Tuesday, 25 August 2026

अनिल मित्तल को कांग्रेस में शामिल कर रघु शर्मा ने केकड़ी में अपनी जीत की नींव रखी। भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ और उत्साह को देखते हुए देवनानी भावुक हुए। शेखावत ने वार्ड पार्षद के पद के दावेदारों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया। अजमेर के वार्ड 4 में हेमा गहलोत का मुकाबला मोनिका जैन से। ================= अजमेर जिले के उपखंड केकड़ी नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अनिल मित्तल ने 25 अगस्त को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। मित्तल के कांग्रेस में आने के साथ ही पूर्व कैबिनेट मंत्री रघु शर्मा ने केकड़ी में अपनी जीत की नींव रख ली। रघु गत बार 7 हजार मतों से विधानसभा चुनाव हारे थे, लेकिन अब 2 वर्ष बाद होने वाले चुनाव की तैयारी रघु ने अभी से ही कर ली है। 25 अगस्त को जब रघु शर्मा की उपस्थिति में अनिल मित्तल ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की तो रघु ने कहा,मित्तल का प्रभाव शहरी क्षेत्र में ही नहीं बल्कि केकड़ी के ग्रामीण क्षेत्रों में भी है। मित्तल सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े हैं। इसलिए संपूर्ण केकड़ी क्षेत्र में प्रभाव है। उन्होंने माना कि मित्तल के साथ राजनीतिक मतभेद रहे, लेकिन मित्तल ने कभी भी मुझ पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की। रघु ने कहा कि जब अनिल मित्तल जैसे नेता का भाजपा में सम्मान नहीं है, तो भाजपा के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। रघु ने कहा कि मित्तल के कांग्रेस में शामिल होने से केकड़ी क्षेत्र के चारों शहरी निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस मजबूत होगी। मित्तल के शामिल होने के बाद केकड़ी नगर पालिका में कांग्रेस का बोर्ड बनकर रहेगा। अभी भी कांग्रेस का ही बोर्ड है। गत विधानसभा के चुनाव में भी केकड़ी शहर से कांग्रेस की ीत हुई थी। कांग्रेस में शामिल होने पर मित्तल ने रघु शर्मा का आभार जताया। उन्होंने कहा कि रघु शर्मा के विधायक रहते हुए ही गत कांग्रेस के शासन में केकड़ी को जिला बनाया गया था। केकड़ी में कलेक्टर और एसपी बैठने भी लगे थे। जिला बनने पर केकड़ी का विकास तेजी से हो रहा था। तत्कालीन जिला कलेक्टर श्वेता चौहान ने औद्योगिक क्षेत्र को स्वीकृत भी दे दी थी, लेकिन भाजपा के शासन में केकड़ी के जिले के दर्जे को समाप्त कर दिया गया। इससे केकड़ी में निराशा का माहौल है। मित्तल ने भाजपा के विधायक शत्रुघ्न गौतम का नाम लिए बगैर कहा कि मेरे लिए अब भाजपा में काम करना मुश्किल हो रहा था। अब मैं रघु शर्मा को पुनः विधायक बनवाने के लिए मेहनत करुंगा। रघु शर्मा के नेतृत्व में ही केकड़ी के साथ साथ सरवाड़, सावर और टांटोटी नगर पालिका में कांग्रेस के बोर्ड बनाए जाएंगे। रघु शर्मा जब विधायक बनेंगे तो केकड़ी को फिर से जिले का दर्जा मिल जाएगा। मित्तल के कांग्रेस में शामिल होने के समारोह में केकड़ी कांग्रेस के सभी बड़े नेता शामिल रहे। हेमंत जैन,समरवीर सिंह, शैलेंद्र सिंह शेखावत, श्यामलाल बैरवा, कमल साहू, सीमा चौधरी, कन्हैयालाल माली, हाजी साहब के साथ साथ रघु शर्मा के पुत्र सागर शर्मा ने भी मित्तल का माला पहनाकर स्वागत किया। समारोह में बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता मौजूद रहे। देवनानी भावुक हुए: अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों के लिए 11 सितंबर को मतदान होना है। अजमेर उत्तर क्षेत्र के 38 वार्डों में भाजपा के दावेदारों का एक सम्मेलन 25 अगस्त को विजय लक्ष्मी पार्क में हुआ। इसमें क्षेत्रीय भाजपा विधायक और विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भी उपस्थित रहे। देवनानी ने कहा कि इस समय में संवैधानिक पद पर हूं और मेरी अपनी सीमाएं हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं की भीड़ और उत्साह को देखते हुए मैं स्वयं को रोक नहीं पा रहा। भरे हुए गले से देवनानी ने कहा कि मेरे कार्यकर्ताओं की