Tuesday, 15 September 2026

शहरी निकाय के चुनाव में प्रथम चरण में 76 प्रतिशत से ज्यादा की वोटिंग। बाड़ाबंदी : क्या भाजपा-कांग्रेस को अपने उम्मीदवारों की वफादारी पर भरोसा नहीं है? निकाय प्रमुख बनाने की चाबी निर्दलियों के पास। ================ राजस्थान में 309 शहरी निकायों के चुनाव का प्रथम चरण 9 सितंबर को हो गया। दूसरा चरण 11 सितंबर को होगा। मतगणना 14 सितंबर को होगी। पहले चरण में 162 निकायों के 5393 वार्डों में मतदान हुआ। 76 प्रतिशत से ज्यादा का मतदान बताता है कि लोगों ने स्थानीय समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अपने वोट का उपयोग किया है। निकाय चुनाव में मतदान का प्रतिशत बढऩे का एक प्रमुख कारण निर्दलीय उम्मीदवारों की ताकत भी रही। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों के साथ साथ निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर लगाया है। घर घर से मतदाताओं को निकालने में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी मेहनत की। निर्दलीय उम्मीदवारों की मेहनत के कारण ही अब भाजपा और कांग्रेस के समक्ष निकाय प्रमुखों को बनाने में चुनौती हो गई है। माना जा रहा है कि अनेक निकायों में कांग्रेस और भाजपा को अपना प्रमुख बनवाने के लिए निर्दलीय पार्षदों की मदद लेनी पड़ेगी। बाड़ाबंदी: जिन 162 निकायों में 9 सितंबर को चुनाव हो गया है, वहां के भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों की बाड़ाबंदी शुरू हो गई है। यानी दोनों ही दल अपने अपने उममीदवारों को सुरक्षित स्थान पर एकत्रित कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि उम्मीदवारों की पार्टी की रीति-नीति का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कांग्रेस के भी अपने तर्क है, लेकिन सवाल उठता है कि क्या दोनों दलों के अपने उम्मीदवारों की वफादारी पर भरोसा नहीं है। यदि उम्मीदवार अपनी पार्टी के प्रति वफादार होते तो दोनों दलों को उम्मीदवारों की बाड़ाबंदी नहीं करनी पड़ती। दोनों ही दलों को आशंका है कि जीतने वाला उम्मीदवार दूसरे दल में जा सकता है। 14 सितंबर को जो उम्मीदवार चुनाव जीत गए उन्हें निकाय प्रमुख के चुनाव तक अति सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा और जो उम्मदवार हार गए उन्हें 14 सितंबर को ही बाड़ाबंदी से मुक्त कर दिया जाएगा। यहां यह खास तौर से उल्लेखनीय है कि दोनों दलों ने अपने अधिकृत प्रत्याशी को नामांकन के समय सिबंल भी नहीं दिया था। उम्मीदवारों के सिबंल सीधे निर्वाचन अधिकारी को जमा कराए गए। कांग्रेस और भाजपा भले ही यह दावा करे कि उनके कार्यकर्ता संगठन के प्रति वफादारी पर भरोसा नहीं है। निर्दलीयों के हाथ में चाबी: माना जा रहा है कि अनेक निकायों में प्रमुख बनाने की चाबदी निर्दलीयों के पास रहेगी। यानी निर्दलीय पार्षद के मत से ही भाजपा या कांग्रेस का प्रमुख बनेगा। यही वजह है कि जिन वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार जीतने की स्थिति में है, उन पर अभी से ही भाजपा और कांग्रेस ने नजर गढ़ा दी है। ऐसे में धनबल का उपयोग होने की संभावना भी बढ़ गई है। पार्टी में ऐसे नेता सक्रिय हो गए हैं जो निर्दलीय पार्षदों को किसी भी कीमत पर अपने साथ रख सकते हैं। देखना होगा कि 309 निकायों में से कितने निकायों में निर्दलीयों के दम पर भाजपा और कांग्रेस अपना बोर्ड बनवाती है।

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