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Wednesday, 8 July 2026
क्या बाड़मेर रिफाइनरी से जुड़ा है, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी स्टाफ को बदलने तथा बर्खास्त करने का मामला? 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद सत्र में हंगामे के आसार। राजस्थान के मुख्यमंत्री से लगातार मुलाकातें। अलवर में कराई एनटीसीए की कार्यशाला पर 20 लाख का खर्च।
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केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव का देश की राजनीति में जबरदस्त दखल है। हाल ही में पश्चिम बंगाल में भाजपा को जो अभूतपूर्व सफलता मिली, उसके पीछे भी भूपेंद्र यादव की रणनीति रही। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने चुनाव से एक वर्ष पहले ही यादव को बंगाल का प्रभारी नियुक्त कर दिया था। गुजरात सहित कई राज्यों में भाजपा की सरकार रिपीट करवाने में यादव का विशेष योगदान रहा। भूपेंद्र यादव भाजपा के उन नेताओं में शामिल हैं जो मीडिया से दूर रहकर प्रभावी भूमिका निभाते हैं। स्वाभाविक है कि जब ऐसे ताकतवर केंद्रीय मंत्री के निजी स्टाफ के चार सदस्यों को एक ही दिन में हटाया जाएगा तो फिर देशव्यापी चर्चा तो होगी ही। 3 जुलाई को जिन चार सदस्यों को हटाया गया उनमें भूपेंद्र यादव के निजी सचिव और आईआरएस कैडर के अमर सिंह तथा अतिरिक्त निजी सचिव शैलेश सिंह को अपने मूल कैडर में भेजा गया, जबकि अतिरिक्त निजी सचिव आयुष शरण तथा सहायक निजी सचिव सिद्धार्थ यादव को तो बर्खास्त ही कर दिया गया। हालांकि निजी स्टाफ को बदलने और बर्खास्त करने की कार्यवाही भूपेंद्र यादव के निर्देश पर ही हुई, लेकिन इस तरह एक ही दिन में निजी स्टाफ के अधिकांश सदस्यों को हटाने से इन दिनों राजनीति का माहौल गर्म है। मीडिया में प्रसारित हो रही खबरों के अनुसार सिद्धार्थ यादव भले ही सहायक निजी सचिव हो, लेकिन सिद्धार्थ यादव ही भूपेंद्र यादव की ओर से प्रदेश के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के प्रभावशाली नेताओं से संवाद करते थे। यानी किसी नेता को मिलना है तो सिद्धार्थ यादव ही तारीख और समय तय करते थे। मंत्रालय में तैनात सीनियर आईएएस भी सिद्धार्थ यादव के निर्देशों का पालन करते थे। किसी भी आईएएस में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे सिद्धार्थ यादव द्वारा दिए गए निर्देशों की पुष्टि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से कर सके। चूंकि भूपेंद्र यादव का देश की राजनीति में दखल है, इसलिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी ट्वीट किया है। सिंघवी ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री के निजी स्टाफ में इतना बड़ा बदलाव अनेक आशंकाएं प्रकट करता है ।माना जा रहा है कि भूपेंद्र यादव से जुड़े इस प्रकरण को 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद सत्र में भी उठाया जाएगा। विपक्ष यह मांग करेगा कि आखिर किन कारणों से भूपेंद्र यादव के पूरे निजी स्टाफ को हटाया गया है? बाड़मेर रिफाइनरी से जुड़े होने के कयास: बताया जा रहा है कि राजस्थान के बाड़मेर स्थित रिफाइनरी के निर्माण में पर्यावरण से जुड़ी स्वीकृतियों को लेकर जो विलंब और गड़बडिय़ां हुई। उन्हें देखते हुए भूपेंद्र यादव के निजी स्टाफ को हटाया और बर्खास्त किया गया। सूत्रों की माने तो रिफाइनरी का मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मादेी के संज्ञान में भी लाया गया और तब भूपेंद्र यादव से उच्च स्तर पर जवाब तलब किया गया। जो गड़बडिय़ां उजागर हुई उनकी जिम्मेदारी भूपेंद्र यादव ने अपने निजी स्टाफ पर डाल दी। यही वजह रही कि बाद में केंद्रीय मंत्री यादव को अपने