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Tuesday, 13 October 2026
इस बार भी राजेंद्र रावत को अजमेर जिला परिषद के सदस्य के चुनाव में भाजपा का टिकट नहीं मिला।
राजनीति में वादा कोई मायने नहीं रखता।
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अजमेर जिला परिषद के सदस्य के चुनाव में 13 अक्टूबर को भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की जो सूची जारी की है, उसमें वार्ड 26 से श्रीमती पूजा भंसाली (भाजपा नेता अमित भंसाली की पत्नी) तथा वार्ड 27 से अर्जुन रावत (अजमेर ग्रामीण की निवर्तमान प्रधान सीमा रावत के पति) को उम्मीदवार बनाया गया है। इन दोनों वार्डों से भाजपा के नेता राजेंद्र रावत ने दावेदारी जताई थी। रावत के समर्थकों का कहना है कि गत विधानसभा के चुनाव में पुष्कर क्षेत्र के उम्मीदवार और मौजूदा समय में केबिनेट मंत्री सुरेश रावत और उनके भाई कुंदन सिंह रावत , राजेंद्र रावत के घर आए और वादा किया था कि आगाजी जिला परिषद के चुनाव में सदस्य का उम्मीदवार बनाया जाएगा और यदि राजनीतिक समीकरण सही हुए तो राजेंद्र रावत को जिला प्रमुख के चुनाव में भाजपा का उम्मीदवार भी बनाया जाएगा। रावत भाईयों और रावत समुदाय के नेतोओं के वादे पर भरोसा कर राजेंद्र रावत कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। तब उन्होंने विधानसभा के चुनाव में सुरेश रावत को जितवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जब रावत समुदाय के दिग्गज नेता भाजपा की खुली खिलाफ कर रहे थे, तब राजेंद्र रावत पूरी निष्ठा के साथ खड़े थे, लेकिन अब जब वादा पूरा करने का समय आया तो सुरेश रावत सहित सभी नेता अपने वादे से मुकर गए। विधानसभा चुनाव में राजेंद्र रावत के घर आने वालों में अर्जुन रावत भी शामिल थे। समर्थकों को इस बात से निराशा है कि राजेंद्र रावत जैसे रावत समाज के नेता को भाजपा ने उम्मीदवार नहीं बनाया है। जबकि सब जानते हैं कि अमित भंसाली का परिवार जमीनों के कारोबार से जुड़ा हुआ है, जबकि अर्जुन रावत की पत्नी सीमा रावत निवर्तमान प्रधान है।
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संघ प्रचारक की नरेना थाने में बेरहमी से पिटाई के प्रकरण में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की कड़ी नाराजगी के बाद भी जयपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हनुमान प्रसाद को नहीं हटाया।
वही वकील थप्पड़ प्रकरण में माफी मांग लेने के बाद डीएसपी अंजू यादव को एपीओ किया, क्योंकि वकीलों की तरह संघ के स्वयं सेवक सड़कों पद प्रदर्शन नहीं कर सकते।
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राजस्थान में बिगड़ी कानून व्यवस्था के मद्देनजर 13 अक्टूबर को गृह विभाग के प्रभारी वाले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुलिस के उच्च अधिकारियों की एक बैठक ली। इस बैठक में सीएम शर्मा ने कहा कि लापरवाह पुलिस अधिकारियों का स्थानांतरण दूरस्थ स्थानों पर किया जाएगा। प्रदेश में लगातार हो रही अपराध की घटनाओं पर सीएम ने चिता जताई। सीएम की बैठक के बाद विभिन्न घटनाओं से जुड़े तीन एएसपी, चार डीएसपी, 2 एसएचओ तथा कई पुलिस कर्मियों को निलंबित और एपीओ कर दिया गया। इन्हीं में जयपुर ग्रामीण के सांभार क्षेत्र के डीएसपी मुकेश जोशी भी शामिल रहे। जोशी को गत 10 अक्टूबर को नरेना थाने पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक कृष्ण अवतार की बेरहमी से पिटाई के प्रकरण में एपीओ किया गया। लेकिन इस गंभीर प्रकरण में अभी तक भी जयपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हनुमान प्रसाद पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। ऐसा तब हो रहा है, जब 13 अक्टूबर को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने संघ प्रचारक की थाने में बेरहमी से पिटाई पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने पुलिस का व्यवहार पशुओं के समान बताया। राठौड़ ने यह भी कहा कि इस मामले में कड़ी कार्यवाही होगी। ऐसा प्रतीत होता है कि भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार संघ के प्रचारक की थाने में पिटाई की घटना को हल्के में ले रही है। संघ का प्रचारक घर परिवार को छोड़कर राष्ट्र सेवा का काम करता है। यदि भाजपा शासित राज्य में संघ प्रचारक की थाने में बेवहज पिटाई हो जाए तो यह भाजपा सरकार के लिए कलंक की बात है। कुछ पुलिस कर्मियों के निलंबन और डीएसपी के एपीओ कर देने से मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता है। किसी भी थाने में घटने वाली घटना के लिए पुलिस अधीक्षक की सुपरवाइजरी जिम्मेदारी होती है। क्या संघ प्रचारक की पिटाई के प्रकरण में पुलिस अधीक्षक के खिलाफ कार्यवाही नहीं होनी चाहिए? एक ओर भजन सरकार संघ प्रचारक की पिटाई के प्रकरण में पुलिस अधीक्षक को बचा रही है तो वहीं अजमेर के किशनगढ़ में एक वकील बाबूलाल बागोरिया को थप्पड़ मारने के मामले में अजमेर की टे्र्रफिक डीएसपी अंजू यादव को एपीओ कर दिया गया है। अंजू को तब एपीओ किया गया, जब उन्होंने सार्वजनिक तोर पर वकील बागोरिया से माफी मांग ली। यहां तक कि बागोरिया ने वकील समुदाय से अपील की वह इस मामले को लेकर कोई आंदोलन नहीं करे। बागोरिया का कहना था जब डीएसपी ने माफी वाली वीडियो स्वयं सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया है, तब वकीलों को सड़कों पर आंदोलन नहीं करना चाहिए, लेकिन डीएसपी के माफीनामे के बाद भी जिला बार एसोसिएशन ने माफीनामे को खारिज करते हुए 13 अक्टूबर को आरोपी डीएसपी को निलंबित करने की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन किया था। वकीलों के प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने अंजू यादव कोएपीओ कर दिया। यानी सरकार को पता है कि संघ के स्वयं सेवक वकीलों की तरह प्रदर्शन नहीं कर सकते है। यदि स्वयं सेवक भी प्रदर्शन करते तो हनुमान प्रसाद को पुलिस अधीक्षक के पद से हटा दिया जाता।
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सहारा इंडिया की गगवाना वाली 97 एकड़ भूमि की नीलामी 10 वर्ष पहले हुई थी।
सेबी की ई-नीलामी में पूरी तरह पारदर्शिता बरती गई।
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सामाजिक कार्यकर्ता बाबूलाल साहू ने अजमेर के निकट गगवाना में सहारा इंडिया समूह की 97 एकड़ भूमि की नीलामी को लेकर गड़बड़ी के जोरा आरोप लगाए हैं, उसके संबंध में नीलामी में भूमि खरीदने वाली कोलकाता की चक्रदेव इंफ्रादेव प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कंपनी ने ई-नीलामी के माध्यम से भूमि 26 करोड़ 51 लाख रुपए में खरीदी है। कंपनी के निदेशक पवित्र कोठारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अंतर्गत