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Sunday, 4 October 2026
भारतीय पायलट मछार की बहादुरी की प्रशंसा करने में कांग्रेस को झिझक क्यों?
क्या कांग्रेस को मुसलमानों के नाराज होने का डर है?
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30 सितंबर को भारतीय पायलट स्मित मछार ने जिस बहादुरी के साथ दुबई एयरलाइंस के विमान को क्रैश होने से बचाया, उसकी अब दुनिया भर में प्रशंसा हो रही है। दुबई के क्राउन प्रिंस से लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री बैंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी माना है कि यदि हवा में उतरे विमान में भारतीय पायलट मछार बुद्धिमता और बहादुरी नहीं दिखाते तो ओमान के को-पायलट हमम अलहमामी विमान को अपने नियंत्रण में लेकर इजरायल में क्रैश करवा देता। इस विमान में 180 लोगों में से 150 इजरायली यात्री थे। जब भारत सहित पूरी दुनिया में पायलट मछार की प्रशंसा हो रही है, तब भारत में कांग्रेस के नेता मछार की प्रशंसा करने में झिझक दिखा रहे हैं। घटना के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल में भर्ती पायलट मछार से वीडियो कॉल के जरिए संवाद किया, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं ने मछार की बहादुरी की प्रशंसा अभी तक भी प्रभावी तरीके से नहीं की है। ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस के नेता दुबई एयरलाइंस के विमान को क्रैश होने सेकबचाने से खुश नहीं है। प्रारंभिक जांच पड़ताल में पता चला है कि को-पायलट अलहमामी के तार ईरान से भी जुड़े हैं। माना जा रहा है कि यह ईरान की आतंकी साजिश थी। कांग्रेस के नेता जिस प्रकार पायलट मछार की प्रशंसा करने में झिझक दिखा रहे हैं, उससे प्रतीत होता है कि कांग्रेस को मुसलमानों के नाराज होने का डर है। जबकि कोई भी सच्चा मुसलमान कभी नहीं चाहेगा कि कोई जिहादी प्रवृत्ति वाला व्यक्ति निर्दोष लोगों की जान ले। जब की मुस्लिम देश दुबई भारतीय पायलट की बहादुरी की प्रशंसा कर सहता है तो भारत में कांग्रेस पार्टी क्यों नहीं?अब जब यह जाहिर हो गया है कि 30 सितबंर को अलहमामी की आतंकी साजिश थी, तब तो कंाग्रेस के नेताओं को प्रभावी तरीके से भारतीय पायलट की प्रशंसा करनी चाहिए।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 05-10-2026)
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20 साल पुराने मामले में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ केरलम सरकार नए सिरे से जांच करवाएगी।
क्या यह कांग्रेस का संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग नहीं है?
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कांग्रेस शासित केरलम सरकार ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 साल पुराने एक मामले में नए सिरे से जांच करवाने का निर्णय लिया है। वर्ष 2006 में ज्ञानेश कुमार जब केरलम के पीडब्ल्यूडी विभाग के सचिव थे, तब एक मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन ने विभाग में फैले भ्रष्टास से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी। हालांकि तब मामले में विस्तृत जाचं हुई, तब की वामपंथी सरकार ने ज्ञानेश कुमार की किसी भी प्रकार से भूमिका नहीं मानी, लेकिन अब 20 साल बाद कांग्रेस की सरकार को लगता है कि मलेशियाई इंजीनियर ने तत्कालीन पीडब्ल्यूडी सचिव ज्ञानेश कुमार के कारण आत्महत्या की थी। केरलम सरकार के गृहमंत्री रमेश चेन्नीथला के अनुसार हाल ही में एक शिकायत कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री वेणुगोपाल को की गई। इस शिकायत में मलेशियाई इंजीनियर की मौत के लिए ज्ञानेश कुमार को दोषी माना गया। वेणुगोपाल को दिए गए ज्ञापन के आधार पर ही केरलम सरका रने मलेशियाई इंजीनियर की मौत के मामले की जांच नए सिरे से करवाने का निर्णय लिया है। सवाल उठता है