Monday, 12 October 2026

#12566 नरेना पुलिस थाने में संघ के प्रचारक कृष्णावतार की बेरहमी से पिटाई के प्रकरण में विजिलेंस जांच। ब्लॉग पर डीजीपी राजीव शर्मा ने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही के आदेश दिए। विजिलेंस के डीएसपी श्रीराम नरेना पहुंचे। जांच से पहले जयपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हनुमान प्रसाद को हटाया जाए। ================= 10 अक्टूबर को सांभर जिले के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक कृष्णावतार की जयपुर ग्रामीण में आने वाले नरेना पुलिस थाने पर बेरहमी से पिटाई के प्रकरण में 12 अक्टूबर को मैंने ब्लॉग संख्या 12565 लिखा। इस ब्लॉग में भाजपा शासित राजस्थान के पुलिस थाने पर संघ प्रचारक की पिटाई को बेहद गंभीर मानते हुए प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई थी। मेरे इस ब्लॉग को राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने पढ़ा और ब्लॉग में लिखे तथ्यों के आधार पर विजिलेंस जांच के आदेश दिए। डीजीपी के प्रिंसिपल स्टाफ अधिकारी कुंवर राष्ट्रदीप (डीआईजी) ने फोन पर मुझे बताया कि इस प्रकरण को गंभीरता से लिया गया है। इस प्रकरण में जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी। डीजीपी के निर्देश के बाद विजिलेंस के एडीजी एस सेंगाथिर ने बताया कि डीएसपी श्रीराम को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच अधिकारी सभी पहलुओं पर प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। डीएसपी श्रीराम 12 अक्टूबर को ही नरेना पहुंच गए हैं। अब यह पता लगाया जाएगा कि संघ प्रचारक कृष्णावतार को नरेना पुलिस स्टेशन पर क्यों लाया गया और क्यों बेरहमी से पिटाई की गई? मालूम हो कि 10 अक्टूबर की शाम को जब संघ प्रचारक कृष्णावतार एक बैठक में भाग लेने के लिए फुलेरा जा रहे थे, तब पुछताछ के बहाने उन्हें नरेना थाने लाया गया। यहां पर थानाधिकारी उमराव सिंह एवं उप थानाधिकारी ओंकारसिंह के साथ-साथ सिपाही रमेशचन्द्र, कुलदीप , महिपाल, विनोद व अजय ने बेरहमी के साथ मारपीट की। इसको लेकर 11 अक्टूबर को दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर मुकदमा दर्ज कर लिया गया, लेकिन संघ प्रचारक की पिटाई के प्रकरण में सिर्फ कुछ पुलिसकर्मियों का निलंबन पर्याप्त कार्यवाही नहीं है, इसीलिए मैंने ब्लॉग के माध्यम से पूरे घटनाक्रम की ओर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा का ध्यान आकर्षित किया। चूंकि राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है, इसलिए पुलिस थाने में संघ प्रचारक की पिटाई होना बेहद निंदनीय और गंभीर मामला है। संघ के प्रचारक अपना घर परिवार छोड़कर राष्ट्र सेवा का काम करते हैं। यदि भाजपा शासित राज्य में संघ प्रचारक को थाने पर ले जाकर पीटा जाए तो यह संबंधित भाजपा सरकार पर कलंक है। पहले पुलिस अधीक्षक को हटाया जाए:- इस पूरे घटनाक्रम में भले ही सीधे तौर पर जयपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हनुमान प्रसाद की कोई भूमिका न हो, लेकिन पुलिस अधीक्षक अपने जिले के सुपरवाइजर होते हैं। ऐसे में किसी भी थाने पर घटना की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक की भी है। संघ प्रचारक की पिटाई के प्रकरण की जांच से पहले हनुमान प्रसाद को पुलिस अधीक्षक के पद से हटाया जाना चाहिए। हनुमान प्रसाद के पुलिस अधीक्षक रहते डीएसपी स्तर की जांच प्रभावित हो सकती है। इस गंभीर प्रकरण में पुलिस अधीक्षक अपनी सुपरवाइज़री जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
