Tuesday, 15 September 2026

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निर्वाचन क्षेत्र अलवर और खैरथल के 19 निकायों में से भाजपा को मात्र तीन में बहुमत। लेकिन 45 पार्षदों वाली खैरथल नगर परिषद में कांग्रेस के सभापति के दावेदार विक्रम चौधरी को ही भाजपा में शामिल कर लिया। अब सभी निकायों में भाजपा के बोर्ड का दावा। भंवर जितेंद्र सिंह और टीकाराम जूली हाथ मसलते रह जाएंगे। ================== केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के निर्वाचन क्षेत्र अलवर और खैरथल के 19 शहरी निकायों में से मात्र 3 में भाजपा को बहुमत मिला। 14 सितंबर को घोषित चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा, यह अलवर के सांसद भूपेंद्र यादव की व्यक्तिगत हार है। अलवर संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं ने दर्शा दिया है कि अब अलवर में भूपेंद्र यादव ने जन समर्थन खो दिया है। दोनों जिलों में 19 शहरी निकायों के 580 वार्डों में चुनाव हुआ। इनमें से भाजपा उम्मीदवार 271 वार्डों में ही जीत पाए। कांग्रेस को भले ही 133 वार्डों में जीत मिली हो, लेकिन 228 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी पार्षद बने। कांग्रेस के नेता अभिजीत का जश्न ही मना रहे थे कि 15 सितंबर को भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस को जबरदस्त मात दे दी। 45 पार्षदों वाली खैरथल नगर परिषद में भाजपा को मात्र 8 सीटें मिली, जबकि कांग्रेस को 20, लेकिन वहीं 17 निर्दलीय उम्मीदवार भी पार्षद बने। कांग्रेस आश्वस्त थी कि निर्दलियों की मदद से सभापति चुन लिया जाएगा, लेकिन भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस में सभापति पद के सबसे मजबूत दावेदार विक्रम चौधरी को ही भाजपा में शामिल कर लिया। चौधरी ने दावा किया कि उनके साथ 8 और कांग्रेस पार्षदों ने भाजपा का समर्थन किया है। खैरथल में सभापति चुनने के लिए 23 पार्षदों की जरूरत है। अब 17 में से अनेक निर्दलीय पार्षद भाजपा उम्मीदवार को समर्थन देने के लिए तत्पर है। असल में परिणाम आने के बाद विक्रम चौधरी ने भंवर जितेंद्र सिंह ेस संपर्क साधने का प्रयास किया, लेकिन राजशाही प्रवृत्ति वाले भंवर जितेंद्र सिंह से मुलाकात नहीं हो सकी। कांग्रेस में राजशाही की स्थिति को देखते हुए भूपेंद्र यादव ने विक्रम चौधरी से संपर्क साधा और उन्हें सभापति के लिए भाजपा का उम्मीदवार बनाने का भरोसा दिलाया। यही वजह रही कि विक्रम चौधरी 8 कांग्रेस पार्षदों के साथ भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंच गए। यानी जिस नगर परिषद में भाजपा का 45 में से 8 सीटें मिली, उस में अब भाजपा का सभापति नब जाएगा। भूपेंद्र यादव ने परिणाम के अगले ही दिन कांग्रेस को जो मात दी उसकी चर्चा अब कांग्रेस के उच्च स्तर पर हो रही है। भले ही 19 निकायों में से सिर्फ 3 में भाजपा को बहुमत मिला है। लेकिन खैरथल के बाद अलवर शहर के नगर निगम में भी भाजा का बोर्ड बनवाना आसान हो गया है। 65 पार्षदों वाले निगम में भाजपा को 28 और कांग्रेस को 23 सीट मिली है हालांकि 14 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से भाजपा आसानी के साथ बोर्ड बनवा रही है, लेकिन अब कांग्रेस के 23 पार्षदों में भी फूट की आशंका उत्पन्न हो गई है। अलवर और खैरथल जिलों के जिन तीन निकायों में भाजपा को बहुमत मिला है, उनमें नौगावां नगर पालिका, खेरली और मुंडावर पालिका शामिल है। वही खैरथल की तीनों नगर परिषद भिवाड़ी, खैरथल और तिजारा में भाजपा को बहुमत नहीं मिला है। तिजारा के 35 वार्डों में से भाजपा को सिर्फ 3 वार्डों में