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Thursday, 2 July 2026
अजमेर के एक भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी कोलकाता में तो दूसरी विधायक अनिता भदेल दिल्ली में सक्रिय।
दोनों का उद्देश्य राजस्थान का विकास।
बीसलपुर बांध में पानी की आवक शुरू।
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2 जुलाई को अजमेर उत्तर के विधायक वासुदेव देवनानी (राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष) कोलकाता में प्रवासी राजस्थानियों के साथ रहे तो अजमेर दक्षिण की भाजपा विधायक श्रीमती अनिता भदेल (पूर्व मंत्री) दिल्ली में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल व केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ सक्रिय दिखी। देवनानी से कोलकाता में प्रवासी राजस्थानियों से आग्रह किया कि वह अपनी मातृभूमि राजस्थान में भी निवेश करे। कोलकाता में देवनानी का 15 से भी ज्यादा सामाजिक संगठनों ने शानदार स्वागत किया। इनमें ब्यावर स्थित श्री सीमेंट के चेयरमैन हरिमोहन बांगड भी शामिल रहे। इसी दिन देवनानी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से भी मुलाकात की। वही भाजपा विधायक श्रीमती अनिता भदेल ने केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से मुलाकात कर जनहित से जुड़े मुद्दों पर विमर्श किया। भदेल ने केंद्रीय मंत्री से राजस्थान के विकास में सहयोग की अपेक्षा जताई। भदेल ने दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर दिल्ली कैंट से वाया रींगस जंक्शन (श्री खाटूश्याम जी) से अजमेर तक प्रतिदिन वंदे भारत ट्रेन चलाने की मांग की। इसके साथ ही अजमेर ब्यावर, सोजत मारवाड़ और जोधपुर से पाली के बीच प्रतिदिन सुबह शाम डेम ट्रेन संचालित करने की मांग रखी। यानी अजमेर के दोनों भाजपा विधायक राजस्थान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अजमेर में इन दोनों विधायकों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देवनानी और भदेल लगातार 5वीं बार विधायक चुने गए हैं।
बांध में पानी की आवक:
अजमेर जयपुर, टोंक, दौसा जिले के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध में बरसात के पानी की आवक शुरू हो गई है। बांध के पानी की निगरानी रखने वाले इंजीनियरों के अनुसार तीन जुलाई को सुबह 8 बजे बांध का जलस्तर 313.57 मीटर माप गया। गर्मी के दिनों में बांध का जल स्तर 313.50 मीटर तक चला गया था। यानी बांध में करीब 7 सेंटीमीटर पानी की आवक हुई है। बांध की कुल भराव क्षमता 315.50 मीटर है। बांध में पानी की आवक से चार जिलों के लोगों ने राहत महसूस की है।
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राजस्थान सरकार में बैठे भाजपा नेताओं को संघ प्रचारक दुर्गादास जी की पुस्तक अपने घुमंतू पढ़नी चाहिए।
अपराधी नहीं बल्कि क्रांतिकारियों के मददगार थी घुमंतू जातियां।
10 प्रतिशत आरक्षण अलग से नहीं बल्कि अपने कोटे में से ही मांग रहे हैं।
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एक जुलाई को जयपुर में जब विमुक्त समुदाय के लोग अपनी मांगों को लेकर जेडीए ग्राउंड पर धरना प्रदर्शन कर रहे थे, तब उनका पुलिस के साथ टकराव हो गया। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया जिसकी वजह से हालात बिगड़े। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना रहा कि एक ओर सरकार के प्रतिनिधि वार्ता का प्रस्ताव दे रहे थे, तो दूसरी ओर पुलिस ने जेडीए ग्राउंड से जबरन खदेडऩे के लिए लाठी चार्ज किया। अभी भी विमुक्त समुदाय के अनेक लोग पुलिस की हिरासत में है। विमुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधि भीखू सिंह धाबाई ने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे लोग हमारे साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं कर रहे हैं। पुलिस के साथ टकराव के कुछ भी कारण रहे हो, लेकिन राजस्थान में मौजूदा सरकार में बैठे भाजपा नेताओं को विमुक्त समुदाय से संवाद करने से पहले संघ प्रचारक दुर्गादास जी की पुस्तक अपने घुमंतू पढ़ लेनी चाहिए। पुलिस जिन घुमंतू, अद्र्धघुमंतू और विमुक्त समुदाय के लोगों पर लाठियां बरसा रही है, वे डीएनटी समुदाय के लोगों का देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। दुर्गादास जी की पुस्तक के बारे में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भैया जी जोशी ने लिखा है कि सामान्य सुविधाओं से वंचित शासन प्रशासन द्वारा प्राप्त होने वाले अधिकारों से कोसो दूर और समाज द्वारा उपेक्षित इस समुदाय के करोड़ों लोग देश में है। ये समुदाय किसी षडय़ंत्र का शिकार हुआ हे। आवश्यकता है कि सारा समाज ऐसे समूहों को समझे, अपना माने, इतिहास में उनके किए पुरुषार्थ का स्मरण करें। उनकी समस्याओं को समझ कर समाधान करे। वहीं इस पुस्तक में दुर्गादास जी ने इस समुदाय के बारे में अनेक खोजपूर्ण और महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी है। जिससे पता चलता है कि घुंतू, विमुक्त जनजाति माने जाने वाले सपेरे भाट, भोपा, नट, बाजीगर, भांड भारोडा, दमामी, बंजारा, रेबारी, गडरिया, सांसी, कंजर, नायक, बाबरी, जोगी, कुचबंधा, ओड, सिंगीवाल, गाडिय़ा लुहार, सिकलीगर, खुर पल्टस आदि के लोग न केवल बहादुर रहे बल्कि देश की आाजदी में जुटे क्रांतिकारियों की मदद की। क्रांतिकारियों की मदद करने के कारण ही 1871 में अंग्रेजों ने इन जातियों को अधिसूचित (नोटिफाइड) कर दिया। इतना ही नहीं इन जातियों को अपराधी प्रवृत्ति का मानते हुए अंग्रेजों ने गांव के बाहर पिंजरे बनवाए और इन जातियों के लोगों को इन पिंजरों में रखा। खुले मैदान में बने पिंजरों में कोई सुविधा नहीं थी। अंग्रेजों की ज्यादतियों के बाद भी इस समुदाय के लोगों ने क्रांातिकारियों को हथियार उपलब्ध करवाने में मदद की। चूंकि अंगे्रजों ने इन जातियों को अपराधी घोषित कर दिया था, इसलिए इतिहास में इन जातियों की बहादुरी का उल्लेख बहुत कम हुआ। गंभीर बात तो हय है कि आजादी के पांच वर्षों तक ये जातियां नोटिफाइड ही रही। 1952 में जब इन जातियों को डीनोटिफाइड किया गया, तब समाज में थोड़ा सम्मान मिला। चूंकि इन जातियों के लोगों की प्रवृत्ति घुमंतू रही, इसलिए सरकार की सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल सका। दुर्गादास जी ने अपने घुमंतू पुस्तक में डीएनटी जातियों की विस्तार से जानकारी दी है। सरकार में बैठे भाजपा के नेता यदि दुर्गादास जी की पुस्तक को पढ़ेंगे तो उन्हें पता चलेगा कि इन जातियों का देश की आजादी में कितना बड़ा योगदान है। चिंताजनक बात तो यह है कि देश की आजादी के 80 वर्ष बाद भी इन जातियों के लोग अपने अधिकारों से वंचित हैं। इन जातियों में अनुसूचित जाति के साथ साथ जनजाति के लोग भी शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनजाति समुदाय के लिए हमेशा चिंतित रहते हैं। लेकिन राजस्थान में भाजपा सरकार की पुलिस इन जनजाति के लोगों पर ही लाठियां बरसा रही है।
अपने आरखण में ही मांग:
1 जुलाई को जयपुर में हुए संघर्ष और डीएनटी समुदाय की समस्याओं को लेकर 2 जुलाई को एनडीटीवी राजस्थान चैनल पर लाइव डिबेट हुई। सायं पांच बजे प्रसारित इस डिबेट में मेरे साथ विमुक्त संघर्ष समिति के संयोजक भीखू सिंह धाबाई भी शामिल हुए। धाबाई ने कहा कि हमारी 10 प्रतिशत की आरक्षण की मांग को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाहा है। हमें भी पता है कि संविधान के मुताबिम 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता। हम अलग से आरक्षण की मांग नहीं कर रहे है। विमुक्त समुदाय की जातियां एससी और एसटी वर्ग में भी आती है। हमारी मांग है कि