीं है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सिर्फ वक्फ संपत्तियों के कामकाज में पारदर्शिता लाना चाहती है। चिश्ती न्यूज चैनलों पर बता रहे है कि ख्वाजा साहब की दरगाह का संचालन भी दरगाह एक्ट 1956 के अंतर्गत हरे हो रहा है। दरगाह कमेटी केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय के अधीन ही काम करती है। मंत्रालय ही कमेटी का नाजिम (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) नियुक्त करता है। दरगाह कमेटी की ओर से दरगाह के अंदर जायरीन की सुविधाओं के लिए अनेक इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन आज तक भी दरगाह कमेटी ने दरगाह की धार्मिक रस्मों में दखल नहीं दिया। दीवान पद की परंपराओं के अनुसार उनके परिवार के सदस्य और खादिम मिलकर दरगाह की धार्मिक रस्मों को पूरा करते हैं। ख्वाजा साहब के सालाना उर्स में मजार शरीफ पर गुसल की रस्म भी दरगाह दीवान और खादिमों के सहयोग से की जाती है। S.P.MITTAL BLOGGER (02-04-2025) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

Tuesday, 1 April 2025

पाकिस्तान में जब हिंदुओं की संपत्तियां सरकार की हो गई तो फिर भारत में मुसलमानों की संपत्तियां वक्फ की कैसे हो सकती है संविधान में वक्फ संपत्तियां या बोर्ड का उल्लेख नहीं, लेकिन तुष्टीकरण की नीति के तहत तत्कालीन पीएम नेहरू ने 1954 में एक्ट बनाया। मोदी सरकार की भी लाचारी: वक्फ एक्ट खत्म नहीं सिर्फ संशोधन। यानी 9 लाख एकड भूमि मुसलमानों की ही रहेगी। ख्वाजा साहब की दरगाह के दीवान की ओर से संशोधन प्रस्ताव का समर्थन, लेकिन खादिमों का विरोध।