जीत दर्ज कर सकी है, लेकिन यहां भी भाजपा का बोर्ड बनेगा, क्योंकि निर्दलीय पार्षदों की संख्या 31 है। कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली है। इसी प्रकार रामगढ़, मालाखेड़ा, बहादुरपुर, कटुमर, थानागाजी, राजगढ़, लक्ष्मणगढ़, गोविंदगढ़, बड़ौदामेव, किशनगढ़बास,कोटकासिम तथा टपूकड़ा पालिकाओं में भी भाजपा को बहुमत नहीं मिला है। हाथ मसलते रह जाएंगे: भूपेंद्र यादव को भाजपा में चुनावी राजनीति का चाणक्य माना जाता है। अलवर में कांग्रेस की कमान राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह और प्रदेश में प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली के पास है, लेकिन भूपेंद्र यादव ने चुनाव परिणाम के बाद जो आक्रामक रणनीति अपनाई है, उसमें भंवर जितेंद्र सिंह और जूली हाथ मसलते रह जाएंगे। जूली आए दिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर हमला करते है, लेकिन खैरथल की घटना बताती है कि जूली को अपने गृह क्षेत्र में पकड़ नहीं है। वहीं भूपेंद्र यादव ने सांसद बनने के बाद अलवर के आम लोगों से सीधा संवाद किया। यही वजह है कि 19 में से 16 निकायों में बहुमत नहीं मिलने के बाद भी अधिकांश निकायों में भाजपा का बोर्ड बनने जा रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 16-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
यूजीसी के नए प्रावधानों को अभी कानूनी रूप नहीं दिया गया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जैन आचार्य पुलक सागर महाराज को भरोसा दिलाया। ================== राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने तीन दिवसीय राजस्थान प्रवास के दौरान 14 सितंबर को भीलवाड़ा में जैन आचार्य पुलक सागर महाराज से मुलाकात की। भागवत ने सनातन धर्म की परंपरा के अनुरूप आचार्य का पाद प्रक्षालन कर वंदन किया। इस अवसर पर दोनों के बीच सामाजिक समरसता और देश के ज्वलंत मुद्दों पर विमर्श हुआ। करीब पौन घंटे की मुलाकात में पुलक सागर महाराज ने यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए प्रावधानों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे उच्च शिक्षण संस्थानों में सामान्य वर्ग के बच्चों का पढऩा मुश्किल हो जाएगा। नए प्रावधानों की वजह से सामान्य वर्ग में भय का माहौल हे। जैन आचार्य ने प्रावधानों को जनविरोधी बताया। इस पर मोहन भागवत का कहना रहा कि यह अभी केवल प्रस्ताव है। इसे कानूनी रूप नहीं दिया गया है। भागवत ने जैन आचार्य को भरोसा दिलाया कि समाज की एकता और समरसता को तोड़ने वाला कोई कानून लागू नहीं होगा। सरकार के स्तर पर इस दिशा में मंथन चल रहा है। भागवत ने कहा कि संघ तो समरसता के लिए देश भर में सेवा कार्य कर रहा हे। हमारे स्वयं सेवक कच्ची बस्तियों में जाकर सेवा का काम कर रहे हैं। जैन आचार्य की चिंता पर संघ प्रमुख ने जो भरोसा दिलाया है वह समाज में सकारात्मक संदेश देता है। असल में यूजीसी के प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर देश भर में सामान्य वर्ग के लोग भयभीत है। यही वजह है कि राजपूत, ब्राह्मण और अन्य जातियों के संगठन लगातार आंदोलन कर रहे है। श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल मकराना ने तो कहा है कि यदि यूजीसी के प्रस्तावों को वापस नहीं लिया गया तो अगले चुनावों में भाजपा को नुकसान होगा। नए प्रावधानों में जिस तरह एससी एसटी के साथ ओबीसी वर्ग को भी आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है, वह बेहद खतरनाक निर्णय है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 16-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