वजह से ही मैं गत पांच बार से इस क्षेत्र से चुनाव जीत रहा हं। विपरीत परिस्थितियों में भी इन्हीं कार्यकर्ताओं ने मुझे जितवाया। मैं क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं का ऋणी हूं। देवनानी ने कहा कि एक वार्ड से अनेक दावेदार हैं, जिन्हें टिकट न मिले वे निराश न हो। आने वाले दिनों में अधिकांश कार्यकर्ताओं को निगम में मनोनीत पार्षद और अन्य सरकारी संस्थाओं में सदस्य के तौर पर नियुक्ति मिलेगी। मैं स्वयं एक एक कार्यकर्ता की मेहनत को देख रहा हूं। देवनानी ने कहा कि भाजपा की ओर से तीसरी आंख भी लगी हुई है, जो हर कार्यकर्ता की गतिविधि पर निगरानी कर रहे हैं। देवनानी ने माना कि इन दिनों भाजपा के कुछ नेता पार्टी विरोधी काम कर रहे हे। पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का नाम लिए बगैर देवनानी ने कहा, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति है। किसी भी भ्रष्टाचारी को बक्शा नहीं जाएगा। मालूम हो कि धर्मेन्द्र गहलोत के मेयर के कार्यकाल में 13 कमर्शियल नक्शों के भ्रष्टाचार के प्रकरण में राज्य सरकार ने गत 18 अगस्त को अभियोजन की स्वीकृति दी है। गहलोत ने सरकार के इस कदम के लिए देवनानी को जिम्मेदार ठहराते हुए भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। कहा जा रहा है कि अब राजनीतिक दृष्टि से देवनानी को मात देने के लिए धर्मेन्द्र गहलोत चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों को खड़ा करेंगे। गहलोत ने कहा भी है कि उनका भाजपा से कोई विवाद नहीं है, लेकिन वे देवनानी को सबक जरूर सिखाएंगे। अनुशासन का पाठ: 25 अगस्त को ही अजमेर दक्षिण क्षेत्र के भाजपा के दावेदारों का एक समारोह मनुहार गार्डन में हुआ। भाजपा विधायक अनिता भदेल ने कहा, हमें फिर से नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनवाना है। वहीं दावेदारों को भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र सिंह शेखावत ने अनुशासन का पाठ पढ़ाया। शेखावत ने कहा कि दक्षिण क्षेत्र के 42 वार्डों में पार्षद पद का टिकट मांगने के लिए लंबी कतार है। पार्टी की ओर से एक ही व्यक्ति को टिकट मिलेगा। जिन्हें टिकट न मिले, वे पार्टी के अनुशासन में रहकर अधिकृत उम्मीदवार को जितवाने का काम करे। शेखावत ने कार्यकर्ताओं से हाथ खड़े करवा कर संकल्प कराया कि पार्टी जिसे उम्मीदवार बनाएगी, उसे जितवाएंगे। शेखावत ने पूछा कि कोई दावेदार बगावत तो नहीं करेगा। मालूम हो कि शेखावत ने पूर्व में मेयर पद का चुनाव कांग्रेस के समर्थन से लड़ा था। इस बार नगर निगम के मेयर का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए है। शेखावत का प्रयास है कि उनकी पत्नी को मेय बनवाया जाए। हेमा का मुकाबला मोनिका से: अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में से सबसे दिलचस्प मुकाबला उत्तर क्षेत्र में आने वाले वार्ड संख्या 4 में होगा। इसी वार्ड के मतदाता क्षेत्रीय भाजपा विधायक और विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भी है। यानी यह वार्ड देवनानी का है। प्रशासन द्वारा निकाली गई लॉटरी में यह वार्ड ओबीसी वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हुआ है। यही वजह है कि भाजपा के बागी पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने अपनी पत्नी हेमा गहलोत को इस वार्ड से चुनाव लड़ने की योजना बनाई है। इसके लिए गहलोत ने वार्ड में आने वाली महावीर कॉलोनी, रामनगर संत कंवरराम कॉलोनी आदि में जनसंपर्क भी शुरू कर दिया है। वही भाजपा ने इस वार्ड से सामाजिक कार्यकर्ता दीपक जैन की पत्नी मोनिका जैन को उम्मीदवार बनाने की रणनीति बना ली है। देवनानी की उपस्थिति में ही 25 अगस्त को दीपक जैन और उनकी पत्नी मोनिका को भाजपा की सदस्यता ग्रहण करवाई गई। जैन दम्पत्ति ने कहा कि देवनानी जो निर्देश देंगे उसका पालन किया जाएगा। मालूम हो कि मोनिका ने गत बार कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर इसी वार्ड से चुनाव लड़ा था। तब इस वार्ड से भाजपा के रमेश सोनी की जीत हुई थी। मोनिका ओबीसी वर्ग में इसलिए वे ओबीसी वर्ग की महिला के लिए आरक्षित इस वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए पात्र है। महावीर कॉलोनी में अधिकांश परिवार जैन धर्म को मानने वाले है। दीपक जैन का जैन समुदाय में खास प्रभाव है। वही संत कंवरराम कॉलोनी में सभी परिवार सिंधी समुदाय के है, जो देवनानी को ही अपना नेता मानते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 26-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
