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राजस्थान में गत कांग्रेस के शासन में सबसे ताकतवर आईएएस रहे जी.एस.संधु को 12 मई को गिरफ्तार कर जयपुर की सेंट्रल जेल में भेज दिया गया है। ये वो ही संधु हैं जो अशोक गहलोत की सरकार में सबसे महत्त्वपूर्ण अधिकारी थे। गहलोत का भी सबसे ज्यादा भरोसा संधु पर ही था। इसलिए संधु को नगरीय विकास और गृह विभाग का प्रमुख शासन सचिव बनाया गया। कांग्रेस के शासन में सीएम गहलोत की तरह संधु को भी एक ईमानदार अफसर माना गया, लेकिन आज वो ही संधु सेंट्रल जेल पहुंच गए हैं। आरोप है कि संधु ने नियमों के विरुद्ध जाकर एक बड़े प्रभावशाली व्यक्ति को बड़े भूखंड का पट्टा जारी कर दिया। भाजपा का तो पहले भी नहीं आरोप था कि इस पट्टे को जारी करने में भ्रष्टाचार हुआ है।
संधु की गिरफ्तारी से उन प्रशासनिक अधिकारियों को सबक लेना चाहिए जो अपने निहित स्वार्थों के खातिर सरकार के दबाव में काम करते हैं या फिर रिश्वत लेकर नियमों को तोड़ते हैं। जो अधिकारी अपने आप को बहुत चालाक और होशियार समझता है उसे भी संधु की गिरफ्तारी से सबक लेना चाहिए। संधु की गिरफ्तारी ने यह बता दिया है कि जब व्यक्ति फंसता है तो उसकी कोई मदद नहीं करता। यहां तक कि भगवान भी साथ छोड़ देता है। सब जानते हैं कि कांग्रेस सरकार में इस मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाली भाजपा ने अब संधु को बचाने की पूरी कोशिश की। वसुंधरा राजे के नेतृत्व में राजस्थान में भाजपा सरकार को चलते हुए सवा दो साल हो गए। लेकिन संधु की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। संधु ने 12 मई को अदालत में तभी सरेंडर किया जब सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत की याचिका खारिज हो गई। क्या वसुंधरा राजे सरकार की खुफिया एजेंसियों को यह पता नहीं था कि संधु कहां टिके हुए हैं? असल में भाजपा सरकार ही संधु को गिरफ्तारी से बचने का पूरा अवसर दे रही थी, लेकिन अदालत की कार्यवाही की वजह से संधु को गिरफ्तार होना ही पड़ा। इस मामले में भाजपा सरकार की रुचि संधु से ज्यादा नगरीय विकास के पूर्व मंत्री शांति धारीवाल में है। अब देखना होगा कि धारीवाल को लेकर संधु पूछताछ में क्या कहते हैं। जो संधु राजस्थान के गृह सचिव के पद पर रह चुके हैं अब उन्हीं संधु का पुलिस रिमांड लेगी।
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(एस.पी. मित्तल) (13-05-2016)
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