Wednesday, 16 September 2026

भगवान राम की जन्मस्थली पर भव्य मंदिर, अनुच्छेद 370 हटाकर अब देश के अधिकांश राज्यों में समान नागरिक संहिता। भारत के सौ करोड़ से ज्यादा सनातनियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से और क्या चाहिए? 17 सितंबर की शाम को हर सनातनी घर के बाहर आशीर्वाद दीप जलाएं। ================== 17 सितंबर 2026 को दुनिया भर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन सेवा संकल्प के साथ मनाया जा रहा है। अनेक धर्मगुरुओं ने देशभर के सनातनियों से अपील की है कि 17 सितंबर की शाम को घर के बाहर आशीर्वाद का दीया जलाएं। ताकि नरेंद्र मोदी और मजबूती के साथ सनातन संस्कृति वाले भारत की रक्षा कर सके। यूं तो नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के अनेक कार्य गिनाए जा रहे हैं, लेकिन देश के 100 करोड़ से ज्यादा सनातनियों के लिए 3 बड़े काम बहुत मायने रखते हैं। जम्मू कश्मीर से धारा 370 को समाप्त कर मोदी ने देश की एकता और अखंडता को मजबूत किया। अयोध्या में भगवान राम के जन्म स्थल पर भव्य मंदिर बनवाकर हर सनातनी को गौरवान्ति होने का अवसर प्रदान किया और अब देश के अधिकांश क्षेत्र में समान नागरिक संहिता लागू की जा रही है। ये तीनों बड़े काम एक सनातनी ही कर सकता है। हालांकि जब वर्ष 2014 में मोदी पीएम बने तब कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि गुलामी की मानसिकता में जीने वाले भारत में यह तीन काम हो सकेंगे, लेकिन मोदी ने इन 12 वर्षों में सनातनियों को गुलामी की मानसिकता से बाहर निकाला और एक एक कर तीनों काम किए। आज हर सनातनी गर्व के साथ कह सकता है कि भारत में उनके सम्मान और अधिकार में वृद्धि हुई है। गुलामी की मानसिकता वाले लोग भले ही मोदी की कार्यशैली की आलोचना करें, लेकिन मोदी ने तीन बड़े काम कर यह दिखाया है कि भारत सनातन संस्कृति वाला देश है। यहां सनातन संस्कृति को नष्ट करने वालों का कोई स्थान नहीं है। जब सनातन संस्कृति मजबूत हो रही है, तब दूसरे धर्मों के लोग भी सुरक्षित हैं। भारत में सौ करोड़ सनातनियों के साथ 25 करोड़ से ज्यादा इस्लाम धर्म को मानने वाले मुसलमान भी रहते हैं। आज दुनिया में मुसलमान सबसे ज्यादा भारत में सुरक्षित है। पिछले 12 वर्षों में तो मुसलमान और ज्यादा सुरक्षित हुए हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि भारत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति का परचम फैला है। यदि वर्ष 2014 के पहले वाले हालात रहते तो भारत में न सनातनी और न मुसलमान सुरक्षित होता। पूरे देश में उन हालातों को देखा है, जब अधिकांश राज्यों में कर्फ्यू लगा रहता था। जब पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी, तब दोनों प्रमुख धर्मों के लोग और ज्यादा सुरक्षित होंगे। कोई भी देश दो कानूनों के रहते मजबूत नहीं हो सकता। अब जब दुनिया में युद्ध की स्थिति है, तब भारत में अमन चैन और शांति बनी हुई है। कोई माने या नहीं लेकिन इसका श्रेय नरेंद्र मोदी की नीतियों को जाता है। आशीर्वाद का दीया तो मुसलमानों को भी जलाना चाहिए। क्योंकि भारत में रहने वाले मुसलमान आज खुशहाल है, इसके विपरीत इस्लामिक देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश ईरान, इराक में रहने वाले मुसलमानों के हालात देखे जा सकते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
