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Sunday, 25 October 2026
भारत के आध्यात्म को समझने के लिए मार्टिन लूथर जैसी दिव्य शक्ति हो।
छलनी से पानी निकालने जैसा धैर्य हो।
बुरे समय में पैसा नहीं प्रार्थना ही काम आती है। अंधाधुंध पैसा कमाने वाले लोग किसी जैन संत के जीवन से प्रेरणा लें।
जैन संत गौतम मुनि महाराज की खरी खरी। संगोष्ठी में न माइक, न कैमरा और न मोबाइल।
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25 अक्टूबर को अजमेर के वरुण सागर मार्ग स्थित नवकार कॉलोनी के महावीर भवन में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ की ओर से शहर के प्रमुख सीए, एडवोकेट, व्यवसायी, बुद्धिजीवियों की एक संगोष्ठी हुई। इस संगोष्ठी में जैन संत गौतम मुनि महाराज ने धर्म संस्कारों के साथ प्रोफेशन की चुनौतियों विषय पर खरी खरी बात कही। इस संगोष्ठी की खास बात यह रही कि किसी भी श्रोता को पास मोबाइल नहीं था और न ही कैमरा व माइक था। गौतम मुनि की आवाज ही इतनी तेज थी कि बिना माइक के ही श्रोताओं को साफ सुनाई दे रहा था। संगोष्ठी में जैन मुनि ने भारत की आध्यात्म शक्ति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति सौभाग्यशाली है। अमेरिकी थिंकर मार्टिन लूटर से जब भारत यात्रा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं पहले भारत को प्राकृति सौंदर्य की दृष्टि से देखता था, लेनिक अब मैं भारत को पूजा ही दृष्टि से देखता हंू। भारत के लोगों में आध्यात्म के प्रति जो लगाव है, वह दुनिया के किसी भी नागरिक में नहीं है। जैन मुनि ने ईमानदारी, प्रार्थना और धैर्य पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी सीए और वकील को अपने हाथ में गलत केस नहीं लेना चाहिए। उन्होंने हर्षद मेहता का उदाहरण देते हुए कहा कि उसके पास अथाह पैसा था, लेकिन बुरे दिनों में यह पैसा काम नहीं आया। बुरे दिनों में मनुष्य की प्रार्थना ही काम आती है। हमें अपने पूर्वजों के कार्यों से गौरवांवित होने के बजाए स्वयं के कार्यों पर गर्व करना चाहिए। हम समाज में ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करें जिससे लोग सम्मान दिखाए। जैन मुनि ने कहा कि मुंबई में एक धनाढ्य परिवार प्रतिदिन एक करोड़ रुपए का दान करता है। यह कार्य पिछले दस वर्षों से किया जा रहा है। मेरी नजर में एक ऐसे आईएएस है जिनके पास सिर्फ चार जोड़ी कपड़े है। अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बाद भी अपने परिवार के लिए एक प्लाट भी नहीं खरीदा है। जो लोग अंधाधुंध कमाई में लगे हुए हैं उन्हें किसी जैन संत के जीवन को देखना चाहिए। जैन संत अपने जीवन में कोई सम्पत्ति एकत्रित नहीं करता। उन्होंने मिसाइल मैन के नाम से जाने जाने वाले एपीजे अब्दुल कलाम का दाहरण दिया। जैन मुनि ने बताया कि कलाम साहब जब राष्ट्रपति बने तो उन्होंने राष्ट्रपति भवन में मिलने वाली सुविधाओं का लाभ अपने परिवा को नहीं दिलवाया। राष्ट्रपति भवन में आने वाले रिश्तेदारों को कलाम साहब सिर्फ चाय पिलाते थे, लेकिन चाय का मूल्य अपने वेतन में से चुकाते थे। उद्योगपति रतन टाटा ने भी जीवन में नैतिकता और ईमानदारी की मिसाल कायम की है। जो लोग पराए धन को अपना समझते हैं उनके लिए जैन मुनि ने एक पति पत्नी की कहानी सुनाई। पति-पत्नी जब मिट्टी वाले रास्ते से गुजर रहे थे, तो पति की नजर मार्ग पर पड़ी स्वर्ण मुद्राओं पर गई। पत्नी थोड़ा पीछे चल रही थी। पति को लगा कि यदि पत्नी की नजर स्वर्ण मुद्राओं