Thursday, 1 October 2026
अब जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के जज संदीप मेहता पर गंभीर आरोप लगाए।
सवाल-जनता के विश्वास का क्या होगा?
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लोकतंत्र में न्याय व्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह उम्मीद होती है कि न्यायालयों में ईमानदारी के साथ फैसले होते हैं, लेकिन आम लोगों का यह विश्वास अब सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज ही तार तार कर रहे हैं। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के जज संदीप मेहता ने राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर जो आरोप लगाए, उनका जवाब एक अक्टूबर को जस्टिस शर्मा ने दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद शर्मा ने मीडिया से संवाद करते हुए कहा कि संदीप मेहता के विरुद्ध भी गंभीर आरोपों से जुड़ी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी, लेकिन इसके बाद भी मेहता को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। जस्टिस शर्मा ने कहा कि संदीप मेहता का उद्देश्य मुझे मुख्य न्यायाधीश बनने से रोकना था। संदीप मेहता अपने उद्देश्य में सफल भी रहे। मेहता ने मुझ पर जो आरोप लगाए वे मान हानिकारक है। इसलिए मैंने देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत से अनुमति मांगी है कि मुझे संदीप मेहता के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दायर करने दिया जाए। संदीप मेहता और संजीव प्रकाश शमा्र ने एक-दूसरे पर जो गंभीर आरोप लगाए हैं, उसके मद्देनजर सवाल उठता है कि आखिर आम लोगों के विश्वास का क्या होगा? यदि संदीप मेहता और संजीव प्रकाश शर्मा के आरोपों को सही माना जाए तो प्रदर्शित होता है कि देश की अदालतों में न्याय नहीं होता। बल्कि धनाढ्य और प्रभावशाली लोग अपने पक्ष में फैसला करवा लेते हैं। मेहता और शर्मा कोई मुंसिफ अदालत के जज नहीं है बल्कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज हैं। यदि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इतनी गड़बडिय़ां हैं तो फिर जिला अदालतों के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। कोई माने या नही,ं लेकिन मेहता और शर्मा के आरोपों से देश की न्याय प्रणाली की छवि धूमिल हुई है। संदीप मेहता के आरोपों के बाद शर्मा मुख्य न्यायाधीश नहीं बन सके, लेकिन अब देखना होगा कि शर्मा के आरोपों से मेहता को सुप्रीम कोर्ट में कितना नुकसान होता है। मेहता के आरोपों के बाद शर्मा ने राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहते हुए स्वयं को न्यायिक कार्यों से अलग कर लिया था। क्या अब संदीप मेहता सुप्रीम कोर्ट में स्वयं को न्यायिक कार्य से अलग करेंगे? यह सही है कि किसी भी जज को आसानी से हटाया नहीं जा सकता। सवाल उठता है कि क्या आरोपों के चलते संदीप मेहता सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के पद से इस्तीफा देंगे?
S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-10-2026)
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