Tuesday, 25 August 2026

अनिल मित्तल को कांग्रेस में शामिल कर रघु शर्मा ने केकड़ी में अपनी जीत की नींव रखी। भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ और उत्साह को देखते हुए देवनानी भावुक हुए। शेखावत ने वार्ड पार्षद के पद के दावेदारों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया। अजमेर के वार्ड 4 में हेमा गहलोत का मुकाबला मोनिका जैन से। ================= अजमेर जिले के उपखंड केकड़ी नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अनिल मित्तल ने 25 अगस्त को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। मित्तल के कांग्रेस में आने के साथ ही पूर्व कैबिनेट मंत्री रघु शर्मा ने केकड़ी में अपनी जीत की नींव रख ली। रघु गत बार 7 हजार मतों से विधानसभा चुनाव हारे थे, लेकिन अब 2 वर्ष बाद होने वाले चुनाव की तैयारी रघु ने अभी से ही कर ली है। 25 अगस्त को जब रघु शर्मा की उपस्थिति में अनिल मित्तल ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की तो रघु ने कहा,मित्तल का प्रभाव शहरी क्षेत्र में ही नहीं बल्कि केकड़ी के ग्रामीण क्षेत्रों में भी है। मित्तल सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े हैं। इसलिए संपूर्ण केकड़ी क्षेत्र में प्रभाव है। उन्होंने माना कि मित्तल के साथ राजनीतिक मतभेद रहे, लेकिन मित्तल ने कभी भी मुझ पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की। रघु ने कहा कि जब अनिल मित्तल जैसे नेता का भाजपा में सम्मान नहीं है, तो भाजपा के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। रघु ने कहा कि मित्तल के कांग्रेस में शामिल होने से केकड़ी क्षेत्र के चारों शहरी निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस मजबूत होगी। मित्तल के शामिल होने के बाद केकड़ी नगर पालिका में कांग्रेस का बोर्ड बनकर रहेगा। अभी भी कांग्रेस का ही बोर्ड है। गत विधानसभा के चुनाव में भी केकड़ी शहर से कांग्रेस की ीत हुई थी। कांग्रेस में शामिल होने पर मित्तल ने रघु शर्मा का आभार जताया। उन्होंने कहा कि रघु शर्मा के विधायक रहते हुए ही गत कांग्रेस के शासन में केकड़ी को जिला बनाया गया था। केकड़ी में कलेक्टर और एसपी बैठने भी लगे थे। जिला बनने पर केकड़ी का विकास तेजी से हो रहा था। तत्कालीन जिला कलेक्टर श्वेता चौहान ने औद्योगिक क्षेत्र को स्वीकृत भी दे दी थी, लेकिन भाजपा के शासन में केकड़ी के जिले के दर्जे को समाप्त कर दिया गया। इससे केकड़ी में निराशा का माहौल है। मित्तल ने भाजपा के विधायक शत्रुघ्न गौतम का नाम लिए बगैर कहा कि मेरे लिए अब भाजपा में काम करना मुश्किल हो रहा था। अब मैं रघु शर्मा को पुनः विधायक बनवाने के लिए मेहनत करुंगा। रघु शर्मा के नेतृत्व में ही केकड़ी के साथ साथ सरवाड़, सावर और टांटोटी नगर पालिका में कांग्रेस के बोर्ड बनाए जाएंगे। रघु शर्मा जब विधायक बनेंगे तो केकड़ी को फिर से जिले का दर्जा मिल जाएगा। मित्तल के कांग्रेस में शामिल होने के समारोह में केकड़ी कांग्रेस के सभी बड़े नेता शामिल रहे। हेमंत जैन,समरवीर सिंह, शैलेंद्र सिंह शेखावत, श्यामलाल बैरवा, कमल साहू, सीमा चौधरी, कन्हैयालाल माली, हाजी साहब के साथ साथ रघु शर्मा के पुत्र सागर शर्मा ने भी मित्तल का माला पहनाकर स्वागत किया। समारोह में बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता मौजूद रहे। देवनानी भावुक हुए: अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों के लिए 11 सितंबर को मतदान होना है। अजमेर उत्तर क्षेत्र के 38 वार्डों में भाजपा के दावेदारों का एक सम्मेलन 25 अगस्त को विजय लक्ष्मी पार्क में हुआ। इसमें क्षेत्रीय भाजपा विधायक और विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भी उपस्थित रहे। देवनानी ने कहा कि इस समय में संवैधानिक पद पर हूं और मेरी अपनी सीमाएं हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं की भीड़ और उत्साह को देखते हुए मैं स्वयं को रोक नहीं पा रहा। भरे हुए गले से देवनानी ने कहा कि मेरे कार्यकर्ताओं की वजह से ही मैं गत पांच बार से इस क्षेत्र से चुनाव जीत रहा हं। विपरीत परिस्थितियों में भी इन्हीं कार्यकर्ताओं ने मुझे जितवाया। मैं क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं का ऋणी हूं। देवनानी ने कहा कि एक वार्ड से अनेक दावेदार हैं, जिन्हें टिकट न मिले वे निराश न हो। आने वाले दिनों में अधिकांश कार्यकर्ताओं को निगम में मनोनीत पार्षद और अन्य सरकारी संस्थाओं में सदस्य के तौर पर नियुक्ति मिलेगी। मैं स्वयं एक एक कार्यकर्ता की मेहनत को देख रहा हूं। देवनानी ने कहा कि भाजपा की ओर से तीसरी आंख भी लगी हुई है, जो हर कार्यकर्ता की गतिविधि पर निगरानी कर रहे हैं। देवनानी ने माना कि इन दिनों भाजपा के कुछ नेता पार्टी विरोधी काम कर रहे हे। पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का नाम लिए बगैर देवनानी ने कहा, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति है। किसी भी भ्रष्टाचारी को बक्शा नहीं जाएगा। मालूम हो कि धर्मेन्द्र गहलोत के मेयर के कार्यकाल में 13 कमर्शियल नक्शों के भ्रष्टाचार के प्रकरण में राज्य सरकार ने गत 18 अगस्त को अभियोजन की स्वीकृति दी है। गहलोत ने सरकार के इस कदम के लिए देवनानी को जिम्मेदार ठहराते हुए भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। कहा जा रहा है कि अब राजनीतिक दृष्टि से देवनानी को मात देने के लिए धर्मेन्द्र गहलोत चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों को खड़ा करेंगे। गहलोत ने कहा भी है कि उनका भाजपा से कोई विवाद नहीं है, लेकिन वे देवनानी को सबक जरूर सिखाएंगे। अनुशासन का पाठ: 25 अगस्त को ही अजमेर दक्षिण क्षेत्र के भाजपा के दावेदारों का एक समारोह मनुहार गार्डन में हुआ। भाजपा विधायक अनिता भदेल ने कहा, हमें फिर से नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनवाना है। वहीं दावेदारों को भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र सिंह शेखावत ने अनुशासन का पाठ पढ़ाया। शेखावत ने कहा कि दक्षिण क्षेत्र के 42 वार्डों में पार्षद पद का टिकट मांगने के लिए लंबी कतार है। पार्टी की ओर से एक ही व्यक्ति को टिकट मिलेगा। जिन्हें टिकट न मिले, वे पार्टी के अनुशासन में रहकर अधिकृत उम्मीदवार को जितवाने का काम करे। शेखावत ने कार्यकर्ताओं से हाथ खड़े करवा कर संकल्प कराया कि पार्टी जिसे उम्मीदवार बनाएगी, उसे जितवाएंगे। शेखावत ने पूछा कि कोई दावेदार बगावत तो नहीं करेगा। मालूम हो कि शेखावत ने पूर्व में मेयर पद का चुनाव कांग्रेस के समर्थन से लड़ा था। इस बार नगर निगम के मेयर का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए है। शेखावत का प्रयास है कि उनकी पत्नी को मेय बनवाया जाए। हेमा का मुकाबला मोनिका से: अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में से सबसे दिलचस्प मुकाबला उत्तर क्षेत्र में आने वाले वार्ड संख्या 4 में होगा। इसी वार्ड के मतदाता क्षेत्रीय भाजपा विधायक और विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भी है। यानी यह वार्ड देवनानी का है। प्रशासन द्वारा निकाली गई लॉटरी में यह वार्ड ओबीसी वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हुआ है। यही वजह है कि भाजपा के बागी पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने अपनी पत्नी हेमा गहलोत को इस वार्ड से चुनाव लड़ने की योजना बनाई है। इसके लिए गहलोत ने वार्ड में आने वाली महावीर कॉलोनी, रामनगर संत कंवरराम कॉलोनी आदि में जनसंपर्क भी शुरू कर दिया है। वही भाजपा ने इस वार्ड से सामाजिक कार्यकर्ता दीपक जैन की पत्नी मोनिका जैन को उम्मीदवार बनाने की रणनीति बना ली है। देवनानी की उपस्थिति में ही 25 अगस्त को दीपक जैन और उनकी पत्नी मोनिका को भाजपा की सदस्यता ग्रहण करवाई गई। जैन दम्पत्ति ने कहा कि देवनानी जो निर्देश देंगे उसका पालन किया जाएगा। मालूम हो कि मोनिका ने गत बार कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर इसी वार्ड से चुनाव लड़ा था। तब इस वार्ड से भाजपा के रमेश सोनी की जीत हुई थी। मोनिका ओबीसी वर्ग में इसलिए वे ओबीसी वर्ग की महिला के लिए आरक्षित इस वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए पात्र है। महावीर कॉलोनी में अधिकांश परिवार जैन धर्म को मानने वाले है। दीपक जैन का जैन समुदाय में खास प्रभाव है। वही संत कंवरराम कॉलोनी में सभी परिवार सिंधी समुदाय के है, जो देवनानी को ही अपना नेता मानते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 26-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