पर पड़ गई तो वहय उठा लेगी इसलिए पति ने स्वर्ण मुद्राओं पर मिट्टी डाल दी, लेकिन इस कृत्य को पत्नी ने देख लिया। पत्नी ने तपाक से कहा कि जिसे आप स्वर्ण मुद्राएं समझ रहे हैं वो मिट्टी है। आपने मिट्टी पर मिट्टी डालने का काम किया है। जैन मुनि ने कहा कि पति-पत्नी के बीच ऐसी ईमानदारी होनी चाहिए। जैन मुनि ने जीवन में धैर्य के भी कई उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि कई बार गुस्से की वजह से पूरा जीवन खराब हो जाता है। हर व्यक्ति को क्रिया पर प्रतिक्रिया धैर्य से देनी चाहिए। ौर्य इतना हो कि छलनी से पानी निकाल लिया जाए। उन्होंने कहा यदि हम छलनी लेकर कुंए से पानी निकालेंगे तो कभी सफलता नहीं मिलेगी, लेकिन जब हम सर्दी के दिनों में पानी के बर्फ बनने तक धैर्य रखेंगे तो उसी छलनी से बर्फ को निकाल कर पानी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब हम पेप्सी की बोतल का ढक्कन खोलते हैं तो पेय पदार्थ उफान कर बाहर आता है, लेकिन जब हम पानी की बोतल का ढक्कन खोलते हैं तो पानी शांत रहता है। एक कक्षा में शरारती बच्चों ने शिक्षक के आने के पहले ब्लैक बोर्ड पर लिखा शिक्षक गधा है। स्वाभाविक था कि जब शिक्षक कक्षा में आएंगे तो उन्हें गुस्सा आएगा ही, लेकिन शिखक ने गुस्सा दिखाने के बजाए बार बार शिक्षक गधा शब्दों को पढ़ा और फिर पूरे धैर्य के साथ लिखा, शिखक गधे को भी इंसान बना सकता है।
जैन मुनि ने कहा कि हम जब भी धैर्य से काम लेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी। हमारा जीवन कोरा कागज है, इस पर लिखने का काम हम स्वयं करते हैं। कुछ लोग समझते हैं कि पैसा ही जीवन को सुरक्षित बनाता है। यह भ्रम है। मनुष्य की असली पूंजी ईश्वर के प्रति प्रार्थना है। हम अपनी तुलना दूसरों से करते है। जबकि हमें अपनी तुलना अपने कार्य से करनी चाहिए। हर व्यक्ति जब मां की कोख से जन्म लेता है तो रोता है। यदि कोई शिशु न रोए तो डॉक्टर उसे रुलाते है। यानी मनुष्य का जीवन रोने से शुरू होता है, लेकिन सफल व्यक्ति वही है जो रोते रोते न मरे। मरने के बाद जो व्यक्ति अपने कार्यों से पहचाना जाता है, उसी व्यक्ति का जीवन सफल माना जाता है। उन्होंने कहा कि सोने से पहले परिवार के सभी सदस्यों को सामूहिक तौर पर प्रार्थना करनी चाहिए, जिस परिवार में रात्रि के समय सामूहिक प्रार्थना होगी, उसमें कभी भी कष्ट उत्पन्न नहीं होगा। भारत की आध्यात्म की संस्कृति में प्रार्थना का विशेष महत्व है। संगोष्ठी में डॉ. एसके अरोड़ा, डॉ. अशोक मित्तल, डॉ. राजकुमार खसगीवाल, डॉ. दीपक जैन, डॉ. रत्ना जैन, राजस्थान बार कौसिल के अध्यक्ष योगेन्द्र शक्तावत, वरिष्ठ वकील बसंत विजयवर्गीय, जेपी शर्मा, उमरदान लखावत, चार्टर्ड एकाउंट एचएन जैन, विजय राका, जीएम जैन, निर्मल कोठारी, सीप कोठारी, सुनील पोरवाल, शिवशंकर हेड़ा, पारसमल राका, संतोष कांसवा व सोमदत्त यादव आदि विशेष तौर पर उपस्थित रहे। आचार्य 1008 श्री हीराचंद जी महाराज और भावी आचार्य श्री महेंद्र मुनि जी महाराज के अनुव्रति गौतम मुनि जी महाराज के अजमेर प्रवास के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829144425 पर सूर्य प्रकाश गांधी से ली जा सकती है।
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मोदी तो क्या, मोदी का बाप भी जाएगा-खडग़े, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष।
सत्ता के बगैर कांग्रेस छटपटा रही है।