संसद के इसी बजट सत्र में ही वक्फ एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने की उम्मीद जताई जा रही है, इसलिए वक्फ बोर्ड से जुड़ी संस्थाओं का विरोध तेज हो गया है। कुछ संस्थाओं के आह्वान पर 31 मार्च को ईद की नमाज के समय कुछ मुसलमानों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। कहा जा रहा है कि वक्फ एक्ट में संशोधन होने के बाद मुसलमानों की मस्जिदे और अन्य धार्मि कस्थल छीन लिए जाएंगे। संशोधन प्रस्ताव को संविधान के विरुद्ध बताया जा रहा है। असल में भारत में वक्फ की संपत्तियोंं का मामला देश के विभाजन से जुड़ा है। 1947 में विभाजन की त्रासदी के समय पाकिस्तान से लाखों हिन्दू भारत आए और भारत से लाखों मुसलमान पाकिस्तान गए। जिन हिंदुओं ने पाकिस्तान छोड़ा उनकी संपत्तियों को सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया, लेकिन जिन मुसलामनों ने भारत छोड़ा वे अपनी संपत्तियों को वक्फ (अल्लाह) के लिए छोड़ गए। हालांकि पाकिस्तान छोड़ते समय हिंदुओं ने भी अपनी संपत्तियों के लिए देवी देवताओं से प्रार्थना की थी, लेकिन पाकिस्तान में हिंदुओं की संपत्तियां सरकार ने अपने कब्जे में ले ली और भारत में मुसलमानों की संपत्तियों के लिए वक्फ बोर्ड बना दिया गया। बीआर अंबेडकर ने जो संविधान बनाया उसमें वक्फ संपत्तियों का कोई उल्लेख नहीं है। यानी संविधान निर्माताओं ने भी तब पाकिस्तान गए मुसलमानों की संपत्तियों को सरकार की ही माना। संविधान में उल्लेख न होने के बाद भी 1954 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ही तुष्टीकरण की नीति के अंतर्गत वक्फ एक्ट बना दिया और संपत्तियों को सुन्नी व शिया मुसलमानो के प्रतिनिधियों को सौंप दिया। वक्फ बोर्ड को बेशकीमती संपत्तियों सौंपने का काम कांग्रेस के अंतिम प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने वर्ष 2013 में किया। यही वजह है कि आज वक्फ बोर्डों के पास 9 लाख एकड से भी ज्यादा भूमि है तथा एक लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा की संपत्तियां है। इसे मोदी सरकार की लाचारी ही कहा जाएगा कि मौजूदा संशोधन में भी वक्फ की संपत्तियां सरकार के अधीन लाने का कोई कानून नहीं बनाया जा रहा है। संशोधन के माध्यम से सिर्फ वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन और वक्फ बोर्डों के कामकाज में पारदर्शिता लाई जाएगी। संपत्तियों से जो इनकम होगी उसे भी मुसलमानो ंपर ही खर्च किया जाएगा। लेकिन इसके बावजूद भी वक्फ बोर्डों पर काबिज मुस्लिम नेता कह रहे है कि एक्ट में संशोधन के बाद मस्जिदें और धार्मिक स्थल छीन लिए जाएंगे। जबकि मस्जिदों का वक्फ की संपत्तियों से कोई सरोकार नहीं है। वक्फ की संपत्तियां उन मुसलमानों की है जो पाकिस्तान चले गए। जबकि मस्जिदे तो विभाजन के बाद भी यथावत है। दीवान की ओर से समर्थन: अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह के दीवान की ओ रसे उनके पुत्र (उत्तराधिकारी) तथा ऑल इंडिया सज्जादानशीन कौंसिल के अध्यक्ष सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने वक्फ एक्ट संशोधन का समर्थन किया है। चिश्ती ने कहा कि देश के कुछ मुस्लिम नेता झूठ बोल रहे है कि संशोधन के बाद मस्जिदें और धार्मिक स्थल छीन लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने जब संशोधन प्रस्ताव बनाए तब उनकी भी राय ली गई थी। संशोधन में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, जिससे वक्फ संपत्तियों पर मुसलमानों का हक कम होता हो। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में वक्फ संपत्तियों का कुछ लोग दुरुपयोग कर रहे है। यहां तक कि गलत तरीकों से वक्फ की संपत्तियों को बेचा जा रहा है। संशोधन के बाद संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा और बिना वैधानिक अनुमति के कोई संस्था वक्फ संपत्तियों को नहीं बेच सकेगी। चिश्ती ने कहा कि नया कानून बनने से वक्फ संपत्तियां सुरक्षित हो जाएगी। संपत्तियों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग होगा और जो इनकम होगी, उसे गरीब मुसलमानों परखच्र किया जा सकेगा। मौजूदा समय में वक्फ संपत्तियों से मामूली इनकम हो रही है जसके हिसाब किताब में पारदर्शिता भी नहीं है। वहीं दरगाह के खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सरवर चिश्ती ने एक्ट में संशोधन का विरोध किया है। उन्होंनक हा कि सरकार की मंशा वक्फ संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने की है। S.P.MITTAL BLOGGER (01-04-2025) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर के कलाप्रेमियों को 29 को भोपा भैरूनाथ तथा 30 मार्च को दुलारी बाई के नाटक जरूरी देखने चाहिए। लाइट, साउंड और कला का भावपूर्ण मेल शायद फिर कभी देखने को न मिले। नाटक खांचे की प्रस्तुत शानदार रही।

Friday, 28 March 2025

नव संवत्सर पर अजमेर में चौराहों की सजावट, मंदिर में सुंदर कांड, विक्रम मेला, वाहन रैली, सूर्य वंदना आदि के साथ साथ मिश्री और तुलसी से मुंह मीठा कराया जाएगा। अजमेर थियेटर फेस्टिवल का शानदार आगाज। सरकारी दफ्तरों में 31 मार्च को मनेगा नवसंवत्सर।

