Friday, 4 April 2025
जो युवा नेता राहुल गांधी के आगे पीछे धूमते थे, जाब वो राहुल जी की ओर देखते भी नहीं है-खडग़े। कांग्रेस की संपत्तियों को हड़पने वाले कांग्रेसियों पर कार्यवाही होगी। कांग्रेस में अब सांसद और विधायक से ज्यादा जिलाध्यक्ष ताकतवर होंगे। राहुल जी, बड़े नेताओं का घमंड दूर करवाओ-अक्षय त्रिपाठी।
3 अप्रैल को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने 8 राज्यों के करीब 700 जिलाध्यक्षों से सीधा संवाद किया। दिल्ली के पार्टी मुख्यालय पर हुए इस संवाद में खडग़े ने कहा कि पार्टी के युवा नेता जो कभी राहुल गांधी के आगे पीछे घूमते थे, आज वे संसद भवन परिसर में राहुल जी की ओर देखते भी नहीं है। खडग़े का इशारा ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा, जतिन प्रसाद जैसे नेताओं की ओर था। यह नेता राहुल गांधी का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। खडग़े ने कहा कि अब हमे ंऐसे मौका परस्त नेताओं से सावधान रहने की जरुरत है। खडग़े ने गुलाम नबी आजाद की ओर इशारा करते हुए कहा कि जो लोग जमीनी नेता नहीं थे, उन्हें भी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक बनाया, लेकिन जब कांग्रेस में संकट का समय आया तो ऐसे नेता कांग्रेस को छोड़ कर चले गए। इन नेताओं को अपनी असलियत का पता जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनाव में चल गया है। मात्र 2 प्रतिशत ही वोट ले पाए हैं। जिलाध्यक्षों के संवाद में खडग़े ने तो लंबा भाषण दिया, लेकिन राहुल गांधी मात्र दस मिनट ही बोले। राहुल गांधी की रुचि अपनी पार्टी के जिलाध्यक्षों के विचारों को सुनने में थी। जिलाध्यक्षों ने कहा कि संगठन में जब पदाधिकारियों का चयन किया जाता है तब सांसद और विधायक की राय को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में जिलाध्यक्ष सिर्फ नाम मात्र का रहता है। जिलाध्यक्षों ने कहा कि पदाधिकारियों के चयन का अधिकार हमारे पास होना चाहिए ताकि ब्लॉक और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत किया जा सके। राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों से जानना चाहा कि जब राज्य में हमारी सरकार होती है तो बोर्ड, निगम आदि में अध्यक्ष और सदस्य की नियुक्ति कैसे होती है, क्या जिलाध्यक्ष अथवा संगठन के पदाधिकारियों से राय ली जाती है या फिर सीधे मुख्यमंत्री के स्तर पर ही नियुक्ति हो जाती है। राहुल गांधी के इस सवाल का जवाब किसी भी जिलाध्यक्षों ने नहीं दिया, क्योंकि अधिकांश राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री संवाद में मौजूद थे। राहुल गांधी ने यह भी जानना चाहा कि क्या जिलाध्यक्ष को विधानसभा चुनाव में पार्टी का उम्मीदवार बनाया जाए। इस पर 35 प्रतिशत जिलाध्यक्षों ने हाथ खड़े कर कहा कि टिकट नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि जब जिलाध्यक्ष ही उम्मीदवार बन जाता है तो फिर वह अन्य विधानसभा क्षेत्र में जाकर पार्टी का प्रचार नहीं कर पाता। पूरे कार्यकाल में जिलाध्यक्ष का काम टिकट हथियाने में लगा रहता है, लेकिन करीब 65 प्रतिशत जिलाध्यक्षों ने विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाए जाने का समर्थन किया। असल में ऐसे जिलाध्यक्ष भी थे जो मौजूदा समय में भी विधायक है। राहुल गांधी ने सवाल किया कि यदि हम जिलाध्यक्षों का पावरफुल बना देते हैं तो इस बात की गारंटी क्या है कि जिलाध्यक्ष अपने पद का दुरुपयोग नहीं करेगा। राहुल गांधी ने कहा कि अब संगठन में बदतमीजी नहीं चलेगी। पदाधिकारियों को कार्यकार्यताओं से अच्छा व्यवहार करना ही पड़ेगा।
संपत्तियां कांग्रेसियों ने ही हड़प ली:
जिला अध्यक्षों के सीधे संवाद में यह बात भी सामने आई कि कई जिलों में कांग्रेस की संपत्तियों को कांग्रेसियों ने ही हड़प लिया है। जो संपत्तियां संगठन की थी, उन्हें खुर्दबुर्द कर दिया। कांग्रेस के जो दफ्तर बरसों से किराए पर चल रहे थे, उन्हें भवन मालिक से सांठगांठ कर चुपचाप खाली कर दिया गया। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की संपत्तियों को खुर्दबुर्द करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्यवाही की जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि कांग्रेस के किन नेताओं की वजह से किराए के दफ्तर खाली हुए।
घमंड दूर करवाओ:
3 अप्रैल को हुए संवाद में राजस्थान के चालीस से भी ज्यादा जिलाध्यक्ष मौजूद थे, लेकिन बोलने का अवसर सीकर की जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला और भीलवाड़ा के जिला अध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी को ही मिला। इन दोनों के नामों की सिफारिश प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने की थी। सुनीता गठाला ने प्रदेश संगठन की जमकर प्रशंसा की। वहीं अक्षय त्रिपाठी ने कहा कि जब हमारी सरकार होती है तो विधायक और चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी को ही महत्व दिया जाता है। जबकि संगठन की मजबूती के लिए जिलाध्यक्ष को महत्व मिलना चाहिए। त्रिपाठी ने कहा कि कई बार जिलाध्यक्ष बड़े नेताओं को आमंत्रित करते हैं, लेकिन बड़े नेता या तो आते नहीं या फिर घमंडपूर्ण व्वहारकरते हैं। कार्यकर्ता सीधे मुंह बात नहीं करते। त्रिपाठी ने राहुल गांधी से आग्रह किया कि बड़े नेताओं का घमंड दूर करवाया जाए। जिलाध्यक्षों के संवाद में सचिन पायलट तो छत्तीसगढ़ के प्रभारी की हैसियत से मौजूद थे, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मौजूद नहीं रहे। गहलोत के पास मौजूदा समय में न तो किसी प्रदेश का प्रभार है और न ही वह संगठन के किसी पद पर है। यह पहला अवसर है, जब मुख्यमंत्री के पद से हटने के बाद गहलोत को अखिल भारतीय स्तर का संगठन का कोई पद नहीं मिला है।
अजमेर के दोनों अध्यक्षों ने भाग लिया:
3 अप्रैल को दिल्ली में हुए संवाद कार्यक्रम में अजमेर देहात के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राठौड़ और शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय जैन ने भी भाग लिया। यहां उल्लेखनीय है कि राजस्थान में अजमेर एकमात्र ऐसा जिला है, जिसमें कार्यकारिणी के भंग होने के बाद नए अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं की गई है। राठौड़ और जैन को ही अध्यक्ष मानकर संगठन का काम चलाया जा रहा है। कार्यकारिणी भंग होने के बाद भी राठौड़ और जैन पूरी निष्ठा के साथ जिलाध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर के संवाद कार्यक्रम आमंत्रित किए जाने से जाहिर है कि बड़े नेताओं का भरोसा राठौड़ और जैन पर बना हुआ है। राठौड़ और जैन ने बताया कि संगठन को मजबूत करने की दृष्टि से दिल्ली का संवाद कार्यक्रम बहुत सफल रहा है। राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों से महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्रित की है। अब यदि जिलाध्यक्षों को अधिकार मिलते हैं तो संगठन को मजबूती मिलेगी।
S.P.MITTAL BLOGGER (04-04-2025)
Website- www.spmittal.in
Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog
Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11
Blog- spmittal.blogspot.com
To Add in WhatsApp Group- 9166157932
To Contact- 9829071511
वक्फ संपत्तियों का लाभ अब 85 प्रतिशत पिछड़े मुसलमानों को मिलेगा। विपक्ष द्वारा संसद में रखी सभी आशंकाएं निराधार साबित होंगी। ख्वाजा साहब की दरगाह के दीवान की ओर से पीएम मोदी मोदी का आभार जताया।
