आखिर नैतिकता दिखाते हुए केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने एक करोड़ की सब्सिडी लौटाई।
भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व संतुष्ट।
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आखिर अजमेर के भाजपा सांसद और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने नैतिकता दिखाते हुए एक करोड़ की सरकारी सब्सिडी लौटा दी। मालूम हो कि चौधरी ने कुचामन जिले के पीह गांव में स्थित अपने कृषि फार्म पर व्यावसायिक खेती के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से एक करोड़ रुपए की सब्सिडी प्राप्त की थी। कृषि मंत्री होने के नाते कृषि मंत्रालय के अधीन आने वाले राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से सब्सिडी लेने पर जोरदार हंगामा हुआ। कांग्रेस ने मंत्री से इस्तीफे तक की मांग की, लेकिन तब चौधरी ने दृढ़ता के साथ कहा कि उन्होंने नियमों के अनुरूप आवेदन किया और सरकार से सब्सिडी ली। सरकार से सहायता वाला बोर्ड भी पीह के कृषि फार्म पर लगाया गया है। लेकिन विवाद के बाद यह मामला भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचा। चौधरी ने राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष भी अपने पक्ष को दृढ़ता के साथ रखा। जानकार सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय नेतृत्व ने माना कि चौधरी ने नियमों के अनुरूप सब्सिडी हासिल की है, लेकिन नैतिकता के नाते चौधरी को सब्सिडी नहीं लेनी चाहिए। थी। राष्ट्रीय नेतृत्व की सलाह पर ही चौधरी नैतिकता दिखाई और एक करोड़ रुपए की राशि वापस बैंक में जमा करवा दी। चौधरी ने बैंक अधिकारियों से आग्रह किया कि सब्सिडी की राशि को वापस राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के खाते में जमा करवा दिया जाए। चौधरी के सब्सिडी वापस करने से अब सब्सिडी वाला मामला समाप्त हो गया है। इसके साथ ही चौधरी ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि जब मीडिया में सब्सिडी वाला मामला उजागर हुआ तो चौधरी के मंत्री पद को भी खतरा उत्पन्न हो गया था।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-07-2026)
भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व संतुष्ट।
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आखिर अजमेर के भाजपा सांसद और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने नैतिकता दिखाते हुए एक करोड़ की सरकारी सब्सिडी लौटा दी। मालूम हो कि चौधरी ने कुचामन जिले के पीह गांव में स्थित अपने कृषि फार्म पर व्यावसायिक खेती के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से एक करोड़ रुपए की सब्सिडी प्राप्त की थी। कृषि मंत्री होने के नाते कृषि मंत्रालय के अधीन आने वाले राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से सब्सिडी लेने पर जोरदार हंगामा हुआ। कांग्रेस ने मंत्री से इस्तीफे तक की मांग की, लेकिन तब चौधरी ने दृढ़ता के साथ कहा कि उन्होंने नियमों के अनुरूप आवेदन किया और सरकार से सब्सिडी ली। सरकार से सहायता वाला बोर्ड भी पीह के कृषि फार्म पर लगाया गया है। लेकिन विवाद के बाद यह मामला भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचा। चौधरी ने राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष भी अपने पक्ष को दृढ़ता के साथ रखा। जानकार सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय नेतृत्व ने माना कि चौधरी ने नियमों के अनुरूप सब्सिडी हासिल की है, लेकिन नैतिकता के नाते चौधरी को सब्सिडी नहीं लेनी चाहिए। थी। राष्ट्रीय नेतृत्व की सलाह पर ही चौधरी नैतिकता दिखाई और एक करोड़ रुपए की राशि वापस बैंक में जमा करवा दी। चौधरी ने बैंक अधिकारियों से आग्रह किया कि सब्सिडी की राशि को वापस राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के खाते में जमा करवा दिया जाए। चौधरी के सब्सिडी वापस करने से अब सब्सिडी वाला मामला समाप्त हो गया है। इसके साथ ही चौधरी ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि जब मीडिया में सब्सिडी वाला मामला उजागर हुआ तो चौधरी के मंत्री पद को भी खतरा उत्पन्न हो गया था।
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