Tuesday, 21 July 2026

 

23 जुलाई को अजमेर बंद करवाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं।

जोर जबरदस्ती की तो पुलिस सख्त कार्यवाही करेगी।

अधिकांश व्यापारिक संगठनों का भी सहयोग नहीं।

आनासागर के संरक्षण के लिए भाजपा ने स्वच्छता एवं श्रमदान अभियान चलाया।
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आनासागर की दुर्दशा के विरोध में कांग्रेस ने 23 जुलाई को अजमेर बंद का आह्वान किया है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल के नेतृत्व में कांग्रेस के कार्यकर्ता बंद को सफल बनाने की रणनीति बना रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के लिए अजमेर बंद करना आसान नहीं है। बंद को लेकर 21 जुलाई को एक रैली निकाली गई, लेकिन इस रैली में कार्यकर्ताओं की संख्या बहुत कम थी। यानी यह रैली बंद का माहौल बनाने में सफल नहीं रही। कोई भी बंद तब सफल होता है, जब व्यापारिक संगठन बंद में शामिल होने की घोषणा करते हैं, लेकिन कांग्रेस के बंद को अजमेर के अधिकांश व्यापारिक संगठनों ने समर्थन नहीं दिया है। इससे भी बंद का माहौल नहीं बन पा रहा है। बंद सफल होने का एक कारण डर और भय भी होता है। यानी डंडों के जोर पर बंद करवाया जाता है। चूंकि प्रदेश में इस समय भाजपा का शासन है, इसलिए पुलिस ने भी बंद से निपटने को लेकर तैयारियां की है। पुलिस किसी भी कांग्रेसी को जोर जबरदस्ती नहीं करने देगी। यानी किसी कांग्रेसी ने कानून हाथ में लेकर बंद करवाया तो उसके खिलाफ पुलिस सख्त कार्यवाही करेगी। वहीं शहर अध्यक्ष डॉ. जयपाल ने कहा कि हम शांतिपूर्ण तरीके से बंद करवाएंगे। उन्होंने कहा कि शासन के दबाव में कारण व्यापारिक संगठन कांग्रेस के बंद का समर्थन नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन आनासागर की दुर्दशा से अजमेर का आम नागरिक आक्रोशित है। डॉ. जयपाल ने कहा कि लोग स्वेच्छा से ही अपने प्रतिष्ठान बंद रखेंगे। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को क्षेत्रवार जिम्मेदारियां दी जा रही है।

भाजपा का स्वच्छता अभियान:
कांग्रेस के बंद के मद्देनजर अजमेर में भाजपा ने तीन दिवसीय स्वच्छता एवं श्रमदान अभियान की शुरुआत 22 जुलाई से की है। शहर भाजपा के जिलाध्यक्ष रमेश सोनी ने बताया कि इसके अंतर्गत भाजपा के कार्यकर्ता आनासागर में सफाई का काम करेंगे। यह काम सेवा की भावना और आनासागर के संरक्षण के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में पानी के अभाव में मछलियों के मरने की जो घटना हुई, उसमें अब लगातार सुधार हो रहा है। निगम प्रशासन ने मृत मछलियों को तत्काल हटाने का काम युद्ध स्तर पर किया है। 22 जुलाई को अजमेर में मानसून की पहली अच्छी बरसात भी हो गई है। बरसात का पानी आने के साथ ही मछलियों के मरने की समस्या स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-07-2026)

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खरगे के जन्मदिन पर बधाई देने के बहाने धोखे से राहुल और प्रियंका गांधी पीएम हाउस के बाहर धरने पर बैठ गए।

प्रतिपक्ष के नेता के संवैधानिक पद पर बैठे राहुल गांधी के यह आचरण उचित है?