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25 अक्टूबर को पटना के एक कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को भी राजनीति में घसीट लिया। असल में कांग्रेस के एक कार्यकर्ता के कथन पर खडग़े ने आवेश में आते हुए कहा कि मोदी तो क्या मोदी का बाप भी जाएगा। इससे पहले खडग़े पीएम मोदी पर वोट चोरी का आरोप लगाते रहे। जब खडग़े के भाषण के दौरान एक कार्यकर्ता ने कहा कि मोदी को हटाने के लिए विद्रोह की जरुरत है। जब तक विद्रोह नहीं होगा, तब तक मोदी को हटाया नहीं जा सकता। 80 वर्ष की उम्र के पार खडग़े ने कार्यकर्ता की पूरी बात को नहीं सुना और आखिरी वाली लाइन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोदी तो क्या, मोदी का बाप भी जाएगा। यदि खडग़े अपने कार्यकर्ता का पूरा कथन सुन लेते तो मोदी के बाप को राजनीति में नहीं घसीटते, लेकिन साफ जाहिर है कि सत्ता के बगैर कांग्रेस के नेता छटपटा रहे हैं। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में लगातार तीसरी बार एनडीए की सरकार बनी है। कांग्रेस के नेता जब लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत मोदी को सत्ता से बाहर नहीं कर पा रहे है, तब वोट चोरी के नाम पर देशवासियों को भड़काने का काम किया जा रहा है। अक्टूबर माह में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने पूरा प्रयास किया कि देश में फ्रांस, इटली, अल्बानिया देशों के जैसी हिंसा हो, लेकिन लाख कोशिश के बाद भी कांग्रेस को सफलता नहीं मिली। अब एक नवंबर को दिल्ली में लाखों लोगों की भीड़ जुटाने का आह्वान किया गया है। जब पूरे देश में दीपावली पर्व का उत्साह है, तब दिल्ली में लाखों लोगों को एकत्रित कर मोदी सरकार को हटाने का काम किया जा रहा है। कांग्रेस और उसके समर्थक नेता चाहते हैं कि भारत में भी मुस्लिम देश बांग्लादेश की तरह सत्ता परिवर्तन हो जाए। यानी लोग संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास में घुस जाए और नरेंद्र मोदी को देश छोडऩे के लिए मजबूर कर दिया जाए। ऐसी बातें दिल्ली के प्रदर्शनों में कही भी गई है। देखना होगा कि एक नवंबर को कांग्रेस दिल्ली में कैसे हालात उत्पन्न करती है।
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महंगाई के विरोध में यूरोप के कई देशों में हिंसा। फिलिस्तन के झंडे भी लहराए।
जामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर देश विरोधी नारे।
1 नवंबर को दिल्ली में लाखों की भीड़ जुटाने से पहले विपक्षी दल और राहुल गांधी ऐसे हालातों को देखे लें।
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भारत के विपक्षी दल खासकर कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी चाहते है कि मौजूदा मोदी सरकार के खिलाफ बड़ा जनआंदोलन हो और फिर सत्ता परिवर्तन हो जाए। इसके लिए अक्टूबर माह में कई बार देश की राजधानी दिल्ली में धरना प्रदर्शन किया गया, लेकिन लाख कोशिश के बादभी विपक्षी दलों का प्रयास सफल नहीं हुआ। अब कांग्रेस और राहुल गांधी की पहल पर विपक्षी दलों ने 1 नवंबर को दिल्ली में लाखों लोगों की भीड़ जुटाने का आह्वान किया है। जब देश में दीपावली पर्व का उत्साह है तब एक नवंबर को दिल्ली में भीड़ जुटाई जा रही है। कांग्रेस और राहुल गांधी को दिल्ली में भीड़ जुटाने से पहले यूरोप के कई देशों के हालात देख लेने चाहिए। फ्रांस, इटली, अल्बानिया आदि देशों में महंगाई के विरोध में जबरदस्त हिंसा हो रही है। फ्रांस में तो फिलिस्तीन के झंडे लहराए जा रहे हैं। इससे प्रदर्शनकारियों की मंशा