Friday, 30 October 2026

अजमेर के डीएवी कॉलेज के खेल मैदान का उपयोग व्यावसायिक कार्यों के लिए होने का विरोध। प्रदर्शनी और मेले के आयोजन पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री और कलेक्टर से गुहार। अदालतों ने भी खेल मैदानों के व्यावसायिक उपयोग को गलत माना है। ================= अजमेर के ब्यावर रोड स्थित डीएवी कॉलेज के खेल मैदान पर प्रस्तावित प्रदर्शनी और मेले के आयोजन का विरोध किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कुलदीप सिंह राजपुरा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री संपर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के साथ ही जिला कलेक्टरए पुलिस अधीक्षकए संभागीय आयुक्त तथा कॉलेज शिक्षा निदेशालय सहित संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर प्रस्तावित मेले एवं प्रदर्शनी के आयोजन पर रोक लगाने की मांग की है। डॉ. राजपुरा ने अपनी शिकायत में कहा है कि शिक्षण संस्थानों के खेल मैदानों और शैक्षणिक परिसरों का उपयोग मुख्य रूप से विद्यार्थियों की शैक्षणिकए खेलकूद एवं पाठ्यक्रम से संबंधित गतिविधियों के लिए होना चाहिएए न कि व्यावसायिक आयोजनों के लिए। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में शारीरिक शिक्षा संकाय एवं बीपीएड पाठ्यक्रम संचालित हैए जिसके विद्यार्थी नियमित रूप से खेल मैदान का उपयोग प्रायोगिक कक्षाओं और विभिन्न खेल गतिविधियों के लिए करते हैं। ऐसे में खेल मैदान में व्यावसायिक मेला आयोजित होने से विद्यार्थियों की नियमित कक्षाओं, प्रायोगिक प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का दिया हवाला: डॉ. कुलदीप सिंह राजपुरा ने अपनी शिकायत में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 17 अक्टूबर 2025 के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा है कि शिक्षण संस्थानों की भूमि, भवनों और खेल मैदानों के उपयोग को लेकर न्यायालय द्वारा महत्वपूर्ण टिप्पणियां की गई थीं। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि गिरजा शंकर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य प्रकरण में दिए गए निर्णय के अनुसार शिक्षण संस्थानों के परिसरों और खेल मैदानों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए थे तथा शैक्षणिक परिसरों के उपयोग को शिक्षा, खेलकूद, सांस्कृतिक एवं अन्य पाठ्यक्रम से संबंधित गतिविधियों तक सीमित रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया था। डॉ. राजपुरा ने संबंधित अधिकारियों से उक्त न्यायिक निर्णय और उसके कानूनी प्रभावों के आलोक में मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। गौशाला और कृषि संकाय के विद्यार्थियों के हितों का भी उठाया मुद्दा: शिकायत में दयानंद कॉलेज में संचालित कृषि संकाय से संबंधित विद्यार्थियों के हितों का मुद्दा भी उठाया गया है। डॉ. राजपुरा के अनुसार महाविद्यालय में कृषि संकाय के विद्यार्थियों को पशुपालन संबंधी व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक गौशाला संचालित की जाती थी। उनका कहना है कि उक्त गौशाला का उपयोग कृषि संकाय के विद्यार्थियों के प्रशिक्षण और पशुपालन संबंधी जानकारी प्रदान करने के लिए किया जाता था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दान में प्राप्त भूमि के एक हिस्से, जहां पूर्व में गौशाला संचालित होती थी उसके उपयोग में परिवर्तन कर वहां एवं उससे जुड़े मार्गों पर मेले की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। डॉ.