Wednesday, 5 August 2026

 

ब्यावर की भी सीमेंट फैक्ट्री से ग्रामीणों का जीना मुश्किल।

प्रतिबंधित केमिकल कचरे के इस्तेमाल से पर्यावरण, पानी जमीन सब कुछ खराब हो रहा है।

ब्यावर का जिला और पुलिस प्रशासन चुप: पर्यावरण विभाग के अधिकारी तो अंधे हैं।
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राजस्थान के ब्यावर के निकट अंधेरी देवरी में श्री सीमेंट का जो प्लांट (फैक्ट्री) लगा हुआ है उसकी वजह से आसपास के ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। यह प्लांट देश के सुविख्यात बांगड़ औद्योगिक घराने का है। यूं तो बांगड़ घराना समाजसेवा का दावा करता है,लेकिन ब्यावर प्लांट की वजह से ग्रामीणों को सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में फैक्ट्री में प्रतिबंधित केमिकल का उपयोग हो रहा है। यह केमिकल सीमेंट बनाने के काम आने वाले पत्थरों को बरीक किया जाता है, लेकिन कोयले की कीमत बढ़ने के कारण बांगड़ समूह श्री सीमेंट फैक्ट्री में प्रतिबंधित केमिकल का उपयोग कर रहा है। यही कारण है कि फैक्ट्री से जो धुंआ निकलता है, उसकी वजह से आस पास के लोगों को सांस लेने में मुश्किल हो रही है। कई ग्रामीणों को चर्म रोग हो गया है। घरों पर मिट्टी की परत आ रही है। इस जहरीली परत को बार बार हटाना भी कठिन है। फैक्ट्री से जो जरीला पानी निकलता है उसकी वजह से खेती की जमीन बंजर हो रही है ।आसपास के कुओं और तालाबों का पानी भी जहरीला हो गया है। पीड़ित ग्रामीण फैक्ट्री के बाहर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन ब्यावर का जिला और पुलिस प्रशासन चुप है। उल्टे ग्रामीणों को ही धमकी दी जा रही है कि उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। जिला और पुलिस प्रशासन नहीं चाहता कि श्री सीमेंट के खिलाफ कोई धरना प्रदर्शन हो। जहां तक पर्यावरण  विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल है तो इस विभाग के अधिकारी अंधे है। उन्हें फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला धुआ और पानी नजर नही नहीं आ रहा है। कहा जा सकता है कि ग्रामीणों की सुनने वाला कोई नहीं यहां यह कि ग्रामीणों को सुनने वाला कोई नहीं है। यहां यह उल्लेखनीय है कि ब्यावर की प्रभारी राज्य के उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी है, ग्रामीणों को पीड़ा मंत्री तक पहुंच गई है। लेकिन दीया कुमारी ने भी अभी तक श्री सीमेंट के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश नहीं दिए है। प्रभारी मंत्री की खामोशी से ब्यावर के पुलिस और जिला प्रशासन की मौज हो गई है। श्री सीमेंट की फैक्ट्री जिस अंधेरी देवरी गांव में स्थित है, वह मसूदा विधानसभा क्षेत्र में आता है। मौजूदा समय में मसूदा से भाजपा विधायक वीरेंद्र सिंह कानावत है, लेकिन कानावत के कानों में भी ग्रामीणों की आवाज सुनाई नहीं दे रही। ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत भी विधायक कानावत के साथ ही खड़े हे। ब्यावर जिला राजसमंद संसदीय क्षेत्र में आता है। मौजूदा समय में श्रीमती महिमा कुमारी भाजपा की सांसद है। शायद महिला कुमारी को भी यह भी पता नहीं होगा कि श्री सीमेंट की फैक्ट्री की वजह से ग्रामीणों को परेशान हो रही है। महिमा कुमारी मेवाड़ राजघराने की सदस्य हे। हो सकता है कि सांसद होने के कारण महिमा कुमारी के बांगड़ समूह से अच्छे संबंध हो।   

S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-08-2026)

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 राजस्थान में ओबीसी की 92 जातियों में से सिर्फ 10 जातियों के लोगों की ही राजनीति में भागीदारी।

