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Monday, 29 June 2026
राजनीति में बड़े बड़े नेताओं को पानी पिलाने के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अब फलदायिनी यमुना नदी का पानी शेखावाटी में लाएंगे।
सीकर, झुंझुनूं व चुरू से पहले हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल व हिसार की प्यास बुझाई जाएगी।
जो काम पीएम मोदी को करना था वो अमित शाह ने किया।
1994 के समझौते के अनुरूप ही हरियाणा को पानी मिलेगा-भजनलाल शर्मा, सीएम राजस्थान।
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29 जून को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यमुना नदी के पानी को लेकर मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए। अमित शाह की उपस्थिति में ही दोनों नेताओं ने इस एग्रीमेंट का एक्सचेंज भी कर लिया। पहले एग्रीमेंट एक्सचेंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में होना था, लेकिन बदले हुए निर्णय में एग्रीमेंट का एक्सचेंज गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुआ। राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के सीकर, झुंझुनूं और चुरू जिले की प्यास बुझाने के लिए यह एग्रीमेंट बहुत महत्वपूर्ण हे। इस एग्रीमेंट को करने में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विशेष प्रयास रहे हैं। भारत की सनातन संस्कृति में यमुना नदी को फलदायिनी और गंगा नदी को मोक्षदायिनी माना जाता है। यानी सीएम शर्मा राजस्थान में अब युमना का पानी ला रहे है जो फलदायिनी मानी जाती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि भजनलाल शर्मा पर ईश्वर की असीम का है। दिसंबर 2023 में पहली बार विधायक बने शर्मा को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया गया, तब उनकी सफलता को लेकर अनेक शंकाए थी, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद शर्मा ने वसुंधरा राजे जैसे दिग्गज भाजपाइयों को ठंडा पानी पिलाया और गत ढाई वर्षों से अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया। आज भजनलाल शर्मा के नेतृत्व को चुनौती देने वाला कोई नहीं है। पिछले ढाई वर्षों से कहा जा रहा है कि प्रदेश के मंत्रिमंडल के 6 रिक्त पदों पर नियुक्तियां होंगी, लेकिन सरकार के ढाई वर्ष गुजर जाने के बाद भी मंत्री पद खाली पड़े हैं। अब जब यमुना के पानी पर हरियाणा के साथ एग्रीमेंट हो गया है, तब राजनीति में भजनलाल शर्मा का कद और बढ़ेगा। यमुना का पानी लाने के लिए गत 32 वर्षों से कांग्रेस और भाजपा के नेता प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सफलता भजनलाल शर्मा को मिली है। इससे पहले ईआरसीपी (राम सेतु लिंक परियोजना) को भी क्रियांवित करने में शर्मा की भूमिका रही। अब जब फलदायिनी यमुना स्वयं राजस्थान आ रही है तो भजनलाल शर्मा को राजनीति में अनेक कामों के फल मिलने शुरू हो गए है। राजस्थान के किसी भी नेता को मुगालते में नहीं रहना चाहिए। कोई माने या नहीं लेकिन 2028 का विधानसभा का चुनाव भी भाजपा भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ही लड़ेगी।
पहले हरियाणा को:
हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से शेखावाटी के चूरू जिले तक पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इन पाइप लाइनों के जरिए ही यमुना नदी का पानी शेखावाटी में लाया जाएगा। हथिनी कुंड बैराज से चुरू तक पानी लाने से पहले हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल व हिसार जिलों की प्यास को बुझाया जाएगा। यानी इस एग्रीमेंट में राजस्थान के साथ साथ हरियाणा को भी प्राथमिकता दी गई है। चूंकि बरसात के दिनों में यमुना नदी उफान पर रहती है, इसलिए हरियाणा के जिलों को पानी देने से राजस्थान के हितों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 32 वर्ष पहले 1994 में चार राज्यों के बीच जो समझौता हुआ उस में राजस्थान को 577 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम)पानी का प्रावधान किया गया था। कहा जा सकता है कि 29 जून को हुए एग्रीमेंट में इतना पानी राजस्थान को मिल ही जाएगा। यमुना का पानी राजस्थान को देने से हरियाणा में कोई विरोध न हो इसके लिए ही पहले हरियाणा के तीन चार जिलों में पेयजल की सप्लाई की जाएगी, इसलिए तीन पाइप लाइन डालने का प्रावधान किया गया है। वैसे ही 300 किलोमीटर के मार्ग का 95 प्रतिशत भाग हरियाणा में ही आता है।
समझौते के अनुरूप हरियाणा को पानी:
यमुना जल समझौते को लेकर 30 जून को दिल्ली में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में जब यह पूछा गया, राजस्थान से पहले हरियाणा को पानी मिलेगा, तब सीएम शर्मा ने कहा 1994 में चार राज्यों के बीच जो समझौता हुआ था, उसमें हरियाणा को भी पानी दिए जाने का प्रावधान है। 1994 के समझौते के तहत ही हरियाणा को उसके हिस्से का पानी दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यमुना का पानी शेखावाटी के जिलों को मिलेगा। इस से एक बड़ी आबादी की प्यास बुझेगी। समझौते के लिए सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी जताया। 29 जून के समझौते पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत की आशंकाओं के सवाल पर सीएम शर्मा ने कहा, जब एग्रीमेंट हुआ है, तो कोई भी तथ्य छिपाया नहीं जा रहा है। एग्रीमेंट भी सार्वजनिक किया जा रहा है। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। गहलोत के मुख्यमंत्री रहते हुए राजस्थान की पहचान पेपर लीक, बिगड़ी कानून व्यवस्था, विधायकों के बंधक रहने जैसे समाचारों से होती थी। लेकिन आज राजस्थान की पहचान विकास को लेकर हो रही है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-06-2026)
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धौलपुर में महिलाओं को निवस्त्र घुमाने के आरोपी कुख्यात अपराधी जगन गुर्जर की अजमेर में हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या।
बुरे काम का बुरा नतीजा।
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करीब 20 वर्षों तक राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में चंबल नदी के सीमावर्ती जंगलों में आतंक मचाने वाले डकैत जगन गुर्जर की 29 जून को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या कर दी गई। जगन गुर्जर को मारने का काम कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने किया। विष्णु ने स्वीकार किया कि उसने गमछे से जगन गुर्जर का गला दबा दिया। विष्णु को अपने कृत्य पर कोई अफसोस नहीं है। जगन गुर्जर पर तीन राज्यों में 125 से भी ज्यादा मुकदमे दर्ज है। हत्या, अपहरण रंगदारी के साथ साथ जगन गुर्जर पर एक गंभीर आरोप वर्ष 2019 का भी है। आरोप है कि धौलपुर के करणपुर में जगन गुर्जर ने दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया। तब पूरे देश में जगन गुर्जर की चर्चा हुई। चूंकि जगन गुर्जर का आतंक चंबल नदी के जंगलों में था, इसलिए उसने वर्ष 2008 में भाजपा की नेता वसुंधरा राजे के धौलपुर के महल को भी बम से उड़ाने की धमकी दी। जगन गुर्जर का इतना आतंक था कि पुलिस भी मुकाबला करने से डरती थी। पुलिस ने अपने प्रयासों से कभी भी जगन गुर्जर को गिरफ्तार नहीं किया। जगन गुर्जर ने तीन बार अपनी मर्जी से पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। अंतिम बार फरवरी 2022 में जगन ने आत्मसमर्पण किया था, तभी से वह विभिन्न जेलों में बंद रहा। इन दिनों जगन गुर्जर अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था। तभी उसकी मुलाकात कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु से हुई। विष्णु ने पहले जगन से दोस्ती की और फिर विश्वास में लेकर जगन को मौत के घाट उतार दिया।
बुरे काम का बुरा नतीजा:
पुलिस अब जगन हत्याकांड की विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस को यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर विष्णु ने जगन की हत्या क्यों की? क्या विष्णु के के पीछे किसी अपराधी गैंग का हाथ है? पुलिस की जांच अपनी जगह है, लेकिन जगह गुर्जर की हत्या ने एक बार फिर यह प्रदर्शित किया है कि बुरे काम का नतीजा भी बुरा ही होता है।
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खड़गे राज्यसभा में फिर प्रतिपक्ष के नेता बने। कांग्रसे के राष्ट्रीय अध्यक्ष तो रहेंगे ही।
अशोक गहलोत को सीखनी चाहिए वफादारी।