निजी स्टाफ से एक साथ चार सदस्यों का हटाना पड़ा। हालांकि अभी निजी स्टाफ को हटाने को लेकर भूपेंद्र यादव की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस प्रकरण से वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में खलबली मची हुई है। राजस्थान के सीएम से लगातार मुलाकात: निजी स्टाफ को बदलने का मामला रिफाइनरी से जुड़े होने की खबरों को इसलिए भी बल मिल रहा है कि भूपेंद्र यादव राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लगातार मिल रहे हैं। हालांकि केंद्रीय मंत्री का किसी मुख्यमंत्री से मिलना सामान्य बात है, लेकिन जब एक पखवाड़े में चार-पांच मुलाकात हो तो फिर चर्चा तो होती ही है। भूपेंद्र यादव ने गत माह 26 जून को सीएम शर्मा से जयपुर में अनेक सरकारी निवास पर मुलाकात की। 7 जुलाई को भी भूपेंद्र यादव सीएम शर्मा से मिलने के लिए दिल्ली स्थित राजस्थान के बीकानेर हाउस में जाकर मिले। आमतौर पर मुख्यमंत्री ही भूपेंद्र यादव से मिलने जाते हैं, लेकिन राजस्थान के सीएम से मिलने के लिए भूपेंद्र यादव स्वयं जा रहे हैं।
अलवर से है लोकसभा के सांसद: भूपेंद्र यादव राजस्थान के अलवर से लोकसभा के सांसद हैं। कुछ मीडिया खबरों में यादव के निजी स्टाफ को हटाने के मामले को पश्चिम बंगाल की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। भले ही निजी स्टाफ को हटाने और बर्खास्त करने का मामला प्रशासनिक बताया जा रहा हो, लेकिन किसी मंत्री के एक साथ चार निजी स्टाफ को हटाना बेहद गंभीर है। चूंकि यह मामला भूपेंद्र यादव से जुड़ा है, इसलिए आने वाले समय में देश की राजनीति में और उछलेगा। अभी राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बना हुआ है। इंडियन एक्सप्रेस न्यूज़ समूह इस मामले में जहां खोजबीन कर रहा है।
अलवर की सेमिनार पर 20 लाख खर्च: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की कार्यशैली त माह तब भी चर्चा में आई थी, जब यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र अलवर में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए की एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला करवाई। पांच सितारा होटल में हुई इस एक दिवसीय कार्यशाला पर 20 लाख रुपए खर्च किए गए। इस कार्यशाला में भूपेंद्र यादव भी उपस्थित रहे। यह कार्यशाला 28 जून 2026 को आयोजित की गई। इसमें देशभर से आए वन विभाग के 40 अधिकारियों ने भाग लिया। राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर में कहा गया कि इतनी महंगी कार्यशाला तब की गई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका ईरान के युद्ध को देखते हुए ईंधन बचत और मितव्ययिता की अपील की है। यानी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने प्रधानमंत्री के निर्देशों की भी धज्जियां उड़ाई। S.P.MITTAL BLOGGER ( 09-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
एक ईरान है, जहां अपने दिवंगत नेता खामनेई के साथ सभी ईरानी खड़े हैं।
यही ताकत सुपुर्द-ए-खाक की रस्म के दौरान भी ईरान को अमेरिका से जंग लड़ने की ताकत देती है।
एक भारत है, जहां अपने ही लोग आराध्य देव राम के मंदिर को भी नहीं बख्श रहे।
जबकि 25 करोड़ की मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांटो तो स्वयं में भारत का डीएनए बताते हैं।