कॉकरोच पार्टी के आंदोलन में अराजक तत्व शामिल।
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21 जुलाई को दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी और उनकी बहन सांसद प्रियंका गांधी ने जिस तरीके से धरना दिया उसे धोखा ही कहा जाएगा। प्रधानमंत्री का सरकारी आवास  अति सुरक्षा घेरे में रहता है, इसलिए कोई सामान्य नागरिक पीएम हाउस के आसपास भी नहीं पहुंच सकता। पीएम हाउस से पांच सौ मीटर की दूरी पर ही राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े का सरकारी आवास भी है। 21 जुलाई को खरगे का 84वां जन्मदिन रहा। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जन्मदिन की बधाई देने के लिए खरगे के सरकारी आवास पर पहुंचे। यह एक सामान्य शिष्टाचार था, इसलिए किसी ने भी यह उम्मीद नहीं जताई कि राहुल गांधी अपनी बहन के साथ पीएम हाउस के बाहर धरने पर बैठे जाएंगे। लेकिन राहुल गांधी ने धोखा देकर पीएम हाउस के बाहर धरना दिया। यदि राहुल गांधी घोषणा कर पीएम हाउस की ओर जाते तो उन्हें सुरक्षा बल कभी भी धरने पर नहीं बैठने देते, लेकिन राहुल गांधी ने खरगे के जन्मदिन की आड़ में जिस तरह धोखाधड़ी की वह राजनीति में उचित नहीं है। प्रतिपक्ष के नेता के नाते राहुल गांधी संवैधानिक पद पर है। क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को सुरक्षा बलों के साथ धोखाधड़ी करनी चाहिए? राहुल गांधी यह सोचते हैं कि उन्हें पीएम हाउस के बाहर कुछ समय के लिए धरना देकर बहादुरी का काम किया है? लेकिन यदि राहुल गांधी सामान्य नागरिक होते और फिर पीएम हाउस के बाहर पहुंच जाते तो उन्हें पता चलता कि संविधान का कानून कितना संख्त है। राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका ने जिस तरह धरना दिया उसे संविधान के साथ धोखा ही कहा जाएगा। जहां तक राहुल गांधी को पीएम हाउस के बाहर जबरन उठाने और फिर थाने ले जाने का सवाल है तो कानून ने अपना काम किया है। अच्छा होता कि राहुल गांधी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में पहले जंतर मंतर पहुंचे और फिर पीएम हाउस की ओर जाने की घोषणा करते। जब उन्हें पता चल जाता कि देश का कानून कितना सख्त है।

संसद में चर्चा क्यों नहीं:
केंद्र सरकार बार बार कह रही है कि संसद के मानसून सत्र में नीट पेपर लीक पर चर्चा की जाए, लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दल संसद में चर्चा को तैयार नहीं है। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो चुका है, लेकिन विपक्ष के सांसद हंगामा कर संसद को चलने नहीं दे रहे। सवाल उठता है कि आखिर कांग्रेस और विपक्षी दल नीट पेपर लीक पर संसद में चर्चा क्यों नहीं करते? जहां तक कॉकरोच पाटी्र के आंदोलन का सवाल है तो इस आंदोलन में अराजक तत्व शामिल हो गए है जो हिंसा में विश्वास रखते हैं। 20 जुलाई के जो वीडियो सामने आए हैं, उन से पता चलता है कि अराजकतत्वों ने सुनियोजित तरीके से हिंसा की। अब छात्रों को आंदोलन तो पीछे छूट गया है और अराजक तत्वों ने आंदोलन पर अपना कब्जा कर लिया है ।

S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-07-2026)

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अजमेर में श्याम भक्तों ने कथावाचक किरीट भाई के प्रति जो आक्रोश दिखाया वैसा आक्रोश सनातनियों को मौलाना जरजिश के खिलाफ भी दिखाना चाहिए। किरीट भाई ने खाटू वाले श्याम बाबा का अपमान किया तो मौलाना जरजिश ने भगवान कृष्ण को पांच वक्त की नमाज पढ़ने वाला मुसलमान बता दिया। स्वयं को ब्रह्म ऋषि होने का दावा करने वाले किरीट भाई ने माना कि वे अज्ञानी है। अजमेर में ब्लैक लिस्ट हुए।

