Thursday, 9 July 2026

कांग्रेस की तरह भाजपा के शासन में भी शिक्षकों के तबादले हो रहे हैं। यदि नेताओं की सिफारिशों से ही तबादले होने हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीति में आने की छूट दी जाए-विजय सोनी शिक्षक नेता। ================ राजस्थान में स्कूली शिक्षा के शिक्षकों के तबादले बड़ी संख्या में हुए है। ये तबादले किसी नीति के बगैर हुए है। तबादलों में भाजपा के नेताओं की सिफारिशों को प्राथमिकता दी गई है। यहां तक कि भाजपा के जयपुर स्थित मुख्यालय में शिक्षकों ने अपने तबादले का प्रार्थना पत्र जमा करवाया है। सरकार में बैठे मंत्रियों ने भी माना है कि हजारों शिक्षक डिजायर के लिए उनके पास आ रहे हैं। यानी शिक्षकों के तबादले जिस प्रकार कांग्रेस के शासन में होते थे, उसी प्रकार भाजपा के शासन में भी हो रहे हैं। कांग्रेस के शासन में भाजपा के नेता तबादले में राजनीतिक द्वेषता के आरोप लगाते थे। वही अब कांग्रेस के नेता राजनीतिक द्वेषता से तबादला करने के आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का तो कहना है कि संघ और भाजपा की विचारधारा वाले शिक्षकों को उनकी इच्छानुसार पोस्टिंग दी गई है। जबकि कांग्रेस विचारधारा वाले शिक्षकों का तबादला दूर कर दिया गया है। डोटासरा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ (सीकर) के तबादलों के आंकड़े भी प्रस्तुत किए हैं। राजनीति में आने की छूट मिले: राजस्थान शिक्षक संघ (राधाकृष्ण) के प्रदेश अध्यक्ष विजय सोनी ने कहा कि यदि नेताओं की सिफारिश से ही तबादले हो रहे हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीति करने की छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ओर सेवा नियमों में उल्लेख है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं लेगा, लेकिन अब जब नेताओं की सिफारिशों से ही तबादले हो रहे हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने की छूट मिलनी चाहिए। वैसे भी शिक्षक सभी प्रकार के कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को राजनीति में भाग लेने की छूट है, उसी प्रकार स्कूली शिक्षकों को भी छूट मिलनी चाहिए। विजय ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने भी बगैर कोई नीति बनाए शिक्षकों के तबादले किए और अब भाजपा के शासन में भी बगैर नीति के ही तबादले हो रहे है। एक ओर कहा जा रहा है कि तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के तबादले पर रोक है, लेकिन वही इस श्रेणी के कंप्यूटर अनुदेशकों के तबादले धड़ल्ले से किए जा रहे है। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादला न करने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इन शिक्षकों की वरिष्ठता जिला स्तर पर निर्धारित होती है। यदि एक जिले से दूर जिले में तबादला किया गया तो वरिष्ठता प्रभावित होगी, लेकिन इसके उलट वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले किए गए है। जबकि वरिष्ठ अध्यापकों की वरिष्ठता संभाग स्तर पर निर्धारित होती है। वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले एक संभाग से दूसरे संभाग में किए गए है। सोनी ने कहा कि चूंकि तबादला नीति नहीं है, इसलिए तबादलों में अनेक विसंगतियां हो रही है। विजय सोनी ने प्रदेश भर में शिक्षकों को राजनीति करने को लेकर अभियान चला रखा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी पत्र दिया गया है। मोबाइल नंबर 9829087912 पर इस अभियान की जानकारी विजय सोनी से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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