Saturday, 12 June 2021

पाठकों को ही समर्पित है 8000 वां ब्लॉग। कोरोना की दूसरी लहर में रोजाना तीन-चार ब्लॉग लिखना बहुत जोखिम भरा रहा।

इसे मेरे लाखों पाठकों का प्यार और स्नेह ही कहा जाएगा कि मैं अपना 8000 वां ब्लॉग लिख रहा हंू। कोई पांच साल पहले जब ब्लॉग लिखने की शुरुआत की थी तब सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं 8000वां ब्लॉग लिखूंगा। लेकिन ईश्वर के आशीर्वाद और पाठकों के स्नेह की वजह से मेरा यह सपना पूरा हुआ। पाठकों का दायर भी अब अजमेर-राजस्थान से निकल कर देशभर का हो गया है। विदेशों में रहने वाले राजस्थान के प्रवासी भी बड़े चाव से रोजाना ब्लॉग पढ़ते हैं। वैसे तो सामान्य दिनों में भी प्रतिदिन ताजा घटनाओं पर आधारित ब्लॉग लिखना कठिन रहता है, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में तो ब्लॉग लिखना जोखिम भरा रहा। घर से बाहर निकलना जब मौत को बुलावा देना था, तब मैं प्रतिदिन घर से दफ्तर आया और ब्लॉग लिखे। मेरा मानना रहा कि ब्लॉग लिखना भी जरुरतमंद लोगों की सेवा करना है। संक्रमित मरीजों की समस्याओं को उठाकर राहत दिलवाने की कोशिश की गई। व्यक्तिगत स्तर पर भी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन से लेकर अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया गया। इसके लिए  सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के चिकित्सकों से आग्रह भी किया गया। समाजसेवा मेरे स्वभाव में ही है, इसलिए कई ब्लॉग सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहते हैं। पहले ब्लॉग लिखना और फिर करीब तीन हजार वाट्सएप ग्रुप में पोस्ट करना वाकई कठिन काम हैं, लेकिन पाठकों के स्नेह और प्यार की वजह से कठिन कार्य आसान हो जाता है। देशभर से जब आलोचनाओं के साथ साथ ढेर सारी प्रशंसा भी मिलती है, तब ब्लॉग लिखने का जज्बा बना रहता है। मैंने पहले भी लिखा है कि लाखों लोगों तक ब्लॉग को पहुंचाने में मेरी पत्नी श्रीमती अचला मित्तल का भी सहयोग रहता है। मेरे सहयोगी प्रवीण कुमार और परिवार के सदस्य भी मुझे तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाते हैं। मेरे द्वारा ब्लॉग लिखने का काम अपनी जगह है, लेकिन लाखों लोगों तक ब्लॉग को पहुंचाने का काम इससे भी बड़ा है। आज सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर मेरा ब्लॉग उपलब्ध है। यह काम टीम भावना से ही संभव है। मुझे संतोष है कि ब्लॉग देशभर में पढ़ा जा रहा है और ब्लॉग पर प्रतिक्रिया भी होती है। शासन और प्रशासन में भी ब्लॉग को गंभीरता से लिया जाता है। 
S.P.MITTAL BLOGGER (12-06-2021)
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श्याम मूंदड़ा ने नशीली दवाइयां अजमेर से ज्यादा जोधपुर, पाली, चूरू, नागौर, भीलवाड़ा आदि शहरों में सप्लाई की। अब पांच दिन के पुलिस रिमांड पर।नशीली दवाओं के कारोबारी मूंदड़ा की गिरफ्तारी अजमेर पुलिस की बड़ी कामयाबी।एसपी जगदीशचंद शर्मा ने डीएसपी मुकेश सोनी के नेतृत्व में तीन थाना अधिकारियों की टीम बनाई थी। मेडिकल स्टोर संचालकों में खलबली।