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21 जुलाई को अजमेर के जवाहर रंगमंच पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव में अपने भक्तों को संबोधित करते हुए कथावाचक किरीट भाई ने राजस्थान के खाटू स्थित श्याम बाबा और उनके मंदिर को लेकर गलत जानकारी प्रस्तुत की। किरीट भाई ने कहा कि खाटू श्याम के स्कंध पुराण में 6 अध्याय हैं। उन्होंने खाटू श्याम को घटोत्कच का बेटा बताया। साथ ही कहा कि अग्रवाल का बेटा अग्रवाल ही होगा। राक्षस का बेटा राक्षस ही होगा। श्रीकृष्ण के साथ उनका कोई संबंध नहीं है। उसका मंदिर होना, उसकी उपासना करना, पूजा करना वेदों में वर्जित है। किरीट भाई ने कहा कि वे ब्रह्म ऋषि हैं और खाटू श्याम के मुद्दे पर किसी से शास्त्रार्थ करने को तैयार है। उन्होंने खाटू स्थिति श्याम बाबा के मंदिर जाने वाले श्याम भक्तों पर अमर्यादित टिप्पणी की। किरी भाई के इस कथन के बारे में पता चलते ही अजमेर के श्याम भक्त और सुप्रसिद्ध श्याम भजन गायक विमल गर्ग के नेतृत्व में गोपाल गोयल, सौरभ जैन, उमेश गर्ग, नीतेश बिंदल, नितेश अग्रवाल आदि बड़ी संख्या में श्याम भक्त वैशाली नगर स्थित होटल मानसिंह पर पहुंच गए। यही पर किरीट भाई ठहरे हुए थे। श्याम भक्तों ने किरीट भाई से कहा कि यदि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगी तो उन्हें अजमेर से जाने नहीं दिया जाएगा। श्याम भक्तों के आक्रोश को देखते हुए किरीट भाई के होटल के पोर्च में खड़े होकर मीडिया के कैमरों के सामने माफी मांगी। जो किरीट भाई कुछ घंटों पहले श्याम बाबा के वजूद और धार्मिक महत्व को नकार रहे थे, उन्होंने कहा कि अज्ञानता और जानकारी के अभाव में मैंने श्याम बाबा के बारे में जो बोला उसके लिए माफी चाहता हंू। मैं अजमेर के ही नहीं बल्कि देश दुनिया के श्याम भक्तों से अपने कृत्य के लिए माफी चाहता हंू। उन्होंने कहा कि मैं श्याम बाबा के चरणों में सिर रखकर माफी मांगता हंू। भविष्य में ऐसी गलती नहीं करुंगा। यदि मेरे कथन से किसी को ठेस पहुंची तो मैं माफी मांग रहा हंू। यह माफी मैं किसी दबाव में नहीं बल्कि दिमाग और दिल से मांग रहा हंू। मुझे श्याम बाबा के बारे में ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। सार्वजनिक माफी के बाद श्याम भक्तों ने किरीट भाई को अजमेर से जाने दिया, लेकिन अजमेर में प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष में किरीट भाई को आमंति करने वाले तुलसी सेवा संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश मंगल, सचिव डॉ. विष्णु चौधरी, रमेश अग्रवाल, विष्णु गर्ग, नरेंद्र खंडेलवाल, गिरधारी मंगल, कैलाश खंडेलवाल, अशोक टांक आदि ने कहा कि वे अब भविष्य में किरीट भाई का अजमेर में कोई कार्यक्रम नहीं करेंगे। उनके लिए श्याम भक्तों का सम्मान पहले हैं और वे खुद भी श्याम भक्त है। अजमेर में हुए हंगामे के बाद 21 जुलाई को ही किशनगढ़ और जयपुर में होने वाले किरीट भाई के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। वहीं खाटू स्थित श्री श्याम मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मोहन दास महाराज ने कहा कि किरीट भाई की माफी तभी स्वीकार होगी, जब वे खाटू स्थित मंदिर में आकर श्याम बाबा से माफी मांगेंगे। यदि किरीट भाई मंदिर में आकर माफी नहीं मांगते हैं तो पूरे देश में किरीट भाई का बहिष्कार करवाया जाएगा। अजमेर में हुए हंगामे के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9214071182 पर भजन गायक विमल गर्ग से ली जा सकती है। किरीट भाई का माफी मांगने वाला वीडियो मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। मौलाना जरजिश के खिलाफ भी हो आक्रोश: श्याम भक्तों ने अजमेर मं कथा वाचक किरीट भाई के प्रति जो आक्रोश दिखाया वैसा आक्रोश मौलाना जरजिश अंसारी के प्रति भी दिखाने की जरूरत हैं। किरीट भाई की तरह ही मौलाना अंसारी ने गत दिनों झारखंड में एक जलसे को संबोधित करते हुए, भगवान कृष्ण को पांच वक्त की नमाज पढ़ने वाला मुसलमान बता दिया। उन्होंने कृष्ण और अर्जुन के बीच युद्ध के संवाद की व्याख्या करते हुए कहा कि कृष्ण तो मुसलमान थे। मौलाना के इस बयान के बाद सनातन धर्म के विद्वान टीवी चैनलों पर बैठकर आलोचना कर रहे हैं, लेकिन किसी भी सनातनी ने मौलाना अंसारी के प्रति अजमेर में हुए किरीट भाई के खिलाफ जैसा आक्रोश प्रकट नहीं किया है। किरीट भाई ने तो श्याम भक्तों से माफी मांग ली है, लेकिन मौलाना अंसारी ने अभी तक भी खेद नहीं जताया है। यह बात अलग है कि सनातन धर्म पांच हजार वर्ष पहले का है, जब इस्लाम का कोई वजूद नहीं था। S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

