अपने ही जाल में फंस गई मोदी सरकार
देश के पीएम नरेन्द्र मोदी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक स्तर में रात और दिन का अंतर है, लेकिन दिल्ली के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल को मात देने के लिए जो जाल बिछाया गया, उसमें पूरी मोदी सरकार उलझ गई है। केजरीवाल को चन्दा देने के मामले में पीएम मोदी ने जल्दबाजी में जो प्रतिक्रिया दी, उससे स्वयं मोदी भी नैतिकता के घेरे में आ गए हैं। एक फरवरी को भाजपा नेता शाजिया इल्मी की उपस्थिति में आवाम नाम एनजीओ के प्रतिनिधियों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि केजरीवाल की 'आमÓ पार्टी ने 50-50 लाख रुपए के दो चैक फर्जी कंपनी से लिए हैं। यह भी आरोप लगाया कि 'आपÓ ने 50 लाख की नकद राशि देकर चंदे के रूप में चैक हासिल किए। तब मोदी सरकार के किसी भी मंत्री ने आवाम के आरोपों की पुष्टि किए बिना केजरीवाल को अपराधी घोषित कर दिया। वाणिज्य मंत्री श्रीमती सीता रमन और ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने एक फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजरीवाल से जवाब मांगा। 2 फरवरी को पीएम के विश्वास पात्र वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि केजरीवाल अपराध करते हुए रंगे हाथों पकड़े गए हैं। इतना ही नहीं 3 फरवरी को दिल्ली की एक चुनावी सभा में खुद पीएम मोदी ने इसी मामले में 'आपÓ और केजरीवाल को 'चन्दा खोरÓ कह दिया। सभी ने कहा कि जो केजरीवाल सभी राजनेतओं को भ्रष्ट बताते हैं, वह स्वयं सबसे बड़े भ्रष्ट राजनेता हैं। एक बार तो ऐसा लगा कि मोदी सरकार ने केजरीवाल के खिलाफ जो जाल बुना उसमें केजरीवाल उलझ गए हैं। लेकिन अपने ही बुने हुए इस जाल में 4 फरवरी को मोदी सरकार खुद फंस गई। जिस कंपनी को फर्जी बताया जा रहा था, उस कंपनी की मालिक जसकीरत मान मीडिया के सामने आई और कहा कि पूरी ईमानदारी के साथ चंदे के रूप में 50-50 लाख रुपए के चैक 'आपÓ पार्टी को दिए गए हैं। इस चंदे की जानकारी बकायदा आयकर विभाग और संबंधित सरकारी एजेंसियों को भी दी गई है। जसकीरत के इस बयान के बाद आवाम संस्था के प्रतिनिधि मुंह छिपाते नजर आए तो मोदी सरकार के प्रतिनिधि इधर-उधर झांकते देखे गए। मोदी सरकार के इशारों पर लाइव डिबेट करने और चीखने चिल्लाने वाले टीवी चैनल भी 4 फरवरी को केजरीवाल के खिलाफ शांत बने रहे। जसकीरत का बयान सिर्फ एनडीटीवी ने ही दिखाया। यदि अधिकांश न्यूज चैनल मोदी सरकार के इशारे पर नहीं नाचते हैं तो उन्हें भी जसकीरत का बयान प्रमुखता के साथ दिखाना चाहिए था। सवाल उठता है कि एक गुमनाम आवाम संस्था के आरोपों के समर्थन में पूरी सरकार के मंत्रियों ने बयान कैसे दे दिए? क्या झूठा बयान देकर मंत्रियों ने अपराध नहीं किया है? पीएम मोदी भले ही विदेशों में भारत का डंका बजवा रहे हो, लेकिन उनसे तो यह उम्मीद की जाती है कि वे अपना भाषण सही तथ्यों के आधार पर दें। यदि देश के वित्तमंत्री व पीएम भी झूठे आरोपों की पुष्टि करेंगे तो सरकार की निष्पक्षता कैसे बनी रहेगी। देश की जनता को अभी भी यह भरोसा है कि पीएम मोदी पूरी ईमानदारी के साथ सरकार चला रहे हैं। यदि मोदी को इस भरोसे को कायम रखना है, तो अरविंद केजरीवाल की उस मांग को पूरा करना चाहिए जो उन्होंने राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे को लेकर की है। केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर आग्रह किया है कि आप पार्टी के साथ-साथ भाजपा और कांग्रेस को गत पांच वर्षों में मिले चंदे की जांच करवाई जाए। मोदी यदि राजनीति में ईमानदारी दिखाना चाहते हैं तो उन्हें भाजपा को मिले चंदे की भी जांच करवानी चाहिए।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in)
Wednesday, 4 February 2015
अपने ही जाल में फंस गई मोदी सरकार
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