Tuesday, 28 July 2026

 पंचायत और निकाय चुनाव में विलंब के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार।

एसआईआर से पहले की मतदाता सूची से होंगे चुनाव।

राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्र में पांच करोड़ 43 लाख तथा शहरी क्षेत्र में एक करोड़ 2 लाख मतदाता।

निकाय चुनाव पहले करवाने का फैसला प्रशासनिक है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि मैं ज्यादा सामाजिक व्यक्ति नहीं हूं।
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फर्स्ट इंडिया न्यूज चैनल के मैनेजिंग एडिटर और सीईओ पवन अरोड़ा (सेवानिवृत्त आईएएस) ने राजस्थान के निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह से सीधा संवाद किया है। इस संवाद में राजेश्वर सिंह ने प्रदेश में होने वाले पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनावों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। जब पवन अरोड़ा ने जानना चाहा कि इन चुनावों में विलंब के लिए कौन जिम्मेदार है तो राजेश्वर सिंह ने कहा कि चुनाव करवाने के लिए निर्वाचन आयोग ने कई पत्र राज्य सरकार को लिखे। इन पत्रों में सरकार से कहा गया कि एससी एसटी, ओबीसी और महिहलाओं के लिए आरक्षण की जानकारी उपलब्ध करवाई जाए, लेकिन सरकार ने समय रहते आरक्षण नहीं किया। संवैधानिक व्यवस्थाओं के अंतर्गत संबंधित वर्गों के लिए आरक्षण के बगैर निर्वाचन आयोग चुनाव की घोषणा नहीं कर सकता। संविधान में आरक्षण निर्धारित करने का अधिकार सरकार के पास ही है, इसलिए पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में विलंब के लिए निर्वाचन आयोग जिम्मेदार नहीं है। वन स्टेट, वन इलेक्शन के सवाल पर राजेश्वर सिंह ने कहा कि यह कितनी बड़ी उपलब्धि है इसका पता आने वाले समय में लगेगा। पवन अरोड़ा ने जानना चाहा कि पंचायती राज से पहले शहरी निकायों के चुनाव कराने का फैसला क्या राज्य की भाजपा सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। इस पर राजेश्वर सिंह ने कहा कि यह एक प्रशासनिक फैसला है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या करीब पांच करोड़ 43 लाख है, इसलिए बाद में चुनाव करवाने का फैसला किया गया। जबकि शहरी क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 2 लाख है। शहरी क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या कम होने े के कारण पहले चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है। निर्वाचन आयोग यह नहीं देखता है कि चुनाव की प्रक्रिया से किस राजनीतिक दल को फायदा हो रहा है। आयोग का उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव करवाना है। मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शिता के साथ होंगे। उन्होंने बताया कि शहरी निकायों के चुनाव 2 तथा पंचायत राज के चुनाव चार चरणों में होंगे। मतदाताओं की संख्या को देखते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग और मध्यप्रदेश से ईवीएम मंगाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे। राजेश्वर सिंह ने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट ने चुनाव करवाने के लिए इसी वर्ष जो 15 नवंबर तक की डेडलाइन दी है, उसके अनुरूप प्रदेश में शहरी निकाय और पंचायती राज के चुनाव संपन्न हो जाएंगे। सरकार ने हाईकोर्ट में लिखित में दिया है कि 5 अगस्त तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट मिल जाएगी और 14 अगस्त तक एससी, एसटी, ओबीसी और महिला वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण कर दिया जाएगा। चुनाव आयोग ने पहले ही कहा है कि आरक्षण की रिपोर्ट मिलते ही तीन माह के अंदर अंदर चुनाव करवा लिए जाएंगे।

एसआईआर वाली सूची से चुनाव नहीं:
चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि मतदाता पुनरीक्षण वाली सूची से पंचायती राज और निकायों के चुनाव नहीं होंगे। सरकार का कहना है कि अभी एसआईआर के अंतिम आंकड़े नहीं आए हैं। इसलिए 1 जनवरी 2025 के डेटा के आधार पर ही चुनाव करवाए जाएंगे। लेकिन 18 वर्ष की उम्र वाले मतदाताओं के नाम जोड़ने का काम अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि जहां तक ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों के वार्डों के परिसीमन का सवाल है तो यह कार्य पहले ही हो चुका है। प्रदेश में 14 हजार 403 ग्राम पंचायत हैं।

ज्यादा सामाजिक नहीं:
राजेश्वर सिंह ने स्वीकार किया कि वे ज्यादा सामाजिक व्यक्ति नहीं है। यही वजह है कि कुछ लोग उनकी कार्यशैली से खुश नहीं है। लेकिन वे सरल स्वभाव वाले व्यक्ति हैं। आईएएस की सेवा में रहते हुए भी उन्होंने अपने काम को प्राथमिकता दी। सरकारी नौकरी की व्यस्तता के बावजूद उनका साहित्य से लगाव रहा। यही वजह है कि उन्होंने अनेक कविताएं लिखी। साहित्य के प्रति रुचि उनकी पारिवारिक है। उनके पिता और दादा भी साहित्यकार रहे। चूंकि उनकी पढ़ाई इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में हुई, इसलिए उन्हें दार्शनिक माहौल भी मिला। 


S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-07-2026)

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