को समझा जा सकता है। इसके विपरीत ईरान-अमेरिका और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी भारत में महंगाई पर नियंत्रण है। देश के 80 करोड़ लोगों को पांच किलो अनाज प्रतिमाह निशुल्क दिया जा रहा है। दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं है, जहां 80 करोड़ लोगों को पांच किलो मुफ्त अनाज मिले। इसके अलावा स्वास्थ्य बीमा से लेकर निशुल्क आवास तक जरूरतमंद लोगों को दिए जा रहे है। ऐसे में भारत में महंगाई कोई मुद्दा नहीं है।
पाकिस्तान रक्षक:
24 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर के बारामूला में एक रैली को संबोधित करते हुए जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के पिता और नेशनल कॉन्फेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर की आजादी के मुद्दे पर अब हमें दिल्ली केंद्र सरकार से कोई उम्मीद नहीं है। यदि कश्मीरियों को अपनी पहचान बनाए रखनी है तो लड़ाई लडऩी पड़ेगी। फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि पड़ोसी देश पाकिस्तान ही अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कश्मीर का मुद्दा उठाता है। आज पाकिस्तान ही हमारा रक्षक है। सब जानते हैं कि आजाद के बाद से ही जम्मू कश्मीर में अधिकांश समय अब्दुल्ला खानदान का ही शासन रहा। पहले शेख अब्दुल्ला, फिर पुत्र फारुख अब्दुल्ला और अब उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री है। आज भी अब्दुल्ला खानदान के मन में कश्मीर की आजादी की तमन्ना है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस मंशा से अब्दुल्ला खानदान में जम्मू कश्मीर पर राज किया। दिल्ली में एक नवंबर को जो भीड़ जुटाने का आह्वान किया गया है उसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस भी शामिल है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता किस मंशा से दिल्ली में एकत्रित होंगे, यह जग जाहिर है। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू कश्मीर में बड़ी मुश्किल से हालात नियंत्रित किए गए हैं, लेकिन अब्दुल्ला खानदान और कांग्रेस मिलकर कश्मीर के हालातों को बिगाडऩा चाहते हैं।
जामिया की दीवारों पर नारे:
उत्तर प्रदेश की जामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर देश विरोधी नारे लिखे गए है। इसमें कश्मीर की आजादी के साथ साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मादेी के बारे में भी विवादित बाते लिखी गई। जब दिल्ली में लाखों लोगों की भीड़ जुटाई जा रही है, तब जामिया यूनिवर्सिटी के हालात भी देखने चाहिए। ऐसा नहीं कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं है। देश में हर पांच वर्ष में त्रिस्तरीय चुनाव होते है। यह बात अलग है कि इन चुनावों में कांग्रेस और विपक्षी दलों को बहुमत नहीं मिल रहा। यही वजह है कि अब भीड़ तंत्र की आड़ में सत्ता परिवर्तन की बात कही जा रही है। आमतौर पर देखा गया है कि अब भीड़ का प्रदर्शन होता है तब अराजक तत्व सक्रिय होकर हालातों को बिगाड़ देते है। अक्टूबर के प्रदर्शन में कई नेताओं ने बांग्लादेश जैसे हालात उत्पन्न करने की बात सार्वजनिक तौर पर कही है।
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नेशनल पेंशन स्कीम नियोक्ता और श्रमिक दोनों के लिए लाभदायक।
अजमेर के मित्तल मॉल में हुई लघु उद्योग भारती की कार्यशाला।
