Sunday, 26 July 2026

 अजमेर में साम्प्रदायिक सौहार्द की भावना से निकलेगा ईद मिलादुन्नबी का जुलूस।

25 अगस्त को निकलने वाले जुलूस में सभी धर्मों के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
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प्रतिवर्ष निकलने वाले ईद मिलादुन्नबी का जुलूस इस बार 25 अगस्त को साम्प्रदायिक सौहार्द की भावना से निकाला जाएगा। जुलूस की तैयारियों को सूफी इंटरनेशनल संस्था की ओर से 26 जुलाई को ख्वाजा साहब की दरगाह स्थित अकबरी मस्जिद में एक बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्ष खादिमों की संस्था अंजुमन मोइनिया फखरिया चिश्तिया के सचिव सैय्यद कलीमुद्दीन चिश्ती ने की।  बैठक में जुलूस के सफल संचालन, मार्ग व्यवस्था, अनुशासन, स्वच्छता, सुरक्षा तथा सामाजिक समरसता जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सूफी इंटरनेशनल के सचिव नवाब हिदायतउल्ला ने बताया कि जुलूस में शामिल होने वाले सभी लोग प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करेंगे। जुलूस के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा, यातायात व्यवस्था में सहयोग किया जाएगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी नागरिक को असुविधा का सामना न करना पड़े। साथ ही सभी से अपील की गई कि जुलूस की गरिमा बनाए रखें और ऐसा कोई कार्य न करें जिससे समाज में गलत संदेश जाए। बैठक में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि अजमेर हमेशा से गंगा-जमुनी तहज़ीब और कौमी एकता की मिसाल रहा है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जुलूस में विभिन्न धर्मों एवं समाजों के प्रतिनिधियों को भी सम्मान आमंत्रित किया जाएगा, ताकि पैगंबर-ए-इस्लाम के अमन और इंसानियत के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जा सके। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि इस वर्ष का 1501 वां जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी पूरी शान, अकीदत और  शहरवासियों के लिए भाईचारे सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश लेकर निकलेगा। अंत में सभी समाजों, संगठनों और शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में जुलूस में शामिल होकर पैगंबर ए इस्लाम की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने तथा प्रेम, शांति और इंसानियत के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया गया। बैठक में सूफी इंटरनेशनल के अध्यक्ष हाजी सरवर सिद्दीकी,मौलाना अय्यूब कासमी, दरगाह कमेटी के सहायक नाजिम शादाब अहमद, काजी मुनव्वर अली, अनजुमन सदस्य गफ्फार काजमी,एहतेशाम चिश्ती, अब्दुल नईम खान, सैय्यद फ़ज़ले अमीन चिश्ती, हाजी इफ्तेखार चिश्ती,पूर्व पार्षद मुख्तार अहमद नवाब, मोहम्मद शाकिर खान, अहसान सुलतानी, सैय्यद अनवर चिश्ती,सैय्यद मसूद मोईनी, अहसान मिर्ज़ा, हुमायूं खान, सलीम कुरैशी, हाजी रईस कुरैशी, आरिफ हुसैन, बशीर खान कायम खानी , सैय्यद सलीम बना,सैय्यद गुलज़ार चिश्ती, अब्दुल जब्बार अब्बासी, अकबर घोसी,शेखजादा ज़ीशान चिश्ती,उमरदीन अब्बासी, अब्दुल शाहिद, अब्दुल हमीद, एस एम अकबर,बदरुद्दीन कुरैशी , हाफिज खान,अब्दुल सलाम,सुब्हानी, मोहम्मद इस्लाम, अशरफ अली, अब्दुल अजीज मुल्तानी,आइन हुसैन घोसी, साहिल घोसी, इकबाल कुरैशी, अस्नान कुरैशी,गयासुद्दीन चिश्ती, अल्ताफ ऊंटडा, जाहिद खान ,उस्मान घड़ियाली   बिलाल, हाफिज रमजान शेरानी, अल्ताफ हुसैन अंसारी, आदि मौजूद रहे  जुलूस के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9413383786 पर नवाब हिदायतउल्ला से ली जा सकती है। 


S.P.MITTAL BLOGGER ( 27-07-2026)

