Tuesday, 15 September 2026
यूजीसी के नए प्रावधानों को अभी कानूनी रूप नहीं दिया गया है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जैन आचार्य पुलक सागर महाराज को भरोसा दिलाया।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने तीन दिवसीय राजस्थान प्रवास के दौरान 14 सितंबर को भीलवाड़ा में जैन आचार्य पुलक सागर महाराज से मुलाकात की। भागवत ने सनातन धर्म की परंपरा के अनुरूप आचार्य का पाद प्रक्षालन कर वंदन किया। इस अवसर पर दोनों के बीच सामाजिक समरसता और देश के ज्वलंत मुद्दों पर विमर्श हुआ। करीब पौन घंटे की मुलाकात में पुलक सागर महाराज ने यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए प्रावधानों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे उच्च शिक्षण संस्थानों में सामान्य वर्ग के बच्चों का पढऩा मुश्किल हो जाएगा। नए प्रावधानों की वजह से सामान्य वर्ग में भय का माहौल हे। जैन आचार्य ने प्रावधानों को जनविरोधी बताया। इस पर मोहन भागवत का कहना रहा कि यह अभी केवल प्रस्ताव है। इसे कानूनी रूप नहीं दिया गया है। भागवत ने जैन आचार्य को भरोसा दिलाया कि समाज की एकता और समरसता को तोड़ने वाला कोई कानून लागू नहीं होगा। सरकार के स्तर पर इस दिशा में मंथन चल रहा है। भागवत ने कहा कि संघ तो समरसता के लिए देश भर में सेवा कार्य कर रहा हे। हमारे स्वयं सेवक कच्ची बस्तियों में जाकर सेवा का काम कर रहे हैं। जैन आचार्य की चिंता पर संघ प्रमुख ने जो भरोसा दिलाया है वह समाज में सकारात्मक संदेश देता है। असल में यूजीसी के प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर देश भर में सामान्य वर्ग के लोग भयभीत है। यही वजह है कि राजपूत, ब्राह्मण और अन्य जातियों के संगठन लगातार आंदोलन कर रहे है। श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल मकराना ने तो कहा है कि यदि यूजीसी के प्रस्तावों को वापस नहीं लिया गया तो अगले चुनावों में भाजपा को नुकसान होगा। नए प्रावधानों में जिस तरह एससी एसटी के साथ ओबीसी वर्ग को भी आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है, वह बेहद खतरनाक निर्णय है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 16-09-2026)
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