सवाल- क्या कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा वंचित 82 जातियों के लोगों को पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में उम्मीद बनाएंगे?
आखिर क्यों 10 जातियों के लोग ही सांसद, विधायक, प्रधान, निकाय प्रमुख आदि बनते हैं?
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5 अगस्त को जयपुर में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) प्रतिनिधित्व आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जज मदनलाल भाटी ने 900 पन्नों वाली आयोग की रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनावों में ओबीसी वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण होगा, लेकिन इस रिपोर्ट में चौकाने वाली बात यह है कि राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी की 92 जातियों हैं, लेकिन इनमें से 10 जातियों के लोगों की ही राजनीति में भागीदारी है। यानी इन 10 जातियों के लोग ही सांसद, विधायक, प्रधान, शहरी निकायों के प्रमुख आदि बनते हैं। शेष वंचित 82 जातियों के लोग पार्षद और सरपंच भी नहीं बन पाते। इस बड़े अंतर को देखते हुए ही आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश भाटी ने कहा कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट केवल जनसंख्या को आधार मानकर नहीं बनाई है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन को भी देखकर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके लिए प्रदेश भर के 74 लाख 85 हजार ओबीसी वर्ग के परिवारों से संवाद किया गया है। यह वाकई अजीत बात है कि राजस्थान में ओबीसी वर्ग की ऐसी 82 जातियां हैं, जिनका कोई भी प्रतिनिधि आज तक सांसद, विधायक आदि नहीं बन सकता है। यानी 92 जातियों का समूह होने के बाद भी सिर्फ 10 जातियों के लोग ही मलाई खा रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या ओबीसी वर्ग की वंचित जातियों को राजनीति में प्रतिनिधित्व नहीं मिलना चाहिए? कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने जब देश भर में जाति आधारित जनगणना की मांग की तो उनका तर्क था कि वंचित जातियों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। राहुल गांधी कहना रहा कि जाति आधारित जनगणना से पता चल जाएगा कि अभी तक राजनीति में किन जातियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। केंद्र सरकार ने राहुल गांधी की मांग पर जाति आधारित जनगणना करवाने का निर्णय लिया है, लेकिन जब राजस्थान में ओबीसी वर्ग की रिपोर्ट उजागर हो गई है, तब सवाल उठता है कि क्या  प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा  इसी वर्ष होने वाले पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में ओबीसी की वंचित 82 जातियों के लोगों को उम्मीदवार बनाएंगे? राहुल गांधी का सपना तभी पूरा होगा, जब राजस्थान में ओबीसी वर्ग की 82 जातियों के लोगों को आरक्षित सीटों पर उम्मीदवार बनाया जाए। डोटासरा को अच्छी तरह पता है कि ओबीसी की वे 10 जातियां कौनसी है, जो राजनीति की मलाई खा रही है। यदि वंचित जातियों के लोगों को ओबीसी का लाभ दिया जाता है तो इस वर्ग में सामाजिक समानता भी आएगी। मौजूदा समय में सिर्फ 10 जातियों के लोग ही ओबीसी के 21 प्रतिशत कोटे का लाभ प्राप्त कर रहे है। यह स्थिति सिर्फ राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं बल्कि सरकारी नौकरियों के क्षेत्र में भी है। 

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जाति भी ओछी, जनम भी ओछा, ओछा कर्म हमारा। हम रैदास राम राई को, कह रैदास बिचारा।