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 विवाह जीवन में अनुशासन लाता है-मोहन भागवत, संघ प्रमुख।

पुत्री हो तो परिवार में अनुशासन और बढ़ जाता है।

सनातन संस्कृति में तो कन्यादान करने वाले माता-पिता को मोक्ष मिलने की मान्यता है।
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26 जुलाई को हैदराबाद में आयोजित विश्व मंगल्य सभा के समकालीन मातृत्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विवाह जीवन में अनुशासन लाता है और धर्म व जिम्मेदारी का भाव पैदा करता है। इसके विपरीत लिव इन रिश्तों में लोग जिम्मेदारी से बचकर केवल सुख चाहते हैं। लिव इन रिश्तों के दुष्परिणाम आज पूरी दुनिया देख रही है। पश्चिमी संस्कृति की अंधी नकल आधुनिकता नहीं बल्कि समाज का पतन है। संघ प्रमुख ने भारत की सनातन संस्कृति में विवाह पद्धति के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। इसमें कोई दो राय नहीं कि आज पश्चिम संस्कृति के पक्षधर लोग भी भारत की विवाह पद्धति की सराहना करने लगे है। यही वजह है कि रोजगार के लिए विदेश में गई भारतीय युवतियों को पश्चिमी देशों के युवा सनातन संस्कृति के अनुरूप विवाह कर रहे है। यानी भारत की विवाह पद्धति को दुनिया में स्वीकारा जा रहा है। सनातन संस्कृति के अनुरूप संपन्न विवाह के बाद जिस परिवार में पुत्री का जन्म होता है, वह परिवार और अनुशासित हो जाता है। पुत्री को देखते हुए माता पिता को भी अपनी जिम्मेदारी का ज्यादा अहसास होता है। हालांकि पुत्री के जन्म का फैसला सनातन संस्कृति में ईश्वर का माना जाता है। लेकिन हम यदि सिर्फ पुत्रों वाले परिवारों की तुलना पुत्री वाले परिवार से करे तो दोनों में फर्क नजर आएगा। यह भी देखा गया है कि पुत्री वाला परिवार ज्यादा सफलता और सरलता के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है। सनातन संस्कृति में तो मान्यता है कि कन्यादान करने वाले माता पिता को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हमारी संस्कृति में मोक्ष का बहुत महत्व है। कई बार मोक्ष प्राप्ति के लिए मनुष्य को अनेक जतन करने होते है, जबकि कन्यादान करने वाले माता पिता को सरलता के साथ मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। वो परिवार वाकई भाग्यशाली है जिनके यहां पुत्री का जन्म हुआ है ।


S.P.MITTAL BLOGGER ( 27-07-2026)

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 कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में पीएम मोदी को गालियां। भद्दी गालियां बकने में लड़कियां भी शामिल।

