सीज की कार्यवाही, हाईकोर्ट की अवमानना:
सीज हुए प्रतिष्ठानों के वकील दिलीप शर्मा का कहना है कि एडीए की कार्यवाही हाईकोर्ट की अवमानना है। गत 23 सितंबर को एडीए के उपायुक्त भरतराज गुर्जर ने प्रार्थना प दायर कर कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि तोडफ़ोड़ की कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी। प्राधिकरण की ओर से यथास्थिति बनाए रखी जाएगी। पूर्व में जो नोटिस दिए गए उसके लिए भी प्राधिकरण की ओर से माफी मांगी गई। एडवोकेट शर्मा ने कहा कि एक और प्राधिकरण हाईकोर्ट से माफी मांग रहा है तो दूसरी ओर सुबह सुबह सीज की कार्यवाही कर रहा है। उन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर को जो ताजा नोटिस दिया गया उसको लेकर भी हाईकोर्ट में 23 अक्टूबर को सुनवाई होनी थी, लेकिन इससे पहले ही प्राधिकरण ने सीज की कार्यवाही कर दी। जबकि 22 अक्टूबर की रात को ही यूडीएच के प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया, जिला कलेक्टर लोकबंधु, एडीए की आयुक्त नित्या के तथा वकील अजय सिंह को हाईकोर्ट के स्टे आदेश वाट्सएप पर भेज दिया गया था। प्राधिकरण की इस कार्यवाही पर अब हाईकोर्ट का ध्यान आकर्षित किया जाएगा। जिन अधिकारियों ने हाईकोर्ट के स्टे के बाद सीज की कार्यवाही की है उन्हें परिणाम भुगतने होंगे। सीज की कार्यवाही राजस्व मंडल के वकील मुकेश दाधीच के भूखंड पर भी की गई है, जबकि इस भूखंड पर कोई निर्माण नहीं हो रहा है। एडीए ने खाली भूखंड के दरवाजे को सीज किया है। इस संबंध में हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829084031 पर एडवोकेट दिलीप शर्मा से ली जा सकती है।
सेवन वंडर का क्या?:
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत आनासागर के भराव क्षेत्र में ही सेवन वंडर की इमारतें भी बनाई गई है। अब इन इमारतों को देखने के लिए शुल्क लिया जाता है। प्रशासन ने शुल्क वसूली का ठेका भी दे दिया है। प्राधिकरण ने जब होटल, रेस्टोरेंट आदि को कॉमर्शियल गतिविधि मानते हुए सीज कर दिया है, तब सवाल उठता है कि सेवन वंडर की इमारतों का क्या होगा? क्या सेवन वंडर में हो रही कमर्शियल गतिविधियों को भी बंद करवाया जाएगा। मालूम हो कि सेवन वंडर की इमारतों को तोड़ने का आदेश नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देखा रखा है। एनजीटी ने इन इमारतों को नियम विरुद्ध माना है। एनजीटी के आदेश के खिलाफ अजमेर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर कर रखी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को प्रशासन को अभी तक भी कोई राहत नहीं मिली है। एनजीटी के आदेश के बाद भी इन इमारतों को नहीं तोड़ा जा रहा है।
देवनानी का दम:
एडीए ने 23 अक्टूबर को सुबह सुबह जो बड़ी कार्यवाही की है उसके पीदे अजमेर शहर के विधायक और राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का दम रहा है। देवनानी के दम पर ही दो दिन पहले नगर निगम ने कचहरी रोड पर से चालीस से भी ज्यादा दुकानों को हटाया दिया या आधा तोड़ दिया। दो दिन के अंतराल में आनासागर के भराव क्षेत्र में हुई बड़ी कार्यवाही से जाहिर होता है कि अब शहर में सुधार के कार्य होंगे। देवनानी लगातार प्रयासरत है कि पुरानी समस्याओं का समाधान हो। देवनानी लगातार अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे है। 22 अक्टूबर को भी देवनानी ने शहर का दौरा और 90 वर्ष पुराने ड्रेनेज सिस्टम को खोज निकाला। आनासागर के भराव क्षेत्र में पक्के निर्माण होने से भराव क्षमता पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। हालांकि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में बने पाथवे के निर्माण से भी आनासागर छोटा हो गया है। आमतौर पर तोडफ़ोड और सीज की बड़ी कार्यवाही करने से प्रशासन बचता है। क्योंकि कोई भी अधिकारी विवाद में पडऩा नहीं चाहता। लेकिन इन दिनों अजमेर प्रशासन के पीछे विधानसभा अध्यक्ष देवनानी खड़े हैं, इसलिए प्रशासन की ओर से निडर होकर कार्यवाही की जा रही है। यहां तक कि हाईकोर्ट के आदेशों को भी अनदेखा किया जा रहा है। अब नगर निगम और एडीए को पुलिस जाब्ता भी आसानी से उपलब्ध हो रहा है।
S.P.MITTAL BLOGGER (23-10-2024)
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