सत्ता का दुरुपयोग तो सबसे ज्यादा खुद गहलोत और डोटासरा ने किया। शहरी निकाय के चुनाव में आरोप लगाने से पहले अपने कृत्य देख लें। ================== राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि शहरी निकायों का प्रमुख चुनने के लिए भाजपा के नेता सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं। निर्दलीय और कांग्रेस के पार्षदों को जबरन उठाया जा रहा है। पुलिस भाजपा का मोहरा बनी हुई है। पूरे प्रदेश में भाजपा ने भय का माहौल बना दिया है। मालूम हो कि राजस्थान के 309 शहरी निकायों के प्रमुख का चुनाव 21 सितंबर को होना है। 14 सितंबर को वार्ड पार्षदों के परिणाम के बाद दोनों ही प्रमुख दलों के पार्षदों की बाड़ाबंदी हो रखी है। पार्षदों को दूसरे राज्यों में भी रखा गया है। अजमेर के कांग्रेसी पार्षद कांग्रेस शासित कर्नाटक के बेंगलुरु में है। इसी प्रकार भाजपा के पार्षद राजस्थान के साथ साथ हरियाणा और दिल्ली में रखे गए है। गहलोत और डोटासरा को आरोप लगाने से पहले अपने कृत्यों को देख लेना चाहिए। जुलाई 2020 में जब डिप्टी सीएम और प्रदेशाध्यक्ष रहते सचिन पायलट 18 कांग्रेसी विधायकों को दिल्ली ले गए थे, तब मुख्यमंत्री रहते हुए गहलोत ने सत्ता का दुरुपयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस के विधायक दिल्ली न जा सके इसके लिए कोरोना संक्रमण की आड़ लेते हुए लोगों के राजस्थान के बाहर जाने पर रोक लगा दी। जिस पुलिस को गहलोत आज कोस रहे हैं, उसी पुलिस ने राजस्थान की सीमा पर खड़े रहकर आम लोगों को जाने नहीं दिया। जब कोरोना संक्रमण रोकने के लिए दूसरे राज्यों से आने वालों पर रोक लगनी चाहिए थी, लेकिन गहलोत ने अपने राजनीतिक स्वार्थ की खातिर जाने वालों पर ही रोक लगा दी। निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों को गहलोत ने प्रशासन की मदद से किस तरह कब्जे में लिया, यह किसी से छिपा नहीं है। इतना ही नहीं सचिन पायलट समर्थक कांग्रेसी विधायकों के खिलाफ देशद्रोह तक का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पूरा प्रदेश जानता है कि जिन अधिकारियों ने गहलोत की सरकार को बचाने का काम किया, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद लाभ के पद दिए गए। गहलोत सरकार में मुख्य सचिव रहे निरंजन आर्य की पत्नी संगीता आर्य को तो राज्य लोकसभा आयोग का सदस्य बना दिया। आईपीएस संजय श्रोत्रिय को आयोग का अध्यक्ष बना दिया। डीबी गुप्ता जैसे मुख्य सचिव को भी सेवानिवृत्ति के बाद मुख्य सूचना आयुक्त बनाया गया। जब गहलोत सत्ता का दुरुपयोग कर रहे थे, तब प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए डोटासरा भी मजा ले रहे थे। प्रदेशाध्यक्ष के साथ साथ डोटासरा कैबिनेट मंत्री भी रहे। जब खुद गहलोत और डोटासरा ने सत्ता का दुरुपयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, तब इन दोनों को सत्ता का दुरुपयोग का आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
पार्षदों के लिए बेंगलुरु जैसे प्रबंध गढ़वाल परिवार ही कर सकता है। इसलिए अजमेर में किरण गढ़वाल मेयर पद के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार। ================== 16 सितंबर को अजमेर नगर निगम के मेयर के पद के लिए श्रीमती किरण गढ़वाल ने कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर नामांकन कर दिया है। भाजपा की ओर से श्रीमती अनामिका शर्मा ने नामांकन किया है। इस बार अजमेर के मेयर का पद महिला के लिए अनारक्षित रखा गया है। यानी सामान्य वर्ग की महिला मेयर बन सकती है। लेकिन कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग की किरण गढ़वाल को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस में सामान्य वर्ग की महिला पार्षद भी दावेदार थी, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं ने गहन मंथन के बाद किरण गढ़वाल को उम्मीदवार घोषित किया। असल में गढ़वाल परिवार ीह कांग्रेस और कुछ निर्दलीय पार्षदों के लिए बेंगलुरु जैसे प्रबंध करने में सक्षम है। कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को 16 सितंबर को जयपुर से हवाई जहाज के जरिए कांग्रेस शासित कर्नाटक के बेंगलुरु में ले जाया गया। जिस रिसोर्ट में अब कांग्रेस के पार्षद रखते हुए हैं, उसका प्रतिदिन का खर्चा लाखों