संघ प्रचारक कृष्णावतार की नरेना थाने में बेरमी से पिटाई के मामले में क्या सिर्फ थानाधिकारी और कुछ पुलिस कर्मी दोषी हैं? कारवाई तो जयपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक पर भी होनी चाहिए, अन्यथा सवाल मुख्यमंत्री और डीजीपी से भी पूछा जाएगा। इधर वकील को थप्पड़ मारने वाली अजमेर ट्रेफिक की डीएसपी अंजू यादव ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी। ================ 10 अक्टूबर की शाम को जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सांभर जिले के प्रचारक कृष्णावतार एक आवश्यक बैठक के लिए फुलेरा जा रहे थे कि तभी पूछताछ के नाम पर नरेना की पुलिस प्रचारक को थाने ले गई। जब कृष्णावतार ने बताया कि वे संघ के प्रचारक है तो नरेना के थानाधिकारी उमराव सिंह और एएसआई ओंकार सिंह ने कहा कि हम अभी तेरी प्रचारी निकाल देते हैं। इसके सथ ही दोनों अधिकारियों ने बुरी तरह कृष्णावतार की पिटाई की। इस कृत्य में सिपाही रमेशचंद, कुलदीप, महिपाल, विनोद व अजय भी शामिल रहे। पिटाई से घायल कृष्णावतार को नरेना के प्राथमिक चिकित्सालय में इलाज के लिए ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए जयपुर के एसएमएस अस्पताल के लिए रैफर कर दिया। अब कृष्णावतार का इलाज जयपुर में हो रहा है। नरेना थाना जयपुर ग्रामीण में आता है, इसलिए यहां के पुलिस अधीक्षक हनुमान प्रसाद ने आरोपी पुलिस कर्मियों को निलंबित कर मुकदमा दर्ज करवा दिया। लेकिन सवाल उठता है कि क्या संघ के प्रचारक की पिटाई के मामले में सिर्फ थानाधिकारी और कुछ पुलिस कर्मी ही दोषी हैं? संघ प्रचारक की पिटाई थाने में तब हुई है, जब राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार चल रही है। ऐसा नहीं कि नरेना की पुलिस ने अनजाने में कृष्णावतार की बेरहमी से पिटाई की। थानाधिकारी को पता था कि कृष्णावतार संघ के प्रचारक हैं। भाजपा शासित राज्य में यदि संघ के प्रचारक को थाने में ले जाकर पीटा जाए तो फिर मुख्यमंत्री और राज्य के डीजीपी पर भी सवाल उठेंगे। घटना के बाद जयपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हनुमान प्रसाद भाजपा और संघ के पदाधिकारियों ने समक्ष बड़ी मायूसी दिखा रहे हैं। जबकि इस घटना के लिए पुलिस अधीक्षक भी उतने ही दोषी हैं, जिन थानाधिकारी उमराव सिंह। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लिए इससे बुरी कोई बात नहीं हो सकती है कि संघ का एक प्रचारक थाने में बुरी तरह पीटा जाए। संघ के प्रचारक के त्याग और परिश्रम के बारे में सीएम शर्मा अच्छी तरह जानते हैं। संघ का प्रचारक अपना घर परिवार सब कुछ छोड़कर राष्ट्र सेवा में लगा रहता है। जिस व्यक्ति ने राष्ट्र सेवा के लिए अपना घर परिवार छोड़ दिया हो उससे यदि भाजपा के शासन में किसी थाने पर पीटा जाए तो उस भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री को अपने पद परं रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं को संघ का प्रचारक बताते हैं तब राजस्थान में भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री रहते हुए संघ के एक प्रचारक की पिटाई बहुत गंभीर घटना है। भविष्य में ऐसी घटना न हो इसके लिए जयपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक को भी निलंबित कियाजाना चाहिए। सीएम शर्मा माने या नहीं, लेकिन संघ के प्रचारक को थाने में पिटाई बड़ी घटना है। यदि संघ प्रचारकों पर परिश्रम और त्याग न हो तो भजनलाल शर्मा भी मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। इस घटना के लिए मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को भी सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए। राजस्थान की भाजपा सरकार पर इससे बड़ा कलंक और कोई नहीं हो सकता। डीएसपी ने माफी मांगीः गत 9 अक्टूबर को जब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अजमेर जिले के किशनगढ़ शहर में आए थे, तब ट्रेफिक मैनजमेंट के लिए अजमेर की ट्रेफिक डीएसपी अंजू यादव किशनगढ़ में मौजूद थी। तभी किशनगढ़ के वकील बाबूलाल बगरिया से डीएसपी का विवाद हो गया। डीएसपी ने गुस्से में वकील बाबूलाल के थप्पड़ मार दिया। जब कवीलों को थप्पड़ की जानकारी हुई तो अजमेर जिला बार एसोसिएशन और राजस्थान बार कौंसिल के पदाधिकारियों ने नाराजगी प्रकट की। 