विक्रम संवत 2082 के पहले दिन यानी 30 मार्च को नव संवत्सर के अवसर पर अजमेर में विभिन्न आयोजन होंगे। नवसंवत्सर समारोह समिति के संयोजक सुनील दत्त जैन ने बताया कि पूर्व संध्या पर 29 मार्च को सायं छह बजे से रीजनल कॉलेज चौराहा स्थित आनासागर चौपाटी पर विक्रम मेले का आयोजन किया गया है। मेले में विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों की प्रस्तुत होगी तथा 25 झांकियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस अवसर पर बच्चों को खाद्य सामग्री निशुल्क दी जाएगी। मेला स्थल पर ही रक्तदान शिविर भी रखा गया है, युवा वर्ग स्वेच्छा से रक्तदान कर सकते हैं। जैन ने बताया कि अगले दिन 30 मार्च की सुबह पुष्कर रोड स्थित मित्तल अस्पताल के सामने चौपाटी पर सूर्य वंदना का कार्यक्रम संस्कार भारती की ओर से किया जाएगा। इसमें शास्त्रीय संगीत के माध्यम से सूर्य की उपासना होगी। उन्होंने बताया कि अजमेर शहर के 25 से भी ज्यादा चौराहों को सजाया जा रहा है। कई चौराहों पर बैंड वादन भी होगा। चौराहों पर समिति से जुड़ी 128 टोलियों के कार्यकर्ता लोगों का स्वागत करेंगे। तिलक लगाकर मिश्री और तुलसी से मुंह मीठा कराया जाएगा। इसके साथ ही महानगर की बस्तियों में 29 मार्च को मंदिरों में सुंदरकांड का पाठ होगा। 29 मार्च को ही नगरा क्षेत्र से विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता एक वाहन रैली निकालेंगे तो जो रीजनल कॉलेज चौपाटी पर आयोजित विक्रम मेले में शामिल होगी। जैन ने बताया कि सनातन धर्म के प्रति जन जागरण के लिए नव संवत्सर से पहले अनेक स्थानों पर विचार गोष्ठियां आयोजित की गई, इसमें प्रचार सामग्री का वितरण किया गया। उन्होंने बताया कि नवसंवत्सर के आयोजनों को लेकर शहर भर में उत्साह देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि नवसंवत्सर के आयोजन हमारी सनातन संस्कृति को मजबूत करते हैं। सरकारी दफ्तरों में 31 को: चूंकि 30 मार्च को रविवार है, इसलिए सरकारी दफ्तरों में नवसंवत्सर के आयोजन सोमवार 31 मार्च को होंगे। जिन दफ्तरों के परिसर में मंदिर बने हुए हैं वहां धार्मिक आयोजन होंगे। साथ ही सनातन धर्म को मानने वाले कार्मिक एक दूसरे को शुभकामनाएं देकर नवसंवत्सर पर्व मनाएंगे। नव संवत्सर के कार्यक्रमों के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829147270 पर संयोजक सुनील दत्त जैन से ली जा सकती है। व्यंग्य बाणों पर सजी फूलों की सेज सा चुटीला हास्य चूड़ामणि: *बाय : डॉ. रमेश अग्रवाल* व्हाट्सएप, फेसबुक, यूट्यूब और टी.वी. से परे, बंद कमरों की घुटन से दूर, एक ही सभागार में, एक ही मानसिक धरातल पर बैठ कर और एक सी गुदगुदी तरंग पर नगर के सैंकड़ों प्रबुद्ध जन नें 27 मार्च को एक लम्बे अन्तराल के बाद अत्यन्त स्वस्थ मनोरंजन की बयार को साझे महसूस किया। सतगुरू इन्टरनेशनल स्कूल के आगाज सभागार में आरम्भ हुए चार दिवसीय थियेटर फेस्टीवल के पहले ही दिन सौरभ अनंत द्वारा निर्देशत एवं भोपाल के विहान ड्रामा वर्क्स द्वारा मंचित हास्य प्रहसन हास्य चूड़ामणि ने आगाज के साथ ही फेस्टीवल को चरम ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। प्राचीन पृष्ठ भूमि पर रचित इस प्रहसन में आधुनिक प्रसंगों के समावेश ने हाल में उपस्थित दर्शकों को एक बिल्कुल नये एवं अनूठे अहसास से अवगत कराया। प्रहसन की पूरी पठकथा एक चोर द्वारा किसी गणिका के गहनों की पुटरिया चुरा कर इसे किसी पाखंडी बाबा के पास छिपाने एवं पीड़ित गणिका द्वारा पुटरिया की खोज में तंत्र मंत्र की गरज से इसी बाबा के पास जा पहुंचने के इर्द गिर्द घूमती है। रोचक एवं कसी हुई पटकथा में लपेट कर न सिर्फ बाबागिरी के पाखंड बल्कि अंधविश्वास एवं आडम्बर में आकंठ डूबे मौजूदा परिवेश पर जोरदार प्रहार किया गया है। प्राचीन कथाओं मैं नजर आने वाले पात्रों के से चरित्र वाले पात्रों के मुंह से नैटवर्क पकड़ने की कोशिश कर रहा हूं, क्यू आर कोड स्कैन करना न भूलें, लाइक और सब्सक्राइब भी करें जैसे संवाद, गुदगुदाने वाले अछूते से हास्य का अहसास कराते हैं। बाबा -चेले की चकल्लस के दौरान कई चुटीले संवाद व्यंग्य की पराकाष्ठा छूते से दिखाई देते हैं मसलन, चोरी का माल छिपाने के लिये बाबाओं से ज्यादा सुरक्षित और कौन सी जगह हो सकती है …….. एक स्थान पर चेला कहता है मैं तो बस यहां से वहां घूमता रहता हूं तो बाबा कहता है, तू क्या देश का प्रधानमंत्री है। योग और आध्यात्म के पर्दे में अपने ब्रांड की मार्केटिंग करने वाले स्वामियों पर किया गया व्यंग्य भी जैसे मलमल पर नक्काशी की तरह कढ़ा हुआ नजर आया। हास्य चूड़ामणि की प्रस्तुति को यादगार बनाने वाला सबसे महत्वपूर्ण घटक इसके कलाकारों का असाधारण एवं उच्च स्तरीय अभिनय था। प्ले के आरम्भ में प्रस्तुत नृत्य गान के दौरान ही इन कलाकारों की मुख मुद्राओं ने अहसास करा दिया था कि आगे होने वाली प्रस्तुति किस कदर हास्य से भरपूर रहने वाली है। लगभग सभी कलाकारों के हाथ पैरों की लयबद्धता और भावाभिव्यक्तियों की चपलता हैरत में डालने वाली थी। कुल मिला कर हास्य चूड़ामणि अजमेर थियेटर फेस्टीवल की एक यादगार उपलब्धि कही जा सकती है। शहर से इतनी दूर और वह भी थियेटर से जुड़े कार्यक्रम में दर्शकों की जितनी उपस्थिति थी वह उत्साहवर्द्धक कही जा सकती है। कुल मिला कर योबी जार्ज , उनकी टीम व रंगकर्म से जुड़े अजमेर के सभी कलाकार इस साझे प्रयास के लिये बधाई के पात्र हैं। शुक्रवार 28 मार्च को इसी मंच पर जोधकुल के अभिनय गुरुकुल के निर्देशक द्वय अरु स्वाति व्यास के नाटक खांचे का प्रदर्शन होगा। S.P.MITTAL BLOGGER (28-03-2025) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तो उत्तर प्रदेश में गौशालाओं को बंद करवा दिया जाएगा, क्योंकि समाजवादी पार्टी को गौशालाओं से दुर्गंध का एहसास होता है। सनातन संस्कृति में तो गौमाता, मनुष्य का जीवन चक्र है।