गालियों वाले वीडियो को सोशल मीडिया के प्लेट फार्मों से हटाने के निर्देश।

सवाल-आखिर यह कौन सा मीडिया है? क्या राहुल-अखिलेश ऐसे मीडिया की निंदा करेंगे।
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नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी ने एक से 25 जुलाई तक दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया उसमें अनेक प्रदर्शनकारियों ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गालियां दी। गालियां बकने में लड़कियां भी शामिल रही। अश्लील और भद्दी गालियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों से ऐसे वीडियो को हटाने के निर्देश संबंधित संस्थाओं को दिए हैं। अब भी गालियों वाले वीडियो सोशल मीडिया से हट जाए, लेकिन यह वीडियो देश भर में घर घर तक पहुंच गए है। हर व्यक्ति के मोबाइल में गालियों वाला वीडियो है। चिंताजनक बात तो यह है कि जिन व्यक्तियों ने वीडियो नहीं देखा उसे भी ऐसे वीडियो दिखाए जा रहे है। मर्यादाओं के कारण प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ऐसी गालियां का उल्लेख न हुआ हो, लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से देश के 140 करोड़ लोगों तक यह वीडियो पहुंच चुका है। सवाल उठता है कि आखिर यह कौन सा मीडिया है जो देश के प्रधानमंत्री के लिए बकी गालियों को लोगों तक पहुंचा रहा है? सवाल ऐसे मीडिया पर नियंत्रण का नहीं है, बल्कि मर्यादा और नैतिकता का है। कोई लड़की मां बहन की गालियां बकने और फिर उस लड़की का वीडियो देशभर में वायरल हो तो यह हमारी सनातन संस्कृति के विरुद्ध भी है। सनातन संस्कृति में तो लड़की को देवी का स्वरूप माना गया है। नवरात्र में तो कन्या पूजन की परंपरा है। सनातन धर्म को मानने वाले नवरात्र में कन्याओं की पूजा करते हैं और उन्हें देवी का स्वरूप मानकर आशीर्वाद लेते है। सवाल उठता है कि कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में शामिल जिन लड़कियों ने पीएम  मोदी को गालियां दी उन्हें सनातन संस्कृति में क्या माना जाए? भले ही देश विरोधी विचारधारा वाले लोग ऐसी गालियों को विचारों की स्वतंत्रता माने, लेकिन भारत की सनातन संस्कृति में गालियां बकने वाली लड़कियों का कोई स्थान नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या कॉकरोच पार्टी की समर्थक कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव गालियां बकने वाली लड़कियों और वीडियो को प्रसारित करने वाले मीडिया की निंदा करेंगे? राहुल गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस की कार्यवाही को तो प्रस्तुत करते हैं, लेकिन उन तत्वों की निंदा नहीं करते जो देश के प्रधानमंत्री को गालियां दे रहे है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव माने या नहीं, लेकिन देश के प्रधानमंत्री को गालियां देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। सरकार को ऐसे मीडिया को नियंत्रित करने की जरूरत है जो देश विरोधी ताकतों के उद्देश्य को आगे बढ़ाता है। कॉकरोच पार्टी के नेताओं को भी उन तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए, जिन्होंने देश के प्रधानमंत्री को गालियां दी है। 


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Saturday, 25 July 2026

 मोदी जी! आखिर कब तक देश विरोधी तत्वों से भारत को बचाओगे?

सवाल छात्र आंदोलन का नहीं, बल्कि हर ऐसे आंदोलन में देश विरोधी तत्वों की सक्रियता का है।

नीट पेपर लीक पर इस्तीफा देना था तो 10 मई को ही दे देना चाहिए था।

री-नीट के रिजल्ट के बाद आंदोलन का क्या तुक था?