राजपुरा ने कहा कि यदि गौशाला और पशुपालन प्रशिक्षण से संबंधित व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं तो कृषि संकाय के विद्यार्थी अपने पाठ्यक्रम की महत्वपूर्ण व्यावहारिक गतिविधियों से वंचित हो सकते हैं। खेल मैदान तक मेले की गतिविधियां होने से बीपीएड विद्यार्थियों को नुकसान: शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित मेले की गतिविधियां गौशाला क्षेत्र से होते हुए खेल मैदान तक संचालित किए जाने की योजना है। इससे महाविद्यालय में अध्ययनरत बीपीएड एवं शारीरिक शिक्षा के विद्यार्थियों की नियमित कक्षाओं और खेल गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पडऩे की आशंका जताई गई है। डॉ. राजपुरा ने कहा कि खेल मैदान विद्यार्थियों के शारीरिक विकास और व्यावहारिक प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में लंबे समय तक मैदान का अन्य गतिविधियों के लिए उपयोग किए जाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई और खेल प्रशिक्षण दोनों प्रभावित हो सकते हैं। सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी उठाए सवाल: मुख्यमंत्री एवं अन्य अधिकारियों को भेजे गए पत्र तथा संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायत में प्रस्तावित मेले की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में मेले में लगाए जाने वाले बड़े झूलों, अस्थायी विद्युत कनेक्शन, अग्निशमन व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण तथा अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच कराने की मांग की गई है। डॉ. राजपुरा ने संबंधित विभागों से निम्न व्यवस्थाओं एवं अनुमतियों की जांच कराने की मांग की है: बड़े झूलों की तकनीकी फिटनेस एवं सुरक्षा जांच, अस्थायी विद्युत कनेक्शन एवं विद्युत सुरक्षा प्रमाणपत्र, अग्निशमन विभाग से आवश्यक एनओसी, भीड़ नियंत्रण एवं पर्याप्त पुलिस व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था, एंबुलेंस एवं प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं, अन्य आवश्यक प्रशासनिक एवं सुरक्षा अनुमतियां की जांच हो। सात दिन में कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय जाने की चेतावनी: डॉ. कुलदीप सिंह राजपुरा ने प्रशासन से मामले की जांच कर प्रस्तावित मेले एवं प्रदर्शनी के आयोजन के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत पर सात दिनों के भीतर उचित कार्रवाई नहीं की जाती हैए तो वे उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने सहित अन्य कानूनी कदम उठा सकते हैं। डॉ. राजपुरा का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध व्यक्तिगत विरोध करना नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थान की भूमि, खेल मैदान, विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों और खेल गतिविधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस संबंध में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 8058217342 पर डॉ. राजपुरा से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
केदारनाथ मंदिर में पूजा पाठ करने के कारण फिल्म अभिनेत्री सारा अली के खिलाफ मुस्लिम जमात का फतवा। धर्म निरपेक्षता का पाठ पढ़ाने वाला कोई मौलाना क्या इस फतवे का विरोध कर सकता है? हिन्दू समाज के लोग बड़ी संख्याओं में दरगाहों में जाकर जियारत करते हैं। ================= फिल्म अभिनेत्री सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान ने केदारनाथ मेंदिर में जाकर विधि विधान से पूजापाठ की। सनातन संस्कृति के अनुरूप सारा अली ने मंदिर से जुड़े लोगों को चढ़ावा भी दिया। इतना ही नहीं अपने माथे पर सिंदूर का तिलक भी लगवाया। सारा अली ने पूरी श्रद्धा के साथ सनातन संस्कृति के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। हिन्दू मंदिर में पूजा पाठ करने के कारण ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी ने फतवा जारी कर दिया है। मौलाना