Thursday, 17 September 2026

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मुख्यमंत्री की तरह अजमेर और जोधपुर का दौरा किया। ================ 17 सितंबर को राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मुख्यमंत्री भजनलाल की तरह अजमेर और जोधपुर का दौरा किया। सीएस की यह पहल प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। 17 सितंबर को सीएस श्रीनिवास ने सड़क मार्ग से जयपुर से अजमेर का सफर किया, यहां राजस्व मंडल में उच्च अधिकारियों की बैठक कर न्याय को निष्पक्ष तरीके से सुनिश्चित करने की बात कही। उच्च अधिकारियों की बैठक के तुरंत बाद मुख्य सचिव ने राजस्व मंडल बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित अभिनंदन समारोह में भाग लिया। इस समारोह में मुख्य सचिव ने कहा, भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि त्वरित न्याय के लिए बार और बेंच के बीच तालमेल भी होना चाहिए। अजमेर के दोरे मेें मुख्य सचिव ने राजस्व मंडल के नए भवन के लिए लिए भूमि आवंटन पर भी आवश्यक निर्देश दिए। अजमेर के बाद श्रीनिवास सड़क मार्ग से जोधपुर पहुंचे और जोधपुर स्थित एम्स अस्पताल के 15 वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। एम्स प्रबंधन की ओर से मुख्य सचिव को समारोह का मुख्य अतिथि बनाया गया। आमतौर पर ऐसे समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अथवा राज्य के मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि होते हैं। लेकिन एम्स प्रबंधन ने परंपराओं से हट कर प्रदेश के मुख्य सचिव को समारोह का मुख्य अतिथि बनाया। समारोह में श्रीनिवास ने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ मरीजों को अधिक से अधिक मिलना चाहिए। उन्होंने अस्पताल के स्थापना दिवस को अमृतकाल से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार मरीजों के लिए अनेक कार्यक्रम चला रही है, इन सभी का लाभ जरूरतमंदों को मिलना चाहिए। सीएस ने जोधपुर में जनसुनवाई भी की और समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए। सीएस का कहना रहा कि आम लोगों की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी भी प्रशासनिक अधिकारियों की है। सीएस ने रात्रि विश्राम जोधपुर के सर्किट हाउस में ही किया। अजमेर और जोधपुर में सीएस तमाम प्रशासनिक अधिकारियों से आत्मीयता के साथ मिले। मालूम हो कि श्रीनिवास के सेवाकाल में हाल ही में 6 माह की वृद्धि की गई है। यानी श्रीनिवास 6 माह के कार्य विस्तार पर मुख्य सचिव का काम कर रहे हैं। आमतौर पर एक दिन में चार पांच कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री ही भाग लेते हैं। लेकिन 17 सितंबर को मुख्य सचिव श्रीनिवास ने भी मुख्यमंत्री की तरह दो जिलों का दौरा कर अनेक कार्यक्रमों में भाग लिया। S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
अजमेर में भाजपा की आपत्ति पर फैसला आने से पहले ही कांग्रेसियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। अनिल पूनियां के निर्वाचन अधिकारी रहते मेयर चुनाव में गड़बड़ी की कोई आशंका नहीं। बेंगलूरू में बंद होने के बाद भी कांग्रेस को अपने पार्षदों पर भरोसा नहीं। ================ अजमेर नगर निगम के मेयर के चुनाव के लिए कांग्रेस की ओर से श्रीमती किरण गढ़वाल और भाजपा की ओर से अनामिका शर्मा ने नामांकन किया है। मतदान 21 सितंबर को होना है। 80 पार्षदों में से कांग्रेस को 37, ीााजपा को 32 मिले हैं, 11 निर्दलीय पार्षद चुने गए हैं। ऐसे में दोनों दल मेयर पद के लिए निर्दलीय पार्षदों पर निर्भर है। 