अजमेर के कांग्रेसी पार्षद बेंगलुरु पहुंचे। अब भाजपा के लिए सेंध लगाना आसान नहीं। 80 में से 37 पार्षद कांग्रेस के हैं। मेयर चुनने के लिए 41 वोट चाहिए। ================== कांग्रेस इस बार हर कीमत पर अजमेर में अपना मेयर बनवाना चाहती है। इसलिए नवनिर्वाचित पार्षदों को जयपुर से हवाई जहाज से बेंगलुरु भेज दिया गया है। सभी पार्षद बेंगलुरु की एक सुरक्षित होटल में ठहरे हुए है। बेंगलुरु भेजने का निर्णय इसलिए लिया गया, क्योंकि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। कांग्रेस को आशंका थी कि यदि पार्षदों को राजस्थान में रखा गया तो पुलिस उठाकर ले जाएगी। खास तौर से निर्दलीय पार्षदों को तो अपने कब्जे में किया ही जा सकता है। अजमेर नगर निगम में मेयर चुनने के लिए 41 पार्षदों की जरूरत है। कांग्रेस को 80 में से 37 सीटें मिली है, लेकिन कांग्रेस के समर्थन में 11 निर्दलीय पार्षदों में से चार समर्थन दे रहे हैं। कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि उनके पास 42 पार्षदों का जुगाड़ है। हालांकि 32 सीटें जीत कर भाजपा भी दावा कर रहे हैं कि मेयर उन्हीं की पार्टी का बनेगा। भाजपा को उम्मीद है कि मतदान वाले दिन 21 सितंबर को कांग्रेस के पार्षदों में बगावत होगी और अनेक पार्षद भाजपा के उम्मीदवार को अपना वोट देंगे। चूंकि स्थानीय निकाय के चुनाव में बदल बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता, इसलिए पार्षदोंं की सदस्यता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भाजपा के एक नेता का दावा है कि भले ही कांग्रेस के पार्षद सुरक्षित स्थान पर हो, लेकिन कई पार्षदों से संपर्क बना हुआ है। लेकिन अब जब कांग्रेस के पार्षद बेंगलुरु पहुंच गए हैं, तब भाजपा का सेंध लगाना आसान नहीं है। कांग्रेस के पार्षदों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता और आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ के पास है। जानकार सूत्रों के अनुसार अजमेर के कांग्रेसी पार्षदों को बेंगलुरु भिजवाने में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की भूमिका रही है। बताया जा रहा है कि राठौड़ के आग्रह पर ही गहलोत ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से बात की और तभी कांग्रेसी पार्षदों को बेंगलुरु ले जाना का निर्णय लिया गया। कहा जा सकता है कि कांग्रेसी पार्षद कर्नाटक पुलिस की निगरानी में है। मालूम हो कि धर्मेन्द्र राठौड़ को विधायकों की बाड़ाबंदी करने का खास अनुभव है। वर्ष 2020 में भी राठौड़ ने मुख्यमंत्री गहलोत के लिए कांग्रेस के विधायकों के साथ साथ निर्दलीय और अन्य पार्टियों के विधायकों की बाड़ाबंदी की थी। धर्मेन्द्र राठौड़ भले ही समर्थक हो, लेकिन निकाय चुनाव में राठौड़ ने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ भी अच्छे संबंध बनाए। यही वजह है कि अजमेर में कांग्रेस का मेयर बनवाने की पूरी जिम्मेदारी धर्मेन्द्र राठौड़ के पास है। यदि 21 सितंबर को कांग्रेस का मेयर बनता है तो 36 वर्ष बाद अजमेर में कांग्रेस को इतनी बड़ी सफलता मिलेगी। वहीं भाजपा में मेयर बनवाने की जिम्मेदारी विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के पास है। देवनानी ने ही भाजपा के 32 और कुछ निर्दलीय पार्षदों को सुरक्षित स्थान पर रखा हुआ है। भाजपा को अपना मेयर बनवाने के लिए 9 निर्दलीय पार्षदों की जरूरत है। देखना होगा कि भाजपा 9 अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ किस प्रकार करती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 16-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