12 जून को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजमेर के जिला पुलिस अधीक्षक जगदीशचन्द्र शर्मा ने बताया कि नशीली दवाओं फरार कारोबारी श्याम सुंदर मूंदड़ा को 11 जून की रात को नागौर जिले के मेड़ता की एक होटल से गिरफ्तार कर लिया गया है। मूंदड़ा की गिरफ्तारी के लिए दक्षिण क्षेत्र के डीएसपी मुकेश सोनी के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी। इस टीम मेें अजमेर शहर के तीन थानों क्लॉक टावर, अलवर गेट और रामगंज के थाना अधिकारियों के साथ साथ जिला पुलिस की स्पेशल टीम को शामिल किया गया। संयुक्त प्रयास के बाद ही मूंदड़ा की गिरफ्तारी हुई है। टीम में शामिल सभी सदस्यों को पुरस्कार व प्रशंसा पत्र दिया जाएगा। उन्होंने माना कि 15 करोड़ रुपए की नशीली दवाइयों की बरामदगी के बाद मुख्य आरोपी श्याम मूंदड़ा की गिरफ्तारी पुलिस के चुनौती थी। अजमेर में जब 24 मई को करीब सवा पांच करोड़ रुपए की नशीली दवाइयां ट्रांसपोर्ट नगर से जब्त की गई थी, तभी से मूंदड़ा फरार चल रहा था। मूंदड़ा की फरारी के बाद ही पांच व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया, जो सभी श्रमिक प्रवृत्ति के थे। लेकिन सभी ने इस बात को माना कि नशीली दवाइयों को मंगाने और फिर इधर उधर भेजने में मूंदड़ा की ही भूमिका थी। वहीं प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद मूंदड़ा ने जो प्राथमिक जानकारी दी है, उसके अनुसार नशीली दवाइयां अजमेर से ज्यादा जोधपुर, पाली, चूरू, नागौर, भीलवाड़ा आदि शहरों में सप्लाई की गई है। पुलिस अब उन सभी लोगों की पहचान कर रही है, जिन्होंने मूंदड़ा से प्रतिबंधित नशीली दवाइयां खरीदी हैं। असल में नशीली दवाइयां उत्तराखंड की हिमालय मेडिटेक कंपनी से जयपुर में रम्या फर्मा तक आती थी। निर्माता कंपनी से रम्या फर्मा तक बिल के अनुरूप माल की सप्लाई होती थी, लेकिन जयपुर के बाद श्याम सुंदर मूंदड़ा जैसे दवा कारोबारी नशीली दवाइयों को गलत तरीके से बेचते थे। अजमेर पुलिस ने भी जयपुर पुलिस की सूचना के बाद करीब 11 करोड़ रुपए की नशीली गोलियां, कैप्सूल, इंजेक्शन बरामद किए थे। जानकार सूत्रों के अनुसार ऐसी दवाइयों पर पहले ही एमआरपी पर 40 प्रतिशत तक का कमीशन होता है। लेकिन मूंदड़ा जैसे कारोबारी इन नशीली दवाइयों को एमआरपी से दोगुनी तीगुनी कीमत पर अवैध तरीके से बेचते थे। इससे मुनाफे का अंदाजा लगाया जा सकता है। मूंदड़ा की गिरफ्तारी के बाद संबंधित शहरों के मेडिकल स्टोर संचालकों में खलबली मच गई है। नशीली दवाइयां अधिकांश तौर पर मेडिकल स्टोरों के माध्यम से ही बेची जाती हैं। पुलिस न 12 जून को मूंदड़ा को न्यायालय में प्रस्तुत कर पांच दिनों के रिमांड पर लिया है। 
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सचिन पायलट के मर्ज का इलाज प्रियंका गांधी के पास नहीं जयपुर में अशोक गहलोत के पास है।फोन कर विधायकों को सीएमआर में बुलाया जा रहा है। किशनगढ़ के निर्दलीय विधायक सुरेश टांक और ओम प्रकाश हुड़ला ने भरोसा दिलाया कि की इस बार गहलोत के शिविर में ही रहेंगे।पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी भाजपा और निर्दलीय विधायकों के हाल चाल पूछ रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात करने के लिए राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम और असंतुष्ट नेता सचिन पायलट दिल्ली पहुंच गए हैं। लेकिन सवाल उठता है कि क्या प्रियंका गांधी सचिन पायलट के मर्ज का इलाज कर पाएंगी? सब जानते हैं कि पायलट का मर्ज राजस्थान में कांग्रेस की सरकार से जुड़ा हुआ है। पायलट का कहना है कि विधानसभा चुनाव में हमने जो वायदे किए थे, उन्हें अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार ने पूरे नहीं किए हैं। संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को भी सत्ता में भागीदारी नहीं मिली है। पायलट ने गत वर्ष अगस्त माह में जब इन्हीं मांगों को लेकर 18 विधायकों के साथ दिल्ली में डेरा जमाया था, तब जयपुर में पायलट