Friday, 24 July 2026

 

भारत में सही मायने में लोकतंत्र है, इसलिए कीटों की श्रेणी वाले कॉकरोचों (दीमक) से भी सरकार को वार्ता करनी पड़ रही है।

यह दुखद है कि राजनीतिक स्वार्थों के खातिर विपक्ष भी कॉकरोच बन गया है।

भारत के युवाओं को स्वयं को कॉकरोच नहीं बनने देना चाहिए।
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जीव विज्ञान में कॉकरोच को तिलचट्टा भी कहा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार विश्व में तिलचट्टा प्रजातियों की 4600 किस्म है। इनमें से 30 प्रजातियां मानव बसेरों में पाई जाती है। कॉकरोच यानी तिलचट्टा की श्रेणी में दीमक भी शामिल है। दीमक से होने वाले नुकसान के बारे में हर इंसान अच्छी तरह जनता है। जिस घर में एक बार दीमक लग जाए उस घर को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। कई घरों में तो दीमक को मारने के लिए हर वर्ष जहरीली दवाई का छिड़काव करना पड़ता है। कॉकरोच और दीमक इतनी घातक होने के बाद भी विदेशी मानसिकता वाले कुछ भारतीय युवकां ने अपने राजनीतिक दल का नाम कॉकरोच जनता पार्टी रख लिया है। भारत के लिए यह चिंताजनक बात है कि कॉकरोच की मानसिकता वाले युवकों के बहकावे में देश के अनेक युवा भी आ गए है। चूंकि भारत में सही मायने में लोकतंत्र है, इसलिए सरकार को कॉकरोचों से भी वार्ता करनी पड़ रही है। इसे दुखद ही कहा जाएगा कि राजनीतिक स्वार्थों की खातिर विपक्ष भी कॉकरोच बन गया है। बड़ी अजीब बात है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में कॉकरोच पार्टी पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन कर रही है। वह भी तब जब लीक हुआ नीट का पेपर दोबारा से शांतिपूर्ण तरीके से हो गया है और परिणाम घोषित होने के बाद सफल अभ्यर्थी देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की तैयारियां कर रहे हैं। यानी नीट का जो मुद्दा समाप्त हो गया उसे कॉकरोच की मानसिकता वाले कुछ युवा अब उठा रहे हैं। सब जानते हैं कि कॉकरोच पार्टी का संस्थापक अमेरिका में रह रहा भारतीय मूल का अभिजीत दीपके है। अमेरिका में समय समय पर भारत विरोधी गतिविधियां संचालित होती है। जग जाहिर है कि अभिजीत दीपके को भी अमेरिकी भारत विरोधी संस्थाओं का सहयोग है, लेकिन इसके बाद भी भारत में कॉकरोच पार्टी ने आंदोलन शुरू कर दिया। गंभीर बात तो यह है कि इस पार्टी के प्रतिनिधि सरकार से आदेशात्मक भाषा में वार्ता कर रहे हैं। 24 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र प्रसाद से जो वार्ता हुई उसमें दो कॉकरोच सौरभ दास और आशुतोष रांका ने आदेश दिया कि सरकार सबसे पहले धर्मेन्द्र प्रधान से शिक्षा मंत्री के पद से हटाए। प्रधान को मंत्री पद से हटाने की मांग विपक्षी दल लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष के दबाव के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से नहीं हटाया। सवाल उठता है कि क्या कुछ कॉकरोचों की मांग पर प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से हटा दिया जाएगा? असल में नीट पेपर लीक तो बहाना है। असल मकसद धर्मेन्द्र प्रधान की आड़ में भारत की नई शिक्षा नीति को कमजोर करना है। प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए ही नई नीति को प्रभावी तरीके से लागू किया गया है। जो इतिहास भारत को कमजोर दिखता था, उस इतिहास में भी प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते ऐतिहासिक बदलाव किए गए। भारत के स्व: को पुनर्जागरण करने में प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका है। विदेशी मानसिकता वाले कॉकरोच नहीं चाहते कि भारत में स्व: को पुनर्जीवित किया जाए।

युवा बचे:
भारत के युवाओं को कॉकरोच मानसिकता से बचना चाहिए। भारत के युवाओं को यह समझना चाहिए कि मौजूदा समय में युद्ध की विभीषिका से दुनिया भर के देश परेशान है। इतने बुरे दौर में भी भारत मजबूती के साथ खड़ा है। ऐसे में युवाओं को ऐसा कोई कृत्य नहीं करना चाहिए जिससे देश कमजोर हो। युवाओं को लेकर पीएम मोदी कितने संवेदनशील है, इसका ताजा उदाहरण 23 जुलाई की रात 12 बजे वीडियो संदेश जारी करना पड़ा। युवाओं को प्रधानमंत्री के इस वीडियो संदेश के सार को समझना चाहिए। पीएम मोदी की नीतियों की वजह से ही भारत के युवाओं को विदेशों में रोजगार के अच्छे अवसर मिले हैं, वहीं भारत में भी स्टार्ट एप के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। आज लाखों युवक वर्क फार्म होम सिस्टम से घर बैठे प्रतिमाह लाखों रुपए का वेतन ले रहे हैं। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-07-2026)

