Friday, 5 August 2022

मुझे हिटलर जैसा ढांचा दे दो, फिर बताता हूं चुनाव कैसे जीतते हैं।मोदी सरकार जितना हमला करेगी, उतना मुझे फायदा होगा-राहुल गांधी।राहुल गांधी की हौसला अफजाई के लिए राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत भी दिल्ली पहुंचे।जनता ने ही कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है-भाजपा।

देश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर 5 अगस्त को कांग्रेस ने देश भर में विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन से पहले कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। एक पत्रकार ने राहुल गांधी से पूछा कि जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार लगातार चुनाव जीत रही है, तब देश में लोकतंत्र को खतरा क्यों बताया जा रहा है? इस पर राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव तो हिटलर भी जीतता था। हिटलर ने जर्मनी की सभी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया था। यहां तक कि पैरा मिलिट्री पर भी हिटलर का नियंत्रण था। मुझे हिटलर जैसा ढांचा दे तो फिर बताता हंू कि चुनाव कैसे जीतते हैं। राहुल ने कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर आरएसएस और भाजपा के लोग काबिज हैं। इसलिए देश में लोकतंत्र खत्म हो गया है। मैं और कांग्रेस पार्टी देश में लोकतंत्र बचाने का काम करते रहेंगे। नेशनल हेराल्ड की दो हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिकाना हक के हस्तांतरण पर ईडी की पूछताछ के संदर्भ में राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार मुझ पर जितना हमला करेगी, उतना मुझे फायदा होगा। मोदी सरकार को लगता है कि ईडी की पूछताछ से गांधी परिवार उर जाएगा। लेकिन मैं स्पष्ट कर देना चाहता हंू कि गांधी परिवार किसी से भी डरने वाला नहीं है। देश की रक्षा के लिए गांधी परिवार के सदस्यों ने बलिदान दिया है। आज बेरोजगारी और महंगाई से पूरा देश त्रस्त है। लेकिन दो-तीन उद्योगपति ही मालामाल हो रहे हैं। नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की ओर इशारा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि चार व्यक्तियों का ही शासन है। राहुल ने कहा कि मेरी समस्या यह है कि मैं सच बोलता हूं, इसलिए मोदी सरकार मुझ पर हमला करती है।

गहलोत भी दिल्ली पहुंचे:
मोदी सरकार के खिलाफ होने वाले कांग्रेस के प्रदर्शन में राहुल गांधी की हौसला अफजाई के लिए पांच अगस्त को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी दिल्ली पहुंचे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी गहलोत राहुल के साथ मौजूद रहे। सोनिया गांधी और राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ के दिनों तक सीएम अशोक गहलोत दिल्ली में रहे थे। सीएम गहलोत जब दिल्ली में रहते हैं तो राजस्थान के कांग्रेसी कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंच जाते हैं।

जनता ने ही साथ छोड़ दिया:
राहुल गांधी के बाद भाजपा की ओर से भी पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी देश में लोकतंत्र को खतरा बता रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि जनता ने ही कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है। पश्चिम बंगाल और पंजाब में कांग्रेस को भाजपा ने नहीं बल्कि टीएमसी और आम आदमी पार्टी ने हराया है। प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी क्या बोलते हैं यह उन्हें भी पता नहीं होता। राहुल गांधी में इतनी हिम्मत नहीं कि वह अकेले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सहे। पांच अगस्त को भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी के साथ अशोक गहलोत और जयराम नरेश जैसे पुराने कांग्रेसी बैठे थे। राहुल गांधी आज महंगाई की बात कर रहे हैं, जबकि कोरोना काल के बाद दुनिया भर में मंदी का दौर है। लेकिन इसके बावजूद भी भारत में 80 करोड़ जरूरतमंद व्यक्तियों को प्रतिमाह पांच किलो अनाज निशुल्क दिया जा रहा है। इतना ही नहीं कोरोना की 200 करोड़ डोज फ्री लगाई गई है। राहुल गांधी को देश की उपलब्धियां नहीं दिखती हैं। महंगाई और बेरोजगारी तो बहाना है। कांग्रेस धरना प्रदर्शन कर ईडी पर दबाव डालना चाहती है। गांधी परिवार को अपने घोटालों के बारे में देश को बताना चाहिए। 

S.P.MITTAL BLOGGER (05-08-2022)
Website- www.spmittal.in
Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog
Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11
Blog- spmittal.blogspot.com
To Add in WhatsApp Group- 9929383123
To Contact- 9829071511

