Monday, 17 August 2026

 ढाई वर्ष में ही जमीन से आसमान में पहुंच गए सतीश पूनिया।

वसुंधरा राजे का मान सम्मान बरकरार रखा।

मन्नालाल रावत अब आदिवासियों के बीच भाजपा की पैठ जमाएंगे।

साफ सुथरी छवि का लाभ मिला सीए राजेश मंगल को।

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राजस्थान पर फोकस।  
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 17 अगस्त को जो कार्यकारिणी घोषित की है इसमें राजस्थान पर विशेष फोकस किया गया है। चूंकि राजस्थान में गत पांच बार से भाजपा और कांग्रेस के बीच सत्ता की अदला बदली हो रही है, इसलिए इस बार भाजपा के  राष्ट्रीय नेतृत्व का प्रयास है कि वर्ष 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ता भाजपा के पास ही रहे। यही वजह है कि राजस्थान से केंद्र सरकार में चार मंत्रियों की मौजूदगी के बाद संगठन में भी प्रदेश के नेताओं को भी महत्व दिया गया है। इसका असर इसी वर्ष होने वाले शहरी निकाय और पंचायती राज चुनाव पर भी पड़ेगा।

जमीन से आसमान पर:
राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया को महामंत्री बनाया गया है। सब जानते हैं कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे पूनिया ढाई वर्ष पहले विधानसभा का चुनाव हार गए थे। तब पूनिया जमीन पर आ गए थे। पूनिया का दर्द और बढ़ गया, जब भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में भी कोई पद नहीं मिला, लेकिन पूनिया ने धैर्य नहीं खाया और एक वर्ष बाद ही पूनिया को राजनीति में जमीन से थोड़ा उठने का मौका मिल गया। पूनिया को हरियाणा का प्रभारी बनाया और हरियाणा में भाजपा की फिर से सरकार बन गई। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की नजर में आने के बाद पूनिया को राजस्थान से राज्यसभा का सांसद बनाया गया। सांसद बनने के बाद अटकले लगाई गई कि पूनिया को केंद्र में मंत्री बनाया जाएगा। ऐसे अटकलों पर पूनिया ने स्वयं सख्ती से विराम लगाया। पूनिया को पता था कि राष्ट्रीय नेतृत्व उनका संगठन में ही उपयोग करेगा। जो पूनिया ढाई वर्ष पहले विधानसभा का चुनाव हार कर जमीन पर आ गए थे, वो ही पूनिया 17 अगस्त को भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री बनकर राजनीति  के आसमान पर पहुंच गए है। इसमें कोई दो राय नहीं कि पूनिया का भाजपा की राजनीति में दबदबा बढ़ा है। पूनिया की इस नियुक्ति से भाजपा को शहरी निकाय और पंचायती राज चुनाव में खासा फायदा होगा।

मान सम्मान बरकरार:
भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का मान सम्मान बरकरार रखा है। नई कार्यकारिणी में राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखा है। अमित शाह जब भाजपा के अध्यक्ष थे, तब से ही राजे उपाध्यक्ष है। भले ही राजे ने उपाध्यक्ष पद पर रहते हुए राष्ट्रीय राजनीति में कभी भी सक्रियता न दिखाई हो, लेकिन राजे के मान सम्मान को बरकरार रखा गया है। उपाध्यक्ष पद बरकरार रखने पर राजे ने अध्यक्ष नितिन नवीन का आभार जताया है। राजे के समर्थकों को अब इसी बात में खुश रहना होगा कि राजे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनी हुई है।

आदिवासियों में पैठ:
नई कार्यकारिणी में उदयपुर के भाजपा सांसद मन्नालाल रावत को एसटी मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। सांसद बनने से पहले रावत राजस्थान के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में सक्रिय थे। एसटी मोर्चे का अध्यक्ष बनने के बाद अब रावत पर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में भाजपा की पैठ जमाने की जिम्मेदारी आ गई है। प्रदेश में आदिवासी बाहुल्य बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ आदि क्षेत्रों में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) का खासा प्रभाव है। इस पार्टी का एक सांसद और चार विधायक है। देखना होगा कि रावत के नेतृत्व में अब प्रदेश में भाजपा का प्रभाव कैसे बढ़ता है।

साफ सुथरी छवि:
नई कार्यकारिणी में जयपुर के सीए राजेश मंगल को सह कोषाध्यक्ष बनाया गया है। कोषाध्यक्ष की जिम्मेदार केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के पास है। मंग लकी नियुक्ति के पीछे उनकी साफ सुथरी छवि है। मंगल की नियुक्ति कर भाजपा ने वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व देने का काम किया है। पूर्व में रामदास अग्रवाल भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके हैं।


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 राजस्थान में शहरी निकाय और पंचायती राज का चुनाव कांग्रेस ठेके पर लड़ेगी?

