Sunday, 5 July 2026
कम से कम साधु संतों को तो ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरि पर हमला करने से बचना चाहिए।
अखिलेश यादव पहले मंदिर जाकर भगवान राम के प्रति आस्था तो दिखाएं।
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अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे के प्रकरण में अब श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और राष्ट्रीय संत स्वामी गोविंद गिरि पर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा है कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष होने के नाते गोविंद गिरि को चढ़ावा चोरी की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गोविंद गिरि अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते है। वही अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी मंदिर के पुजारी डॉ. विदेशाचार्य महाराज ने कहा कि कोषाध्यक्ष होने के नाते गोविंद गिरी को चढ़ावा चोरी की जांच के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय से पूछताछ हो सकती है तब जांच एजेंसियां गोविंद गिरि से पूछताछ क्यों नहीं कर रही। अब तो चढ़ावा चोरी के प्रकरण में एफआईआर भी दर्ज हो गई है। मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना और फिर उसे सुरक्षित रखने की प्रमुख जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष की ही है। डॉ. विदेशाचार्य महाराज ने कहा कि इस बात का भी पता लगाया जाना चाहिए कि स्वामी गोविंद गिरी किन के पैसों से चार्टर प्लेन से भ्रमण करते हैं। उन्होंने स्वामी गोविंद गिरि की देश भर में संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि गोविंद गिरि अयोध में राम मंदिर में तभी नजर आते हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आते हैं। क्या ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष को मंदिर के चढ़ावे की निगरानी नहीं करनी चाहिए? जांच एजेंसियों ने जिस प्रकार महामंत्री चंपत राय से घंटों पूछताछ की है, उसी प्रकार गोविंद गिरि से भी की जानी चाहिए।
हमला करने से साधु संत तो बचे:
अयोध्या में मंदिर निर्माण में स्वामी गोविंद गिरि महाराज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। गोविंद गिरि महाराज के सानिध्य में ही देश के विभिन्न शहरों में वेद विद्यालय संचालित है। इनमें पुष्कर का सावित्री विद्यापीठ भी शामिल हें। स्वामी गोविंद गिरी को सनातन धर्म का प्रतीक माना जाता है। हो सकता है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के रूप में वे प्रभावी भूमिका न निभा सके हो, लेकिन कम से कम साधु संतों को तो गोविंद गिरि महाराज पर हमला करने से बचना चाहिए। खुद गोविंद गिरि ने भी कहा है कि राम मंदिर के चढ़ावे की गणना और फिर बैंकों तक नगद राशि जमा करवाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। न ही कोषाध्यक्ष के तौर पर बैंक के किसी अकाउंट पर हस्ताक्षर हें। इतना ही नहीं उनके हस्ताक्षरों से बैंक से कोई राशि भी नहीं निकाली जाती। गोविंद गिरि ने माना कि चढ़ावा चोरी के प्रकरण से वह न केवल आहत है, बल्कि लज्जित भी है।
अखिलेश पहले मंदिर जाएं:
उत्तर प्रदेश में सपा के नेता और पूर्व सीएम अखिलेश यादव बार बार कह रहे है कि राम मंदिर के चढ़ावे के चोरी होने से हिंदुओं की आस्था को क्षति पहुंची है। हिंदुओं की आस्था की दुहाई देकर अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी आरोप लगा रहे हैं। यह सही है कि चढ़ावा चोरी की खबरों से हिंदुओं की आस्था को धक्का लगा है, लेकिन सवाल उठता है कि अखिलेश यादव को हिंदुओं की आस्था की चिंता कब से हो गई? अखिलेश याव तो उन नेताओं में शामिल हैं जो अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर अभी तक भी अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन करने नहीं गए हैं। जो व्यक्ति मंदिर जाने से डरता हो वो हिंदुओं की आस्था की चिंता कर रहा है। यदि अखिलेश यादव को हिंदुओं की आस्था की इतनी ही चिंता है तो पहले अयोध्या जाकर मंदिर में दर्शन तो करने चाहिए।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-07-2026)
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