इधर कश्मीरी पंडितों के 28 वर्ष पुराने वंधामा नरसंहार की जांच दोबारा से, उधर आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों की हत्या की फिर धमकी दी। लेकिन अब आतंकियों को यह समझना चाहिए कि जम्मू कश्मीर का माहौल 90 के दशक वाला नहीं है। ================= जम्मू कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने 1998 के बहुचर्चित वंधामा नरसंहार की जांच फिर से करने का फैसला किया है। 90 के दशक में जब जम्मू कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था, तब 25 जनवरी 1998 में गांदरबल जिले के वंधामा गांव में कश्मीरी पंडितों के घरों में घुसकर आतंकियों ने एक ही रात में 23 लोगों की हत्या कर दी थी। ऐसी घटनाओं की वजह से ही चार लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को जम्मू कश्मीर छोड़ना पड़ा। इधर जांच एजेंसियों ने वंधामा नरसंहार की जांच फिर से शुरू करने की घोषणा की तो उधर पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (यूएलसी) ने कुछ कश्मीरी पंडितों के नाम और पते जारी कर हत्या की धमकी दी है। आतंकियों ने कहा कि कश्मीरी पंडितों की हर गतिविधियों पर हमारी नजर है। यानी आतंकी चाहते है कि जम्मू कश्मीर खासकर कश्मीर घाटी में एक भी हिन्दू न रहे, लेकिन यूएलसी जैसे आतंकी संगठनों को अब यह समझना चाहिए कि जम्मू कश्मीर में 90 के दशक वाला माहौल नहीं है। उस समय कश्मीरी पंडितों की हत्या करना आतंकियों के लिए आसान था। एक तरफ से पूरा कश्मीर आतंकियों के कब्जे में था। तब कश्मीर में कट्टरपंथियों का ही दबदबा था, लेकिन अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कश्मीर का माहौल बदल गया है। सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन ऑल आउट चलाकर आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया है। अब कश्मीर में 90 के दशक वाली घटनाएं नहीं हो पाती। जिस कश्मीर में वर्ष भर कर्फ्यू जैसे हालात रहते थे, वहां अब बाजारों में भीड़ नजर आ रही है। पर्यटन भी तेजी से बढ़ा है। राजधानी श्रीनगर के लाल चौक पर शान से तिरंगा भी लहरा रहा है। कश्मीरियों के भी यह समझ में आ गया है कि शांति रहेगी तो पर्यटन के माध्यम से रोजगार मिलता रहेगा। इसके साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जिस तरह कश्मीरी मुसलमानों को कुचला जा रहा है उससे भी हमारे कश्मीरियों ने सबक लिया है। आम कश्मीरी यह मानता है कि भारत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों से कश्मीर में न केवल विकास हुआ बल्कि आम कश्मीरी को शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, रोजगार आदि की सुविधा भी मिली है। अब आतंकियों को कश्मीर में पहले जैसा संरक्षण नहीं मिलता है। उल्टे अब कश्मीरी नागरिक ही आतंकियों की गतिविधियों की जानकारी सुरक्षा बलों को देते हैं। यही वजह है कि आतंकी गतिविधियों पर नियंत्रण हुआ है। यदि यूएलसी के आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया तो उन्हें सुरक्षा बलों के हथियारों के अंजाम भी भुगतने होंगे। सुरक्षा बलों का ऑल आउट ऑपरेशन अभी भी जारी है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
पत्नी यदि सास-ससुर की सेवा न करे और बिना बताए पीहर चली जाए तो यह उसका अधिकार है। पत्नी से ससुराल में सेवा की अपेक्षा क्यों की जाती है? पति के माता-पिता की सेवा का दायित्व बहु का नहीं, पुत्र-पुत्री का है। कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल। ================= कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश चिलकुर सुमालया का एक आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल माना जा रहा है। न्यायाधीश सुमालया के समक्ष एक युवक ने याचिका दायर की कि वह अपनी पत्नी को भरण पोषण की राशि नहीं दे सकता क्योंकि उसकी पत्नी उसके माता पिता की सेवा नहीं करती और बिना बताए पीहर चली जाती है। चूंकि पत्नी ससुराल में अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रही है, इसलिए उसे अलग होने का भरण पोषण राशि का अधिकार नहीं है। इस याचिका पर न्यायाधीश सुमाया ने कहा कि पत्नी से ससुराल में यह अपेक्षा क्यों की जाती है कि वह सास-ससुर की सेवा करें? पत्नी को अपने पीहर जाने के लिए पति या ससुराल के किसी अन्य सदस्य से अनुमति लेने की जरूरत भी नहीं है। पत्नी जब चाहे तब अपने पीहर जा सकती है। जस्टिस सुमायला ने कहा कि माता पिता की सेवा का दायित्व पुत्र-पुत्री का है। सेवा के लिए बहु से अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाह के बाद ससुराल में आने वाली युवती को अपने निर्णय लेने का स्वतंत्र अधिकार है। पत्नी का यह मतलब नहीं है कि वह किसी के नियंत्रण में काम करे। न्यायाधीश सुमालया ने अपने आदेश में पीहर में रह रही पत्नी को भरण पोषण की राशि देने का आदेश भी दिया। न्यायाधीश सुमालया का आदेश अपनी जगह है। हो सकता है कि उन्होंने महिला की स्वतंत्रता के अधिकारों को देखते हुए आदेश दिया हो, लेकिन कोर्ट का यह आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल हैै। भले ही कोई कानून न माने लेकिन जो भारतीय परिवार व्यवस्था है उसमें ससुराल में सास-ससुर ही माता पिता की भूमिका में होते हैं। यह सही है कि एक युवती 20-15 वर्ष अपने माता पिता के साथ रहने के बाद दूसरे परिवार में बहुत की भूमिका में आ जाती है, इसलिए उसे भी ससुराल में मान सम्मान मिलना ही चाहिए। वैसे भी अब परिवारों की सोच में बदलाव हो रहा है। पीहर जाने के लिए कोई बहुत वाकई अनुमति नहीं लेती है। सास-ससुर को तो सिर्फ यह बताया जाता है कि बहु कितने दिन के लिए पीहर जा रही है। इसके साथ ही अधिकांश सास ससुर या तो अपने बैअे और बहुत से अलग रह रहे हैं या फिर सेवा की अपेक्षा नहीं रखते। हर सास-ससुर यही चाहता है कि उसका बेटा और बहुत स्वतंत्रता के साथ आराम से रहे। कोई भी सास-ससुर अपनी बहुत से सेवा की अपेक्षा नहीं रखता। जब बेटे में ही सेवाभाव नहीं है तो फिर बहुत से अपेक्षा कैसे की जा सकती है। जस्टिस सुमालया माने या नहीं, लेकिन अब परिवार व्यवस्था में भी बहुत बदलाव आ गया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
विधायक शत्रुघ्न गौतम से तंग आकर केकड़ी के पूर्व पालिका अध्यक्ष अनिल मित्तल ने भाजपा छोड़ी। अब कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर पार्षद का चुनाव लड़ेंगे। ================= अजमेर जिले में अभी अजमेर नगर निगम के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का भाजपा से इस्तीफा देने का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि निकाय चुनाव के शोर के बीच जिले के सबसे बड़े उपखंड केकड़ी के नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अनिल मित्तल ने भी 25 अगस्त को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। 24 अगस्त को जब मित्तल के इस्तीफे की भनक लगी तो देहात जिला अध्यक्ष जीतमल प्रजापत और अन्य नेता मित्तल से मिलने पहुंचे। तब मित्तल ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में क्षेत्रीय भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम ने किस प्रकार का व्यवहार उनके साथ किया। वे गत 36 वर्षों से भाजपा में सक्रिय हैं। लेकिन ढाई वर्षो से विधायक गौतम ने भाजपा छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। मित्तल की नाराजगी को दूर करने के लिए चुनाव में संभाग प्रभारी और राज्य वित्तीय आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने भी फोन पर बात की। लेकिन भाजपा के नेता मित्तल की नाराजगी को दूर नहीं कर सके। मित्तल अब कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर पार्षद का चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस में शामिल होने के लिए मित्तल की वार्ता केकड़ी के पूर्व विधायक और मंत्री रहे रघु शर्मा से हो गई है। मित्तल ने अपने इस्तीफे में बताया है कि उनकी राजनीति में शुरुआत विद्यार्थी परिषद से हुई थी। 1995 में वे विद्यार्थी परिषद के उम्मीदवार के तौर पर ही राजकीय महाविद्यालय के अध्यक्ष भी बने। बाद में युवा मोर्चे से लेकर भाजपा संगठन तक में विभिन्न पदों पर रहे। वर्ष 2015 से 2020 तक मित्तल केकड़ी नगर पालिका के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने हमेशा भाजपा में समर्पण भाव से काम किया। मित्तल ने अपने इस्तीफे में भाजपा का आभार जताते हुए आगे भाजपा के साथ काम करने में असमर्थता जताई। केकड़ी की राजनीति में बदलाव: मित्तल के भाजपा छोड़ने के बाद ही केकड़ी की राजनीति में बड़ा बदलाव हो गया। अब तक मित्तल केकड़ी में भाजपा के प्रमुख स्तंभ थे। लेकिन अब वे कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि केकड़ी में मित्तल का मान सम्मान है। अग्रवालों की चौरासी गांवों की संस्था के अध्यक्ष भी मौजूदा समय में मित्तल ही है। चूंकि मित्तल ने जैन धर्म स्वीकार कर रखा है, इसलिए जैन समाज में भी मित्तल की प्रतिष्ठा है। विधायक शत्रुघ्न गौतम भले ही न माने लेकिन मित्तल के भाजपा छोड़ने का असर नगर पालिका के चुनाव परिणाम पर पड़ेगा। मित्तल के भाजपा छोड़ने और कांग्रेस में शामिल होने से कांग्रेसियों में उत्साह है। पूर्व विधायक रघु शर्मा ने भी मित्तल का कांग्रेस में स्वागत किया है। इस्तीफे के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9928021482 पर अनिल मित्तल से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