चार उम्मीदवारों को जिताने की गारंटी देने वाले नेता को टिकट दिया जाए-रंधावा, प्रदेश प्रभारी।
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राजनीति में अब तक तो यह सुना जाता था कि जिताऊ व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया जाए। इस कथन में कोई बुराई भी नहीं है लेकिन 17 अगस्त को राजस्थान में कांग्रेस के प्रभारी महासचिव सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शहरी निकाय और पंचायती राज चुनाव के मद्देनजर जीत का नया फॉर्मूला प्रस्तुत किया है। रंधावा ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से कहा कि चुनाव में ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया जाए तो चार अन्य उम्मीदवार को जिताने की गारंटी दे। यदि एक नेता अपने साथ चार अन्य उम्मीदवारों को जीत दिलवाएगा तो कांग्रेस को कोई हरा नहीं सकता। यदि प्रदेश में रंधावा का यह फार्मूला लागू होता है तो फिर शहरी निकायों में ऐसे नेता को पार्षद का टिकट दिया जाएगा जो अपने आस पास के चार अन्य उम्मीदवारों को भी जितवाने की गारंटी देगा। हो सकता है कि ऐसा नेता चार वार्डों में अपने पसंद के व्यक्ति को उम्मीदवार बनाए। यही फार्मूला जिला परिषद और पंचायत समितियों के वार्डों में भी लागू हो सकता है। हालांकि डोटासरा ने रंधावा के फार्मूले पर कोई टिप्पणी नहीं की है, क्योंकि राजस्थान की राजनीति में दोनों प्रमुख दलों में ऐसी कोई परंपरा नहीं है कि जीत का ठेका एक व्यक्ति को दे दिया जाए। मालूम हो कि रंधावा पंजाब में कांग्रेस के नेता है और अगले वर्ष पंजाब में विधानसभा के चुनाव होने हैं। पंजाब में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने जो रणनीति बनाई है उससे रंधावा खुश नहीं है। पंजाब में खुद रंधावा असंतुष्ट नेता की भूमिका में है। सवाल उठता है कि जो नेता अपने गृह प्रदेश में असंतुष्ट हो, वह राजस्थान में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में एकजुटता की बात कैसे कर सकता है?


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 अजमेर के जिला कलेक्टर लोकबंधु को राज्य स्तरीय सम्मान उनके मधुर और शालीन व्यवहार के कारण भी मिला है।