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24 अक्टूबर को अजमेर के मित्तल मॉल स्थित सरोवर पोर्टिको के सभागार में राष्ट्रीय संगठन लघु उद्योग भारती की नेशनल पेंशन स्कीम को लेकर एक ज्ञापनवद्र्धक कार्यशाला हुई। इस कार्यशाला में पेंशन स्कीम के विशेषज्ञ अजिंक्य देशपांडे ने पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया, एनपीएस नियोक्त और श्रमिकों दोनों के लिए लाभदायक है। इस स्कीम में पंजीकरण भी सरल है। लघु उद्यमी स्वयं के लिए भी इस स्कीम का उपयोग कर सकता है। स्कीम की सबसे खास बात यह है कि पेंशन के लिए जो अंश दान जमा करवाया जाएगा वह टैक्स मुक्त होगा। 60 वर्ष की उम्र के बाद अंशदान के अनुरूप नियोक्ता और श्रमिक दोनों को पेंशन मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों के कार्मिकों के लिए तो पेंशन की सुविधा है, लेकिन लघु उद्यमियों के लिए पेंशन की व्यवस्था नहीं है। लेकिन एनपीएस के दायरे में छोटे कारोबारियों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा लघु उद्यमी का मतलब किसी उद्योग को चलाने वाला ही नहीं बल्कि गली मोहल्ले में छोटी बड़ी दुकान चलाने वाला भी इस स्कीम के दायरे में आता है। उन्होंने कहा जो भी व्यक्ति अपने कारोबार से जुड़ा है उसे इस स्कीम का लाभ उठाना चाहिए।
यूटीआई फंड की जानकारी:
कार्यशाला में यूटीआई पेंशन फंड के बारे में जानकारी देते हुए मुकेश यादव ने पेंशन फंड के लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि म्यूचुअल फंड का ही एक सुरक्षित और अनुशासित रूप है। इसमें पूंजी को सुरक्षित संपत्तियों में निवेश किया जाता है, जिससे निवेशकों को भविष्य के लिए एक स्थिर और सुनिश्चित रिटर्न प्राप्त होता है। सत्र के दौरान तकनीकी प्रश्नोत्तरी का संचालन सुभाष बडज़ात्या द्वारा किया गया, जिसमें उपस्थित उद्यमियों ने अपने उद्यम प्रमाण पत्र के साथ सहभागिता करते हुए योजना से जुड़े तकनीकी प्रश्नों और संशय का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम में संगठन परिचय गिरिराज अग्रवाल ने रखा तथा मंच संचालन गौरव बाहेती ने किया। इस अवसर पर लघु उद्योग भारती के प्रमुख पदाधिकारी एवं सदस्य राजेश बंसल, अशोक शर्मा, अशोक मोतियानी, गोपाल रावत, अंकुर गुप्ता, दिनेश नवल, दिव्य सोमानी, राहुल राजपुरोहित सहित अजमेर क्षेत्र के कई गणमान्य सूक्ष्म एवं लघु उद्यमी उपस्थित रहे। कार्यशाला में कुणाल जैन ने अतिथियों वक्ताओं एवं पधारे हुए उद्यमियों का औपचारिक अभिनंदन किया। इस कार्यशलाा के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9413309933 पर लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधि से ली जा सकती है।
संगठन नीति-निर्माताओं और उद्यमियों के बीच सेतु का कार्य कर रहे-अशोक तोषनीवाल:
सभा को संबोधित करते हुए लघु उद्योग भारती के महामंत्री अशोक तोषनीवाल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र या उद्योग की प्रगति में नीति-निर्माताओं और धरातल पर कार्य करने वाले उद्यमियों के बीच की संवादहीनता एक बड़ी बाधा बनती है। कई बार शासन की उत्कृष्ट योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक अपेक्षित गति से नहीं पहुँच पातीं। ऐसे में लघु उद्योग भारती जैसे औद्योगिक संगठन सरकार और उद्यमियों के मध्य एक सशक्त सेतु की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि वर्तमान सरकार इस दूरी को पाटने के लिए निरंतर प्रयासरत और संवेदनशील है। साथ ही उन्होंने उद्यमियों की जागरूकता और नवाचारों से अद्यतन रहने की ललक की सराहना करते हुए कहा कि यह सोच पूरे नगर के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।
