Friday, 7 August 2026

 ममता बनर्जी की टीएमसी वाले सांसद, यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर ने पीएम मोदी का आतिथ्य स्वीकारा।

सवाल-फिर पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी कैसे।
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7 अगस्त को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के उन 26 सांसदों को सुबह के नाश्ते पर आमंत्रित किया, जो हाल ही में केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए में शामिल हुए हैं। इन सांसदों में टीएमसी के चुनाव चिह्न पर लोकसभा का सांसद बनने वाले यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर भी शामिल रहे। इन तीनों मुस्लिम सांसदों ने पीएम मोदी के पास खड़े होकर गर्व से फोटो भी खिंचवाया। तीनों ने पीएम मोदी की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि मोदी की नीतियों से देश का विकास हो रहा है। मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल में मुसलमान स्वयं को ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि तीनों मुस्लिम सांसदों के संसदीय क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रहे यूसुफ पठान ने तो अपने गृह प्रदेश गुजरात को छोड़कर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से चुनाव लड़ा था। पठान ने वर्ष 2024 में इस सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी को इसलिए हराया कि यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा थी। आमतौर पर यह आरोप लगता है कि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी है। ऐसा आरोप ममता बनर्जी के साथ साथ कांग्रेस के राहुल गांधी, सपा के अखिलेश यादव आदि भी लगाते हैं, लेकिन सवाल उठता है कि जब मुस्लिम वोटों के दम पर चुनाव जीते मुस्लिम सांसद ही पीएम मोदी की प्रशंसा कर रहे हैं, तब मोदी मुस्लिम विरोधी कैसे हो सकते हैं? तीनों मुस्लिम सांसदों ने पीएम मोदी के नेतृत्व में आस्था प्रकट की जो यह दर्शाता है कि पीएम मोदी सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास के तहत मुसलमानों का भी पूरा ख्याल रखते हैं। यदि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी होते तो यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर भी भी मोदी के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करते। ममता बनर्जी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव जैसे नेता मोदी के बारे में कुछ भी कहे, लेकिन मुस्लिम सांसदों ने यह प्रदर्शित किया है कि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी नहीं है। 7 अगस्त की मुलाकात में पीएम मोदी ने टीएमसी और शिवसेना से आए सांसदों को भरोसा दिलाया कि उनके राजनीतिक हितों की रक्षा की जाएगी। यानी वर्ष 2029 में होने वाले लोकसभा के चुनाव में यह सभी सांसद भाजपा के उम्मीदवार होंगे। 


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 तो क्या जेलर सद्दाम हुसैन की वजह से अजमेर सेंट्रल जेल में बंद मुस्लिम कैदियों की मौज हो रही है?