रात्रि चौपाल के लिए प्रदेश भर में चर्चित है।
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अजमेर के जिला कलेक्टर लोक बंधु को 15 अगस्त को बीकानेर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में प्रशंसीय राज्य सेवा एवं कुशल कार्य निष्पादन के लिए योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कलेक्टर को यह सम्मान राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिया। इसमें कोई दो राय नहीं की सरकारी योजनाओं की क्रियान्विति और जनकल्याणकारी का लाभ जरूरतमंद लोगों को दिलवाने में कलेक्टर लोक बंधु की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जो आम रास्ते कब्जों के कारण बंद थे, उन्हें भी खुलवा कर लोगों को राहत पहुंचाई गई। सरकारी और वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए भी अभियान चलाए गए।  लेकिन प्रदेश के प्रशासनिक क्षेत्रों में लोक बंधु की सबसे ज्यादा चर्चा रात्रि चौपाल को लेकर है। कलेक्टर पद की अनेक व्यवस्थाओं के बावजूद लोकबंधु ने ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि चौपाल लगाने में कोई कसरनहीं छोड़ी। कई बार तो जिला मुख्यालय पर रात 8 बजे तक काम करने के बाद लोकबंधु रात 9 बजे संबंधित गांव में रात्रि चौपाल के कार्यक्रम में शामिल हुए। लेाक बंधु ने सिर्फ दिखाने के लिए रात्रि चौपाल नहीं की, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया। लोक बंधु का राज्य स्तर पर यह सम्मान उनके मधुर और शालीन व्यवहार के कारण भी हुआ है। सत्तारूढ़ नेताओं के साथ ही नहीं बल्कि विपक्ष के नेताओं के साथ भी कलेक्टर ने हमेशा शालीन व्यवहार किया। कई बार ऐसे मौके आए जब कलेक्टर ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से अपने कक्ष से बाहर आकर भी संवाद किया। कलेक्टर के व्यवहार को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं को भी कोई शिकायत नहीं है। राजनीतिक दृष्टि से अजमेर का महत्व इसलिए भी है कि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, कैबिनेट मंत्री सुरेश रावत अजमेर जिले से ही विधायक है। देवनानी का निर्वाचन क्षेत्र उत्तर और सुरेश रावत का निर्वाचन क्षेत्र पुष्कर की सीमाएं आपस में मिली हुई है। इसके बाद भी लोकबंधु इन दोनों ताकतवर नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखते हैं। हाल ही में पुष्कर घाटी में हाईट गेट को लेकर विवाद की स्थिति हुई, लेकिन लोकबंधु ने अपने शालीन व्यवहार और प्रशासनिक कूटनीति के तहत पुष्कर और अजमेर उत्तर के लोगों को नियंत्रण में रखा। लोकबंधु देवनानी और सुरेश रावत के साथ साथ अजमेर के सांसद और केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ते। चूंकि किशनगढ़ में कांग्रेस के विधायक डॉ. विकास चौधरी है, लेकिन फिर भी लोकबंधु भाजपा और कांग्रेस के बीच तालमेल बनाए  हैं। विकास चौधरी जिले में कांग्रेस के एक मात्र विधायक है। चौधरी देहात कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी हैं। विधायक चौधरी को भी कलेक्टर के व्यवहार से कोई शिकायत नहीं है। कई जिलों के कलेक्टरों का तबादला एक वर्ष बाद ही हो जाता है। लेकिन लोकबंधु को अजमेर में दो वर्ष हो रहे हैं। लोकबंधु का अपने अधीनस्थ अधिकारियों से भ अच्छा तालमेल है। यही वजह है कि अधीनस्थ अधिकारी कलेक्टर से जब चाहे तब बिना झिझक संवाद कर सकते हैं। कलेक्टर ने जो व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा है उसमें अधीनस्थ अधिकारियों को सवालों के जवाब तत्काल देते हैं। किसी भी अधीनस्थ अधिकारी की समस्या को लोकबंधु कभी नहीं टालते। जनसमस्याओं के निदान को  लोकबंधु   पहली प्राथमिकता देते हैं। 


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नगर निगम के चुनाव के शोर के बीच भाजपा विधायक अनीता भदेल का मातृशक्ति मानसून मेला।

महिलाओं के लिए चार श्रेणियों में फैशन शो।

विजया राहटकर, दीया कुमारी जैसी दिग्गज नेत्रियां भी भाग लेंगी।

गत 6 वर्षों से लग रहा है मेला।
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अजमेर नगर निगम के चुनाव के शोर के बीच अजमेर दक्षिण क्षेत्र की भाजपा विधायक श्रीमती अनीता भदेल की पहल पर 23 अगस्त को अजमेर के ब्यावर रोड स्थित डीएवी कॉलेज के खेल मैदान पर दोपहर 2 बजे से मातृशक्ति मानसून मेला आयोजित किया जाएगा। इस मेले में शहर भर की महिलाओं को आमंत्रित किया गया है। विधायक भदेल ने कहा कि महिलाओं के इस मेले का नगर निगम के चुनाव से कोई सरोकार नहीं है, क्योंकि वे गत 6 वर्षों से प्रतिवर्ष इस मेले का आयोजन कर रही है। यह मेला प्रतिवर्ष मानसून के दौरान राखी पर्व के आसपास आयोजित किया जाता है। इस मेले का उद्देश्य महिलाओं को प्रोत्साहित करना है। आमतौर पर अधिकांश महिलाएं घरेलू कामकाज में उलझी रहती है। मेरा प्रयास होता है कि ऐसी महिलाओं को घरों से निकाल कर उत्साह व उमंग के वातावरण में लाया जाए। इसलिए चार श्रेणियां में महिलाओं के लिए फैशन शो भी आयोजित किया जा रहा है। भदेल ने बताया कि गत वर्ष डीएवी कॉलेज का खेल मैदान छोटा पड़ गया था। इस बार खेल मैदान का भी विस्तार किया गया है। मुझे इस बात की खुशी है कि मेले को लेकर शहर भर की महिलाओं में जबरदस्त उत्साह है।