जसवंत दारा का सटीक और प्रभावी कार्टून।
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25 जुलाई को दोपहर बाद जब धर्मेन्द्र प्रधान ने  केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया, तभी से मीडिया में प्रसारित हो रहा है, यह छात्रों और देश के युवाओं की जीत है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घमंड के साथ कहा, हमने मोदी सरकार को झुका दिया। इसमें कोई दो राय नहीं कि छात्रों और युवाओं के देशव्यापी आंदोलन के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफा लेना पड़ा। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह आंदोलन सिर्फ छात्रों और युवाओं का था? दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट बताती है कि जंतर मंतर के आंदोलन में देश विरोधी तत्व भी शामिल हो गए थे। आदतन अपराधियों ने भी स्टूडेंट का चोला ओढ़ लिया था। यही वजह रही कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जबरदस्त हिंसा हुई। दिल्ली की तरह यह आंदोलन देश भर में फैल गया और जगह जगह हिंसा होने लगी। सरकार भी मानती है कि इस हिंसा में युवाओं का कोई योगदान नहीं है, लेकिन आंदोलन में देश विरोधी तत्वों की सक्रियता से आंदोलन हिंसक हुआ। यह पहला मौका नहीं है, जब ऐसे आंदोलन में हिंसा हुई। इससे पहले सीएए (नागरिकता संशोधन कानून), किसान आंदोलन आदि के दौरान भी देश विरोधी तत्वों की सक्रियता देखने को मिली थी। किसान आंदोलन में तो सरकार को संसद में पारित कानूनों को वापस लेना पड़ा था। ताजा छात्र आंदोलन को देखते हुए धर्मेन्द्र प्रधान ने जो इस्तीफा दिया उसमें भी यह लिखा है कि राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे और बच्चे अपनी पढ़ाई और करियर पर फोकस करें, इसलिए मैं इस्तीफा दे रहा हंू। धर्मेन्द्र प्रधान का यह कथन बताता है कि छात्र आंदोलन के नाम पर देश के हालात बिगाड़ने की साजिश हो रही थी। इसलिए सवाल उठता है कि आखिर देश विरोधी ताकतों से भारत को कब तक बचाया जाएगा। हर बार देश विरोधी ताकतें ज्यादा शक्ति के साथ भारत पर हमला करती हैं। यह कहा जा सकता है कि भारत में देश विरोधी ताकतें लगातार मजबूत हो रही है। ऐसी ताकतें सिर्फ मौके का इंतजार करती है। ऐसे आंदोलनों में जिस तरह पीएम मोदी को गालियां दी जाती है उससे भी जाहिर है कि देश विरोधी ताकतें अपने मंसूबों में मोदी को सबसे बड़ा बाधक मानती है। यानी जब तक मोदी की सत्ता रहेगी, तब तक देश विरोधी ताकतों को भारत को तोडऩे का अवसर नहीं मिलेगा। यही वजह है कि ऐसे आंदोलनों में सीधे मोदी को ही टारगेट किया जाता है। धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा करवाकर पीएम मोदी ने सिर्फ अराजकता के माहौल को टाला है। देश में राष्ट्रविरोधी ताकतें कभी भी हालातों को बिगाड़ सकती है। यदि धर्मेन्द्र प्रधान को नीट पेपर लीक पर इस्तीफा देना था तो 10 मई को ही दे देना चाहिए था। नीट यूजी की परीक्षा 3 मई 2026 को हुई थी। परीक्षा होने के साथ ही पेपर लीक की खबरें आ गई थी, लेकिन तब प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिा। प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए ही 21 जून को दुबारा से परीक्षा हुई और 16 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिया गया। यानी कॉकरोच जनता पार्टी ने जुलाई माह में जो आंदोलन शुरू किया उसमें नीट यूजी पेपर लीक का तो कोई मुद्दा नहीं था। विपक्ष के नेता अब भले ही धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे का श्रेय ले, लेकिन मई में पेपर लीक के समय कोई भी राजनीतिक दल सरकार के खिलाफ आंदोलन को खड़ा नहीं कर सका। जुलाई में आंदोलन तब शुरू हुआ, जब कॉकरोच पार्टी के संस्थापक दीपके अमेरिका से भारत आए। यानी विदेश से आकर एक व्यक्ति ने देशभर में आंदोलन को खड़ा किया। जिस तरह से नीट पेपर लीक पर अब आंदोलन किया गया उसकी जांच होगी तो देश विरोधी ताकतों के चेहरे पर से नकाब भी उतर जाएगी।

 
संसद में चर्चा हो:
नीट पेपर लीक और कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। ताकि देशवासियों को आंदोलन की हकीकत का पता चल सके। अच्छा हो कि इस चर्चा में विपक्ष भी भाग लें। सरकार की ओर से सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली 2024 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा जाएगा। इस संशोधित प्रस्ताव में ही आंदोलन पर चर्चा होनी चाहिए।
 
दारा का कार्टून:
शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा और छात्रों के आंदोलन में देश विरोधी ताकतों की भूमिका को लेकर कार्टूनिस्ट जसवंत दारा ने सटीक और प्रभावी कार्टून बनाया है। इस कार्टून को मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 26-07-2026)

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Friday, 24 July 2026

 

भारत में सही मायने में लोकतंत्र है, इसलिए कीटों की श्रेणी वाले कॉकरोचों (दीमक) से भी सरकार को वार्ता करनी पड़ रही है।

