Friday, 17 July 2026
राहुल गांधी के मिलने और संसद मार्च से पहले ही सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से हटाया।
पुलिस ने यह कार्यवाही दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश से की।
हरियाणा के जींद-सोनीपत के बीच चली हाइड्रोजन ट्रेन।
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18 जुलाई को सुबह सुबह सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। वांगचुक गत 20 दिनों से आमरण अनशन पर थे। वांगचुक नीट पेपर में गड़बड़ी के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन पर थे। 17 जुलाई को ही वांगचुक ने घोषणा की थी कि 20 जुलाई को जब संसद का मानसून सत्र होगा, तब वे जंतर मंतर से संसद तक मार्च करेंगे। जानकार सूत्रों के अनुसार 18 जुलाई को ही लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी भी वांगचुक से मिलने के लिए जंतर मंतर पर आ रहे थे। लेकिन राहुल गांधी के आने और 20 जुलाई को संसद मार्च से पहले ही वांगचुक को जंतर-मंतर से हटा दिया गया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि कार्यवाही हाईकोर्ट के आदेश से की गई है। हाईकोर्ट ने कहा था कि वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था, इसलिए पुलिस को वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। अब वांगचुक चिकित्सकों की निगरानी में है। वहीं पुलिस ने लोगों से कहा कि जंतर-मंतर पर भीड़ न लगाई जाए। असल में 20 दिन के आमरण अनशन के बाद भी वांगचुक को जनसमर्थन नहीं मिल रहा था। हालांकि कॉकरोच पार्टी के कुछ समर्थक जंतर मंतर पर आए, लेकिन उनकी संख्या इतनी नहीं थी कि सरकार पर कोई दबाव डाल सकै। जनसमर्थन नहीं मिलने का परिणाम ही रहा कि आमरण अनशन के दौरान सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने वांगचुक से संवाद नहीं किया। सरकार द्वारा संवाद नहीं किए जाने का एक कारण वांगचुक की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी रही। असल में वांगचुक लद्दाख में रहकर चीन का समर्थन करते रहे। इसलिए वांगचुक को भारत में चीन का प्रतिनिधि माना गया। सरकार नहींचाहती कि लद्दाख में वांगचुक जैसे चीन समर्थकों को मजबूती मिले। वांगचुक को जंतर मंतर से हटाए जाने के बाद 20 जुलाई को संसद मार्च धरा रहा गया है। असल में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पार्टियां देश में युवा पीढ़ी (जेनजी) को मोदी सरकार के खिलाफ उकसाने का प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में सोनम वांगचुक के अनशन को भ देखा जा रहा था। लेकिन विपख की लाख कोशिश के बाद भी युवा वर्ग मोदी सरकार के खिलाफ सड़क पर नहीं आ रहा।
हाइड्रोजन ट्रेन:
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जेनजी को कितना भी उकसाए, लेकिन देश के युवा वर्ग को पता है कि गत 12 वर्षों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में न केवल देश का तेजी से विकास हुआ, बल्कि युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर मिले हैं। इसका ताजा उदाहरण 17 जुलाई को हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर में हाइड्रोजन ट्रेन का चलना है। यूं तो 4 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन जापान, चीप, फ्रांस, अमेरिका आदि देशों में चल रही है, लेकिन 10 कोच वाली ट्रेन भारत में दुनिया की पहली ट्रेन है। हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवा वर्ग के सामने भारत की उजली तस्वीर को भी रखा। मोदी ने कहा कि उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले देश में रेलवे में 30 प्रतिशत ही विद्युतीकरण हुआ था। यानी अधिकांश ट्रेने डीजल से संचालित हो रही थी। उनके 12 वर्ष के कार्यकाल में रेलवे में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हो गया है। यानी आज अधिकांश ट्रेन बिजली से चल रही है। यदि वर्ष 2012 से पहले के हालात होत तो डीजल की खपत का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब जब अमेरिका और ईरान के युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेज का संकट हो गया है, तब कल्पना कीजिए कि यदि भारत की ट्रेने डीजल से चलती तो हालात कितने खराब होते। यदि देश में रेलवे में विद्युतीकरण नहीं होता तो आज हमें डीजल के अभाव में ट्रेनों का संचालन को बंद करना पड़ता। देश के इस विकास को युवा पीढ़ी समझती है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-07-2026)
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