भारत में सही मायने में लोकतंत्र है, इसलिए कीटों की श्रेणी वाले कॉकरोचों (दीमक) से भी सरकार को वार्ता करनी पड़ रही है।
यह दुखद है कि राजनीतिक स्वार्थों के खातिर विपक्ष भी कॉकरोच बन गया है।
भारत के युवाओं को स्वयं को कॉकरोच नहीं बनने देना चाहिए।
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जीव विज्ञान में कॉकरोच को तिलचट्टा भी कहा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार विश्व में तिलचट्टा प्रजातियों की 4600 किस्म है। इनमें से 30 प्रजातियां मानव बसेरों में पाई जाती है। कॉकरोच यानी तिलचट्टा की श्रेणी में दीमक भी शामिल है। दीमक से होने वाले नुकसान के बारे में हर इंसान अच्छी तरह जनता है। जिस घर में एक बार दीमक लग जाए उस घर को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। कई घरों में तो दीमक को मारने के लिए हर वर्ष जहरीली दवाई का छिड़काव करना पड़ता है। कॉकरोच और दीमक इतनी घातक होने के बाद भी विदेशी मानसिकता वाले कुछ भारतीय युवकां ने अपने राजनीतिक दल का नाम कॉकरोच जनता पार्टी रख लिया है। भारत के लिए यह चिंताजनक बात है कि कॉकरोच की मानसिकता वाले युवकों के बहकावे में देश के अनेक युवा भी आ गए है। चूंकि भारत में सही मायने में लोकतंत्र है, इसलिए सरकार को कॉकरोचों से भी वार्ता करनी पड़ रही है। इसे दुखद ही कहा जाएगा कि राजनीतिक स्वार्थों की खातिर विपक्ष भी कॉकरोच बन गया है। बड़ी अजीब बात है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में कॉकरोच पार्टी पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन कर रही है। वह भी तब जब लीक हुआ नीट का पेपर दोबारा से शांतिपूर्ण तरीके से हो गया है और परिणाम घोषित होने के बाद सफल अभ्यर्थी देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की तैयारियां कर रहे हैं। यानी नीट का जो मुद्दा समाप्त हो गया उसे कॉकरोच की मानसिकता वाले कुछ युवा अब उठा रहे हैं। सब जानते हैं कि कॉकरोच पार्टी का संस्थापक अमेरिका में रह रहा भारतीय मूल का अभिजीत दीपके है। अमेरिका में समय समय पर भारत विरोधी गतिविधियां संचालित होती है। जग जाहिर है कि अभिजीत दीपके को भी अमेरिकी भारत विरोधी संस्थाओं का सहयोग है, लेकिन इसके बाद भी भारत में कॉकरोच पार्टी ने आंदोलन शुरू कर दिया। गंभीर बात तो यह है कि इस पार्टी के प्रतिनिधि सरकार से आदेशात्मक भाषा में वार्ता कर रहे हैं। 24 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र प्रसाद से जो वार्ता हुई उसमें दो कॉकरोच सौरभ दास और आशुतोष रांका ने आदेश दिया कि सरकार सबसे पहले धर्मेन्द्र प्रधान से शिक्षा मंत्री के पद से हटाए। प्रधान को मंत्री पद से हटाने की मांग विपक्षी दल लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष के दबाव के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से नहीं हटाया। सवाल उठता है कि क्या कुछ कॉकरोचों की मांग पर प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से हटा दिया जाएगा? असल में नीट पेपर लीक तो बहाना है। असल मकसद धर्मेन्द्र प्रधान की आड़ में भारत की नई शिक्षा नीति को कमजोर करना है। प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए ही नई नीति को प्रभावी तरीके से लागू किया गया है। जो इतिहास भारत को कमजोर दिखता था, उस इतिहास में भी प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते ऐतिहासिक बदलाव किए गए। भारत के स्व: को पुनर्जागरण करने में प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका है। विदेशी मानसिकता वाले कॉकरोच नहीं चाहते कि भारत में स्व: को पुनर्जीवित किया जाए।
युवा बचे:
भारत के युवाओं को कॉकरोच मानसिकता से बचना चाहिए। भारत के युवाओं को यह समझना चाहिए कि मौजूदा समय में युद्ध की विभीषिका से दुनिया भर के देश परेशान है। इतने बुरे दौर में भी भारत मजबूती के साथ खड़ा है। ऐसे में युवाओं को ऐसा कोई कृत्य नहीं करना चाहिए जिससे देश कमजोर हो। युवाओं को लेकर पीएम मोदी कितने संवेदनशील है, इसका ताजा उदाहरण 23 जुलाई की रात 12 बजे वीडियो संदेश जारी करना पड़ा। युवाओं को प्रधानमंत्री के इस वीडियो संदेश के सार को समझना चाहिए। पीएम मोदी की नीतियों की वजह से ही भारत के युवाओं को विदेशों में रोजगार के अच्छे अवसर मिले हैं, वहीं भारत में भी स्टार्ट एप के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। आज लाखों युवक वर्क फार्म होम सिस्टम से घर बैठे प्रतिमाह लाखों रुपए का वेतन ले रहे हैं।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-07-2026)