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अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा की वजह से पेपर लीक पर पोल खुल जाएगी, इसलिए कांग्रेस संसद में चर्चा नहीं होने दे रही।

राजस्थान में रीट का पेपर लीक होने पर डोटासरा ने कहा था कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा क्यों दें?
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नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष 20 जुलाई से संसद में हंगामा कर रहा है। सरकार की ओर से बार बार आग्रह किया जा रहा है कि पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राजस्थान के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भी कहा है कि विपक्ष के नेता जितने समय के लिए चाहे उतने समय तक पेपर लीक पर चर्चा करवाने को तैयार है। लेकिन इसके बाद भी संसद के दोनों सदनों में पेपर लीक पर चर्चा नहीं हो रही है। असल में कांग्रेस को पता है कि यदि पेपर लीक पर चर्चा हुई तो राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की वजह से पोल खुल जाएगी। कांग्रेस ने खासकर राहुल गांधी ने पेपर लीक को लेकर जो मांगे सरकार के समक्ष रखी है, उनकी हवा चर्चा के दौरान निकल जाएगी। असल में राजस्थान में अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते हुए वर्ष 2018 से 2023 के बीच 19  परीक्षाओं के पेपर आउट हुए। बार बार पेपर लीक की घटनाओं पर गहलोत ने कहा था कि पेपर लीक को रोकना अकेले किसी सरकार के बस में नहीं है, क्योंकि इसमें संगठित गिरोह शामिल है। तब गहलोत ने इसे देशव्यापी समस्या बताया था। पेपर लीक पर गहलोत ने जो कुछ कहा उसे भाजपा के सांसद संसद में चर्चा के दौरान बताएंगे और जब गहलोत के कथन एक एक कर बताए जाएंगे तो कांग्रेस की मौजूदा मांगों की हवा निकल जाएगी। कांग्रेस अभी नीट पेपर लीक पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा भी मांग रही है। लेकिन राजस्थान में गोविंद सिंह डोटासरा जब कांग्रेस सरकार में शिक्षा मंत्री थे, तब शिक्षक पात्रता परीक्षा रीट का पेपर लीक हुआ। तब 20 लाख से ज्यादा युवाओं को दोबारा से परीक्षा देनी पड़ी थी। तब  शिक्षा मंत्री के नाते डोटासरा से इस्तीफे की मांग की गई, लेकिन तब डोटासरा ने कहा कि रीट का पेपर लीक होने पर शिक्षा मंत्री इस्तीफा क्यों दे? परीक्षा करवाने की जिम्मेदारी राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की है। यानी तब कांग्रेस ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को खारिज कर चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आज नीट पेपर लीक पर कांग्रेस किस मुंह से शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रही है? संसद में चर्चा के दौरान भाजपा के सांसद डोटासरा के कथन का भी उल्लेख करेंगे। इतना ही नहीं संसद में चर्चा के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के बयानों को भी पढ़ा जाएगा। पायलट, गहलोत सरकार में डिप्टी सीएम थे और तब उन्होंने पेपर लीक पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। पायलट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग में सीएम गहलोत द्वारा की गई सदस्यों की नियुक्ति पर भी ऐतराज जताया था। इतना ही नहीं अपनी ही सरकार के खिलाफ पायलट ने अजमेर से जयपुर तक पद यात्रा भी निकाली। संसद को यह भी बताया जाएगा कि कि गहलोत द्वारा आयोग में नियुक्त सदस्य बाबूलाल कटारा तो स्वयं ही परीक्षा के प्रश्न पत्रों को बेचने का काम कर रहा था। कटारा अभी जेल में है तथा गहलोत द्वारा नियुक्त दो महिला सदस्य श्रीमती संगीता आर्य और श्रीमती मंजू शर्मा आरोपों के बाद इस्तीफा दे चुकी है। संसद को यह भी बताया जाएगा कि आयोग में एक सदस्य की नियुक्ति के बाद अशोक गहलोत को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी थी। तब गहलोत ने कहा था कि मुझे इस सदस्य की पृष्ठभूमि पता होती तो मैं नियुक्ति नहीं करता। कांग्रेस को पता है कि पेपर लीक पर चर्चा हुई तो गहलोत और डोटासरा की वजह से पोल खुल जाएगी। 