धर्मेन्द्र राठौड़ तो बाड़ाबंदी के उस्ताद हैं। ऐसे में भाजपा के लिए अजमेर में नगर निगम में बोर्ड बनाना आसान नहीं। =============== अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों का परिणाम 14 सितंबर को घोषित हुआ। परिणाम के मुताबिक 37 सीटें कांग्रेस, 32 भाजपा  और 11 सीटें निर्दलीयों को मिली है। निगम में मेयर बनाने के लिए 41 पार्षदों का समर्थन चाहिए। चूंकि किसी भी दल को बहुत नहीं मिला है, इसलिए कांग्रेस और भाजपा ने अपने अपने निर्वाचित पाष्ज्र्ञदों की बाड़ाबंदी कर रखी है। इस बाड़ा बंदी में कांग्रेस का पलड़ा भारी है, क्योंकि कांग्रेस की बाड़ाबंदी वरिष्ठ नेता धर्मेन्द्र राठौड़ के हाथों में है। राठौड़ को बाड़ा बंदी का उस्ताद माना जाता है। वर्ष 2020 में जब डिप्टी सीएम सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस के 18 विधायक दिल्ली चले गए तब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थन में 100 विधायकों की बाड़ांदी धर्मेन्द्र राठौड़ के निर्देशन में ही हुई। करीब 100 विधायक एक माह तक जयपुर और जैसलमेर की होटलों में कैद रहे। इसके बाद सितंबर 2022 में विधायकों की समानांतर बैठक करवाने में भी धर्मेन्द्र राठौड़ की भूमिका रही। एक स्थान पर विधायकों को कैसे सुरक्षित रखा जाता है, इसका अच्छा अनुभव राठौड़ को है। जिन राठौड़ ने अशोक गहलोत के लिए विधायकों की बाड़ाबंदी की उन राठौड़ के लिए अजमेर के 41 पार्षदों की बाड़ाबंदी कोई मायने नहीं रखती। 32 पार्षदों वाली भाजपा भी चाहती है कि 11 निर्दलीयों की मदद से निगम में भाजपा का मेयर बनवाया जाए, इसलिए भाजपा ने भी अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी कर रखी है। लेकिन धर्मेन्द्र राठौड़ के रहते कांग्रेस की बाड़ाबंदी से पार्षदों को बाहर निकालना आसान काम नहीं है। धर्मेन्द्र राठौड़ ने शहर जिलाध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल के साथ मिलकर जो मजबूत रणनीति बनाई है, उसमें चार निर्दलीय पार्षदों को 14 सितंबर को ही सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। जिन चार पार्षदों को राठौड़ और जयपाल ने अपने कब्जे में लिया है उनके नामों की जानकारी कांग्रेस के बंधक पार्षदों को नहीं है। राठौड़ का प्रयास है कि जहां कांग्रेस के पार्षदों को एकजुट रखा जाए वहीं निर्दलीय पार्षदों का समर्थन ज्यादा से ज्यादा लिया जाए। धर्मेन्द्र राठौड़ के सामने यह भी चुनौती है कि 37 पार्षद है वे डॉ. राजकुमार जयपाल, द्रौपदी कोली, हेमतं भाटी, विजय जैन, महेंद्र सिंह रलावता के समर्थकों में बंटे हुए हैं। फिलहाल तो राठौड़ ने कांग्रेस के सभी नेताओं को एकजुट कर रखा है। वहीं अब भाजपा पार्षदों की रणनीति की कमान उत्तर क्षेत्र के विधायक वासुदेव देवनानी ने संभाल ही है। यानी एक तरफ राठौड़ है तो दूसरी तरफ देवनानी। भाजपा को अपना मेयर बनवाने के लिए 9 पार्षदों की जरूरत है। धर्मेन्द्र राठौड़ के रहते 11 निर्दलीयों में से 9 निर्दलीयों को तोड़ना भाजपा के लिए आसान काम नहीं है। भाजपा अपना मेयर तभी बना सकती है, जब कांग्रेस के पार्षदों में फूट हो जाए। कहा जा रहा है कि देवनानी के संपर्क में कांग्रेस के कई नेता और पार्षद है। विधानसभा अध्यक्ष के पद पर रहते हुए देवनानी ने कांग्रेस के कई नेताओं को ओबलाइज किया है।    S.P.MITTAL BLOGGER ( 14-09-2026) Website- www.spmittal.inFacebook Page- www.facebook.com/SPMittalblogFollow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11Blog- spmittal.blogspot.comTo Add in WhatsApp Group- 9166157932To Contact- 9829071511