रुपया है। चुनाव में कांग्रेस को 37 वार्डों में जीत मिली, जबकि मेयर चुनने के लिए 41 पार्षदों की जरूरत है। निर्दलीय पार्षदों को कांग्रेस के खेमे में लाने के लिए गढ़वाल परिवार ने पूरी ताकत लगा रखी है। चूंकि कांग्रेस का मेयर बनवाने की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता धर्मेन्द्र राठौड़ ने ले रखी है, इसलिए किरण गढ़वाल की उम्मीदवार में धर्मेन्द्र राठौड़ की राय को माना गया। राठौड़ को पता है इसलिए किरण गढ़वाल को उम्मीदवार बनाया गया। यही वजह है कि कांग्रेस के सभी 37 और कुछ निर्दलीय पार्षद पूरे आराम और मस्ती के साथ बेंगलुरु के रिसोर्ट में ठहरे है। कई पार्षद तो ऐसे रहे जिन्होंने पहली बार हवाई जहाज का सफर किया। यदि किरण गढ़वाल की उम्मीदवारी नहीं होती तो ऐसे पार्षद हवाई जहाज का सफर नहीं कर पाते। असल में किरण गढ़वाल के पति दिलीप गढ़वाल का जमीनों का कारोबार विरासत में मिला है। उनके पिता छोटेलाल गढ़वाल की पाल बीसला में कई बीघा जमीन थी। इस जमीन पर खेती का कार्य होता था। चूंकि पाल बीसला की इसी जमीन के निकट तालाब भी था, इसलिए खेती का काम अच्छा रहा। धीरे धीरे खेती वाली भूमि पर बड़े बड़े मकान बन गए। समय के साथ पिता के निधन के बाद दिलीप गढ़वाल ने गढ़वाल समारोह स्थल भी बनाया और समाज सेवा का काम भी किया। रेलवे ने जो दूसरा गेट बनाया है, वह पाल बीसला में गढ़वाल पैलेस के ठीक सामने है। रेलवे स्टेशन का गेट बन जाने से गढ़वाल परिवार की जमीनों के भाव भी बहुत बढ़ गए है। इसमें कोई दो राय नहीं कि दिलीप गढ़वाल अपने माली समाज के साथ साथ अन्य समाजों में भी दानवीर की भूमिका निभाते हैं। गढ़वाल परिवार की ओर से एक शव वाहन भी उपलब्ध है। इस शव वाहन को स्वयं दिलीप गढ़वाल चलाते हैं। यानी किसी परिवार में मृत्यु होने पर दिलीप गढ़वाल अपना वाहन शव को श्मशान स्थल तक ले जाने के लिए उपलब्ध करवाते हैं। कोरोना काल में तो परिवार के सदस्य ही शव को हाथ लगाने से डरते थे, तब दिलीप गढ़वाल ने शवों को न केवल अपने वाहन में रखा बल्कि शव का अंतिम संस्कार तक करवाया। सामाजिक कार्यों में गढ़वाल समारोह स्थल को निशुल्क दिया जाता है। कांग्रेस के के बड़े नेताओं ने सोच समझ कर ही किरण गढ़वाल को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा की अनामिका: 80 पार्षदों वाले अजमेर निगम में भाजपा को 32 सीटें मिली है। लेकिन भाजपा ने भी श्रीमती अनामिका शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा को अपना मेयर बनवाने के लिए 9 अतिरिक्त पार्षदों की जरूरत है। भाजपा का कहना है कि 11 निर्दलीयों में से 9 के वोट उन्हें मिलेंगे। भाजपा को कांग्रेस पार्षदों में क्रॉस वोटिंग की भी उम्मीद है, लेकिन कांग्रेस के पार्षदों के वोट भाजपा को न मिले इसके इंतजाम कांग्रेस से ज्यादा गढ़वाल परिवार ने किए हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

Tuesday, 15 September 2026

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निर्वाचन क्षेत्र अलवर और खैरथल के 19 निकायों में से भाजपा को मात्र तीन में बहुमत। लेकिन 45 पार्षदों वाली खैरथल नगर परिषद में कांग्रेस के सभापति के दावेदार विक्रम चौधरी को ही भाजपा में शामिल कर लिया। अब सभी निकायों में भाजपा के बोर्ड का दावा। भंवर जितेंद्र सिंह और टीकाराम जूली हाथ मसलते रह जाएंगे। ================== केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के निर्वाचन क्षेत्र अलवर और खैरथल के 19 शहरी निकायों में से मात्र 3 में भाजपा को बहुमत मिला। 