Tuesday, 28 July 2026

 दिल्ली में कॉकरोचों के प्रदर्शन में गुंडई करने वालों पर कार्यवाही होगी।

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्णय पर कॉकरोचों को ऐतराज।
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28 जुलाई को देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली में कॉकरोच  जनता पार्टी के प्रदर्शन में 20 जुलाई को जिन तत्वों ने कानून का उल्लंघन किया उनके विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए सरकार स्वतंत्र है। देश के किसी भी नागरिक को कानून तोड़ने का अधिकार नहीं है, लेकिन इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र के विरुद्ध कोई कार्यवाही न हो। सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम निर्णय से यह साफ हो गया है कि प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जिन तत्वों ने गुंडागर्दी की उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी। दिल्ली पुलिस ने कम्प्यूटर तकनीक से गुंडागर्दी करने वाले दो हजार युवाओं की पहचान की है। इनमें से कई तो आदतन अपराधी है। एक सुनियोजित षडय़ंत्र के तहत देश विरोधी तत्वों ने छात्र आंदोलन में घुसपैठ की। यानी ऐसे तत्वों ने छात्रों का ेचोला ओढ़कर माहौल को खराब किया। यदि इन तत्वों को सख्ती से नहीं रोका जाता तो संसद पर हमला हो सकता  था। गुंडों को नियंत्रित करने के दौरान ही अनेक छात्र भी पुलिस की चपेट में आ गए। पुलिस ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी छज्ञत्र के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी, लेकिन 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जिन युवाओं ने गुंडागर्दी की उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर सख्त से सख्त कार्यवाही करवाई जाएगी।

कॉकरोचों को ऐतराज:
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्णय पर कॉकरोच पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने ऐतराज जताया है, उनका कहना है कि सरकार के साथ जो समझौता हुआ, उसमें वायदा किया गया था कि आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होगा, लेकिन अब ऐसा लगता है कि सरकार अपने वादे से मुकर रही है। सौरभ दास ने कहा कि पुलिस को आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही नहीं करनी चाहिए। सौरभ दास हा यह बयान बताता है कि कॉकरोच पार्टी गुंडागर्दी के पक्ष में है। सवाल उठता है कि जब आंदोलन नीट पेपर लीक को लेकर सिर्फ छात्रों का था तो फिर दिल्ली के जंतर मंतर पर देश विरोधी नारे कैसे लगे? 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हिंसा किन लोगों ने की? छात्रों की आड़ में हुई इस हिंसा में 250 पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस वाहनों को क्षतिग्रस्त भी किया गया। स्पष्ट है कि यह काम छात्रों का नहीं गुंडों का था और अब गुंडों को कॉकरोच पार्टी बचाना चाहती है। 


S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-07-2026)

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 पंचायत और निकाय चुनाव में विलंब के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार।

एसआईआर से पहले की मतदाता सूची से होंगे चुनाव।

राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्र में पांच करोड़ 43 लाख तथा शहरी क्षेत्र में एक करोड़ 2 लाख मतदाता।