मन चंगा तो कठौती में गंगा।
गुरु ग्रंथ साहिब में भी 41 वाणियों के शब्द।

संत रविदास जी का यह विचार आम लोगों तक पहुंचना जरूरी।

भाजपा की तरह कांग्रेस भी पहल कर सकती है।
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संत कवि रविदास जी 650 वीं जयंती पर भाजपा पूरे देश में श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान चला रही है। इसी के अंतर्गत 5 अगस्त को जयपुर में आयोजित एक समारोह में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने 245 रज कलश रथ को हरी झंडी दिखाई। ये रथ प्रदेश के सभी 25 लोकसभा क्षेत्रों में संत कवि रविदास के विचारों का प्रचार-प्रसार करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में होने वाले पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनावों के मद्देनजर रज कलश रथ को घुमाया जा रहा है। कांग्रेस का अपना तर्क हो सकता है कि लेकिन मौजूदा समय में समाज में जो जातिवाद हावी है,उसका मुकाबला संत कवि रविदास के विचारों से ही किया जा सकता है। 650 वर्ष पहले समाज को जो वातावरण था उसी में चर्मकार रविदास जी ने लिखा, जाति भी ओछी, जनम भी ओछा, ओछा करम हारा। हम रैदास राम राई को, कह रैदास बिचारा। यानी हमारी जाति, जनम और कर्म छोटा है, लेकिन हम तो राजाराम के अनुचर है। अर्थात् जो राम काज में रत भक्त है, उसका कर्म, जन्म और जाति कमतर कैसे हो सकता है। उस समय रैदास जैसा संत कवि ही लिख सकता था, मन चंगा तो कठौती में गंगा। यानी मन पवित्र है तो घर पर गंगा स्नान का पुण्य मिलता सकता है। चूंकि रविदास चर्मकार थे, इसलिए उनके पास चमड़ा भिगोने का का छोटा बर्तन होता था। इस बात को ही कठौती कहा गया है। संत रविदास जी ने अपनी रचनाएं 1489 से 1471 ईवी के बीच लिखी। यह वह दौर था, जब भारत पर लोदी वंश के शासक राज कर रहे थे, इस से पहले हिंदू समाज पर कासिम, गजनवी, गौरी, खिलजी, गुलाम वंश, तुगलक, तैमूर के अत्याचार हो चुके थे। यह वही दौर था जब तलवार की नोंक पर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। तब संपूर्ण हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए संत रविदास जी ने रचनाएं लिखी। रविदास जी की रचनाएं यह बताती है कि हिंदू समाज को आज 650 वर्ष बाद भी एकजुट करने की जरूरत है। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि रविदास जी द्वारा लिखित 41 वाणियोंं को सिख समुदाय के गुरु ग्रंथ साहिब में शब्द के रूप में शामिल किया गया है। इससे भी रविदास के विचारों की मानता का अंदाजा लगाया जा सकता है। रविदास जी के  विचारों को रथ के जरिए भले ही भाजपा ने पहुंचाने का काम किया हो, लेकिन यह काम कांग्रेस भी कर सकती है। भाजपा ने रथ रवाना किए हैं उनमें एक कलश भी रखा हुआ है। इस कलश में वाराणसी के क्षीर, गोवर्धन पुर की रज (मिट्टी) भी भरी हुई है। चूंकि गोवर्धन पुर ही संत रविदास जी की कर्मस्थली रहा, इसलिए अब मिट्टी को पवित्र मानकर उनके विचारों को आगे बढ़ाया जा रहा है। 

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Sunday, 2 August 2026

 

शिक्षकों के तबादले में रिश्वतखोरी का 6 वर्ष पुराना मामला उठाकर पूर्व सीएम गहलोत ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डोटासरा को 30 जुलाई वाले बयान का जवाब दिया।