17 सितंबर को भाजपा की उम्मीदवार अनामिका ने निर्वाचन अधिकारी अनिल पूनिया के समक्ष एक आपत्ति दर्ज कराई। इस आपत्ति में कहा गया है कि कांग्रेस की प्रत्याशी किरण के मालिकाना हक वाले समारोह स्थल पर 19 लाख रुपए का टैक्स बकाया है। नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 24 (18) के तहत कोई प्रत्याशी सरकारी बकाया होने पर चुनाव नहीं लड़ सकता, इसलिए कांग्रेस की प्रत्याशी का नामांकन खारिज किया जाए। आपत्ति पर फैसला आने से पहले ही कांग्रेसियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। कांग्रेस के उत्साही नेताओं ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर लोकतंत्र की हत्या कर रही है। चूंकि कांग्रेस प्रत्याशी पर वाकई 19 लाख रुपया बकाया था। इसलिए कांग्रेसियों ने मान लिया कि नामांकन खारिज होगा और भाजपा की प्रत्याशी अनामिका निर्विरोध मेयर बन जाएंगी। कांग्रेयिों का यहां तक आरोप रहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अजमेर के जिला निर्वाचन अधिकारी लोकबंधु को भी फोन किया है। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में ही भाजपा के बागी नेता धर्मेन्द्र गहलोत भी नगर निगम के कार्यालय में आ गए। उनका कहना रहा कि पार्षद के चुनाव में वार्ड संख्या 4 से उनकी पत्नी और निर्दलीय उम्मीदवार हेमा गहलोत ने भाजपा प्रत्याशी मोनिका जैन के खिलाफ ऐसी ही आपत्ति दर्ज कराई थी। मोनिका के पति दीपक जैन के खिलाफ नगर निगम का लाखों रुपया बकाया है, लेकिन तब निर्वाचन अधिकारी ने उनकी आपत्ति पर कोई निर्णय नहीं लिया। जब उनकी आपत्ति पर भाजपा प्रत्याशी का नामांकन खारिज नहीं किया गया, तब अब बकाया राशि के मुद्दे पर कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन कैसे खारिज किया जा सकता है? धर्मेन्द्र गहलोत ने आरोप लगाया कि निर्वाचन विभाग सरकार के दबाव में काम कर रहा है। इस बीच निर्वाचन अधिकारी और अजमेर विकास प्राधिकरण के सचिव अनिल पूनिया ने कांग्रेसियों को भरोसा दिलाया कि नियमों के तहत ही फैसला होगा। वह स्वयं नगर पालिका अधिनियम का गहराई के साथ अध्ययन कर रहे है, लेकिन कांग्रेसियों ने पूनिया के कथन पर भरोसा नहीं किया। बड़ी संख्या में कांग्रेसी निगम कार्यालय में एकत्रित हो गए। तनावपूर्ण हालातों को देखते हुए भारी पुलिस बल को मौके पर बुलाना पड़ा। शाम को 6 बजे निर्वाचन अधिकारी पूनिया ने भाजपा की आपत्ति को खारिज कर दिया और कांग्रेस प्रत्याशी किरण की उम्मीदवार को बरकरार रखा। पूनिया ने अपने फैसले में कहा कि अब जब किरण गढ़वाल का निर्वाचन पार्षद के रूप में हो गया है और कोई भी पार्षद मेयर का चुनाव लड़ सकता है, इसलिए भाजपा प्रत्याशी की आपत्ति मायने नहीं रखती, लेकिन भाजपा प्रत्याशी दूसरी न्यायिक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। इस फैसले के बाद किरण के पति दिलीप गढ़वाल ने कहा कि उन्हें निर्वाचन अधिकारी की निष्पक्षता पर कोई संदेह नहीं हे। निर्वाचन अधिकारी ने पूर्ण निष्पक्षता के साथ फैसला दिया है। गढ़वाल ने अनिल पूनिया के फैसले का स्वागत किया। यानी फैसले से पहले कांग्रेसी जो आशंका जता रहे थे, वह सब निर्मूल साबित हुई। प्रशासनिक क्षेत्र के उच्च अधिकारियों का मानना है कि अनिल पूनिया के निर्वाचन अधिकारी रहते अजमेर नगर निगम के मेयर के चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हो सकती। पूनिया बेहद ईमानदार और कुशल प्रशासक है। यह सही है कि आपत्ति के बाद पूनिया ने जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर लोक बंधु से विमर्श किया। इससे जाहिर था कि प्रशासन पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं था। जहां क धर्मेन्द्र गहलोत की आपत्ति का सवाल है तो जानकार मानते हैं कि हेम गहलोत और अनामिका शर्मा की आपत्तियों में अंतर है। हेमा गहलोत आपत्ति में बकाया राशि भाजपा प्रत्याशी मोनिका के पति दीपक जैन पर है, जबकि अनामिका की आपत्ति में बकाया राशि स्वयं कांग्रेस की प्रत्याशी किरण गढ़वाल पर है। कांग्रेस को भरोसा नहीं: कांग्रेस अपने पार्षदों को सुरक्षित रखने के लिए कांग्रेस शासित कर्नाटक के बेंगलुरु में ले गई है। बेंगलुरु में कांग्रेस 37 पार्षदों के साथ साथ 3 निर्दलीय