3 अप्रैल की देर रात वक्फ एक्ट संशोधन बिल 2025 राज्यसभा में भी पारित हो गया। बिल के पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 वोट पड़े। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी बिल मंजूर हो जाने के बाद अब राष्ट्रपति को भेजा जाएगा और फिर राष्ट्रपति की और से कानून बनाने का आदेश जारी होगा। राज्य सभा में भले ही सांसदों की संख्या कम हो, लेकिन लोकसभा के मुकाबले में राज्य सभा में ज़्यादा समय तक बहस हुई। लोकसभा में कोई 12 घंटे, लेकिन राज्यसभा में 15 घंटे से भी ज्यादा समय तक चर्चा हुई। यानी दोनों सदनों में सांसदों ने अपने विचारों को प्रमुखता के साथ रखा लोकतंत्र की यह खूबी हैं कि बहस के बाद बहुमत के आधार पर फैसला होता है। अब देश की संसद ने वक्फ एक्ट में संशोधन प्रस्तावों पर मुहर लगा दी है। दोनों सदनों में पास होने के बाद अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह के दीवान और ख्वाजा साहब के वंशज जैनुअल आबेदीन के पुत्र और उत्तराधिकारी सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि संसद में बहस के दौरान विपक्षी सांसदों ने जो आशंकाएं व्यक्त की है वह सभी निराधार साबित होंगी। वक्फ एक्ट संशोधन के प्रस्ताव को बनाने में उनकी ऑल इंडिया सज्जादानशीन कौंसिल की भी भूमिका है। हमने भी सुझाव दिया था के पिछड़े मुसलमानों को वक्फ बोर्ड में प्रतिनिधित्व दिया जाए। देश में कुल मुसलमानों की आबादी का 85 प्रतिशत पिछड़े वर्ग के मुसलमान है। इनमें अंसारी, मंसूरी, जुलाहा, राइनी इकरिसी, नाई, मिरासी, मुकेरी, बारी, घोसी जैसीे जातियों के मुसलमान आते है। अब तक इन पिछड़े मुसलमानों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलता था। चिश्ती ने बताया कि देश में बिहार एकमात्र ऐसा राज्य जहां जातीय जनगणना हो चुकी है। आंकड़े बताते है के बिहार में 73 प्रतिशत मुसलमान पिछड़ी जातियों के है। अब जब इन पिछड़ी जातियों के मुसलमानों वक्फ बोर्ड में प्रतिनिधि मिलेगा तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम मुसलमान को कितना लाभ होगा। चिश्ती ने कहा कि नए कानून के बाद देश भर की वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन होगा। इसमें सभी संपत्तियों का नामांकन और नाप भी होगा। मौजूदा समय में लाखों संपत्तियों का न तो सीमांकन है और न ही नाप। कब्रिस्तान और मस्जिद के बाद रिकॉर्ड में सीमांकनकी जगह जीरों अंकित किया गया है। नए कानून के लागू होने क ेबाद इन सब बुराइयों को समाप्त किया जाएगा। मौजूदा समय में कुछ संस्थाओं के लोगों ने वक्फ की संपत्तियों को कौडिय़ों के भाव बेच दिया है या फिर मामूली किराये दारी पर दे दीहै। उन्होंने कहा कि जब वक्फ क सपंथ्ततयों में पारदर्शिता आएगी तो इनकम भी बढ़ेगी। वे दावे से कह सकते हैं कि वक्फ संपत्तियों से होने वाली इनकम को मुसलमानों की भलाई पर ही खर्च किया जाएगा।
मोदी का आभार:
नसीरुद्दीन चिश्ती ने वक्फ एक्ट में संशोधन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और अल्पसंख्यक मामलात मंत्री किरण रिजिजू का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह बिल देश का पहला ऐसा बिल है, जिस पर लाखों लोगों से राय ली गई है। कुछ लोग गुमराह करते है कि नरेंद्र मोदी मुस्लिम विरोधी है। यदि नरेंद्र मोदी मुस्लिम विरोधी होते तो वक्फ बोर्ड में गरीब मुसलमानों को प्रतिनिधित्व नहीं देते। मोदी ने अपने 11 वर्ष के कार्यकाल में भारत के मुसलमानों के लिए भलाई और विकास के जो कार्य किए उसी की वजह से चार मुस्लिम देशों ने अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान नरेंद्र मोदी को दिया है। चिश्ती ने कहा कि वक्फ एक्ट में संशोधन के बाद जब आम मुसलमानों को अपनी संपत्तियों का लाभ मिलने लगेगा, तब उन नेताओं की दुकान बंद हो जाएगी जो मोदी को मुस्लिम विरोधी बताते हैं।