नगरीय चुनाव में शपथ पत्र की शर्त से उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने की आशंका। जब बताए अनुसार बकाया राशि जमा करवाई जा रही है तो शपथ पत्र क्यों? निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह को ध्यान देने की जरुरत। ================= राजस्थान में शहरी निकायों के 10 हजार 245 वार्डों के पार्षद पद के चुनाव के लिए 27 अगस्त से नामांकन शुरू हो रहा है। यही वजह है कि इन दिनों नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम के दफ्तरों में एनओसी लेने के लिए भीड़ लगी हुई है। निकाय के अधिकारी जो राशि बकाया बता रहे है उसे चुनाव लडऩे के इच्छुक व्यक्ति हाथों हाथ जमा करवा रहे हैं। यह राशि 300 वर्ग गज से अधिक भूखंड पर लगने वाले शुल्क की है। अधिकारियों द्वारा बताई गई बकाया राशि का भुगतान कर दिए जाने के बाद भी शहरी निकायों में पार्षद पद के दावेदारों से एक शपथ पत्र लिया जा रहा है। इस शपथ पत्र में एक शर्त यह भी है कि अब उस पर किसी भी प्रकार की बकाया राशि नहीं है। सवाल उठता है कि जब बकाया राशि जमा करवा दी गई है तो शपथ पत्र क्यों लिया जा रहा है? क्या निकायों के अधिकारियों को अपने रिकॉर्ड पर भरोसा नहीं है? यदि कोई राशि बकाया है तो फिर एनओसी क्यों दी जा रही है? एनओसी देने का मतलब यही है कि संबंधित व्यक्ति पर कोई राशि बकाया नहीं है। यदि राशि बकाया है और फिर भी एनओसी दी जा रही है तो यह त्रुटि निकायों के अधिकारियों की है। अब जब बकाया राशि जमा कराने के बाद भी शपथ पत्र लिया जा रहा है तो यह आशंका हो रही है कि किसी भी उम्मीदवार का नामांकन रद्द किया जा सकता है। यदि निकाय के अधिकारी किन्हीं कारणों से बकाया राशि नहीं बताते और एनओसी जारी कर देते हैं और जांच में अब बकाया राशि का पता चलता है तो निर्वाचन अधिकारी नामांकन को रद्द कर देगा। यानी निकाय अधिकारियों की गलती का खामियाजा उम्मीदवार को भुगतना होगा। इस मामले में राज्य के निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह को ध्यान देने की जरूरत है। यदि बेवजह कोई शपथ लिया जा रहा है तो उस पर निर्वाचन आयुक्त को न्यायपूर्ण कार्यवाही करनी चाहिए। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
तो फिर राहुल गांधी यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध क्यों कर रहे हैं। ============== लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 22 अगस्त को पुणे में छात्रों की गूंज अपने कार्यक्रम में छात्राओं पर विशेष फोकस किया। उन्होंने अपने इस अभियान को बंदिशों का पिंजड़ा तोड़ों नाम दिया। और आरोप लगाया कि मनुस्मृति में महिला को बचपन से ही दबाने का काम किया गया है। महिला की पहचान बेटी, पत्नी और मां तक ही सीमित रखी है। राहुल गांधी ने कहा कि जब देश में महिलाओं की संख्या 70 करोड़ है तो उनके अधिकारों को दबाया नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने महिलाओं के अधिकारों की बात कर सराहनीय काम किया है। उम्मीद है कि राहुल गांधी की नजर में भारत में रहने वाली सभी धर्मों की महिलाएं शामिल होंगे आज देश के विभिन्न राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया जा रहा है। 22 अगस्त को राहुल गांधी ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर जितनी भी समस्या रखी, उन सब का समाधान यूनिफॉर्म सिविल कोड में है। जिन राज्यों में यूसीसी लागू हो चुका है, वहां जाकर राहुल गांधी को महिलाओं के अधिकारों का अध्ययन करना चाहिए। यूसीसी इसलिए लागू किया जा रहा है। ताकि महिलाओं को भी समान रूप से अधिकार मिल सके। जिन राज्यों में यूसीसी लागू हो गया है, वहां कानून विवाह और तलाक के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देगा। वसीयत, विरासत, पैतृक सम्पत्ति के मामलों में बेटियों (विवाहित और अविवाहित दोनों) गर्भस्थ शिशुओं को भी बेटों के समान उत्तराधिकार प्राप्त होगा। विभिन्न धर्मों के जटिल और बिखरे हुए पर्सनल लॉ की जगह विधेयक से सरल और सुलभ और एकीकृत कानून व्यवस्था लागू हो सकेगी। जाति और धर्म के आधार पर नागरिक अधिकारों में भेदभाव समाप्त होने से समारोह में समरसता और देश की अखंडता मजबूत होगी। विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 और महिला के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 24-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
समाज की जाजम पर भाजपा-कांग्रेस जाट नेता और अधिकारी एक साथ। अजमेर में जाट समुदाय के तीन आईएएस, 140 आरएएस, 30 खिलाडिय़ों सहित 200 प्रतिभाओं का सम्मान। ============== 23 अगस्त को अजमेर के जवाहर रंगमंच पर आदर्श जाट महासभा की ओर से प्रदेशस्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह हुआ। इस समारोह में 3 आईएएस, 140 आरएएस, 30 खिलाडिय़ों, 10 समाजसेवियों सहित 200 प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। इस सम्मान समारोह की खासीयत यह रही कि भाजपा और कांग्रेस के नेता एक साथ मंच पर नजर आए। अतिथि के तौर पर केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, किशनगढ़ के विधायक विकास चौधरी, अजमेर डेयरी के रामचंदर चौधरी आदि भी उपस्थित रहे। यानी समाज की जाजम पर कांग्रेस और भाजपा के नेता एक साथ नजर आए। सभी नेताओं ने अपने समाज की मेहनत पर गर्व करते हुए कहा कि ऐसे समारोह से युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। समारोह में प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा ने अपने बेटे और पुत्रवधू के आरएएस में सिलेक्शन के विवाद पर भी स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे और पुत्रवधू का चयन किसी सिफारिश से नहीं बल्कि योग्यता से हुआ है। लोगों ने बेवजह राजनीतिक कारणों से दुष्प्रचार किया। समारोह में वरिष्ठ आईएएस आरुषि मलिक का भी सम्मान किया गया। पूर्व आरएएस जस्सा राम ने कहा, आज तेजाजी को किसी अन्य समाज का बताया जा रहा है ऐसी भ्रांतियां दूर होनी चाहिए। इसके लिए अजमेर के सुरसुरा स्थित तेजाजी धाम पर शोध होना चाहिए। समारोह में महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुबेसिंह चौधरी ने कहा, अथक प्रयास के बाद इतना बड़ा सम्मान समारोह आयोजित किया गया है। ऐसे सम्मान समारोह से समाज के युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि हमारे युवा अब खेत पर ही अपनी योग्यता नहीं दिखा रहे बल्कि राजनीति और प्रशासनिक क्षेत्रों में योग्यता प्रदर्शित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी ऐसे सम्मान समारोह महासभा की ओर से आयोजित किए जाएंगे। सुबेसिंह ने केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डोटासरा का विशेष तौर से आभार प्रकट किया। S.P.MITTAL BLOGGER ( 24-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
भाजपा विधायक अनिता भदेल का मातृशक्ति फेस्ट और कांग्रेस नेता रामचंद्र चौधरी का सरस महाकुंभ में शक्ति प्रदर्शन । भदेल के शक्ति प्रदर्शन में दीया कुमार तो चौधरी के डोटासरा ने भगा लिया। अजमेर में डोटासरा ने गमछा नहीं हिलाया। ============== 23 अगस्त को अजमेर में ब्यावर रोड स्थित डीएवी कॉलेज के खेल मैदान में मातृ शक्ति मानसून फेस्ट तथा कच्छावा समारोह स्थल पर सरस महाकुंभ का आयोजन हुआ। मातृशक्ति फेस्ट अजमेर दक्षिण की भाजपा विधायक अनिता भदेल और सरस महाकुंभ कांग्रेस के नेता रामचंद्र चौधरी की ओर से आयोजित किया गया। हालांकि इन दोनों कार्यक्रमों में राजनीति से कोई सरोकार नहीं था, लेकिन दोनों नेताओं ने कार्यक्रमों में शक्ति प्रदर्शन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भदेल पिछले अनेक वर्षों से मानसून के दौरान मानसून फेस्ट का आयोजन करती है तो वही अजमेर डेयरी के अध्यक्ष होने के नाते चौधरी पशुपालकों के प्रोग्राम करते रहते हैं। 