Friday, 4 September 2026

निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर। अगले माह ही होने है पंचायतीराज के चुनाव। ================= राजस्थान के 309 शहरी निकायों के 10 हजार 245 वार्डों में अब उम्मीदवारों की स्थिति साफ हो गई है। 3 सितंबर को नाम वापसी के बाद 38891 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। 9 और 11 सितंबर को मतदान होना है। 14 सितंबर को परिणाम आएंगे। सत्तारूढ़ भाजपा ने इन चुनावों को लेकर जो रणनीति बनाई है उसके अनुसार शहरी निकाय चुनाव मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के चेहरे पर लड़े जाएंगे। यही वजह है कि संभाग मुख्यालय पर सीएम शर्मा की सभाएं करवाई जाएगी। स्टार नेता के तौर पर भाजपा के किसी भी बड़े नेता की सभाएं नहीं होंगी। जब सीएम शर्मा के चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा तब सीएम शर्मा की प्रतिष्ठा भी दांव पर होंगी। 309 शहरी निकायों के परिणाम इसलिए भी महत्व रखते हैं कि अगले माह ही पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव होने हैं। राजस्थान में वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत दोनों संस्थाओं के चुनाव कराए जा रहे हैं। देखा जाए तो सीएम शर्मा की यह भी एक बड़ी उपलब्धि है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पूर्व में कहा था कि मुख्यमंत्री के काकाजी भी एक साथ चुनाव नहीं करवा सकतै। डोटासरा के इस कटाक्ष पर सीएम शर्मा का कहना है कि अब काकाजी ही चुनाव करवा रहे हैं। शहरी निकाय के चुनाव में प्रचार के क्षेत्र में भाजपा ने बाजी मार ली है। 2 सितंबर को ही मुख्यमंत्री शर्मा ने शहरी विकास का संकल्प पत्र जारी कर दिया है। जबकि अभी कांग्रेस के संकल्प पत्र की कोई खबर नहीं है। रामसेतु लिंक परियोजना, यमुना जल एग्रीमेंट, बाड़मेर में एचपीसीएल की रिफाइनरी आदि कार्यों को सीएम शर्मा अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि मानते हैं। सीएम शर्मा का कहना है कि जो कार्य वर्षों से लंबित थे। उन्हें ढाई वर्ष के कार्यकाल में पूरा किया गया है। वादे के मुताबिक अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां युवाओं को दी गई है। इतना ही नहीं बिजली के क्षेत्र में राजस्थान आत्मनिर्भर हो गया है। प्रदेश को अब किसी दूसरे राज्य से बिजली नहीं मांगनी पड़ती। उल्टे दूसरे राज्यों को बिजली दी जा रही है। बिजली की पर्याप्त उपलब्धता के कारण किसानों को भी दिन में बिजली दी जा रही है। सीएम शर्मा को लगता है कि ढाई वर्ष में जो कार्य हुए है, उनकी बदौलत शहरी निकायों में भाजपा की जीत होगी। इन चुनावों का असर पंचायती राज के चुनावों पर भी पड़ेगा। पंचायती राज चुनाव के परिणाम के दो वर्ष बाद विधानसभा के चुनाव होंगे। राजस्थान में गत पांच बार से सत्ता में बदलाव की परंपरा है। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार को रिपीट करवाने की योजना बनाई जा रही है, जबकि कांग्रेस को उम्मीद है कि परंपरा के अनुरूप इस बार विधानसभा के चुनाव में उसे सरकार बनाने का अवसर मिलेगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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