Wednesday, 16 September 2026

सत्ता का दुरुपयोग तो सबसे ज्यादा खुद गहलोत और डोटासरा ने किया। शहरी निकाय के चुनाव में आरोप लगाने से पहले अपने कृत्य देख लें। ================== राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि शहरी निकायों का प्रमुख चुनने के लिए भाजपा के नेता सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं। निर्दलीय और कांग्रेस के पार्षदों को जबरन उठाया जा रहा है। पुलिस भाजपा का मोहरा बनी हुई है। पूरे प्रदेश में भाजपा ने भय का माहौल बना दिया है। मालूम हो कि राजस्थान के 309 शहरी निकायों के प्रमुख का चुनाव 21 सितंबर को होना है। 14 सितंबर को वार्ड पार्षदों के परिणाम के बाद दोनों ही प्रमुख दलों के पार्षदों की बाड़ाबंदी हो रखी है। पार्षदों को दूसरे राज्यों में भी रखा गया है। अजमेर के कांग्रेसी पार्षद कांग्रेस शासित कर्नाटक के बेंगलुरु में है। इसी प्रकार भाजपा के पार्षद राजस्थान के साथ साथ हरियाणा और दिल्ली में रखे गए है। गहलोत और डोटासरा को आरोप लगाने से पहले अपने कृत्यों को देख लेना चाहिए। जुलाई 2020 में जब डिप्टी सीएम और प्रदेशाध्यक्ष रहते सचिन पायलट 18 कांग्रेसी विधायकों को दिल्ली ले गए थे, तब मुख्यमंत्री रहते हुए गहलोत ने सत्ता का दुरुपयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस के विधायक दिल्ली न जा सके इसके लिए कोरोना संक्रमण की आड़ लेते हुए लोगों के राजस्थान के बाहर जाने पर रोक लगा दी। जिस पुलिस को गहलोत आज कोस रहे हैं, उसी पुलिस ने राजस्थान की सीमा पर खड़े रहकर आम लोगों को जाने नहीं दिया। जब कोरोना संक्रमण रोकने के लिए दूसरे राज्यों से आने वालों पर रोक लगनी चाहिए थी, लेकिन गहलोत ने अपने राजनीतिक स्वार्थ की खातिर जाने वालों पर ही रोक लगा दी। निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों को गहलोत ने प्रशासन की मदद से किस तरह कब्जे में लिया, यह किसी से छिपा नहीं है। इतना ही नहीं सचिन पायलट समर्थक कांग्रेसी विधायकों के खिलाफ देशद्रोह तक का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पूरा प्रदेश जानता है कि जिन अधिकारियों ने गहलोत की सरकार को बचाने का काम किया, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद लाभ के पद दिए गए। गहलोत सरकार में मुख्य सचिव रहे निरंजन आर्य की पत्नी संगीता आर्य को तो राज्य लोकसभा आयोग का सदस्य बना दिया। आईपीएस संजय श्रोत्रिय को आयोग का अध्यक्ष बना दिया। डीबी गुप्ता जैसे मुख्य सचिव को भी सेवानिवृत्ति के बाद मुख्य सूचना आयुक्त बनाया गया। जब गहलोत सत्ता का दुरुपयोग कर रहे थे, तब प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए डोटासरा भी मजा ले रहे थे। प्रदेशाध्यक्ष के साथ साथ डोटासरा कैबिनेट मंत्री भी रहे। जब खुद गहलोत और डोटासरा ने सत्ता का दुरुपयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, तब इन दोनों को सत्ता का दुरुपयोग का आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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