पार्षद भी है। बहुमत के लिए 41 पार्षद चाहिए। कांग्रेस की मजबूत स्थिति के बाद भी बड़े नेताओं को अपने पार्षदों पर भरोसा नहीं है। नेताओं को आशंका है कि भले ही पार्षद बेंगलूरू में बंद हो, लेकिन 21 सितंबर को क्रॉस वोटिंग हो सकती है। लाख कोशिश के बाद भी कांग्रेस के पार्षदों के तार भाजपा के नेताओं खासकर विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से जुड़े हुए हैं, कहा तो यहां तक जा रहा है कि कांग्रेस के मुस्लिम पार्षदों के मकानों और होटलों की फाइल की जांच पड़ताल भी तो रही है। एक पार्षद की होटल को गैर कानूनी मानते हुए नगर निगम ने तोड़ने का नोटिस दे रखा है। एक अन्य पार्षद की विशालकाय कोठी का निर्माण भी अवैध माना गया है। पार्षदों के रिश्तेदार चाहते हैं कि अवैध होटल और कोठियों पर कोई कार्यवाही न हो। इसी प्रकार निर्दलीय पार्षद भी भाजपा के नेताओं के संपर्क में है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
जोधपुर में 7 निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा को समर्थन दिया तो पूर्व सीएम अशोक गहलोत बोले-दो-दो करोड़ रुपए में बिक रहे हैं पार्षद। गहलोत ने ऐसे ही आरोप सचिन पायलट समर्थकों पर लगाए थे, लेकिन साबित नहीं कर सके। मुख्यमंत्री की तरह रोड शो नहीं करने पर गहलोत अब डोटासरा से भी नाराज। गहलोत को अपने ही घर में मात देने में भाजपा नेता लखावत की अहम भूमिका। ================ सब जानते हैं कि जोधपुर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तीन बार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह शहर है। नगर निगम के चुनाव में जोधपुर में कांग्रेस का मेयर बनवाने की जिम्मेदार गहलोत पर ही है। 11 सितंबर को मतदान से दो दिन पहले गहलोत ने जोधपुर में डेरा जमाया और भरतपुर कोशिश की कि कांग्रेस के पार्षद चुनाव जीते, लेकिन 14 सितंबर को घोषित परिणाम में कांग्रेस को 100 वार्डों में से 44 में ही जीत मिली। जबकि मेयर बनाने के लिए 51 पार्षद की जरुरत हे। जोधपुर में भाजपा को भी 45 सीटें ही मिली। 17 सितंबर को 11 निर्दलीय पार्षदों में से 7 ने मेयर चुनाव में भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी। जिन निर्दलीय पार्षदों ने समर्थन दिया उनमें विशाल सांखला, दिनेश शर्मा, चेतन गहलोत, मोहन राम चौधरी, दुर्गा मेवाड़ा, निर्मला नायक शामिल है। यानी भाजपा को 52 पार्षदों का समर्थन मिल गया है, इसलिए भाजपा का मेयर बनना तय है। इधर जोधपुर में 7 निर्दलीयों ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की, उधर जयपुर में सिविल लाइन स्थित अपने सरकारी आवास पर गहलोत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि भाजपा निर्दलीय पार्षदों को 2-2 करोड़ रुपए में खरीद रही है। असल में गहलोत को जवाब तो अपने घर के 7 निर्दलीय उम्मीदवारों के भाजपा में चले जाने का जवाब देना था, लेकिन अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए गहलोत ने भाजपा पर पार्षदों को खरीदने का आरोप लगा दिया। सवाल उठता है कि गहलोत के घर में ही निर्दलीय पार्षद भाजपा के पास कैसे चले गए? गहलोत ने अपनी राजनीतिक नाकामी पर पर्दा डालने के लिए पार्षदों को ही बिकाऊ कह दिया। गहलोत ने ऐसे आरोप सचिन पायलट के समर्थक विधायकों पर भी लगाए थे। तब गहलोत ने भाजपा पर विधायकों को 35-35 करोड़ रुपए में खरीदने के आरोप लगाए। यह बात अलग है कि गहलोत आज तक भी अपने आरोपों को साबित नहीं कर सके। असल में गहलोत जब भी विफल होते हैं तो अपनी गलती का दोष दूसरों पर डाल देते हैं। गहलोत को पता था कि जोधपुर में 7 निर्दलीय पार्षदों के भाजपा में शामिल होने को लेकर उनसे सवाल पूछा जाएगा, लेकिन गहलोत ने उसी दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी खामियों के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा दिया। इतना ही नहीं गहलोत ने शहरी निकाय चुनाव में कांग्रेस के