23 अगस्त को भदेल के कार्यक्रम में महिलाओं के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। फैशन शो, चरी नृत्य, शृंगार आदि के कार्यक्रमों में महिलाओं ने बढ़चढ़कर भाग लिया। महिलाओं ने स्वादिष्ट खाद्य सामग्री का लुत्फ उठाया। महिलाओं से जुड़े इस कार्यक्रम का आकर्षण तब और बढ़ गया जब जयपुर के पूर्व राजघराने की प्रमुख सदस्य और राज्य की डिप्टी सीएम दीया कुमार ने महिलाओं के साथ झूले का लुत्फ उठाया और सभी स्टॉलों का अवलोकन किया। दीया कुमारी ने भदेल के साथ आसमान में रंगीन गुब्बारे और सफेद कबूतर भी छोड़े। समारोह में भाजपा महिला मोर्चे की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़, विधायक कल्पना देवी, सांसद मंजू शर्मा, पारूल नैयर, पूजा अग्रवाल आदि ने भाग लिया। भदेल का यह शक्ति प्रदर्शन नगर निगम के चुनाव के शोर के बीच बहुत मायने रखता है। चूंकि इन दिनों भाजपा में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए महिलाओं में कुछ ज्यादा ही उत्साह देखा गया। दक्षिण क्षेत्र में नगर निगम के 80 में से 42 वार्ड आते हैं। भदेल इस आरक्षित सीट से गत पांच बार से लगातार चुनाव जीत रही हैं। चौधरी का भी शक्ति प्रदर्शन: सरस महाकुंभ के बहाने 23 अगस्त को अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने भी शक्ति प्रदर्शन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चूंकि चौधरी भी गत 30 वर्षों से डेयरी के अध्यक्ष है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में चौधरी की खासी पकड़ है। चौधरी के शक्ति प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाग लिया। डोटासरा ने कहा कि डेयरी अध्यक्ष चौधरी पूरे अजमेर जिले में सर्वाधिक लोकप्रिय नेता है और वे हमेशा पशुपालकों और किसानों के लिए संघर्ष करते है। इस अवसर पर चौधरी ने कहा कि राजस्थान में सरस डेयरी को नुकसान पहुंचाने के लिए गुजरात की अमूल डेयरी को लाया जा रहा है। अमृत डेयरी के आने से राजस्थान की सरस डेयरी के सहकारिता आंदोलन को नुकसान होगा। चौधरी ने डोटासरा के समक्ष पशुपालकों की समस्याओं को भी रखा। गमछा नहीं हिलाया: सरस महाकुंभ में जब राजस्थानी गाना सुपर डुपर बजा तो उम्मीद जताई गई कि प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा गमछा हिलाकर मंच पर डांस करेंगे। डोटासरा के भाव को देखते हुए किशनगढ़ के कांग्रेस विधायक डॉ. विकास चौधरी ने डोटासरा को सफेद रंग वाला गमछा देे का प्रयास किया, लेकिन डोटासरा ने गमछा लेने से मना कर दिया। अलबत्ता डोटासरा ने तालियां बजाकर लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। S.P.MITTAL BLOGGER ( 24-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
जेन-जी बनने से पहले छात्र अपने माता-पिता की अपेक्षाओं पर खरा उतरे-एसपी मित्तल। आज जो सोचेंगे वो हो जाएगा-आर.एस. चोयल। अजमेर के इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रभावी रहा स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम। ============== 22 अगस्त को अजमेर के इंजीनियरिंग कॉलेज में स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम का समापन समारोह हुआ। कॉलेज के प्राचार्य आरके मोटवानी ने बताया कि सरकार की नई शिक्षा नीति के अंतर्गत कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले नए छात्रों के लिए इस प्रोग्राम को अनिवार्य किया गया है। सरकार के निर्देशों के अनुरूप ही इंजीनियरिंग कॉलेज में 6 दिवसीय स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम किया गया। इसके अंतर्गत प्रोग्राम की कॉर्डिनेटर श्रीमती सरोज लखावत के मार्गदर्शन में कॉलेज के पुरान छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम, पर्यावरण, खेलकूद आदि के कार्यक्रम रखे। इन सभी में नए छात्रों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। कॉलेज में 2500 स्टूडेंट है और प्रतिवर्ष करीब 500 स्टूडेंट प्रथम वर्ष में प्रवेश लेते हैं। इस प्रोग्राम से नए छात्रों को पुरानों के साथ मेलजोल करने का अवसर मिलता है। समापन समारोह में अतिथि के तौर पर संपादक ब्लॉग एसपी मित्तल ने इस 6 दिवसीय प्रोग्राम की सराहना करते हुए कहा कि मौजूदा समय में शिक्षा को लेकर जो जागरूकता बढ़ी है उसमें हर विद्यार्थी अच्छे अंकों के साथ डिग्री प्राप्त कर ही लेगा, लेकिन डिग्री लेने के साथ विद्यार्थी को संस्कारवान नागरिक भी बनना है। छात्रों को जेन-जी बनने से पहले अपने माता-पिता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। 12वीं कक्षा की पढ़ाई के बाद अधिकांश विद्यार्थी कॉलेज में प्रवेश लेते हैं। जब कॉलेज में प्रवेश लिया जाता है, तब माता-पिता नहीं चाहता कि कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद उनका बच्चा किसी धरना प्रदर्शन में भाग ले। हर माता पिता चाहता है कि उनका बच्चा कॉलेज में शांतिपूर्ण और बगैर किसी तनाव के शिक्षा ग्रहण करे। स्कूल के बाद कॉलेज में बच्चों को बदला हुआ माहौल मिलता है। ऐसे में हर बच्चे को अपने माता-पिता और घर परिवार के सम्मान का ध्यान रखना चाहिए। माता-पिता अनेक मुसीबतों के साथ बच्चों को कॉलेज में प्रवेश दिलाते हैं। वह बच्चा अपने परिवार के हालातों के बारे में भी जानता है। यदि बच्चा कॉलेज से डिग्री लेकर संस्कारवान बनता है तो सबसे ज्यादा खुशी माता पिता को ही होती है। मित्तल ने कहा कि कॉलेज में शिक्षक भी माता पिता की भूमिका में ही होते हैं। इसलिए हर छात्र को शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए। जो सोचोगे वो होगा: समारोह में जाने माने मोटिवेटर और प्रमुख उद्योगपति आर.एस. चोयल ने कहा कि व्यक्ति जो सोचता है वो ही होता है। स्कूली शिक्षा से निकलकर उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाले बच्चों की सोचने की प्रवृत्ति अलग ही होती है। मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि आज बच्चा जो सोचेगा वहीं भविष्य में हो जाएगा। किसी भी छात्र को निराश और हताश होने की जरुरत नहीं है। कभी भी अंक प्राप्त करने की होड़ नहीं करनी चाहिए। चोयल ने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि वे कॉमर्स के स्टूडेंट रहे, लेकिन उन्होंने अपने पिता के अनाज पीसने की चक्की बनाने वाली कारोबार को आगे बढ़ाया। उन्होंने किसी भी कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं ली, लेकिन आज उनकी फैक्ट्री में निर्मित चक्कियों (मशीनों) का निर्यात विदेशों में हो रहा है। उन्होंने अपने पिता के अनुभवों से सीख लेकर ऐसी चक्की का निर्माण जिसकी मांग आज दुनिया भर में है। उन्होंने कहा कि मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं ताकि कम अंक प्राप्त करने वाले स्टूडेंट प्रोत्साहित हो सके। उन्होंने कहा कि डिग्री लेने के बाद नौकरी की तलाश करने के बजाए नौकरी देने वाला बनने की सोच रखनी चाहिए। यदि मैं स्वयं को कॉमर्स का ज्ञाता ही मानता तो इतना सफल उद्योगपति नहीं बनता। मेरे इंजीनियरिंग के ज्ञान का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यूरोप के देशों के इंजीनियर अजमेर आकर हमारी फैक्ट्री की तकनीक देखना चाहते हैं। समारोह में प्रोग्राम की कॉर्डिनेटर सरोज लखावत ने 6 दिवसीय कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। S.P.MITTAL BLOGGER ( 24-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
राजस्थान की स्कूलों में जाने के बजाए कॉकरोच पार्टी के कार्यकर्ता भास्कर अखबार की खबरों पर विरोध जता सकते हैं। आखिर अखबार भी तो शांतिपूर्ण तरीके से स्कूलों की खामियां उजागर कर रहा है। ============== 21 अगस्त को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के नेतृत्व में कुछ कार्यकर्ता राजस्थान के बगरू के रामपुरा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय की दुर्दशा की जांच के लिए पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं को स्कूल से दूर ही रोक दिया और कहा कि स्कूल की दुर्दशा का मामला हमारे गांव का है,इसलिए हम बाहरी व्यक्तियों को दखल नहीं देने देंगे। लेकिन जब कार्यकर्ता जबरन घुसने लगे तो फिर ग्रामीणों ने बलपूर्वक कार्यकर्ताओं को खदेड़ दिया। इस पिटाई के बाद कॉकरोच पार्टी के नेता गुस्से में है। राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को धमकी दी गई है यदि मारपीट करने वाले लोगों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा। इसके साथ ही पार्टी ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे की भी मांग की है। कॉकरोच पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की पिटाई का मामला मीडिया की हेडलाइन बना हुआ है, लेकिन सवाल उठता है कि क्या कॉकरोच पार्टी के कार्यकर्ताओं को गांवों की स्कूलों में जबरन घुसने की जरूरत है? 21 अगस्त को पार्टी के नेता बगरू में जिस तामझाम के साथ आए उससे जाहिर था कि उनका उद्देश्य सरकारी स्कूलों की खामियों को उजागर करने के बजाए राजनीति करना था। जहां तक सरकारी स्कूलों की दुर्दशा को उजागर करने का मामला है तो प्रदेश के समाचार पत्र आए दिन फोटो सहित खबरें प्रकाशित कर रहे है। 22 अगस्त को भी भास्कर अखबार ने जिस पृष्ठ पर बगरू की घटना की खबर प्रकाशित की, उसी पृष्ठ पर तीन सरकारी स्कूलों की फोटो और दुर्दशा की खबर छापी है। इस खबर में बताया गया है कि कोटा जिले की दांडियाखेड़ा स्कूल के 80 छात्र एक कमरे में पढ़ने को मजबूर है। कोटड़ा पुरा स्कूल के छात्र तो टीनशेड में पढ़ाई कर रहे है। उदपुरा स्कूल के छात्र तो मंदिर परिसर में पढ़ने को मजबूर है। कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को यदि सरकारी स्कूलों की दुर्दशा को लेकर विरोध जताया है तो भास्कर और अन्य अखबारों की खबरों को आधार बनाया जा सकता है। भास्कर अखबार भी तो शांतिपूर्ण तरीके से सरकारी स्कूलों की दुर्दशा उजागर कर रहा है। सवाल यह भी है कि जब एक अखबार शांतिपूर्ण तरीके से सरकार की खामियां उजागर कर सकता है तो फिर कॉकरोच पार्टी के नेता ऐसा क्यों नहीं कर सकते? लेकिन कॉकरोच पार्टी का उद्देश्य स्कूलों की खामियां उजागर करना नहीं बल्कि राजनीति करना है। कॉकरोच पार्टी यह राजनीति तब कर रही है, जब राजस्थान में इन दिनों शहरी निकायों और पंचायती राज के चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

