13 से 16 नवंबर तक मैं ब्लॉग इसलिए नहीं लिख पाया कि मुझे एक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए राजस्थान के भीलवाड़ा के जहाजपुर स्थित स्वस्ति धाम और मांगलिक भवन में रहना पड़ा। जो लोग डेस्टिनेशन वेडिंग में रुचि रखते हैं उनके लिए जहाजपुर का स्वस्ति धाम सबसे उपयुक्त है। मैं यहां स्वस्ति धाम का प्रचार नहीं कर रहा क्योंकि दिगंबर जैन समाज की विदूषी लेखिका पूज्य गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी की प्रेरणा से यह तीर्थ स्थान बनकर तैयार हुआ है। स्वस्ति धाम से 300 मीटर की दूरी पर मांगलिक भवन बनाया गया है, जिसमें एक बड़े बगीचे के साथ 45 कमरों का भवन भी है। इस भवन में एक बड़ा हॉल है, जिसमें सभी कार्य संपन्न हो सकते हैं। निकट ही स्वस्ति धाम में 108 कमरे हैं, जिन्हें जरुरत होने पर किराये पर लिया जा सकता है। एसी कमरे का किराया मात्र 800 रुपए प्रति दिन है और 4 मेहमान आसानी से रह सकते हैं। इन कमरों में दो स्टार वाली सुविधाएं उपलब्ध है जबकि स्वस्ति धाम का प्राकृतिक सौंदर्य किसी सेवन स्टार होटल से भी ज्यादा बना हुआ है। पाठकों को जानकर आश्चर्य होगा कि 45 कमरों वाले मांगलिक भवन का दो दिन का शुल्क मुश्किल से 2 लाख रुपए का है। इसमें बिजली तक की सुविधा शामिल है। स्वस्ति धाम के बारे में और अधिक जानकारी बेवसाइट www.munisuvratswastidham.com से ली जा सकती है। मेरा ऐसा मानना है कि जो लोग बिना किसी विघ्न के शादी समारोह करना चाहते हैं उन्हें एक बार इस धाम पर आना चाहिए। अजमेर से जहाजपुर 130, जयपुर से देवली होते हुए 180, कोटा से 110, भीलवाड़ा से मात्र 90 किलोमीटर है। स्वस्ति धाम और मांगलिक भवन को तैयार करवाने के लिए परम विदुषी स्वस्ति भूषण माताजी का आभार प्रकट किया जाना चाहिए।
व्यवस्था बिगाड़ने वाले रिश्तेदार:
इन दिनों पूरे देश में शादी ब्याह का सीजन चल रहा है। दस प्रतिशत शादी समारोह धनाढ्य परिवारों से जुड़े होते हैं। जिन्हें मेहमानों के बारे में आने की जानकारी पहले से होती है, लेकिन 90 प्रतिशत विवाह समारोह मध्यम वर्गीय परिवारों के होते है। आमतौर पर निकट के रिश्तेदार शादी समारोह में भाग लेते हैं, लेकिन कई अवसरों पर देखा गया है कि दूर दराज के रिश्तेदार भी समारोह में आ जाते हैं। किसी भी परिवार को आने वाले रिश्तेदारों की संख्या पर ऐतराज नहीं होता क्योंकि सनातन संस्कृति में अधिक रिश्तेदारों का आना परिवार का सम्मान माना जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि समारोह के लिए एक व्यवस्था निर्धारित की जाती है, लेकिन जब उम्मीद से ज्यादा रिश्तेदार आ जाते हैं तो व्यवस्था बिगड़ जाती है। धनाढ्य परिवारों में तो इवेंट मैनेजर फोन कर आने वाले रिश्तेदारों की संख्या पता लगा लेता है, लेकिन मध्यम वर्गीय परिवारों में ऐसा संभव नहीं है। यदि दूल्हे के फूफा से आने वालों की संख्या पूछ ली जाए तो फूफा जी नाराज हो कर लौट जाएंगे। मेरा सभी रिश्तेदारों से आग्रह है कि समारोह में जाने से पहले मेजबान को संख्या बताई जाए ताकि व्यवस्था न बिगड़े। सवाल सिर्फ कारों का ही नहीं बल्कि खाने पीने आदि की सभी सुविधाओं का भी होता है।
S.P.MITTAL BLOGGER (17-11-2024)
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