जेल में बंद मुस्लिम कैदियों का रिश्तेदारों से संवाद वाला वीडियो उजागर।

यह जेल की सुरक्षा के लिए खतरनाक स्थिति है।
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भास्कर अखबार ने यह दावा किया कि उसके पास अजमेर सेंट्रल जेल का एक ऐसा एक्सक्लूसिव वीडियो है जो यह दर्शाता है कि जेल में बंद मुस्लिम कैदी अपने रिश्तेदारों से वीडियो कॉलिंग पर संवाद कर रहे हैं। गंभीर और चिंता का विषय यह है कि इस मामले में जेलर सद्दाम हुसैन की भूमिका है। जेलर सद्दाम हुसैन मुस्लिम कैदियों को अपने कक्ष में बुलाता है और फिर अपने मोबाइल से उनके रिश्तेदारों से संवाद करवाता है। अब एक ऐसा वीडियो उजागर हुआ है, जिसमें जेल में बंद ताहिर चिश्ती, उसका बेटा तौफीक चिश्ती और भांजा फखर चिश्ती जेलर सद्दाम हुसैन के कक्ष में बैठकर जेल से बाहर अपने रिश्तेदार फारुख चिश्ती से संवाद कर रहे हैं। फारुख चिश्ती ने इस वीडियो कॉलिंग के लिए जेलर सद्दाम का शुक्रिया अदा भी किया। आरोप है कि सद्दाम हुसैन जेलर के पद का फायदा उठाकर मुस्लिम कैदियों की बात मोबाइल पर उनके रिश्तेदारों से करवाता रहता है। ताजा मामला इसलिए भी गंभीर है कि तौफीक चिश्ती के संबंध बब्बर खालसा जैसे आतंकी संगठनों से भी रहे हैं। तौफिक चिश्ती पर आतंकी संगठनों को हथियार और ड्रग्स सप्लाई करने के आरोप है। ऐसे आरोपों में ही तौफिक चिश्ती पंजाब के जेलों में बंद रहा। तौफीक चिश्ती अपने पिता ताहिर चिश्ती के साथ अजमेर जेल में इसलिए बंद है कि उस पर अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह के खादिम हाजी बिलाल हुसैन चिश्ती पर जानलेवा हमला करने का आरोप है। तीनों आरोपी सात वर्ष की सजा अजमेर जेल में काट रहे हैं। सेंट्रल जेल से अपने रिश्तेदारों से वीडियो कॉल पर बात करने की इस घटना से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं। सरकार को इस पूरे मामले की गंभीरता के साथ जांच पड़ताल करवानी चाहिए । अजमेर में सेंट्रल जेल के साथ साथ हाई सिक्योरिटी जेल भी है। इन दोनों जेलों में कैदियों के पास मोबाइल मिलना आम बात है। लेकिन ताजा मामले में तो कैदी जेलर का मोबाइल ही इस्तेमाल कर रहे हैं। 


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अजमेर में गहलोत और पायलट गुट फिर आमने-सामने।

नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस की फूट चौराहे पर।

पायलट समर्थकों ने धर्मेन्द्र राठौड़ के दखल पर ऐतराज जताया।
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अगले महीने जब अजमेर नगर निगम के चुनाव होने हैं, तब कांग्रेस की फूट चौराहे पर है। चुनाव से पूर्व, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के समर्थक आमने सामने हो गए है। पायलट समर्थक माने जाने वाले पूर्व शहर अध्यक्ष विजय जैन और गत दो बार दक्षिण क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे हेमंत भाटी के नेतृत्व में पायलट समर्थकों ने 7 अगस्त को एक बैठक की। इस बैठक में बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता शामिल हुए। विजय जैन और हेमंत भाटी ने आरोप लगाया कि आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ के दखल से अजमेर शहर में कांग्रेस को नुकसान हो रहा है।
मौजूदा शहर अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल भी राठौड़ के दबाव में काम कर रहे हैं। इससे पुराने और निष्ठावान कांग्रेसियों की की उपेक्षा हो रही है। मौजूदा समय में अजमेर शहर में भाजपा के खिलाफ जबरदस्त माहोल है। इस बार नगर निगम का मेयर कांग्रेस का बन सकता है, लेकिन धर्मेन्द्र राठौड़ की विभाजनकारी नीतियों के कारण कांग्रेस का कार्यकर्ता निराश है। जैन और भाटी ने कहा कि आखिर धर्मेन्द्र राठौड़ अजमेर की राजनीति में क्यों सक्रिय हैै? राठौड़ ने तो पूर्व में बानसूर (जयपुर ग्रामीण) से चुनाव लड़ा। उनकी राजनीतिक गतिविधियां बानसूर में ही रही है। लेकिन राठौड़ अब अजमेर में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे कांग्रेस का कार्यकर्ता स्वीकार नहीं करेगा। जैन और भाट ने कहा कि हमारा प्रयास कांग्रेस को मजबूत करने का है। जबकि धर्मेन्द्र राठौड़ अजमेर में कांग्रेस को कमजोर कर रहे हैं। जैन और भाटी के आरोपों के जवाब में राठौड़ का कहना रहा है कि वे गत 8 वर्षों से अजमेर की राजनीति में लगातार सक्रिय हैं। उनका पैतृक गांव अजमेर के निकट नांद है। उन्होंने गत 8 वर्षों से अजमेर में कांग्रेस संगठन को मजबूती दी है। आज जो लोग कांग्रेस को मजबूत करने का दावा कर रहे हैं, उन्हीं के कारण अजमेर शहर की दोनों विधानसभा सीटों पर गत पांच बार से लगातार कांग्रेस उम्मीदवारों की हार हो रही है। कांग्रेस को नगर निगम में भी अपना बोर्ड बनाने का अवसर नहीं मिल रहा है। राठौड़ ने कहा कि शहर अध्यक्ष जयपाल के नेतृत्व में कांग्रेस एकजुट है। मैंने तो प्रत्येक कार्यकर्ता का सम्मान किया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि धर्मेन्द्र राठौड़ को पूर्व सीएम गहलोत का कट्टर समर्थक माना जाता है। सितंबर 2022 में अब अशोक गहलोत के समर्थन में कांग्रेस के विधायकों की समानांतर बैठक हुई, तब जिन 3 कांग्रेसी नेताओं को हाईकमान ने अनुशासनहीनता का नोटिस दिया, उसमें धर्मेन्द्र राठौड़ भी शामिल थे। आज भी राठौड़, गहलोत के साथ खड़े हैं। राठौड़ का कहना है कि मैं अशोक गहलोत का पक्का समर्थक हंू। 

