Monday, 12 October 2026

एसआईआर में कथित गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित। राष्ट्रपति ने भी सबूत मांगे। दिल्ली में बिना अनुमति के जबरन प्रदर्शन। 545 में से विपक्ष के 200 सांसद, अनेक राज्यों में सरकार। फिर भी लोकतंत्र खबरें में होने का आरोप। ईरान में शादी के कुछ घंटे बाद ही एक प्रदर्शनकारी अबो रेजा को फांसी। ================ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के समर्थन से हो रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को देखते हुए 10 अक्टूबर को देश की राजधानी दिल्ली को सील कर दिया गया है। दिल्ली की ओर से आने वाली सभी मार्गों पर सख्त निगरानी की गई है। ट्रेनों को भी दिल्ली में आने नहीं दिया जा रहा। यहां तक कि दिल्ली के अंदर मेट्रोल ट्रेनों को भी बंद कर दिया गया है। धरना स्थल जंतर-मंतर के चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। दिल्ली के चप्पे चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात है। कॉकरोच पार्टी एसआईआर में कथित गड़बड़ी के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रही है, लेकिन इस प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से कोई अनुमति नहीं ली गई। कॉकरोचों का कहना है कि लोकतंत्र में प्रदर्शन के लिए अनुमति की कोई जरूरत नहीं है। जिस कथित गड़बड़ी को लेकर जबरन प्रदर्शन किया जा रहा है, वह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी की है कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसले एक तरफा साबित होंगे तो उन्हें रद्द कर दिया जाएगा। वोट से मतदाताओं को वंचित रखने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है। इस मामले में अब 27 अक्टूबर को कोर्ट में सुनवाई होनी है। इस बीच 9 अक्टूबर की रात को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने एसआईआर में कथित गड़बड़ी के सबूत मांगे हैं। यानी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांग के लिए जो कुछ भी किया जा सकता है, वह भारत में विपक्ष के नेता कर रहे हैं। राहुल गांधी भले ही एसआईआर के नाम पर लोगों को वोट से वंचित करने का आरोप मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर लगाए, लेकिन सच्चाई यह है कि लोकसभा में 545 में से 200 सांसद विपक्षी दलों के हैं। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, हिमाचल, पंजाब, जम्मू कश्मीर, तेलंगाना, झारखड़ आदि राज्यों में विपक्षी दलों की ही सरकारें हैं। जिन राज्यों में सरकार नहीं है, वहां भी बड़ी संख्या में विपक्षी दलों के विधायक हैं, लेकिन इसके बाद भी लोकतंत्र खतरें में होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। जिस देश में कुछ लोग बिना अनुमति के प्रदर्शन करने की हिम्मत रखते हो, उस देश में लोकतंत्र कैसे खतरे में हो सकता है? 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को देखते हुए ही 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को हिदायत दी कि प्रदर्शन को रोने के लिए सख्त और बड़ी कार्यवाही न की जाए। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत का कहना रहा कि मक्खी को मारने के लिए हथोड़े का उपयोग नहीं होना चाहिए। यानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को जो हालात उत्पन्न हो रहे है उन पर सुप्रीम कोर्ट की नजर है। सब जानते हैं कि जून में जब कॉकरोच पार्टी ने दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था, तब जबरदस्त अराजकता हुई थी। गुंडा तत्वों ने केवल आगजनी की बल्कि पुलिस कर्मियों को पीटा भी। पुलिस का कहना है कि कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में छात्रों की भीड़ में करीब तीन हजार गुंडातत्व शामिल हो गए। जून की घटना को ध्यान में रखते हुए ही इस