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मुस्लिम देश ईरान में अपने दिवंगत नेता अयातुल्ला खामेनेई के सुपुर्द-ए-खाक की रस्म 9 जुलाई को संपन्न हो रही है। गत चार जुलाई से शुरू हुई जनाजे की रस्म में करोड़ों ईरान भाग ले रहे हैं। इसी बीच ईरान अपने दुश्मन अमेरिका के साथ जंग भी लड़ रहा है। यानी एक ओर ईरान अमेरिका की मिसाइलों का सामना कर रहा है। तो दूसरी ओर अपने दिवंगत नेता के साथ पूरी ताकत के साथ खड़ा है। ईरानियों की यह ताकत ही उन्हें अमेरिका के साथ लड़ने की शक्ति प्रदर्शन करता है। ये खामनेई वो ही नेता है, जिनकी कट्टरपंथी नीतियों के विरोध में गत वर्ष लाखों ईरानियों ने खासकर महिलाओं ने सड़कों पर प्रदर्शन किया था। लेकिन जब अमेरिका ने हमला किया तो सारे ईरानी एकजुट हो गए। आज इसी एकता के कारण ईरान की सेना खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला कर रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही ईरान को तबाह करने की धमकी दे, लेकिन ईरान ने जता दिया है कि जो नीति दिवंगत नेता खामनेई ने निर्धारित की है, उस पर ही ईरान चलेगा। यानी ईरान अमेरिका के सामने झुकेगा नहीं। एक और दुनिया के सामने ईरानियों की एकता है, तो वहीं भारत में अपने ही लोग आराध्य देव राम के मंदिर की छवि खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। जबकि अयोध्या में जन्म स्थल वाली भूमि पर राम का मंदिर बनवाने में पांच सौ वर्ष लगे और लाखों राम भक्तों ने अपना बलिदान दिया। लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या में राम मंदिर बन पाया। लेकिन अब मंदिर के चढ़ावा चोरी की आड़ में संपूर्ण सनातन संस्कृति और भगवान राम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन लोगों को भी कटघरे में खड़ा किया जा रहा है जिन्होंने मंदिर निर्माण में अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। यह सही है कि जिन लोगों ने चढ़ावा चोरी किया उन्हें सजा मिलनी चाहिए। लेकिन चढ़ावा चोरी की आड़ में सनातन संस्कृति को बदनाम नहीं किया जा सकता। गंभीर बात तो यह है कि जिन लोगों ने मंदिर निर्माण में बाधाएं खड़ी की आज वे ही स्वयं को राम भक्त बताकर चढ़ावा चोरी के मामले में बयानबाजी कर रहे हैं। उन लोगों के बलिदान पर पानी फेरने की कोशिश की जा रही है जिन्होंने अयोध्या में मंदिर का निर्माण करवाया। अयोध्या का मंदिर कोई साधारण भवन नहीं है बल्कि यह सौ करोड़ से ज्यादा हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। जो चढ़ावा चोरी का मामला उजागर हुआ है, उसमें सभी सनातनियों को एकजुटता दिखानी चाहिए। लेकिन अपने ही लोग राजनीतिक स्वार्थों की खातिर सनातन संस्कृति को बदनाम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को ईरानियों की एकता से सबक लेना चाहिए।
भारत का डीएनए:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 और 7 जुलाई को इंडोनेशिया का दौरा किया। इंडोनेशिया में मुस्लिम आबादी 25 करोड़ है। इंडोनेशिया को मुस्लिम देश ही माना जाता है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांटो ने मोदी से मुलाकात के दौरान कहा, मुझ में भी भारत का डीएनए है। असल में भारत और इंडोनेशिया के बीच सभ्यता और संस्कृति जुड़ी हुई है। एक और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति है जो स्वयं में भारत का डीएनए बताते हैं, दूसरी ओर भारत में अपने ही लोग सनातन संस्कृति पर हमला करने से बाज नहीं आते।
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Sunday, 5 July 2026
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई के जनाजे और सुपुर्दे-ए-खाक की रस्म को अभूतपूर्व बनाने की योजना।
शिया समुदाय में जनाजा अंतिम सफर नहीं, बल्कि इबादत माना जाता है।
पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खुमैनी के जनाजे में भगदड़ मचने से 10 ईरानियों की मौत हो गई थी।
जनाजे में शामिल होने ईरान पहुंची जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने तेहरान में रील बनाई।