यह डोटासरा के जले पर नमक छिड़कना जैसा है।

जयपुर रेलवे स्टेशन पर लोकप्रियता का प्रदर्शन। स्वयं गहलोत ने डाला वीडियो।
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2 अगस्त को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने अपने गृह क्षेत्र जोधपुर के दौरे पर रहे। गहलोत ने अपनी आदत के मुताबिक जमकर बयानबाजी की। गहलोत ने राजनीतिक चतुराई से गत 30 जुलाई को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान का भी जवाब दिया। मालूम हो कि 30 जुलाई को पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय और उनके समर्थक प्रदेश कार्यालय आने से पहले जयपुर में गहलोत के सरकारी आवास पर चले गए थे तो डोटासरा ने नाराजगी जताई थी। डोटासरा की यह नाराजगी गहलोत के नागवार लगी। यही वजह रही कि गहलोत ने डोटासरा से जुड़े 6 वर्ष पुराने शिक्षकों के तबादले में रिश्वतखोरी का मामला उठा दिया। गहलाते जब भी मीडिया से संवाद करते हैं तब मीडिया कर्मियों के रूप में अपने समर्थकों को भी सवाल पूछने का मौका देते हैं। चूंकि गहलोत को डोटासरा के 30 जुलाई वाले बयान का जवाब देना था, इसलिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षकों के तबादले में रिश्वतखोरी का सवाल उठाया गया। गहलोत चाहते तो अपना जवाब भाजपा के शासन तक सीमित रख सकते थे, लेकिन गहलोत ने 6 वर्ष पुराना जयपुर स्थित बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित शिक्षक दिवस के समारोह की घटना का भी उल्लेख कर दिया। गहलोत का कहना रहा कि तब मैं मुख्यमंत्री था और मैंने सामान्य शिष्टाचार के नाते समारोह में उपस्थित शिक्षकों से पूछ लिया कि क्या तबादलों में रिश्वत देनी पड़ती है? तो अधिकांश शिक्षकों ने हां में जवाब दिया। उस समय मेरे साथ शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा भी उपस्थित थे, लेकिन बाद में किसी भी शिक्षक ने मुझे रिश्वत का कोई सबूत नहीं दिया। गहलोत ने कहा कि हर शासन में शिक्षकों के तबादले में रिश्वत के आरोप लगते है। गहलोत ने यह बात कहकर डोटासरा के जले पर नमक छिड़कने वाला काम किया है। भाजपा के नेता आज तक इस मुद्दे को लेकर डोटासरा को कटघरे में खड़ा करते हैं और अब गहलोत ने भी यह बता दिया कि 6 वर्ष पहले मेरी सरकार के शिक्षा मंत्री डोटासरा पर भी तबादलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। चूंकि गहलोत चतुर राजनीतिज्ञ है, इसलिए स्वयं की जुबान से डोटासरा को रिश्वतखोर नहीं कहा। लेकिन बड़ी चतुराई से यह दर्शा दिया कि शिक्षकों ने डोटासरा पर भी रिश्वत लेने के आरोप लगाए। मालूम हो कि वर्ष 2018 में जब गहलोत मुख्यमंत्री बने तब डोटासरा को स्कूली शिक्षा मंत्री बनाया गया था, लेकिन 2020 में सचिन पायलट की बगावत के बाद डोटासरा को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया। तब उन्हें शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। देखना होगा कि गहलोत ने 6 वर्ष पुराना मामला उठाकर डोटासरा पर जो हमला किया है, उसका जवाब आने वाले दिनों में डोटासरा किस प्रकार से देते हैं।
 
लोकप्रियता का प्रदर्शन
2 अगस्त को पूर्व सीएम गहलोत ने जयपुर से जोधपुर का सफर ट्रेन से किया। इस सफर के पीछे गहलोत को स्वयं की लोकप्रियता दिखाना था। गहलोत जब जयपुर के प्लेटफार्म पर पहुंचे तो उनके कैमरा मैन पहले से ही तैयार थे। गहलोत ने प्लेटफार्म पर खड़े यात्रियों से उनके हाल चाल पूछे। कई यात्रियों ने गहलोत को पहचाना उनसे आत्मीय मुलाकात भी की। गहलोत ने एक कुली से भी उसके हाल जाने। प्लेटफार्म के बा जब गहलोत ट्रेन के कोच में पहुंचे तो यहां भी एक एक यात्री से हाथ मिलाया। कोई डेढ़ दो मिनट के इस वीडियो को फिल्मी गाने के साथ गहलोत ने स्वयं सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। इस वीडियो के माध्यम से यह जताने का प्रयास किया गया है कि वे आज भी प्रदेश भर में लोकप्रिय हैं। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-08-2026)

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 पाकिस्तान की सीमा से सटे खाजूवाला से 50 करोड़ की हेरोइन और 11 विदेशी पिस्टल जब्त।  ड्रोन का इस्तेमाल।

इसलिए सीमावर्ती क्षेत्रों में 50 किलोमीटर की परिधि में अतिक्रमणों को हटाया जा रहा है।

