Tuesday, 25 August 2026
पत्नी यदि सास-ससुर की सेवा न करे और बिना बताए पीहर चली जाए तो यह उसका अधिकार है।
पत्नी से ससुराल में सेवा की अपेक्षा क्यों की जाती है?
पति के माता-पिता की सेवा का दायित्व बहु का नहीं, पुत्र-पुत्री का है।
कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल।
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कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश चिलकुर सुमालया का एक आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल माना जा रहा है। न्यायाधीश सुमालया के समक्ष एक युवक ने याचिका दायर की कि वह अपनी पत्नी को भरण पोषण की राशि नहीं दे सकता क्योंकि उसकी पत्नी उसके माता पिता की सेवा नहीं करती और बिना बताए पीहर चली जाती है। चूंकि पत्नी ससुराल में अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रही है, इसलिए उसे अलग होने का भरण पोषण राशि का अधिकार नहीं है। इस याचिका पर न्यायाधीश सुमाया ने कहा कि पत्नी से ससुराल में यह अपेक्षा क्यों की जाती है कि वह सास-ससुर की सेवा करें? पत्नी को अपने पीहर जाने के लिए पति या ससुराल के किसी अन्य सदस्य से अनुमति लेने की जरूरत भी नहीं है। पत्नी जब चाहे तब अपने पीहर जा सकती है। जस्टिस सुमायला ने कहा कि माता पिता की सेवा का दायित्व पुत्र-पुत्री का है। सेवा के लिए बहु से अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाह के बाद ससुराल में आने वाली युवती को अपने निर्णय लेने का स्वतंत्र अधिकार है। पत्नी का यह मतलब नहीं है कि वह किसी के नियंत्रण में काम करे। न्यायाधीश सुमालया ने अपने आदेश में पीहर में रह रही पत्नी को भरण पोषण की राशि देने का आदेश भी दिया। न्यायाधीश सुमालया का आदेश अपनी जगह है। हो सकता है कि उन्होंने महिला की स्वतंत्रता के अधिकारों को देखते हुए आदेश दिया हो, लेकिन कोर्ट का यह आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल हैै। भले ही कोई कानून न माने लेकिन जो भारतीय परिवार व्यवस्था है उसमें ससुराल में सास-ससुर ही माता पिता की भूमिका में होते हैं। यह सही है कि एक युवती 20-15 वर्ष अपने माता पिता के साथ रहने के बाद दूसरे परिवार में बहुत की भूमिका में आ जाती है, इसलिए उसे भी ससुराल में मान सम्मान मिलना ही चाहिए। वैसे भी अब परिवारों की सोच में बदलाव हो रहा है। पीहर जाने के लिए कोई बहुत वाकई अनुमति नहीं लेती है। सास-ससुर को तो सिर्फ यह बताया जाता है कि बहु कितने दिन के लिए पीहर जा रही है। इसके साथ ही अधिकांश सास ससुर या तो अपने बैअे और बहुत से अलग रह रहे हैं या फिर सेवा की अपेक्षा नहीं रखते। हर सास-ससुर यही चाहता है कि उसका बेटा और बहुत स्वतंत्रता के साथ आराम से रहे। कोई भी सास-ससुर अपनी बहुत से सेवा की अपेक्षा नहीं रखता। जब बेटे में ही सेवाभाव नहीं है तो फिर बहुत से अपेक्षा कैसे की जा सकती है। जस्टिस सुमालया माने या नहीं, लेकिन अब परिवार व्यवस्था में भी बहुत बदलाव आ गया है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026)
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