बार दिल्ली पुलिस कुछ ज्यादा ही सतर्कता बरत रही है। पुलिस ने जो सख्त कदम उठाए हैं, उनकी वजह से दिल्लीवासियों के साथ साथ देश भर के लोगों को परेशानी हो रही है। पुलिस ने दिल्ली मस्जिदों से लाउडस्पीकरों के जरिए घोषणा करवाई है कि जरूरी होने पर ही दिल्लीवासी अपने घरों से निकले। मस्जिदों के लाउडस्ीकर के उपयोग से प्रदर्शन की गंभीरता को समझा जा सकता है। जून के प्रदर्शन में भी हजारों की भीड़ अचानक जंतर मंतर पर आ गई थी। प्रदर्शनकारी को फांसी: दिल्ली में जब कॉकरोच पार्टी प्रदर्शन कर रही है, तभी इस्लामिक देश ईरान से खबर आई है कि इसी वर्ष जनवरी में ईरान में हुए प्रदर्शन में शामिल एक 25 वर्षीय युवक अली रेजा सेपाही को फांसी दे दी गई है। ईरान में किसी को भी सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन की इजाजत नहीं है। अली रेजा की फांसी का दुखद पहलू यह है कि उसने फांसी से कुछ घंटे पहले दूसरी जेल में बंद अपनी मंगेतर महशाद कासानी से फोन पर ही निकाल किया था। अली रेजा को उम्मीद थी कि निकाह कर लेने के बाद ईरान की कट्टरपंथी सरकार का दिल पसीजेगा, लेकिन ईरान की सरकार ने अली रेजा को निकाह की तो अनुमति दी, लेकिन फांसी को नहीं टाला। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
यूपी का जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब नरेंद्र मोदी के नाम से जाना जाएगा। इसे कहते है जले पर नमक छिड़कना। ================ कांग्रेस के राहुल गांधी, सपा के अखिलेश यादव, टीएमसी की ममता बनर्जी, आरजेडी के लालू प्रसाद यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला, आप के केजरीवाल के साथ साथ वामपंथी दलों के नेताओं को अवसर मिले तो वह नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के पद से हटा दे। ऐसे नेता मोदी को एक दिन भी पीएम की कुर्सी पर देखना नहीं चाहते। एसआईआर में कथित गड़बड़ी के विरोध में राहुल गांधी के नेतृत्व में दिल्ली में गत 2 अक्टूबर से लगातार प्रदर्शन हो रहा है। नरेंद्र मादेी से इतनी नफरत है कि देश की संसद को भी चलने नहीं दिया जा रहा। भले ही मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक क्षेत्र में दुनिया की तीसरी महाशक्ति बनने जा रहा हो, लेकिन विपक्ष के नेता इतनी बड़ी उपलब्धि को भी स्वीकार नहीं करते। पिछले 12 वर्षों में नरेंद्र मादेी को दुनिया के 36 देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है, लेकिन विपक्ष की नजर में यह भी उपलब्धि नहीं है। दुनिया के अनेक देश् ायुद्ध से ग्रस्त हैं, जबकि भारत में न कवेल शांति है, बल्कि अनेक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हो गई है। दुनिया में भले ही तेल का भीषण संकट हो, लेकिन भारत में 140 करोड़ लोगों को मांग के अनुरूप पेट्रोल डीजल मिल रहा है। नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों को देखते हुए ही भाजपा शासित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेवर के नोएडा स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम नरेंद्र मोदी रखने का फैसला किया है। यानी अब जेवर का एयरपोर्ट नरेंद्र मोदी के नाम से जाना जाएगा। विपक्ष के जो नेता मोदी को प्रधानमंत्री के पदपर देखना नहीं चाहते, उन्हें अब इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम नरेदं्र मोदी होना मानना पड़ेगा। कहा जा सकता है कि योगी आदित्यनाथ ने जले पर नमक छिड़कने वाली कहावत को चरितार्थ किया है। इससे पहले गुजरात में बने एशिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम मोटेरा का नाम भी नरेंद्र मोदी पर रखा जा चुका है। योगी आदित्यनाथ ने जो पहल की है उसके बाद भाजपा शासित राज्यों में भी बड़े संस्थानों के नाम नरेंद्र मोदी पर रखे जा सकते है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