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Wednesday, 5 August 2026

 

ब्यावर की भी सीमेंट फैक्ट्री से ग्रामीणों का जीना मुश्किल।

प्रतिबंधित केमिकल कचरे के इस्तेमाल से पर्यावरण, पानी जमीन सब कुछ खराब हो रहा है।

ब्यावर का जिला और पुलिस प्रशासन चुप: पर्यावरण विभाग के अधिकारी तो अंधे हैं।
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राजस्थान के ब्यावर के निकट अंधेरी देवरी में श्री सीमेंट का जो प्लांट (फैक्ट्री) लगा हुआ है उसकी वजह से आसपास के ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। यह प्लांट देश के सुविख्यात बांगड़ औद्योगिक घराने का है। यूं तो बांगड़ घराना समाजसेवा का दावा करता है,लेकिन ब्यावर प्लांट की वजह से ग्रामीणों को सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में फैक्ट्री में प्रतिबंधित केमिकल का उपयोग हो रहा है। यह केमिकल सीमेंट बनाने के काम आने वाले पत्थरों को बरीक किया जाता है, लेकिन कोयले की कीमत बढ़ने के कारण बांगड़ समूह श्री सीमेंट फैक्ट्री में प्रतिबंधित केमिकल का उपयोग कर रहा है। यही कारण है कि फैक्ट्री से जो धुंआ निकलता है, उसकी वजह से आस पास के लोगों को सांस लेने में मुश्किल हो रही है। कई ग्रामीणों को चर्म रोग हो गया है। घरों पर मिट्टी की परत आ रही है। इस जहरीली परत को बार बार हटाना भी कठिन है। फैक्ट्री से जो जरीला पानी निकलता है उसकी वजह से खेती की जमीन बंजर हो रही है ।आसपास के कुओं और तालाबों का पानी भी जहरीला हो गया है। पीड़ित ग्रामीण फैक्ट्री के बाहर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन ब्यावर का जिला और पुलिस प्रशासन चुप है। उल्टे ग्रामीणों को ही धमकी दी जा रही है कि उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। जिला और पुलिस प्रशासन नहीं चाहता कि श्री सीमेंट के खिलाफ कोई धरना प्रदर्शन हो। जहां तक पर्यावरण  विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल है तो इस विभाग के अधिकारी अंधे है। उन्हें फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला धुआ और पानी नजर नही नहीं आ रहा है। कहा जा सकता है कि ग्रामीणों की सुनने वाला कोई नहीं यहां यह कि ग्रामीणों को सुनने वाला कोई नहीं है। यहां यह उल्लेखनीय है कि ब्यावर की प्रभारी राज्य के उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी है, ग्रामीणों को पीड़ा मंत्री तक पहुंच गई है। लेकिन दीया कुमारी ने भी अभी तक श्री सीमेंट के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश नहीं दिए है। प्रभारी मंत्री की खामोशी से ब्यावर के पुलिस और जिला प्रशासन की मौज हो गई है। श्री सीमेंट की फैक्ट्री जिस अंधेरी देवरी गांव में स्थित है, वह मसूदा विधानसभा क्षेत्र में आता है। मौजूदा समय में मसूदा से भाजपा विधायक वीरेंद्र सिंह कानावत है, लेकिन कानावत के कानों में भी ग्रामीणों की आवाज सुनाई नहीं दे रही। ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत भी विधायक कानावत के साथ ही खड़े हे। ब्यावर जिला राजसमंद संसदीय क्षेत्र में आता है। मौजूदा समय में श्रीमती महिमा कुमारी भाजपा की सांसद है। शायद महिला कुमारी को भी यह भी पता नहीं होगा कि श्री सीमेंट की फैक्ट्री की वजह से ग्रामीणों को परेशान हो रही है। महिमा कुमारी मेवाड़ राजघराने की सदस्य हे। हो सकता है कि सांसद होने के कारण महिमा कुमारी के बांगड़ समूह से अच्छे संबंध हो।   