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कांग्रेस के बंद और भाजपा के सफाई अभियान से क्या अजमेर के आनासागर के हालात सुधर जाएंगे?
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अजमेर में कांग्रेस के नेता गौरवान्वित है कि उन्होंने आनासागर की दुर्दशा के मुद्दे पर 23 जुलाई को अजमेर बंद करवा दिया। वहीं भाजपा के नेता इसलिए गौरवान्वित है कि उन्होंने 22  से 24 जुलाई तक तीन दिवसीय सफाई अभियान चलाकर आनासागर को स्वच्छ बना दिया। यानी दोनों ही राजनीतिक दलों ने स्वयं को आनासागर का सबसे बड़ा हमदर्द बताया। लेकिन सवाल उता है कि क्या अजमेर बंद और सफाई अभियान के बाद आनासागर के हालात सुधर जाएंगे? आनासागर की दुर्दशा के लिए भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराती है। यह तब है जब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में आनासागर के संरक्षण पर करीब 50 करोड़ रुपए खर्च हो गया। इतनी राशि खर्च होने के  बाद भी आनासागर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। जिस आनासागर की भराव क्षमता 16 फीट थी, उसे घटाकर 13 फीट कर दिया गया। और बरसात से पूर्व आनासागर का जलस्तर प्रतिवर्ष 10 फीट कर दिया जाता है। प्रतिवर्ष आनासागर में मछलियां मरती है। गत तीन वर्षों से मछली निकालने का ठेका भी नहीं दिया जा रहा। लाख कोशिश के बाद भी कुछ नालों का गंदा पानी आनासागर में गिर रहा है, जिसकी वजह से चारों तरफ दुर्गंध का माहौल है। अजमेर की जनता यह सवाल कर रही है कि आखिर आनासागर के हालात कब सुधरेंगे। 

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Tuesday, 21 July 2026

 

23 जुलाई को अजमेर बंद करवाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं।

जोर जबरदस्ती की तो पुलिस सख्त कार्यवाही करेगी।

अधिकांश व्यापारिक संगठनों का भी सहयोग नहीं।

आनासागर के संरक्षण के लिए भाजपा ने स्वच्छता एवं श्रमदान अभियान चलाया।
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आनासागर की दुर्दशा के विरोध में कांग्रेस ने 23 जुलाई को अजमेर बंद का आह्वान किया है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल के नेतृत्व में कांग्रेस के कार्यकर्ता बंद को सफल बनाने की रणनीति बना रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के लिए अजमेर बंद करना आसान नहीं है। बंद को लेकर 21 जुलाई को एक रैली निकाली गई, लेकिन इस रैली में कार्यकर्ताओं की संख्या बहुत कम थी। यानी यह रैली बंद का माहौल बनाने में सफल नहीं रही। कोई भी बंद तब सफल होता है, जब व्यापारिक संगठन बंद में शामिल होने की घोषणा करते हैं, लेकिन कांग्रेस के बंद को अजमेर के अधिकांश व्यापारिक संगठनों ने समर्थन नहीं दिया है। इससे भी बंद का माहौल नहीं बन पा रहा है। बंद सफल होने का एक कारण डर और भय भी होता है। यानी डंडों के जोर पर बंद करवाया जाता है। चूंकि प्रदेश में इस समय भाजपा का शासन है, इसलिए पुलिस ने भी बंद से निपटने को लेकर तैयारियां की है। पुलिस किसी भी कांग्रेसी को जोर जबरदस्ती नहीं करने देगी। यानी किसी कांग्रेसी ने कानून हाथ में लेकर बंद करवाया तो उसके खिलाफ पुलिस सख्त कार्यवाही करेगी। वहीं शहर अध्यक्ष डॉ. जयपाल ने कहा कि हम शांतिपूर्ण तरीके से बंद करवाएंगे। उन्होंने कहा कि शासन के दबाव में कारण व्यापारिक संगठन कांग्रेस के बंद का समर्थन नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन आनासागर की दुर्दशा से अजमेर का आम नागरिक आक्रोशित है। डॉ. जयपाल ने कहा कि लोग स्वेच्छा से ही अपने प्रतिष्ठान बंद रखेंगे। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को क्षेत्रवार जिम्मेदारियां दी जा रही है।

