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Sunday, 19 July 2026
प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह पर रोक के नियम को मुस्लिम विरोधी न माना जाए।
ब्लड रिलेशन में शादी होने से जनरेटिक (आनुवांशिक) बीमारियां भी साथ आती है।
इसलिए सनातन संस्कृति में भाई-बहन के साथ साथ मौसी, चाची, मामा, बुआ आदि के बच्चों के बीच विवाह पर रोक है।
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मध्यप्रदेश में विधानसभा का पांच दिवसीय सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक भी प्रस्तुत किया जाएगा। 19 जुलाई को मंत्रिमंडल की बैठक में यूसीसी विधेयक को मंजूरी दे दी गई। इस विधेयक में विवाह, तलाक, दत्तक ग्रहण जैसे मामलों में एक कानून लागू करने का प्रस्ताव है। विवाह के लिए लड़की की उम्र 18 और लड़के के लिए 21 वर्ष अनिवार्य की गई है। इसके साथ ही प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह पर रोक लगाने का प्रावधान भी रखा गया है, लेकिन इस प्रावधान को लेकर मध्यप्रदेश में राजनीति भी शुरू हो गई है। प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह को रोक लगाने के नियम को मुस्लिम विरोधी माना जा रहा है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के नेता वोट की राजनीति के चलते कुछ भी कहे, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ब्लड रिलेशन में विवाह होने से जनरेटिक यानी आनुवांशिक बीमारियां भी साथ आ जाती है। यानी विवाहित जोड़े के बच्चों को बीमारियां स्वत: ही मिल जाती है। आमतौर पर देखा गया है कि यदि किसी पिता को दम, शुगर बीपी आदि का रोग होता है तो उसके बच्चों को भी यह रोग हो ही जाता है। अब यदि ब्लड रिलेशन में ही विवाह होते हैं तो विवाहित जोड़े के बच्चों को भी स्वत: ही बीमारियों के गुण मिल जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए ही मध्यप्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता के विधेयक में प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह को रोकने का प्रावधान किया है। इसलिए इसे मुस्लिम विरोध नहीं मानना चाहिए। देखा जाए तो यह नियम मुसलमानों के हित में ही है। हर धर्म के माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे स्वस्थ और निरोगी हो। कोई भी माता पिता यह नहीं चाहेगा कि उनके ब्लड की वजह से बच्चे संक्रमित हो।
सनातन संस्कृति में रोक:
भले ही चिकित्सा विज्ञान ने अब बताया हो कि ब्लड रिलेशन में विवाह हानिकारक है, लेकिन सनातन संस्कृति में तो पहले ही भाई बहन के साथ साथ मौसी, चाची, मामा बुआ आदि के बच्चों के बीच विवाह पर रोक है। चूंकि इन रिश्तों वाले लड़के-लड़की को भाई-बहन माना जाता है, इसलिए सनातन संस्कृति में भाई-बहन के बीच विवाह नहीं हो सकता। भले ही आधुनिक दौर में सनातन संस्कृति में भी अनेक परंपराओं को तोड़ा जा रहा है। लेकिन अधिकांश मामलों में ऐसे विवाह नहीं होते हैं। सनातन संस्कृति में तो एक ही गोत्र के बच्चों को भी भाई बहन माना गया है। इसलिए एक गोत्र में विवाह निषेध है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-07-2026)
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राष्ट्रगान की तरह वंदे मातरम गीत को भी मिलेगा कानून संरक्षण।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह राज्यसभा में विधेयक प्रस्तुत करेंगे।
सरकारी शिक्षण संस्थाओं में अनिवार्य रूप से गाया जाएगा वंदे मातरम।
