Friday, 2 October 2026

नरेद्र मोदी की बोटी बोटी काटने की धमकी देने वाले इमरान मसूद को राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। विधानसभा चुनाव से पहले मुसलमानों का सबसे बड़ा हिमायती बनने की होड़। ================= देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा के चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मुसलमानों को सबसे बड़ा हिमायती होने की होड़ मची हुई है। इस क्रम में कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। हालांकि अध्यक्ष के तौर पर अराधना मिश्रा की नियुक्ति हुई है लेकिन मिश्रा के साथ इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। इमरान की नियुक्ति के पीछे मुसमानों के वोट हासिल करना है। ये इमरान मसूद वो ही नेता है, जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान सार्वजनिक तौर पर कहा था कि मोदी ने यदि उत्तर प्रदेश को गुजरात बनाने की कोशिश की तो उनकी बोटी बोटी काट दी जाएगी। तब इमान मसूद के इस बयान का कांग्रेस सहित सभी दलों ने विरोध किया था, लेकिन मोदी की बोटी बोटी काटने वाला बयान को ध्यान में रखते हुए ही कांग्रेस ने गत लोकसभा के चुनाव में इमरान मसूद को सहारनपुर से उम्मीदवार बनाया। चूंकि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन था, इसलिए इमरान मसूद सांसद भी बन गए। सहारपुर मुस्लिम बाहुल्य संसदीय क्षेत्र है। अपने बयानों से इमान मसूद मुसलमानों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहे हैं। यही वजह है कि इमरान मसूद को उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राहुल गांधी को लगता है कि विधानसभा के चुनाव में इमरान मसूद की सोच के कारण मुसलमानों के वोट कांग्रेस को मिल जाएंगे। यह बात अलग है कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव मसूद को पसंद नहीं करते हैं। क्योंकि विधानसभा चुनाव में मसूद कांग्रेस के लिए 50 प्रतिशत सीट चाहते हैं। मसूद का कहना है कि सपा केसाथ तभी गठबंधन किया जाए, जब 403 में से 200 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार हो। अब देखना होगा कि मसूद की नियुक्ति पर अखिलेश यादव की क्या प्रतिक्रिया होती है। अलबत्ता मुसलमानों को आकर्षित करने के लिए अखिलेश यादव भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। यादव का कहना है कि गत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 6 सीटें इसलिए मिल पाई कि सपा के साथ गठबंधन था। जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अकेले दम पर मात्र 2 सीटें हासिल की थी। कांग्रेस का वजूद उत्तर प्रदेश में सपा केसाथ गठबंधन से ही है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
चीन और अमेरिका को भारतीय पायलट स्मित मछार की सनातनी और ओमन के को-पायलट हमस अलहमामी की कट्टरपंथी सोच को समझना चाहिए। हनुमान चालीसा के पाठ से शक्ति और बुद्धि मिली। मोदी के बाद ट्रंप और नेतन्याहू भी मछार से बात करने को इच्छुक। ================= दुनियाके दो शक्तिशाली देश अमेरिका और चीन समय समय पर अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर पाकिस्तान को सपोर्ट करते है, जबकि पाकिस्तान पूरी दुनिया में आतंक की फैक्ट्री बना हुआ है। लेकिन भारत की सनातनी और पाकिस्तान की कट्टरपंथी सोच का ताजा उदाहरण 30 सितंबर को दुबई एयरलाइंस के विमान में देखने को मिली। दुबई से इजरायल जा रहे इस विमान में 180 यात्री सवार थे, जिनमें से 150 इजरायली थे। विमान को भारत के पायलट स्मित मछार उड़ा रहे थे, जबकि कॉकपिट में को-पायलट के तौर पर ओमान के पायलट हमम अलहमामी थे। जब विमान सऊदी अरब के हवाई मार्ग पर था और कुछ ही समय