दिल्ली का चुनाव अब मोदी बनाम केजरीवाल
पीएम मोदी ने 10 जनवरी को दिल्ली के रामलीला मैदान से जो विशाल जनसभा की उसमें एक बात तो साफ हो गई कि अब दिल्ली विधानसभा का चुनाव नरेन्द्र मोदी बनाम अरविन्द केजरीवाल में होगा। मोदी ने अपने संबोधन में भले ही केजरीवाल का नाम नहीं लिया हो, लेकिन उनका निशाना केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी रही। मोदी के संबोधन से यह साफ हो गया कि दिल्ली में भाजपा का मुकाबला कांग्रेस की बजाय केजरीवाल की पार्टी से है। विपक्षी दल के नाम पर मोदी ने बार-बार केजरीवाल की ही आलोचना की। राजनीति में वर्तमान परिपेक्ष्य में नरेन्द्र मोदी को सबसे बड़ा विशेषज्ञ माना जाता है। यदि देश का सबसे बड़ा राजनेता कांग्रेस की बजाय दो-तीन साल पुरानी पार्टी की आलोचना करे तो केजरीवाल में दम तो नजर आता ही है। विधानसभा चुनाव के परिणाम कुछ भी रहे, लेकिन चुनाव से पहले भाजपा के समकक्ष खड़े होकर केजरीवाल ने अपनी काबिलियत तो जाहिर कर दी है। मोदी ने अपने संबोधन में केजरीवाल पर हमला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। केजरीवाल को अराजक बताते हुए मोदी ने सलाह दी कि केजरीवाल नक्सलियों के साथ हाथ मिला ले। मोदी ने जहां अपने भाषण में केजरीवाल और उनकी पार्टी को अराजक, अनुभवहीन, धरना प्रदर्शन आदि वाला कहा, वहीं दिल्ली के नागरिकों पर जमकर मेहरबानियां भी की। चूंकि अभी चुनाव की घोषणा नहीं हुई है। दिल्लीवासियों को जो भी लालच दिए जा सकते थे वो दिए गए। मोदी व उनकी सरकार के केन्द्रीय मंत्री ने झुग्गी झौंपड़ी की कॉलोनियों को नियमित करने, 24 घंटे बिजली देने, पानी की समस्या को दूर करने के वायदे किए। यह बात अलग है कि दिल्ली को अलग राज्य का दर्जा देने का मोदी की तरफ से कोई वायदा नहीं किया गया। एक वर्ष पहले हुए विधानसभा चुनाव में केजरीवाल के 28 विधायक निर्वाचित हुए थे। इनमें से सिर्फ 1 विधायक बिन्नी ने केजरीवाल का साथ छोड़ा। आज भी केजरीवाल के साथ 27 विधायक है। इससे भी यह जाहिर होता है कि अनेक मौकों पर गलत निर्णय लेने पर भी केजरीवाल अपने संगठन को एकजुट रखा है। लोकसभा चुनाव की अपार सफलता और फिर हरियाणा, महाराष्ट्र व झारखंड में भाजपा की जीत के बाद यह माना जा रहा है कि देश में नरेन्द्र मोदी की लहर चल रही है। इस लहर से दिल्ली भी अछूती नहीं है। दिल्ली का चुनाव जीतने के लिए जहां पूरी भाजपा मोदी के कंधे पर सवार है, वहीं केजरीवाल दिल्ली के एक-एक वोटर पर नजर लगा रखे हुए है। केजरीवाल और उनके कार्यकर्ताओं ने चुनाव के लिए जो मेहनत की है उसी का परिणाम है कि केजरीवाल भाजपा से मुकाबला करने के लिए खड़े है। जहां उत्तर प्रदेश और बिहार में सभी गैर भाजपा राजनैतिक दल एकजुट होकर भाजपा और मोदी का मुकाबला कर रहे है वहीं दिल्ली में आम आदमी पार्टी अकेले ही भाजपा के सामने खड़ी है। बसपा, सपा, राजग, जेदयू आदि राजनीतिक दल के नेताओं पर जहां भ्रष्टाचार के आरोप है, वहीं केजरीवाल की छवि फिलहाल साफ सुथरी है।
-(एस.पी.मित्तल)(spmittal.blogspot.in)
Sunday, 11 January 2015
दिल्ली का चुनाव अब मोदी बनाम केजरीवाल
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