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सब जानते हैं कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर जो हमला किया उसमें ईरान के सर्वोच्च धार्मिक लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के 10 सदस्यों की मौत हो गई। तभी से खामेनेई के शव को सुरक्षित रखा गया और अब खामनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया ईरान में बड़े पैमाने पर शुरू हो गई है। हालांकि खामनेई को 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्दे-ए-खाक किया जाएगा, लेकिन इससे पहले 4 जुलाई से ही खामेनेई को श्रद्धांजलि देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके अंतर्गत 6 जुलाई को ख़ामेनई का जनाजा तेहरान से निकलेगा और 7 जुलाई को शिया समुदाय के धार्मिक स्थल कौम पहुंचेगा। इसके बाद नजफ शहर और कर्बला होते हुए जनाजे का जुलूस मशहद पहुंचेगा। जिस भी शहर से खामेनेई का जनाजा निकल रहा है, वहां लाखों शिया मुसलमानों की भीड़ है। हर ईरान एक बार अपने नेता के दर्शन करना चाहता है, इसके लिए होड़ मची हुई है। असल में शिया समुदाय में जनाजा अंतिम सफर नहीं बल्कि इबादत है। चूंकि जनाजा भी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए बड़ी संख्या में ईरानी नागरिक भाग ले रहे हैं। मौजूदा समय में दिवंगत खामनेई के पुत्र मुस्तबा खामनेई ईरान के सुप्रीम लीडर है, इसलिए दुनिया के 100 से भी ज्यादा प्रतिनिधि जनाजे की रस्म में भाग लेने पहुंचे हैं। भले ही अभी भी अमेरिका और इजरायल की नजरे ईरान पर टेड़ी हो, लेकिन जनाजे और सुपुर्दे-ए-खाक को ईरान में अभूतपूर्व मनाने की योजना है। माना जा रहा है कि जनाजे के जुलूस और सुपुर्दे-ए-खाक की रस्म तक दो करोड़ लोग शामिल होंगे। यही वजह है कि ईरान के सुरक्षा बल भी सतर्कता बरत रहे हैं। कड़ी सुरक्षा के बाद भी ईरान के अधिकारियों को आशंका है कि जनाजे और सुपुर्दे-ए-खा के अवसरों पर अप्रिय घटना हो सकती है। इसमें अनेक लोग मारे भी जा सकते हैं। असल में 1998 में जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खुमैनी के जनाजे के समय भी भगदड़ मच गई थी। लोग खुमैनी के दर्शन के लिए इतने उतावले थे कि कफन बॉक्स ही क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस को हालातों को नियंत्रण में करने के लिए गोली चलानी पड़ी, जिसमें 10 ईरानी मारे गए। बाद में खुमैनी के शव को हेलीकॉप्टर से ले जाना पड़ा। खुमैनी के समय के हालातों को देखते हुए ही खामनेई के अंतिम संस्कार को लेकर विशेष सुरक्षा बरती जा रही है। ईरान जब युद्ध की वजह से लहूलुहान है, तब अपने नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए शिया समुदाय के दो करोड़ लोगों का जुटना यह बताता है कि दिवंगत खामनेई कितने लोकप्रिय थे। असल में खामनेई के जनाजे को अभूतपूर्व बनाने के पीछे अमेरिका और इजरायल को यह दिखाना है कि भले ही खामनेई को मार डाला हो, लेकिन ईरान में उनका विचार जिंदा है। ईरान के नेताओं ने कहा कि भी है कि खामनेई की मौत का बदला तो अमेरिका और इजरायल से लिया ही जाएगा।
महबूबा ने रील बनाई:
खामनेई के अंतिम संस्कार की रस्म में भाग लेने के लिए भारत की ओर से जो प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचा है, उसमें जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। तेहरान पहुंचने के बाद महबूबा उस स्थान पर गई जहां 28 फरवरी को खामनेई और उनके परिवार के सदस्यों की मौत हुई थी। महबूबा ने इस परिसर में घूमते हुए अपना एक वीडियो (रील) भी बनाया। महबूबा का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
61 वर्षीय अभिनेता आमिर खान भले ही तीसरी शादी करे, लेकिन कम से कम सामाजिक मर्यादाओं का तो पालन करें।
तीसरी शादी के रजिस्ट्रेशन के समय पहली और दूसरी पत्नियों तथा उनके बच्चों को उपस्थित रखने का क्या तुक है?