Thursday, 4 August 2022

नेशनल हेराल्ड दफ्तर को सील करने का गुस्सा राहुल गांधी ने संघ को देशद्रोही संगठन बता कर निकाला।आयकर रिटर्न और चुनाव के शपथ पत्र में नेशनल हेराल्ड की संपत्ति का मालिक होने का उल्लेख राहुल गांधी ने क्यों नहीं किया?हम पीएम मोदी से नहीं डरते-राहुल गांधी।

दिल्ली में नेशनल हेराल्ड के दफ्तर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा सील किए जाने को लेकर कांग्रेस बेहद गुस्से में है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को देशद्रोही संगठन तक कह दिया। दफ्तर नेशनल हेराल्ड का सील हुआ है, लेकिन कांग्रेस को लगता है कि देश में लोकतंत्र को खत्म किया जा रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तो देश में अद्योषित आपातकाल होने की बात कर रहे हैं। सवाल उठता है कि हेराल्ड दफ्तर को सील किए जाने पर कांग्रेस इतना आग बबूला क्यों हैं? असल में नेशनल हेराल्ड की 2 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक राहुल गांधी और उनकी माताजी सोनिया गांधी हैं। जब संपत्ति का हस्तांतरण हुआ, तब अनेक वित्तीय अनियमितताएं हुई। तब देश में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार चल रही थी। तब कांग्रेस के नेताओं खासकर गांधी परिवार ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन पोल खुल जाएगी। यही वजह रही कि राहुल गांधी ने अपने आयकर रिटर्न और लोकसभा चुनावों के शपथ पत्रों में भी नेशनल हेराल्ड का मालिक होने का उल्लेख नहीं किया। असल में गांधी परिवार यह बात छुपाए रखना चाहता था कि यह दो हजार करोड़ रुपए की संपत्ति का मालिक हो गया है। पिछले दिनों ईडी की पूछताछ में सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मालिकाना हक के हस्तांतरण की सारी जिम्मेदारी कांग्रेस के दिवंगत नेता मोतीलाल बोहरा पर डाल दी। पूछताछ को आगे बढ़ाने के लिए ईडी को नेशनल हेराल्ड अखबार के परिसर में चल रहे यंग इंडियन दफ्तर की तलाशी लेनी थी। इसके लिए यंग इंडियन के निदेशक और राज्यसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े को नोटिस भी जारी किया गया। लेकिन खडग़े नहीं आए। इसलिए मजबूरी में ईडी को दफ्तर सील करना पड़ा। राहुल गांधी संघ को देशद्रोही संगठन बताने के बजाए यह बताएं कि दफ्तर की तलाशी के लिए मल्लिकार्जुन खडग़े को क्यों नहीं भेजा? यदि खडग़े को भेज कर दफ्तर की तलाशी करवा दी जाती तो ईडी को सील करने की जरुरत ही नहीं होती। आखिर गांधी परिवार नेशनल हेराल्ड दफ्तर की तलाशी से क्यों घबरा रहा है? खडग़े लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता थे, लेकिन गत लोकसभा का चुनाव खडग़े हार गए। लेकिन गांधी परिवार ने खडग़े को राज्यसभा का सदस्य बनवा कर राज्यसभा में कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुनवा दिया ताकि दिल्ली में खडग़े का केबिनेट मंत्री वाला दर्जा बना रहे। ऐसा इसीलिए किया गया कि खडगे भी यंग इंडियन में निदेशक हैं। यदि मल्लिकार्जुन खडग़े नाराज होते हैं तो गांधी परिवार की पोल खुल सकती है। खडग़े को राज्यसभा में कांग्रेस संसदीय दल का नेता बनाने के लिए गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा का सदस्य तक नहीं बनवाया गया। खडग़े से पहले आजाद ही राज्यसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता थे। गांधी परिवार से खडग़े जैसा लाभ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी उठा रहे हैं। परसराम मदेरणा, सीपी जोशी और 2018 में सचिन पायलट का हक मार कर गांधी परिवार ने गहलोत को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनवाया। यही वजह है कि नेशनल हेराल्ड के दफ्तर को सील करने पर गहलोत को देश में अद्योषित आपातकाल नजर आता है। जबकि 1975 में पूरा देश उस आपातकाल को देख चुका है जो तत्कालीन कांग्रेस सरकार की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने लगाया था, तब विपक्षी राजनीतिक दलों से लेकर जन आंदोलन से जुड़े नेताओं तक को जेल में डाल दिया गया। इतना ही नहीं मीडिया पर सेंसरशिप लागू कर दी गई। जो भी व्यक्ति कांग्रेस और सरकार की आलोचना करता, उसे भी जेल में डाला जाता रहा। गहलोत बताएं कि कांग्रेस के किस नेता को बेवजह जेल में डाला गया है तथा किस मीडिया पर सेंसरशिप लगाई गई है। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के नेता खुले आम केंद्र की मोदी सरकार और सत्तारूढ़ भाजपा की आलोचना कर रहे हैं। यहां तक कि राष्ट्रवादी संगठन संघ को देशद्रोही तक कहा जा रहा है। देश में लगातार बढ़ रही आतंकी और देशद्रोही वारदातों पर कांग्रेस चिंतित नहीं है, लेकिन गांधी परिवार की पोल खुलने पर हंगामा किया जा रहा है। यदि ईडी के अधिकारी कुछ गलत कर रहे हैं तो गांधी परिवार को न्यायालय की शरण लेनी चाहिए।
 