14 सितंबर को घोषित चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा, यह अलवर के सांसद भूपेंद्र यादव की व्यक्तिगत हार है। अलवर संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं ने दर्शा दिया है कि अब अलवर में भूपेंद्र यादव ने जन समर्थन खो दिया है। दोनों जिलों में 19 शहरी निकायों के 580 वार्डों में चुनाव हुआ। इनमें से भाजपा उम्मीदवार 271 वार्डों में ही जीत पाए। कांग्रेस को भले ही 133 वार्डों में जीत मिली हो, लेकिन 228 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी पार्षद बने। कांग्रेस के नेता अभिजीत का जश्न ही मना रहे थे कि 15 सितंबर को भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस को जबरदस्त मात दे दी। 45 पार्षदों वाली खैरथल नगर परिषद में भाजपा को मात्र 8 सीटें मिली, जबकि कांग्रेस को 20, लेकिन वहीं 17 निर्दलीय उम्मीदवार भी पार्षद बने। कांग्रेस आश्वस्त थी कि निर्दलियों की मदद से सभापति चुन लिया जाएगा, लेकिन भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस में सभापति पद के सबसे मजबूत दावेदार विक्रम चौधरी को ही भाजपा में शामिल कर लिया। चौधरी ने दावा किया कि उनके साथ 8 और कांग्रेस पार्षदों ने भाजपा का समर्थन किया है। खैरथल में सभापति चुनने के लिए 23 पार्षदों की जरूरत है। अब 17 में से अनेक निर्दलीय पार्षद भाजपा उम्मीदवार को समर्थन देने के लिए तत्पर है। असल में परिणाम आने के बाद विक्रम चौधरी ने भंवर जितेंद्र सिंह ेस संपर्क साधने का प्रयास किया, लेकिन राजशाही प्रवृत्ति वाले भंवर जितेंद्र सिंह से मुलाकात नहीं हो सकी। कांग्रेस में राजशाही की स्थिति को देखते हुए भूपेंद्र यादव ने विक्रम चौधरी से संपर्क साधा और उन्हें सभापति के लिए भाजपा का उम्मीदवार बनाने का भरोसा दिलाया। यही वजह रही कि विक्रम चौधरी 8 कांग्रेस पार्षदों के साथ भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंच गए। यानी जिस नगर परिषद में भाजपा का 45 में से 8 सीटें मिली, उस में अब भाजपा का सभापति नब जाएगा। भूपेंद्र यादव ने परिणाम के अगले ही दिन कांग्रेस को जो मात दी उसकी चर्चा अब कांग्रेस के उच्च स्तर पर हो रही है। भले ही 19 निकायों में से सिर्फ 3 में भाजपा को बहुमत मिला है। लेकिन खैरथल के बाद अलवर शहर के नगर निगम में भी भाजा का बोर्ड बनवाना आसान हो गया है। 65 पार्षदों वाले निगम में भाजपा को 28 और कांग्रेस को 23 सीट मिली है हालांकि 14 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से भाजपा आसानी के साथ बोर्ड बनवा रही है, लेकिन अब कांग्रेस के 23 पार्षदों में भी फूट की आशंका उत्पन्न हो गई है। अलवर और खैरथल जिलों के जिन तीन निकायों में भाजपा को बहुमत मिला है, उनमें नौगावां नगर पालिका, खेरली और मुंडावर पालिका शामिल है। वही खैरथल की तीनों नगर परिषद भिवाड़ी, खैरथल और तिजारा में भाजपा को बहुमत नहीं मिला है। तिजारा के 35 वार्डों में से भाजपा को सिर्फ 3 वार्डों में जीत दर्ज कर सकी है, लेकिन यहां भी भाजपा का बोर्ड बनेगा, क्योंकि निर्दलीय पार्षदों की संख्या 31 है। कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली है। इसी प्रकार रामगढ़, मालाखेड़ा, बहादुरपुर, कटुमर, थानागाजी, राजगढ़, लक्ष्मणगढ़, गोविंदगढ़, बड़ौदामेव, किशनगढ़बास,कोटकासिम तथा टपूकड़ा पालिकाओं में भी भाजपा को बहुमत नहीं मिला है। हाथ मसलते रह जाएंगे: भूपेंद्र यादव को भाजपा में चुनावी राजनीति का चाणक्य माना जाता है। अलवर में कांग्रेस की कमान राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह और प्रदेश में प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली के पास है, लेकिन भूपेंद्र यादव ने चुनाव परिणाम के बाद जो आक्रामक रणनीति अपनाई है, उसमें भंवर जितेंद्र सिंह और जूली हाथ मसलते रह जाएंगे। जूली आए दिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर हमला करते है, लेकिन खैरथल की घटना बताती है कि जूली को अपने गृह क्षेत्र में पकड़ नहीं है। वहीं भूपेंद्र यादव ने सांसद बनने के बाद अलवर के आम लोगों से सीधा संवाद किया। यही वजह है कि 19 में से 16 निकायों में बहुमत नहीं मिलने के बाद भी अधिकांश निकायों में भाजपा का बोर्ड बनने जा रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 16-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