जो लोग आमिर को अपना हीरो मानते हैं उन्हें आमिर खान की इस बेहयाई को भी समझना चाहिए।
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मुंबइया हिन्दी फिल्मों के अभिनेता 61 वर्षीय आमिर खान ने 5 जुलाई को 47 वर्षीय गौरी स्प्रैट से तीसरी शादी कर ली। आमिर खान गौरी के साथ पिछले कुछ वर्षों से लिवइन में रह रहे थे। आमिर और गौरी ने जब भारतीय विवाह कानून के अंतर्गत अपने विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाया तब आमिर की पहली पत्नी रीना दत्त और दूसरी पत्नी किरण राव के साथ साथ उनके बच्चे भी उपस्थित रहे। तीसरी पत्नी गौरी के पहले विवाह से उत्पन्न बेटा भी उपस्थित रहा। आमिर खान तीसरी के बाद भले ही चौथी शादी भी करें, लेकिन उन्हें सामाजिक मर्यादाओं का तो ख्याल रखना ही चाहिए। तीसरी शादी के रजिस्ट्रेशन के समय उपस्थित पहली और दूसरी पत्नी और उनके बच्चों के फोटो और वीडियो न्यूज़ चैनलों और अखबारों में प्रसारित हो रहे हैं। सवाल उठता है कि तीसरी शादी के समय पहली और दूसरी पत्नी को उपस्थित रख आमिर खान भारत के सभ्य समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं? भारत सनातन संस्कृति वाला देश है, जहां भगवान राम को मर्यादा पुरुष माना जाता है जो लोग आमिर खान को अपना हीरो मानते हैं, उन्हें आमिर खान की इस बेहयाई को भी समझना चाहिए। क्या भारत के सभ्य समाज में यह संभव है कि एक व्यक्ति जब तीसरी शादी करे तो उसकी पहली व दूसरी पत्नी व बच्चे भी उपस्थित रहे? समझ में नहीं आता कि पहली पत्नी रीना दत्त और दूसरी पत्नी किरण राव आमिर की तीसरी शादी के समय क्यों उपस्थित रही? यहां अभिनेता सलमान खान का हाल ही में दिए गए बयान का उल्लेख करना जरूरी है। सलमान खान की उम्र भी 60 वर्ष हो गई है, लेकिन उन्होंने कहा कि वे विवाह इसलिए नहीं कर रहे हैं उन्हें तलाक से डर लगता है, बीवी जब तलाक लेती है तो बड़ी मात्रा में पैसा भी ले जाती है, एक और सलमान खान तलाक के डर से विवाह नहीं कर रहे तो दूसरी ओर आमिर खान तीसरे विवाह के अवसर पर पहली और दूसरी बीवी को उपस्थित रख रहे हैँ।
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कम से कम साधु संतों को तो ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरि पर हमला करने से बचना चाहिए।
अखिलेश यादव पहले मंदिर जाकर भगवान राम के प्रति आस्था तो दिखाएं।
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अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे के प्रकरण में अब श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और राष्ट्रीय संत स्वामी गोविंद गिरि पर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा है कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष होने के नाते गोविंद गिरि को चढ़ावा चोरी की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गोविंद गिरि अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते है। वही अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी मंदिर के पुजारी डॉ. विदेशाचार्य महाराज ने कहा कि कोषाध्यक्ष होने के नाते गोविंद गिरी को चढ़ावा चोरी की