हम डरते नहीं है:
नेशनल हेराल्ड की दो हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के हस्तांतरण पर तो राहुल गांधी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन हेराल्ड के दफ्तर को सील किए जाने पर राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह कुछ भी कर लें, लेकिन हम डरने वाले नहीं है। मैं लोकतंत्र और देश को बचाने का काम करता रहंूगा। राहुल ने कहा कि हम भागने वाले नहीं है। मोदी सरकार की ज्यादतियों का डटकर मुकाबला करते रहेंगे। संसद में सांसदों के धरने में भी राहुल गांधी शामिल हुए और उन्होंने संकेत दिए कि अब मोदी सरकार के विरुद्ध देशभर में आंदोलन चलाया जाएगा। कांग्रेस ने पहले ही 5 अगस्त को आंदोलन करने की घोषणा कर रखी है। 

S.P.MITTAL BLOGGER (04-08-2022)
Website- www.spmittal.in
Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog
Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11
Blog- spmittal.blogspot.com
To Add in WhatsApp Group- 9929383123
To Contact- 9829071511

लम्पी के मामले में जिस बात का डर था वही हुआ। गौशालाओं में फैलने लगा है वायरस।राजस्थान में कब तक सोती रहेगी गहलोत सरकार। अखबारों में विज्ञापन देने से कुछ नहीं होगा। पशु अखबार नहीं पढ़ते।

राजस्थान में पशुओं खास कर गायों में फैल रहे लम्पी स्किन डिजीज के मामले में जिस बात का डर था, वही हुआ। डिजीज की शुरुआत में ही सरकार से बार बार आग्रह किया कि प्रदेश की गौशालाओं को इस संक्रमित रोग से बचाया जाए, लेकिन समय रहते सरकार की ओर से कोई ठोस उपाय नहीं उठाए गए। जयपुर की सबसे बड़ी हिंगोनिया गौशाला सहित प्रदेश की अधिकांश गौशालाओं से गायों के संक्रमित होने की सूचनाएं आने लगी है। जिस देश में गाय को माता का दर्जा दिया गया है उस देश के राजस्थान में लम्पी स्किन डिजीज से हजारों गाय बेदम हो गई हैं। गायों के शरीर पर घूमड़ हो गए है तथा उन्होंने चारा पानी छोड़ दिया है। संक्रमित गायों पर जो मोटी मक्खियां बैठ रही हैं, उसेस यह रोग अन्य स्वास्थ्य गायों में तेजी से फैल रहा है। हालांकि कुछ गौशालाओं के प्रबंधकों ने संक्रमित गायों को अलग बाड़ों में रखने की व्यवस्था की है, लेकिन संक्रमित गायों पर बैठने वाली मक्खियों को किसी बाड़े में बंद नहीं किया जा सकता। वैसे भी बरसात के मौसम में गायों को गौशालाओं में सुरक्षित रखने की समस्या रहती है। ऐसे में संक्रमित गायों को अलग रखना बहुत मुश्किल है। जानकार पहले ही आशंका जता रहे थे कि यदि गौशालाओं में लम्पी की एंट्री होती है तो हालात संभाले नहीं जा सकेंगे। राज्य सरकार ने चेतावनी के बाद भी कार्यवाही नहीं की। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लगता है कि लम्पी के बारे में अखबारों में विज्ञापन देकर रोग को नियंत्रित कर लिया जाएगा। सीएम को यह समझना होगा कि गाय और अन्य पशु अखबार नहीं पढ़ते हैं। लम्पी से  बचने के लिए पशुओं को टीका लगाया जाना चाहिए। सरकार ने 106 लाख रुपए की जो राशि कागजों में स्वीकृत की है, उससे बड़ी मात्रा में टीेके खरीदे जाएं। सरकार जब तक युद्ध स्तर पर पशुओं के टीके नहीं लगवाएगी, तब तक लम्बी पर नियंत्रण नहीं पाया जा सकता है। यह सही है कि बेजुबान पशु अपनी जान बचाने के लिए कोई आंदोलन भी नहीं कर सकते हैं। सीएम गहलोत को स्वयं ही टीके लगवाने की पहल करनी होगी। गौशालाओं में केमिकल का छिड़काव करने की भी सख्त जरुरत है। प्रदेश में पशु चिकित्सक नहीं के बराबर है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के स्वयं सेवी संगठनों का सहयोग लिया जाना चाहिए। सीएम गहलोत को यह भी समझना चाहिए कि राज्य की आय का एक मुख्य स्त्रोत पशुधन भी है। पशुओं को नुकसान होता है तो प्रदेश की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ेगी। 

