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Thursday, 16 July 2026
क्या राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष डोटासरा के खिलाफ हाईकोर्ट की अवमानना का मामला दर्ज होगा?
पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव भजन सरकार की इच्छा पर निर्भर है।
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राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 16 जुलाई को हाईकोर्ट की अवमानना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। डोटासरा ने सार्वजनिक तौर परक हा कि आखिर पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव करावने के मामले में हाईकोर्ट कितनी बार तारीखें देगा। यदि हाईकोर्ट की अवमानना की सुनवाई के दौरान भी तारीख दे दी जाएगी तो फिर हाईकोर्ट की कथनी और करनी में फर्क दिखेगा। डोटासरा ने हाईकोर्ट के एक्टिग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित से आग्रह किया कि वे न्याय करे। डोटासरा ने 16 जुलाई को यह बयान तब दिया, जब सीजेआई शर्मा और जस्टिस पुरोहित ने हाईकोर्ट की अवमानना के मामले में एक बार फिर तारीख दे दी। डोटासरा ने जो बयान दिया वह हाईकोर्ट की अवमानना के दायरे में आता है। कोई भी व्यक्ति मुंसीफ कोर्ट की कार्यशैली को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी करता है तो उसे कोर्ट की अवमानना ही माना जाता है। डोटासरा ने तो सीधे सीजेआई शर्मा और जस्टिस पुरोहित की कार्यशैली को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। देखना होगा कि क्या हाईकोर्ट डोटासरा पर मानहानि का मामला दर्ज करता है? ऐसे मामलों में कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर मानहानि करने वाले को तलब किया है। जहां तक राजस्थान में पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव करवाने का सवाल है तो यह भजनलाल शमा्र के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की इच्छा पर निर्भर है। राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले 15 अप्रैल और फिर 31 जुलाई तक चुनाव करवाने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार के मंत्रियों ने कह दिया कि चुनाव तो नवंबर दिसंबर में होंगे। इस बीच हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना का मामला प्रस्तुत हो गया। अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ही 16 जुलाई को सीजेआई शर्मा और जस्टिस पुरोहित ने राज्य सरकार, चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग को जवाब देने के लिए 20 जुलाई की तारीख दे दी। याचिकाकर्ताओं को उम्मीद थी कि 16 जुलाई को हाईकोर्ट का सख्त रुख सामने आएगा, लेकिन हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान ओबीसी आयोग से जानना चाहा कि आयोग की रिपोर्ट कब तक आ जाएगी। मीडिया में प्रसारित हो रहा है कि चुनाव नहीं करवाने को लेकर कोर्ट ने राज्य सरकार, चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग को फटकार लगाई है। यदि हाईकोर्ट स्वयं के आदेशों की अवहेलना को मानता तो 16 जुलाई को ही संबंधित संस्थाओं के अधिकारियों को जेल भेजने के आदेश दे देता। लेकिन स्वयं के आदेश की अवहेलना हो जाने के बाद भी संबंधित संस्थाओं से ही जवाब मांगा जा हा है। चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि चुनाव प्रक्रिया में 90 दिन लगेंगे और चुनाव की प्रक्रिया तभी शुरू होगी, जब राज्य सरकार ओबीसी वर्ग का आरक्षण निर्धारित कर देगी। सरकार आरक्षण का तभी निर्धारण कर पाएगी जब ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट देगा। पूर्व न्यायाधीश भाटी की अध्यक्षता में गठित ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को कब देगा, यह किसी को भी पता नहीं है। इसलिए माना जा रहा है कि राजस्थान में भजनलाल शर्मा की सरकार जब चाहेगी, तब पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव होंगे। हाईकोर्ट यदि कोई आदेश दे भी देता है तो अभी सुप्रीम कोर्ट शेष है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-07-2026)