कि जब वर्ष 2006 में वामपंथी सरकार के समय जांच एजेंसियों ने ज्ञानेश कुमार को दोषी नहीं माना तो अब उसी मामले की जांच नए सिरे से क्यों करवाई जा रही है। क्या यह कांग्रेस का संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग नहीं है? कांग्रेस के नेता प्रतिदिन आरोप लगाते हैं कि केंद्र की मोदी सरकार संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है। यहां तक की सुप्रीम कोर्ट भी मोदी सरकार के दबाव में है। लेनिक अब उसी कांग्रेस की सरकार 20 साल पुराने मामले की जांच नए सिरे से करवा रही है। कांग्रेस की इस कार्यवाही को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दबाव डालने वाला बताया जा रहा है। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि र्वा 2006 में केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन तब कांग्रेस के किसी भी नेता ने ज्ञानेश कुमार की भूमिका को संदिग्ध नहीं माना।
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मोदी और शाह अवैध रूप से प्रधानमंत्री और गृहमंत्री है-खड़गे।
तो क्या राहुल-प्रियंका भी अवैध सांसद हैं? मौजूदा समय में भी लोकसभा में विपक्ष के 200 सांसद हैं।
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कथित वोट चोरी के आरोपों के मद्देनजर कांग्रेस के राष्ट्रीयअध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह अवैध रूप से प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के पद पर हैं। खडग़े का आरोप रहा कि ये दोनों वोट चोरी के कारण अपने पदों पर है। यदि खडग़े का यह आरोप सही है तो सवाल उठता है कि क्या राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी अवैध सांसद हैं? वोट की जिस प्रक्रिया से नरेंद्र मोदी और अमित शाह जीते, उसी प्रक्रिया से राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी भी सांसद चुनी गई हे। नरेंद्र मोदी तो सिर्पु बनारस से ही जीते, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी रायबरेली (यूपी) और वायनाड (केरलम) से चुनाव जीते। इतना ही नहीं इस्तीफे के बाद राहुल गांधी ने वायनाड़ से अपनी बहन प्रियंका को सांसद चुनवाया। मौजूदा समय में भी लोकसभा में विपक्ष के 200 सांसद हैं। इसके साथ ही हिमाचल, कर्नाटक, केरलम और तेलंगाना में खडग़े के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकारें हैं। तमिलनाडू, झारखंडद्व पंजाब, जम्मू कश्मीर आदि राज्यों में विपक्षी दलों की ही सरकारें हैं। यदि मोदी और शाह के पीएम व गृृहमंत्री के पद अवैध है तो फिर विपक्ष के 200 सांसदों के पद भी अवैध हैं। यहां तक कि विपक्ष की सरकारें भी वोट चोरी से ही बनी है। 545 में से 200 सांसद विपक्ष के होने के बाद भी वोट चोरी के आरोप लगाए जा रहे हैं असल में कांग्रेस के नेता सत्ता के बिना छटपटा रहे हैं। उन्हें नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना बर्दाश्त नहींहो रहा है। खड़गे को आरोप लगाने से पहले खुद की स्थिति भी देख लेनी चाहिए। खडग़े की काबिलियित सिर्फ गांधी परविार की स्तुति करना है। खडग़े पहले जो लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता थे। जब लोकसभा का चुनाव नहीं जीत सके तो कांग्रेस ने राज्यसभा का सांसद बनवाया और फिर राज्यसभा में ही प्रतिपक्ष का नेता बननवा दिया। संसद में प्रतिपक्ष के नेता को केबिनेट मंत्री की सुविधाएं मिलती है। खडग़े के पुत्र प्रियांक खड़गे भी कर्नाटक में मंत्री है। लोकसभा में कांग्रेस के 99 सांसद चुनाव नहीं जीत जी सकते थे।
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Friday, 2 October 2026
लिफ्ट लगाने वाली चेन्नई की निबब कंपनी के खिलाफ अजमेर में धोखाधड़ी का मामला दर्ज।
डॉ. अशोक मित्तल के परिवाद पर अदालत के आदेश।