28 में से 21 राज्यों में लोकसभा चुनाव से पहले समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी। अनुच्छेद 370 और अयोध्या में राम मंदिर के बाद संघ भाजपा का बड़ा काम।   =============== केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि भाजपा शासित सभी 21 राज्यों में वर्ष 2029 तक समान नागरिक संहिता यूसीसी लागू हो जाएगी। मालूम हो कि 2029 में लोकसभा के चुनाव होने है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का प्रयास है कि अगले चुनाव से पहले पहले भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी लागू हो जाए। अभी गोवा, उत्तराखंड, गुजरात, असम, और मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू कर दिया गया है। जबकि राजस्थान, हरियाणा आदि राज्यों में विधानसभा में यूसीसी के प्रस्ताव प्रस्तुत कर दिए गए है। भाजपा का प्रयास है कि अगले चुनाव में पहले पहले देश के अधिकांश भूभाग पर यूसीसी लागू हो जाए। वर्ष 2014 में जब  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में एनडीए की सरकार बनी तो तीन बड़े काम सामने रखे गए। एक जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना, दो अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनवाना तथा तीन देश में समान नागरिक संहिता लागू करना। यह तीनों ही काम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे में शामिल रहे। तब इन तीनों कामों को करना आसान नहीं माना गया। अनेक चुनौतियों के बाद भी मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और अयोध्या में राम मंदिर बनवाने में सफल रही। मोदी सरकार का प्रयास था कि तीसरे कार्यकाल में यूसीसी को भी संसद में प्रस्ताव लाकर पूरे देश में एक साथ लागू करवाया जाए। लेकिन वर्ष 2024 में भाजपा को अपने दल पर बहुमत नहीं मिला इसलिए यूसीसी को एक साथ पूरे देश में लागू नहीं किया जा सकता। लेकिन भाजपा शासित राज्यों में एक एक कर यूसीसी को लागू किया जा रहा है। अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ऐलान कर दिया है कि 2029 तक सभी भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी को लागू कर दिया जाएगा। अनुच्छेद 370, अयोध्या में राम मंदिर के बाद जो बड़ा काम समान नागरिक संहिता का था उसे भी पूरा किया जा रहा है। हालांकि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल यूसीसी का विरोध कर रहे है, लेकिन तमाम विरोधों के बाद भी देश के अधिकांश भू भाग पर समान नागरिक संहिता लागू हो रही है। पूरी दुनिया में भारत एकमात्र देश है, जहां के नागरिकों के लिए अलग अलग कानून है। अलग अलग कानून वाला देश कभी भी विकास नहीं कर सकता। अब जब अधिकांश भू भाग पर यूसीसी लागू हो रही है, तब न केवल देश का विकास तेज होगा, बल्कि राष्ट्रीय एकता भी मजबूत होगी। कुछ मुस्मि संगठन यूसीसी का विरोध कर रहे है, लेकिन यूसीसी का सबसे ज्यादा फायदा मुस्लिम समाज की महिलाओं और बच्चों को ही है। बच्चे और महिलाएं अब तक जिन अधिकारों से वंचित रहे उन्हें अब अपने अधिकार मिलेंगे। तीन तलाक पर कानून बनने के बाद मुस्लिम महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा मिली है। यही वजह है कि मुस्लिम समाज की अनेक महिलाएं यूसीसी के समर्थन में खड़ी है।   S.P.MITTAL BLOGGER ( 14-09-2026) Website- www.spmittal.inFacebook Page- www.facebook.com/SPMittalblogFollow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11Blog- spmittal.blogspot.comTo Add in WhatsApp Group- 9166157932To Contact- 9829071511