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चीन समर्थक सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को जनसमर्थन नहीं मिल रहा।
अब वो जमाना गुजर गया, जब देश को गाली देकर हीरों बन जाते थे।
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लद्दाख में रहकर चीन के समर्थन में बयान देने वाले सोनम वांगचुक का 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर मंतर पर 20वें दिन भी आमरण अनशन जारी रहा। चिकित्सकों का आकलन है कि वांगचुक अभी कुछ दिन और अनशन पर रह सकते हैं। फिलहाल उनके जीवन को कोई खतरा नहीं है, लेकिन वांगचुक के कुछ समर्थकों को आश्चर्य है कि इतने लंबे अनशन के बाद भी वांगचुक को जनसमर्थन नहीं मिल रहा है। वांगचुक के समर्थन में जो कुछ युवा आ रहे हैं उनकी पृष्ठभूमि दिल्ली के जेएनयू की है। इसलिए अनशन स्थल पर देश विरोधी और सनातन संस्कृति के विरुद्ध भाषण और नारेबाजी हो रही है। वांगचुक नीट परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हालांकि इस मांग पर केद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, क्योंकि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पहले ही खारिज की जा चुकी है। वांगचुक के आमरण अनशन को जनसमर्थन नहीं मिलने से यह प्रदर्शित हो रहा है कि जब भारत में राष्ट्रवाद की भावना प्रबल है। वो जमाना गुजर गया जब अपने ही देश और सनातन संस्कृति को गाली देकर हीरो बन जाते थे। अनुच्छेद 370 के हटने से पहले जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेता भी अपने देश को गालियां देते थे और जनता की नजर में हीरो बन जाते थे। कांग्रेस के भी कई नेता देश विरोधी बयान देते थे। तब यह मान लिया गया कि देश की आलोचना करने वाले ही नेता बन सकते हैं, लेकिन भारत में वर्ष 2014 के बाद जो बदलाव आया, उसमें राष्ट्रवाद की भावना प्रबल हुई। जो लोग अपने ही देश की आलोचना करते थे, उन सबको जनता ने किनारे कर दिया। जिन लोगों ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर और अयोध्या में राम मंदिर बनवाकर सनातन संस्कृति को मजबूत किया उन्हें जनता ने सत्ता सौंपी। चूंकि सोनम वांगचुक भी समय समय पर अपने देश की आलोचना कर चीन के गुणगान करते रहे, इसलिए आज आमरण अनशन के बाद भी जनसमर्थन नहीं मिल रहा है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं को उम्मीद थी कि वांगचुक के आमरण अनशन से देश भर के युवा एकजुट होंगे, लेकिन इस उम्मीद पर पानी फिर गया। अच्छा हो कि वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर लद्दाख लौट जाए और लद्दाख में रहकर देश की एकता और अखंडता के लिए काम करें। यदि वांगचुक देशहित में काम करेंगे तो उनके एक दिन के अनशन का भी असर होगा और देश की जनता उन्हें सिर पर बैठाएगी। लेकिन यदि वांगचुक अपने ही देश और संस्कृति को गालियां देंगे तो उनके अनशन का कोई असर नहीं होगा। आज पूरा देश अयोध्या में राम मंदिर के बनने से गौरवान्ति है।
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मानसून के धोखा दे देने से अजमेर के आनासागर में मछलियां मर रही है।
यदि तीन फीट पानी की निकासी नहीं की जाती तो आनासागर से अचानक निकलने वाले पानी से शहर भर में मुसीबत होती।
कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन अपनी जगह है।
