Thursday, 16 July 2026
चीन समर्थक सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को जनसमर्थन नहीं मिल रहा।
अब वो जमाना गुजर गया, जब देश को गाली देकर हीरों बन जाते थे।
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लद्दाख में रहकर चीन के समर्थन में बयान देने वाले सोनम वांगचुक का 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर मंतर पर 20वें दिन भी आमरण अनशन जारी रहा। चिकित्सकों का आकलन है कि वांगचुक अभी कुछ दिन और अनशन पर रह सकते हैं। फिलहाल उनके जीवन को कोई खतरा नहीं है, लेकिन वांगचुक के कुछ समर्थकों को आश्चर्य है कि इतने लंबे अनशन के बाद भी वांगचुक को जनसमर्थन नहीं मिल रहा है। वांगचुक के समर्थन में जो कुछ युवा आ रहे हैं उनकी पृष्ठभूमि दिल्ली के जेएनयू की है। इसलिए अनशन स्थल पर देश विरोधी और सनातन संस्कृति के विरुद्ध भाषण और नारेबाजी हो रही है। वांगचुक नीट परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हालांकि इस मांग पर केद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, क्योंकि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पहले ही खारिज की जा चुकी है। वांगचुक के आमरण अनशन को जनसमर्थन नहीं मिलने से यह प्रदर्शित हो रहा है कि जब भारत में राष्ट्रवाद की भावना प्रबल है। वो जमाना गुजर गया जब अपने ही देश और सनातन संस्कृति को गाली देकर हीरो बन जाते थे। अनुच्छेद 370 के हटने से पहले जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेता भी अपने देश को गालियां देते थे और जनता की नजर में हीरो बन जाते थे। कांग्रेस के भी कई नेता देश विरोधी बयान देते थे। तब यह मान लिया गया कि देश की आलोचना करने वाले ही नेता बन सकते हैं, लेकिन भारत में वर्ष 2014 के बाद जो बदलाव आया, उसमें राष्ट्रवाद की भावना प्रबल हुई। जो लोग अपने ही देश की आलोचना करते थे, उन सबको जनता ने किनारे कर दिया। जिन लोगों ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर और अयोध्या में राम मंदिर बनवाकर सनातन संस्कृति को मजबूत किया उन्हें जनता ने सत्ता सौंपी। चूंकि सोनम वांगचुक भी समय समय पर अपने देश की आलोचना कर चीन के गुणगान करते रहे, इसलिए आज आमरण अनशन के बाद भी जनसमर्थन नहीं मिल रहा है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं को उम्मीद थी कि वांगचुक के आमरण अनशन से देश भर के युवा एकजुट होंगे, लेकिन इस उम्मीद पर पानी फिर गया। अच्छा हो कि वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर लद्दाख लौट जाए और लद्दाख में रहकर देश की एकता और अखंडता के लिए काम करें। यदि वांगचुक देशहित में काम करेंगे तो उनके एक दिन के अनशन का भी असर होगा और देश की जनता उन्हें सिर पर बैठाएगी। लेकिन यदि वांगचुक अपने ही देश और संस्कृति को गालियां देंगे तो उनके अनशन का कोई असर नहीं होगा। आज पूरा देश अयोध्या में राम मंदिर के बनने से गौरवान्ति है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-07-2026)
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