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29 जून को मल्लिाकर्जुन खडग़े ने राज्यसभा में कांग्रेस सांसद के तौर पर शपथ ली। शपथ लेने के साथ ही राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णान ने खडग़े को प्रतिपक्ष का नेता भी घोषित कर दिया। यानी सभापति को कांग्रेस की ओर से पहले ही सूचित कर दिया गया था कि खडग़े ही कांग्रेस सांसदों के नेता है और राज्यसभा में विपक्ष में कांग्रेस सांसदों की संख्या सबसे ज्यादा है, इसलिए खडग़े ही प्रतिपक्ष के नेता होंगे। आमतौर पर कांग्रेस में एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत पर अमल किया जाता है, लेकिन खडग़े कांग्रेस के उरन चुनिंदा नेताओं में से एक है जिन पर कोई नियम लाू नहीं होता। खडग़े मौजूदा समय में भी कांग्रसे के राष्ट्रीय अध्यक्ष है। यानी खरगे के पास दो महत्वपूर्ण पद है। राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता का पद होने के कारण खडग़े को केबिनेट मंत्री का दर्जा मिला हुआ है। कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व खासकर गांधी परिवार खडग़े पर कितना भरोसा करता है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2019 से पहले खडग़े लोकसभा में प्रतिपख के नेता थे। 2019 में खडग़े जब लोकसभा का चुनाव हार गए, तब गांधी परिवार ने खडग़े को कर्नाटक से राज्यसभा में भेज दिया। इतना ही नहीं तब गुलाम नबी आजाद जैसे नेता को राज्यसभा से विदा कर खडग़े को प्रतिपक्ष का नेता बना दिया। खडग़े को हाल ही में दुबारा से राज्यसभा का सांसद बनाया गया और उनहें एक बार फिर प्रतिपक्ष का नेता घोषित किया गया।यानी अब खडग़े के पास पूर्व की तरह दो पद रहेंगे। गांधी परिवा रने स्पष्ट कर दिया है कि खडग़े पर एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत लागू नहीं होगा।
गहलोत वफादारी की सीख लें:
सितंबर 2022 से पहले तक अशोक गहलोत भी कांग्रेस के वफादार नेताओं में शामिल थे, लेकिन गहलोत ने जिस तरह 25 सितंबर 2022 को राजस्थान के मुख्यमंत्री के पद के लालच में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व से बगावत की उसी का परिणाम है कि आज गहलोत पर हाईकमान का भरोसा नहीं रहा। जहां खडग़े के पास दो-दो महत्वपूर्ण पद है, वहां गहलोत के पास कोई पद नहीं है। एक समय था, जब गहलोत गांधी परिवार के सबसे भरोसेमंद नेता थे, इसलिए वर्ष 2022 में श्रीमती सोनिया गांधी के स्थान पर अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला किया गया। तब गहलोत को अधिकृत तौर पर उम्मीदवार भी घोषित कर दिया गया था। लेकिन गहलोत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के लालच में कांग्रेस हाईकमान के समक्ष बगावत कर दी। गहलोत नहीं चाहते थे कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाए। जबकि गांधी परिवार पायलट को मुख्यमंत्री बनाने का प्रयास कर रहा था, इसलिए तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मल्लिकार्जुन खडग़े और अजय माकन को पर्यवेक्षक बनाकर राजस्थान भेजा। लेकिन अशोक गहलोत ने तब खडग़े और माकन के साथ कांग्रेस विधायकों की बैठक ही नहीं होने दी। तब इन दोनों पर्यवेक्षकों को अपमानित होरक जयपुर से लौटना पड़ा। इधर गहलोत को मुख्यमंत्री बनाए रखने की मांग पर कांग्रेस के 80 विधायकों ने अपना सामूहिक इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को दे दिया, तब गहलोत मुख्यमंत्र का पद बचाने में तो सफल रहे, लेकिन गांधी परिवार का भरोसा खो दिया। वफदारी कैसेी होती है यह अशोक गहलोत को खडग़े से सीखनी चाहिए।
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Sunday, 28 June 2026
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स में मिला सर्वोच्च नागरिक सम्मान। अब तक 35 से भी ज्यादा देश दे चुके हैं ऐसा सम्मान।
सम्मान देने वाले देशों में इजरायल और फिलीस्तीन भी शामिल।
वही पड़ोसी देश पाकिस्तान में गृहयुद्ध के हालात। अफगानिस्तान के साथ जंग भी।
भारत में रहने वाले पाकिस्तान परस्त नेता इन हालातों को समझे।
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 जून तक सेशेल्स के दौरे पर हैं। इस तीन दिवसीय दौरे में 28 जून को सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हार्मिनी ने पीएम मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन सम्मानित किया। पीएम मोदी को दुनिया के 35 से भी ज्यादा देश अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित कर चुके है। इसमें इजरायल और फिलीस्तीन भी शामिल हैं। अनेक मुस्लिम देशों ने भी मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है। इन सम्मानों के संबंध में पीएम मोदी स्पष्ट कह चुके हैं कि यह समान मेरा नहीं बल्कि भारत का है। इसमें कोई दो राय नहीं की नरेंद्र मोदी के गत 12 वर्षों के कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का दबदबा बढ़ा है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि भारत आंतरिक दृष्टि से मजबूत बना है। यही वजह है कि आर्थिक दृष्टि से चौथी महाशक्ति बनने के बाद भारत अब तीसरी महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। एक और मजबूत और खुशहाल भारत है तो दूसरी ओर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में गृहयुद्ध के हालात है। 