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अजमेर शहर के बीचों बीच बने आनासागर में इन दिनों हजारों मछलियां प्रतिदिन मर रही है। इसका कारण आनासागर में पानी की कमी होना है। असल में मानसून को देखते हुए प्रशासन ने आनासागर से तीन फीट पानी की निकासी कर दी। प्रशासन को उम्मीद थी कि मानसून की बरसात का पानी आनासागर में आ जाएगा, लेकिन इस बार मानसून ने धोखा दे दिया। बरसात का पानी नहीं आने के कारण आनासागर सूखा रह गया और अब मछलियां मर रही है। लेकिन सवाल उठता है कि यदि बरसात से पूर्व आनासागर को खाली नहीं किया जाता और बरसात का पानी आ जाता, तब उत्पन्न होने वाले हालातों का कौन जिम्मेदार होता? आनासागर का ओवरफ्लो पानी एस्केप चैनल के जरिए शहर से होकर ही निकलता है। प्रतिवर्ष एस्केप चैनल के ओवरफ्लो होने से शहर भर के लोगों को परेशानी होती है। दक्षिण क्षेत्र की निचली बस्तियों में तो एस्केप चैनल का पानी भर ही जाता है, साथ ही शहर के प्रमुख मार्ग भी बंद हो जाते हैं। प्रमुख मार्ग कई दिनों तक बंद रहते हैं। गत वर्ष भी बरसात के दिनों में शहर के लोगों ने आनासागर के पानी से उत्पन्न हुई परेशानियों को झेला था। गत वर्ष की तरह शहरवासियों को परेशानी न हो इसको देखते हुए ही प्रशासन ने मानसून से पहले आनासागर को तीन फीट खाली कर दिया, लेकिन मानसून ने धोखा दे देने से आनासागर खाली रह गया। अब उन स्थानों पर मछलियां मर रही है, जहां पानी की कमी है या जमीन पूरी तरह सूख गई है। मछलियों के मरने से दुर्गंध का माहौल है। जिला कलेक्टर लोकबंधु के निर्देश पर नगर निगम के सफाई कर्मियों आनासागर से मरी मछलियों को उठाने का काम कर रहे हैं। निगम के अधीक्षण अभियंता मनोहर सोनगरा ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में मृत मछलियों का निस्तारण किया जा रहा है। इसके साथ ही आनासागर में चूना डाला जा रहा है ताकि पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहे, सोनगरा ने कहा कि बरसात का थोड़ा पानी आते ही मछलियों के मरने का सिलसिला बंद हो जाएगा। उन्होंने बताया कि आनासागर में वर्षभर पानी का स्तर बना रहता है, क्योंकि आसपास की कॉलोनियों के पानी को शुद्ध कर आनासागर में डाला जाता है। इसके लिए आनासागर के भराव क्षेत्र में 13 एमएलडी पानी की क्षमता वाला ट्रीटमेंट प्लांट लगा रखा है।
विरोध अपनी जगह:
आनासागर में मछलियों के मरने को लेकर 16 जुलाई को शहर कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन किया गया। चूंकि कांग्रेस विपक्ष में है, इसलिए उसे विपक्ष का धर्म निभाना चाहिए। लोकतंत्र में विपक्ष को शासन प्रशासन की खामियों की आलोचना करने का अधिकार है। विपक्ष के विरोध का भी प्रशासन पर असर होता है।
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Tuesday, 14 July 2026
आनासागर में आने वाले 13 में से 10 नालों का पानी ट्रीट (शुद्ध) होकर ही गिर रहा है।
7 एमएलडी क्षमता वाला ट्रीटमेंट प्लांट 8 अगस्त से शुरू हो जाएगा। गंदे पानी को ट्रीट करने की प्रक्रिया को अजमेर का कोई भी नागरिक प्लांट पर आकर देख सकता है।
मछलियों को बचाने के लिए आनासागर में चूना डाला और फाउंटेन भी चले।
कलेक्टर लोकबंधु के निर्देश पर प्रभावी कार्यवाही