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अजमेर के मशहूर आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अशोक मित्तल के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में लिफ्ट लगाने वाली चेन्नई की निबब के विरुद्ध धोखाधड़ी का मामला कृष्णगंज पुलिस स्टेशन पर दर्ज हुआ है। मुकदमा दर्ज करने के आदेश स्थानीय अदालत ने दिए हैं। एडवोकेट एसके सक्ेसना, आशीष सक्सेना और हर्षित मित्तल ने डॉ. अशोक मित्तल की ओर से दायर वाद में आरोप लगाया कि वैशाली नगर स्थित अस्पताल में लिफ्ट लगाने के लिए 16 लाख 50 हजार 697 रुपए का भुगतान कंपनी को किया गया। लेकिन कंपनी ने जो लिफ्ट लगाई वह खराब है। बार बार शिकायत करने के बाद भी लिफ्ट चल नहीं रही है। कंपनी के टेक्निशियनों ने भी अपनी रिपोर्ट में माना है कि लिफ्ट में तकनीकी गड़बड़ी है। कंपनी न तो लिफ्ट को ठीक कर रही है और न ही भुगतान की राशि वापस दे रही है। कंपनी के निदेशकों को बार बार शिकायत की गई, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया है। डॉ. मित्तल का आरोप है कि संपूर्ण राशि का भुगतान करने के बाद भी लिफ्ट का उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिसकी वजह से उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ साथ मानसिक वेदना भी हो रही है। डॉ. मित्तल के परिवाद पर अदालत ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए और कृष्णगंज थाने में कंपनी के निदेशकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। अब निदेशकों को अजमेर बुलाने की कार्यवाही पुलिस की ओर से की जा रही है। इस संबंध में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 8058041414 पर डॉ. अशोक मित्तल से ली जा सकती है।
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सचिन पायलट के लिए पंजाब में कांग्रेस को मजबूत करना आसान नहीं।
अध्यक्ष पद से हटने के बाद राजा वडिंग नाराज।
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राजस्थान की राजनीति से जुड़े सचिन पायलट मौजूदा समय में कांग्रेस की ओर से पंजाब के प्रभारी है। पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा के चुनाव होने हैं। कांग्रेस चाहती है कि इस बार पंजाब में सरकार बनाई जाए, इसलिए सचिन पायलट को प्रभारी बनाया गया है, लेकिन पंजाब में कांग्रेस को मजबूत करना आसान नहीं है। यह सही है कि सचिन पायलट की रिपोर्ट के बाद शीर्ष नेता राहुल गांधी ने राजा वडिंग को हटाकर परगट सिंह को अध्यक्ष नियुक्त किया है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटने के बाद राजा वडिंग ने पायलट के प्रति नाराजगी प्रकट की है। उन्होंने कहा कि जब भूपेश बघेल प्रभारी थे, तो उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को बदलने से साफ इंकार कर दिया था, लेकिन सचिन पायलट के प्रभारी बनने के बाद मुझे इस्तीफा देना पड़ा है। वडिंग ने कहा कि मुझे राहुल गांधी ने इस्तीफादेने के लिए नहीं कहा, लेकिन मैं राहुल गांधी की आंखों का इशारा समझता हूं इसलिए बिना विरोध किया इस्तीफा दे दिया। विधानसभा के चुनाव में मेरी क्या भूमिका होगी यह राहुल गांधी ही तय करेंगे। मेरे हटने से पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा कितने खुश होंगे, यह मुझे नहीं पता। मालूम हो कि चन्नी और रंधावा ने ही वडिंग को अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी। वडिंग के अध्यक्ष रहते चन्नी और रंधावा नाराज थे और अब परगट सिंह के अध्यक्ष बनने से वडिंग नाराज हे। वडिंग की नाराजगी कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचाती है, यह विधानसभा चुनाव के परिणम बताएंगे, लेकिन पंजाब में सचिन पायलअ के लिए कांग्रेस को मजबूत करना आसान नहीं है। मौजूदा समय में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सत्तारूढ़ है। इस बार सरकार बनाने के लिए भाजपा ने भी पूरी ताकत लगा रखी है।
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