S.P.MITTAL BLOGGER (04-04-2025)
Website- www.spmittal.in
Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog
Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11
Blog- spmittal.blogspot.com
To Add in WhatsApp Group- 9166157932
To Contact- 9829071511
जब खुद की दाढ़ी में आग लगती है तो हकीकत का पता चलता है कांग्रेस अध्यक्ष खडग़े के कथित अपमान पर राज्यसभा के सभापति धनखड़ की दो टूक। कर्नाटक में वक्फ की संपत्तियां हड़पने का आरोप।
3 अप्रैल को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही मल्लिकार्जुन खडग़े ने अपने प्रतिपक्ष के नेता के विशेषाधिकारों का उपयोग करते हुए कहा कि 2 अप्रैल् को लोकसभा में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने उन पर कर्नाटक में वक्फ की संपत्तियों को हड़पने का आरोप लगाया है। खडगे ने भावुक होते हुए ही कहा कि आरोप साबित हो जाए तो राजनीति से संन्यास ले लेंगे। खडग़े ने सदन में मौजूद पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि मेरी ईमानदारी के बारे में देवगौड़ा से पूछा जा सकता है। खडग़े ने सभापति जगदीप धनखड़ से कहा कि वह अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा से माफी मंगवाए। खडग़े की बात का समर्थन विपक्ष के कई सांसदों ने किया, लेकिन सभापति धनखड़ ने कहा कि खडग़े ने जो बात कही है उसे मैं घनश्याम तिवाड़ी की अध्यक्षता वाली एधिक (आचरण) को रैफर कर रहा हंू। तिवाड़ी एक अनुभवी राजनेता है, इसलिए अनुराग ठाकुर और खडग़े के प्रकरण की सच्चाई का पता लगाएंगे। धनखड़ ने कहा कि वे स्वयं भी चाहते हैं कि सांसदों का आचरण संसदीय परंपराओं के अनुरूप हो, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अनेक सांसद ऐसा नहीं करते। उन्होंने उदाहरण दिया कि देश की रक्षा करने वाले राणा सांगा के बारे में इसी संसद में अमर्यादित टिप्पणियां की गई। मैंने तब भी सांसदों को सावचेत किया था। धनखड़ ने खडग़े से कहा कि आपने भी राणा सांगा के मुद्दे पर निष्पक्ष भूमिका नहीं निभाई। धनखड़ ने कहा कि इसी सदन में देश के प्रधानमंत्री और स्वयं मेरे लिए भी अमर्यादित टिप्पणियां की जाती है, लेकिन जब खुद की दाढ़ी में आग लगती है तो हकीकत का पता चलता है। धनखड़ की दो टूक के बाद मल्लिकार्जुन खडग़े शांत होकर बैठ गए।
S.P.MITTAL BLOGGER (04-04-2025)
Website- www.spmittal.in
Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog
Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11
Blog- spmittal.blogspot.com
To Add in WhatsApp Group- 9166157932
To Contact- 9829071511
जब 370 के निरस्त होने, सीएए और तीन तलाक के कानून से मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं हुआ तो वक्फ एक्ट में संशोधन से कैसे हो सकता है? मुसलमानों के लिए कांग्रेस ने जो कांटे बोए उन्हें नरेंद्र मोदी हटा रहे हैं। नया कानून मुस्लिम विरोधी होता तो टीडीपी, जेडीयू जैसी पार्टियां समर्थन नहीं करती। किसी भी मुस्लिम देश से ज्यादा सम्मान और समृद्धि के साथ भारत में रह रहे है मुसलमान।
Wednesday, 2 April 2025
न्यूज चैनलों में सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती की सबसे ज्यादा मांग। ख्वाजा साहब की दरगाह के दीवान की ओर से वक्फ एक्ट संशोधन पर मुसलमानों का पक्ष रख रहे हैं। दरगाह का संचालन भी एक्ट से होता है, लेकिन धार्मिक मामलों में दखल नहीं।