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अजमेर के आनासागर में मर रही मछलियों, पानी में ऑक्सीजन की कमी ओर नालों का गंदा पानी गिरने की लोकर 13 जुलाई को मैंने ब्लॉग संख्या 12353 लिखा था। इस ब्लॉग पर जिला कलेक्टर लोक बंधु के निर्देश पर नगर निगम की कार्यवाहक आयुक्त नित्या के (आईएएस) ने प्रभावी कार्यवाही करवाई। आनासागर में जिन स्थानों पर मरी हुई मछलियां पड़ी थी, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया गया है ताकि कुत्ते और मांसाहारी पक्षी गंदगी न फैलाए। आनासागर के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए नाव से बड़ी मात्रा में चूना डाला गया है। इतना ही नहीं फाउंटेन चलाकर ऑक्सीजन को बढ़ाने के प्रयास भी किए गए है। आनासागर के संरक्षण से जुड़े नगर निगम के अधीक्षण अभियंता मनोहर सोनगरा ने बताया कि जिन स्थानों पर पानी का अभाव रहा, वहां मछलियां मरी है, लेकिन भविष्य में मछलियों के मरने की घटना न हो इसके लिए अब प्रभावी कदम उठाए हैं। आवश्यकता होने पर आनासागर में सूखे चूने को और डलवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि चूने में मिक्स पदार्थों से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। इस बात का भी ख्याल रखा जा रहा है कि आनासागर कि किनारे सूखी जमीन पर समुचित साफ सफाई हो, ताकि आवरा जानवर गंदगी न फैलाए। अभी जो कचरा पड़ा है, उसे भी युद्ध स्तर पर उठाने का काम किया जा रहा है।
नालों का पानी ट्रीट हो रहा है:
जिला कलेक्टर लोक बंधु के निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि आनासागर में नालों का पानी ट्रीट शुरू कर ही डाला जाए। सीवरेज और नालों के गंदे पानी को शुद्ध करने के संबंध में नगर निगम के अधिशासी अभियंता (सीवरेज योजना) रविंद्र जैन ने बताया कि जिन 13 नालों का पानी आनासागर में आता है, उनमें से 10 नालों के पानी को आनासागर के किनारे लगे ट्रीटमेंट प्लांट तक लाया जाता है। गंदे पानी को शुद्ध करने के बाद ही आनासागर में छोड़ा जा रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट में पानी की शुद्धता के जो पैरामीटर निर्धारित कर रखे हैं, उसमें एक लीटर पानी में 2.5 मिलीग्राम ऑक्सीजन की मात्रा होनी चाहिए। इस पैरामीटर को आनासागर में पूरा किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त और जो तकनीकी मापदंड है, उन्हें भी पूरा किया जा रहा है। मौजूदा प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 13 एमएलडी पानी को शुद्ध करने की है। अभी 11 एमएलडी से ज्यादा पानी प्रतिदिन शुद्ध किया जा रहा है। एक्सईएन जैन ने प्लांट पर खड़े होकर कांच के दो बार अपने हाथ में लिए एक जार में गंदा पानी और दूसरे जार में प्लांट में शुद्ध हुआ पानी भरा। और यह बताने का प्रयास किया कि आनासागर में कितना शुद्ध पानी छोड़ा जा रहा है। जैन ने कहा कि आनासागर का ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड है। कम्प्यूटर से ही प्लांट की इकाइयों को संचालित किया जाता है। ऐसे में गंदे पानी को आनासागर में नहीं छोड़ा जा सकता है। ट्रीटमेंट प्लांट की इस पारदर्शी प्रक्रिया को अजमेर का कोई भी नागरिक आकर देख सकता है। उन्होंने कहा कि जब प्लांट पर पानी को मापदंड के अनुरूप शुरू किया जा हा है तो निगम प्रशासन के पास छिपाने को कुछ भी नहीं है। उन्होंने माना कि मौजूदा समय में काजी का नाला, नागफनी का नाला और महावीर कॉलोनी के नाले के पानी को शुद्ध नहीं किया जा रहा है। इन नालों का पानी फिलहाल पाइपों में ही संग्रहित रखा गया है। उन्होंने बताया कि मौजूदा प्लांट के पास ही 7 एमएलडी की क्षमता वाला एक और प्लांट लग रहा है। इन नए प्लांट में भी 8 अगस्त से गंदे पानी को ट्रीट करने का काम शुरू हो जाएगा। नए प्लांट के शुरू होने के बाद आनासागर में आने वाले सभी 13 नालों के पानी को शुद्ध किया जा सकेगा। जैन ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि आनासागर के ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ी सीवरेज लाइनें अब सुचारू काम कर रही है। इसलिए इस क्षेत्र में सीवरेज चैंबर के ओवरफ्लो होने की घटनाएं नहीं हो रही। यानी घरों से निकलने वाला सीवरेज का पानी पाइप लाइन के जरिए ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच रहा है। जैने ने आनासागर के आसपास बसी कॉलोनियों के लोगों से भी अपील की कि वेएक बार एसटीपी प्लांट पर आकर पानी के शुद्ध होने की प्रक्रिया को देखे। आनासागर में साफ सफाई और ट्रीटमेंट प्लांट की प्रक्रिया से जुड़े फोटोज मेरे फेसबुक पेज पर देखे जा सकते हैं।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 14-07-2026)