ने अपने फतवे में कहा कि किसी मुस्लिम का दूसरे धर्म में पूजा पाठ और धार्मिक रस्मों में शामिल होना इस्लाम धर्म में जायज नहीं है। एक तरह से मौलाना रजवी ने सारा अली को इस्लाम धर्म से बाहर कर दिया है। मौलाना रजवी का फतवा अपनी जगह है, लेकिन क्या धर्म निरपेक्षता की दुहाई देने वाला कोई मौलाना इस फतवे का विरोध कर सकता है? आमतौर पर अनेक मुस्लिम धर्मगुरु भारत में धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढ़ाते हैं। ऐसे पाठ के कारण ही आज लाखों हिन्दू मुस्लिम धर्म से जुड़ी दरगाहों में जाकर जियारत करते है। यहां तक कि सूफी परंपरा के अनुरूप मजार पर चादर भी चढ़ाई जाती है। ऐसे हिन्दुओं के विरुद्ध कभी भी किसी हिन्दू धर्मगुरु ने नाराजगी नहीं जताई। उल्टे कई हिन्दू धर्मगुरु तो स्वयं भी दरगाहों में जाकर जियारत की रस्म अदा करते हैं। सवाल उठता है कि जब हिंदुओं के जियारत करने पर कोई ऐतराज नहीं है तो फिर सारा अली के मंदिर में जाकर पूजा पाठ करने पर फतवा क्यों जारी किया गया है? जब हम धर्म निरपेक्षता की दुहाई देते हैं तो फिर धार्मिक रस्मों में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। धर्म निरपेक्षता तो तभी सफल होगी, जब सभी धर्मों की स्थिति समान हो। यह कहना कि दूसरे धर्म में पूजा पाठ करना सारा अली के लिए जायज नहीं है तो फिर धर्म निरपेक्षता पर भी सवाल उठता है। सिर्फ हिन्दुओं के दरगाहों में जाकर जियारत करने से धर्म निरपेक्ष्ज्ञता को मजबूती नहीं मिलेगी। सब जानते है कि सैफ अली खान ने पहला निकाह 1991 में अभिनेत्री अमृता सिंह से किया था। तभी साराअली का जन्म हुआ। सैफ अली से निकाल करने के लिए ही अमृता सिंह को इस्लाम धर्म स्वीकार करना पड़ा, लेकिन सारा अली की आस्था मां अमृता सिंह के कारण सनातन संस्कृति में भी है। अब यदि मां के कारण सारा अली हिन्दू मंदिरों में जाकर पूजा पाठ कर रही है तो मुस्लिम जमात को ऐतराज हो रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
संजय गोयल के बड़बोलेपन के कारण भाजपा सरकार को एसीबी जांच करवाने के लिए मजबूर होना पड़ा। सवाल- भजन सरकार गोयल फैशंस के अनंता रिर्सोटों के खिलाफ कार्यवाही कब करेगी? पूर्व सीएम अशोक गहलोत को अब सीबीआई और ईडी पर भरोसा। ================= राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशाखा माथुर ने अलवर और उदयपुर के अनंता रिर्सोटों में जो 40 विला खरीदें उसकी जांच अब एसीबी से करवाई जाएगी। इस जांच के लिए मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने विशेष निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के पास ही गृह विभाग है, इसलिए एसीबी सीधे भजनलाल शर्मा के अधीन ही जाती है। विला खरीदने का मामला उजागर होने के बाद सरकार ने शिखर अग्रवाल को एपीओ कर दिया था, लेकिन इस बीच अनंता रिसोर्ट को संचालित करने वाली गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के एमडी संजय गोयल ने इस प्रकरण में मुख्यमंत्री शर्मा को भी घसीट लिया। गोयल ने कहा कि 14 फरवरी 2026 को जिस निवेश बोर्ड की बैठक में अलवर के रिसोर्ट को सरकारी रियायतें देने का फैसला हुआ, उसमें शिखर अग्रवाल के साथ साथ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ भी उपस्थित रहे। ऐसे में किसी फैसले के लिए अकेले शिखर अग्रवाल को दोषी ठहराना सही नहीं है। संजय गोयल के इस कथन से गड़बड़ी की आंच मुख्यमंत्री पर भी आ रही थी। सीएम शर्मा नहीं चाहते हैं कि किसी घोटाले की आंच उन तक आए, इसलिए स्वयं की छवि को साफ बनाए रखने के लिए मजबूरन एसीबी जांच के आदेश दिए गए। एसीबी की जांच में क्या निकलता है यह तो भजनलाल शर्मा को ही पता है, लेकिन सवाल उठता है कि सरकार गोयल फैशंस के अनंता रिर्सोटों के खिलाफ कार्यवाही कब करेगी? शिखर अग्रवाल जैसे अनेक