Saturday, 25 July 2026

 मोदी जी! आखिर कब तक देश विरोधी तत्वों से भारत को बचाओगे?

सवाल छात्र आंदोलन का नहीं, बल्कि हर ऐसे आंदोलन में देश विरोधी तत्वों की सक्रियता का है।

नीट पेपर लीक पर इस्तीफा देना था तो 10 मई को ही दे देना चाहिए था।

री-नीट के रिजल्ट के बाद आंदोलन का क्या तुक था?

जसवंत दारा का सटीक और प्रभावी कार्टून।
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25 जुलाई को दोपहर बाद जब धर्मेन्द्र प्रधान ने  केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया, तभी से मीडिया में प्रसारित हो रहा है, यह छात्रों और देश के युवाओं की जीत है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घमंड के साथ कहा, हमने मोदी सरकार को झुका दिया। इसमें कोई दो राय नहीं कि छात्रों और युवाओं के देशव्यापी आंदोलन के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफा लेना पड़ा। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह आंदोलन सिर्फ छात्रों और युवाओं का था? दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट बताती है कि जंतर मंतर के आंदोलन में देश विरोधी तत्व भी शामिल हो गए थे। आदतन अपराधियों ने भी स्टूडेंट का चोला ओढ़ लिया था। यही वजह रही कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जबरदस्त हिंसा हुई। दिल्ली की तरह यह आंदोलन देश भर में फैल गया और जगह जगह हिंसा होने लगी। सरकार भी मानती है कि इस हिंसा में युवाओं का कोई योगदान नहीं है, लेकिन आंदोलन में देश विरोधी तत्वों की सक्रियता से आंदोलन हिंसक हुआ। यह पहला मौका नहीं है, जब ऐसे आंदोलन में हिंसा हुई। इससे पहले सीएए (नागरिकता संशोधन कानून), किसान आंदोलन आदि के दौरान भी देश विरोधी तत्वों की सक्रियता देखने को मिली थी। किसान आंदोलन में तो सरकार को संसद में पारित कानूनों को वापस लेना पड़ा था। ताजा छात्र आंदोलन को देखते हुए धर्मेन्द्र प्रधान ने जो इस्तीफा दिया उसमें भी यह लिखा है कि राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे और बच्चे अपनी पढ़ाई और करियर पर फोकस करें, इसलिए मैं इस्तीफा दे रहा हंू। धर्मेन्द्र प्रधान का यह कथन बताता है कि छात्र आंदोलन के नाम पर देश के हालात बिगाड़ने की साजिश हो रही थी। इसलिए सवाल उठता है कि आखिर देश विरोधी ताकतों से भारत को कब तक बचाया जाएगा। हर बार देश विरोधी ताकतें ज्यादा शक्ति के साथ भारत पर हमला करती हैं। यह कहा जा सकता है कि भारत में देश विरोधी ताकतें लगातार मजबूत हो रही है। ऐसी ताकतें सिर्फ मौके का इंतजार करती है। ऐसे आंदोलनों में जिस तरह पीएम मोदी को गालियां दी जाती है उससे भी जाहिर है कि देश विरोधी ताकतें अपने मंसूबों में मोदी को सबसे बड़ा बाधक मानती है। यानी जब तक मोदी की सत्ता रहेगी, तब तक देश विरोधी ताकतों को भारत को तोडऩे का अवसर नहीं मिलेगा। यही वजह है कि ऐसे आंदोलनों में सीधे मोदी को ही टारगेट किया जाता है। धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा करवाकर पीएम मोदी ने सिर्फ अराजकता के माहौल को टाला है। देश में राष्ट्रविरोधी ताकतें कभी भी हालातों को बिगाड़ सकती है। यदि धर्मेन्द्र प्रधान को नीट पेपर लीक पर इस्तीफा देना था तो 10 मई को ही दे देना चाहिए था। नीट यूजी की परीक्षा 3 मई 2026 को हुई थी। परीक्षा होने के साथ ही पेपर लीक की खबरें आ गई थी, लेकिन तब प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिा। प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए ही 21 जून को दुबारा से परीक्षा हुई और 16 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिया गया। यानी कॉकरोच जनता पार्टी ने जुलाई माह में जो आंदोलन शुरू किया उसमें नीट यूजी पेपर लीक का तो कोई मुद्दा नहीं था। विपक्ष के नेता अब भले ही धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे का श्रेय ले, लेकिन मई में पेपर लीक के समय कोई भी राजनीतिक दल सरकार के खिलाफ आंदोलन को खड़ा नहीं कर सका। जुलाई में आंदोलन तब शुरू हुआ, जब कॉकरोच पार्टी के संस्थापक दीपके अमेरिका से भारत आए। यानी विदेश से आकर एक व्यक्ति ने देशभर में आंदोलन को खड़ा किया। जिस तरह से नीट पेपर लीक पर अब आंदोलन किया गया उसकी जांच होगी तो देश विरोधी ताकतों के चेहरे पर से नकाब भी उतर जाएगी।

 
संसद में चर्चा हो:
नीट पेपर लीक और कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। ताकि देशवासियों को आंदोलन की हकीकत का पता चल सके। अच्छा हो कि इस चर्चा में विपक्ष भी भाग लें। सरकार की ओर से सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली 2024 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा जाएगा। इस संशोधित प्रस्ताव में ही आंदोलन पर चर्चा होनी चाहिए।
 
दारा का कार्टून:
शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा और छात्रों के आंदोलन में देश विरोधी ताकतों की भूमिका को लेकर कार्टूनिस्ट जसवंत दारा ने सटीक और प्रभावी कार्टून बनाया है। इस कार्टून को मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 26-07-2026)

Website- www.spmittal.in
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