महिलाओं के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया उत्सव:
विधायक भदेल ने कहा कि मातृशक्ति मानसून फेस्ट केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं बल्कि महिलाओं के लिए समर्पित एक ऐसा मंच है जहां उन्हें मनोरंजन प्रतिभा प्रदर्शन खरीदारीए खेल संस्कृति और आपसी सहभागिता का एक साथ अवसर मिलेगा। आयोजन को विशेष रूप से मातृशक्ति के लिए तैयार किया गया है तथा पूरे परिसर को चारदीवारी से सुरक्षित रखा जाएगा। व्यवस्थाओं में लगे अधिकृत कार्यकर्ताओं को विशेष बैज दिए जाएंगे।

चार श्रेणियों में होगा भव्य फैशन शो
फेस्ट का प्रमुख आकर्षण भव्य फैशन शो करेगा जिसे लहरिया, ब्राइडल, ट्रेडिशनल और रिश्ते.चार श्रेणियों में आयोजित किया जाएगा। विधायक भदेल ने बताया कि मिस लहरियाए मिस ब्राइडल और मिस ट्रेडिशनल के लिए आकर्षक पुरस्कार रखे गए हैं। जिसमें 43 इंच एलईडी वाशिंग मशीन मिक्सर ग्राइंडर एवं गिफ्ट हैंपर पुरस्कार रखे गए है।

खेलो और प्रतियोगिताओं की रहेगी भरमार
फेस्ट में महिलाओं के मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रकार के खेल एवं प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें कुर्सी रेस हाउजी बच्चों की कुर्सी रेस, बॉल अटैक पहिया घुमाओ.इनाम जीतो सहित अनेक मनोरंजक गतिविधियां शामिल हैं।

विद्यालय की छात्राओं को भी मिलेगा मंच
विधायक भदेल ने बताया कि इस वर्ष मेले में अंतर विद्यालय समूह लोक नृत्य प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जायेगा। प्रतियोगिता में भाग लेने वाली छात्राओं को मोमेंटो एवं प्रमाण.पत्र प्रदान तथा विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार से सम्मानित किया जावेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों एवं युवा पीढ़ी को राजस्थान की लोक संस्कृति परम्पराओं और कला से जोड़ना तथा उन्हें बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देना है।

राजस्थान के विभिन्न जिलों से आएंगी स्वयं सहायता समूहों की बहनें
फेस्ट में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों के लिए विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। विधायक भदेल ने बताया कि धौलपुर जयपुर राजसमंद अलवर और टोंक सहित विभिन्न स्थानों से स्वयं सहायता समूहों की बहनें अपने हाथ से तैयार किए गए उत्पाद की स्टॉल लगाएंगी। इन स्टॉल्स पर हैंडमेड राखियांए हैंडीक्राफ्ट उत्पादए साडिय़ांए सूटए पर्सए वॉल हैंगिंग्सए मांडना एवं अन्य कलात्मक उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। विशेष रूप से ऐसे पर्स भी बिक्री के लिए रखे जाएंगेए जिन्हें फूलों एवं फलों के पल्प से तैयार किया जाता है और जिनमें चमड़े का उपयोग नहीं किया जाता।

सावन के उत्सव में झूलों का भी विशेष इंतजाम
विधायक भदेल ने कहा कि सावन बिना झूलों के अधूरा है इसलिए महिलाओं के लिए फेस्ट में विभिन्न प्रकार के झूलों की विशेष व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि झूलों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है और उनकी जांच भी करवाई गई है।

