Wednesday, 8 July 2026
एक ईरान है, जहां अपने दिवंगत नेता खामनेई के साथ सभी ईरानी खड़े हैं।
यही ताकत सुपुर्द-ए-खाक की रस्म के दौरान भी ईरान को अमेरिका से जंग लड़ने की ताकत देती है।
एक भारत है, जहां अपने ही लोग आराध्य देव राम के मंदिर को भी नहीं बख्श रहे।
जबकि 25 करोड़ की मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांटो तो स्वयं में भारत का डीएनए बताते हैं।
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मुस्लिम देश ईरान में अपने दिवंगत नेता अयातुल्ला खामेनेई के सुपुर्द-ए-खाक की रस्म 9 जुलाई को संपन्न हो रही है। गत चार जुलाई से शुरू हुई जनाजे की रस्म में करोड़ों ईरान भाग ले रहे हैं। इसी बीच ईरान अपने दुश्मन अमेरिका के साथ जंग भी लड़ रहा है। यानी एक ओर ईरान अमेरिका की मिसाइलों का सामना कर रहा है। तो दूसरी ओर अपने दिवंगत नेता के साथ पूरी ताकत के साथ खड़ा है। ईरानियों की यह ताकत ही उन्हें अमेरिका के साथ लड़ने की शक्ति प्रदर्शन करता है। ये खामनेई वो ही नेता है, जिनकी कट्टरपंथी नीतियों के विरोध में गत वर्ष लाखों ईरानियों ने खासकर महिलाओं ने सड़कों पर प्रदर्शन किया था। लेकिन जब अमेरिका ने हमला किया तो सारे ईरानी एकजुट हो गए। आज इसी एकता के कारण ईरान की सेना खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला कर रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही ईरान को तबाह करने की धमकी दे, लेकिन ईरान ने जता दिया है कि जो नीति दिवंगत नेता खामनेई ने निर्धारित की है, उस पर ही ईरान चलेगा। यानी ईरान अमेरिका के सामने झुकेगा नहीं। एक और दुनिया के सामने ईरानियों की एकता है, तो वहीं भारत में अपने ही लोग आराध्य देव राम के मंदिर की छवि खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। जबकि अयोध्या में जन्म स्थल वाली भूमि पर राम का मंदिर बनवाने में पांच सौ वर्ष लगे और लाखों राम भक्तों ने अपना बलिदान दिया। लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या में राम मंदिर बन पाया। लेकिन अब मंदिर के चढ़ावा चोरी की आड़ में संपूर्ण सनातन संस्कृति और भगवान राम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन लोगों को भी कटघरे में खड़ा किया जा रहा है जिन्होंने मंदिर निर्माण में अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। यह सही है कि जिन लोगों ने चढ़ावा चोरी किया उन्हें सजा मिलनी चाहिए। लेकिन चढ़ावा चोरी की आड़ में सनातन संस्कृति को बदनाम नहीं किया जा सकता। गंभीर बात तो यह है कि जिन लोगों ने मंदिर निर्माण में बाधाएं खड़ी की आज वे ही स्वयं को राम भक्त बताकर चढ़ावा चोरी के मामले में बयानबाजी कर रहे हैं। उन लोगों के बलिदान पर पानी फेरने की कोशिश की जा रही है जिन्होंने अयोध्या में मंदिर का निर्माण करवाया। अयोध्या का मंदिर कोई साधारण भवन नहीं है बल्कि यह सौ करोड़ से ज्यादा हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। जो चढ़ावा चोरी का मामला उजागर हुआ है, उसमें सभी सनातनियों को एकजुटता दिखानी चाहिए। लेकिन अपने ही लोग राजनीतिक स्वार्थों की खातिर सनातन संस्कृति को बदनाम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को ईरानियों की एकता से सबक लेना चाहिए।
भारत का डीएनए:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 और 7 जुलाई को इंडोनेशिया का दौरा किया। इंडोनेशिया में मुस्लिम आबादी 25 करोड़ है। इंडोनेशिया को मुस्लिम देश ही माना जाता है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांटो ने मोदी से मुलाकात के दौरान कहा, मुझ में भी भारत का डीएनए है। असल में भारत और इंडोनेशिया के बीच सभ्यता और संस्कृति जुड़ी हुई है। एक और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति है जो स्वयं में भारत का डीएनए बताते हैं, दूसरी ओर भारत में अपने ही लोग सनातन संस्कृति पर हमला करने से बाज नहीं आते।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 09-07-2026)
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