में इजरायल पहुंचने वाला था कि तभी को-पायलट हमम अलहमामी ने चाकू से पायलट मछार पर हमला कर दिया। मछार ने न केवल विमान को संभाल, बल्कि स्वयं को सुरक्षित रखते हुए कॉकपिट का दरवाजा भी खोल दिया। इससे विमान के यात्री भी बचाव के लिए कॉकपिट में आए गए। अब अलहमामी के बारे में जो जानकारी मिली रही है उसके अनुसार वह कट्टरपंथी सोच वाला इंसान है। इजरायल और ईान के बीच चल रहे युद्ध के मद्देनजर ही अलहमामी 150 इजरायली नागरिकों वाले विमान को क्रैश करवाना चाहता था। यदि स्मित मछार अपनी शक्ति और बुद्धि का परिचय नहीं देते तो अलहमामी विमान को इजरायल में किसी ऊंची बिल्डिंग से टकराता। यानी अलहमामी एक सुसाइड बम के तौर पर को-पायलट के रूप में विमान में बैठा था। सवाल अब दुबई एयरलाइंस पर भी उठ रहे है। इजरायल ने पहले ही कह रखा था कि दुश्मन देश के किसी भी पायलट को इजरायल आने वाले विमान में काम न दिया जाए। मौजूदा युद्ध की स्थिति में ओमान ईरान के अलहमामी की ड्यूटी नहीं लगनी चाहिए थी। लेकिन दुबई एयरलाइंस ने सुरक्षामानकों की अनदेखी कर कट्टरपंथी सोच वाले अलहमामी को को-पायलट के रूप में इजरायल जाने वाले विमान में सवार कर दिया। जानकारी के अनुसार दुबई एयरलाइंस में नियुक्त होने से पहले अलहमामी सीरिया में रहा था। सीरिया में ही अलहमामी कट्टरपंथियों के संपर्क में आया। ऐसे कट्टरपंथियों ने अलहमामी को निर्दोष लोगों की जान लेने की शिक्षा दी। एक ओर अलहमामी की कट्टरपंथी सोच तो दूसरी ओर भारत कीसनातन संस्कृति की सोच सामने आई है। अलहमामी ने जब स्मित मछार पर चाकू से हमला किया तो मछार ने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। हनुमान चालीस के पाठ की वहल से मछार को अलहमामी से लडऩे की शक्ति और कॉकपिट का दरवाजा खोलने की बुद्धि मिली। यानि भारत की सनातन संस्कृति दूसरों की जान बचाने की शिक्षा देती है। चीन और अमेरिका जब पाकिस्तान जैसे आतंकी देश की मदद करते हैं तो उन्हें इन दोनों सोच का ध्यान रखना चाहिए। चीन और अमेरिका की जान बचाने वाली सोच की मदद करनी चाहिए। पाकिस्तान की कट्टरपंथी सोच कभी भी चीन और अमेरिका की मदद नहीं कर सकती है। अमेरिका से ज्यादा चीन को सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि चीन इन दिनों पाकिस्तान में ज्यादा निवेश कर रहा है। एक दिन यही कट्टरपंथी सोच चीन के लिए आत्मघाती होगी। ट्रंप और नेतन्याहू भी बात करने को इच्छुक: सऊदी अरब के अस्पताल में भर्ती स्मित मछार से 2 अक्टूबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मादेी ने मोबाइल पर वीडियो कॉल तकनीक से बात की। मोदी ने कहा कि आज 140 करोड़ की आबादी वाला भारत गौरवांति है। इस गौरव का श्रेय मोदी ने मछार को दिया।मोदीने जिस अंदाज में मछार की हौंसला अफजाई की, उससे मछार की आंखों में आंसू आ गए। मछार ने मोदी से कहा कि मेरे लिए तो आप प्रेरणा स्त्रोत है। मोादी पहले राष्ट्राध्यक्ष हैं, जिन्होंने मछार से मोबाइल पर बात की। अब इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मछार से बात करने को इच्छुक हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

Thursday, 1 October 2026