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20 जुलाई से संसद का मानसूत्र सत्र शुरू हो रहा है। इस सत्र में हंगामा करने के लिए विपक्ष ने योजना बनाई है, लेकिन वहीं नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार ने भी अपने नजरिए से देश हित में संसद में विधेयक प्रस्तुत करने की योजना बनाई है। जानकार सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इसी सत्र में वंदे मातरम गीत को कानून संरक्षण देने के लिए विधेयक प्रस्तुत करेंगे। इस विधेयक की मंजूरी के बाद वंदे मातरम गीत को भी राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण मिल जाएगा। यानी जिस प्रकार राष्ट्रगान गाना अनिवार्य है, उसी प्रकार वंदे मातरम गीत को गाना भी अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यक्ति अपनी मान्यताओं के चलते वंदे मातरम गीत को नहीं गाता है तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही हो सकती है। सरकार ने पहले से ही घोषणा कर रखी है कि देश भर के शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम गीत को गाना अनिवार्य है। चूंकि अभी वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण नहीं मिला हुआ है, इसलिए अनेक शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम का गायन नहीं हो पा रहा है। सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए ही मानसून सत्र में विधेयक प्रस्तुत करने का फैसला किया है। इसके लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने व्यापक तैयारियां की है। माना जा रहा है कि 20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन ही वंदे मातरम से जुड़े विधेयक को प्रस्तुत कर दिया जाएगा। विधेयक को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पेश करेंगे। वहीं विपक्ष के सूत्रों का कहना है कि वंदे मातरम की कानूनी अनिवार्यता का संसद के दोनों सदनों में विरोध किया जाएगा। असल में वंदे मातरम गीत के कुछ शब्दों पर मुस्लिम संगठनों को ऐतराज है। यही वजह है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता इस विधेयक का लगातार विरोध कर रहे हैं। जबकि सरकार का मानना है कि स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम गीत की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-07-2026)
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भारत के लोकतंत्र को खतरा होता तो अवकाश के दिन रविवार को सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं होती।
आखिर वांगचुक को सरकारी से प्राइवेट अस्पताल में क्यों शिफ्ट करवाना चाहती है पत्नी गीतांजलि?
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विपक्ष खासकर कांग्रेस बार बार कहती है कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। यदि विपक्ष का यह आरोप सही होता तो 19 जुलाई को रविवार के अवकाश के दिन भी सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट सुनवाई नहीं करता। डॉ. गीतांजलि चाहती थी कि उनके पति सोनम वांगचुक को दिल्ली के सरकारी सफदरजंग अस्पताल से प्राइवेट वेदांता में शिफ्ट कर दिया जाए। इसके लिए गीतांजलि ने रविवार को ही दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया। डॉ. गीतांजलि के आग्रह को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने अवकाश के दिन सुनवाई की। यह प्रदर्शित करता है कि देश में संवैधानिक संस्थाएं बिना किसी दबाव में काम कर रही है। देश के आम नागरिक को भी विशेष अधिकार मिले हुए हैं, जिसके अंतर्गत अवकाश वाले दिन भी हाईकोर्ट खुलता है। सवाल यह भी है कि आखिर डॉ. गीतांजलि अपने पति सोनम वांगचुक को सरकारी से प्राइवेट अस्पताल में क्यों शिफ्ट करना चाहती है? सब जानते हैं कि किसी भी प्राइवेट अस्पताल से ज्यादा सुविधाएं सरकारी अस्पताल में होती है। दिल्ली का सफदरजंग अस्पताल तो सरकार की शान है। यही वजह है कि कांग्रेस की शीर्ष नेता श्रीमती सोनिया गांधी भी जरुरत पडऩे पर इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ही आती है। मालूम हो कि सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को ही अनशन स्थल जंतर मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चूंकि वांगचुक गत 20 दिनों से अनशन