Thursday, 8 October 2026

संविधान की पुस्तक में मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, रामायण, महाभारत के चित्र दर्शाते हैं भारत की राष्ट्रीयता। इंडोनेशिया में रामलीला के कलाकार मुसलमान ही होते हैं, क्योंकि वे अपने पूर्वजों को नहीं भूले। विचार आधारित पार्टी भी अब 36 प्रतिशत वोटों से संतुष्ट हो गई है, जबकि सेकुलर विचार वाली भगवा से डराती है। लोकमंथन यात्रा में जसवंत खत्री की दो टूक। शराब जेसी बुराई से बचा हुआ है जयपुर का अभयपुरा गांव। डीग के पालका में आज भी हताई पर होते हैं फैसले। ================ देश की लोकसंस्कृति, लोक परपंरा, साहित्य, शिक्षा और संविधन के मूल्यों को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकाली जा रही लोक मंथन यात्रा 8 अक्टूबर को अजमेर पहुंची। यात्रा के अजमेर पहुंचने पर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सभागार में संविधन में उल्लेखित हम भारत के लोग शब्द पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्यवक्ता के तौर पर बोलेते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह इंजीनियर जसवंत ने कहा संविधान की पुस्तक में मोहनजोदड़ा, हड़प्पा, रामायाण, महाभारत आदि के साथ साथ हिमालय पर्वत और महापुरुषों के चित्र अंकित है। ये चित्र ही भारत की राष्ट्रीयता को दिखाते हैं। संविधान बनाते समय डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि आज हम भले ही अलग अलग विचारों के लोग संविधान को बना रहे हो, लेकिन एक समय आएगा, जब हम सब एक होंगे। उन्होंने कहा कि वैदिक काल से ही सनातन का भाव निकला है। आजादी के बाद पाठ्य पुस्तकों में संविधान की भावना के अनुरूप पाठ होने चाहिए थे, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका। सेकुलर विचारधारा ने हमारे संविधान की भावना को ही खत्म कर दिया। संविधान में जो चित्र दर्शाए गए वह सभी सनतान संस्कृति से जुड़े हुए हैं, उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया मुस्लिम देश है, लेकिन वहां आज भी रामलीला का मंचन होता है। रामलीला के सभी कलाकार मुसलमान होते हैं, लेकिन किसी भी मुस्लिम कलाकार को रामायण के पात्र बनने पर ऐतराज नहीं है। उनका मानना है कि उनके पूर्वज सनातन संस्कृति को ही मानने वाले थे, वे अपने पूर्वजों को कभी नहीं भूल सकते। 36 प्रतिशत से संतुष्टि: खत्री ने किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बगैर कहा कि आज विचार आधारित पार्टी 26 प्रतिशत वोटों से संतुष्ट हो गई है। जबकि सेकुलर विचार वाली पार्टी भगवा से डरा रही है। आज जब सौ प्रतिशत मतदान की जरुरत है, तब 36 प्रतिशत का जुगाड़ किया जा रहा है। हालातइतने खराब है कि जाति आधारित मतदान होने लगा है। परिणाम भी जाति आधारित सामने आ रहे है। सरेआम कहा जा रहा है कि अब देश का भविष्य संसद में नहीं सड़क पर तय होगा। जबकि ऐसे ह लोगों ने 1976 में आपातकाल के दौरान संविधान की आत्मा को मार दिया था। यात्रा के संस्मरण: संगोष्ठी में लोकमंथन यात्रा के संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने यात्रा के संस्मण सुनाते हुए कहा कि जयपुर के अभयपुरा गांव में बिना किसी लोभ लालाच के सौ प्रतिशत मतदान होता है। यह गांव आज भी शराब जैसीे बुराइयों से बचा हुआ है। इसी प्रकार डीग के पालका गांव के लोग अपने विवादों को गांव की जताई पर ही निपटाते हैं। गांव का कोई भी व्यक्ति पुलिस और अदालत में नहीं जाता। यात्रा के दौरान ऐसे अनेक ग्रामीण मिले जिन्हें संविधान के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन स्वयं की न्याय व्यवस्था के कारण पेड़ काटने पर रोक लगा रखी थी। यात्रा में अनेक संयुक्त परिवार भी देखने को मिले जो हम भारत के लोग के भाव को प्रकट करते थे। संगोष्ठी का यह आयोजन अधिवक्ता परिषद विज्ञान भारती एवं राजस्थान