पिछड़ने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को जिम्मेदार माना। गहलोत ने कहा कि जिस प्रकार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नगर निगम वाले शहरों में भाजपा के लिए रोड शो किए, उसी प्रकार प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भी कांग्रेस के बड़े नेताओं के रोड शो करने चाहिए थे। गहलोत ने इसे कांग्रेस संगठन की राजनीतिक चूक बताया। गहलोत तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। कांग्रेस के पिछड़ने की जिम्मेदारी गहलोत की भी है, लेकिन गहलोत ने अपनी जिम्मेदारी डोटासरा पर डाल दी है। देखना होगा कि गहलोत के इस बयान पर डोटासरा क्या प्रतिक्रिया देते हैं। लखावत ने दी मात: गहलोत के गृह शहर जोधपुर में 7 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भाजपा को दिलवाने में भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सैनी के साथ लखावत भी जोधपुर संभाग के प्रभारी है। लखावत ने जो रणनीति बनाई उसी के अंतर्गत 11 निर्दलीय पार्षदों से संपर्क साधा गया। 11 में से 7 ने तो भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। माना जा रहा है कि 21 सितंबर को मतदान से पहले शेष चार पार्षद भी भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर सकते हैं। लखावत का कहना है कि अब जोधपुर में गहलोत का जादू खत्म हो गया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

Wednesday, 16 September 2026

भगवान राम की जन्मस्थली पर भव्य मंदिर, अनुच्छेद 370 हटाकर अब देश के अधिकांश राज्यों में समान नागरिक संहिता। भारत के सौ करोड़ से ज्यादा सनातनियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से और क्या चाहिए? 17 सितंबर की शाम को हर सनातनी घर के बाहर आशीर्वाद दीप जलाएं। ================== 17 सितंबर 2026 को दुनिया भर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन सेवा संकल्प के साथ मनाया जा रहा है। अनेक धर्मगुरुओं ने देशभर के सनातनियों से अपील की है कि 17 सितंबर की शाम को घर के बाहर आशीर्वाद का दीया जलाएं। ताकि नरेंद्र मोदी और मजबूती के साथ सनातन संस्कृति वाले भारत की रक्षा कर सके। यूं तो नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के अनेक कार्य गिनाए जा रहे हैं, लेकिन देश के 100 करोड़ से ज्यादा सनातनियों के लिए 3 बड़े काम बहुत मायने रखते हैं। जम्मू कश्मीर से धारा 370 को समाप्त कर मोदी ने देश की एकता और अखंडता को मजबूत किया। अयोध्या में भगवान राम के जन्म स्थल पर भव्य मंदिर बनवाकर हर सनातनी को गौरवान्ति होने का अवसर प्रदान किया और अब देश के अधिकांश क्षेत्र में समान नागरिक संहिता लागू की जा रही है। ये तीनों बड़े काम एक सनातनी ही कर सकता है। हालांकि जब वर्ष 2014 में मोदी पीएम बने तब कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि गुलामी की मानसिकता में जीने वाले भारत में यह तीन काम हो सकेंगे, लेकिन मोदी ने इन 12 वर्षों में सनातनियों को गुलामी की मानसिकता से बाहर निकाला और एक एक कर तीनों काम किए। आज हर सनातनी गर्व के साथ कह सकता है कि भारत में उनके सम्मान और अधिकार में वृद्धि हुई है। गुलामी की मानसिकता वाले लोग भले ही मोदी की कार्यशैली की आलोचना करें, लेकिन मोदी ने तीन बड़े काम कर यह दिखाया है कि भारत सनातन संस्कृति वाला देश है। यहां सनातन संस्कृति को नष्ट करने वालों का कोई स्थान नहीं है। जब सनातन संस्कृति मजबूत हो रही है, तब दूसरे धर्मों के लोग भी सुरक्षित हैं। भारत में सौ करोड़ सनातनियों के साथ 25 करोड़ से ज्यादा इस्लाम धर्म को मानने वाले मुसलमान भी रहते हैं। आज दुनिया में मुसलमान सबसे ज्यादा भारत में सुरक्षित है। पिछले 12 वर्षों में तो मुसलमान और ज्यादा सुरक्षित हुए हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि भारत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति