अजमेर विकास प्राधिकरण ने 23 अक्टूबर को रीजनल कॉलेज के सामने आनासागर के भराव क्षेत्र में बनी 39 दुकानों, रेस्टोरेंट होटल, समारोह स्थल आदि को सीज करने की जो बड़ी कार्यवाही की है, उसमें अब स्थानीय निकाय के निदेशालय से दुकानों को खुलवाना आसान नहीं होगा। आमतौर पर देखा गया है कि नगर निगम और एडीए जिन अवैध निर्माणों को सीज करता है उन्हें निदेशालय से खुलवाने के आदेश हासिल कर लिए जाते हैं। इसमें निदेशालय के अधिकारियों की मिलीभगत रहती है। सवाल उठता है कि जिस दुकान, बिल्ंिडग आदि को स्थानीय निकाय ने अवैध मानते हुए सीज किया है उसे निदेशालय किस आधार पर वैध कर देता है? कई बार ऐसे मामलों में एडीए और नगर निगम की मिलीभगत भी सामने आती है, लेकिन अजमेर में इन दिनों अवैध निर्माणों पर जो कार्यवाही हो रही है उन्हें निदेशालय से कोई राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि अब सीज होने वाले प्रतिष्ठानों पर अजमेर के विधायक और विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की नजर है। देवनानी के दम पर ही एडीए और नगर निगम अवैध निर्माण कर्ताओं के खिलाफ कार्यवाही कर रहा है। ऐसे में निदेशालय के अधिकारी चाहते हुए भी दुकान खोलने के आदेश नहीं दे सकते। 23 अक्टूबर को आनासागर के भराव क्षेत्र में जिन दुकानों को सीज किया गया, उसके पीछे व्यावसायिक गतिविधियों का होना था। दुकानदारों ने अपने निर्माण को न तोडऩे के लिए हाईकोर्ट से स्टे ले रखा था, लेकिन एडीए ने हाईकोर्ट के स्टे आदेश की पालना की और किसी भी दुकान में कोई तोडफ़ोड़ नहीं की। कानून के अनुसार कोई व्यक्ति व्यावसायिक गतिविधि तभी कर सकता है, जब संबंधित भूमि कमर्शियल उपयोग के लिए हो। आनासागर के भराव क्षेत्र वाली भूमि कृषि भूमि है, जिस पर कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो सकती। इस तकनीकी आधार पर ही एडीए ने सीज की कार्यवाही की है।
शराब की दुकानें भी सीज हो:
23 अक्टूबर को आनासागर के भराव क्षेत्र में जिन 39 दुकानों को सीज किया गया, उन में तीन शराब की दुकानें हैं। हालांकि शराब की दुकानें आबकारी विभाग के लाइसेंस जारी होने के बाद ही खोली गई, लेकिन एडीए का कहना रहा कि जिस भूमि पर शराब की दुकान लगाई गई है, भूमि कमर्शियल श्रेणी की नहीं है। जबकि किसी भी प्रकार का कारोबार करने के लिए कमर्शियल भूमि होनी चाहिए। अजमेर शहर में शराब की ऐसी अनेक दुकानें हैं जो कमर्शियल भूमि पर नहीं है। कई कृषि भूमि पर तो लोहे की केबिन में शराब की दुकान चल रही है। कुछ स्थानों पर तो घरवाली बिल्डिंग में ही शराब की दुकान खोल दी गई है। जबकि शराब की दुकानों का आसपास के लोग विरोध कर रहे है। आबकारी विभाग का कहना होता है कि भूमि कमर्शियल है या नहीं, इससे उनका कोई सरोकार नहीं है, लेकिन अब जब आनासागर के किनारे शराब की दुकानों को भी सीज कर दिया गया है, तब शहर भर की शराब की उन दुकानों को भी सीज किया जाना चाहिए जो कमर्शियल भूखंड पर नहीं बनी है।
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