यह दुखद है कि राजनीतिक स्वार्थों के खातिर विपक्ष भी कॉकरोच बन गया है।
भारत के युवाओं को स्वयं को कॉकरोच नहीं बनने देना चाहिए।
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जीव विज्ञान में कॉकरोच को तिलचट्टा भी कहा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार विश्व में तिलचट्टा प्रजातियों की 4600 किस्म है। इनमें से 30 प्रजातियां मानव बसेरों में पाई जाती है। कॉकरोच यानी तिलचट्टा की श्रेणी में दीमक भी शामिल है। दीमक से होने वाले नुकसान के बारे में हर इंसान अच्छी तरह जनता है। जिस घर में एक बार दीमक लग जाए उस घर को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। कई घरों में तो दीमक को मारने के लिए हर वर्ष जहरीली दवाई का छिड़काव करना पड़ता है। कॉकरोच और दीमक इतनी घातक होने के बाद भी विदेशी मानसिकता वाले कुछ भारतीय युवकां ने अपने राजनीतिक दल का नाम कॉकरोच जनता पार्टी रख लिया है। भारत के लिए यह चिंताजनक बात है कि कॉकरोच की मानसिकता वाले युवकों के बहकावे में देश के अनेक युवा भी आ गए है। चूंकि भारत में सही मायने में लोकतंत्र है, इसलिए सरकार को कॉकरोचों से भी वार्ता करनी पड़ रही है। इसे दुखद ही कहा जाएगा कि राजनीतिक स्वार्थों की खातिर विपक्ष भी कॉकरोच बन गया है। बड़ी अजीब बात है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में कॉकरोच पार्टी पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन कर रही है। वह भी तब जब लीक हुआ नीट का पेपर दोबारा से शांतिपूर्ण तरीके से हो गया है और परिणाम घोषित होने के बाद सफल अभ्यर्थी देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की तैयारियां कर रहे हैं। यानी नीट का जो मुद्दा समाप्त हो गया उसे कॉकरोच की मानसिकता वाले कुछ युवा अब उठा रहे हैं। सब जानते हैं कि कॉकरोच पार्टी का संस्थापक अमेरिका में रह रहा भारतीय मूल का अभिजीत दीपके है। अमेरिका में समय समय पर भारत विरोधी गतिविधियां संचालित होती है। जग जाहिर है कि अभिजीत दीपके को भी अमेरिकी भारत विरोधी संस्थाओं का सहयोग है, लेकिन इसके बाद भी भारत में कॉकरोच पार्टी ने आंदोलन शुरू कर दिया। गंभीर बात तो यह है कि इस पार्टी के प्रतिनिधि सरकार से आदेशात्मक भाषा में वार्ता कर रहे हैं। 24 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र प्रसाद से जो वार्ता हुई उसमें दो कॉकरोच सौरभ दास और आशुतोष रांका ने आदेश दिया कि सरकार सबसे पहले धर्मेन्द्र प्रधान से शिक्षा मंत्री के पद से हटाए। प्रधान को मंत्री पद से हटाने की मांग विपक्षी दल लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष के दबाव के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से नहीं हटाया। सवाल उठता है कि क्या कुछ कॉकरोचों की मांग पर प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से हटा दिया जाएगा? असल में नीट पेपर लीक तो बहाना है। असल मकसद धर्मेन्द्र प्रधान की आड़ में भारत की नई शिक्षा नीति को कमजोर करना है। प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए ही नई नीति को प्रभावी तरीके से लागू किया गया है। जो इतिहास भारत को कमजोर दिखता था, उस इतिहास में भी प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते ऐतिहासिक बदलाव किए गए। भारत के स्व: को पुनर्जागरण करने में प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका है। विदेशी मानसिकता वाले कॉकरोच नहीं चाहते कि भारत में स्व: को पुनर्जीवित किया जाए।
युवा बचे:
भारत के युवाओं को कॉकरोच मानसिकता से बचना चाहिए। भारत के युवाओं को यह समझना चाहिए कि मौजूदा समय में युद्ध की विभीषिका से दुनिया भर के देश परेशान है। इतने बुरे दौर में भी भारत मजबूती के साथ खड़ा है। ऐसे में युवाओं को ऐसा कोई कृत्य नहीं करना चाहिए जिससे देश कमजोर हो। युवाओं को लेकर पीएम मोदी कितने संवेदनशील है, इसका ताजा उदाहरण 23 जुलाई की रात 12 बजे वीडियो संदेश जारी करना पड़ा। युवाओं को प्रधानमंत्री के इस वीडियो संदेश के सार को समझना चाहिए। पीएम मोदी की नीतियों की वजह से ही भारत के युवाओं को विदेशों में रोजगार के अच्छे अवसर मिले हैं, वहीं भारत में भी स्टार्ट एप के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। आज लाखों युवक वर्क फार्म होम सिस्टम से घर बैठे प्रतिमाह लाखों रुपए का वेतन ले रहे हैं।
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