Tuesday, 25 August 2026
तो फिर राहुल गांधी यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध क्यों कर रहे हैं।
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लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 22 अगस्त को पुणे में छात्रों की गूंज अपने कार्यक्रम में छात्राओं पर विशेष फोकस किया। उन्होंने अपने इस अभियान को बंदिशों का पिंजड़ा तोड़ों नाम दिया। और आरोप लगाया कि मनुस्मृति में महिला को बचपन से ही दबाने का काम किया गया है। महिला की पहचान बेटी, पत्नी और मां तक ही सीमित रखी है। राहुल गांधी ने कहा कि जब देश में महिलाओं की संख्या 70 करोड़ है तो उनके अधिकारों को दबाया नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने महिलाओं के अधिकारों की बात कर सराहनीय काम किया है। उम्मीद है कि राहुल गांधी की नजर में भारत में रहने वाली सभी धर्मों की महिलाएं शामिल होंगे आज देश के विभिन्न राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया जा रहा है। 22 अगस्त को राहुल गांधी ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर जितनी भी समस्या रखी, उन सब का समाधान यूनिफॉर्म सिविल कोड में है। जिन राज्यों में यूसीसी लागू हो चुका है, वहां जाकर राहुल गांधी को महिलाओं के अधिकारों का अध्ययन करना चाहिए। यूसीसी इसलिए लागू किया जा रहा है। ताकि महिलाओं को भी समान रूप से अधिकार मिल सके। जिन राज्यों में यूसीसी लागू हो गया है, वहां कानून विवाह और तलाक के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देगा। वसीयत, विरासत, पैतृक सम्पत्ति के मामलों में बेटियों (विवाहित और अविवाहित दोनों) गर्भस्थ शिशुओं को भी बेटों के समान उत्तराधिकार प्राप्त होगा। विभिन्न धर्मों के जटिल और बिखरे हुए पर्सनल लॉ की जगह विधेयक से सरल और सुलभ और एकीकृत कानून व्यवस्था लागू हो सकेगी। जाति और धर्म के आधार पर नागरिक अधिकारों में भेदभाव समाप्त होने से समारोह में समरसता और देश की अखंडता मजबूत होगी। विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 और महिला के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 24-08-2026)
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