खान.पान के लिए भी होगी विशेष व्यवस्था
फेस्ट में खानपान की भी व्यापक व्यवस्था रहेगी। विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे। विधायक भदेल ने बताया कि इंदौर के प्रसिद्ध सैंडविच के लिए विशेष वेंडर भी आयोजन में आएंगे। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के व्यंजन और खाद्य सामग्री उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए फेस्ट में खेलने झूलने खरीदारी करने और खान.पान का आनंद लेने की पूरी व्यवस्था की गई है।

बच्चों के मनोरंजन के लिए कैमल सफारी और हॉर्स राइडिंग
फेस्ट में बच्चों के लिए भी विशेष आकर्षण रहेंगे। बच्चों के लिए कैमल सफारी हॉर्स राइडिंग सहित विभिन्न मनोरंजक गतिविधियां रखी गई हैं।

प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर की महिला हस्तियों की रहेगी मौजूदगी
फेस्ट में प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर की महिला हस्तियों को भी आमंत्रित किया गया है। विधायक भदेल ने बताया कि प्रदेश की उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर राष्ट्रीय महिला मोर्चा की अध्यक्ष वनथी श्रीनिवासन तथा राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष महिला मोर्चा भाजपा एवं पूर्व विधायक कालका हरियाणा लतिका शर्मा सहित अनेक विशिष्ट महिला अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी को भी आमंत्रित किया गया है और उनकी स्वीकृति की प्रतीक्षा है। मेले के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829270288 पर विधायक भदेल से ली जा सकती है। 

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 शहरी चुनाव का असर देखने के लिए पंचायती चुनाव की लॉटरी प्रक्रिया को टाला।

लेकिन अब राजस्थान भर में आचार संहिता को लेकर असमंजस की स्थिति।
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राजस्थान के इतिहास में संभवत यह पहला अवसर है, जब वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत शहरी निकायों और पंचायती राज के चुनाव एक साथ हो रहे है। सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को इसी वर्ष 15 नवंबर तक दोनों संस्थाओं के चुनाव करवाने है। तय कार्यक्रम के अनुसार 17 और 18 अगस्त को पंचायती राज से जुड़ी जिला परिषद के वार्ड, पंचायत समितियों के प्रधान और वार्ड सदस्यों, ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच के लिए आरक्षित वार्डों की लॉटरी निकालनी थी, लेकिन 16 अगस्त को रविवार के अवकाश के बावजूद राज्य सरकार ने लॉटरी निकालने की प्रक्रिया को अचानक स्थगित कर दिया। अब अगले माह सितंबर में 71 और 18 तारीख को आरक्षित वर्गों की लॉटरी निकालने की घोषणा की गई है। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि लॉटरी प्रक्रिया को अचानक स्थगित क्यों किया गया, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पहले शहरी निकायों का चुनाव असर देखना चाहती है, इसलिए सरकार ने पहले चरण में शहरी निकायों के चुनाव करवाने का निर्णय लिया है। हालांकि चुनाव आयोग ने अभी शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन सितंबर माह में शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। यानी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव अक्टूबर और नवंबर में होंगे। ऐसी स्थिति में पंचायती राज चुनाव की लॉटरी को एक माह के लिए टाल दिया गया है। इससे दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के उन नेताओं को भी फायदा होगा जो शहरी निकायों के चुनाव में वार्ड पार्षद, निकायों के अध्यक्ष, सभापति और मेयर नहीं बन सके। हाल ही में जो परिसीमन हुआ है उसमें अनेक ग्राम पंचायत शहरी निकायों में शामिल हो गई है। यानी ऐसे अनेक राजनेता है जिनकी राजनीति शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में है।

असमंजस की स्थिति:
सरकार ने पंचायती राज चुनाव में लॉटरी प्रक्रिया को टाल कर चुनाव आचार संहिता को लेकर असमंजस की स्थिति खड़ी कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग जिस दिन शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा, उसी दिन से शहरी सीमा में चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। लेकिन वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता लागू नहीं होगी। जबकि प्रदेश भर में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सीमाएं आपस में मिली हुई है। कहा जा सकता है कि किसी ग्राम पंचायत की सीमाएं शहरी क्षेत्र में किसी शहरी निकाय के वार्ड की सीमा ग्रामीण क्षेत्र में घुसी हुई है। ऐसे में आचार संहिता का पालना करवाना बेहद मुश्किल होगा। 


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