Monday, 24 August 2026

 

कांग्रेस विधायकों के साथ यदि कार्यकर्ता भी घुस जाते तो राजस्थान विधानसभा का क्या होता?

अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की समझदारी से हादसा टला।

इसलिए पीएम मोदी ने दिमागी नक्सली की बात कही।
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राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 20 अगस्त को शुरू हुआ। आमतौर पर सभी विधायक अपने वाहनों से विधानसभा के परिसर में प्रवेश करते है। पोर्च में वाहन से उतरने के बाद सदन में पैदल जाते हैं। लेकिन 20 अगस्त को कांग्रेस के विधायक पैदल विधानसभा के मुख्य द्वार पर पहुंचे। विधायकों के साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता भी थे। इस भीड़ को देखते हुए विधानसभा के सुरक्षा गार्डों ने विधायकों को भी प्रवेश नहीं दिया। कांग्रेस के विधायक चाहते थे कि उनके साथ कार्यकर्ताओं को भी विधानसभा परिसर में घुसने दिया जाए। गंभीर बात तो यह थी कि विधायकों और कार्यकर्ताओं को नेतृत्व टीकाराम जूली, कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट कर रहे थे। यह तीनों नेता भी विधायक है। जब  विधायकों को कार्यकर्ताओं के साथ प्रवेश नहीं दिया गया तो सभी विधायक मुख्य द्वार के बाहर धरने पर बैठ गए। सवाल उठता है कि यदि कांग्रेस विधायकों को कार्यकर्ताओं के साथ घुसने दिया जाता तो विधानसभा परिसर का क्या हाल होता? क्या कांग्रेस के कार्यकर्ता शांत रहते? वैसे भी बिना अनुमति के कोई भी व्यक्ति परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि 20 अगस्त को अध्यक्ष देवनानी ने सूझबूझ का परिचय दिया। यदि देवनानी समझदारी नहीं दिखाते तो 20 अगस्त को विधानसभा में बड़ा हादसा हो जाता। राजस्थान के संसदीय इतिहास में यह पहला अवसर रहा, जब विपक्षी दल के विधायकों ने भीड़ के साथ विधानसभा में घुसने का प्रयास किया। असल में कांग्रेस के विधायक सदन में जाना ही नहीं चाहते थे। इसे भी अफसोसनाक कहा जाएगा कि 20 अगस्त को जब विधानसभा में दिवंगत पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि दी जा रही थी, तब विपक्ष का कोई विधायक उपस्थित नहीं था। जबकि दिवंगत पूर्व विधायकों में कांग्रेस के विधायक भी शामिल थे। यानी कांग्रेस ने अपने पूर्व विधायकों के प्रति भी संवेदना नहीं दिखाई।
 
दिमागी नक्सली:
देश के राजनीतिक हालातों को देखते हुए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भले ही देश से नक्सलवाद समाप्त हो गया है, लेकिन कुछ नेता दिमागी नक्सली हो गए हैं, इसलिए संसद में गैर जिम्मेदाराना व्यवहार किया जा रहा है। मालूम हो कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने संसद का मानसून सत्र भी नहीं चलने दिया। कांग्रेस ने जो रवैया संसद में अपनाया वही रवैया राजस्थान विधानसभा में अपना रही है। विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस लगातार हंगामा करती रहेेगी। कांग्रेस के विधायकों ने 20 अगस्त को जो कृत्य किया वह दिमागी नक्सली वाला ही था। आने वाले दिनों में भी कांग्रेस का ऐसा ही कृत्य सामने आएगा। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 21-08-2026)

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