Monday, 24 August 2026
तो अब माता-पिता बच्चों के लिव इन रिलेशन में रहने पर ऐतराज भी नहीं कर सकते।
आखिर माता-पिता की पीड़ा को कौन समझेगा?
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दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा है कि लिव इन रिलेशन में रहने वाले बालिगों के जीवन में उनके माता-पिता, भाई-बहन और अन्य रिश्तेदार दखल नहीं दे सकते। इसके साथ ही जस्टिस बनर्जी ने याचिकाकर्ता एक जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने के आदेश भी दिए। जस्टिस बनर्जी ने कहा कि जो बालिग जोड़े आपसी सहमति और इच्छा से एक साथ रह रहे हैं, उन पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे जोड़ों को संरक्षण प्रदान किया है। यानी जो बेटी अपने दोस्त के साथ रह रही है, उस बेटी के माता-पिता ऐतराज भी नहीं कर सकते हैं। यदि ऐतराज करेंगे तो पुलिस माता-पिता को ही गिरफ्तार कर लेगी। यह सब उस सनातनी देश में हो रहा है, जहां शादी को एक पवित्र बंधन माना गया है। भारतीय संस्कृति में बालिग युवक-युवती के एक साथ रहने की कभी कल्पना नहीं की गई। शादी के बाद ही एक साथ रहने की अनुमति होती है। लेकिन अब तो बिना विवाह के लिवइन रिलेशन में रहने की आजादी मिल गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भले ही कानून के प्रावधानों के अंतर्गत आदेश दिया हो, लेकिन उन माता-पिता की पीड़ा को समझा जाना चाहिए जिनकी बालिग बेटी या बेटा लिव इन में रह रहे है। सवाल यह भी है कि क्या माता-पिता को अपनी बेटी या बेटे को समझाने का भी अधिकार नहीं रहा? जिस माता पिता ने अनेक कठिनाइयों से बेटी या बेटे को पाला यदि वह बेटी अपने दोस्त के साथ बिना विवाह के रह रही है तो उन माता-पिता की पीड़ा को भी समझा जाना चाहिए। यह माना कि भारत की सनातन संस्कृति में पश्चिम की संस्कृति का प्रभाव हो गया है, इसलिए लिव इन रिलेशन में रहने वाले जोड़ों को कानूनी संरक्षण भी मिल गया है, लेकिन इससे भारत की जो विवाह पद्धति है उस को नुकसान पहुंच रहा है। सबसे बड़ी समस्या बच्चों के जन्म की है। लिव इन रिलेशन में रहने वाले जोड़ों के विवाह अधिक उम्र में होते हैं और फिर बच्चा पैदा करने में भी विलंब किया जाता है। ऐसे में विवाहित जोड़े बच्चा पैदा करने के लायक नहीं रहते। इससे भारत का सामाजिक ताना-बाना भी खराब हो रहा है। जिस सनातन संस्कृति में परदादा, परदादी की परंपरा है, उसमें माता-पिता बनना भी कठिन होता जा हा है। जो जोड़े लिवइन में रह रहे हैं, उनकी विवाह में भी रुचि नहीं रहती। इसे अफसोस नाक ही कहा जाएगा कि माता पिता अपने गृह शहर में अकेले रह रहे हैं और बेटे बेटी किसी महानगर में अपने मित्र के साथ लिवइन रिलेशन में रह रहे है। लिवइन के बढ़ते प्रचलन के कारण ही युवा जोड़ों के विवाह के बाद तलाक भी हो रहे हैं। अदालतों में तलाक के मामलों की बाढ़ आ गई है। चिंताजनक बात यह है कि विवाह के एक माह बाद ही तलाक का आवेदन किया जा रहा है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 21-08-2026)
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