निकाय चुनाव पहले करवाने का फैसला प्रशासनिक है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि मैं ज्यादा सामाजिक व्यक्ति नहीं हूं।
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फर्स्ट इंडिया न्यूज चैनल के मैनेजिंग एडिटर और सीईओ पवन अरोड़ा (सेवानिवृत्त आईएएस) ने राजस्थान के निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह से सीधा संवाद किया है। इस संवाद में राजेश्वर सिंह ने प्रदेश में होने वाले पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनावों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। जब पवन अरोड़ा ने जानना चाहा कि इन चुनावों में विलंब के लिए कौन जिम्मेदार है तो राजेश्वर सिंह ने कहा कि चुनाव करवाने के लिए निर्वाचन आयोग ने कई पत्र राज्य सरकार को लिखे। इन पत्रों में सरकार से कहा गया कि एससी एसटी, ओबीसी और महिहलाओं के लिए आरक्षण की जानकारी उपलब्ध करवाई जाए, लेकिन सरकार ने समय रहते आरक्षण नहीं किया। संवैधानिक व्यवस्थाओं के अंतर्गत संबंधित वर्गों के लिए आरक्षण के बगैर निर्वाचन आयोग चुनाव की घोषणा नहीं कर सकता। संविधान में आरक्षण निर्धारित करने का अधिकार सरकार के पास ही है, इसलिए पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में विलंब के लिए निर्वाचन आयोग जिम्मेदार नहीं है। वन स्टेट, वन इलेक्शन के सवाल पर राजेश्वर सिंह ने कहा कि यह कितनी बड़ी उपलब्धि है इसका पता आने वाले समय में लगेगा। पवन अरोड़ा ने जानना चाहा कि पंचायती राज से पहले शहरी निकायों के चुनाव कराने का फैसला क्या राज्य की भाजपा सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। इस पर राजेश्वर सिंह ने कहा कि यह एक प्रशासनिक फैसला है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या करीब पांच करोड़ 43 लाख है, इसलिए बाद में चुनाव करवाने का फैसला किया गया। जबकि शहरी क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 2 लाख है। शहरी क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या कम होने े के कारण पहले चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है। निर्वाचन आयोग यह नहीं देखता है कि चुनाव की प्रक्रिया से किस राजनीतिक दल को फायदा हो रहा है। आयोग का उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव करवाना है। मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शिता के साथ होंगे। उन्होंने बताया कि शहरी निकायों के चुनाव 2 तथा पंचायत राज के चुनाव चार चरणों में होंगे। मतदाताओं की संख्या को देखते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग और मध्यप्रदेश से ईवीएम मंगाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे। राजेश्वर सिंह ने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट ने चुनाव करवाने के लिए इसी वर्ष जो 15 नवंबर तक की डेडलाइन दी है, उसके अनुरूप प्रदेश में शहरी निकाय और पंचायती राज के चुनाव संपन्न हो जाएंगे। सरकार ने हाईकोर्ट में लिखित में दिया है कि 5 अगस्त तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट मिल जाएगी और 14 अगस्त तक एससी, एसटी, ओबीसी और महिला वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण कर दिया जाएगा। चुनाव आयोग ने पहले ही कहा है कि आरक्षण की रिपोर्ट मिलते ही तीन माह के अंदर अंदर चुनाव करवा लिए जाएंगे।

एसआईआर वाली सूची से चुनाव नहीं:
चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि मतदाता पुनरीक्षण वाली सूची से पंचायती राज और निकायों के चुनाव नहीं होंगे। सरकार का कहना है कि अभी एसआईआर के अंतिम आंकड़े नहीं आए हैं। इसलिए 1 जनवरी 2025 के डेटा के आधार पर ही चुनाव करवाए जाएंगे। लेकिन 18 वर्ष की उम्र वाले मतदाताओं के नाम जोड़ने का काम अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि जहां तक ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों के वार्डों के परिसीमन का सवाल है तो यह कार्य पहले ही हो चुका है। प्रदेश में 14 हजार 403 ग्राम पंचायत हैं।

ज्यादा सामाजिक नहीं:
राजेश्वर सिंह ने स्वीकार किया कि वे ज्यादा सामाजिक व्यक्ति नहीं है। यही वजह है कि कुछ लोग उनकी कार्यशैली से खुश नहीं है। लेकिन वे सरल स्वभाव वाले व्यक्ति हैं। आईएएस की सेवा में रहते हुए भी उन्होंने अपने काम को प्राथमिकता दी। सरकारी नौकरी की व्यस्तता के बावजूद उनका साहित्य से लगाव रहा। यही वजह है कि उन्होंने अनेक कविताएं लिखी। साहित्य के प्रति रुचि उनकी पारिवारिक है। उनके पिता और दादा भी साहित्यकार रहे। चूंकि उनकी पढ़ाई इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में हुई, इसलिए उन्हें दार्शनिक माहौल भी मिला। 


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आखिर नैतिकता दिखाते हुए केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने एक करोड़ की सब्सिडी लौटाई।

भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व संतुष्ट।
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आखिर अजमेर के भाजपा सांसद और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने नैतिकता दिखाते हुए एक करोड़ की सरकारी सब्सिडी लौटा दी। मालूम हो कि चौधरी ने कुचामन जिले के पीह गांव में स्थित अपने कृषि फार्म पर व्यावसायिक खेती के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से एक करोड़ रुपए की सब्सिडी प्राप्त की थी। कृषि मंत्री होने के नाते कृषि मंत्रालय के अधीन आने वाले राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से सब्सिडी लेने पर जोरदार हंगामा हुआ। कांग्रेस ने मंत्री से इस्तीफे तक की मांग की, लेकिन तब चौधरी ने दृढ़ता के साथ कहा कि उन्होंने नियमों के अनुरूप आवेदन किया और सरकार से सब्सिडी ली। सरकार से सहायता वाला बोर्ड भी पीह के कृषि फार्म पर लगाया गया है। लेकिन विवाद के बाद यह मामला भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचा। चौधरी ने राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष भी अपने पक्ष को दृढ़ता के साथ रखा। जानकार सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय नेतृत्व ने माना कि चौधरी ने नियमों के अनुरूप सब्सिडी हासिल की है, लेकिन नैतिकता के नाते चौधरी को सब्सिडी नहीं लेनी चाहिए। थी। राष्ट्रीय नेतृत्व की सलाह पर ही चौधरी नैतिकता दिखाई और एक करोड़ रुपए की राशि वापस बैंक में जमा करवा दी। चौधरी ने बैंक अधिकारियों से आग्रह किया कि सब्सिडी की राशि को वापस राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के खाते में जमा करवा दिया जाए। चौधरी के सब्सिडी वापस करने से अब सब्सिडी वाला मामला समाप्त हो गया है। इसके साथ ही चौधरी ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि जब मीडिया में सब्सिडी वाला मामला उजागर हुआ तो चौधरी के मंत्री पद को भी खतरा उत्पन्न हो गया था। 

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Sunday, 26 July 2026

 अजमेर में साम्प्रदायिक सौहार्द की भावना से निकलेगा ईद मिलादुन्नबी का जुलूस।

25 अगस्त को निकलने वाले जुलूस में सभी धर्मों के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
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प्रतिवर्ष निकलने वाले ईद मिलादुन्नबी का जुलूस इस बार 25 अगस्त को साम्प्रदायिक सौहार्द की भावना से निकाला जाएगा। जुलूस की तैयारियों को सूफी इंटरनेशनल संस्था की ओर से 26 जुलाई को ख्वाजा साहब की दरगाह स्थित अकबरी मस्जिद में एक बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्ष खादिमों की संस्था अंजुमन मोइनिया फखरिया चिश्तिया के सचिव सैय्यद कलीमुद्दीन चिश्ती ने की।  बैठक में जुलूस के सफल संचालन, मार्ग व्यवस्था, अनुशासन, स्वच्छता, सुरक्षा तथा सामाजिक समरसता जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सूफी इंटरनेशनल के सचिव नवाब हिदायतउल्ला ने बताया कि जुलूस में शामिल होने वाले सभी लोग प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करेंगे। जुलूस के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा, यातायात व्यवस्था में सहयोग किया जाएगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी नागरिक को असुविधा का सामना न करना पड़े। साथ ही सभी से अपील की गई कि जुलूस की गरिमा बनाए रखें और ऐसा कोई कार्य न करें जिससे समाज में गलत संदेश जाए। बैठक में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि अजमेर हमेशा से गंगा-जमुनी तहज़ीब और कौमी एकता की मिसाल रहा है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जुलूस में विभिन्न धर्मों एवं समाजों के प्रतिनिधियों को भी सम्मान आमंत्रित किया जाएगा, ताकि पैगंबर-ए-इस्लाम के अमन और इंसानियत के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जा सके। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि इस वर्ष का 1501 वां जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी पूरी शान, अकीदत और  शहरवासियों के लिए भाईचारे सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश लेकर निकलेगा। अंत में सभी समाजों, संगठनों और शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में जुलूस में शामिल होकर पैगंबर ए इस्लाम की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने तथा प्रेम, शांति और इंसानियत के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया गया। बैठक में सूफी इंटरनेशनल के अध्यक्ष हाजी सरवर सिद्दीकी,मौलाना अय्यूब कासमी, दरगाह कमेटी के सहायक नाजिम शादाब अहमद, काजी मुनव्वर अली, अनजुमन सदस्य गफ्फार काजमी,एहतेशाम चिश्ती, अब्दुल नईम खान, सैय्यद फ़ज़ले अमीन चिश्ती, हाजी इफ्तेखार चिश्ती,पूर्व पार्षद मुख्तार अहमद नवाब, मोहम्मद शाकिर खान, अहसान सुलतानी, सैय्यद अनवर चिश्ती,सैय्यद मसूद मोईनी, अहसान मिर्ज़ा, हुमायूं खान, सलीम कुरैशी, हाजी रईस कुरैशी, आरिफ हुसैन, बशीर खान कायम खानी , सैय्यद सलीम बना,सैय्यद गुलज़ार चिश्ती, अब्दुल जब्बार अब्बासी, अकबर घोसी,शेखजादा ज़ीशान चिश्ती,उमरदीन अब्बासी, अब्दुल शाहिद, अब्दुल हमीद, एस एम अकबर,बदरुद्दीन कुरैशी , हाफिज खान,अब्दुल सलाम,सुब्हानी, मोहम्मद इस्लाम, अशरफ अली, अब्दुल अजीज मुल्तानी,आइन हुसैन घोसी, साहिल घोसी, इकबाल कुरैशी, अस्नान कुरैशी,गयासुद्दीन चिश्ती, अल्ताफ ऊंटडा, जाहिद खान ,उस्मान घड़ियाली   बिलाल, हाफिज रमजान शेरानी, अल्ताफ हुसैन अंसारी, आदि मौजूद रहे  जुलूस के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9413383786 पर नवाब हिदायतउल्ला से ली जा सकती है। 