जांच के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय से पूछताछ हो सकती है तब जांच एजेंसियां गोविंद गिरि से पूछताछ क्यों नहीं कर रही। अब तो चढ़ावा चोरी के प्रकरण में एफआईआर भी दर्ज हो गई है। मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना और फिर उसे सुरक्षित रखने की प्रमुख जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष की ही है। डॉ. विदेशाचार्य महाराज ने कहा कि इस बात का भी पता लगाया जाना चाहिए कि स्वामी गोविंद गिरी किन के पैसों से चार्टर प्लेन से भ्रमण करते हैं। उन्होंने स्वामी गोविंद गिरि की देश भर में संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि गोविंद गिरि अयोध में राम मंदिर में तभी नजर आते हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आते हैं। क्या ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष को मंदिर के चढ़ावे की निगरानी नहीं करनी चाहिए? जांच एजेंसियों ने जिस प्रकार महामंत्री चंपत राय से घंटों पूछताछ की है, उसी प्रकार गोविंद गिरि से भी की जानी चाहिए।
हमला करने से साधु संत तो बचे:
अयोध्या में मंदिर निर्माण में स्वामी गोविंद गिरि महाराज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। गोविंद गिरि महाराज के सानिध्य में ही देश के विभिन्न शहरों में वेद विद्यालय संचालित है। इनमें पुष्कर का सावित्री विद्यापीठ भी शामिल हें। स्वामी गोविंद गिरी को सनातन धर्म का प्रतीक माना जाता है। हो सकता है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के रूप में वे प्रभावी भूमिका न निभा सके हो, लेकिन कम से कम साधु संतों को तो गोविंद गिरि महाराज पर हमला करने से बचना चाहिए। खुद गोविंद गिरि ने भी कहा है कि राम मंदिर के चढ़ावे की गणना और फिर बैंकों तक नगद राशि जमा करवाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। न ही कोषाध्यक्ष के तौर पर बैंक के किसी अकाउंट पर हस्ताक्षर हें। इतना ही नहीं उनके हस्ताक्षरों से बैंक से कोई राशि भी नहीं निकाली जाती। गोविंद गिरि ने माना कि चढ़ावा चोरी के प्रकरण से वह न केवल आहत है, बल्कि लज्जित भी है।
अखिलेश पहले मंदिर जाएं:
उत्तर प्रदेश में सपा के नेता और पूर्व सीएम अखिलेश यादव बार बार कह रहे है कि राम मंदिर के चढ़ावे के चोरी होने से हिंदुओं की आस्था को क्षति पहुंची है। हिंदुओं की आस्था की दुहाई देकर अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी आरोप लगा रहे हैं। यह सही है कि चढ़ावा चोरी की खबरों से हिंदुओं की आस्था को धक्का लगा है, लेकिन सवाल उठता है कि अखिलेश यादव को हिंदुओं की आस्था की चिंता कब से हो गई? अखिलेश याव तो उन नेताओं में शामिल हैं जो अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर अभी तक भी अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन करने नहीं गए हैं। जो व्यक्ति मंदिर जाने से डरता हो वो हिंदुओं की आस्था की चिंता कर रहा है। यदि अखिलेश यादव को हिंदुओं की आस्था की इतनी ही चिंता है तो पहले अयोध्या जाकर मंदिर में दर्शन तो करने चाहिए।
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