इधर कश्मीरी पंडितों के 28 वर्ष पुराने वंधामा नरसंहार की जांच दोबारा से, उधर आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों की हत्या की फिर धमकी दी। लेकिन अब आतंकियों को यह समझना चाहिए कि जम्मू कश्मीर का माहौल 90 के दशक वाला नहीं है। ================= जम्मू कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने 1998 के बहुचर्चित वंधामा नरसंहार की जांच फिर से करने का फैसला किया है। 90 के दशक में जब जम्मू कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था, तब 25 जनवरी 1998 में गांदरबल जिले के वंधामा गांव में कश्मीरी पंडितों के घरों में घुसकर आतंकियों ने एक ही रात में 23 लोगों की हत्या कर दी थी। ऐसी घटनाओं की वजह से ही चार लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को जम्मू कश्मीर छोड़ना पड़ा। इधर जांच एजेंसियों ने वंधामा नरसंहार की जांच फिर से शुरू करने की घोषणा की तो उधर पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (यूएलसी) ने कुछ कश्मीरी पंडितों के नाम और पते जारी कर हत्या की धमकी दी है। आतंकियों ने कहा कि कश्मीरी पंडितों की हर गतिविधियों पर हमारी नजर है। यानी आतंकी चाहते है कि जम्मू कश्मीर खासकर कश्मीर घाटी में एक भी हिन्दू न रहे, लेकिन यूएलसी जैसे आतंकी संगठनों को अब यह समझना चाहिए कि जम्मू कश्मीर में 90 के दशक वाला माहौल नहीं है। उस समय कश्मीरी पंडितों की हत्या करना आतंकियों के लिए आसान था। एक तरफ से पूरा कश्मीर आतंकियों के कब्जे में था। तब कश्मीर में कट्टरपंथियों का ही दबदबा था, लेकिन अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कश्मीर का माहौल बदल गया है। सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन ऑल आउट चलाकर आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया है। अब कश्मीर में 90 के दशक वाली घटनाएं नहीं हो पाती। जिस कश्मीर में वर्ष भर कर्फ्यू जैसे हालात रहते थे, वहां अब बाजारों में भीड़ नजर आ रही है। पर्यटन भी तेजी से बढ़ा है। राजधानी श्रीनगर के लाल चौक पर शान से तिरंगा भी लहरा रहा है। कश्मीरियों के भी यह समझ में आ गया है कि शांति रहेगी तो पर्यटन के माध्यम से रोजगार मिलता रहेगा। इसके साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जिस तरह कश्मीरी मुसलमानों को कुचला जा रहा है उससे भी हमारे कश्मीरियों ने सबक लिया है। आम कश्मीरी यह मानता है कि भारत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों से कश्मीर में न केवल विकास हुआ बल्कि आम कश्मीरी को शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, रोजगार आदि की सुविधा भी मिली है। अब आतंकियों को कश्मीर में पहले जैसा संरक्षण नहीं मिलता है। उल्टे अब कश्मीरी नागरिक ही आतंकियों की गतिविधियों की जानकारी सुरक्षा बलों को देते हैं। यही वजह है कि आतंकी गतिविधियों पर नियंत्रण हुआ है। यदि यूएलसी के आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया तो उन्हें सुरक्षा बलों के हथियारों के अंजाम भी भुगतने होंगे। सुरक्षा बलों का ऑल आउट ऑपरेशन अभी भी जारी है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