को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम केक पद से बर्खास्त कर दिया था। यह सही है कि पिछले एक वर्ष से पायलट ने अपने साथ सभी 18 विधायकों का समर्थन बनाए रखा है। वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी अपने पास 110 विधायकों का जुगाड़ बनाए रखा है। गहलोत समर्थकों का कहना है कि यदि पायलट अपने 18 विधायकों के साथ अलग भी रहते हैं तो भी गहलोत के नेतृत्व में सरकार चलती रहेगी। लेकिन कांग्रेस का नेतृत्व करने वाला गांधी परिवार नहीं चाहता है कि सचिन पायलट कांग्रेस में असंतुष्ट रहे या फिर अलग हो जाए। लेकिन गांधी परिवार में ही सबसे बड़ी समस्या राहुल गांधी को लेकर है। सूत्रों की मानें तो बदली हुई परिस्थितियों में राहुल गांधी पूरी तरह सीएम अशोक गहलोत के साथ खड़े हैं। राहुल गांधी अब सचिन पायलट से कोई बात भी नहीं करना चाहते हैं। भले ही दिल्ली में पायलट की मुलाकात प्रियंका गांधी से हो जाए, लेकिन पायलट के मर्ज का इलाज तो जयपुर में अशोक गहलोत के पास ही होना है। सवाल उठता है कि क्या सीएम गहलोत पायलट के समर्थकों को संगठन और सरकार में कोई महत्व देंगे? पायलट भले ही मुख्यमंत्री के पद पर दावा न करें, लेकिन उनकी नजर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के पद पर लगी हुई है। पायलट चाहेंगे कि उनके समर्थक विधायकों को मंत्री भी बनाया जाए। निगम और अन्य सरकारी संस्थानों में भी पायलट के समर्थकों की नियुक्ति की जाए। सवाल यह भी है कि जब सीएम गहलोत के पास 200 में से 110 विधायकों का जुगाड़ है तब वे पायलट की शर्तों को क्यों मानेंगे? सूत्रों के अनुसार गहलोत का खेमा तो चाहता ही है कि पायलट कांग्रेस से अलग हो जाए। यदि पायलट कांग्रेस में बने रहते हैं, तो ढाई वर्ष बाद होने वाले विधानसभा के चुनाव में टिकटों का बंटवारा हो जाएगा। गहलोत के समर्थक चाहते हैं कि 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की कमान पूरी तरह अशोक गहलोत के पास रहे। पायलट की ताजा राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए सीएम गहलोत ने भी अपने समर्थक विधायकों को सीएमआर में बुलाना शुरू कर दिया है। गहलोत एक एक विधायक से व्यक्तिगत तौर पर मिल रहे हैं। विधायकों से उनकी समस्याएं पूछी जा रही है। इसी सिलसिले में 11 जून की रात को निर्दलीय विधायक ओम प्रकाश हुड़ला और सुरेश टांक ने सीएमआर में सीएम गहलोत से मुलाकात की। दोनों विधायकों ने सीएम को भरोसा दिलाया कि यदि इस बार विधायकों का शिविर लगेगा तो वे गहलोत के शिविर में ही रहेंगे। यहां यह उल्लेखनीय है कि गत वर्ष अगस्त में ये दोनों निर्दलीय विधायक दिल्ली चले गए थे। हालांकि  दोनों विधायक पायलट वाले शिविर में नहीं थे, लेकिन इन दोनों ने अलग ठिकाना बना लिया था। हुड़ला और टाक के साथ साथ निर्दलीय विधायक खुशवीर सिंह जोरावर के खिलाफ भी तब पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था। हालांकि पायलट के वापस आने पर ये तीनों विधायक भी सीएम के समर्थन में आ गए थे। तब सीएम ने भी माना कि इन तीनों विधायकों को लेकर गलतफहमी हो गई थी। कहा जा सकता है कि इस बार ये तीनों निर्दलीय विधायक गहलोत के पास खड़े हैं। सीएमआर में पिछले दो दिन से छोटे दलों और कांग्रेस के विधायकों के आने का सिलसिला लगा हुआ है। इस बीच राजस्थान के प्रभारी अजय माकन ने एक बार फिर मंत्रिमंडल के विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों का शगुफा छोड़ दिया है। लेकिन राजस्थान में कांग्रेस की राजनीति में वो ही होगा जो सीएम गहलोत चाहेंगे। गहलोत चाहेंगे तभी सचिन पायलट संतुष्ट होंगे। राजस्थान में गांधी परिवार भी पूरी तरह गहलोत पर निर्भर है।
