फिर भी शराब बेच रही है सरकार
सभी लोगों ने 28 नवम्बर को प्रदेश के प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में आबकारी विभाग का एक विज्ञापन पढ़ा होगा। इस विज्ञापन में सरकार ने लोगों को बताया कि मदिरा का सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त हानिकारक है तथा मदिरा पान एक सामाजिक बुराई है। मदिरा के व्यसन से पारिवारिक जीवन में तनाव रहता है एवं परिवार को आर्थिक कठिनाईयों का भी सामना करना पड़ता है, इसलिए मदिरा का सेवन सभी प्रकार से हानिकारक हे। सवाल उठता है कि जब शराब की बुराइयों के बारे में सरकार सब समझती है तो फिर इसकी बिक्री क्यों की जा रही है? भारतीय संविधान में लिखा है कि जनता के वोट से चुनी सरकार ऐसा कोई काम नहीं करेगी, जो लोगों का स्वास्थ खराब करता हो तथा सामाजिक बुराई हो। यानि सरकार मदिरा की बिक्री कर राजस्थान की सरकार स्वयं ही संविधान के खिलाफ काम कर रही है। क्या ऐसी सरकार को बर्खास्त नहीं किया जाना चाहिए? यह लोकतंत्र का मजाक ही है कि एक ओर सरकार मदिरा को सामाजिक बुराई मान रही है, तो दूसरी ओर गली कूचों में दुकानें खोल कर शराब बेची जा रही है। यहां तक की लोगों के विरोध को दर किनार कर दुकानें खोली गई हैं। राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे बताएं कि अखबारों में छपा विज्ञापन सही है या सरकार की शराब की बिक्री। विज्ञापन को पढऩे के बाद लगता है कि राजस्थान सरकार खुद ही सामाजिक बुराई को बढ़ावा देकर लोगों के घरों को तबाह कर रही है।
-(एस.पी.मित्तल) (spmittal.blogspot.in)
Friday, 28 November 2014
फिर भी शराब बेच रही है सरकार
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