Monday, 24 August 2026

वर्ष 2013 में जिन राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के अध्यादेश की प्रतियों को सरेआम फाड़ डाला था, उन्हीं राहुल गांधी को अब एक एफआईआर दर्ज करवाने के लिए 7 घंटे धरने पर बैठना पड़ा। दिल्ली में 20 जुलाई की हिंसा और अराजकता की जांच के लिए हाई पावर्ड कमेटी काम कर रही है। क्या राहुल गांधी स्वयं को सुप्रीम कोर्ट और देश के संविधान से ऊपर समझते हैं? ============== इतिहास गवाह है कि 25 सितंबर 2013 को कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन केंद्र सरकार के उस अध्यादेश की प्रतियों को फाड़ डाला था जो दागी और सजायाफ्ता राजनेताओं को राहत पहुंचाने से संबंधित था। उस समय केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की गठबंधन की सरकार चल रही थी। राहुल गांधी द्वारा अध्यादेश की प्रतियों को फाड़ने के बाद केंद्र सरकार को अपना अध्यादेश वापस लेना पड़ा। इससे स समय राहुल गांधी की राजनीतिक ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। तब प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की भी इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे राहुल गांधी के इस कृत्य पर नाराजगी प्रकट करते। केंद्र सरकार को सरेआम अपमानित करने के बाद भी पूरी गठबंधन की सरकार चुप रही। लेकिन 13 वर्ष बाद 21 अगस्त को 2026 को उन्हीं राहुल गांधी को एक एफआईआर दर्ज करवाने के लिए सात घंटे तक दिल्ली में संसद भवन, पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठना पड़ा। इसे अब राहुल गांधी की राजनीतिक ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह समय का फेर ही है कि अब राहुल गांधी के लिए एक एफआईआर दर्ज करवाना भी आसान नहीं है। क्या संविधान से ऊपर है राहुल?: 21 अगस्त को राहुल गांधी के 7 घंटे के धरने के बाद पुलिस ने गत 20 जुलाई को जंतर मंतर की हिंसा में घायल हुए युवक सहित लोहचब की ओर से अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करी। साहिल का आरोप है कि पुलिस ने जो पेलेटगन चलाई उसकी वजह से वह जख्मी हुआ। हालांकि इस एफआईआर को दर्ज करने से पहले दिल्ली पुलिस के बड़े अधिकारियों ने राहुल गांधी को बताया कि कानूनन एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती है क्योंकि 20 जुलाई की हिंसा और अराजकता की जांच के लिए पहले ही सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज आर.सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय हाई पवार्ड कमेटी बन गई है। इस कमेटी का सदस्य हाईकोर्ट के पूर्व जज रविशंकर झा व शैलिन्द्र सिंह के साथ सााि सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ता व मेघालय के पूर्व डीजीपी एल.आर.विश्नोई को कमेटी का सदस्य बनाया गया है। यह कमेटी पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है। राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत का बयान भी बताया गया, जिसमें सूर्यकांत ने कहा, में स्वयं 20 जुलाई के घटना की जांच पर नजर रखे हुए हैं। यानी हाईपवार्ड कमेटी की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है, इसलिए एक युवक की अलग से एफआईआर दर्ज करना संवैधानिक दृष्टि से गलत होगा, लेकिन राहुल गांधी अपनी जिद पर अड़े रहे और कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, तब तक धरने पर बैठे रहेंगे। चूंकि राहुल गांधी लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता के संवैधानिक पद पर है, इसलिए दिल्ली पुलिस ने उच्च स्तर पर विचार विमर्श कर पीड़ित साहित की एफआईआर दर्ज कर ली। सवाल उठता है कि क्या राहुल गांधी स्वयं को सुप्रीम कोर्ट और देश के संविधान से ऊपर समझते हैं? जिस घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है, उस घटना की अलग से एक एफआईआर दर्ज करवाने के क्या मायने है? 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में जो हिंसा और अराजकता हुई, वह किसी से छिपी नहीं है। अब यह बात, उजागर हो गई है कि हिंसा में असामाजिक तत्व शामिल थे। S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
अजमेर में अब सरकारी समारोहों का संचालन कौन करेगा? वर्तिका शर्मा ने स्कूल प्राचार्य के पद से पांच वर्ष पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। ============== अजमेर जिले के पीसांगन ब्लॉक के भगवानपुरा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाचार्य वर्तिका शर्मा गत 18 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गई। हालांकि वर्तिका की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष शेष थे। लेकिन पारिवारिक कारणों की वजह से वर्तिका ने पांच वर्ष पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। वर्तिका की सेवानिवृत्ति के साथ ही सवाल उठता है कि अब अजमेर के सरकारी समारोह में संचालन का काम कौन करेगा? राजकीय सेवा में रहते हुए वर्तिका ही अधिकांश सरकारी समारोह का संचालन करती थी। चूंकि वर्तिका हिंदी और अंग्रेजी भाषा की ज्ञाता है, इसलिए दोनों ही भाषाओं में प्रभावी संचालन करती थी। प्रभावशाली आवाज के कारण वर्तिका की मांग हमेशा बनी रही। किसी भी समारोह में आवाज से ही पता चल जाता था कि मंच का संचालन वर्तिका शर्मा कर रही है। मौजूदा जिला कलेक्टर लोकबंधु भी वर्तिका की कार्यशैली और योग्यता के प्रशंसक है, जिले भर के अधिकारियों ने सेवानिवृत्ति पर वर्तिको शुभकामनाएं दी। अनेक सम्मान: वर्तिका को चार बार जिला स्तर एवं संभाग स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ। वर्ष 2014 में श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान तथा चुनाव संबंधी उत्कृष्ट कार्य के लिए मुख्यमंत्री द्वारा राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्ष 2017-18 में उनके कार्यकाल के दौरान स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल श्रीनगर को राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ भारत पुरस्कार प्राप्त हुआ। वर्ष 1998 से अजमेर जिले के प्रमुख प्रशासनिक आयोजनों से जुड़ी रहीं। चुनाव संबंधी कार्य में लगभग 24 वर्षों तक उद्घोषक तथा गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस एवं पुष्कर मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लगभग 22 वर्षों तक नृत्य निर्देशक के रूप में सेवाएं दीं। कोविड-19 के दौरान वे जिला स्तर के वार रूम की प्रभारी सदस्य तथा जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय के वार रूम से भी जुड़ी रहीं। सामाजिक सरोकारों में वे पिछले 18 वर्षों से आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ी हैं तथा महावीर इंटरनेशनल, पृथ्वीराज फाउंडेशन के साथ भी सक्रिय हैं और सांस्कृतिक संस्था सप्तक में महासचिव पद का दायित्व निभा रही है। उन्होंने 90 से अधिक बार रक्तदान किया और वर्ष 2013 में देहदान का संकल्प लेकर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सक्रिय, प्रतिभावान, सहयोगी और सदैव सकारात्मक रहने वाली शर्मा ने अपने कार्य और व्यवहार से सहकर्मियों एवं विद्यार्थियों के बीच विशेष स्थान बनाया। सेवाकाल के प्रारंभ में लगभग दो वर्षों तक माहेश्वरी पब्लिक स्कूल एवं मयूर स्कूल में भी सेवाएं दीं। मोबाइल नंबर 9414378951 पर वर्तिका शर्मा को सेवानिवृत्ति पर शुभकामनाएं दी जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
धर्मेन्द्र राठौड़ की सक्रियता से अजमेर में कांग्रेस मजबूत हुई। नगर निगम के चुनाव में सक्रिय भूमिका रहेगी। राठौड़ को बाहरी बताना गलत-डॉ. राजकुमार जयपाल, अध्यक्ष शहर कांग्रेस। ============== अब जब अजमेर नगर निगम के चुनाव की सरगर्मियां जोरों पर है, तब शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने कहा कि आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ की लगातार सक्रियता से अजमेर में कांग्रेस संगठन को मजबूती मिली है। यही वजह है कि नगर निगम के चुनाव की रणनीति राठौड़ के सहयोग से बनाई जा रही है। डॉ. जयपाल ने कहा कि राठौड़ को अजमेर के लिए बाहरी नेता बताना गलत है। राठौड़ पिछले अनेक वर्षों से अजमेर की राजनीति में सक्रिय हैं। आरटीडीसी का अध्यक्ष रहते हुए भी राठौड़ ने कांग्रेस शासन में विकास के अनेक कार्य करवाए। जनसमस्याओं को उठाने में भी राठौड़ लगातार सक्रिय है। मेरा प्रयास है कि कांग्रेस के सभी नेताओं को साथ लेकर अध्यक्ष की भूमिका को निभाऊ। मेरे कांग्रेस के किसी भी नेता से मतभेद नहीं है। हाल ही में जब वरिष्ठ नेता हेमंत भाटी का जन्मदिन मनाया गया तो मैं स्वयं भाटी के निवास पर गया और उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। मेरा और धर्मेन्द्र राठौड़ का प्रयास है कि इस बार नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बनवाया जाए। भाजपा के ढाई वर्ष के शासन में अजमेर के नागरिकों की नाराजगी बढ़ी है। नगर निगम का भ्रष्टाचार किसी से भी छिपा नहीं है। अब तो भाजपा की गुटबाजी भी सड़क पर आ गई है। जयपाल ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व ने जो मापदंड निर्धारित किए है उसी के अनुरूप नगर निगम के चुनाव में टिकट दिए जाएंगे। पूर्व अध्यक्ष ने किया था विरोध: अजमेर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष विजय जैन ने धर्मेन्द्र राठौड़ को बाहरी बताते हुए विरोध किया था। जैन के नेतृत्व में करीब 100 कार्यकर्ताओं ने विगत दिनों जयपुर में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात की थी। विजय जैन ने आरोप लगाया था कि राठौड़ की वजह से अजमेर में कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। मालूम हो कि राठौड़ पूर्व सीएम अशोक गहलोत के समर्थक है, जबकि विजय जैन सचिन पायलट के। S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
तो अब माता-पिता बच्चों के लिव इन रिलेशन में रहने पर ऐतराज भी नहीं कर सकते। आखिर माता-पिता की पीड़ा को कौन समझेगा? ============= दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा है कि लिव इन रिलेशन में रहने वाले बालिगों के जीवन में उनके माता-पिता, भाई-बहन और अन्य रिश्तेदार दखल नहीं दे सकते। इसके साथ ही जस्टिस बनर्जी ने याचिकाकर्ता एक जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने के आदेश भी दिए। जस्टिस बनर्जी ने कहा कि जो बालिग जोड़े आपसी सहमति और इच्छा से एक साथ रह रहे हैं, उन पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे जोड़ों को संरक्षण प्रदान किया है। यानी जो बेटी अपने दोस्त के साथ रह रही है, उस बेटी के माता-पिता ऐतराज भी नहीं कर सकते हैं। यदि ऐतराज करेंगे तो पुलिस माता-पिता को ही गिरफ्तार कर लेगी। यह सब उस सनातनी देश में हो रहा है, जहां शादी को एक पवित्र बंधन माना गया है। भारतीय संस्कृति में बालिग युवक-युवती के एक साथ रहने की कभी कल्पना नहीं की गई। शादी के बाद ही एक साथ रहने की अनुमति होती है। लेकिन अब तो बिना विवाह के लिवइन रिलेशन में रहने की आजादी मिल गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भले ही कानून के प्रावधानों के अंतर्गत आदेश दिया हो, लेकिन उन माता-पिता की पीड़ा को समझा जाना चाहिए जिनकी बालिग बेटी या बेटा लिव इन में रह रहे है। सवाल यह भी है कि क्या माता-पिता को अपनी बेटी या बेटे को समझाने का भी अधिकार नहीं रहा? जिस माता पिता ने अनेक कठिनाइयों से बेटी या बेटे को पाला यदि वह बेटी अपने दोस्त के साथ बिना विवाह के रह रही है तो उन माता-पिता की पीड़ा को भी समझा जाना चाहिए। यह माना कि भारत की सनातन संस्कृति में पश्चिम की संस्कृति का प्रभाव हो गया है, इसलिए लिव इन रिलेशन में रहने वाले जोड़ों को कानूनी संरक्षण भी मिल गया है, लेकिन इससे भारत की जो विवाह पद्धति है उस को नुकसान पहुंच रहा है। सबसे बड़ी समस्या बच्चों के जन्म की है। लिव इन रिलेशन में रहने वाले जोड़ों के विवाह अधिक उम्र में होते हैं और फिर बच्चा पैदा करने में भी विलंब किया जाता है। ऐसे में विवाहित जोड़े बच्चा पैदा करने के लायक नहीं रहते। इससे भारत का सामाजिक ताना-बाना भी खराब हो रहा है। जिस सनातन संस्कृति में परदादा, परदादी की परंपरा है, उसमें माता-पिता बनना भी कठिन होता जा हा है। जो जोड़े लिवइन में रह रहे हैं, उनकी विवाह में भी रुचि नहीं रहती। इसे अफसोस नाक ही कहा जाएगा कि माता पिता अपने गृह शहर में अकेले रह रहे हैं और बेटे बेटी किसी महानगर में अपने मित्र के साथ लिवइन रिलेशन में रह रहे है। लिवइन के बढ़ते प्रचलन के कारण ही युवा जोड़ों के विवाह के बाद तलाक भी हो रहे हैं। अदालतों में तलाक के मामलों की बाढ़ आ गई है। चिंताजनक बात यह है कि विवाह के एक माह बाद ही तलाक का आवेदन किया जा रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 21-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

 

कांग्रेस विधायकों के साथ यदि कार्यकर्ता भी घुस जाते तो राजस्थान विधानसभा का क्या होता?

अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की समझदारी से हादसा टला।

इसलिए पीएम मोदी ने दिमागी नक्सली की बात कही।
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राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 20 अगस्त को शुरू हुआ। आमतौर पर सभी विधायक अपने वाहनों से विधानसभा के परिसर में प्रवेश करते है। पोर्च में वाहन से उतरने के बाद सदन में पैदल जाते हैं। लेकिन 20 अगस्त को कांग्रेस के विधायक पैदल विधानसभा के मुख्य द्वार पर पहुंचे। विधायकों के साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता भी थे। इस भीड़ को देखते हुए विधानसभा के सुरक्षा गार्डों ने विधायकों को भी प्रवेश नहीं दिया। कांग्रेस के विधायक चाहते थे कि उनके साथ कार्यकर्ताओं को भी विधानसभा परिसर में घुसने दिया जाए। गंभीर बात तो यह थी कि विधायकों और कार्यकर्ताओं को नेतृत्व टीकाराम जूली, कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट कर रहे थे। यह तीनों नेता भी विधायक है। जब  विधायकों को कार्यकर्ताओं के साथ प्रवेश नहीं दिया गया तो सभी विधायक मुख्य द्वार के बाहर धरने पर बैठ गए। सवाल उठता है कि यदि कांग्रेस विधायकों को कार्यकर्ताओं के साथ घुसने दिया जाता तो विधानसभा परिसर का क्या हाल होता? क्या कांग्रेस के कार्यकर्ता शांत रहते? वैसे भी बिना अनुमति के कोई भी व्यक्ति परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि 20 अगस्त को अध्यक्ष देवनानी ने सूझबूझ का परिचय दिया। यदि देवनानी समझदारी नहीं दिखाते तो 20 अगस्त को विधानसभा में बड़ा हादसा हो जाता। राजस्थान के संसदीय इतिहास में यह पहला अवसर रहा, जब विपक्षी दल के विधायकों ने भीड़ के साथ विधानसभा में घुसने का प्रयास किया। असल में कांग्रेस के विधायक सदन में जाना ही नहीं चाहते थे। इसे भी अफसोसनाक कहा जाएगा कि 20 अगस्त को जब विधानसभा में दिवंगत पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि दी जा रही थी, तब विपक्ष का कोई विधायक उपस्थित नहीं था। जबकि दिवंगत पूर्व विधायकों में कांग्रेस के विधायक भी शामिल थे। यानी कांग्रेस ने अपने पूर्व विधायकों के प्रति भी संवेदना नहीं दिखाई।
 
दिमागी नक्सली:
देश के राजनीतिक हालातों को देखते हुए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भले ही देश से नक्सलवाद समाप्त हो गया है, लेकिन कुछ नेता दिमागी नक्सली हो गए हैं, इसलिए संसद में गैर जिम्मेदाराना व्यवहार किया जा रहा है। मालूम हो कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने संसद का मानसून सत्र भी नहीं चलने दिया। कांग्रेस ने जो रवैया संसद में अपनाया वही रवैया राजस्थान विधानसभा में अपना रही है। विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस लगातार हंगामा करती रहेेगी। कांग्रेस के विधायकों ने 20 अगस्त को जो कृत्य किया वह दिमागी नक्सली वाला ही था। आने वाले दिनों में भी कांग्रेस का ऐसा ही कृत्य सामने आएगा। 

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10 वर्ष अजमेर के मेयर रहने वाले धर्मेन्द्र गहलोत ने भाजपा छोड़ी।

कांग्रेस के हाथों-हाथ लपका।
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10 वर्ष तक अजमेर के मेयर रहने वाले धर्मेन्द्र गहलोत ने 20 अगस्त को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। गहलोत ने यह इस्तीफा तब दिया, जब एक दिन पहले ही भाजपा के प्रदेश नेतृत्व में उन्हें नागौर नगर परिषद का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया था। गहलोत का आरोप है कि अजमेर उत्तर के भाजपा विधायक और राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी आरोप के चलते उन्हें 18 अगस्त को स्वायत शासन विभाग ने दो प्रकरणों में नोटिस जारी किए है। एक प्रकरण मेयर रहते हुए का है। 13 नक्शों की स्वीकृति के मामले में जो नोटिस दिया गया है, उसमें कहा गया है कि क्यों न उन्हें 6 वर्ष तक नगरीय निकायों के पुनिर्वाचन के अयोग्य घोषित कर दिया जाए। गहलोत ने कहा कि जब उन्हें स्वयं को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित करने वाला नोटिस दिया जा रहा है तब वे नागौर में भाजपा के चुनाव प्रभारी की भूमिका कैसे निभा सकते है। गहलोत ने माना कि देवनानी के साथ उनके वैचारिक मतभेद है। नोटिस से नाराज गहलोत ने कहा कि वे किसी से भी डरने वाले नहीं है। वही भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी ने कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं होता। किसी के आने जाने से भाजपा पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।

कांग्रेस ने लपका:
पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का इस्तीफा ऐसे समय में हुआ, जब नगर निगम के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। गहलोत के इस्तीफे में कांग्रेस अपना लाभ देख रही है। इसलिए कांग्रेस के नेताओं को गहलोत से सहानुभूति हो गई है। कांग्रेस के जो नेता कल तक भाजपा नेता के रूप में गहलोत की आलोचना करते थे, उनके विचार अचानक बदल गए है। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने कहा कि भाजपा हमेशा डराने, धमकाने वाला काम करती है। गहलोत को भी डराने के लिए नोटिस दिलवाए गए हे। आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ ने कहा कि गहलोत का इस्तीफा बताता है कि भाजपा में आंतरिक विरोध चरम पर है। भाजपा के नेता स्वयं ही सुरक्षित नहीं है। वही शहर उपाध्यक्ष एडवोकेट विवेक पाराशर ने कहा कि अब जब धर्मेन्द्र गहलोत ने भाजपा छोड़ दी है, तब कांग्रेस गहलोत के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि गहलोत सूझबूझ वाले राजनेता है। आवश्यकता होने पर गहलोत के साथ मिलकर नगर निगम चुनाव की रणनीति भी बनाई जाएगी। पाराशर ने कहा, गहलोत राजनेता के साथ साथ वकील भी है, इसलिए वकील समुदाय भी गहलोत के साथ खड़ा है। गहलोत को जो नोटिस दिया गया है, उसमें भी सभी वकील मिलकर गहलोत को कानूनी सहायता उपलब्ध करवाएंगे। 

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 राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से किसी को भी मिलने नहीं दिया जा रहा।

प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली के इस कथन में कितनी सच्चाई है?
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राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली का आरोप है कि इन दिनों भाजपा में जबरदस्त रोष है। मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और संजय शर्मा अपनी ही सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने तो अलवर की जिला कलेक्टर श्रीमती अर्तिका शुक्ला पर लूट कर खाने का आरोप लगाया है। दोनों मंत्रियों के बयानों से प्रतीत होता है कि सरकार में भी असंतोष है। जूली ने कहा कि पूर्व सीएम और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे से भी किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा है। जूली का कहना है कि राजे के जयपुर के सिविल लाइन स्थित सरकारी आवास पर कड़ा पहरा है। सवाल उठता है कि जूली ने वसुंधरा राजे को लेकर जो बयान दिया है, उसमें कितनी सच्चाई है? क्या वाकई पूर्व सीएम को किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है? चौबीस घंटे गुजर जाने के बाद भी वसुंधरा राजे की ओर से जूली के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस से अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है। मालूम हो कि हाल ही में राजे को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। राजे लंबे समय से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर आसीन हे। लेकिन उन्होंने कभी भी भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रियता नहीं दिखाई माना जा रहा है कि वसुंधरा राजे अपनी भूमिका से संतुष्ट नहीं है। हालांकि अभी तक राजे ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर नहीं की है। अब प्रतिपक्ष के नेता जूली के बयान से राजे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। देखना होगा कि जूली के बयान पर वसुंधरा राजे क्या प्रतिक्रिया देती हैं। 


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 जिन शहरी निकायों में 11 सितंबर को मतदान होगा, उनके उम्मीदवारों को प्रचार के लिए दो दिन अधिक मिलेंगे।

निर्वाचन आयोग हाईकोई की अवमानना के दायरे में नहीं।

पंचायतीराज में आरक्षण की लॉटरी नहीं निकालने वाला सवाल राजस्थान सरकार से पूछा जाए-राजेश्वर सिंह आयुक्त।
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राजस्थान में शहरी निकायों की 309 संस्थाओं के चुनाव 9 व 11 सितंबर को होंगे। राज्य के निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने 19 अगस्त को चुनाव की जो घोषणा की उसके अनुसार दो चरणों में होने वाले मतदान के नामांकन की प्रक्रिया 27 अगस्त से शुरू हो जाएगी। यानी वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार 27 अगस्त से नामांकन शुरू कर देंगे। प्रदेश में भले ही दो चरणों में चुनाव हो रहे हो, लेकिन नामांकन की प्रक्रिया को एक समान रखा गया है। ऐसे में जिन निकायों में 11 सितंबर को मतदान होगा उनके उम्मीदवारों को प्रचार के लिए दो दिन अधिक मिलेंगे। जबकि जिन निकायों में 9 सितंबर को मतदान होगा उनके उम्मीदवारों को प्रचार के लिए दो दिन कम मिलेंगे। आमतौर पर मतदान से दो दिन पहले चुनावी सभाओं जैसा प्रचार बंद हो जाता है। निर्वाचन आयोग के अनुसार पहले चरण के मतदान में पांच हजार 550 और दूसरे चरण के मतदान में 4 हजार 695 पार्षद चुने जाएंगे। कुल 10 हजार 245 पार्षदों का निर्वाचन होना है। 14 सितंबर को परिणाम आने के बाद निकाय प्रमुखों के पद के लिए नामांकन 15 और 16 सितंबर को होगा तथा 21 सिंतबर को मतदान और उसी दिन परिणाम घोषित होगा।