12 अक्टूबर को इस प्रकरण को लेकर बड़ा आंदोलन होना था, लेकिन इससे पहले ही 11 अक्टूबर को डीएसपी अंजू यादव ने किशनगढ़ की एक होटल में वकील बाबूलाल को बुलाया और माफी मांगी। डीएसपी की माफी के बाद वकील ने कहा कि अब मैंने डीएसपी को माफ कर दिया है, इसलिए वकीलों को आंदोलन करने की जरूरत नहीं है। डीएसपी यादव ने अपना माफीनामा और वकील द्वारा माफ कर देने वाला वीडियो सोशल मीथ्डया पर पोस्ट किया। डीएसपी यादव नेमाना कि गलती इंसान से ही होती है। डीएसपी ने जिस संवदेनशीलता और गंभीरता के साथ माफी मांगी, उसकी चर्चा अब पुलिस महकमे के साथ वकील समुदाय में भी हो रही है। डीएसपी अंजू यादव ने यह प्रदर्शित किया कि माफी मांगने से इंसान बड़ा होता है। जानकारी के मुताबिक पुलिस में डीएसपी बनने से पहले अंजू यादव शिक्षक थी। प्रशासनिक सेवा में चयन और पुलिस ट्रेनिंग के बाद अजमेर में ट्रैफिक डीएसपी के पद पर अंजू यादव की पहली नियुक्ति हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
तो अजमेर में कांग्रेस अपना रावण अलग जलाएगी ? नगर निगम के इतिहास में पहली बार दुर्गा पूजा महोत्सव अलग अलग। क्या मेयर अनामिका को भाजपा के नेताओं का समर्थन नहीं मिल रहा ? ============== अजमेर नगर निगम के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब दुर्गा पूजा महोत्सव कांग्रेस और भाजपा के पार्षद अलग अलग मना रहे हैं। पिछले 36 वर्षों से नगर निगम की ओर से जो दुर्गा पूजा महोत्सव मनाया जाता है, उसमें भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों की भूमिका रहती है। लेकिन इस बार मेयर अनामिका शर्मा ने महोत्सव के लिए जिन पांच कमेटियों का गठन किया उनमें से एक कमेटी का संयोजक कांग्रेस के पार्षद को बनाया गया। जबकि निगम में भाजपा के पार्षदों की संख्या 32 और कांग्रेस के पार्षदों की संख्या 37 हैं। जब कांग्रेस के पार्षदों इस भेदभाव पर ऐतराज जताने के लिए मेयर के पास गए तो भाजपा के पार्षद सतीश बंसल ने अभ्रद व्यवहार किया। कमेटियों में भेदभाव और बंसल के अभद्र व्यवहार के विरोध में 11 अक्टूबर को नगर निगम द्वारा आयोजित आजाद पार्क में दुर्गा महोत्सव के पहले दिन के समारोह का कांग्रेस के पार्षदों ने बहिष्कार किया। इसके साथ ही कांग्रेस के पार्षदों पाल बीसला स्थित गढ़वाल पैलेस पर अलग से दुर्गा पूजा का आयोजन किया। कांग्रेस की ओर से मेयर पद की उम्मीदवार रही किरण गढ़वाल और डिप्टी मेयर पद के उम्मीदवार नौरत गुर्जर ने कहा कि अब कांग्रेस के पार्षद दुर्गा पूजा महोत्सव अलग ही करेंगे। अलग अलग आयोजन के लिए मेयर खुद जिम्मेदार हैं। मेयर का न तो भाजपा पार्षदों और न प्रशासन पर कोई नियंत्रण है। मेयर का पद मजाक बनकर रह गया है। कांग्रेस के उपाध्यक्ष एडवोकेट विवेक पाराशर ने कहा कि कांग्रेस के पार्षद अब रावण दहन का कार्यकम भी अलग से करेंगे। कांग्रेस का कोई भी पार्षद नगर निगम के दुर्गा पूजा महोत्सव में शामिल नहीं होगा। यानी इस बार अजमेर में कांग्रेस अपना रावण अलग से जलाएगी। भाजपा नेताओं का समर्थन नहीं ?: कांग्रेस केपार्षदों ने जो मुद्दा उठाया है, वह इतना बड़ा नहीं था कि उसे सुलझाया न जा सके। यह माना कि मेयर अनामिका में अनुभव का अभाव है। वे घरेलू महिला होकर पहली बार पार्षद बनी और फिर सीधे मेयर भी बन गई, लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की यह जिम्मेदारी थी कि वे मामले में दखल देकर दुर्गा पूजा महोत्सव एक साथ करवाते। अलग अलग महोत्सव होने से मेयर और भाजपा की प्रतिष्ठा को ही धक्का लग रहा है। भले ही मेयर ने सूझबूझ का अभाव हो, लेकिन भाजपा के नेता चाहते तो विवाद को खत्म करवा सकते थे। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा के ही कुछ नेता और पार्षद मेयर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने में लगे हुए हैं, जहां तक मेयर अनामिका का सवाल है तो वे इसी बात से खुश है कि प्रतिदिन कई स्थानों पर उनका स्वागत हो रहा है S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
