सफाई के काम में गन्दगी का खेल
जो अजमेर शहर पीएम नरेन्द्र मोदी की पहल पर स्मार्ट सिटी बनने जा रहा है, उसमें सफाई के काम में गन्दगी का खुला खेल हो रहा है। राजनेताओं और अधिकारियों का इतना तगड़ा गठजोड़ है कि गन्दगी लगातार बढ़ती जा रही है। ख्वाजा साहब का सालाना उर्स चांद दिखने पर 21 या 22 अप्रैल से शुरू होगा। उर्स के पन्द्रह दिनों की अवधि के लिए नगर निगम उर्स मेला क्षेत्र में सफाई का कार्य ठेके से करवाता है। इस बार भी निगम को पांच सौ सफाई कर्मचारी ठेके पर लेने हैं। इसके लिए 26 मार्च को ठेकेदारों से प्रस्ताव मांगे गए। इसमें न्यूनतम प्रस्ताव सुरेन्द्र जैन नामक ठेकेदार ने दिया।
इस प्रस्ताव में कहा गया कि 194 रुपए प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से सफाई कर्मचारी उपलब्ध करवा दिए जाएंगे। चूंकि यह न्यूनतम दर का प्रस्ताव था, इसीलिए निगम को स्वीकार करना पड़ा। गन्दगी की बात यह है कि सुरेन्द्र जैन की भाभी श्रीमती पुष्पा जैन नगर निगम में सफाई की स्थायी ठेकेदार हैं। वर्तमान में पुष्पा जैन के पास ही स्थायी ठेका है। पुष्पा जैन प्रतिदिन करीब 1300 सफाई कर्मचारी निगम को उपलब्ध करवाती हैं। इसकी एवज में पुष्पा जैन 239 रुपए प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन की दर से भुगतान प्राप्त करती हैं।
यानि निगम स्थायी ठेकेदार को 239 रुपए और अस्थाई ठेकेदार को 194 रुपए का भुगतान करें। सवाल उठता है कि यह 43 रुपए प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन की जो गन्दगी है, उसे कौन-कौन खा रहा है? इस गन्दगी के खेल की रौचक बात यह है कि श्रीमती पुष्पा जैन के पति और सुरेन्द्र जैन के भाई कांग्रेस के पूर्व पार्षद मनोज जैन हैं। सफाई में गन्दगी का यह ऐसा गठजोड़ है जिसको तोडऩे की हिम्मत स्मार्ट सिटी बनाने वाले अजमेर के डीसी धर्मेन्द्र भटनागर में भी नहीं है। ठेकेदार भले ही निगम से कितनी भी राशि वसूल ले,लेकिन वह गरीब सफाई कर्मचारी को नहीं मिल पाती। सफाईकर्मी पहले भी अपने सिर पर गन्दगी ढोता रहा और आज भी गन्दगी ढो रहा है।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in) M-09829071511
Thursday, 26 March 2015
सफाई के काम में गन्दगी का खेल
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