मोदी सरकार नहीं ला सकती कालाधान
9 फरवरी को इंडियन एक्सप्रेस अखबार में एचएसबीसी विदेशी बैंक में जमा भारतीयों की धनराशि को लेकर खबर प्रकाशित हुई तो टीवी चैनल वाले दिनभर कालाधान वापस लाने को लेकर शोर मचाते रहे। शाम होते-होते केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने स्पष्ट कर दिया कि भले ही भारतीय धन्नासेठों के खाते विदेशी बैंकों में हो, लेकिन सरकार के पास अभी तक भी ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिसके अंतर्गत बैंकों में जमा राशि को कालाधन माना जा सके। जेटली ने जिस तरह से जवाब दिया, उससे सुप्रसिद्ध वकील रामजेठमलानी का कथन सही साबित हो गया है। विगत दिनों ही जेठमलानी ने कहा था कि अरुण जेटली के वित्तमंत्री रहते हुए विदेशों में जमा कालाधन वापस नहीं आ सकता है। सवाल उठता है कि जब सरकार के पास कालेधन को लेकर कोई सबूत ही नहीं है, तो फिर लोकसभा चुनाव के दौरान नरेन्द्र मोदी ने कालाधन वापस लाने का वायदा क्यों किया? मोदी ने ऐसा प्रदर्शित किया कि कांग्रेस की सरकार कालाधन वापस नहीं ला सकती है और यदि भाजपा की सरकार बन गई तो प्रत्येक भारतीय के स्वदेशी खाते में 15-15 लाख रुपए आ जाएंगे। हालांकि दिल्ली चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कह दिया कि नरेन्द्र मोदी ने कालाधन वापस लाने का कोई वायदा नहीं किया था। 15 लाख रुपए की बात जो जुमले के बतौर कही गई थी। अब योग गुरु बाबा रामदेव भी कालेधन पर खामोश है, क्योंकि वे अपना कारोबार बढ़ाने में लगे हुए है। कहा जा रहा है कि देशभर में चलने वाले खादी भंडारों को पतंजलि पीठ को दिए जा रहे है। अब इन खादी भंडारों में बाबा रामदेव के उत्पादों की बिक्री होगी। देश की जनता के भी समझ में आ गया है कि जब काले धन के आरोपी पीएम नरेन्द्र मोदी के साथ विदेश यात्रा कर रहे हैं, तब कालाधन वापस आने की बात करना बेमानी है। इसलिए अरुण जेटली को कोई सबूत भी नजर नहीं आ रहे है।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in)
Monday, 9 February 2015
मोदी सरकार नहीं ला सकती कालाधान
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