Sunday, 19 July 2026

प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह पर रोक के नियम को मुस्लिम विरोधी न माना जाए। ब्लड रिलेशन में शादी होने से जनरेटिक (आनुवांशिक) बीमारियां भी साथ आती है। इसलिए सनातन संस्कृति में भाई-बहन के साथ साथ मौसी, चाची, मामा, बुआ आदि के बच्चों के बीच विवाह पर रोक है। ============== मध्यप्रदेश में विधानसभा का पांच दिवसीय सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक भी प्रस्तुत किया जाएगा। 19 जुलाई को मंत्रिमंडल की बैठक में यूसीसी विधेयक को मंजूरी दे दी गई। इस विधेयक में विवाह, तलाक, दत्तक ग्रहण जैसे मामलों में एक कानून लागू करने का प्रस्ताव है। विवाह के लिए लड़की की उम्र 18 और लड़के के लिए 21 वर्ष अनिवार्य की गई है। इसके साथ ही प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह पर रोक लगाने का प्रावधान भी रखा गया है, लेकिन इस प्रावधान को लेकर मध्यप्रदेश में राजनीति भी शुरू हो गई है। प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह को रोक लगाने के नियम को मुस्लिम विरोधी माना जा रहा है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के नेता वोट की राजनीति के चलते कुछ भी कहे, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ब्लड रिलेशन में विवाह होने से जनरेटिक यानी आनुवांशिक बीमारियां भी साथ आ जाती है। यानी विवाहित जोड़े के बच्चों को बीमारियां स्वत: ही मिल जाती है। आमतौर पर देखा गया है कि यदि किसी पिता को दम, शुगर बीपी आदि का रोग होता है तो उसके बच्चों को भी यह रोग हो ही जाता है। अब यदि ब्लड रिलेशन में ही विवाह होते हैं तो विवाहित जोड़े के बच्चों को भी स्वत: ही बीमारियों के गुण मिल जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए ही मध्यप्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता के विधेयक में प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह को रोकने का प्रावधान किया है। इसलिए इसे मुस्लिम विरोध नहीं मानना चाहिए। देखा जाए तो यह नियम मुसलमानों के हित में ही है। हर धर्म के माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे स्वस्थ और निरोगी हो। कोई भी माता पिता यह नहीं चाहेगा कि उनके ब्लड की वजह से बच्चे संक्रमित हो। सनातन संस्कृति में रोक: भले ही चिकित्सा विज्ञान ने अब बताया हो कि ब्लड रिलेशन में विवाह हानिकारक है, लेकिन सनातन संस्कृति में तो पहले ही भाई बहन के साथ साथ मौसी, चाची, मामा बुआ आदि के बच्चों के बीच विवाह पर रोक है। चूंकि इन रिश्तों वाले लड़के-लड़की को भाई-बहन माना जाता है, इसलिए सनातन संस्कृति में भाई-बहन के बीच विवाह नहीं हो सकता। भले ही आधुनिक दौर में सनातन संस्कृति में भी अनेक परंपराओं को तोड़ा जा रहा है। लेकिन अधिकांश मामलों में ऐसे विवाह नहीं होते हैं। सनातन संस्कृति में तो एक ही गोत्र के बच्चों को भी भाई बहन माना गया है। इसलिए एक गोत्र में विवाह निषेध है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
राष्ट्रगान की तरह वंदे मातरम गीत को भी मिलेगा कानून संरक्षण। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह राज्यसभा में विधेयक प्रस्तुत करेंगे। सरकारी शिक्षण संस्थाओं में अनिवार्य रूप से गाया जाएगा वंदे मातरम। ============== 20 जुलाई से संसद का मानसूत्र सत्र शुरू हो रहा है। इस सत्र में हंगामा करने के लिए विपक्ष ने योजना बनाई है, लेकिन वहीं नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार ने भी अपने नजरिए से देश हित में संसद में विधेयक प्रस्तुत करने की योजना बनाई है। जानकार सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इसी सत्र में वंदे मातरम गीत को कानून संरक्षण देने के लिए विधेयक प्रस्तुत करेंगे। इस विधेयक की मंजूरी के बाद वंदे मातरम गीत को भी राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण मिल जाएगा। यानी जिस प्रकार राष्ट्रगान गाना अनिवार्य है, उसी प्रकार वंदे मातरम गीत को गाना भी अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यक्ति अपनी मान्यताओं के चलते वंदे मातरम गीत को नहीं गाता है तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही हो सकती है। सरकार ने पहले से ही घोषणा कर रखी है कि देश भर के शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम गीत को गाना अनिवार्य है। चूंकि अभी वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण नहीं मिला हुआ है, इसलिए अनेक शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम का गायन नहीं हो पा रहा है। सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए ही मानसून सत्र में विधेयक प्रस्तुत करने का फैसला किया है। इसके लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने व्यापक तैयारियां की है। माना जा रहा है कि 20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन ही वंदे मातरम से जुड़े विधेयक को प्रस्तुत कर दिया जाएगा। विधेयक को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पेश करेंगे। वहीं विपक्ष के सूत्रों का कहना है कि वंदे मातरम की कानूनी अनिवार्यता का संसद के दोनों सदनों में विरोध किया जाएगा। असल में वंदे मातरम गीत के कुछ शब्दों पर मुस्लिम संगठनों को ऐतराज है। यही वजह है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता इस विधेयक का लगातार विरोध कर रहे हैं। जबकि सरकार का मानना है कि स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम गीत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511