आयोग अवमानना के दायरे में नहीं:
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने माना कि हाईकोर्ट ने 15 अगस्त तक शहरी निकाय और पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण की लॉटरी निकालने के आदेश दिए थे। लेकिन राज्य सरकार ने सिर्फ शहरी निकायों की लॉटरी ही निकाली है, इसलिए आयोग ने शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। आयुक्त ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण की लॉटरी क्यों नहीं निकाली यह सवाल राज्य सरकार से पूछा जाना चाहिए, क्योंकि लॉटरी निकालने का काम राज्य सरकार का है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लॉटरी नहीं निकलने पर हाई कोर्ट की अवमानना के दायरे में निर्वाचन आयोग नहीं आता है। आयोग तो चुनावों की घोषणा तभी कर सकता है, जब आरक्षण की रिपोर्ट आयोग को दी जाए। बगैर आरक्षण के आयोग चुनावों की घोषणा नहीं कर सकता। मालूम हो कि राज्य सरकार ने पंचायती राज चुनाव में आरक्षण की लॉटरी निकालने के लिए 17 अगस्त की तारीख निर्धारित की थी, लेकिन एक दिन पहले इस से एक माह के लिए टाल दिया गया। सरकार का कहना है कि अब 17 सितंबर को लॉटरी निकाल कर आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। सवाल उठता है कि हाईकोर्ट ने शहरी निकायों और पंचायती राज चुनाव के लिए 15 अगस्त तक आरक्षण का निर्धारण करने का आदेश दिया था, तब सरकार ने कोर्ट के आदेशों की पालना क्यों नहीं की। कहा जा रहा है कि अब हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की जाएगी। संभावित याचिका को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयुक्त ने पहले ही सरकार पर जिम्मेदारी डाल दी है।

 
आचार संहिता पर असमंजस:
निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि आचार संहिता उन्हीं क्षेत्रों में प्रभावी होगी, जहां शहरी निकायों के चुनाव होने हैं। यानी ग्राम पंचायतों वाले क्षेत्रों में आचार संहिता लागू नहीं है। यही वजह है कि आचार संहिता के क्षेत्र को लेकर  असमंजस रहेगा। हाल ही में जो परिसीमन हुआ उसमें ग्राम पंचायतों की कुछ सीमा शहरी निकायों में शामिल हुई है, ऐसे में आचार संहिता को प्रभावी बनाना निर्वाचन विभाग के लिए भी परेशानी का सबब बनेगा। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-08-2026)

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अजमेर विकास प्राधिकरण के जिस नवनिर्मित भवन का लोकार्पण केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया उस पर ठेकेदार ने ताला लगा दिया।

बिना राजनीतिक संरक्षण के ऐसी हिमाकत नहीं हो सकती।

यह कृत्य डबल इंजन की सरकार को धमकाने वाला है।
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16 अगस्त को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के निंबाहेड़ा और अलवर से प्रदेश के 11 हजार 953 करोड़ कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास भी किए। अपने संबोधन में अमित शाह ने इन परियोजनाओं को डबल इंजन की उपलब्धि बताया। अमित शाह के साथ दोनों स्थानों पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे। केंद्रीय गृहमंत्री ने जिन योजनाओं का लोकार्पण किया उनमें अजमेर के करीब 68 करोड़ के कार्य भी शामिल रहे। लोकार्पण वाली सूची में अजमेर विकास प्राधिकरण का नवनिर्मित भवन भी है। इस भवन की लागत 25 करोड़ 98 लाख बताई जा रही है। चूंकि नए भवन का लोकार्पण 16 अगस्त को हो गया था, इसलिए उच्च स्तर पर निर्णय लिया गया कि मौजूदा पुराने भवन से नए भवन में शिफ्टिंग का काम 19 अगस्त से शुरू किया जाएगा। लेकिन 19 अगस्त को कुछ विभाग शिफ्ट होते इससे पहले ही भवन का निर्माण करने वाले ठेकेदार अरिहंत ने मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। ठेकेदार ने कहा कि उसका दो करोड़ रुपया बकाया है, जब तक बकाया भुगतान नहीं हो जाता तब तक मुख्य द्वार पर ताला लगा रहेगा। ठेकेदार का आरोप रहा कि उसने एक वर्ष पहले ही नया भवन प्राधिकरण को सौंप दिया, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं हो रहा। 19 अगस्त को जब कुछ अधिकारी जयपुर रोड स्थित नए भवन पर पहुंचे तो दोनों मुख्य द्वारों पर ताला लगा हुआ था। गंभीर बात तो यह है थी कि मौके पर सुरक्षा गार्ड भी नहीं था। ऐसी स्थिति में अधिकारियों को ताले तुड़वाने पड़े। नवनिर्मित भवन पर ठेकेदार द्वारा ताले लगाने की घटना से पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
 
राजनीतिक संरक्षण:
आमतौर पर ठेकेदारों का बकाया रहता ही है। अजमेर विकास प्राधिकरण के मामले में बताया जा रहा है कि फाइनल बिल के मात्र 2 करोड़ रुपए बकाया है। इंजीनियरों का तर्क है कि फाइनल बिल की राशि इसलिए रोकी गई है ताकि शिफ्टिंग के बाद कोई खामी हो तो उसी ठेकेदार से दूर करवाया जाए। प्राधिकरण के अधिकारी भी ठेकेदार के ताला लगाने के कृत्य को गलत माना हैं। माना जा रहा है कि ठेकेदार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, इसलिए उसने नवनिर्मित भवन पर ताला लगाने जैसी हिमाकत की है। ठेकेदार का यह कृत्य डबल इंजन की सरकार को धमकाने वाला भी है। यदि ठेकेदार ही सरकारी भवनों पर ताला लगाने लगेंगे तो फिर व्यवस्था चौपट हो जाएगी। अजमेर प्राधिकरण का मामला इसलिए भी गंभीर है कि नवनिर्मित भवन का लोकार्पण केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया था। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-08-2026)

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 जम्मू कश्मीर में रोहिंग्या और बांग्लादेशी रह सकते हैं, लेकिन हिंदू नहीं।

देशवासियों को इस मानसिकता को समझने की जरुरत।
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सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय कमेटी इन दिनों के देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में आए आबादी, असंतुलन बदलाव का अध्ययन कर रही है। यानी सीमावर्ती राज्यों में जो घुसपैठ हुई है उस पर रिपोर्ट तैयार की जा री है। प्राथमिक तौर पर जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार जम्मू कश्मीर राज्य में बड़ी संख्या में रोहिंग्या और बांग्लादेशी बस गए है। सरकारी रिकॉर्ड में इनकी संख्या करीब 10 हजार मानी गई है, जबकि हकीकत में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की संख्या बहुत ज्यादा है। चिंताजनक बात यह है कि रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की मौजूदगी पर कश्मीरी मुसलमानों और पाकिस्तान परस्त कट्टरपंथियों को कोई ऐतराज नहीं है, बल्कि इन विदेशी नागरिकों को कश्मीरी मुसलमान संरक्षण देते हैं। जानकारी के मुताबिक रोहिंग्या और बांग्लादेशी कश्मीर घाटी में इतने घुलमिल गए हैं कि अब फर्क नजर नहीं आता। इसके विपरीत कश्मीर घाटी में अभी भी हिंदुओं को खतरा बना हुआ है। कट्टरपंथियों के अत्याचारों के कारण ही 90 के दशक में चार लाख से ज्यादा हिंदुओं को कश्मीर से भागना पड़ा और अब आए दिन पाकिस्तानी आतंकी हिंदुओं को निशाना बनाते है। धर्म के आधार पर हिंदुओं की पहचान कर मौत के घाट उतार दिया जाता है। यानी जम्मू कश्मीर में रोहिंग्या और बांग्लादेशी रह सकते हैं, लेकिन हिन्दू नहीं। देशवासियों को जम्मू कश्मीर की इस मानसिकता को समझना चाहिए। आज पूरे देश में जम्मू कश्मीर के नागरिक आसानी के साथ बिना डर के रह रहे हैं। किसी भी कश्मीरी मुसलमान के साथ कोई भेदभाव नहीं होता है। सवाल उठता है कि जब कश्मीर के मुसलमान देश के किसी भी राज्य में रह सकते हैं तो हिंदू जम्मू कश्मीर में क्यों नहीं रह सकते? राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी जैसे विपक्षी नेता अकसर जम्मू कश्मीर के हालातों पर चिंता जताते हैं, लेकिन ऐसे नेता हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों  पर चुप रहते हैं। यहां तक कि जम्मू कश्मीर के मौजूदा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके पिता पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला  और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती भी रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों के साथ ही खड़ी रहती है। 


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 राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र छोटा रखने पर कांग्रेस को ऐतराज।

सवाल-तो फिर अध्यक्ष देवनानी के प्रस्ताव पर अमल क्यों नहीं होता?