S.P.MITTAL BLOGGER (04-08-2022)
Website- www.spmittal.in
To Add in WhatsApp Group- 9929383123
To Contact- 9829071511

आखिर अरविंद केजरीवाल दिल्ली के स्कूली बच्चों से दुनिया का सबसे बड़ा तिरंगा नहीं बनवा सके।विज्ञापनों पर खर्च हुए करोड़ों रुपए की भरपाई अब कौन करेगा?

पिछले 15 दिनों से न्यूज चैनलों और अखबारों में एक विज्ञापन प्रकाशित हो रहा था, जिसमें कहा गया कि देश की आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर 4 अगस्त को दिल्ली की स्कूलों के बच्चे सबसे बड़ा तिरंगा बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाएंगे। विज्ञापनों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नायक के तौर पर दिखाया गया। लेकिन 4 अगस्त को दिल्ली सरकार का यह कार्यक्रम नहीं हो सका। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 4 अगस्त को सुबह ही सोशल मीडिया पर स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली के बुराड़ी मैदान में बरसात का पानी भरने के कारण यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। सिसोदिया के इस ट्वीट के बाद भी न्यूज चैनलों पर तिरंगे का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाला विज्ञापन प्रसारित होता रहा। इतना ही नहीं चार अगस्त को देश के प्रमुख अखबारों में इस कार्यक्रमों को लेकर पूरे पृष्ठ के विज्ञापन भी प्रकाशित हुए। सवाल उठता है कि अब जब यह कार्यक्रम नहीं हो सका तो फिर विज्ञापनों पर खर्च हुई करोड़ रुपए की राशि की भरपाई कौन करेगा? आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर देश भक्ति के कार्यक्रम हो, इस पर कोई एतराज नहीं है, लेकिन जब ऐसे कार्यक्रमों में राजनीति घुसेड़ दी जाए तब आपत्ति होना स्वाभाविक है। अच्छा होता कि सबसे बड़े तिरंगे का कार्यक्रम संपन्न हो जाने के बाद प्रचार प्रसार किया जाता। लेकिन राजनीतिक नजरिए से पिछले पंद्रह दिनों से न्यूज चैनलों और अखबारों में विज्ञापन दिए गए। सबसे बड़ा तिरंगा बनाने वाले कार्यक्रम में सिर्फ दिल्ली के स्कूली बच्चे ही शामिल रहे, लेकिन इस कार्यक्रम से संबंधित विज्ञापन को देश भर के दर्शकों ने न्यूज चैनलों पर देखा। शायद ही कोई न्यूज चैनल होगा, जिस पर अरविंद केजरीवाल का यह विज्ञापन प्रसारित न हुआ हो। चूंकि चैनल मालिकों को विज्ञापन की पूरी राशि वसूलनी थी, इसलिए कार्यक्रम स्थगित हो जाने के बाद भी विज्ञापनों का प्रसारण होता रहा। स्वाभाविक है कि दिल्ली सरकार ऐसे विज्ञापनों का भुगतान भी करे। सबसे बड़ा तिरंगा बनाने का कार्यक्रम कब होगा, इसकी अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है। 

S.P.MITTAL BLOGGER (04-08-2022)
Website- www.spmittal.in
Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog
Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11
Blog- spmittal.blogspot.com
To Add in WhatsApp Group- 9929383123
To Contact- 9829071511

