Wednesday, 5 August 2026

जाति भी ओछी, जनम भी ओछा, ओछा कर्म हमारा। हम रैदास राम राई को, कह रैदास बिचारा।

मन चंगा तो कठौती में गंगा।
गुरु ग्रंथ साहिब में भी 41 वाणियों के शब्द।

संत रविदास जी का यह विचार आम लोगों तक पहुंचना जरूरी।

भाजपा की तरह कांग्रेस भी पहल कर सकती है।
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संत कवि रविदास जी 650 वीं जयंती पर भाजपा पूरे देश में श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान चला रही है। इसी के अंतर्गत 5 अगस्त को जयपुर में आयोजित एक समारोह में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने 245 रज कलश रथ को हरी झंडी दिखाई। ये रथ प्रदेश के सभी 25 लोकसभा क्षेत्रों में संत कवि रविदास के विचारों का प्रचार-प्रसार करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में होने वाले पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनावों के मद्देनजर रज कलश रथ को घुमाया जा रहा है। कांग्रेस का अपना तर्क हो सकता है कि लेकिन मौजूदा समय में समाज में जो जातिवाद हावी है,उसका मुकाबला संत कवि रविदास के विचारों से ही किया जा सकता है। 650 वर्ष पहले समाज को जो वातावरण था उसी में चर्मकार रविदास जी ने लिखा, जाति भी ओछी, जनम भी ओछा, ओछा करम हारा। हम रैदास राम राई को, कह रैदास बिचारा। यानी हमारी जाति, जनम और कर्म छोटा है, लेकिन हम तो राजाराम के अनुचर है। अर्थात् जो राम काज में रत भक्त है, उसका कर्म, जन्म और जाति कमतर कैसे हो सकता है। उस समय रैदास जैसा संत कवि ही लिख सकता था, मन चंगा तो कठौती में गंगा। यानी मन पवित्र है तो घर पर गंगा स्नान का पुण्य मिलता सकता है। चूंकि रविदास चर्मकार थे, इसलिए उनके पास चमड़ा भिगोने का का छोटा बर्तन होता था। इस बात को ही कठौती कहा गया है। संत रविदास जी ने अपनी रचनाएं 1489 से 1471 ईवी के बीच लिखी। यह वह दौर था, जब भारत पर लोदी वंश के शासक राज कर रहे थे, इस से पहले हिंदू समाज पर कासिम, गजनवी, गौरी, खिलजी, गुलाम वंश, तुगलक, तैमूर के अत्याचार हो चुके थे। यह वही दौर था जब तलवार की नोंक पर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। तब संपूर्ण हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए संत रविदास जी ने रचनाएं लिखी। रविदास जी की रचनाएं यह बताती है कि हिंदू समाज को आज 650 वर्ष बाद भी एकजुट करने की जरूरत है। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि रविदास जी द्वारा लिखित 41 वाणियोंं को सिख समुदाय के गुरु ग्रंथ साहिब में शब्द के रूप में शामिल किया गया है। इससे भी रविदास के विचारों की मानता का अंदाजा लगाया जा सकता है। रविदास जी के  विचारों को रथ के जरिए भले ही भाजपा ने पहुंचाने का काम किया हो, लेकिन यह काम कांग्रेस भी कर सकती है। भाजपा ने रथ रवाना किए हैं उनमें एक कलश भी रखा हुआ है। इस कलश में वाराणसी के क्षीर, गोवर्धन पुर की रज (मिट्टी) भी भरी हुई है। चूंकि गोवर्धन पुर ही संत रविदास जी की कर्मस्थली रहा, इसलिए अब मिट्टी को पवित्र मानकर उनके विचारों को आगे बढ़ाया जा रहा है। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-08-2026)

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