S.P.MITTAL BLOGGER ( 27-07-2026)

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 विवाह जीवन में अनुशासन लाता है-मोहन भागवत, संघ प्रमुख।

पुत्री हो तो परिवार में अनुशासन और बढ़ जाता है।

सनातन संस्कृति में तो कन्यादान करने वाले माता-पिता को मोक्ष मिलने की मान्यता है।
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26 जुलाई को हैदराबाद में आयोजित विश्व मंगल्य सभा के समकालीन मातृत्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विवाह जीवन में अनुशासन लाता है और धर्म व जिम्मेदारी का भाव पैदा करता है। इसके विपरीत लिव इन रिश्तों में लोग जिम्मेदारी से बचकर केवल सुख चाहते हैं। लिव इन रिश्तों के दुष्परिणाम आज पूरी दुनिया देख रही है। पश्चिमी संस्कृति की अंधी नकल आधुनिकता नहीं बल्कि समाज का पतन है। संघ प्रमुख ने भारत की सनातन संस्कृति में विवाह पद्धति के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। इसमें कोई दो राय नहीं कि आज पश्चिम संस्कृति के पक्षधर लोग भी भारत की विवाह पद्धति की सराहना करने लगे है। यही वजह है कि रोजगार के लिए विदेश में गई भारतीय युवतियों को पश्चिमी देशों के युवा सनातन संस्कृति के अनुरूप विवाह कर रहे है। यानी भारत की विवाह पद्धति को दुनिया में स्वीकारा जा रहा है। सनातन संस्कृति के अनुरूप संपन्न विवाह के बाद जिस परिवार में पुत्री का जन्म होता है, वह परिवार और अनुशासित हो जाता है। पुत्री को देखते हुए माता पिता को भी अपनी जिम्मेदारी का ज्यादा अहसास होता है। हालांकि पुत्री के जन्म का फैसला सनातन संस्कृति में ईश्वर का माना जाता है। लेकिन हम यदि सिर्फ पुत्रों वाले परिवारों की तुलना पुत्री वाले परिवार से करे तो दोनों में फर्क नजर आएगा। यह भी देखा गया है कि पुत्री वाला परिवार ज्यादा सफलता और सरलता के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है। सनातन संस्कृति में तो मान्यता है कि कन्यादान करने वाले माता पिता को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हमारी संस्कृति में मोक्ष का बहुत महत्व है। कई बार मोक्ष प्राप्ति के लिए मनुष्य को अनेक जतन करने होते है, जबकि कन्यादान करने वाले माता पिता को सरलता के साथ मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। वो परिवार वाकई भाग्यशाली है जिनके यहां पुत्री का जन्म हुआ है ।


S.P.MITTAL BLOGGER ( 27-07-2026)

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