अजमेर के कांग्रेसी पार्षद बेंगलुरु पहुंचे। अब भाजपा के लिए सेंध लगाना आसान नहीं। 80 में से 37 पार्षद कांग्रेस के हैं। मेयर चुनने के लिए 41 वोट चाहिए। ================== कांग्रेस इस बार हर कीमत पर अजमेर में अपना मेयर बनवाना चाहती है। इसलिए नवनिर्वाचित पार्षदों को जयपुर से हवाई जहाज से बेंगलुरु भेज दिया गया है। सभी पार्षद बेंगलुरु की एक सुरक्षित होटल में ठहरे हुए है। बेंगलुरु भेजने का निर्णय इसलिए लिया गया, क्योंकि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। कांग्रेस को आशंका थी कि यदि पार्षदों को राजस्थान में रखा गया तो पुलिस उठाकर ले जाएगी। खास तौर से निर्दलीय पार्षदों को तो अपने कब्जे में किया ही जा सकता है। अजमेर नगर निगम में मेयर चुनने के लिए 41 पार्षदों की जरूरत है। कांग्रेस को 80 में से 37 सीटें मिली है, लेकिन कांग्रेस के समर्थन में 11 निर्दलीय पार्षदों में से चार समर्थन दे रहे हैं। कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि उनके पास 42 पार्षदों का जुगाड़ है। हालांकि 32 सीटें जीत कर भाजपा भी दावा कर रहे हैं कि मेयर उन्हीं की पार्टी का बनेगा। भाजपा को उम्मीद है कि मतदान वाले दिन 21 सितंबर को कांग्रेस के पार्षदों में बगावत होगी और अनेक पार्षद भाजपा के उम्मीदवार को अपना वोट देंगे। चूंकि स्थानीय निकाय के चुनाव में बदल बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता, इसलिए पार्षदोंं की सदस्यता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भाजपा के एक नेता का दावा है कि भले ही कांग्रेस के पार्षद सुरक्षित स्थान पर हो, लेकिन कई पार्षदों से संपर्क बना हुआ है। लेकिन अब जब कांग्रेस के पार्षद बेंगलुरु पहुंच गए हैं, तब भाजपा का सेंध लगाना आसान नहीं है। कांग्रेस के पार्षदों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता और आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ के पास है। जानकार सूत्रों के अनुसार अजमेर के कांग्रेसी पार्षदों को बेंगलुरु भिजवाने में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की भूमिका रही है। बताया जा रहा है कि राठौड़ के आग्रह पर ही गहलोत ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से बात की और तभी कांग्रेसी पार्षदों को बेंगलुरु ले जाना का निर्णय लिया गया। कहा जा सकता है कि कांग्रेसी पार्षद कर्नाटक पुलिस की निगरानी में है। मालूम हो कि धर्मेन्द्र राठौड़ को विधायकों की बाड़ाबंदी करने का खास अनुभव है। वर्ष 2020 में भी राठौड़ ने मुख्यमंत्री गहलोत के लिए कांग्रेस के विधायकों के साथ साथ निर्दलीय और अन्य पार्टियों के विधायकों की बाड़ाबंदी की थी। धर्मेन्द्र राठौड़ भले ही समर्थक हो, लेकिन निकाय चुनाव में राठौड़ ने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ भी अच्छे संबंध बनाए। यही वजह है कि अजमेर में कांग्रेस का मेयर बनवाने की पूरी जिम्मेदारी धर्मेन्द्र राठौड़ के पास है। यदि 21 सितंबर को कांग्रेस का मेयर बनता है तो 36 वर्ष बाद अजमेर में कांग्रेस को इतनी बड़ी सफलता मिलेगी। वहीं भाजपा में मेयर बनवाने की जिम्मेदारी विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के पास है। देवनानी ने ही भाजपा के 32 और कुछ निर्दलीय पार्षदों को सुरक्षित स्थान पर रखा हुआ है। भाजपा को अपना मेयर बनवाने के लिए 9 निर्दलीय पार्षदों की जरूरत है। देखना होगा कि भाजपा 9 अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ किस प्रकार करती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 16-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511