Tuesday, 25 August 2026

इधर कश्मीरी पंडितों के 28 वर्ष पुराने वंधामा नरसंहार की जांच दोबारा से, उधर आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों की हत्या की फिर धमकी दी। लेकिन अब आतंकियों को यह समझना चाहिए कि जम्मू कश्मीर का माहौल 90 के दशक वाला नहीं है। ================= जम्मू कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने 1998 के बहुचर्चित वंधामा नरसंहार की जांच फिर से करने का फैसला किया है। 90 के दशक में जब जम्मू कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था, तब 25 जनवरी 1998 में गांदरबल जिले के वंधामा गांव में कश्मीरी पंडितों के घरों में घुसकर आतंकियों ने एक ही रात में 23 लोगों की हत्या कर दी थी। ऐसी घटनाओं की वजह से ही चार लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को जम्मू कश्मीर छोड़ना पड़ा। इधर जांच एजेंसियों ने वंधामा नरसंहार की जांच फिर से शुरू करने की घोषणा की तो उधर पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (यूएलसी) ने कुछ कश्मीरी पंडितों के नाम और पते जारी कर हत्या की धमकी दी है। आतंकियों ने कहा कि कश्मीरी पंडितों की हर गतिविधियों पर हमारी नजर है। यानी आतंकी चाहते है कि जम्मू कश्मीर खासकर कश्मीर घाटी में एक भी हिन्दू न रहे, लेकिन यूएलसी जैसे आतंकी संगठनों को अब यह समझना चाहिए कि जम्मू कश्मीर में 90 के दशक वाला माहौल नहीं है। उस समय कश्मीरी पंडितों की हत्या करना आतंकियों के लिए आसान था। एक तरफ से पूरा कश्मीर आतंकियों के कब्जे में था। तब कश्मीर में कट्टरपंथियों का ही दबदबा था, लेकिन अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कश्मीर का माहौल बदल गया है। सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन ऑल आउट चलाकर आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया है। अब कश्मीर में 90 के दशक वाली घटनाएं नहीं हो पाती। जिस कश्मीर में वर्ष भर कर्फ्यू जैसे हालात रहते थे, वहां अब बाजारों में भीड़ नजर आ रही है। पर्यटन भी तेजी से बढ़ा है। राजधानी श्रीनगर के लाल चौक पर शान से तिरंगा भी लहरा रहा है। कश्मीरियों के भी यह समझ में आ गया है कि शांति रहेगी तो पर्यटन के माध्यम से रोजगार मिलता रहेगा। इसके साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जिस तरह कश्मीरी मुसलमानों को कुचला जा रहा है उससे भी हमारे कश्मीरियों ने सबक लिया है। आम कश्मीरी यह मानता है कि भारत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों से कश्मीर में न केवल विकास हुआ बल्कि आम कश्मीरी को शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, रोजगार आदि की सुविधा भी मिली है। अब आतंकियों को कश्मीर में पहले जैसा संरक्षण नहीं मिलता है। उल्टे अब कश्मीरी नागरिक ही आतंकियों की गतिविधियों की जानकारी सुरक्षा बलों को देते हैं। यही वजह है कि आतंकी गतिविधियों पर नियंत्रण हुआ है। यदि यूएलसी के आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया तो उन्हें सुरक्षा बलों के हथियारों के अंजाम भी भुगतने होंगे। सुरक्षा बलों का ऑल आउट ऑपरेशन अभी भी जारी है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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