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25 वर्ष पूरे होने पर अजमेर के रसोई रेस्टोरेंट में जश्न का माहौल।
31 अक्टूबर तक ग्राहकों को एक डेजर्ट फ्री।
2001 में स्वामी कॉम्प्लेक्स की शुरुआत के साथ मॉल संस्कृति का उदय। राजनीति के उतार चढ़ाव भी देखे।
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वर्ष 2001 में अजमेर में पहली बार इंडिया मोटर सर्किल पर स्वामी कॉम्प्लेक्स का शुभारंभ हुआ और इसी के साथ अजमेर में मॉल संस्कृति का उदय भी हुआ। कॉम्प्लेक्स के मालिक कंवल प्रकाश किशनानी को तब उम्मीद नहीं थी कि एक दिन अजमेर में मित्तल मॉल जैसे बड़े बहुउद्देशीय कॉम्प्लेक्स भी बनेंगे, लेकिन आज किशनानी को गर्व है कि उन्होंने छोटे स्तर पर जो शुरुआत की वह अब अजमेर में विशाल रूप ले चुकी है। कॉमप्लेक्स की श्ुारुआत के साथ ही रसोई रेस्टोरेंट का का भी शुभारंभ किया गया। अजमरे में आए दिन नए रेस्टोरेंट खुलते हैं लेकिन कुछ समय बाद बंद भी हो जाते है। लेकिन रसोई रेस्टोरेंट एकमात्र ऐसा रेस्टोरेंट है जो गत 25 वर्षों से लगातार चल रहा है। स्वामी कॉमप्लेक्स की चौथी मंजिल पर चलने वाले इस रेस्टोरेंट में समय के साथ बदलाव भी किए गए। वर्ष 2011 में रेस्टोरेंट को ट्रेन का लुक दिया गया। आज नए दौर के परविर्तन किए गए है। रेस्टोरेंट की कमान कंवल प्रकाश के पुत्र गौरांग किशनानी ने संभाल ली है। मुंबई से होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद गौरांग ने अपने परिवार के परंपरागत कारोबार को आगे बढ़ाया है। भले ही रेस्टोरेंट का उद्देश्य स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध करवाना होगा, लेकिन गौरांग ने जो नए प्रयोग किए है उसमें अब रेस्टोरेंट की छत पर बड़े आयोजन भी हाने लगे हैं। चौथी मंजिल पर रेस्टोरेंट होने के बाद भी दिन भर ग्राहकों की भीउ़ रहती है। ग्राहकों के लिए लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। गौरांग ने बताया कि 31 अक्टूबर तक जो भी ग्राहक आएंगे उन्हें प्रबंधन की ओर से एक डेजर्ट (मिठाई या आइसक्रीम) निशुल्क दी जाएगी। गौरांग ने कहा कि उन्हें गर्व है कि पिता कंवल प्रकाश ने जो पौधा लगाया था आज वह वटवृक्ष बन गया है। किसी भी रेस्टोरेंट का 25 वर्ष तक लगातार चलना आसान काम नहीं है ।
राजनीति के उतार चढ़ाव:
कंवल प्रकाश किशनानी भाजपा के वरिष्ठ नेता भी है। इसलिए स्वामी कॉम्प्लेक्स और रसोई रेस्टोरेंट ने राजनीति के उतार चढ़ाव भी देखे हैं। किशनानी ने अजमेर उत्तर से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लडऩे के हर बार प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। अपनी राजनीतिक इच्छाओं के चलते किशनानी ने रसोई रेस्टोरेंट में वर्षों तक भाजपा के कार्यक्रम करवाए। यही वजह रही कि भाजपा के दिग्गज नेता रसोई रेस्टोरेंट में स्वादिष्ट भोजन करते रहे, लेकिन अब बदली हुई परिस्थितियों में रेस्टोरेंट में राजनीति से जुड़े कार्यक्रम बंद हो गए हैं। इसका मुख्य कारण यह भी है कि पुत्र गौरांग किशनानी को राजनीति से कोई रुचि नहीं है। कंवल प्रकाश भी भाजपा की राजनीति से ज्यादा सामाजिक क्षेत्र में सक्रियहो गए है। रसोई रेस्टोरेंट और स्वामी कॉम्प्लेक्स की विकास यात्रा की और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9351397710 पर कंवल प्रकाश किशनानी से ली जा सकती है।
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