वक्फ एक्ट में संशोधन को लेकर न्यूज चैनलों पर लगातार बहस हो रही है। चैनलों की बहस में सबसे ज्यादा मांग सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती की है। चिश्ती अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह के दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन के पुत्र हैं। आबेदीन ने अपने पुत्र को ही उत्तराधिकारी घोषित कर रखा है। ऐसे में न्यूज चैनलों पर नसीरुद्दीन चिश्ती दरगाह दीवान की ओर से मुसलमानों का पक्ष रख रहे हैं। नसीरुद्दीन चिश्ती उन मुस्लिम प्रतिनिधियों में शामिल है, जिन्होंने वक्फ एक्ट के संशोधन का मसौदा तैयार करने में भूमिका रही है। यही वजह है कि चिश्ती अब खुलकर संशोधन प्रस्ताव का समर्थन कर रहे है। चिश्ती का कहना है कि नया कानून बनने से वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग नहीं हो पाएगा। मौजूदा समय में अनेक वक्फ संपत्तियों पर ऐसे लोग काबिज है जो सिर्फ अपने स्वार्थ पूरे कर रहे है। एक्ट में संशोधन समय की जरूरत है। मैं यह बात दावे से कह सकता हंू कि वक्फ संपत्तियों का लाभ सिर्फ मुसलमानों को ही मिलेगा। वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने की नीयत सरकार की नहीं है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सिर्फ वक्फ संपत्तियों के कामकाज में पारदर्शिता लाना चाहती है। चिश्ती न्यूज चैनलों पर बता रहे है कि ख्वाजा साहब की दरगाह का संचालन भी दरगाह एक्ट 1956 के अंतर्गत हरे हो रहा है। दरगाह कमेटी केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय के अधीन ही काम करती है। मंत्रालय ही कमेटी का नाजिम (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) नियुक्त करता है। दरगाह कमेटी की ओर से दरगाह के अंदर जायरीन की सुविधाओं के लिए अनेक इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन आज तक भी दरगाह कमेटी ने दरगाह की धार्मिक रस्मों में दखल नहीं दिया। दीवान पद की परंपराओं के अनुसार उनके परिवार के सदस्य और खादिम मिलकर दरगाह की धार्मिक रस्मों को पूरा करते हैं। ख्वाजा साहब के सालाना उर्स में मजार शरीफ पर गुसल की रस्म भी दरगाह दीवान और खादिमों के सहयोग से की जाती है।
S.P.MITTAL BLOGGER (02-04-2025)
Website- www.spmittal.in
Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog
Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11
Blog- spmittal.blogspot.com
To Add in WhatsApp Group- 9166157932
To Contact- 9829071511
Tuesday, 1 April 2025
पाकिस्तान में जब हिंदुओं की संपत्तियां सरकार की हो गई तो फिर भारत में मुसलमानों की संपत्तियां वक्फ की कैसे हो सकती है संविधान में वक्फ संपत्तियां या बोर्ड का उल्लेख नहीं, लेकिन तुष्टीकरण की नीति के तहत तत्कालीन पीएम नेहरू ने 1954 में एक्ट बनाया। मोदी सरकार की भी लाचारी: वक्फ एक्ट खत्म नहीं सिर्फ संशोधन। यानी 9 लाख एकड भूमि मुसलमानों की ही रहेगी। ख्वाजा साहब की दरगाह के दीवान की ओर से संशोधन प्रस्ताव का समर्थन, लेकिन खादिमों का विरोध।
संसद के इसी बजट सत्र में ही वक्फ एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने की उम्मीद जताई जा रही है, इसलिए वक्फ बोर्ड से जुड़ी संस्थाओं का विरोध तेज हो गया है। कुछ संस्थाओं के आह्वान पर 31 मार्च को ईद की नमाज के समय कुछ मुसलमानों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। कहा जा रहा है कि वक्फ एक्ट में संशोधन होने के बाद मुसलमानों की मस्जिदे और अन्य धार्मि कस्थल छीन लिए जाएंगे। संशोधन प्रस्ताव को संविधान के विरुद्ध बताया जा रहा है। असल में भारत में वक्फ की संपत्तियोंं का मामला देश के विभाजन से जुड़ा है। 