राजे भी पूछ रही हैं हालचाल:
कांग्रेस में जब भी असंतुष्ट गतिविधियों बढ़ती है तब भाजपा में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सक्रियता बढ़ जाती है। राजे पिछले कुछ दिनों से भाजपा और निर्दलीय विधायकों को फोन कर हाल चाल पूछ रही हैं। यह बात अलग है कि राजे जब मुख्यमंत्री थी तब मंत्रियों को भी मिले के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब जब पूर्व मंत्रियों और विधायकों के पास सीधे वसुंधरा राजे का फोन पहुंच रहा है,तो वे भी गदगद हैं। सब जानते हैं कि प्रदेश में वसुंधरा राजे अपनी ढपली अलग ही बजा रही हैं। राजे की राजनीतिक सक्रियता का सबसे ज्यादा फायदा सीएम अशोक गहलोत को ही होता है। 
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जिस शहर की जनता बेवकूफ होती है, उस शहर के धूर्त और बेईमान पॉलिटिशियन मक्खन से रोटी लगाकर खाते हैं- जार्ज बर्नार्ड शा।अजमेर शहर में बड़ी आबादी को भीषण गर्मी में चार दिन में एक बार कम प्रेशर से मात्र एक घंटे पेयजल सप्लाई हो रही है।अजमेर की जनता न तो बेवकूफ है और न ही यहां के पॉलिटिशियन धूर्त। प्रशासनिक अधिकारी और इंजीनियर हो रहे हैं निरंकुश।

ब्रिटेन में समालोचक रहे जॉर्ज बर्नार्ड शा ने कहा है कि जिस शहर की जनता बेवकूफ होती है, उस शहर के धूर्त और बेईमान पॉलिटिशियन मक्खन से रोटी लगाकर खाते हैं। संभवत: बर्नार्ड शा ने यह बात तब लिखी होगी जब ब्रिटेन के धूर्त और बेईमान पॉलिटिशियन भारत सहित दुनिया भर में राज कर रहे होंगे। तब उन्होंने देखा कि अंग्रेज किस प्रकार ब्रेड पर मक्खन लगा कर खा रहे हैं। जार्ज बर्नार्ड शा का यह कथन अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अजमेर शहर पर तो लागू होता ही नहीं है। क्योंकि शहर की एक बड़ी आबादी को भीषण गर्मी में चार-पांच दिन में एक बार कम प्रेशर से मात्र एक घंटे के लिए पेयजल की सप्लाई होने के बाद शरीर में गर्मी का अहसास नहीं हो रहा है। जनता इससे ज्यादा सहनशील क्या हो सकती है। इसी वर्ष जब जनवरी में वार्ड पार्षद के चुनाव हुए थे, तब कैसे कैसे वायदे किए। स्वयं को ही सबसे ईमानदार, सेवाभावी, वफादार बताया था। वायदे करने वाले 80 पार्षद बने भी, लेकिन अब जब उत्तर विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश भागों में चार-पांच दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई हो रही है तो ऐसे सेवाभावी पार्षद कहीं भीनजर नहीं आ रहे है। शायद अब ऐसे सेवाभावी स्वयं की सेवा करने में व्यस्त है। जहां तक क्षेत्रीय भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी का सवाल है तो उन्होंने अखबारों में बयान देकर जिला प्रशासन से लेकर जलदाय विभाग के इंजीनियरों तक आग के गोले बरसा दिए हैं। अब यदि स्मार्ट सिटी के इंजीनियर अपनी जेसीबी से पुष्कर रोड पर बार बार पाइप लाइन तोड़ देंगे तो देवनानी स्वयं मरम्मत का काम तो नहीं करेंगे? एक जागरुक जनप्रतिनिधि के नाते देवनानी अखबारों में बयान ही दे सकते हैं। वैसे भी राज्य में कांग्रेस की सरकार है, इसलिए भाजपा विधायकों की कोई सुनवाई नहीं होती है। जहां तक सांसद भागीरथ चौधरी का सवाल है तो पानी की समस्या उनके गृह शहर किशनगढ़ की नहीं है। यह समस्या अजमेर शहर की है। भले ही अजमेर शहर उनके संसदीय क्षेत्र में आता है, लेकिन पानी की समस्या का समाधान कर राज्य सरकार का काम है। वे तो लोकसभा के सांसद हैं और लोकसभा में बड़े बड़े कानून बनाने