Wednesday, 3 August 2022

सरकार के पास पशु चिकित्सक ही नहीं हैं तो राजस्थान में लम्पी स्किन डिजीज से गायों और अन्य जानवरों को कैसे बचाया जाएगा?गायों में तेजी से फैल रहा है वायरस। गौशालाएं बन सकती हैं वायरस विस्फोट का केंद्र।राजस्थान सरकार स्टाम्प और शराब पर वसूल रही है गौ संरक्षण टैक्स।

राजस्थान में गाय, बकरी भेड़ आदि जानवरों में लम्पी स्किन डिजीज का वायरस तेजी से फैल रहा है। हजारों गायों ने अब तक दम तोड़ दिया है तथा लाखों पशु मौत के कगार पर खड़े हैं। बेजुबान पशुओं की इस गंभीर समस्या और सरकार के सुस्त रवैये पर 2 अगस्त को जी न्यूज के राजस्थान चैनल पर लाइव डिबेट हुई। इस डिबेट में राजस्थान गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष मेवाराम जैन ने राज्य सरकार का पक्ष रखा, जबकि बीकानेर के लूणकरण से भाजपा विधायक सुमित गोदारा ने सरकार की खामियां व दम तोड़ते पशुओं के बारे में जानकारी दी। वहीं एक पत्रकार के नाते मैंने पशु चिकित्सकों की कमी और पशुपालकों की पीड़ा को रखा। असल में सरकार दावा तो कर रही है कि लम्पी स्किन डिजीज से पशुओं को बचाने के उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। राज्य में पशु चिकित्सकों के 2400 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 70 प्रतिशत पद खाली है। जबकि स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में पशुधन की स्थिति को देखते हुए 11 हजार पशु चिकित्सक होने चाहिए। सरकार ने 2019 में 900 पशु चिकित्सकों की भर्ती निकली थी। परीक्षा का परिणाम भी घोषित हो गया, लेकिन कानूनी झमेलों के कारण नियुक्तियां अटकी पड़ी है। इस मामले में 8 अगस्त को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। राज्य सरकार यदि गंभीरता दिखाए तो 900 पशु चिकित्सकों की नियुक्ति का रास्ता निकल सकता है। राज्य सरकार भले ही स्वीकार न करे, लेकिन पशुओं खास कर गायों पर आफत आई हुई है। पाकिस्तान की सीमा से लगे बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर आदि जिलों में रोजाना सैकड़ों पशु मर रहे हैं। यही हाल इन जिलों से सटे जिलों का भी है। चूंकि गुजरात की सीमा भी पाकिस्तान से लगी हुई है, इसलिए राज्य सरकार ने सीमावर्ती 11 जिलों में लंपी स्किन डिजीज से पशुओं को बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया है। राजस्थान के लिए गंभीर बात यह है कि गुजरात से सटे जिलों में बड़ी संख्या में पशुओं का आवागमन होता है। यानी यह वायरस गुजरात की ओर से भी आ सकता है। इसलिए एक पशु से दूसरे पशु में तेजी से प्रवेश करता है। सरकार को न केवल पशुओं के आवागमन को लेकर कोई ठोस नीति बनानी होगी, बल्कि गौशालाओं पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। रोग से बचाने के लिए गौशालाओं में केमिकल का छिड़काव करना बेहद जरूरी है। यदि गौशालाओं में गाय मरने लगी तो सरकार से हालात नहीं संभाले जाएंगे। ग्रामीण पृष्ठभूमि के सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम सिंह टापरवाला का मानना है कि पशुओं को तत्काल प्रभाव से वैक्सीन लगाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि गुजरात सरकार ने 15 जिलों के 1126 गांवों के 10 लाख पशुओं को अब तक वैक्सीन लगा दी है ताकि लम्पी स्किन डिजीज न हो। गुजरात के पशु पालकों को टोल फ्री नम्बर 1962 दिया गया है। इस पर चौबीस घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। राजस्थान में भी ऐसे उपाय करने की जरुरत है। टापरवाला ने बताया कि राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की स्थिति बहुत दयनीय है, जबकि प्रदेश में आय का मुख्य स्त्रोत पशुधन ही है। उन्होंने बताया कि देसी पद्धति से भी वैक्सीन तैयार की जा सकती है, जिसके एक डोज की कीमत मात्र 20 रुपए आएगी। इस संबंध में और अधिक जानकारी मोबाइल नम्बर 9460752009 पर विक्रम सिंह टापरवाला से ली जा सकती है। 

S.P.MITTAL BLOGGER (03-08-2022)
Website- www.spmittal.in
Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog
Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11
Blog- spmittal.blogspot.com
To Add in WhatsApp Group- 9929383123
To Contact- 9829071511