पर थे, इसलिए उनके स्वास्थ्य को देखते हुए पुलिस को कार्यवाही करनी पड़ी। सोनम वांगचुक स्वस्थ रहे, इसकी जिम्मेदारी अब सफदरजंग अस्पताल और सरकार की है। लेकिन यदि वांगचुक किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती रहते हैं तो फिर उनके जीवन की जिम्मेदारी पत्नी गीतांजलि की होगी। वांगचुक के जीवन को अमूल्य मानते हुए ही हाईकोर्ट ने भी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति नहीं दी है। यह बात अलग है कि कि डॉ. गीतांजलि हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं है और अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रही है। डॉ. गीतांजलि की न्यायिक सक्रियता भी दिखाती है कि उन्हें लोकंत्र के हर स्तर पर अपनी बात रखने का अधिकार है। एक और डॉ. गीतांजलि अपने पति को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की जिद पर अड़ी हुई है तो वहीं सरकार के विरुद्ध मोर्चा भी खोल रखा है। डॉ. गीतांजलि ने कहा कि 20 जुलाई को जंतर मंतर से संसद तक होने वाले मार्च का नेतृत्व वे स्वयं करेंगी। उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा में गड़बड़ी होने के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर ही वांगचुक ने आमरण अनशन शुरू किया था।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-07-2026)
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Friday, 17 July 2026
वर्ष 2024 से आनासागर में मछलियों को निकालने का ठेका ही नहीं हुआ, इसलिए क्षमता से ज्यादा मछलियां।
एसटीपी बनने से पहले विश्राम स्थली में प्रति वर्ष उर्स में 20 हजार जायरीन ठहरते थे।
गत वर्ष 1250 एफटीएफ पानी की निकासी हुई, इस से चार आनासागर भर जाते।
कांग्रेस के शासन में पूर्व विधायक डॉ. बाहेती और डॉ. जयपाल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के डायरेक्टर बने थे।
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अजमेर के बीचों बीच बने आनासागर में इन दिनों रोजाना बड़ी संख्या में मछलियां मर रही है, मछलियों के मरने की खबरें मीडिया में छाई हुई है। मरी मछलियों की दुर्गंध से आसपास के लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है। असल में मछलियों के मरने का एक प्रमुख कारण आनासागर में क्षमता से अधिक मछलियों का होना है। वर्ष 2024 में आनासागर में मछलियों को निकालने का ठेका ही नहीं दिया गया। वर्ष 2024 से पहले प्रतिवर्ष मत्स्य विभाग आनासागर का ठेेका देता था। इससे सरकार को राजस्व की प्राप्ति होने के साथ साथ मछलियों को भी निकाल लिया जाता था। संबंधित ठेकेदार ही काफी हद तक आनासागर में साफ सफाई का काम भी करता था। प्रतिवर्ष मछलियां निकालने से मछलियों और आनासागर के पानी के बीच संतुलन भी बना रहता था। अब जब 2024 मछली निकालने का काम हो ही नहीं रहा है, तब मछलियों की बढ़ती संख्या का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि मानसून को देखते हुए आनासागर से करीब डेढ़ दो फीट पानी की निकासी की गई। उम्मीद थी कि जुलाई माह में ही मानसून की बरसात हो जाएगी, लेकिन बरसात न होने और आनासागर की क्षमता से ज्यादा मछलियों की संख्या होने के कारण इन दिनों प्रतिदिन मछलियां मर रही है। अच्छा हो कि पूर्व की तरह आनासागर से मछलियों के निकालने का ठेका दिया जाए। जहां तक आनासागर से डेढ़ फीट पानी की निकासी का सवाल है तो गत वर्ष अच्छी बरसात के कारण आनासागर से 1250 एफटीएफ पानी की निकासी की गई। इस पानी से चार आनासागर भरे जा सकते थे। आनासागर का जल स्तर 13 फीट है और भराव क्षमता 250 एफटीएफ पानी की है। सब जानते हैं कि जब आनासागर से एस्केप चैनल के जरिए पानी की निकासी होती है तो शहर भर के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सुभाष बाग, ब्रह्मपुरी, जयपुर रोड आदि के क्षेत्रों में तो यातायात ही बंद करना पड़ता है। बरसात से पहले आनासागर से पानी की निकासी पिछले कई वर्षों से की जा रही है ताकि बरसात के दिनों में शहरवासियों को परेशानी न हो।