भाजपा का स्वच्छता अभियान:
कांग्रेस के बंद के मद्देनजर अजमेर में भाजपा ने तीन दिवसीय स्वच्छता एवं श्रमदान अभियान की शुरुआत 22 जुलाई से की है। शहर भाजपा के जिलाध्यक्ष रमेश सोनी ने बताया कि इसके अंतर्गत भाजपा के कार्यकर्ता आनासागर में सफाई का काम करेंगे। यह काम सेवा की भावना और आनासागर के संरक्षण के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में पानी के अभाव में मछलियों के मरने की जो घटना हुई, उसमें अब लगातार सुधार हो रहा है। निगम प्रशासन ने मृत मछलियों को तत्काल हटाने का काम युद्ध स्तर पर किया है। 22 जुलाई को अजमेर में मानसून की पहली अच्छी बरसात भी हो गई है। बरसात का पानी आने के साथ ही मछलियों के मरने की समस्या स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-07-2026)

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खरगे के जन्मदिन पर बधाई देने के बहाने धोखे से राहुल और प्रियंका गांधी पीएम हाउस के बाहर धरने पर बैठ गए।

प्रतिपक्ष के नेता के संवैधानिक पद पर बैठे राहुल गांधी के यह आचरण उचित है?

कॉकरोच पार्टी के आंदोलन में अराजक तत्व शामिल।
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21 जुलाई को दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी और उनकी बहन सांसद प्रियंका गांधी ने जिस तरीके से धरना दिया उसे धोखा ही कहा जाएगा। प्रधानमंत्री का सरकारी आवास  अति सुरक्षा घेरे में रहता है, इसलिए कोई सामान्य नागरिक पीएम हाउस के आसपास भी नहीं पहुंच सकता। पीएम हाउस से पांच सौ मीटर की दूरी पर ही राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े का सरकारी आवास भी है। 21 जुलाई को खरगे का 84वां जन्मदिन रहा। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जन्मदिन की बधाई देने के लिए खरगे के सरकारी आवास पर पहुंचे। यह एक सामान्य शिष्टाचार था, इसलिए किसी ने भी यह उम्मीद नहीं जताई कि राहुल गांधी अपनी बहन के साथ पीएम हाउस के बाहर धरने पर बैठे जाएंगे। लेकिन राहुल गांधी ने धोखा देकर पीएम हाउस के बाहर धरना दिया। यदि राहुल गांधी घोषणा कर पीएम हाउस की ओर जाते तो उन्हें सुरक्षा बल कभी भी धरने पर नहीं बैठने देते, लेकिन राहुल गांधी ने खरगे के जन्मदिन की आड़ में जिस तरह धोखाधड़ी की वह राजनीति में उचित नहीं है। प्रतिपक्ष के नेता के नाते राहुल गांधी संवैधानिक पद पर है। क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को सुरक्षा बलों के साथ धोखाधड़ी करनी चाहिए? राहुल गांधी यह सोचते हैं कि उन्हें पीएम हाउस के बाहर कुछ समय के लिए धरना देकर बहादुरी का काम किया है? लेकिन यदि राहुल गांधी सामान्य नागरिक होते और फिर पीएम हाउस के बाहर पहुंच जाते तो उन्हें पता चलता कि संविधान का कानून कितना संख्त है। राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका ने जिस तरह धरना दिया उसे संविधान के साथ धोखा ही कहा जाएगा। जहां तक राहुल गांधी को पीएम हाउस के बाहर जबरन उठाने और फिर थाने ले जाने का सवाल है तो कानून ने अपना काम किया है। अच्छा होता कि राहुल गांधी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में पहले जंतर मंतर पहुंचे और फिर पीएम हाउस की ओर जाने की घोषणा करते। जब उन्हें पता चल जाता कि देश का कानून कितना सख्त है।

संसद में चर्चा क्यों नहीं:
केंद्र सरकार बार बार कह रही है कि संसद के मानसून सत्र में नीट पेपर लीक पर चर्चा की जाए, लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दल संसद में चर्चा को तैयार नहीं है। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो चुका है, लेकिन विपक्ष के सांसद हंगामा कर संसद को चलने नहीं दे रहे। सवाल उठता है कि आखिर कांग्रेस और विपक्षी दल नीट पेपर लीक पर संसद में चर्चा क्यों नहीं करते? जहां तक कॉकरोच पाटी्र के आंदोलन का सवाल है तो इस आंदोलन में अराजक तत्व शामिल हो गए है जो हिंसा में विश्वास रखते हैं। 20 जुलाई के जो वीडियो सामने आए हैं, उन से पता चलता है कि अराजकतत्वों ने सुनियोजित तरीके से हिंसा की। अब छात्रों को आंदोलन तो पीछे छूट गया है और अराजक तत्वों ने आंदोलन पर अपना कब्जा कर लिया है ।

S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-07-2026)

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