पत्नी यदि सास-ससुर की सेवा न करे और बिना बताए पीहर चली जाए तो यह उसका अधिकार है। पत्नी से ससुराल में सेवा की अपेक्षा क्यों की जाती है? पति के माता-पिता की सेवा का दायित्व बहु का नहीं, पुत्र-पुत्री का है। कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल। ================= कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश चिलकुर सुमालया का एक आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल माना जा रहा है। न्यायाधीश सुमालया के समक्ष एक युवक ने याचिका दायर की कि वह अपनी पत्नी को भरण पोषण की राशि नहीं दे सकता क्योंकि उसकी पत्नी उसके माता पिता की सेवा नहीं करती और बिना बताए पीहर चली जाती है। चूंकि पत्नी ससुराल में अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रही है, इसलिए उसे अलग होने का भरण पोषण राशि का अधिकार नहीं है। इस याचिका पर न्यायाधीश सुमाया ने कहा कि पत्नी से ससुराल में यह अपेक्षा क्यों की जाती है कि वह सास-ससुर की सेवा करें? पत्नी को अपने पीहर जाने के लिए पति या ससुराल के किसी अन्य सदस्य से अनुमति लेने की जरूरत भी नहीं है। पत्नी जब चाहे तब अपने पीहर जा सकती है। जस्टिस सुमायला ने कहा कि माता पिता की सेवा का दायित्व पुत्र-पुत्री का है। सेवा के लिए बहु से अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाह के बाद ससुराल में आने वाली युवती को अपने निर्णय लेने का स्वतंत्र अधिकार है। पत्नी का यह मतलब नहीं है कि वह किसी के नियंत्रण में काम करे। न्यायाधीश सुमालया ने अपने आदेश में पीहर में रह रही पत्नी को भरण पोषण की राशि देने का आदेश भी दिया। न्यायाधीश सुमालया का आदेश अपनी जगह है। हो सकता है कि उन्होंने महिला की स्वतंत्रता के अधिकारों को देखते हुए आदेश दिया हो, लेकिन कोर्ट का यह आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल हैै। भले ही कोई कानून न माने लेकिन जो भारतीय परिवार व्यवस्था है उसमें ससुराल में सास-ससुर ही माता पिता की भूमिका में होते हैं। यह सही है कि एक युवती 20-15 वर्ष अपने माता पिता के साथ रहने के बाद दूसरे परिवार में बहुत की भूमिका में आ जाती है, इसलिए उसे भी ससुराल में मान सम्मान मिलना ही चाहिए। वैसे भी अब परिवारों की सोच में बदलाव हो रहा है। पीहर जाने के लिए कोई बहुत वाकई अनुमति नहीं लेती है। सास-ससुर को तो सिर्फ यह बताया जाता है कि बहु कितने दिन के लिए पीहर जा रही है। इसके साथ ही अधिकांश सास ससुर या तो अपने बैअे और बहुत से अलग रह रहे हैं या फिर सेवा की अपेक्षा नहीं रखते। हर सास-ससुर यही चाहता है कि उसका बेटा और बहुत स्वतंत्रता के साथ आराम से रहे। कोई भी सास-ससुर अपनी बहुत से सेवा की अपेक्षा नहीं रखता। जब बेटे में ही सेवाभाव नहीं है तो फिर बहुत से अपेक्षा कैसे की जा सकती है। जस्टिस सुमालया माने या नहीं, लेकिन अब परिवार व्यवस्था में भी बहुत बदलाव आ गया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
विधायक शत्रुघ्न गौतम से तंग आकर केकड़ी के पूर्व पालिका अध्यक्ष अनिल मित्तल ने भाजपा छोड़ी। अब कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर पार्षद का चुनाव लड़ेंगे। ================= अजमेर जिले में अभी अजमेर नगर निगम के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का भाजपा से इस्तीफा देने का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि निकाय चुनाव के शोर के बीच जिले के सबसे बड़े उपखंड केकड़ी के नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अनिल मित्तल ने भी 25 अगस्त को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। 24 अगस्त को जब मित्तल के इस्तीफे की भनक लगी तो देहात जिला अध्यक्ष जीतमल प्रजापत और अन्य नेता मित्तल से मिलने पहुंचे। तब मित्तल ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में क्षेत्रीय भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम ने किस प्रकार का व्यवहार उनके साथ किया। वे गत 36 वर्षों से भाजपा में सक्रिय हैं। लेकिन ढाई वर्षो से विधायक गौतम ने भाजपा छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। मित्तल की नाराजगी को दूर करने के लिए चुनाव में संभाग प्रभारी और राज्य वित्तीय आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने भी फोन पर बात की। लेकिन भाजपा के नेता मित्तल की नाराजगी को दूर नहीं कर सके। मित्तल अब कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर पार्षद का चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस में शामिल होने के लिए मित्तल की वार्ता केकड़ी के पूर्व विधायक और मंत्री रहे रघु शर्मा से हो गई है। मित्तल ने अपने इस्तीफे में बताया है कि उनकी राजनीति में शुरुआत विद्यार्थी परिषद से हुई थी। 