Tuesday, 14 July 2026
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत पर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर कम से कम मर्यादित आचरण तो करें।
मीडिया के कैमरों के सामने हसंगे और ब्रेक के बाद जैसे शब्द कहेंगे तो सरकार की बदनामी तो होगी ही।
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कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा आदि जिलों के सरकारी अस्पतालों में हो रही प्रसूताओं की मौत को लेकर 13 जुलाई को जयपुर में राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में मंत्री के साथ चिकित्सा विशेषज्ञ भी बैठे और यह जताने की कोशिश की कि प्रसूताओं की मौत चिकित्सकों की लापरवाही, गलत इंजेक्शन, गलत दवा देने आदि के कारणों से नहीं हुई, बल्कि एनीमिया, हाई बीपी, पीपीएच, लीवर किडनी फेल, न्यूटीशियन की कमी जैसे कारणों से हुई है। चिकित्सा मंत्री के संरक्षण में बैठे चिकित्सा विशेषज्ञों का यह भी कहना रहा कि प्रसूताओं की मौत के मामले में दूसरे अस्पतालों से स्थानांतरित होकर आए। यानी प्राथमिक स्तर पर समुचित इलाज नहीं हुआ। खुद मंत्री खींवसर ने बताया कि वर्ष 2023-24 में मातृ मृत्यु दर प्रदेश में 1094 थी जो वर्ष 2025-26 में घटकर 824 रह गई है। इसी प्रकार प्रसूताओं की मृत्यु दर में भी कमी आई है। हो सकता है कि मंत्री और चिकित्सा विशेषज्ञों के दावे सही हो,लेकिन मीडिया के कैमरों के सामने चिकित्सा मंत्री खींवसर को कम से कम मर्यादित आचरण तो करना ही चाहिए। 13 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों के बीच ही मंत्री खड़े हो गए और हंसते हुए कहा कि बाकी सवालों के जवाब ब्रेक के बाद। मंत्री ने कहा कि वे भीलवाड़ा जा रहे है, जहां प्रसूताओं की मौत के कारणों का पता लगाएंगे। मंत्री ने हंसते हुए ब्रेक के बाद जैसे शब्द कहे उससे साफ जाहिर था कि प्रसूताओं की मौत के मामलों में भी मंत्री खींवसर संवेदनशील नहीं है। मंत्री के हंसने और ब्रेक के बाद के शब्दों से प्रेस कॉन्फ्रेंस के उन आंकड़ों पर पानी फिर गया जो चिकित्सा विशेषज्ञों ने रखे थे। मंत्री खींवसर के इस गैर जिम्मेदाराना आचरण की आलोचना अब राष्ट्रीय मीडिया में भी हो रही है। असल में गजेंद्र सिंह खींवसर चिकित्सा विभाग को लेकर कभी गंभीर नहीं रहे। उनके व्यवहार को लेकर विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक भी खुश नहीं है। जबकि चिकित्सा मंत्री तो बेहद ही गंभीर और संवेदनशील होना चाहिए, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि राजस्थान के चिकित्सा मंत्री न केवल संवेदनहीन है बल्कि अपने विभाग के प्रति वफादार भी नहीं है। जानकार सूत्रों की माने तो मंत्री खींवसर को लेकर जो शिकायतें प्राप्त हुई है उसी के आधार पर गत दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खींवसर को तलब किया था। ऐसा लगता है कि अमित शाह की हिदायतों का भी खींवसर पर कोई असर नहीं हुआ है। चूंकि चिकित्सा विभाग सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकारी अस्पतालों में होने वाली घटनाओं का असर प्रदेश की भाजपा सरकार पर पड़ता है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 14-07-2026)
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