पंचायतराज चुनाव में पहले चरण के नामांकन का 13 अक्टूबर को अंतिम दिन, लेकिन अभी तक भाजपा कांग्रेस के उम्मीदवारों की घोषणा नहीं। शहरी निकाय के मुकाबले पंचायत चुनाव में ज्यादा घमासान। ================= पंचयतीराज चुनाव के पहले चरण में जिन 16 जिला परिषदों में चुनाव होना है, वहां उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तिथि 13 अक्टूबर है। आज 11 अक्टूबर हो जाने के बाद भी कांग्रेस और भाजपा ने जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के उम्मदवारों की घाष्ज्ञणा नहीं की है, जबकि दोनों ही दल दावा करते हैं उनका संगठन प्रदेश भर में मजबूत है। यदि इन दलों का संगठन मजबूत होता तो नामांकन शुरू होने से पहले ही उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाती। नामांकन 8 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। अब यदि 12 अक्टूबर को उम्मीदवारों की घोषणा होती है तो सभी उम्मीद अंतिम दिन 13 अक्टूबर को ही नामांकन करेंगे। इससे निर्वाचन विभाग को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। जब उम्मीदवार और उनके समर्थको ंकी भीड़ एक साथ आती है तो फिर कानून व्यवस्था बिगडऩे की भी संभावना होती है। हाल ही में संपन्न शहरी निकाय के चुनाव में भी भाजपा और कांग्रेस ने अपने उम्मीरवारों की घोषणा ऐन मौके पर की और उम्मीदवारों के सिबंल सीधे निर्वाचन अधिकारी के पास जमा करवाए। शहरी निकाय के मुकाबले पंचायती राज का चुनाव 15 गुना बड़ा है। ऐसे में इन चुनावों में ज्यादा घमासान होगा। जब राजनीतिक दल उम्मीदवारों की घोषणा में जरूरत से ज्यादा विलंब कर रहे हैं, तब घमासान और बढऩे की आशंका है। शहरी निकाय के चुनाव में सबसे ज्यादा हड़बड़ी कांग्रेस में देखने को मिली थी। भीलवाड़ा नगर निगम में जो 17 उम्मीदवारों के सिंबल कांग्रेस की ओर से जमा ही नहीं करवाए गए। हालांकि बगावत का सामना दोनों ही दलों को करना पड़ा। पहले चरण का मतदान 22 अक्टूबर को होगा। सभी चरणों के मतदान की मतगणना 20 नवंबर को एक साथ होगी। S.P.MITTAL BLOGGER ( 11-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
कॉकरोचों की आड़ में राहुल, अखिलेश, ममता, केजरीवाल जैसे नेता देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं। वामपंथ तो तैयार ही बैठे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी गुंडई उचित नहीं। इसलिए स्टार लिंक को भारत में अनुमति नहीं दी जा रही। अब दिल्ली के हालात सामन्य होने लगे हैं। ================= 11 अक्टूबर को देश की राजधानी दिल्ली में मैट्रो ट्रेनों का संचालन सामान्य हो गया। इसी के साथ अब दिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर टे्रने भी आने लगी है। जंतर -मंतर वाले क्षेत्र को छोड़ कर यातायात भी सामान्य हो रहा है। यानी 10 अक्टूबर को जो सख्ती की गई थी, उसमें ढील दे दी गई है। असल में कॉकरोच जनता पार्टी की आड़ में कांग्रेस के राहुल गांधी, सपा के अखिलेश यादव, टीएमसी की ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल चाहते हैं कि देश में अराजकता फैल जाए। चूंकि लोकतांत्रिक तरीके से नरेंद्र मादेी को सत्ता से बाहर करना मश्किल हो गया है, इसलिए राहुल गांधी और उनके समर्थक नेता गुंडाई तरीके से देश के हालातों को बिगाडऩा चाहते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि नरेंद्र मादेी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति न हो तो गुंडई वाले नेता भारत की स्थिति भी पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और यहां तक कि फ्रांस जैसी कर दे। 