यह दुखद है कि राजनीतिक स्वार्थों के खातिर विपक्ष भी कॉकरोच बन गया है।

भारत के युवाओं को स्वयं को कॉकरोच नहीं बनने देना चाहिए।
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जीव विज्ञान में कॉकरोच को तिलचट्टा भी कहा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार विश्व में तिलचट्टा प्रजातियों की 4600 किस्म है। इनमें से 30 प्रजातियां मानव बसेरों में पाई जाती है। कॉकरोच यानी तिलचट्टा की श्रेणी में दीमक भी शामिल है। दीमक से होने वाले नुकसान के बारे में हर इंसान अच्छी तरह जनता है। जिस घर में एक बार दीमक लग जाए उस घर को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। कई घरों में तो दीमक को मारने के लिए हर वर्ष जहरीली दवाई का छिड़काव करना पड़ता है। कॉकरोच और दीमक इतनी घातक होने के बाद भी विदेशी मानसिकता वाले कुछ भारतीय युवकां ने अपने राजनीतिक दल का नाम कॉकरोच जनता पार्टी रख लिया है। भारत के लिए यह चिंताजनक बात है कि कॉकरोच की मानसिकता वाले युवकों के बहकावे में देश के अनेक युवा भी आ गए है। चूंकि भारत में सही मायने में लोकतंत्र है, इसलिए सरकार को कॉकरोचों से भी वार्ता करनी पड़ रही है। इसे दुखद ही कहा जाएगा कि राजनीतिक स्वार्थों की खातिर विपक्ष भी कॉकरोच बन गया है। बड़ी अजीब बात है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में कॉकरोच पार्टी पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन कर रही है। वह भी तब जब लीक हुआ नीट का पेपर दोबारा से शांतिपूर्ण तरीके से हो गया है और परिणाम घोषित होने के बाद सफल अभ्यर्थी देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की तैयारियां कर रहे हैं। यानी नीट का जो मुद्दा समाप्त हो गया उसे कॉकरोच की मानसिकता वाले कुछ युवा अब उठा रहे हैं। सब जानते हैं कि कॉकरोच पार्टी का संस्थापक अमेरिका में रह रहा भारतीय मूल का अभिजीत दीपके है। अमेरिका में समय समय पर भारत विरोधी गतिविधियां संचालित होती है। जग जाहिर है कि अभिजीत दीपके को भी अमेरिकी भारत विरोधी संस्थाओं का सहयोग है, लेकिन इसके बाद भी भारत में कॉकरोच पार्टी ने आंदोलन शुरू कर दिया। गंभीर बात तो यह है कि इस पार्टी के प्रतिनिधि सरकार से आदेशात्मक भाषा में वार्ता कर रहे हैं। 24 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र प्रसाद से जो वार्ता हुई उसमें दो कॉकरोच सौरभ दास और आशुतोष रांका ने आदेश दिया कि सरकार सबसे पहले धर्मेन्द्र प्रधान से शिक्षा मंत्री के पद से हटाए। प्रधान को मंत्री पद से हटाने की मांग विपक्षी दल लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष के दबाव के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से नहीं हटाया। सवाल उठता है कि क्या कुछ कॉकरोचों की मांग पर प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से हटा दिया जाएगा? असल में नीट पेपर लीक तो बहाना है। असल मकसद धर्मेन्द्र प्रधान की आड़ में भारत की नई शिक्षा नीति को कमजोर करना है। प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए ही नई नीति को प्रभावी तरीके से लागू किया गया है। जो इतिहास भारत को कमजोर दिखता था, उस इतिहास में भी प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते ऐतिहासिक बदलाव किए गए। भारत के स्व: को पुनर्जागरण करने में प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका है। विदेशी मानसिकता वाले कॉकरोच नहीं चाहते कि भारत में स्व: को पुनर्जीवित किया जाए।

युवा बचे:
भारत के युवाओं को कॉकरोच मानसिकता से बचना चाहिए। भारत के युवाओं को यह समझना चाहिए कि मौजूदा समय में युद्ध की विभीषिका से दुनिया भर के देश परेशान है। इतने बुरे दौर में भी भारत मजबूती के साथ खड़ा है। ऐसे में युवाओं को ऐसा कोई कृत्य नहीं करना चाहिए जिससे देश कमजोर हो। युवाओं को लेकर पीएम मोदी कितने संवेदनशील है, इसका ताजा उदाहरण 23 जुलाई की रात 12 बजे वीडियो संदेश जारी करना पड़ा। युवाओं को प्रधानमंत्री के इस वीडियो संदेश के सार को समझना चाहिए। पीएम मोदी की नीतियों की वजह से ही भारत के युवाओं को विदेशों में रोजगार के अच्छे अवसर मिले हैं, वहीं भारत में भी स्टार्ट एप के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। आज लाखों युवक वर्क फार्म होम सिस्टम से घर बैठे प्रतिमाह लाखों रुपए का वेतन ले रहे हैं। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-07-2026)

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