Tuesday, 15 September 2026

एक ऐसा चुनाव जिसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों ही जीत का दावाकर रहे हैं। राजस्थान के शहरी निकायों के 10245 वार्डों में से भाजपा को 4179 में जीत, जबकि कांग्रेस के 3613 व निर्दलीय के 2453 वार्डों की संख्या 6066 होती है। निकाय प्रमुख चुनाव में दोनों दलों के पत्ते 16 सितंबर को खुल जाएगे। =============== राजस्थान के 309 शहरी निकायों के 10245 वार्डों का चुनाव परिणाम 14 सितंबर को घोषित हो गया। भाजपा ने 4179, कांग्रेस ने 3613 और निर्दलीयों 2453 वार्डों में जीत दर्ज की हे। यदि निर्दलीय और कांग्रेस के पार्षदों की संख्या जोड़ दी जाए तो 6066 पार्षद ऐसे हें जिन्होंने भाजपा के उम्मीदवारों को हराया है। चुनाव परिणाम बताता है कि 85 निकायों में भाजपा तथा 45 में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है। जबकि 34 निकायों में निर्दलीय पार्षदों की संख्या भाजपा और कांग्रेस से ज्यादा है। शेष 145 निकायों में किसी भी लद को बहुमत नहीं मिला है, इसलिए निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से बोर्ड बनेगा। चुनाव परिणाम के भाजपा और कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट है, लेकिन दोनों ही दल अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे है। भाजपा की ओर से तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जीत के लिए राजस्थान की जनता को बधाई दे दी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का कहना है कि यह जीत पीएम मोदी की जनकल्याणकारी नीतियों की है। हमने ढाई वर्ष में जो काम किए उसी के कारण शहरी जनता ने आशीर्वाद दिया है। ऐसा ही आशीर्वाद अगले माह होने वाले पंचायती राज के चुनाव में मिलेगा। शहरी निकायों की जीत का जश्न भाजपा ने 14 सितंबर की शाम को ही जयपुर के प्रदेश कार्यालय में मनाया। भाजपा के नेता जीत का जश्न मना ही रहे थे कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि शहरी निकाय के चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई है। प्रदेश की जनता ने भाजपा के ढाई वर्ष के कुशासन पर मुहर लगा दी है। डोटासरा ने कहा कि राजस्थान में डबल इंजन की सरकार होने के बाद भी शहरी निकायों के चुनाव में कांग्रेस को 34 प्रतिशत वोट मिले हैं। जबकि भाजपा को 35 प्रतिशत। यानी भाजपा और कांग्रेस के मतों में सिर्फ एक प्रतिशत का अंतर है। 27 प्रतिशत वोट निर्दलीयों को मिले है। यानी 61 प्रतिशत से ज्यादा लोग मौजूदा भाजपा सरकार से नाराज है। संभवत: देश का यह पहला चुनाव होगा, जिसमें दोनों ही दल प्रमुख दल अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे है। शहरी निकायों के चुनाव के बाद अगले माह ही पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव होंगे। इसके बाद वर्ष 2028 के नवंबर माह में विधानसीाा के चुनाव होने है। गत पांच बार से प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की परंपरा है। देखना होगा कि शहरी क्षेत्रों में 35 प्रतिशत वोट प्राप्त करने वाली भाजपा किस प्रकार अपनी सरकार को रिपीट करवाती है और 35 प्रतिशत वोट प्राप्त करने वाली कांग्रेस किस प्रकार सत्ता को हासिल करती है। देखा जाए तो शहरी निकायों के परिणाम दोनों प्रमुख दलों के लिए आईना है। मतदाताओं ने दोनों ही दलों को साफ साफ बता दिया है कि राजनीति में उनकी हैसियत क्या है? पत्ते खुल जाएंगे: 309 शहरी निकायों में से 145 ऐसे निकाय हैं, जहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में दोनों ही दलों को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। निर्वाचन विभाग के अनुसार 15 सितंबर को निकाय प्रमुखों और उपप्रमुखों के चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाएगी और 16 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नामांकन किया जा सकेगा। स्वाभाविक है कि निकाय प्रमुख के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने अपने उम्मीदवारों का नामांकन कराना होगा। नामांकन के साथ ही निकाय प्रमुख चुनाव के पत्ते खुल जाएंगे। यानी यह पता चल जाएगा कि किस दल के साथ निर्दलीय पार्षद होंगे। निर्दलीय पार्षद अपनी शर्तो के अनुरूप समर्थन देंगे। हो सकता है कि निर्दलीय उम्मीदवारों की पसंद को देखते हुए दोनों ही दलों को अपने उम्मीदवारों का नाम बदलना पडे। तय कार्यक्रम के अनुसार 16 सितंबर को नामांकन के बाद 17 सितंबर को जांच का काम होगा और 18 सितंबर को दोपहर तीन बजे तक नाम वापस लिए जाए सकेंगे। निकाय प्रमुख के लिए मतदान 21 सितंबर को प्रात: 10 से 2 बजे तक होगा तथा मतदान के तुरंत बाद मतगणना शुरू हो जाएगा। 22 सितंबर को प्रात: 11 बजे उप प्रमुख के लिए नामांकन होगा तथा 2 बजे नाम वापस लिए जा सकेंगे। दोपहर 2:30 से 5 बजे के बीच मतदान होगा। मतदान के बाद मतगणना और फिर परिणाम घोषित किया जाएगा। दोनों ही दलों के पार्षद 22 सितंबर तक बाड़ाबंदी में रहेंगे।    S.P.MITTAL BLOGGER ( 14-09-2026) Website- www.spmittal.inFacebook Page- www.facebook.com/SPMittalblogFollow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11Blog- spmittal.blogspot.comTo Add in WhatsApp Group- 9166157932To Contact- 9829071511

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