यह डोटासरा के जले पर नमक छिड़कना जैसा है।
जयपुर रेलवे स्टेशन पर लोकप्रियता का प्रदर्शन। स्वयं गहलोत ने डाला वीडियो।
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2 अगस्त को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने अपने गृह क्षेत्र जोधपुर के दौरे पर रहे। गहलोत ने अपनी आदत के मुताबिक जमकर बयानबाजी की। गहलोत ने राजनीतिक चतुराई से गत 30 जुलाई को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान का भी जवाब दिया। मालूम हो कि 30 जुलाई को पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय और उनके समर्थक प्रदेश कार्यालय आने से पहले जयपुर में गहलोत के सरकारी आवास पर चले गए थे तो डोटासरा ने नाराजगी जताई थी। डोटासरा की यह नाराजगी गहलोत के नागवार लगी। यही वजह रही कि गहलोत ने डोटासरा से जुड़े 6 वर्ष पुराने शिक्षकों के तबादले में रिश्वतखोरी का मामला उठा दिया। गहलाते जब भी मीडिया से संवाद करते हैं तब मीडिया कर्मियों के रूप में अपने समर्थकों को भी सवाल पूछने का मौका देते हैं। चूंकि गहलोत को डोटासरा के 30 जुलाई वाले बयान का जवाब देना था, इसलिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षकों के तबादले में रिश्वतखोरी का सवाल उठाया गया। गहलोत चाहते तो अपना जवाब भाजपा के शासन तक सीमित रख सकते थे, लेकिन गहलोत ने 6 वर्ष पुराना जयपुर स्थित बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित शिक्षक दिवस के समारोह की घटना का भी उल्लेख कर दिया। गहलोत का कहना रहा कि तब मैं मुख्यमंत्री था और मैंने सामान्य शिष्टाचार के नाते समारोह में उपस्थित शिक्षकों से पूछ लिया कि क्या तबादलों में रिश्वत देनी पड़ती है? तो अधिकांश शिक्षकों ने हां में जवाब दिया। उस समय मेरे साथ शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा भी उपस्थित थे, लेकिन बाद में किसी भी शिक्षक ने मुझे रिश्वत का कोई सबूत नहीं दिया। गहलोत ने कहा कि हर शासन में शिक्षकों के तबादले में रिश्वत के आरोप लगते है। गहलोत ने यह बात कहकर डोटासरा के जले पर नमक छिड़कने वाला काम किया है। भाजपा के नेता आज तक इस मुद्दे को लेकर डोटासरा को कटघरे में खड़ा करते हैं और अब गहलोत ने भी यह बता दिया कि 6 वर्ष पहले मेरी सरकार के शिक्षा मंत्री डोटासरा पर भी तबादलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। चूंकि गहलोत चतुर राजनीतिज्ञ है, इसलिए स्वयं की जुबान से डोटासरा को रिश्वतखोर नहीं कहा। लेकिन बड़ी चतुराई से यह दर्शा दिया कि शिक्षकों ने डोटासरा पर भी रिश्वत लेने के आरोप लगाए। मालूम हो कि वर्ष 2018 में जब गहलोत मुख्यमंत्री बने तब डोटासरा को स्कूली शिक्षा मंत्री बनाया गया था, लेकिन 2020 में सचिन पायलट की बगावत के बाद डोटासरा को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया। तब उन्हें शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। देखना होगा कि गहलोत ने 6 वर्ष पुराना मामला उठाकर डोटासरा पर जो हमला किया है, उसका जवाब आने वाले दिनों में डोटासरा किस प्रकार से देते हैं।
लोकप्रियता का प्रदर्शन
2 अगस्त को पूर्व सीएम गहलोत ने जयपुर से जोधपुर का सफर ट्रेन से किया। इस सफर के पीछे गहलोत को स्वयं की लोकप्रियता दिखाना था। गहलोत जब जयपुर के प्लेटफार्म पर पहुंचे तो उनके कैमरा मैन पहले से ही तैयार थे। गहलोत ने प्लेटफार्म पर खड़े यात्रियों से उनके हाल चाल पूछे। कई यात्रियों ने गहलोत को पहचाना उनसे आत्मीय मुलाकात भी की। गहलोत ने एक कुली से भी उसके हाल जाने। प्लेटफार्म के बा जब गहलोत ट्रेन के कोच में पहुंचे तो यहां भी एक एक यात्री से हाथ मिलाया। कोई डेढ़ दो मिनट के इस वीडियो को फिल्मी गाने के साथ गहलोत ने स्वयं सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। इस वीडियो के माध्यम से यह जताने का प्रयास किया गया है कि वे आज भी प्रदेश भर में लोकप्रिय हैं।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-08-2026)