Wednesday, 1 July 2026

रिश्ते सुधारने के लिए भारत और पाकिस्तान की 117 हस्तियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखे। लेकिन पहलगाम में जब 26 हिंदू पर्यटकों को धर्म पूछकर मौत के घाट उतार दिया जाता है, जब इन हस्तियों का मुंह बंद क्यों हो जाता है? सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस जैसी संस्थाओं से सावधान रहने की जरुरत। ============== भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने के लिए दोनों देशों की 117 हस्तियों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखे हैं। पत्र में दोनों प्रधानमंत्रियों से आग्रह किया गया है कि दोनों देश सीमाओं से आपस में जुड़े हुए है, इसलिए दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध होने चाहिए। पत्र में राजनीतिक संबंधों के साथ साथ कारोबार संबंधों को भी सुधारने पर जोर दिया गया है। यह पत्र सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस नाम की संस्था की पहल पर लिखा गया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सुधरने चाहिए, लेकिन सवाल उठता है, जब 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में बैसरन घाटी में धर्म पूछकर 26 हिंदू पर्यटकें को मौत के घाट उतार दिया जाता है और हत्यारे मुस्लिम आतंकी पाकिस्तान में शरण ले लेते हैं, तब इन हस्तियों का मुंह बंद क्यों हो जाता है? तब यह हस्तियां पाकिस्तान और आतंकियों की आलोचना क्यों नहीं करते? इतना ही नहीं जब पहलगाम के आतंकियों को भारत की सेना ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान में घुसकर मारती है, तब इन्हीं हस्तियों को पाकिस्तान बेचारा नजर आता है। ऐसी हस्तियां ही भारतीय सेना से ऑपरेशन सिंदूर के सबूत मांगती है। ऐसी हस्तियां धर्मनिरपेक्षता का चोला ओढ़कर सांप्रदायिक सौहार्द की दुहाई भी देती है। धर्मनिरपेक्षता के एक तरफा चेहरे की वजह से ही भारत को काफी नुकसान हो चुका है। धर्म निरपेक्षता तभी सफल होती है, जब दूसरा पक्ष भी सौहार्द दिखाए। पहलगाम में 26 हिंदुओं की हत्या करने और फिर धर्मनिरपेक्षता वादियों के चुप रहने से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते कभी नहीं सुधर सकते हैं। सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस नाम की संस्था ने भारत में जिन हस्तियों के हस्ताक्षर करवाए हैं, उनमें जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के साथ साथ राजद के सांसद मनोज झा के भी हस्ताक्षर है। ऐसी हस्तियां तो शुरू से ही पाकिस्तान की समर्थक रही है। देखा जाए तो फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की वजह से ही कश्मीर घाटी से चार लाख हिंदुओं को पलायन करना पड़ा। आज भी ये कश्मीरी हिंदू अपने ही देश में शरणार्थी बन कर रह रहे हैं ,भारत की सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस जैसी संस्थाओं से भी सावधान रहने की जरूरत है। असल में जब तक पाकिस्तान में कट्टरपंथी संगठनों पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक भारत के साथ रिश्ते नहीं सुधर सकते। पाकिस्तान में बैठे कट्टरपंथी नेता ही आज भी भारत में आतंकी गतिविधियां करवा रहे हैं। अब तो नशीले पदार्थ भिजवा कर युवा पीढ़ी को खराब किया जा रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
श्री गंगानगर में दुष्कर्म के अड्डे बनी तीन होटलों को मिट्टी में मिलाया। ऐसी कार्यवाही राजस्थान भर में होनी चाहिए। ============== एक जुलाई को राजस्थान के श्रीगंगानगर में होटल जॉय इन, होटल ड्रीम और होटल सफायर पर जेसीबी चलाकर मिट्टी में मिला दिया गया।आरोप है कि होटलें दुष्कर्म के अड्डे बनी हुई थी। हाल ही में एक मामला एक नाबालिग का सामने आया। इन होटलों के संचालकों ने नाबालिग को अपने होटल में रखा और फिर कई युवकों से गैंग रेप करवाया। एक जुलाई को प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाते हुए इन होटलों पर जो कार्यवाही की उसकी अब सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। राजस्थान में संभवत: अब यह पहला अवसर होगा, जब दुष्कर्म के आरोप के मद्देनजर एक साथ तीन होटलों पर जेसीबी चलाई गई। स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी कार्यवाही से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सहमति ली होगी। श्रीगंगानगर में होटलों पर जो कार्यवाही हुई वैसी कार्यवाही राजस्थान भर में होना चाहिए। असल में राजस्थान के शहरों में अनेक होटलों में महिलाओं के साथ दुष्कर्म होते हैं। कई बार तो क्षेत्रीय नागरिक भी शिकायत करते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जाती। अनेक बार बलात्कार की शिकार युवती होटल का नाम भी बताती है, लेकिन फिर भी कार्यवाही नहीं होती। श्रीगंगानगर के प्रशासन ने तीन होटलों पर जेसीबी चलाकर सराहनीय काम किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चाहिए कि श्रीगंगानगर जैसी कार्यवाही राजस्थान भर में करवाई जाए। तभी होटल संचालकों में भय होगा। बलात्कार की घटना के बाद कोई होटल संचालक अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है। जिस होटल में दुष्कर्म हुआ, उसके लिए होटल का मालिक भी जिम्मेदार है। कई बार देखा गया है कि मोटे किराये के लालच में संदिग्ध व्यक्तिों को होटल का कमरा दे दिया जाता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
राजस्थान में कार्मिकों को सेवानिवृत्ति पर नहीं मिल रही राशि। चिकित्सा विभाग में तो पांच माह तक का विलंब। ============== सरकार का नियम तो यही है कि राज्य कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के साथ ही भविष्य निधि (ईपीएफ), ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण आदि की राशि मिल जाए। ताकि सेवानिवृत्ति के बाद संबंधित कार्मिक अपने भविष्य की योजना बना सके,लेकिन इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि राजस्थान में राज्य कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के साथ पीएफ, ग्रेच्युटी आदि का भुगतान नहीं हो रहा है। इसके लिए कार्मिकों को सेवानिवृत्ति के बाद चार-पांच माह तक का इंतजार करना पड़ रहा है। चिकित्सा विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को तो पांच माह का इंतजार है। जिन कर्मचारियों ने 30 से लेकर 36 वर्ष तक अपनी सेवाएं दी, उन्हें अपने ही पैसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इनमें सरकार के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। सेवानिवृत्ति के समय कर्मियों को भुगतान होने के संबंध में कहा जा रहा है कि सरकार के खजाने में पैसा नहीं है। सरकार के पास जब पैसों का जुगाड़ हो जाता है, तब सेवानिवृत्त कर्मियों को बकाया राशि का भुगतान किया जाता है। खजाने में पैसा नहीं होने के कारण ही कर्मियों को पांच-पांच माह इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे अनेक कार्मिक हैं जिन्होंने सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली राशि को लेकर योजना बनाई, लेकिन राशि नहीं मिलने के कारण ऐसी योजना सफल नहीं हो पा रही। कार्मिकों का कहना है कि ऐसी सरकार को काम से कमस सेवानिवृत्ति के एक माह के अंदर अंदर बकाया राशि का भुगतान करना चाहिए। बकाया राशि का भुगतान नहीं होने से कर्मियों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की छवि भी खराब हो रही है7 मुख्यमंत्री शर्मा स्वयं शिकायत विवरण सेंटर पर जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं। लेकिन कर्मियों की सेवानिवृत्ति के समय भुगतान न होने पर मुख्यमंत्री शर्मा भी चुप हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511