पायलट स्मित ने पूरी दुनिया में भारत की सनातन संस्कृति का डंका बजाया। ओमानी को-पायलट का कृत्य इजरालय और ईरान युद्ध से जुड़ा है। कट्टरपंथता के आगे निर्दोष लोगों का जीवन कोई मायने नहीं रखता। ============== 30 सितंबर को दुबई से इजरायल जा रहे हवाई जहाज के भारतीय पायलट स्मित मछार ने अपने को-पायलट (इस्लामिक देश ओमान का नागरिक) से चाकू के वाहन सहने के बाद भी 180 लोगों को सुरक्षित पहुंचाया। यदि स्मित मछार बहादुरी और समझदारी न दिखाते तो जहाज को को-पायलट इजरायल में क्रेश करवा देता। इस जहाज में इजरायल के 150 नागरिक सवार थे। पूरी दुनिया में इस्लाम और ईसाई धर्मो के लोगों का बोलबाला है। चीन, जापान जैसे कुछ देश बौद्ध धर्म को मानते हैं। सनातन धर्म को मानने वाले सिर्फ भारत में ही है, लेकिन पायलट स्मित मछार ने 30 सितंबर को जो बहादुरी व समझदारी दिखाई उससे भारत की सनातन संस्कृति का डंका पूरी दुनिया में बजा है। स्मित मछार ने एक बार फिर साबित किया है सनातन धर्म को मानने वाला व्यक्ति कभी भी धोखेबाज नहीं हो सकता। भले ही वह इस्लामिक देश दुबई का जहाज उड़ा रहा हो। सनातन संस्कृति को मानने वाले व्यक्ति दुनिया में जहां भ है, वहां उनकी विश्वसनीयता है और अब स्मित मछार ने उस विश्वसनीयता को और बढ़ा दिया है। निसन्देह इस घटना से भारत का सनातन संस्कृति का मान बढ़ा है। इसके साथ ही एक बार फिर यह प्रदर्शित हुआ है कि कट्टरपंथता के सामने निर्दोष लोगों का जीवन कोई मायने नहीं रखता है। इस्लामिक देश ओमान के को-पायलट को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि जिस विमान को वह ब्रेश कराना चाहता है, उसमें निर्दोश लोग सवार है। यदि सनातन धर्म के अनुयायी स्मित मछार बहादुरी और समझदारी नहीं दिखाते तो 30 सितंबर को 180 लोग मौत के शिकार हो जाते। यही वजह है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू आदि ने स्मित मछार की जमकर प्रशंसा की है। इजरायल तो स्मित मछार को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मनित करेगा। युद्ध से जुड़े है तार: दुबई से इजरायल जहां रहे विमान में जो हादसा हुआ उसके तार इजरायल और ईरान के युद्ध से जुड़े हैं। ईरान ने अपने नियंत्रण वाले समुद्र के होर्मूज मार्ग में टोल वसूली की जो योजना बनाई, उसमें ओमान भी शामिल है। इजरायल के साथ युद्ध में ओमान, ईरान का मददगार है। अब तक की जांच में सामने आया है कि ओमान का को-पायलट विमान को क्रेश करवाकर इजरायल से बदला लेना चाहता था। यही वजह है कि इजरायल ने साऊदी अरब से मांग की है कि ओमान के को-पायलट को उन्हें सौंपा जाए। मालूम हो कि जब पायलट स्मित मछार पर हमला हुाअ, तब विमान की इमरजेंसी लैंडिंग सऊदी अरब में ही करवाई गई थी। यानी इस समय ओमानी को-पायलट सऊदी अरब के कब्जे में है। देखना होगा कि सऊदी अरब कब तक ओमानी पायलट को इजरायल को सौंपता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
अब जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के जज संदीप मेहता पर गंभीर आरोप लगाए। सवाल-जनता के विश्वास का क्या होगा? ============== लोकतंत्र में न्याय व्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह उम्मीद होती है कि न्यायालयों में ईमानदारी के साथ फैसले होते हैं, लेकिन आम लोगों का यह विश्वास अब सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज ही तार तार कर रहे हैं। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के जज संदीप मेहता ने राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर जो आरोप लगाए, उनका जवाब एक अक्टूबर को जस्टिस शर्मा ने दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद शर्मा ने मीडिया से संवाद करते हुए कहा कि संदीप मेहता के विरुद्ध भी गंभीर आरोपों से जुड़ी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी, लेकिन इसके बाद भी मेहता को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। जस्टिस शर्मा ने कहा कि संदीप मेहता का उद्देश्य मुझे मुख्य न्यायाधीश बनने से रोकना था। संदीप मेहता अपने उद्देश्य में सफल भी रहे। मेहता ने मुझ पर जो आरोप लगाए वे मान हानिकारक है। इसलिए मैंने देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत से अनुमति मांगी है कि मुझे