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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत पर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर कम से कम मर्यादित आचरण तो करें।
मीडिया के कैमरों के सामने हसंगे और ब्रेक के बाद जैसे शब्द कहेंगे तो सरकार की बदनामी तो होगी ही।
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कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा आदि जिलों के सरकारी अस्पतालों में हो रही प्रसूताओं की मौत को लेकर 13 जुलाई को जयपुर में राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में मंत्री के साथ चिकित्सा विशेषज्ञ भी बैठे और यह जताने की कोशिश की कि प्रसूताओं की मौत चिकित्सकों की लापरवाही, गलत इंजेक्शन, गलत दवा देने आदि के कारणों से नहीं हुई, बल्कि एनीमिया, हाई बीपी, पीपीएच, लीवर किडनी फेल, न्यूटीशियन की कमी जैसे कारणों से हुई है। चिकित्सा मंत्री के संरक्षण में बैठे चिकित्सा विशेषज्ञों का यह भी कहना रहा कि प्रसूताओं की मौत के मामले में दूसरे अस्पतालों से स्थानांतरित होकर आए। यानी प्राथमिक स्तर पर समुचित इलाज नहीं हुआ। खुद मंत्री खींवसर ने बताया कि वर्ष 2023-24 में मातृ मृत्यु दर प्रदेश में 1094 थी जो वर्ष 2025-26 में घटकर 824 रह गई है। इसी प्रकार प्रसूताओं की मृत्यु दर में भी कमी आई है। हो सकता है कि मंत्री और चिकित्सा विशेषज्ञों के दावे सही हो,लेकिन मीडिया के कैमरों के सामने चिकित्सा मंत्री खींवसर को कम से कम मर्यादित आचरण तो करना ही चाहिए। 13 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों के बीच ही मंत्री खड़े हो गए और हंसते हुए कहा कि बाकी सवालों के जवाब ब्रेक के बाद। मंत्री ने कहा कि वे भीलवाड़ा जा रहे है, जहां प्रसूताओं की मौत के कारणों का पता लगाएंगे। मंत्री ने हंसते हुए ब्रेक के बाद जैसे शब्द कहे उससे साफ जाहिर था कि प्रसूताओं की मौत के मामलों में भी मंत्री खींवसर संवेदनशील नहीं है। मंत्री के हंसने और ब्रेक के बाद के शब्दों से प्रेस कॉन्फ्रेंस के उन आंकड़ों पर पानी फिर गया जो चिकित्सा विशेषज्ञों ने रखे थे। मंत्री खींवसर के इस गैर जिम्मेदाराना आचरण की आलोचना अब राष्ट्रीय मीडिया में भी हो रही है। असल में गजेंद्र सिंह खींवसर चिकित्सा विभाग को लेकर कभी गंभीर नहीं रहे। उनके व्यवहार को लेकर विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक भी खुश नहीं है। जबकि चिकित्सा मंत्री तो बेहद ही गंभीर और संवेदनशील होना चाहिए, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि राजस्थान के चिकित्सा मंत्री न केवल संवेदनहीन है बल्कि अपने विभाग के प्रति वफादार भी नहीं है। जानकार सूत्रों की माने तो मंत्री खींवसर को लेकर जो शिकायतें प्राप्त हुई है उसी के आधार पर गत दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खींवसर को तलब किया था। ऐसा लगता है कि अमित शाह की हिदायतों का भी खींवसर पर कोई असर नहीं हुआ है। चूंकि चिकित्सा विभाग सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकारी अस्पतालों में होने वाली घटनाओं का असर प्रदेश की भाजपा सरकार पर पड़ता है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 14-07-2026)
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