अधिकारी है, जिन्होंने समय समय पर अनंता रिर्सोटों को लभ पहुंचाया है। शिखर अग्रवाल तो पिछले 20 वर्षों से अनंता के पुष्कर, उदयपुर, अलवर, जयपुर आदि रिर्सोटों पर मेहरबान है। उदयपुर के रिसोर्ट पर वर्ष 2006 में की गई शिखर अग्रवाल की मेहरबानी उजागर हो चुकी है। पुष्कर के अनंता रिसोर्ट के दायरे में भी वन विभाग की भूमि है। यह मामला भी दबा पड़ा है। अब जब सरकार ने शिखर अग्रवाल के खिलाफ एसीबी जांच का फैसला किया है तो अनंता रिर्सोटों के खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए। जिन अधिकारियों ने समय-समय पर अनंता रिर्सोटों को लाभ पहुंचाया उन्हें भी जांच के दायरे में शामिल किया जाए। अनंता रिर्सोटों के मालिक संजय गोयल ने अपनी ओर से नारको टेस्ट करवाने का प्रस्ताव कर दिया है। एसीबी को जांच शुरू करने से पहले संजय गोयल का नारको टेस्ट करवाना चाहिए। इससे उन अधिकारियों के नाम उजागर हो जाएंगे, जिन्होंने अनंता रिर्सोटों को लाभ पहुंचाया। यदि अनंता रिर्सोटों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होती है तो एसीबी जांच के कोई मायने नहीं है। असल में शिखर अग्रवाल ने अपनी पत्नी, सास-ससुर और बच्चों के नाम जो विला खरीदे हैं उसकी पूरी जानकारी आयकर विभाग और नौकरी के दस्तावेजों में दी है। ऐसे में आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने या भ्रष्टाचार का मामला बनता ही नहीं है। सीबीआई, ईडी पर भरोसा: शिखर अग्रवाल के विला खरीदने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने सीबीआई और ईडी से जांच करवाने की मांग की है। गहलोत का कहना है कि सीबीआई और ईडी की जांच से ही भ्रष्टाचारका पता चलेगा। यानी अब गहलोत भी मानते हैं कि सीबीआई और ईडी निष्पक्ष जांच करती है। इससे पहले गहलोत कई बार कह चुके है कि सीबीआई और ईडी मोदी सरकार के दबाव में काम करती है। गहलोत तो सुप्रीम कोर्ट को भी कटघरे में खड़ा कर चुके हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
रिलायंस समूह की कंपनी जियो की सफलता से कांग्रेस और राहुल गांधी को देश का मूड समझना चाहिए। एमएलसी की 28 सीटों में से कांग्रेस को एक भी नहीं। तो फिर कांग्रेस दिल्ली में रैली क्यों कर रही है? ================= 28 अक्टूबर को रिलायंस समूह की डिजिटल सेवा कंपनी जियो प्लेट फार्मस लिमिटेड की शेयर मार्केट में लिस्टिंग हुई। जियो कंपनी का शेयर प्राप्त करने के लिए एक करोड़ 40 लाख लोगों ने आवेदन किया। करीब 80 लाख लोग जियो कपंनी का शेयर प्राप्त करने में सफल रहे। जियो कंपनी का शेयर लेने के लिएदेश भर में होड़ मची हुई थी। रिलायंस समूह मौजूदा समय में देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 28 अक्टूबर को जब जियो की लिस्टिंग हो रही थी, तब रिलायंस समूह के प्रमुख मुकेश अंबानी के पुत्र अनंत अंबानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। अनंत अंबानी का कहना रहा कि रिलायंस समूह को समय समय पर पीएम मोदी का मार्गदर्शन मिलता है। रिलांयस समूह के प्रति देशवासियों ने जो भरोसा जताया है उससे कांग्रेस और राहुल गांधी को देश् ाका मूड भांपना चाहिए। सब जानते है कि राहुल गांधी लगातार रिलांयस समूह पर हमले करते हैं। राहुल गांधी उद्योगपति मुकेश अंबानी और पीएम मोदी के संबंधों को लेकर भी आरोप लगाते हैं। राहुल गांधी को मौका मिले तो वे रिलांयस समूह को बंद करवा दे, लेकिन जियो की सफलता में राहुल गांधी के आरोपों को नकार दिया है। रिलायंस समूह को लेकर राहुल गांधी के बयानों का कोई असर होता तो जियो को इतनी सफलता नहीं मिलती। शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि देश में अभी तक भी किसी अन्य कंपनी के प्रति इतना भरोसा नहीं जताया गया है। जबकि जियो सिर्फ डिजिटल प्लेटफार्मस का कारोबार ही कर रही है। असल में जियो के पीछे रिलायंस समूह की प्रतिष्ठा है। देशवासियों ने यह भरोसा रिलायंस समूह पर जताया है। एक भी सीट नहीं: कोई भी राजनीतिक दल चुनाव में सफलता हासिल करने के लिए काम करता है। यदि किसी दल को चुनाव में सफलता न मिले तो उसकी राजनीकि गतिविधियां कोई मायने नहीं रखती है। 