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 राजस्थान में ओबीसी की 92 जातियों में से सिर्फ 10 जातियों के लोगों की ही राजनीति में भागीदारी।

सवाल- क्या कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा वंचित 82 जातियों के लोगों को पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में उम्मीद बनाएंगे?
आखिर क्यों 10 जातियों के लोग ही सांसद, विधायक, प्रधान, निकाय प्रमुख आदि बनते हैं?
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5 अगस्त को जयपुर में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) प्रतिनिधित्व आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जज मदनलाल भाटी ने 900 पन्नों वाली आयोग की रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनावों में ओबीसी वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण होगा, लेकिन इस रिपोर्ट में चौकाने वाली बात यह है कि राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी की 92 जातियों हैं, लेकिन इनमें से 10 जातियों के लोगों की ही राजनीति में भागीदारी है। यानी इन 10 जातियों के लोग ही सांसद, विधायक, प्रधान, शहरी निकायों के प्रमुख आदि बनते हैं। शेष वंचित 82 जातियों के लोग पार्षद और सरपंच भी नहीं बन पाते। इस बड़े अंतर को देखते हुए ही आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश भाटी ने कहा कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट केवल जनसंख्या को आधार मानकर नहीं बनाई है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन को भी देखकर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके लिए प्रदेश भर के 74 लाख 85 हजार ओबीसी वर्ग के परिवारों से संवाद किया गया है। यह वाकई अजीत बात है कि राजस्थान में ओबीसी वर्ग की ऐसी 82 जातियां हैं, जिनका कोई भी प्रतिनिधि आज तक सांसद, विधायक आदि नहीं बन सकता है। यानी 92 जातियों का समूह होने के बाद भी सिर्फ 10 जातियों के लोग ही मलाई खा रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या ओबीसी वर्ग की वंचित जातियों को राजनीति में प्रतिनिधित्व नहीं मिलना चाहिए? कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने जब देश भर में जाति आधारित जनगणना की मांग की तो उनका तर्क था कि वंचित जातियों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। राहुल गांधी कहना रहा कि जाति आधारित जनगणना से पता चल जाएगा कि अभी तक राजनीति में किन जातियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। केंद्र सरकार ने राहुल गांधी की मांग पर जाति आधारित जनगणना करवाने का निर्णय लिया है, लेकिन जब राजस्थान में ओबीसी वर्ग की रिपोर्ट उजागर हो गई है, तब सवाल उठता है कि क्या  प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा  इसी वर्ष होने वाले पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में ओबीसी की वंचित 82 जातियों के लोगों को उम्मीदवार बनाएंगे? राहुल गांधी का सपना तभी पूरा होगा, जब राजस्थान में ओबीसी वर्ग की 82 जातियों के लोगों को आरक्षित सीटों पर उम्मीदवार बनाया जाए। डोटासरा को अच्छी तरह पता है कि ओबीसी की वे 10 जातियां कौनसी है, जो राजनीति की मलाई खा रही है। यदि वंचित जातियों के लोगों को ओबीसी का लाभ दिया जाता है तो इस वर्ग में सामाजिक समानता भी आएगी। मौजूदा समय में सिर्फ 10 जातियों के लोग ही ओबीसी के 21 प्रतिशत कोटे का लाभ प्राप्त कर रहे है। यह स्थिति सिर्फ राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं बल्कि सरकारी नौकरियों के क्षेत्र में भी है। 

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