लेकिन कांग्रेस इसमें भी राजनीति कर रही है।
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राजस्थान के सीमावर्ती बीकानेर रेंज में आईजी ओम प्रकाश और एसपी मृदुल कच्छावा के निर्देशन में नार्को आर्म्स, सिडीकेट के खिलाफ जो अभियान चलाया जा रहा है, उसी का परिणाम रहा कि 2 अगस्त को खाजूवाला क्षेत्र से पचास करोड़ रुपए की कीमत वाली 10 किलो अफगानी हेरोइन और 11 विदेशी पिस्टल जब्त की गई। आईजी ओम प्रकाश का मानना है कि यह नशा और हथियार पाकिस्तान से आए हैं ड्रोन ने गिराया है। चूंकि पुलिस लगातार निगरानी कर रही थी, इसलिए हेरोइन और हथियार के बारे में जानकारी मिल गई। उन्होंने बताया कि इस सामग्री के साथ डिलीवरी मैन पाली के जैतारण निवासी वीरेंद्र सिंह राजपुरोहित को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। राजपुरोहित ने बताया कि यह सामग्री पंजाब जेल में बंद लक्खी नाम के व्यक्ति ने पाकिस्तान से मंगवाई थी। रेंज आईजी ओम प्रकाश का मानना है कि नशा और विदेशी हथियार पूरे देश में सप्लाई किए जाने थे। पिछले दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राजस्थान में पाकिस्तान सीमा पर लगे श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर,बाड़मेर, हनुमानगढ़ और जोधपुर क्षेत्र की समीक्षा की थी। केंद्रीय एजेंसियों ने बताया कि अब पाकिस्तान राजस्थान वाली सीमा से ड्रोन तकनीक से हथियार और नशीले पदार्थ भिजवा रहा है। केंद्रीय मंत्री शाह के निर्देशों के बाद राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी को और प्रभावी बनाया गया। बीएसएफ और राजस्थान पुलिस के बीच तालमेल को और बेहतर किया जा रहा है। बाड़मेर, जैसलमेर जैसे क्षेत्रों में दोनों समुदायों के धार्मिक स्थलों को भी हटाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नशीले पदार्थ और विदेशी हथियारों को छुपाने के लिए धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल हो सकता है। कई बार ऐसे अतिक्रमण प्रभावी निगरानी में बाधक   होते हैं। राजस्थान में सटी सीमा से पाकिस्तान नशीले पदार्थों और हथियारों को न भेज सके, इसलिए सीमा से पचास किलोमी की परिधि में आने वाले निर्माणों को भी हटाया जा हा है। सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए कानून बना है, उसमें सीमा से पचास किलोमीटर की परिधि में संदिग्ध निर्माण नहीं होने चाहिए। इसी कानून के तहत सुरक्षा एजेंसियों को 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी स्थानों की जांच करने का अधिकार भी है। बीकानेर के खाजूवाला में जब्त हेरोइन और विदेशी हथियार की घटना बताती है कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। लेकिन कांग्रेस सीमा के इस संवेदनशील मुद्दे पर भी राजनीति कर रही है। संबंधित जिला प्रशासनों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में जो अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया है उसका कांग्रेस की ओर से विरोध किया जा रहा है। कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि मुसलमानों को निशाना बनाकर कार्यवाही की जा री है। अतिक्रमण हटाने के नाम पर पुरानी मस्जिदों को भी गिराया जा रहा है। वही प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान में मंदिर भी शामिल है। इसलिए भेदभाव का आरोप पूरी तरह गलत है। मौजूदा हालातों में सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी की सख्त जरूरत है। उल्लेखनीय है कि पहले जम्मू कश्मीर की सीमा से नशीले पदार्थ और हथियार भेजे जाते थे, लेकिन अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद पाकिस्तान के लिए कश्मीर की सीमा से नशा और हथियार भेजना मुश्किल हो गया है, इसलिए पाकिस्तान अब राजस्थान की सीमा का इस्तेमाल करने लगा है।


S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-08-2026)

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