राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र छोटा रखने पर कांग्रेस को ऐतराज।
सवाल-तो फिर अध्यक्ष देवनानी के प्रस्ताव पर अमल क्यों नहीं होता?
गहलोत के शासन में वर्ष में 30-32 बैठकें ही होती थी।
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20 अगस्त से शुरू हो रहे राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर 18 अगस्त को राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक हुई। इस बैठक में अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सत्र के बारे में नेताओं को जानकारी दी। बैठक के बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार मानसून सत्र को मात्र चार पांच दिन ही चलाना चाहती है। सरकार की मंशा से लगता है कि सरकार विधानसभा से भाग रही है । यदि मानसून सत्र अधिक दिनों तक चलेगा तो सदन में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि विधानसभा की बैठक ज्यादा होनी चाहिए, इसलिए अध्यक्ष बनने के बाद देवनानी ने प्रस्ताव रखा था कि जिस प्रकार संसद के तीन सत्र होते हैं, उसी प्रकार विधानसभा के भी तीन सत्र हो ताकि बैठक ज्यादा हो सके। राजस्थान में अभी एक वर्ष में दो सत्र की ही परंपरा है। एक बजट सत्र और दूसरा मानसून। देवनानी का प्रस्ताव है कि संसद की तरह शीतकालीन सत्र भी हो। कांग्रेस जब मानसून सत्र की अवधि को लेकर नाराजगी जता रही है, तब सवाल उठता है कि अध्यक्ष देवनानी के प्रस्ताव पर अमल क्यों नहीं किया जाता? क्या कांग्रेस ने कभी यह प्रयास किया कि राजस्थान में भी विधानसभा के तीन सत्र हो? जहां तक कांग्रेस शासन में विधानसभा की बैठकों का सवाल है तो अशोक गहलोत के तीन बार के कार्यकाल में एक वर्ष में 30-32 ही बैठकें हो सकी। यानी कांग्रेस शासन में भी विधानसभा की बैठकों की संख्या बढ़ाने का काम नहीं हुआ। अब जब कांग्रेस विपक्ष में है तो विधानसभा की बैठक बढ़ाने की मांग कर रही है।विधानसभा का रिकॉर्ड बताता है कि इस वर्ष बजट सत्र में 24 बैठकें हो चुकी है। यानी कांग्रेस के शासन से मात्र 8 दिन कम है। अब जब 20 अगस्त से मानसून सत्र शुरू हो रहा है तो सरकार की मंशा इसे 25 अगस्त तक ही चलाने की है। चूंकि प्रदेश में पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव हो रहे है, इसलिए विधानसभा सत्र को छोटा रखा गया है। चूंकि 6 माह की अवधि में विधानसभा सत्र बुलाने की अनिवार्यता है, इसलिए 20 अगस्त से विधानसभा बुलाई गई है। बजट सत्र में इसी वर्ष 28 जनवरी को शुरू हुआ था। ऐसे में 6 माह की अवधि को ध्यान में रखते हुए मानसून सत्र आहूत किया गया। चूंकि चुनाव के कारण सत्र छोटा है, इसलिए नवंबर माह में एक सत्र और बुलाया जाएगा। मानसून सत्र को लेकर भाजपा ने अपना एजेंडा साफ कर दिया है। इस सत्र में सरकार की ओर से राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड और ट्रीज प्रोटेक्शन बिल प्रस्तुत किए जाएंगे। जबकि कांग्रेस ने बता दिया है कि जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा। कांग्रेस ने जिस तरह संसद के मानसून सत्र में हंगामा किया उसी प्रकार राजस्थान विधानसभा में भी कांग्रेस के विधायक हंगामा करेंगे। यानी संसद की तरह विधानसभा को भी बाधित किया जाएगा।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 19-08-2026)
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