अजमेर विकास प्राधिकरण के जिस नवनिर्मित भवन का लोकार्पण केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया उस पर ठेकेदार ने ताला लगा दिया।
बिना राजनीतिक संरक्षण के ऐसी हिमाकत नहीं हो सकती।
यह कृत्य डबल इंजन की सरकार को धमकाने वाला है।
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16 अगस्त को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के निंबाहेड़ा और अलवर से प्रदेश के 11 हजार 953 करोड़ कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास भी किए। अपने संबोधन में अमित शाह ने इन परियोजनाओं को डबल इंजन की उपलब्धि बताया। अमित शाह के साथ दोनों स्थानों पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे। केंद्रीय गृहमंत्री ने जिन योजनाओं का लोकार्पण किया उनमें अजमेर के करीब 68 करोड़ के कार्य भी शामिल रहे। लोकार्पण वाली सूची में अजमेर विकास प्राधिकरण का नवनिर्मित भवन भी है। इस भवन की लागत 25 करोड़ 98 लाख बताई जा रही है। चूंकि नए भवन का लोकार्पण 16 अगस्त को हो गया था, इसलिए उच्च स्तर पर निर्णय लिया गया कि मौजूदा पुराने भवन से नए भवन में शिफ्टिंग का काम 19 अगस्त से शुरू किया जाएगा। लेकिन 19 अगस्त को कुछ विभाग शिफ्ट होते इससे पहले ही भवन का निर्माण करने वाले ठेकेदार अरिहंत ने मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। ठेकेदार ने कहा कि उसका दो करोड़ रुपया बकाया है, जब तक बकाया भुगतान नहीं हो जाता तब तक मुख्य द्वार पर ताला लगा रहेगा। ठेकेदार का आरोप रहा कि उसने एक वर्ष पहले ही नया भवन प्राधिकरण को सौंप दिया, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं हो रहा। 19 अगस्त को जब कुछ अधिकारी जयपुर रोड स्थित नए भवन पर पहुंचे तो दोनों मुख्य द्वारों पर ताला लगा हुआ था। गंभीर बात तो यह है थी कि मौके पर सुरक्षा गार्ड भी नहीं था। ऐसी स्थिति में अधिकारियों को ताले तुड़वाने पड़े। नवनिर्मित भवन पर ठेकेदार द्वारा ताले लगाने की घटना से पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
राजनीतिक संरक्षण:
आमतौर पर ठेकेदारों का बकाया रहता ही है। अजमेर विकास प्राधिकरण के मामले में बताया जा रहा है कि फाइनल बिल के मात्र 2 करोड़ रुपए बकाया है। इंजीनियरों का तर्क है कि फाइनल बिल की राशि इसलिए रोकी गई है ताकि शिफ्टिंग के बाद कोई खामी हो तो उसी ठेकेदार से दूर करवाया जाए। प्राधिकरण के अधिकारी भी ठेकेदार के ताला लगाने के कृत्य को गलत माना हैं। माना जा रहा है कि ठेकेदार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, इसलिए उसने नवनिर्मित भवन पर ताला लगाने जैसी हिमाकत की है। ठेकेदार का यह कृत्य डबल इंजन की सरकार को धमकाने वाला भी है। यदि ठेकेदार ही सरकारी भवनों पर ताला लगाने लगेंगे तो फिर व्यवस्था चौपट हो जाएगी। अजमेर प्राधिकरण का मामला इसलिए भी गंभीर है कि नवनिर्मित भवन का लोकार्पण केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया था।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-08-2026)
बिना राजनीतिक संरक्षण के ऐसी हिमाकत नहीं हो सकती।
यह कृत्य डबल इंजन की सरकार को धमकाने वाला है।
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16 अगस्त को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के निंबाहेड़ा और अलवर से प्रदेश के 11 हजार 953 करोड़ कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास भी किए। अपने संबोधन में अमित शाह ने इन परियोजनाओं को डबल इंजन की उपलब्धि बताया। अमित शाह के साथ दोनों स्थानों पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे। केंद्रीय गृहमंत्री ने जिन योजनाओं का लोकार्पण किया उनमें अजमेर के करीब 68 करोड़ के कार्य भी शामिल रहे। लोकार्पण वाली सूची में अजमेर विकास प्राधिकरण का नवनिर्मित भवन भी है। इस भवन की लागत 25 करोड़ 98 लाख बताई जा रही है। चूंकि नए भवन का लोकार्पण 16 अगस्त को हो गया था, इसलिए उच्च स्तर पर निर्णय लिया गया कि मौजूदा पुराने भवन से नए भवन में शिफ्टिंग का काम 19 अगस्त से शुरू किया जाएगा। लेकिन 19 अगस्त को कुछ विभाग शिफ्ट होते इससे पहले ही भवन का निर्माण करने वाले ठेकेदार अरिहंत ने मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। ठेकेदार ने कहा कि उसका दो करोड़ रुपया बकाया है, जब तक बकाया भुगतान नहीं हो जाता तब तक मुख्य द्वार पर ताला लगा रहेगा। ठेकेदार का आरोप रहा कि उसने एक वर्ष पहले ही नया भवन प्राधिकरण को सौंप दिया, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं हो रहा। 19 अगस्त को जब कुछ अधिकारी जयपुर रोड स्थित नए भवन पर पहुंचे तो दोनों मुख्य द्वारों पर ताला लगा हुआ था। गंभीर बात तो यह है थी कि मौके पर सुरक्षा गार्ड भी नहीं था। ऐसी स्थिति में अधिकारियों को ताले तुड़वाने पड़े। नवनिर्मित भवन पर ठेकेदार द्वारा ताले लगाने की घटना से पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
राजनीतिक संरक्षण:
आमतौर पर ठेकेदारों का बकाया रहता ही है। अजमेर विकास प्राधिकरण के मामले में बताया जा रहा है कि फाइनल बिल के मात्र 2 करोड़ रुपए बकाया है। इंजीनियरों का तर्क है कि फाइनल बिल की राशि इसलिए रोकी गई है ताकि शिफ्टिंग के बाद कोई खामी हो तो उसी ठेकेदार से दूर करवाया जाए। प्राधिकरण के अधिकारी भी ठेकेदार के ताला लगाने के कृत्य को गलत माना हैं। माना जा रहा है कि ठेकेदार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, इसलिए उसने नवनिर्मित भवन पर ताला लगाने जैसी हिमाकत की है। ठेकेदार का यह कृत्य डबल इंजन की सरकार को धमकाने वाला भी है। यदि ठेकेदार ही सरकारी भवनों पर ताला लगाने लगेंगे तो फिर व्यवस्था चौपट हो जाएगी। अजमेर प्राधिकरण का मामला इसलिए भी गंभीर है कि नवनिर्मित भवन का लोकार्पण केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया था।
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