27 मार्च को कन्नौज के एक समारोह में समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा को दुर्गंध पसंद है, इसलिए गौशालाएं बनाई जा रही है, जबकि समाजवादी पार्टी को सुगंध पसंद है, इसलिए इत्र पार्क विकसित किए गए। उन्होंने कहा कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराकर दुर्गंध को बंद कर दिया जाएगा। अखिलेश यादव के बयान से प्रतीत होता है कि यदि वह दोबारा से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते हैं तो प्रदेश में गौशालाओं को बंद कर देंगे। हो सकता है कि गौशालाओं के स्थान पर इत्र के शोरूम खोल दिए जाए। गौशालाओं के बंद हो जाने से गौ माता की स्थिति कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। गौशालाओं से अखिलेश यादव को भले ही दुर्गंध का अहसास होता हो, लेकिन सनातन संस्कृति में तो गौमाता, मनुष्य के जीवन का चक्र है। यहां तक माना जाता है कि जिस घर के आंगन में गाय रहती हो वह घर निरोगी होता है। न केवल गाय का दूध मनुष्य के शरीर को मजबूत बनाता है बल्कि गाय के गोबर और मूत्र से तैयार होने वाली खाद का उपयोग खेती में किया जाता है। गौमाता के गोबर और मूत्र से तैयार खाद से जो फसल तैयार होती है, वह भी क्वालिटी की दृष्टि से उत्तम होती है। यहां तक कि फसल को बचाने के लिए कीटनाशक का उपयोग भी नहीं करना पड़ता है। गौमाता की वजह से ही भारत में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल रहा है। भारत की सनातन संस्कृति में गाय को सिर्फ एक दुधारू पशु नहीं माना गया बल्कि माता का दर्जा दिया गया है। घर-परिवार की महिलाएं तो गायों को पूजती है। हमारे यहां गोवर्धन पूजन की परंपरा है। गौशालाओं से दुर्गंध आने की बात कहकर अखिलेश यादव ने भारत की सनातन संस्कृति का भी अपमान किया है। अखिलेश ने ऐसा तब कहा जब यादव समुदाय को भगवान कृष्ण का अनुयायी माना जाता है। भगवान कृष्ण तो स्वयं गौभक्त हैं। उन्हें तो ग्वाले (गाय पालक)की उपाधि भी दी गई है। अखिलेश को ऐसा बयान देने से पहले अपने यादव समाज की धार्मिक भावनाओं को तो ख्याल रखना चाहिए था। S.P.MITTAL BLOGGER (28-03-2025) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511