1995 में वे विद्यार्थी परिषद के उम्मीदवार के तौर पर ही राजकीय महाविद्यालय के अध्यक्ष भी बने। बाद में युवा मोर्चे से लेकर भाजपा संगठन तक में विभिन्न पदों पर रहे। वर्ष 2015 से 2020 तक मित्तल केकड़ी नगर पालिका के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने हमेशा भाजपा में समर्पण भाव से काम किया। मित्तल ने अपने इस्तीफे में भाजपा का आभार जताते हुए आगे भाजपा के साथ काम करने में असमर्थता जताई। केकड़ी की राजनीति में बदलाव: मित्तल के भाजपा छोड़ने के बाद ही केकड़ी की राजनीति में बड़ा बदलाव हो गया। अब तक मित्तल केकड़ी में भाजपा के प्रमुख स्तंभ थे। लेकिन अब वे कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि केकड़ी में मित्तल का मान सम्मान है। अग्रवालों की चौरासी गांवों की संस्था के अध्यक्ष भी मौजूदा समय में मित्तल ही है। चूंकि मित्तल ने जैन धर्म स्वीकार कर रखा है, इसलिए जैन समाज में भी मित्तल की प्रतिष्ठा है। विधायक शत्रुघ्न गौतम भले ही न माने लेकिन मित्तल के भाजपा छोड़ने का असर नगर पालिका के चुनाव परिणाम पर पड़ेगा। मित्तल के भाजपा छोड़ने और कांग्रेस में शामिल होने से कांग्रेसियों में उत्साह है। पूर्व विधायक रघु शर्मा ने भी मित्तल का कांग्रेस में स्वागत किया है। इस्तीफे के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9928021482 पर अनिल मित्तल से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
नगरीय चुनाव में शपथ पत्र की शर्त से उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने की आशंका। जब बताए अनुसार बकाया राशि जमा करवाई जा रही है तो शपथ पत्र क्यों? निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह को ध्यान देने की जरुरत। ================= राजस्थान में शहरी निकायों के 10 हजार 245 वार्डों के पार्षद पद के चुनाव के लिए 27 अगस्त से नामांकन शुरू हो रहा है। यही वजह है कि इन दिनों नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम के दफ्तरों में एनओसी लेने के लिए भीड़ लगी हुई है। निकाय के अधिकारी जो राशि बकाया बता रहे है उसे चुनाव लडऩे के इच्छुक व्यक्ति हाथों हाथ जमा करवा रहे हैं। यह राशि 300 वर्ग गज से अधिक भूखंड पर लगने वाले शुल्क की है। अधिकारियों द्वारा बताई गई बकाया राशि का भुगतान कर दिए जाने के बाद भी शहरी निकायों में पार्षद पद के दावेदारों से एक शपथ पत्र लिया जा रहा है। इस शपथ पत्र में एक शर्त यह भी है कि अब उस पर किसी भी प्रकार की बकाया राशि नहीं है। सवाल उठता है कि जब बकाया राशि जमा करवा दी गई है तो शपथ पत्र क्यों लिया जा रहा है? क्या निकायों के अधिकारियों को अपने रिकॉर्ड पर भरोसा नहीं है? यदि कोई राशि बकाया है तो फिर एनओसी क्यों दी जा रही है? एनओसी देने का मतलब यही है कि संबंधित व्यक्ति पर कोई राशि बकाया नहीं है। यदि राशि बकाया है और फिर भी एनओसी दी जा रही है तो यह त्रुटि निकायों के अधिकारियों की है। अब जब बकाया राशि जमा कराने के बाद भी शपथ पत्र लिया जा रहा है तो यह आशंका हो रही है कि किसी भी उम्मीदवार का नामांकन रद्द किया जा सकता है। यदि निकाय के अधिकारी किन्हीं कारणों से बकाया राशि नहीं बताते और एनओसी जारी कर देते हैं और जांच में अब बकाया राशि का पता चलता है तो निर्वाचन अधिकारी नामांकन को रद्द कर देगा। यानी निकाय अधिकारियों की गलती का खामियाजा उम्मीदवार को भुगतना होगा। इस मामले में राज्य के निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह को ध्यान देने की जरूरत है। यदि बेवजह कोई शपथ लिया जा रहा है तो उस पर निर्वाचन आयुक्त को न्यायपूर्ण कार्यवाही करनी चाहिए। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511