Saturday, 11 July 2026
आलोचनाओं का स्वयं मौका देते हैं राहुल गांधी।
भारत में थोड़ी राजनीतिक गतिविधियां करने के बाद विश्राम के लिए विदेश चले जाते हैं।
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कांग्रेस के सर्वोच्च नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर विदेश दौरे पर है। आमतौर पर विदेश में राहुल गांधी की गतिविधियां सार्वजनिक नहीं होती। राहुल गांधी के बार बार विदेश दौरों को लेकर भाजपा और अन्य दलों के नेता विरोध करते हैं। असल में आलोचनाओं का अवसर राहुल गांधी स्वयं देते हैं। बार बार विदेश चले जाने से ऐसा प्रदर्शित होता है कि राहुल गांधी भारत में पार्ट टाइम राजनीति करते हैं। राहुल गांधी सिर्फ कांग्रेस के नेता ही नहीं है, बल्कि लोकसभा में पूरे विपक्ष के नेता भी है। ऐसे में राहुल गांधी की जिम्मेदारी है कि वे सरकार की नीतियों को लेकर विपक्ष के साथ आंदोलन करे। यह बताए कि मोदी सरकार की नीतियों कैसे जन विरोधी है, लेकिन राहुल गांधी बार बार जिस तरह विदेश यात्रा पर चले जाते हैं, उस विपक्षी दल भी एकजुट नहीं हो पाते। राहुल गांधी के प्रतिपक्ष का नेता होते हुए ही पश्चिम बंगाल की टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा के सांसदों ने अलग दल बना लिया। इसी प्रकार महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी दूसरी बार बड़ी बगावत हो गई। सवाल उठता है कि क्या प्रतिपक्ष के नेता के नाते विपक्ष को एकजुट रखने की जिम्मेदारी राहुल गांधी की नहीं है? पंजाब में भी जिस तरह आम आदमी पार्टी में बगावत हुई उससे राहुल गांधी के प्रतिपक्ष के नेता होने पर सवाल उठते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि राहुल गांधी भारत में थोड़ी राजनीतिक गतिविधियां करने के बाद विश्राम के लिए विदेश चले जाते हैं। भारत में 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। अच्छा होता कि राहुल गांधी प्रतिपक्ष के नेता के नाते विपक्षी दलों के साथ बैठकर सरकार के विरुद्ध कोई रणनीति बनाते, लेकिन मानसून सत्र शुरू होने से पहले राहुल गांधी विदेश चले गए। देश के युवा वर्ग को मोदी सरकार के विरुद्ध जगाने के लिए राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज अभियान शुरू किया था। कोटा के बाद राहुल को बिहार के पटना में दूसरा कार्यक्रम करना था, लेकिन राहुल गांधी का अब पटना वाला कार्यक्रम रद्द हो गया है। कहा जा रहा है कि पटना की जगह देहरादून में कार्यक्रम होगा। असल में राहुल गांधी के बार बार विदेश चले जाने के कारण कांग्रेस संगठन में भी असमंजस की स्थिति रहती है। लोकतंत्र में विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है, लेकिन इसके लिए विपक्षी नेताओं को जन आंदोलन करने पड़ेंगे। जन आंदोलन तभी सफल हो सकते हैं, जब विरोधी दल के नेता वर्षभर सक्रिय रहे। बार बार विदेश जाने से भारत में मोदी सरकार के विरुद्ध मजबूत विपक्षी दल खड़े नहीं हो सकते। राहुल गांधी को इस मामले में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से सीख लेनी चाहिए। यादव वर्ष भर अपने ही उत्तर प्रदेश में रहकर विपक्षी नेता की भूमिका निभाते हैं।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026)
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