28 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की एमएलसी की 28 सीटों के परिणाम सामने आए। 28 में से कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है। जबकि एमएलसी के चुनाव मतपत्र से हुए। कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि चुनाव मतपत्र से करवाए जाए। कांग्रेस को ईवीएम में गड़बड़ी की आशंका है, लेकिन एमएलसी के चुनाव के परिणाम बताते हैं कि मतपत्र से चुनाव होने के बाद भी कांग्रेस को सफलता नहीं मिलती है। कांग्रेस एक ओर वोट चोरी का आरोप लगा कर एक नवंबर को दिल्ली में महारैली कर रही है तो वहीं एमएलसी चुनाव में कांग्रेस को एक सीट भी नहीं मिली है। सवाल उठता है तो फिर कांग्रेस दिल्ली में किस उद्देश्य से रैली कर रही है? अगले वर्ष देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने है। यहां सत्तारूढ़ भाजपा के सामने प्रमुख विपक्षी दल के तौर पर समाजवादी पार्टी है। उत्तर प्रदेश में भी 11 एमएलसी सीटों परचुनाव हुए। सपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की सीट के साथ साथ पांच सीटों पर जीत दर्ज की है, लेकिन कांग्रेस एक सीट भी जीत नहीं सकी। यानी उत्तर प्रदेश में सपा ही विपक्षी दल है। कांग्रेस तो सपा के कंधे पर सवार है। दिल्ली में भले ही कुछ क्षेत्रीय दल कांग्रेस केसाथ नजर आते हो, लेकिन अपने प्रभाव वाले प्रदेश में ऐसे क्षेत्रीय दल कांग्रेस को पनपने नहीं देते। कांग्रेस ने यूपी में गत विधानसभा का चुनाव अकेले दम पर लड़ा था और तब कांग्रेस को 403 सीटों में से मात्र 2 सीट मिली। इसके बाद 2024 में कांग्रेस ने जब लोकसभा का चुनाव सपा केसाथ मिलकर लड़ा तो कांग्रेस 6 संसदीय क्षेत्रों में जीत दर्ज करने में सफल रही।
जिस सरकारी बैठक में रियायतें मिली उसमें मुख्यमत्री भजनलाल शर्मा और उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ भी उपस्थित थे- संजय गोयल एमडी गोयल फैंशनस। सीनियर आईएएस शिखर अग्रवाल के परिवार के द्वारा महाराष्ट्र में भी विला लेने की जानकारी-पूनम भंडारी। शिखर दम्पत्ति के 40 विला का मामला उजागर करने में क्या पूर्व सीएस सुधांश पंत की भूमिका है? ================= पुष्कर, अलवर, उदयपुर सहित देश के 14 प्रमुख स्थानों पर होटल और रिसोर्ट का संचालन करने वाली मैसर्स गोयल फेंशनस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के एमडी संजय गोयल का अब विवादित मामलों में बयान सामने आया है। राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशाखा माथुर को अलवर और उदयपुर में 40 विला मात्र 6 करोड़ रुपए में देने के संबंध में गोयल फेंशनस के संजय गोयल का कहना है कि अकेले शिखर अग्रवाल पर लांछन लगाना उचित नहीं है। 14 फरवरी 2026 को बोर्ड ऑफ इनवेंस्टमेंट की जिस बैठक में अलवर के अजबगढ़ वाले रिसोर्ट को सरकारी रियायतें देने का फैसला हुआ, उस बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) अखिल अरोड़ा, प्रमुख वित्त सचिव वैभव गालरिया के साथ शिखर अग्रवाल भी मौजूद रहे। ऐसी रियायतें राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन नीति के अंतर्गत दी गई। सभी निर्णय नियमों के तहत हुए। यह एक संयोग ही है जिस दिन रियायतों वाला फैसला हुआ, उसी दिन 20 विला की रजिस्ट्री भी हुई। संजय गोयल ने कहा कि उनके रिर्सोटों में अनेक लोगों ने विला खरीदे है। सभी को 16 लाख रुपए में ही विला दिए गए है। मीडिया में शिखर अग्रवाल को लेकर जो खबरें आ रही है, वह सही नहीं है। यह आरोप