20 हजार जायरीन ठहरते थे:
आनासागर के भराव क्षेत्र में ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण वर्ष 2015 में हुआ। एसटीपी के बनने से पहले आनासागर का बड़ा भूभाग खाली रहता था। इसलिए पुष्कर रोड की विश्राम स्थली में प्रतिवर्ष ख्वाजा साहब के उर्स के दौरान 20 हजार जायरीन करीब 10 दिनों तक ठहरते थे। पुष्कर रोड के निवासियों को पता है कि जायरीन के चलते जाने के बाद हालात कितने विकराल होते थे, लेकिन वर्ष 2014-15 में एसटीपी यानी ट्रीटमेंट प्लांट के शुरू हो जाने से आनासागर में पानी वर्ष भरा भरा रहने लगा। चूंकि आनासागर खासकर कोटड़ा क्षेत्र में तेजी से आबादी बढ़ी इसलिए घरों से निकालने वाले पानी की मात्रा भी बढ़ गई। सीवरेज योजना के तहत घरों से निकलने वाली पानी की पाइप लाइन के जरिए एसटीपी तक लाया गया और फिर पानी को शुद्ध कर आनासागर में डाला गया। चूंकि वर्ष भर पानी की आवक रहती है, इसलिए आनासागर में हमेशा पानी भरा रहता है। डेढ़ फीट पानी की निकासी के बाद भी मौजूदा समय में जलस्तर 10.8 फीट है। वर्षा न होने के बाद भी आनासागर में पानी की आवक जारी है, इसलिए आनासागर का जलस्तर और बढ़ जाएगा।
बाहेती और जयपाल बने थे डायरेक्टर:
कांग्रेस आज भले ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कार्यों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हो, लेकिन स्मार्ट सिटी के अधिकांश कार्य गत कांग्रेस के पांच वर्ष के शासन में ही हुए। अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री और रघु शर्मा के चिकित्सा मंत्री रहते हुए ही स्मार्ट सिटी के कार्यों का निर्धारण हुआ। आनासागर के चारों तरफ पाथवे का अधिकांश निर्माण कार्य कांग्रेस के शासन में ही हुआ। तब किसी भी कांग्रेस नेता ने आनासागर की भराव क्षमता कम होने का विरोध नहीं किया। इतना ही नहीं अजमेर की राजनीति से जुड़े पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती और डॉ. राजकुमार जयपाल (शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष) को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में राज्य सरकार की ओर से डायरेक्टर भी बनाया गया। डायरेक्टर बनाए जाने के संबंध में डॉ. बाहेती और डॉ. जयपाल का कहना है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट केंद्र सरकार का था, इसलिए नियुक्ति के कुछ दिनों बाद ही उन्हें हटा दिया गया। डॉ. बाहेती ने तो प्रोजेक्ट से जुड़ी एक भी बैठक में भाग नहीं लिया।
विशेष सतर्कता:
नगर निगम के अधीक्षण अभियंता मनोज सोनगरा ने बताया कि आनासागर में मछलियों के मरने की स्थिति को देखते हुए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मृत मछलियों को हाथों हाथ उठाया जा रहा है तथा आनासागर में चूना डालने का काम लगातार जारी है। निगम प्रशासन का प्रयास है कि मछलियां कम से कम मरे तथा आसपास की कॉलोनियों के निवासियों को कोई परेशान न हो। आनासागर पर चौबीस घंटे निगरानी का काम किया जा रहा है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-07-2026)
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राहुल गांधी के मिलने और संसद मार्च से पहले ही सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से हटाया।
पुलिस ने यह कार्यवाही दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश से की।
हरियाणा के जींद-सोनीपत के बीच चली हाइड्रोजन ट्रेन।