एससी-एसटी के लिए जो निर्धारित आरक्षण है उसी में से हमारी जातियों के लिए दस प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि एससी एसटी वर्ग में जिन जातियों को अभी तक आरक्षण नहीं मिला है, उन्हें विशेषतौर पर आरक्षण का लाभ दिया जाए। धाबाई ने कहा कि एससीएसटी वर्ग की प्रभावशाली जातियां ही पूरा आरक्षण ले लेती हैं और हमारी अति पिछड़ा जातियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता। विमुक्त समाज की एससी एसटी की अनेक जातियां ऐसी हैं जिन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक की नौकरी नहीं मिली है।
विमुक्त जातियों के नायक:
विमुक्त जातियों के नायकों में क्रांतिवीर उमाजी नायक, भीमाजी नायक, लक्खी शाह बंजारा, गोविंद गुरु, संत सेवालालजी महाराज, क्रांतिकारी डाकू सुल्ताना, अनगढ़ बाबाजी (अमराभक्त) शामिल हैं। इसके साथ ही जाहरवीर, गोगा देव, बाबा रामदेव, देवी अहिल्या बाई होल्कर आदि को आराध्य देव माना जाता है।
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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 2 जुलाई को जब भ्रष्टाचार के मगरमच्छों को जेल में रखने की बात कह रहे थे, तभी भिवाड़ी में कृषि अधिकारी खाद व कीटनाशक दवाओं के निर्माताओं से वसूली कर रहे थे।
भ्रष्टाचार के मगरमच्छों को किसी का भी डर नहीं है।
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2 जुलाई को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मसूदा के देवमाली से वीबी जी रामजी योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए सीएम शर्मा ने कहा कि भ्रष्टाचार के मगरमच्छ जेल में ही रहेंगे। उन्होंने कांग्रेस सरकार में जलदाय मंत्री रहे महेश जोशी और जल जीवन मिशन के प्रभारी आईएएस सुबोध अग्रवाल की तुलना भ्रष्टाचार के मगरमच्छों से की। सीएम शर्मा ने सीना ठोक कर कहा कि राजस्थान में किसी भी स्थिति में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 2 जुलाई को सीएम शर्मा जब मसूदा में भ्रष्टाचार के खिलाफ बोल रहे थे, तभी अलवर के भिवाड़ी में कृषि विभाग के अधिकारी खाद और कीटनाशक दवाओं के निर्माताओं से जांच का डर दिखाकर लाखों रुपए की वसूली कर रहे थे। एसीबी ने कृषि अधिकारी महेश मीणा के बैग से एक लाख 48 हजार और चंदा राम गुर्जर के बैग से 1 लाख 15 हजार रुपए की राशि बरामद की। इन दोनों के साथ ही अन्य कृषि अधिकारी भगवान सहाय यादव और कार के ड्राइवर रमेश चंद मीणा को भी गिरफ़्तार किया। असल में कृषि विभाग की इस टीम ने भिवाड़ी कोटपुतली, बहरोड की 20 फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया। बाद में इन अधिकारियों ने जांच का डर दिखाकर फैक्ट्री मालिकों से वसूली की। कृषि विभाग के अधिकारी खुले आम वसूली तब कर रहे थे, जब राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा है। मीणा ने नकली खाद और घटिया कीटनाशक बनाने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ अभियान चला रखा है। अधिकारियों को पता है कि उनके मंत्री भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं, लेकिन तीन कृषि अधिकारियों के भ्रष्टाचार से पता चलता है कि भ्रष्टाचारियों को किसी का भी डर नहीं है। इसे कृषि अधिकारियों की दिलेरी ही कहा जाएगा कि मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के सख्त रवैये के बाद भी खुलेआम वसूली हो रही है। इससे भ्रष्टाचार की जड़ों अंदाजा लगाया जा सकता है।
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Wednesday, 1 July 2026
रिश्ते सुधारने के लिए भारत और पाकिस्तान की 117 हस्तियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखे।
लेकिन पहलगाम में जब 26 हिंदू पर्यटकों को धर्म पूछकर मौत के घाट उतार दिया जाता है, जब इन हस्तियों का मुंह बंद क्यों हो जाता है?
सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस जैसी संस्थाओं से सावधान रहने की जरुरत।
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भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने के लिए दोनों देशों की 117 हस्तियों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखे हैं। पत्र में दोनों प्रधानमंत्रियों से आग्रह किया गया है कि दोनों देश सीमाओं से आपस में जुड़े हुए है, इसलिए दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध होने चाहिए। पत्र में राजनीतिक संबंधों के साथ साथ कारोबार संबंधों को भी सुधारने पर जोर दिया गया है। यह पत्र सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस नाम की संस्था की पहल पर लिखा गया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सुधरने चाहिए, लेकिन सवाल उठता है, जब 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में बैसरन घाटी में धर्म पूछकर 26 हिंदू पर्यटकें को मौत के घाट उतार दिया जाता है और हत्यारे मुस्लिम आतंकी पाकिस्तान में शरण ले लेते हैं, तब इन हस्तियों का मुंह बंद क्यों हो जाता है? तब यह हस्तियां पाकिस्तान और आतंकियों की आलोचना क्यों नहीं करते? इतना ही नहीं जब पहलगाम के आतंकियों को भारत की सेना ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान में घुसकर मारती है, तब इन्हीं हस्तियों को पाकिस्तान बेचारा नजर आता है। ऐसी हस्तियां ही भारतीय सेना से ऑपरेशन सिंदूर के सबूत मांगती है। ऐसी हस्तियां धर्मनिरपेक्षता का चोला ओढ़कर सांप्रदायिक सौहार्द की दुहाई भी देती है। धर्मनिरपेक्षता के एक तरफा चेहरे की वजह से ही भारत को काफी नुकसान हो चुका है। धर्म निरपेक्षता तभी सफल होती है, जब दूसरा पक्ष भी सौहार्द दिखाए। पहलगाम में 26 हिंदुओं की हत्या करने और फिर धर्मनिरपेक्षता वादियों के चुप रहने से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते कभी नहीं सुधर सकते हैं। सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस नाम की संस्था ने भारत में जिन हस्तियों के हस्ताक्षर करवाए हैं, उनमें जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के साथ साथ राजद के सांसद मनोज झा के भी हस्ताक्षर है। ऐसी हस्तियां तो शुरू से ही पाकिस्तान की समर्थक रही है। देखा जाए तो फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की वजह से ही कश्मीर घाटी से चार लाख हिंदुओं को पलायन करना पड़ा। आज भी ये कश्मीरी हिंदू अपने ही देश में शरणार्थी बन कर रह रहे हैं ,भारत की सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस जैसी संस्थाओं से भी सावधान रहने की जरूरत है। असल में जब तक पाकिस्तान में कट्टरपंथी संगठनों पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक भारत के साथ रिश्ते नहीं सुधर सकते। पाकिस्तान में बैठे कट्टरपंथी नेता ही आज भी भारत में आतंकी गतिविधियां करवा रहे हैं। अब तो नशीले पदार्थ भिजवा कर युवा पीढ़ी को खराब किया जा रहा है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-07-2026)
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श्री गंगानगर में दुष्कर्म के अड्डे बनी तीन होटलों को मिट्टी में मिलाया।
ऐसी कार्यवाही राजस्थान भर में होनी चाहिए।
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एक जुलाई को राजस्थान के श्रीगंगानगर में होटल जॉय इन, होटल ड्रीम और होटल सफायर पर जेसीबी चलाकर मिट्टी में मिला दिया गया।आरोप है कि होटलें दुष्कर्म के अड्डे बनी हुई थी। हाल ही में एक मामला एक नाबालिग का सामने आया। इन होटलों के संचालकों ने नाबालिग को अपने होटल में रखा और फिर कई युवकों से गैंग रेप करवाया। एक जुलाई को प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाते हुए इन होटलों पर जो कार्यवाही की उसकी अब सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। राजस्थान में संभवत: अब यह पहला अवसर होगा, जब दुष्कर्म के आरोप के मद्देनजर एक साथ तीन होटलों पर जेसीबी चलाई गई। स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी कार्यवाही से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सहमति ली होगी। श्रीगंगानगर में होटलों पर जो कार्यवाही हुई वैसी कार्यवाही राजस्थान भर में होना चाहिए। असल में राजस्थान के शहरों में अनेक होटलों में महिलाओं के साथ दुष्कर्म होते हैं। कई बार तो क्षेत्रीय नागरिक भी शिकायत करते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जाती। अनेक बार बलात्कार की शिकार युवती होटल का नाम भी बताती है, लेकिन फिर भी कार्यवाही नहीं होती। श्रीगंगानगर के प्रशासन ने तीन होटलों पर जेसीबी चलाकर सराहनीय काम किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चाहिए कि श्रीगंगानगर जैसी कार्यवाही राजस्थान भर में करवाई जाए। तभी होटल संचालकों में भय होगा। बलात्कार की घटना के बाद कोई होटल संचालक अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है। जिस होटल में दुष्कर्म हुआ, उसके लिए होटल का मालिक भी जिम्मेदार है। कई बार देखा गया है कि मोटे किराये के लालच में संदिग्ध व्यक्तिों को होटल का कमरा दे दिया जाता है।
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