Monday, 24 August 2026

वर्ष 2013 में जिन राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के अध्यादेश की प्रतियों को सरेआम फाड़ डाला था, उन्हीं राहुल गांधी को अब एक एफआईआर दर्ज करवाने के लिए 7 घंटे धरने पर बैठना पड़ा। दिल्ली में 20 जुलाई की हिंसा और अराजकता की जांच के लिए हाई पावर्ड कमेटी काम कर रही है। क्या राहुल गांधी स्वयं को सुप्रीम कोर्ट और देश के संविधान से ऊपर समझते हैं? ============== इतिहास गवाह है कि 25 सितंबर 2013 को कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन केंद्र सरकार के उस अध्यादेश की प्रतियों को फाड़ डाला था जो दागी और सजायाफ्ता राजनेताओं को राहत पहुंचाने से संबंधित था। उस समय केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की गठबंधन की सरकार चल रही थी। राहुल गांधी द्वारा अध्यादेश की प्रतियों को फाड़ने के बाद केंद्र सरकार को अपना अध्यादेश वापस लेना पड़ा। इससे स समय राहुल गांधी की राजनीतिक ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। तब प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की भी इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे राहुल गांधी के इस कृत्य पर नाराजगी प्रकट करते। केंद्र सरकार को सरेआम अपमानित करने के बाद भी पूरी गठबंधन की सरकार चुप रही। लेकिन 13 वर्ष बाद 21 अगस्त को 2026 को उन्हीं राहुल गांधी को एक एफआईआर दर्ज करवाने के लिए सात घंटे तक दिल्ली में संसद भवन, पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठना पड़ा। इसे अब राहुल गांधी की राजनीतिक ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह समय का फेर ही है कि अब राहुल गांधी के लिए एक एफआईआर दर्ज करवाना भी आसान नहीं है। क्या संविधान से ऊपर है राहुल?: 21 अगस्त को राहुल गांधी के 7 घंटे के धरने के बाद पुलिस ने गत 20 जुलाई को जंतर मंतर की हिंसा में घायल हुए युवक सहित लोहचब की ओर से अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करी। साहिल का आरोप है कि पुलिस ने जो पेलेटगन चलाई उसकी वजह से वह जख्मी हुआ। हालांकि इस एफआईआर को दर्ज करने से पहले दिल्ली पुलिस के बड़े अधिकारियों ने राहुल गांधी को बताया कि कानूनन एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती है क्योंकि 20 जुलाई की हिंसा और अराजकता की जांच के लिए पहले ही सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज आर.सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय हाई पवार्ड कमेटी बन गई है। इस कमेटी का सदस्य हाईकोर्ट के पूर्व जज रविशंकर झा व शैलिन्द्र सिंह के साथ सााि सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ता व मेघालय के पूर्व डीजीपी एल.आर.विश्नोई को कमेटी का सदस्य बनाया गया है। यह कमेटी पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है। राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत का बयान भी बताया गया, जिसमें सूर्यकांत ने कहा, में स्वयं 20 जुलाई के घटना की जांच पर नजर रखे हुए हैं। यानी हाईपवार्ड कमेटी की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है, इसलिए एक युवक की अलग से एफआईआर दर्ज करना संवैधानिक दृष्टि से गलत होगा, लेकिन राहुल गांधी अपनी जिद पर अड़े रहे और कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, तब तक धरने पर बैठे रहेंगे। चूंकि राहुल गांधी लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता के संवैधानिक पद पर है, इसलिए दिल्ली पुलिस ने उच्च स्तर पर विचार विमर्श कर पीड़ित साहित की एफआईआर दर्ज कर ली। सवाल उठता है कि क्या राहुल गांधी स्वयं को सुप्रीम कोर्ट और देश के संविधान से ऊपर समझते हैं? जिस घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है, उस घटना की अलग से एक एफआईआर दर्ज करवाने के क्या मायने है? 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में जो हिंसा और अराजकता हुई, वह किसी से छिपी नहीं है। अब यह बात, उजागर हो गई है कि हिंसा में असामाजिक तत्व शामिल थे। S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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