का काम होता है। जहां तक दक्षिण क्षेत्र की भाजपा विधायक अनिता भदेल का सवाल है तो पानी की मौजूदा समस्या उत्तर क्षेत्र की है। इस समस्या के समाधान की जिम्मेदारी देवनानी की है। क्या कभी देवनानी ने दक्षिण क्षेत्र की किसी समस्या का समाधान करवाया है? जिम्मेदारी तो शहर की प्रथम नागरिक और मेयर श्रीमती ब्रजलता हाड़ा की भी है, लेकिन हाड़ा की तो नगर निगम में ही सुनवाई नहीं हो रही। जहां तक सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेताओं का सवाल है तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट का झगड़ा निपटने पर ही अजमेर में भी झगड़ा खत्म होगा। वैसे अजमेर की कांग्रेसियों की स्थिति भी विपखी नेताओं जैसी है। यंू तो जिले के कांग्रेसी विधायक रघु शर्मा प्रदेश के चिकित्सा मंत्री हैं, लेकिन इन दिनों में उच्च स्तरीय राजनीति में व्यस्त हैं। उन्हें लगता है कि गहलोत और पायलट के झगड़े में गांधी परिवार रघु शर्मा को राजस्थान का मुख्यमंत्री बना देगा। कोई ढाई वर्ष तक लोकसभा  का सांसद रहते हुए दिल्ली में राहुल गांधी से सीधी एप्रोच हो गई है। अजमेर के प्रशासनिक अधिकारियों और इंजीनियरों की पांचों उंगलियां घी में और सिर कढ़ाही में है। इंजीनियर खुलेआम बयान दे रहे हैं कि पुष्कर रोड पर पेयजल की पाइप लाइन आगामी एक माह तक ऐसी ही टूटती रहेंगी। पुष्कर रोड पर सीवरेज की लाइन बिछाई जा रही है। सीवरेज के पाइप बिछाने के लिए सड़क को 10 फुट नीचे तक खोदा जा रहा है। जबकि जलदाय विभाग की लाइन तीन-चार फीट नीचे ही हैं। मिट्टी का बेस हटने से पेयजल की पाइप लाइन के ज्वाइंट टूट जाते हैं। इंजीनियरों के ऐसे बयानों के बाद जिला प्रशासन के अधिकारी चुप है। हकीकत यह है कि 10 फिट नीचे तक सड़क खोदने के समय संबंधित विभागों के इंजीनियर मौके पर मौजूद नहीं रहतेे। जेसीबी का चालक और हेल्पर ही इंजीनियरों की भूमिका निभाते हैं। जेसीबी पर बैठा चालक जजमीन नहीं देख पाता और पाइप लाइन टूट जाती है। पाइप लाइन की मरम्मत में पूरा दिन लगा दिया जाता है। अजमेर के उत्तर क्षेत्र के अधिकांश भागों में चार-पांच दिन में एक बार पेयजल सप्लाई होने पर लोग चाहे कितने भी परेशान हो, लेकिन जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और इंजीनियरों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। जलदाय विभाग का तो पूरी तरह भट्टा ही बैठा हुआ है। 
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Friday, 11 June 2021

भाजपा यह अच्छी तरह समझ ले कि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार चल रही है।गत वर्ष एक ऑडियो से सरकार बचा ली गई थी, तो जयपुर ग्रेटर की निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर क्या मायने रखती है। इस बार तो संघ को भी लपेटे में ले लिया।निलंब के प्रकरण में अब 14 जून को होगी सुनवाई।

जयपुर में सफाई का काम करने वाली बीवीजी कंपनी के कथित प्रतिनिधि संदीप चौधरी और जयपुर ग्रेटर की मेयर सौम्या गुर्जर (अब निलंबित) के पति राजाराम के बीच हुई 20 करोड़ की डील का संवाद क्या गुल खिलाएगा यह अभी कोई नहीं जानता। ऑडियो वीडियो किसने बनाई तथा किसने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए अभी कुछ भी पता नहीं हैए लेकिन इन वीडियो के आधार पर अखबारों में खबरें 11 जून को तब छपी है जब सौम्या गुर्जर के निलंबन को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी। इतना ही नहीं अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर के निर्माण के लिए चंदा लेने