गहलोत के शासन में वर्ष में 30-32 बैठकें ही होती थी।
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20 अगस्त से शुरू हो रहे राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर 18 अगस्त को राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक हुई। इस बैठक में अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सत्र के बारे में नेताओं को जानकारी दी। बैठक के बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार मानसून सत्र को मात्र चार पांच दिन ही चलाना चाहती है। सरकार की मंशा से लगता है कि सरकार विधानसभा से भाग रही  है । यदि मानसून सत्र अधिक दिनों तक चलेगा तो सदन में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि विधानसभा की बैठक ज्यादा होनी चाहिए, इसलिए अध्यक्ष बनने के बाद देवनानी ने प्रस्ताव रखा था कि जिस प्रकार संसद के तीन सत्र होते हैं, उसी प्रकार विधानसभा के भी तीन सत्र हो ताकि बैठक ज्यादा हो सके। राजस्थान में अभी एक वर्ष में दो सत्र की ही परंपरा है। एक बजट सत्र और दूसरा मानसून। देवनानी का प्रस्ताव है कि संसद की तरह शीतकालीन सत्र भी हो। कांग्रेस जब मानसून सत्र की अवधि को लेकर नाराजगी जता रही है, तब सवाल उठता है कि अध्यक्ष देवनानी के प्रस्ताव पर अमल क्यों नहीं किया जाता? क्या कांग्रेस ने कभी यह प्रयास किया कि राजस्थान में भी विधानसभा के तीन सत्र हो? जहां तक कांग्रेस शासन में विधानसभा की बैठकों का सवाल है तो अशोक गहलोत के तीन बार के कार्यकाल में एक वर्ष में 30-32 ही बैठकें हो सकी। यानी कांग्रेस शासन में भी विधानसभा की बैठकों की संख्या बढ़ाने का काम नहीं हुआ। अब जब कांग्रेस विपक्ष में है तो विधानसभा की बैठक बढ़ाने की मांग कर रही है।विधानसभा का रिकॉर्ड बताता है कि इस वर्ष बजट सत्र में 24 बैठकें हो चुकी है। यानी कांग्रेस के शासन से मात्र 8 दिन कम है। अब जब 20 अगस्त से मानसून सत्र शुरू हो रहा है तो सरकार की मंशा इसे 25 अगस्त तक ही चलाने की है। चूंकि प्रदेश में पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव हो रहे है, इसलिए विधानसभा  सत्र को छोटा रखा गया है। चूंकि 6 माह की अवधि में विधानसभा सत्र बुलाने की अनिवार्यता है, इसलिए 20 अगस्त से विधानसभा बुलाई गई है। बजट सत्र में इसी वर्ष 28 जनवरी को शुरू हुआ था। ऐसे में 6 माह की अवधि को ध्यान में रखते हुए मानसून सत्र आहूत किया गया। चूंकि चुनाव के कारण सत्र छोटा है, इसलिए नवंबर माह में एक सत्र और बुलाया जाएगा। मानसून सत्र को लेकर भाजपा ने अपना एजेंडा साफ कर दिया है। इस सत्र में सरकार की ओर से राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड और ट्रीज प्रोटेक्शन बिल प्रस्तुत किए जाएंगे। जबकि कांग्रेस ने बता दिया है कि जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा। कांग्रेस ने जिस तरह संसद के मानसून सत्र में हंगामा किया उसी प्रकार राजस्थान विधानसभा में भी कांग्रेस के विधायक हंगामा करेंगे। यानी संसद की तरह विधानसभा को भी बाधित किया जाएगा। 


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पवन अरोड़ा अब सच बेधड़क अखबार और न्यूज चैनल को चमकाएंगे।

फर्स्ट इंडिया न्यूज ग्रुप से शानदार विदाई।

राजस्थान के मीडिया क्षेत्र में बड़ा बदलाव।
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आईएएस की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद राजस्थान में मीडिया क्षेत्र में कदम रखने वाले पवन अरोड़ा अब सच बेधड़क अखबार और न्यूज चैनल को चमकाने का काम करेंगे। 18 अगस्त को अरोड़ा  ने सच बेधड़क ग्रुप के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक का पद ग्रहण कर लिया। इससे पहले अरोड़ा को फर्स्ट इंडिया न्यूज चैनल ग्रुप की ओर से शानदार विदाई दी गई। इस ग्रुप के निदेशक वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि गत तीन वर्षों में पवन अरोड़ा ने ग्रुप के सीईओ और मैनेजिंग एडिटर के पद पर रहते हुए ग्रुप को लोकप्रियता दिलवाने में काई कसर नहीं छोड़ी। वे भारी मन से पवन अरोड़ा को विदा कर रहे है, लेकिन साथ ही अरोड़ा के उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं। पवन अरोड़ा जहां भी रहेंगे, वहां उन्हें सफलता मिलेगा। अपने विदाई समारोह में अरोड़ा ने भी स्वीकार किया कि फर्स्ट इंडिया ग्रुप में उन्हें अपार स्नेह और सम्मान मिला। टीम भावना के कारण ही वे फर्स्ट इंडिया न्यूज चैनल को सर्वश्रेष्ठ बना सके। फर्स्ट इंडिया न्यूज चैनल को सर्वश्रेष्ठ बना सके। फर्स्ट इंडिया ग्रुप से विदाई के तुरंत बाद पवन अरोड़ा ने सच बेधड़क ग्रुप के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक का पद संभाल लिया। पद संभालते ही सच बेधड़क समूह से जुड़े पत्रकारों और प्रबंधन स्टाफ से अरोड़ा ने कहा कि बदलाव ही जीवन है। तीन वर्ष पहले जब उन्होंने आईएएस जैसे प्रतिष्ठित पद से स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति ली, तब यह कल्पना भी नहीं की थी कि मीडिया के क्षेत्र में इतनी सफलता मिलेगी, लेकिन उनके बड़े भाई और मीडिया क्षेत्र की प्रमुख हस्ती डॉ. जगदीश चंद्र के मार्गनिर्देशन में जो काम किया उसकी वजह से अपार सफलता मिली। अब नए समूह का चेयरमैन बनने के बाद मुझे उम्मीद है कि बड़े भाई साहब का आशीर्वाद मिलता रहेगा। पवन अरोड़ा ने कहा कि अब मीडिया के क्षेत्र में आर्टिफिशियल टेक्नोलॉजी का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इससे मीडिया कर्मियों का काम आसान हुआ है। सच बेधड़क दैनिक समाचार पत्र और न्यूज़ चैनल में भी एआई का उपयोग किया जाएगा। राजस्थान के पाठकों और दर्शकों को मीडिया के क्षेत्र में अब सच बेधड़क के माध्यम से टेक्नोलॉजी के बदलाव देखने को मिलेंगे। सच बेधड़क न्यूज चैनल जल्द ही सैटेलाइट के सभी प्लेटफार्म पर जल्द देखने को मिलेगा। इसी प्रकार अखबार भी प्रदेश के हर पाठक को उपलब्ध होगा। अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने विगत दिनों राजस्थानी भाषा का जो गणगौर न्यूज चैनल रि-लांच किया, वह भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस चैनल में भी एआई टेक्नोलॉजी का समावेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब हर पाठक और दर्शक नए अंदाज में अखबार और चैनल देखना चाहता है। हम पाठक और दर्शकों की उम्मीद पर खरा उतरेंगे। मेरा प्रयास रहेगा कि राजस्थान की जनता और सरकार के बीच सेतु बनकर काम करें। 

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Monday, 17 August 2026

 ढाई वर्ष में ही जमीन से आसमान में पहुंच गए सतीश पूनिया।

वसुंधरा राजे का मान सम्मान बरकरार रखा।

मन्नालाल रावत अब आदिवासियों के बीच भाजपा की पैठ जमाएंगे।

साफ सुथरी छवि का लाभ मिला सीए राजेश मंगल को।

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राजस्थान पर फोकस।  
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 17 अगस्त को जो कार्यकारिणी घोषित की है इसमें राजस्थान पर विशेष फोकस किया गया है। चूंकि राजस्थान में गत पांच बार से भाजपा और कांग्रेस के बीच सत्ता की अदला बदली हो रही है, इसलिए इस बार भाजपा के  राष्ट्रीय नेतृत्व का प्रयास है कि वर्ष 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ता भाजपा के पास ही रहे। यही वजह है कि राजस्थान से केंद्र सरकार में चार मंत्रियों की मौजूदगी के बाद संगठन में भी प्रदेश के नेताओं को भी महत्व दिया गया है। इसका असर इसी वर्ष होने वाले शहरी निकाय और पंचायती राज चुनाव पर भी पड़ेगा।

जमीन से आसमान पर:
राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया को महामंत्री बनाया गया है। सब जानते हैं कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे पूनिया ढाई वर्ष पहले विधानसभा का चुनाव हार गए थे। तब पूनिया जमीन पर आ गए थे। पूनिया का दर्द और बढ़ गया, जब भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में भी कोई पद नहीं मिला, लेकिन पूनिया ने धैर्य नहीं खाया और एक वर्ष बाद ही पूनिया को राजनीति में जमीन से थोड़ा उठने का मौका मिल गया। पूनिया को हरियाणा का प्रभारी बनाया और हरियाणा में भाजपा की फिर से सरकार बन गई। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की नजर में आने के बाद पूनिया को राजस्थान से राज्यसभा का सांसद बनाया गया। सांसद बनने के बाद अटकले लगाई गई कि पूनिया को केंद्र में मंत्री बनाया जाएगा। ऐसे अटकलों पर पूनिया ने स्वयं सख्ती से विराम लगाया। पूनिया को पता था कि राष्ट्रीय नेतृत्व उनका संगठन में ही उपयोग करेगा। जो पूनिया ढाई वर्ष पहले विधानसभा का चुनाव हार कर जमीन पर आ गए थे, वो ही पूनिया 17 अगस्त को भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री बनकर राजनीति  के आसमान पर पहुंच गए है। इसमें कोई दो राय नहीं कि पूनिया का भाजपा की राजनीति में दबदबा बढ़ा है। पूनिया की इस नियुक्ति से भाजपा को शहरी निकाय और पंचायती राज चुनाव में खासा फायदा होगा।

मान सम्मान बरकरार:
भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का मान सम्मान बरकरार रखा है। नई कार्यकारिणी में राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखा है। अमित शाह जब भाजपा के अध्यक्ष थे, तब से ही राजे उपाध्यक्ष है। भले ही राजे ने उपाध्यक्ष पद पर रहते हुए राष्ट्रीय राजनीति में कभी भी सक्रियता न दिखाई हो, लेकिन राजे के मान सम्मान को बरकरार रखा गया है। उपाध्यक्ष पद बरकरार रखने पर राजे ने अध्यक्ष नितिन नवीन का आभार जताया है। राजे के समर्थकों को अब इसी बात में खुश रहना होगा कि राजे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनी हुई है।

आदिवासियों में पैठ:
नई कार्यकारिणी में उदयपुर के भाजपा सांसद मन्नालाल रावत को एसटी मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। सांसद बनने से पहले रावत राजस्थान के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में सक्रिय थे। एसटी मोर्चे का अध्यक्ष बनने के बाद अब रावत पर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में भाजपा की पैठ जमाने की जिम्मेदारी आ गई है। प्रदेश में आदिवासी बाहुल्य बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ आदि क्षेत्रों में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) का खासा प्रभाव है। इस पार्टी का एक सांसद और चार विधायक है। देखना होगा कि रावत के नेतृत्व में अब प्रदेश में भाजपा का प्रभाव कैसे बढ़ता है।

साफ सुथरी छवि:
नई कार्यकारिणी में जयपुर के सीए राजेश मंगल को सह कोषाध्यक्ष बनाया गया है। कोषाध्यक्ष की जिम्मेदार केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के पास है। मंग लकी नियुक्ति के पीछे उनकी साफ सुथरी छवि है। मंगल की नियुक्ति कर भाजपा ने वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व देने का काम किया है। पूर्व में रामदास अग्रवाल भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके हैं।


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