Sunday, 29 March 2015

सामाजिक सरोकारों से जुड़ी है मीडिया की भूमिका

सामाजिक सरोकारों से जुड़ी है मीडिया की भूमिका
अजमेर को स्मार्ट और हेरिटेज सिटी बनाने की योजना के अन्तर्गत 29 मार्च को गांधी भवन के टाऊन हॉल में एक संगोष्ठी हुई। इस संगोष्ठी में सहज योग संस्थान और प्रशासन द्वारा स्मार्ट सिटी के लिए बनाई गई उपसमिति के सदस्यों ने भाग लिया। समाज और मीडिया विषय पर संगोष्ठी में मुझे भी बोलने का अवसर मिला। मैंने कहा कि कुछ लोग अपने-अपने नजरिये से मीडिया की आलोचना कर सकते हंै। कई मुद्दों पर मीडिया की भूमिका जन आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं होती लेकिन फिर भी मीडिया सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहता है। राजस्थान पत्रिका की ओर से जो 'हमराहÓ कार्यक्रम चलाया जा रहा है वह समाज से जुड़ा हुआ है। सुबह के साफ-सुथरे वातावरण में लोगों को न केवल योग आदि सिखाए जाते है बल्कि मनोरंजन के कार्यक्रम भी प्रस्तुत होते हैं। बेटी बचाओ अभियान में तो पत्रिका की भूमिका सराहनीय रही है। अब जब समाज में लगातार बेटियों की संख्या बेटों के मुकाबले घटती जा रही है तब बेटी बचाओ अभियान बहुत ही उपयोगी है। गर्मी के दिनों में कुएं बावड़ी, तालाब आदि का जीर्णोद्धार करने में भी पत्रिका की भूमिका सामने आ रही है। इसी प्रकार दैनिक भास्कर की ओर से भी जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए अभियान चलाया जाता है। अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाने के काम में भी भास्कर अपनी ओर से जागरूकता के अनेक कार्यक्रम चला रहा है। भास्कर ने समय-समय पर बाजारों से अतिक्रमण, अस्थाई अतिक्रमण हटाने का भी अभियान चलाया है। इसी प्रकार दैनिक नवज्योति की ओर से भी जन जागरण के लिए अभियान चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती है। सिटीजन काउंसिल के माध्यम से दैनिक नवज्योति के प्रधान संपादक दीनबंधु चौधरी समय-समय पर जन समस्याओं को सरकार के समक्ष रखते है। मेरा यह सुझाव रहा कि प्रमुख मीडिया घरानों को भी स्मार्ट सिटी की योजना से जोड़ा जाए। चूंकि स्मार्ट और हेरिटेज के बहुत सारे काम है, इसलिए कुछ प्रमुख कार्यों की जिम्मेदारी अलग-अलग मीडिया घरानों को दे दी जाए। कई बार ऐसा होता है कि प्रशासन या कोई सामाजिक संस्था किसी एक अखबार का सहयोग लेती है तो दूसरे प्रतिद्वंदी अखबार में समारोह की खबर प्रकाशित नहीं होती है। मीडिया घरानों की आपसी प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए संभागीय आयुक्त धर्मेन्द्र भटनागर को चाहिए की वे अलग-अलग जिम्मेदारी दे दे। मेरा ऐसा मानना है कि यदि मीडिया घरानों को सम्मानपूर्वक कोई जिम्मेदारी दी गई तो ऐसा काम अवश्य सफल होगा। संगोष्ठी में डॉ. संदीप अवस्थी ने सहज योग के माध्यम से मन और शरीर को स्वस्थ करने के लिए प्रार्थना भी की। इस मौके पर म्यूजिक थैरेपी का भी अनुभव कराया गया। चन्दबरदाई साहित्य समिति के प्रमुख प्रेमराव ने सुझाव दिया कि विद्युत शव दाहगृह बनाया जाए ताकि बड़े पैमाने पर पेड़ों को कटने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति एक पेड़ लगाएगा उसका एक लाख रुपए का बीमा समिति की ओर से करवाया जाएगा। संगोष्ठी में सहज योग संस्थान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in) M-09829071511

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