के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी लपेटे में ले लिया गया है। ऑडियो वीडियो को जिस तरह एडिट कर पोस्ट किया गया है ए उससे जाहिर है कि सारा काम योजनाबद्ध तरीके से किया गया। ऑडियो वीडियो के कई टुकड़े अभी और भी आ सकते हैं। राजस्थान के लोगों को पता होगा कि गत वर्ष इन्हीं दिनों में जब कांग्रेस की राजनीति में उठापटक हो रही थी, तब मुख्यमंत्री के ओएसडी लोकेश शर्मा ने मीडिया कर्मियों को मोबाइल फोन की रिकॉर्डिंग भेजी थी। रिकॉर्डिंग के आधार पर पुलिस की विभिन्न एजेंसियों ने राजद्रोह के मुकदमे दर्ज किए और सचिन पायलट वाले गुट के विधायकों को नोटिस तक जारी किए। विधायकों को पकडऩे के लिए राजस्थान की पुलिस दिल्ली तक गई। तीन निर्दलीय विधायकों को तो भूमिगत होना पड़ा। 11 जून के ऑडियो के आधार पर अशोक गहलोत अपनी सरकार बचाने में सफल रहे। सरकार बचाने के बाद इस मामले में एफआर भी लगा दी गई। मीडिया कर्मियों के माध्यम से पिछली बार यह पता चल गया था कि मोबाइल रिकॉर्डिंग मुख्यमंत्री के ओएसडी लोकेश शर्मा ने डाली है, लेकिन इस बार सौम्या गुर्जर वाले प्रकरण में पोस्ट करने वाले की पहचान भी नहीं हो रही है, लेकिन ऑडियो वीडियो के आधार पर अशोक गहलोत के अधीन काम करने वाली एसीबी ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। सौम्या गुर्जर और उनके पति राजाराम का मामला तो निपट जाएगा लेकिन संघ के लपेटे वाला मामला लंबा खींचेगा। राम मंदिर निर्माण के धन संग्रह अभियान को भी नुकसान पहुंचाया जाएगा। भाजपा के लोगों को यह अच्छी तरह समझना होगा कि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार चल रही है। कलेक्टर एसपी जैसे बड़े अधिकारियों को पकड़ना कितना मायने नहीं रखता, उतना राजाराम द्वारा 20 करोड़ की कथित डील करना है। अब चाहे राजाराम कितनी भी सफाई दे लेकिन सौम्या गुर्जर और संघ को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है। बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधि संदीप चौधरी में इतना दम नहीं कि वह ऑडियो वीडियो बना ले संदीप चौधरी के पीछे बड़ी ताकतें खड़ी है। यदि राजाराम वाकई ?20 करोड़ की मांग कर रहे थे तो कार्यवाही होनी ही चाहिए। भ्रष्ट व्यक्ति किसी भी पार्टी का हो कार्यवाही होनी ही चाहिए। बीवीजी कंपनी की यह सफाई कोई मायने नहीं रखती कि संदीप चौधरी कंपनी का कोई अधिकारी नहीं है। यदि संदीप चौधरी कंपनी का प्रतिनिधि नहीं होता तो राजाराम कभी भी बात नहीं करते।
14 जून को होगी सुनवाई:
जयपुर ग्रेटर की मेयर सौम्या गुर्जर के निलंबन के प्रकरण में 11 जून को हाईकोर्ट में कोई पांच घंटे तक सुनवाई हुई। सरकार के महाधिवक्ता ने जहां सौम्या गुर्जर के निलंबन को नगर पालिका अधिनियम के अंतर्गत वैधानिक बताया वहीं सौम्या के वकील राजेन्द्र प्रसाद ने तर्क दिया कि जांच अधिकारी ने जो रिपोर्ट प्रस्तुत की है उसमें सौम्या गुर्जर का नाम नहीं है। रिपोर्ट में निगम के आयुक्त के साथ पार्षदों द्वारा अभद्र व्यवहार करने का आरोप है। लेकिन फिर भी सरकार ने राजनीतिक द्वेषता की वजह से मेयर का भी निलंबन कर दिया। वकील ने कहा कि सरकार को पार्षद पद से निलंबन करने का अधिकार नहीं है। लम्बी बहस को देखते हुए न्यायाधीश पंकज भंडारी और पीके सोनगरा ने अब 14 जून सोमवार को सुनवाई जारी रखने का निर्णय दिया है। कोर्ट ने अभी निलंबन पर स्टे नहीं किया है, इसलिए शील धाबाई ही नगर निगम की कार्यवाहक मेयर का काम करती रहेंगी। 
S.P.MITTAL BLOGGER (11-06-2021)
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