का परचम फैला है। यदि वर्ष 2014 के पहले वाले हालात रहते तो भारत में न सनातनी और न मुसलमान सुरक्षित होता। पूरे देश में उन हालातों को देखा है, जब अधिकांश राज्यों में कर्फ्यू लगा रहता था। जब पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी, तब दोनों प्रमुख धर्मों के लोग और ज्यादा सुरक्षित होंगे। कोई भी देश दो कानूनों के रहते मजबूत नहीं हो सकता। अब जब दुनिया में युद्ध की स्थिति है, तब भारत में अमन चैन और शांति बनी हुई है। कोई माने या नहीं लेकिन इसका श्रेय नरेंद्र मोदी की नीतियों को जाता है। आशीर्वाद का दीया तो मुसलमानों को भी जलाना चाहिए। क्योंकि भारत में रहने वाले मुसलमान आज खुशहाल है, इसके विपरीत इस्लामिक देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश ईरान, इराक में रहने वाले मुसलमानों के हालात देखे जा सकते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
सत्ता का दुरुपयोग तो सबसे ज्यादा खुद गहलोत और डोटासरा ने किया। शहरी निकाय के चुनाव में आरोप लगाने से पहले अपने कृत्य देख लें। ================== राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि शहरी निकायों का प्रमुख चुनने के लिए भाजपा के नेता सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं। निर्दलीय और कांग्रेस के पार्षदों को जबरन उठाया जा रहा है। पुलिस भाजपा का मोहरा बनी हुई है। पूरे प्रदेश में भाजपा ने भय का माहौल बना दिया है। मालूम हो कि राजस्थान के 309 शहरी निकायों के प्रमुख का चुनाव 21 सितंबर को होना है। 14 सितंबर को वार्ड पार्षदों के परिणाम के बाद दोनों ही प्रमुख दलों के पार्षदों की बाड़ाबंदी हो रखी है। पार्षदों को दूसरे राज्यों में भी रखा गया है। अजमेर के कांग्रेसी पार्षद कांग्रेस शासित कर्नाटक के बेंगलुरु में है। इसी प्रकार भाजपा के पार्षद राजस्थान के साथ साथ हरियाणा और दिल्ली में रखे गए है। गहलोत और डोटासरा को आरोप लगाने से पहले अपने कृत्यों को देख लेना चाहिए। जुलाई 2020 में जब डिप्टी सीएम और प्रदेशाध्यक्ष रहते सचिन पायलट 18 कांग्रेसी विधायकों को दिल्ली ले गए थे, तब मुख्यमंत्री रहते हुए गहलोत ने सत्ता का दुरुपयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस के विधायक दिल्ली न जा सके इसके लिए कोरोना संक्रमण की आड़ लेते हुए लोगों के राजस्थान के बाहर जाने पर रोक लगा दी। जिस पुलिस को गहलोत आज कोस रहे हैं, उसी पुलिस ने राजस्थान की सीमा पर खड़े रहकर आम लोगों को जाने नहीं दिया। जब कोरोना संक्रमण रोकने के लिए दूसरे राज्यों से आने वालों पर रोक लगनी चाहिए थी, लेकिन गहलोत ने अपने राजनीतिक स्वार्थ की खातिर जाने वालों पर ही रोक लगा दी। निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों को गहलोत ने प्रशासन की मदद से किस तरह कब्जे में लिया, यह किसी से छिपा नहीं है। इतना ही नहीं सचिन पायलट समर्थक कांग्रेसी विधायकों के खिलाफ देशद्रोह तक का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पूरा प्रदेश जानता है कि जिन अधिकारियों ने गहलोत की सरकार को बचाने का काम किया, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद लाभ के पद दिए गए। गहलोत सरकार में मुख्य सचिव रहे निरंजन आर्य की पत्नी संगीता आर्य को तो राज्य लोकसभा आयोग का सदस्य बना दिया। आईपीएस संजय श्रोत्रिय को आयोग का अध्यक्ष बना दिया। डीबी गुप्ता जैसे मुख्य सचिव को भी सेवानिवृत्ति के बाद मुख्य सूचना आयुक्त बनाया गया। जब गहलोत सत्ता का दुरुपयोग कर रहे थे, तब प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए डोटासरा भी मजा ले रहे थे। प्रदेशाध्यक्ष के साथ साथ डोटासरा कैबिनेट मंत्री भी रहे। जब खुद गहलोत और डोटासरा ने सत्ता का दुरुपयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, तब इन दोनों को सत्ता का दुरुपयोग का आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511