भारतीय प्रतिभूमि एवं विनियम बोर्ड (सेबी) ने इस ई-नीलामी के लिए पेशेवर एजेंसी को नियुक्त किया था। एजेंसी ने देश भर के अखबारों में नीलामी का विज्ञापन प्रकाशित किया। तब आरंभिक बोली 16 करोड़ 50 लाख रुपए रखी गई। चूंकि ईनीलामी में कई कंपनियां शामिल थी, इसलिए प्रारंभिक राशि बढ़ती गई। अंत में सबसे ज्यादा बोली 26 करोड़ 51 लाख रुपए की कोलकाता की कंपनी की रही। इसलिए सेबी ने भूमि का हस्तांतरण हमारी कंपनी के नाम किया। तभी से इस भूमि प रकंपनी के प्रोजेक्ट बन रहे है। कंपनी के निदेशक कोठारी ने कहा, उस समय में जो डीएलसी दर थी उससे 10 गुना ज्यादा का भुगतान किया गया है। ऐसी स्थिति में आज के बाजार भाव और डीएलसी दर से तुलना करना उचित नहीं है। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया है कि भूमि की क्रय राशि सेबी के खातों में जमा करवाई गई है ताकि सहारा इंडिया के जमाकर्ताओं को भुगतान हो सके। जब आरंभिक राशि से 10 करोड़ रुपए ज्यादा में भूमि की खरीद हुई है तब गडबड़ी की कोई आशंका नहीं है। पिछले 10 वर्षों में इन नीलामी को लेकर किसी भी अदालत में कोई याचिका दायर नहीं की गई है और न ही उचित माध्यम से किसी संवैधानिक संस्था ने जांच की कार्यवाही की है। भविष्य में भी कंपनी अपनी और से किसी भी संस्था को अपना स्प्ष्टीकरण देने को तैयार है। जो लोग ईनीलामी में गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं उन्हें तथ्यों की सही जानकारी नहीं है। इस ई-नीलामी के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9414007677 पर निदेशक पवित्र कोठारी से ली जा सकती है।
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सहरा इंडिया की 136 करोड़ रुपए के मूल्य वाली 97 एकड़ भूमि मात्र 26 करोड़ रुपए में बेच दी।
सेबी और निजी कंपनी की मिली भगत पर अजमेर के सामाजिक कार्यकर्ता बाबूलाल साहू ने शिकायत दर्ज करवाई।
सहारा इंडिया के जमाकर्ता भुगतान के लिए तरस रहे हैं।
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एक ओर देश में सहारा इंडिया समूह के छोटे छोटे जमाकर्ता अपने भुगतान के लिए तरस रहे हैं, वहीं भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमिय बोर्ड (सेबी) और कोलकाता की निजी कंपनी चक्र देव इंफ्रा देव प्राइवेट लिमिटेड की आपसी मिली भगत से अजमेर के निकट गगवाना में 136 करोड़ रुपए की मूल्य वाली 97 एकड़ भूमि को मात्र 26 करोड़ 51 लाख रुपए में बेचने का मामला सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता और जनता के मुद्दों को उठाने वाले बाबूलाल साहू ने सेबी के अध्यक्ष को एक शिकायती पत्र भेजा है। इस पत्र में कहा गया है कि सहारा इंडिया ने पूर्व में टाउन शिप बनाने के लिए अजमेर के निकट गगवाना में कृषि भूमि खरीदी थी, लेकिन बाद में दिवालीए प्र्िरकया के कारण कृषि भूमि पर टाउनशिप नहीं बन सकी। कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सहारा इंडिया की संपत्तिों का अधिग्रहण सेबी ने कहर लिया। सुप्रीम कोर्ट के दिशा निदेशों के अनुरूप ही अब सहारा इंडिया की संपत्तियों को बेचा जा रहा है ताकि जमाकर्ताओं को भुगतान किया जा सके। साहू ने बताया कि पूर्व में सहारा इंडिया ने अपनी संपत्तियों का जो विवरण सुप्रीम कोर्ट में दिया है उसमें भी अजमेर के गगवाना की भूमि का मूल्य 136 करोड़ आंका है। इतना ही नहीं मोजूदा समय में 97 एकत्र इस भूमि की डीएलसी दर के हिसाब से भी मूल्य सौ करोड़ रुपए से ज्यादा है। लेकिन सेबी के अधिकारियों ने मिली भगत कर 97 एकड़ भूमि को मात्र 26 करोड़ 51 लाख रुपए में कोलकाता की निजी कंपनी को बेच दिया। साहू ने कहा कि यदि सेबी के अध्यक्ष ने उनकी शिकायत पर दोषी अधिकारियों विरुद्ध कार्यवाही और जमीन के सौदे को रद्द नहीं किया तो वे कानूनी कार्यवाही करेंगे। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि एक ओर सहारा इंडिया के जमाकर्ता अपने भुगतान के लिए तरस रहे हैं तो वहीं 136 करोड़ रुपए की मूल्यवाली जमीन मात्र 26 करोड़ रुपए में बेची जा रही है। सवाल उठता है कि जब खुले बााजार में गगवाना वाली भूमि के सौ करोड रुपए से मिल रहे है, तब इस भूमि का स्थानांतरण मात्र 26 करोड़ रुपए में क्यों किया गया? साहू ने कहा कि अजमेर के जमाकर्ताओं को आज तक भी पूरा भुगतान नहीं मिला है। इस पूरे प्रकरण की ओर अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 8619189143 पर बाबूलाल साहू से ली जा सकती है।
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जो लोग जमीन जायदाद के लिए लड़ रहे हैं, उन्हें पूर्व विधायक अतर सिंह भडाऩा का हश्र देखना चाहिए।
सत्ता का दबदबा भी काम नहीं आया।
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राजस्थान में सत्तारूढ़ भाजपा से जुड़े पूर्व विधायकय अतर सिंह भड़ाना की 11 अक्टूबर को भरतपुर जिले के भौंडा गांव में पीटपीटर कर हत्या कर दी। लाठी,सरियों और अन्य घातक हथियारों से भडाना को तब तक पीटा गया, जब तक उनकी मौत न हुई। ऐसा नहीं कि कुछ लोगों ने अचानक भडाऩा पर प्राणघातक हमला कर दिया। खुद भडाना ने गत 27 सितंबर को पुलिस में लिखित शिकायत दी थी कि उन्हें जान का खतरा है। भडाना ने कुछ व्यक्तियों के नाम भी शिकायत में लिखे थे। इससे हमलावरों की दिलेरी ही कहा जाएगा कि पुलिस के पास सूचना होने के बाद भी पूर्व विधायक भडाना को मार डाला। भडाना अपनी साझेदारी फर्म वाली जमीन पर खनन का काम न कर सके, इसके लिए विरोधियों ने खान वाले मार्ग को खेद दिया। हाईकोर्ट ने रास्ता बनाने के आदेश भी दिए, लेकिन फिर भी खान का रास्ता नहीं बन सका। एक तरफ भौंडा गांव में विरोध बढ़ता गया तो दूसरी ओर भडाना की भी जिद थी कि वे इसी जमीन पर ही खनन का काम करेंगे। हालांकि भडाना को समझाया गया कि वे जमीन का मोह छोड़ दे, लेकिन भडाना अपनी जिद पर कायम रहे। भडाना की एक बेटी आईएएस है, लेकिन विरोधियों को भडाना की ताकत का कोई डर नहीं रहा। जो लोग जमीन जायजद को लेकर लड़ रहे हैं, उन्हें भडाना का हश्र देखना चाहिए। जिन्दगी में पैसा ही सब कुछ नहीं है। जिन्दगी जितनी सादगी वाली होगी, उतना ही जीने का आनंद होगा। यदि जीवन में कोई तनाव अथवा घरेलू विवाद नहीं है तो ऐसा व्यक्ति दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति होता है। यदि साधारण व्यक्ति स्वस्थ है तो भी वह अमीर की श्रेणी में आएगा। ऐसे करोड़ों धनाढ्य है जो अपना सब कुछ देकर सिर्फ स्वस्थ रहना चाहते हैं। यह ईश्वर का न्याय है कि धन दौलत देने के बाद भी व्यक्ति को अनेक रोगों से ग्रस्त रखा है। अतर सिंह भडाना की हत्या दर्शाती है कि सब कुछ जमीन पर ही रह जाता है। परिवार सुख शांति पहली प्राथमिकत होनी चाहिए।
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