10 अक्टूबर को को भी एक बार फिर अराजकता करने की कोशिश की गई थी, लेकिन मोदी-शाह की रणनीति ने प्रयासों को फेल कर दिया। राहुल केजरीवाल के इशारे पर नाचने वाले कॉकरोचों की मांग है कि देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दे। जिस कॉकरोच पार्टी ने अभी तक किसी चुनाव में भाग नहीं लिया, वह पार्टी भी वोट चोरी का आरोप लगा रही है। जबकि एसआईआर में गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट मे विचाराधीन है। भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था पूर्ण रूप से पारदर्शी है। सभी संवैधानिक संस्थाएं देश के संविधान के अनुरूप काम कर रही है। अब चुनाव में देश की जनता नरेंद्र मोदी के नेतृत्वको पसंदकरती है तो सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग क्या कर सकता है? मोदी को सत्ता से बाहर करने के लिए राहुल, केजरीवाल, अखिलेश यादव आदि को जनता का विश्वास जीतना होगा। ये नेता अपनी नीतियों की वजह से चुनाव हार रहे हैं और अब चुनाव आयोग को दोषी ठहरा रहे है। ऐसा नहीं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष का वजूद ही नहीं रहा। आज भी 545 में से 200 सांसद विपक्ष के हैं। इतना ही नहीं कई राज्यों में विपक्ष की सरकारें हैं। विपक्षी नेताओं की मांग पर अदालतें आधी रात को भी सुनवाई करती है। विपक्ष के नेता जब चाहे तब राष्ट्रपति से मुलाकात कर सकते हैं। इतना ही नहीं छोटे बड़े सभी नेताओं को सुरक्षा भी मिली हुई है। इसे लोकतंत्र की आफसोसनाक स्थिति ही कहा जाएगा कि जो नेता गुंडई कर रहे हैं उन्हें भी सरकार की ओर से सुरक्षा मिली हुई है। देश में अराजकता की मंशा रखने वाले नेताओं को यह समझना चाहए कि भारत के चारों तरफ दुश्मन देश है, जो भारत को मजबूत देखना नहीं चाहते। यदि भारत में अराजकता होगी तो दुश्मन देश फायदा उठाएंगे। जहां तक देशवासियों को सवाल है तो पिछले पांच वर्षों से देश के 80 करोड़ लोगों को प्रतिमाह पांच किलोम अनाज मुफ्त में यही मोदी सरकार दे रही है। दुनिया का कोई ऐसा देश नहीं है, जहां इतनी बड़ी आबादी को प्रतिमाह मांग से ज्यादा अनाज मुफ्त मं दिया जा रहा है। जरुरतमंद लोगों का इलाज फ्री में हो रहा है। इतना ही नहीं सरकार की ओर से मकान भी मुफ्त मेंदिए जा रहे है। किसानों को 6 हजार रुपए प्रतिवर्ष सम्मान निधि के तौर पर यही मोदी सरकार दे रही है। ऐसी अनेक योजनाएं है, जिसका साधा लाभ जनता को मिल रहा है। स्टार लिंक को अनुमति नहीं: देश में अराजकता क मंशा रखने वाले नेता खासकर राहुल गांधी चाहते हैं कि सैटेलाइट, इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक को भारत में इंटरनेट की सेवाएं उपलब्ध करवाने की अनुमति दे दी जाए। इस कंपनी पर मालिकाना हक अमेरिका के कारोबारी और दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति एलन मास्क का है। स्टार लिंक जिस देश में अपनी सेवाएं दे रही है,वहां अपराध और आतंकवाद को बढ़ावा मिला है। भारत में मोदी सरकार नहीं चाहती कि स्टार लिंक की वजह से देश की सुरक्षा को खतरा हो। यही वजह है कि मोदी सरकार शर्तो के आधार पर स्टार लिंक को अनुमति देना चाहती है। मौजूदा समय में भारत के जो उद्योगपति इंटरनेट की सेवाएं दे रहे है, उन पर सरकार का नियंत्रण है। लेकिन एलन मस्क सरकार का नियंत्रण नहीं चाहते। क्या देश की सुरक्षा को एक अमेरिकी कंपनी के हाथों में दे दिया जाए? एलन मस्क यह नही ंचाहते कि भारत में उनकी कंपनी का डेटा सरकार के नियंत्रण में हो। यदि स्टार लिंक पर सरकार का नियंत्रण नहीं होगा तो आवश्यकता होने पर सीमावर्ती राज्यों में भी इंटरनेट बंद नहीं हो सकेगा। कई बार देश की सुरक्षा के लिए इंटरने सेवाओं को बंद करना पड़ता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511