संदीप मेहता के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दायर करने दिया जाए। संदीप मेहता और संजीव प्रकाश शमा्र ने एक-दूसरे पर जो गंभीर आरोप लगाए हैं, उसके मद्देनजर सवाल उठता है कि आखिर आम लोगों के विश्वास का क्या होगा? यदि संदीप मेहता और संजीव प्रकाश शर्मा के आरोपों को सही माना जाए तो प्रदर्शित होता है कि देश की अदालतों में न्याय नहीं होता। बल्कि धनाढ्य और प्रभावशाली लोग अपने पक्ष में फैसला करवा लेते हैं। मेहता और शर्मा कोई मुंसिफ अदालत के जज नहीं है बल्कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज हैं। यदि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इतनी गड़बडिय़ां हैं तो फिर जिला अदालतों के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। कोई माने या नही,ं लेकिन मेहता और शर्मा के आरोपों से देश की न्याय प्रणाली की छवि धूमिल हुई है। संदीप मेहता के आरोपों के बाद शर्मा मुख्य न्यायाधीश नहीं बन सके, लेकिन अब देखना होगा कि शर्मा के आरोपों से मेहता को सुप्रीम कोर्ट में कितना नुकसान होता है। मेहता के आरोपों के बाद शर्मा ने राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहते हुए स्वयं को न्यायिक कार्यों से अलग कर लिया था। क्या अब संदीप मेहता सुप्रीम कोर्ट में स्वयं को न्यायिक कार्य से अलग करेंगे? यह सही है कि किसी भी जज को आसानी से हटाया नहीं जा सकता। सवाल उठता है कि क्या आरोपों के चलते संदीप मेहता सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के पद से इस्तीफा देंगे? S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
सचिन पायलट की रिपोर्ट पर राजा वडिंग की पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद से छुट्टी। राजस्थान और पंजाब की राजनीति के तार जुड़े हुए हैं। ============== कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब के प्रभारी सचिन पायलट की रिपोर्ट के बाद राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा के चुनाव होने हैं और कांग्रेस का प्रयास है कि पंजाब में सरकार बनाई जाए। मौजूदा समय में भगवत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार है। राजा वडिंग को कुछ माह पहले ही पंजाब का अध्यक्ष बनाया गया था। तब से ही पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा विरोध कर रहे थे, लेकिन तब के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने राजा वडिंग को हटाने से साफ इंकार कर दिया था। लेकिन भूपेश बघेल के स्थान पर सचिन पायलट के प्रभारी बनने के बाद चन्नी और रंधावा के समर्थकों ने राजा वडिंग को हटाने की मांग तेज कर दी। माना जा रहा है कि पायलट की रिपोर्ट के आधार पर ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और राहुल गांधी ने राजा वडिंग को हटाने का फैसला किया। असल में पंजाब की राजनीति के तार राजस्थान से जुड़े हुए हैं। लम्बे समय तक राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष रहे पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट पंजाब के प्रभारी हैं तो पंजाब के वरिष्ठ सांसद रंधवा राजस्थान के। राजा वडिंग के अध्यक्ष पद से हटने के बाद रंधावा और उनके समर्थक खुश हैं। अब देखना होगा कि रंधावा राजस्थान में सचिन पायलट के समर्थकों को खुश होने का कब अवसर देते हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि राजस्थान में भाजपा के अध्यक्ष रहे सतीश पूनिया मौजूदा समय में भाजपा के पंजाब में प्रभारी है। राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे गुलाबचंद कटारिया पहले से ही पंजाब के राज्यपाल हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511