Friday, 17 July 2026

वर्ष 2024 से आनासागर में मछलियों को निकालने का ठेका ही नहीं हुआ, इसलिए क्षमता से ज्यादा मछलियां। एसटीपी बनने से पहले विश्राम स्थली में प्रति वर्ष उर्स में 20 हजार जायरीन ठहरते थे। गत वर्ष 1250 एफटीएफ पानी की निकासी हुई, इस से चार आनासागर भर जाते। कांग्रेस के शासन में पूर्व विधायक डॉ. बाहेती और डॉ. जयपाल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के डायरेक्टर बने थे। ============== अजमेर के बीचों बीच बने आनासागर में इन दिनों रोजाना बड़ी संख्या में मछलियां मर रही है, मछलियों के मरने की खबरें मीडिया में छाई हुई है। मरी मछलियों की दुर्गंध से आसपास के लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है। असल में मछलियों के मरने का एक प्रमुख कारण आनासागर में क्षमता से अधिक मछलियों का होना है। वर्ष 2024 में आनासागर में मछलियों को निकालने का ठेका ही नहीं दिया गया। वर्ष 2024 से पहले प्रतिवर्ष मत्स्य विभाग आनासागर का ठेेका देता था। इससे सरकार को राजस्व की प्राप्ति होने के साथ साथ मछलियों को भी निकाल लिया जाता था। संबंधित ठेकेदार ही काफी हद तक आनासागर में साफ सफाई का काम भी करता था। प्रतिवर्ष मछलियां निकालने से मछलियों और आनासागर के पानी के बीच संतुलन भी बना रहता था। अब जब 2024 मछली निकालने का काम हो ही नहीं रहा है, तब मछलियों की बढ़ती संख्या का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि मानसून को देखते हुए आनासागर से करीब डेढ़ दो फीट पानी की निकासी की गई। उम्मीद थी कि जुलाई माह में ही मानसून की बरसात हो जाएगी, लेकिन बरसात न होने और आनासागर की क्षमता से ज्यादा मछलियों की संख्या होने के कारण इन दिनों प्रतिदिन मछलियां मर रही है। अच्छा हो कि पूर्व की तरह आनासागर से मछलियों के निकालने का ठेका दिया जाए। जहां तक आनासागर से डेढ़ फीट पानी की निकासी का सवाल है तो गत वर्ष अच्छी बरसात के कारण आनासागर से 1250 एफटीएफ पानी की निकासी की गई। इस पानी से चार आनासागर भरे जा सकते थे। आनासागर का जल स्तर 13 फीट है और भराव क्षमता 250 एफटीएफ पानी की है। सब जानते हैं कि जब आनासागर से एस्केप चैनल के जरिए पानी की निकासी होती है तो शहर भर के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सुभाष बाग, ब्रह्मपुरी, जयपुर रोड आदि के क्षेत्रों में तो यातायात ही बंद करना पड़ता है। बरसात से पहले आनासागर से पानी की निकासी पिछले कई वर्षों से की जा रही है ताकि बरसात के दिनों में शहरवासियों को परेशानी न हो। 20 हजार जायरीन ठहरते थे: आनासागर के भराव क्षेत्र में ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण वर्ष 2015 में हुआ। एसटीपी के बनने से पहले आनासागर का बड़ा भूभाग खाली रहता था। इसलिए पुष्कर रोड की विश्राम स्थली में प्रतिवर्ष ख्वाजा साहब के उर्स के दौरान 20 हजार जायरीन करीब 10 दिनों तक ठहरते थे। पुष्कर रोड के निवासियों को पता है कि जायरीन के चलते जाने के बाद हालात कितने विकराल होते थे, लेकिन वर्ष 2014-15 में एसटीपी यानी ट्रीटमेंट प्लांट के शुरू हो जाने से आनासागर में पानी वर्ष भरा भरा रहने लगा। चूंकि आनासागर खासकर कोटड़ा क्षेत्र में तेजी से आबादी बढ़ी इसलिए घरों से निकालने वाले पानी की मात्रा भी बढ़ गई। सीवरेज योजना के तहत घरों से निकलने वाली पानी की पाइप लाइन के जरिए एसटीपी तक लाया गया और फिर पानी को शुद्ध कर आनासागर में डाला गया। चूंकि वर्ष भर पानी की आवक रहती है, इसलिए आनासागर में हमेशा पानी भरा रहता है। डेढ़ फीट पानी की निकासी के बाद भी मौजूदा समय में जलस्तर 10.8 फीट है। वर्षा न होने के बाद भी आनासागर में पानी की आवक जारी है, इसलिए आनासागर का जलस्तर और बढ़ जाएगा। बाहेती और जयपाल बने थे डायरेक्टर: कांग्रेस आज भले ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कार्यों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हो, लेकिन स्मार्ट सिटी के अधिकांश कार्य गत कांग्रेस के पांच वर्ष के शासन में ही हुए। अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री और रघु शर्मा के चिकित्सा मंत्री रहते हुए ही स्मार्ट सिटी के कार्यों का निर्धारण हुआ। आनासागर के चारों तरफ पाथवे का अधिकांश निर्माण कार्य कांग्रेस के शासन में ही हुआ। तब किसी भी कांग्रेस नेता ने आनासागर की भराव क्षमता कम होने का विरोध नहीं किया। इतना ही नहीं अजमेर की राजनीति से जुड़े पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती और डॉ. राजकुमार जयपाल (शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष) को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में राज्य सरकार की ओर से डायरेक्टर भी बनाया गया। डायरेक्टर बनाए जाने के संबंध में डॉ. बाहेती और डॉ. जयपाल का कहना है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट केंद्र सरकार का था, इसलिए नियुक्ति के कुछ दिनों बाद ही उन्हें हटा दिया गया। डॉ. बाहेती ने तो प्रोजेक्ट से जुड़ी एक भी बैठक में भाग नहीं लिया। विशेष सतर्कता: नगर निगम के अधीक्षण अभियंता मनोज सोनगरा ने बताया कि आनासागर में मछलियों के मरने की स्थिति को देखते हुए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मृत मछलियों को हाथों हाथ उठाया जा रहा है तथा आनासागर में चूना डालने का काम लगातार जारी है। निगम प्रशासन का प्रयास है कि मछलियां कम से कम मरे तथा आसपास की कॉलोनियों के निवासियों को कोई परेशान न हो। आनासागर पर चौबीस घंटे निगरानी का काम किया जा रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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