भी गलत है कि एक विला का सालना किराया 1 करोड़ 80 लाख रुपए दिया जा रहा है। कंपनी और शिखर अग्रवाल के परिवार के साथ ऐसा कोई अनुबंध नहीं है। शिखर और उनकी पत्नी प्रशाखा ने जो 40 विला अलवर और उदयपुर में खरीदें है। उन सबका नियमानुसार भुगतान किया गया है। जब पूरी डीजल में पारदर्शिता है तो फिर लांछन लगाना गलत है। गोयल ने कहा कि यदि सीबीआई जांच करेंगेी तो वे पअना नारको टेस्ट कराने को भी तैयार है। राजस्थान के पर्यटन विकास में उनकी कंपनी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शिखर अग्रवाल से पुराने संबंध: इस बीच खबरें आई है कि संजय गोयल और शिख्र अग्रवाल के बीच पुराने संबंध है। शिखर अग्रवाल वर्ष 2006 में जब उदयपुर के कलेक्टर थे, तब संयज गोयल के बूझड़ा वाले रिसोर्ट की 13 हैक्टेयर भूमि का कानवर्जन किया था। इतना ही नहीं रिसोर्ट में निर्माण के लिए नगर नियोजक वाली अुमति में भी छूट दी गई है। कलेक्टर ने आदेश दे दिए कि पर्यटन आयुक्त ने जो बिल्डिंग प्लान दिया है, उसी के आधार पर रिसोर्ट में निर्माण कर लिया जाए। यानी शिखर अग्रवाल, गोयल फैशंस को पिछले 20 वर्षों से छूट देते आ रहे हैं। महाराष्ट्र की भी जानकारी: पब्लिक अंगेस्ट करप्शन के प्रमुख एडवोकेट पूनम भंडारी ने कहा कि शिखर दम्पत्ति के परिवार के द्वारा महाराष्ट्र में भी विला लेने की जानकारी मिली है। हमारी संस्था वह पता लगा रही है कि गोयल फैशंस के साथ साथ किन प्रोजेक्टों में शिखर दम्पत्ति की हिस्सेदारी है। अब तक जो मामले उजागर हुए हैं, उन सभी की जांच सीबीआई से कराने के लिए पत्र लिखा गया है। चूंकि गोयल फैशंस का कारोबार देश भर में फैला हुआ है, इसलिए सीबीआई जैसी एजेंसी ही जांच कर सकती है। जिन लोगों ने गोयल फैशंस के रिर्सोटो में विला खरीदे है उनके तार विदेशों से भी जुड़े हुए हैं, इसलिए सभी मामलों की जांच ईडी के द्वारा भी की जानी चाहिए। मौजूदा समय में भी शिखर दम्पत्ति विदेश में है। पूनम भंडारी ने चेतावनी दी है कि यदि सीबीआई ने जांच अपने हाथ में नहीं ली तो वह अदालत में मामला दायर करेंगे। उल्लेखनीय है कि भंडारी के पब्लिक अंगेस्ट करप्शन की ओर से बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले को भी उजागर किया था। क्या सुधांश पंत की भूमिका है?: शिखर अग्रवाल के 40 विला खरीदने का जो मामला उजागर हुआ है, उसको लेकर राजस्थान के प्रशासनिक क्षेत्रों में जबरदस्त चर्चा है। कहा जा रहा है कि शिखर अग्रवाल के जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करवाने में राजस्थान के पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत की भूमिका है। राजस्थान में वर्ष 2023 में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद सुधांश पंत को दिल्ली से राजस्थान भेजा गया। तभी शिखर अग्रवाल भी मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव भी बने। तब अनेक मामलों में सुधांश पंत और शिखर अग्रवाल के बीच तनातनी हुई। खबरों के मुताबिक शिखर अग्रवाल के दखल की वजह से ही सुधांश पंत को मुख्य सचिव के पद से हटना पड़ा। हालांकि तब शिखर अग्रवाल को भी सीएमओ से हटाया गया। सुधांश पंत अब भले ही दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर चले गए हों, लेकिन राजस्थान के प्रशासनिक क्षेत्रों में अभी भी पंत का दखल है। यही वजह है कि शिखर अग्रवाल और गोयल फैशंस के बीच 20 वर्ष पुराने दस्तावेजों को आज प्रकाश में लाया जा रहा है। यहां तक कि शिखर दम्पत्ति के परिवार द्वारा खरीदे गए विला की रजिस्ट्रियां भी उजागर हो गई है। सरकार ने 28 अक्टूबर को शिखर अग्रवाल को एपीओ कर दिया है। कहा जा रहा है कि अब शिखर दम्पत्ति को खरीदी गई सम्पत्तियों को लेकर कारण बताओं नोटिस भी जारी किया जाएगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511