1947 में विभाजन की त्रासदी के समय पाकिस्तान से लाखों हिन्दू भारत आए और भारत से लाखों मुसलमान पाकिस्तान गए। जिन हिंदुओं ने पाकिस्तान छोड़ा उनकी संपत्तियों को सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया, लेकिन जिन मुसलामनों ने भारत छोड़ा वे अपनी संपत्तियों को वक्फ (अल्लाह) के लिए छोड़ गए। हालांकि पाकिस्तान छोड़ते समय हिंदुओं ने भी अपनी संपत्तियों के लिए देवी देवताओं से प्रार्थना की थी, लेकिन पाकिस्तान में हिंदुओं की संपत्तियां सरकार ने अपने कब्जे में ले ली और भारत में मुसलमानों की संपत्तियों के लिए वक्फ बोर्ड बना दिया गया। बीआर अंबेडकर ने जो संविधान बनाया उसमें वक्फ संपत्तियों का कोई उल्लेख नहीं है। यानी संविधान निर्माताओं ने भी तब पाकिस्तान गए मुसलमानों की संपत्तियों को सरकार की ही माना। संविधान में उल्लेख न होने के बाद भी 1954 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ही तुष्टीकरण की नीति के अंतर्गत वक्फ एक्ट बना दिया और संपत्तियों को सुन्नी व शिया मुसलमानो के प्रतिनिधियों को सौंप दिया। वक्फ बोर्ड को बेशकीमती संपत्तियों सौंपने का काम कांग्रेस के अंतिम प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने वर्ष 2013 में किया। यही वजह है कि आज वक्फ बोर्डों के पास 9 लाख एकड से भी ज्यादा भूमि है तथा एक लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा की संपत्तियां है। इसे मोदी सरकार की लाचारी ही कहा जाएगा कि मौजूदा संशोधन में भी वक्फ की संपत्तियां सरकार के अधीन लाने का कोई कानून नहीं बनाया जा रहा है। संशोधन के माध्यम से सिर्फ वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन और वक्फ बोर्डों के कामकाज में पारदर्शिता लाई जाएगी। संपत्तियों से जो इनकम होगी उसे भी मुसलमानो ंपर ही खर्च किया जाएगा। लेकिन इसके बावजूद भी वक्फ बोर्डों पर काबिज मुस्लिम नेता कह रहे है कि एक्ट में संशोधन के बाद मस्जिदें और धार्मिक स्थल छीन लिए जाएंगे। जबकि मस्जिदों का वक्फ की संपत्तियों से कोई सरोकार नहीं है। वक्फ की संपत्तियां उन मुसलमानों की है जो पाकिस्तान चले गए। जबकि मस्जिदे तो विभाजन के बाद भी यथावत है।
दीवान की ओर से समर्थन:
अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह के दीवान की ओ रसे उनके पुत्र (उत्तराधिकारी) तथा ऑल इंडिया सज्जादानशीन कौंसिल के अध्यक्ष सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने वक्फ एक्ट संशोधन का समर्थन किया है। चिश्ती ने कहा कि देश के कुछ मुस्लिम नेता झूठ बोल रहे है कि संशोधन के बाद मस्जिदें और धार्मिक स्थल छीन लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने जब संशोधन प्रस्ताव बनाए तब उनकी भी राय ली गई थी। संशोधन में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, जिससे वक्फ संपत्तियों पर मुसलमानों का हक कम होता हो। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में वक्फ संपत्तियों का कुछ लोग दुरुपयोग कर रहे है। यहां तक कि गलत तरीकों से वक्फ की संपत्तियों को बेचा जा रहा है। संशोधन के बाद संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा और बिना वैधानिक अनुमति के कोई संस्था वक्फ संपत्तियों को नहीं बेच सकेगी। चिश्ती ने कहा कि नया कानून बनने से वक्फ संपत्तियां सुरक्षित हो जाएगी। संपत्तियों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग होगा और जो इनकम होगी, उसे गरीब मुसलमानों परखच्र किया जा सकेगा। मौजूदा समय में वक्फ संपत्तियों से मामूली इनकम हो रही है जसके हिसाब किताब में पारदर्शिता भी नहीं है। वहीं दरगाह के खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सरवर चिश्ती ने एक्ट में संशोधन का विरोध किया है। उन्होंनक हा कि सरकार की मंशा वक्फ संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने की है।
S.P.MITTAL BLOGGER (01-04-2025)
Website- www.spmittal.in
Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog
Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11
Blog- spmittal.blogspot.com
To Add in WhatsApp Group- 9166157932
To Contact- 9829071511
Subscribe to:
Posts (Atom)