10 वर्ष अजमेर के मेयर रहने वाले धर्मेन्द्र गहलोत ने भाजपा छोड़ी।
कांग्रेस के हाथों-हाथ लपका।
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10 वर्ष तक अजमेर के मेयर रहने वाले धर्मेन्द्र गहलोत ने 20 अगस्त को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। गहलोत ने यह इस्तीफा तब दिया, जब एक दिन पहले ही भाजपा के प्रदेश नेतृत्व में उन्हें नागौर नगर परिषद का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया था। गहलोत का आरोप है कि अजमेर उत्तर के भाजपा विधायक और राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी आरोप के चलते उन्हें 18 अगस्त को स्वायत शासन विभाग ने दो प्रकरणों में नोटिस जारी किए है। एक प्रकरण मेयर रहते हुए का है। 13 नक्शों की स्वीकृति के मामले में जो नोटिस दिया गया है, उसमें कहा गया है कि क्यों न उन्हें 6 वर्ष तक नगरीय निकायों के पुनिर्वाचन के अयोग्य घोषित कर दिया जाए। गहलोत ने कहा कि जब उन्हें स्वयं को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित करने वाला नोटिस दिया जा रहा है तब वे नागौर में भाजपा के चुनाव प्रभारी की भूमिका कैसे निभा सकते है। गहलोत ने माना कि देवनानी के साथ उनके वैचारिक मतभेद है। नोटिस से नाराज गहलोत ने कहा कि वे किसी से भी डरने वाले नहीं है। वही भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी ने कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं होता। किसी के आने जाने से भाजपा पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।
कांग्रेस ने लपका:
पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का इस्तीफा ऐसे समय में हुआ, जब नगर निगम के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। गहलोत के इस्तीफे में कांग्रेस अपना लाभ देख रही है। इसलिए कांग्रेस के नेताओं को गहलोत से सहानुभूति हो गई है। कांग्रेस के जो नेता कल तक भाजपा नेता के रूप में गहलोत की आलोचना करते थे, उनके विचार अचानक बदल गए है। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने कहा कि भाजपा हमेशा डराने, धमकाने वाला काम करती है। गहलोत को भी डराने के लिए नोटिस दिलवाए गए हे। आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ ने कहा कि गहलोत का इस्तीफा बताता है कि भाजपा में आंतरिक विरोध चरम पर है। भाजपा के नेता स्वयं ही सुरक्षित नहीं है। वही शहर उपाध्यक्ष एडवोकेट विवेक पाराशर ने कहा कि अब जब धर्मेन्द्र गहलोत ने भाजपा छोड़ दी है, तब कांग्रेस गहलोत के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि गहलोत सूझबूझ वाले राजनेता है। आवश्यकता होने पर गहलोत के साथ मिलकर नगर निगम चुनाव की रणनीति भी बनाई जाएगी। पाराशर ने कहा, गहलोत राजनेता के साथ साथ वकील भी है, इसलिए वकील समुदाय भी गहलोत के साथ खड़ा है। गहलोत को जो नोटिस दिया गया है, उसमें भी सभी वकील मिलकर गहलोत को कानूनी सहायता उपलब्ध करवाएंगे।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 21-08-2026)
कांग्रेस के हाथों-हाथ लपका।
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10 वर्ष तक अजमेर के मेयर रहने वाले धर्मेन्द्र गहलोत ने 20 अगस्त को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। गहलोत ने यह इस्तीफा तब दिया, जब एक दिन पहले ही भाजपा के प्रदेश नेतृत्व में उन्हें नागौर नगर परिषद का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया था। गहलोत का आरोप है कि अजमेर उत्तर के भाजपा विधायक और राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी आरोप के चलते उन्हें 18 अगस्त को स्वायत शासन विभाग ने दो प्रकरणों में नोटिस जारी किए है। एक प्रकरण मेयर रहते हुए का है। 13 नक्शों की स्वीकृति के मामले में जो नोटिस दिया गया है, उसमें कहा गया है कि क्यों न उन्हें 6 वर्ष तक नगरीय निकायों के पुनिर्वाचन के अयोग्य घोषित कर दिया जाए। गहलोत ने कहा कि जब उन्हें स्वयं को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित करने वाला नोटिस दिया जा रहा है तब वे नागौर में भाजपा के चुनाव प्रभारी की भूमिका कैसे निभा सकते है। गहलोत ने माना कि देवनानी के साथ उनके वैचारिक मतभेद है। नोटिस से नाराज गहलोत ने कहा कि वे किसी से भी डरने वाले नहीं है। वही भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी ने कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं होता। किसी के आने जाने से भाजपा पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।
कांग्रेस ने लपका:
पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का इस्तीफा ऐसे समय में हुआ, जब नगर निगम के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। गहलोत के इस्तीफे में कांग्रेस अपना लाभ देख रही है। इसलिए कांग्रेस के नेताओं को गहलोत से सहानुभूति हो गई है। कांग्रेस के जो नेता कल तक भाजपा नेता के रूप में गहलोत की आलोचना करते थे, उनके विचार अचानक बदल गए है। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने कहा कि भाजपा हमेशा डराने, धमकाने वाला काम करती है। गहलोत को भी डराने के लिए नोटिस दिलवाए गए हे। आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ ने कहा कि गहलोत का इस्तीफा बताता है कि भाजपा में आंतरिक विरोध चरम पर है। भाजपा के नेता स्वयं ही सुरक्षित नहीं है। वही शहर उपाध्यक्ष एडवोकेट विवेक पाराशर ने कहा कि अब जब धर्मेन्द्र गहलोत ने भाजपा छोड़ दी है, तब कांग्रेस गहलोत के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि गहलोत सूझबूझ वाले राजनेता है। आवश्यकता होने पर गहलोत के साथ मिलकर नगर निगम चुनाव की रणनीति भी बनाई जाएगी। पाराशर ने कहा, गहलोत राजनेता के साथ साथ वकील भी है, इसलिए वकील समुदाय भी गहलोत के साथ खड़ा है। गहलोत को जो नोटिस दिया गया है, उसमें भी सभी वकील मिलकर गहलोत को कानूनी सहायता उपलब्ध करवाएंगे।
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