Monday, 12 October 2026
#12566
नरेना पुलिस थाने में संघ के प्रचारक कृष्णावतार की बेरहमी से पिटाई के प्रकरण में विजिलेंस जांच।
ब्लॉग पर डीजीपी राजीव शर्मा ने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही के आदेश दिए।
विजिलेंस के डीएसपी श्रीराम नरेना पहुंचे।
जांच से पहले जयपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हनुमान प्रसाद को हटाया जाए।
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10 अक्टूबर को सांभर जिले के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक कृष्णावतार की जयपुर ग्रामीण में आने वाले नरेना पुलिस थाने पर बेरहमी से पिटाई के प्रकरण में 12 अक्टूबर को मैंने ब्लॉग संख्या 12565 लिखा। इस ब्लॉग में भाजपा शासित राजस्थान के पुलिस थाने पर संघ प्रचारक की पिटाई को बेहद गंभीर मानते हुए प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई थी। मेरे इस ब्लॉग को राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने पढ़ा और ब्लॉग में लिखे तथ्यों के आधार पर विजिलेंस जांच के आदेश दिए। डीजीपी के प्रिंसिपल स्टाफ अधिकारी कुंवर राष्ट्रदीप (डीआईजी) ने फोन पर मुझे बताया कि इस प्रकरण को गंभीरता से लिया गया है। इस प्रकरण में जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी। डीजीपी के निर्देश के बाद विजिलेंस के एडीजी एस सेंगाथिर ने बताया कि डीएसपी श्रीराम को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच अधिकारी सभी पहलुओं पर प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। डीएसपी श्रीराम 12 अक्टूबर को ही नरेना पहुंच गए हैं। अब यह पता लगाया जाएगा कि संघ प्रचारक कृष्णावतार को नरेना पुलिस स्टेशन पर क्यों लाया गया और क्यों बेरहमी से पिटाई की गई? मालूम हो कि 10 अक्टूबर की शाम को जब संघ प्रचारक कृष्णावतार एक बैठक में भाग लेने के लिए फुलेरा जा रहे थे, तब पुछताछ के बहाने उन्हें नरेना थाने लाया गया। यहां पर थानाधिकारी उमराव सिंह एवं उप थानाधिकारी ओंकारसिंह के साथ-साथ सिपाही रमेशचन्द्र, कुलदीप , महिपाल, विनोद व अजय ने बेरहमी के साथ मारपीट की। इसको लेकर 11 अक्टूबर को दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर मुकदमा दर्ज कर लिया गया, लेकिन संघ प्रचारक की पिटाई के प्रकरण में सिर्फ कुछ पुलिसकर्मियों का निलंबन पर्याप्त कार्यवाही नहीं है, इसीलिए मैंने ब्लॉग के माध्यम से पूरे घटनाक्रम की ओर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा का ध्यान आकर्षित किया। चूंकि राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है, इसलिए पुलिस थाने में संघ प्रचारक की पिटाई होना बेहद निंदनीय और गंभीर मामला है। संघ के प्रचारक अपना घर परिवार छोड़कर राष्ट्र सेवा का काम करते हैं। यदि भाजपा शासित राज्य में संघ प्रचारक को थाने पर ले जाकर पीटा जाए तो यह संबंधित भाजपा सरकार पर कलंक है।
पहले पुलिस अधीक्षक को हटाया जाए:-
इस पूरे घटनाक्रम में भले ही सीधे तौर पर जयपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हनुमान प्रसाद की कोई भूमिका न हो, लेकिन पुलिस अधीक्षक अपने जिले के सुपरवाइजर होते हैं। ऐसे में किसी भी थाने पर घटना की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक की भी है। संघ प्रचारक की पिटाई के प्रकरण की जांच से पहले हनुमान प्रसाद को पुलिस अधीक्षक के पद से हटाया जाना चाहिए। हनुमान प्रसाद के पुलिस अधीक्षक रहते डीएसपी स्तर की जांच प्रभावित हो सकती है। इस गंभीर प्रकरण में पुलिस अधीक्षक अपनी सुपरवाइज़री जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते हैं।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-10-2026)
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