27 जून को ही कराची में आतंकी हमला हुआ है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आग लगी हुई है। बलूचिस्तान में तो आए दिन पाकिस्तान की सेना के जवान ही मारे जा रहे है। असल में पाकिस्तान में जो इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन बने हुए हैं वे ही आपस में अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। इतनी अराजकता के बाद पाकिस्तान को अपने पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान से जंग भी करनी पड़ रही है। पाकिस्तान आए दिन अफगानिस्तान पर हवाई हमले कर रहा है तो अफगानिस्तान पर काबिज तालिबानी लड़ाके पाकिस्तान में घुसकर कोहराम मचा रहे है। कहा जा सकता है कि आज पाकिस्तान में आम मुसलमान का जीना मुश्किल हो गया है। महंगाई की वजह से दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही।
फर्क को समझें:
भारत में ऐसे कई नेता और मुस्लिम संगठन है, जिनकी हमदर्दी पाकिस्तान के साथ रहती है। ऐसे नेताओं और संगठनों को पाकिस्तान और भारत के अंतर को समझना चाहिए। भारत में 25 करोड़ से ज्यादा मुसलमान रहते हैं जो दुनिया के किसी भी मुस्लिम देश से ज्यादा है। पाकिस्तान में जहां गृहयुद्ध के हालात है, वहीं भारत में हिंदुओं के साथ साथ मुसलमान भी सम्मान और समृद्धि के साथ रह रहे हँ। भारत के जिन 85 करोड़ जरूरतमंद व्यक्तियों को प्रतिमाह पांच किलो अनाज मुफ्त में मिल रहा है उनमें मुस्लिम परिवार भी शामिल हैं। यदि किसी परिवार में माता पिता के साथ 10 बच्चे रह रहे हैं तो उन्हें माह 60 किलो अनाज निशुल्क मिल रहा है। सरकार ने हाल ही में निर्णय लिया है कि ऐसे व्यक्तियों को तीन माह का अनाज अग्रिम दे दिया जाए। यानी 12 सदस्यों वाले परिवार को 180 किलो अनाज मुफ्त में मिल रहा है। भारत में रहकर पाकिस्तान के गीत गाने वाले नेताओं को एक बार पाकिस्तान जाकर हालातों को देखना चाहिए।
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जो शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाते, वे निकम्मापन कर रहे हैं।
राजस्थान के स्कूली शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का यह बयान सरकारी कार्मिकों और सांसद, विधायक, पार्षद आदि जनप्रतिनिधियों पर भी लागू होता है।
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28 जून को टोंक में खटीक समाज के अधिकारियों और कर्मचारियों के सम्मान समारोह में राजस्थान के स्कूली शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को लेकर बड़ी बातें कही। दिलावर ने कहा कि शिक्षकों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाना चाहिए। जो शिक्षक ऐसा नहीं करते हैं, वे निकम्मे हैं। ऐसा लगता है कि शिक्षकों को अपने ही शिक्षण कार्य पर भरोसा नहीं है। प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को वेतन और सुविधाएं भी ज्यादा मिलती है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर ऊंचा होना चाहिए। यदि शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे तो इसका असर समाज पर पड़ेगा। अब यदि शिक्षक ही अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं तो आम अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्यों पढ़ाएंगे? दिलावर ने शिक्षकों के समक्ष एक महत्वपूर्ण सवाल रखा है। यह सही है कि सरकार से मोटा वेतन लेने वाले शिक्षकों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहिए, लेकिन दिलावर ने शिक्षकों के समक्ष जो सवाल खड़ा किया है, वह सरकार के अधिकारियों और सभी कर्मियों के साथ साथ सांसद, विधायक, पार्षद, जिला प्रमुख, प्रधान सरपंच आदि सभी जनप्रतिनिधियों पर उठता है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी सरकार से वेतन और अनेक सुविधाएं प्राप्त करते हैं। ऐसे में कार्मिकों और जनप्रतिनिधियों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाए। यदि सांसद, विधायकों, आईएएस आईपीएस अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे तो स्कूलों की गुणवत्ता भी सुधर जाएगी। अच्छा हो कि मदन दिलावर एक अभियान चलाकर सभी सरकारी कर्मियों और जनप्रतिनिधियों के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित करें। अकेले शिक्षकों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ाने से व्यवस्था में सुधार नहीं होगा।
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