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18 जुलाई को सुबह सुबह सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। वांगचुक गत 20 दिनों से आमरण अनशन पर थे। वांगचुक नीट पेपर में गड़बड़ी के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन पर थे। 17 जुलाई को ही वांगचुक ने घोषणा की थी कि 20 जुलाई को जब संसद का मानसून सत्र होगा, तब वे जंतर मंतर से संसद तक मार्च करेंगे। जानकार सूत्रों के अनुसार 18 जुलाई को ही लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी भी वांगचुक से मिलने के लिए जंतर मंतर पर आ रहे थे। लेकिन राहुल गांधी के आने और 20 जुलाई को संसद मार्च से पहले ही वांगचुक को जंतर-मंतर से हटा दिया गया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि कार्यवाही हाईकोर्ट के आदेश से की गई है। हाईकोर्ट ने कहा था कि वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था, इसलिए पुलिस को वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। अब वांगचुक चिकित्सकों की निगरानी में है। वहीं पुलिस ने लोगों से कहा कि जंतर-मंतर पर भीड़ न लगाई जाए। असल में 20 दिन के आमरण अनशन के बाद भी वांगचुक को जनसमर्थन नहीं मिल रहा था। हालांकि कॉकरोच पार्टी के कुछ समर्थक जंतर मंतर पर आए, लेकिन उनकी संख्या इतनी नहीं थी कि सरकार पर कोई दबाव डाल सकै। जनसमर्थन नहीं मिलने का परिणाम ही रहा कि आमरण अनशन के दौरान सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने वांगचुक से संवाद नहीं किया। सरकार द्वारा संवाद नहीं किए जाने का एक कारण वांगचुक की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी रही। असल में वांगचुक लद्दाख में रहकर चीन का समर्थन करते रहे। इसलिए वांगचुक को भारत में चीन का प्रतिनिधि माना गया। सरकार नहींचाहती कि लद्दाख में वांगचुक जैसे चीन समर्थकों को मजबूती मिले। वांगचुक को जंतर मंतर से हटाए जाने के बाद 20 जुलाई को संसद मार्च धरा रहा गया है। असल में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पार्टियां देश में युवा पीढ़ी (जेनजी) को मोदी सरकार के खिलाफ उकसाने का प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में सोनम वांगचुक के अनशन को भ देखा जा रहा था। लेकिन विपख की लाख कोशिश के बाद भी युवा वर्ग मोदी सरकार के खिलाफ सड़क पर नहीं आ रहा।
हाइड्रोजन ट्रेन:
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जेनजी को कितना भी उकसाए, लेकिन देश के युवा वर्ग को पता है कि गत 12 वर्षों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में न केवल देश का तेजी से विकास हुआ, बल्कि युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर मिले हैं। इसका ताजा उदाहरण 17 जुलाई को हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर में हाइड्रोजन ट्रेन का चलना है। यूं तो 4 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन जापान, चीप, फ्रांस, अमेरिका आदि देशों में चल रही है, लेकिन 10 कोच वाली ट्रेन भारत में दुनिया की पहली ट्रेन है। हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवा वर्ग के सामने भारत की उजली तस्वीर को भी रखा। मोदी ने कहा कि उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले देश में रेलवे में 30 प्रतिशत ही विद्युतीकरण हुआ था। यानी अधिकांश ट्रेने डीजल से संचालित हो रही थी। उनके 12 वर्ष के कार्यकाल में रेलवे में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हो गया है। यानी आज अधिकांश ट्रेन बिजली से चल रही है। यदि वर्ष 2012 से पहले के हालात होत तो डीजल की खपत का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब जब अमेरिका और ईरान के युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेज का संकट हो गया है, तब कल्पना कीजिए कि यदि भारत की ट्रेने डीजल से चलती तो हालात कितने खराब होते। यदि देश में रेलवे में विद्युतीकरण नहीं होता तो आज हमें डीजल के अभाव में ट्रेनों का संचालन को बंद करना पड़ता। देश के इस विकास को युवा पीढ़ी समझती है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-07-2026)
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