ह्यूममन रिसोसेज डवलपमेंट फाउंडेशन आरएचआरडी के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता जगदीश सिंह राणा ने की। संगोष्ठी के मंच पर पूर्व आईपीएस कन्हैयालाल बैरवा, आरएचआरडी के अध्यक्ष हरदयाल, वसंत विजयवर्गीय, भवानी सिंह रोहिला आदि बैठे। वहीं संगोष्ठी में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरु सुरेश कुमार अग्रवाल, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़, अजयमेरु विभाग के संघचालक मुकेश अग्रवाल, वरिष्ठ एडवोकेट एसके सक्सेना आदि भी उपस्थित रहे। संगोष्ठी में महानगर संघ चालक खाजू लाल चौहान ने आभार प्रकट किया तथा अधिवक्ता परिषद की प्रांत कार्यकारिणी के सदस्य जेपी शर्मा ने सफल संचालन किया। पुष्कर से शुरू हुई यात्रा : 8 अक्टूबर को तृतीय चरण में लोक मंथन यात्रा पुष्कर तीर्थ से शुरू हुई। पहले पुष्कर में पूजा अर्चना की गई और फिर यह यात्रा वाहन रैली के रूप में आदर्श विद्या निकेतन के निकट रीजनल कॉलेज तिराहे पर पहुंची, यहां पर यात्रा का जोरदार स्वागत किया गया। यहां से यात्रा राजकीय कन्या महाविद्यालय पहुंची, जहां पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ, संस्कार भारती, संस्कृत भारती एवं अन्य संगठनों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं विभिन्न लोक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय लोक परम्परा के साथ लोक वाद्य, लोक गीत, लोक नृत्य आदि की प्रस्तुति हुई । क्रीड़ा भारती द्वारा लोक खेल सतोलिया, लट्टू, लंगड़ी टांग, रस्सा-कशी, खो-खो, कबड्डी का प्रदर्शन हुआ। कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम का प्रारंभ पूर्ण वन्देमातरम राष्ट्र गीत के गायन के साथ हुआ । बाद में महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा पधारो म्हारे देश लोक गीत की मनमोहक प्रस्तुति हुई, तत्पश्चात मंच पर कलाकारों का स्वागत भी किया गया। लोक कलाकार अशोक शर्मा ने भवई नृत्य की प्रस्तुति दी। संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं द्वारा नृत्य नाटिका के माध्यम से संस्कृत भाषा को कैसे सीखें यह बताया। अजमेर के बाद यात्रा अपने अगले पड़ाव लल्लाई ग्राम सरवाड़ रवाना हुई, इसके बाद जालिया 2 ब्यावर पहुंची। यह यात्रा पुष्कर में 8 अक्टूबर से प्रारंभ हुई जो 21 अक्टूबर को झालावाड़ में सम्पन्न होगी। यात्रा से संबंधित और अधिक जानकारी मोबाइल नबंर 9414785558 पर मनोज बहरवाल है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 09-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
कांग्रेस के पार्षदों की ऐसी एकता पहले हो जाती तो अजमेर में कांग्रेस का ही मेयर होता। 'अब पछताए होत क्या, जब चिडिय़ा चुग गई खेत ' की कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं अजमेर के कांग्रेसी। ================ अजमेर के कांग्रेस के पार्षद इन दिनों गुस्से में ही हैं। पार्षदों का कहना है कि भाजपा की मेयर अनामिका शर्मा उन्हें अपमानित कर रही है। मेयर के दशहरा महोत्सव की जो कमेटियां बनाई है, उसमें से सिर्फ एक कमेटी का संयोजक कांग्रेस के पार्षद को बनाया गया है, जबकि नगर निगम में कांग्रेस के पार्षदों की संख्या भाजपा से ज्यादा है। इतना ही नहीं जब कांग्रेस के पार्षद ऐतराज प्रकट करते हैं तो संतीश बंसल जैसे भाजपाई पार्षद गाली गलौच करते हैं। भाजपा के खिलाफ अब कांग्रेस के पार्षद लामबंद हो गए हैं और तत्काल प्रभाव से साधारण सभा बुलाने की मांग की है। जिस पर मेयर चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे नौरत गुर्जर का दावा है कि कांग्रेस के 37 और 3 निर्दलीय पार्षद एकजुट है। निगम में कुल पार्षदों की संख्या 80 है। इसमें कोई दो राय नहीं कि कांग्रेस के पार्षद एक जुटता दिखा रहे हैं, लेकिन यदि ऐसी एकजुटता पहले दिखाई जाती तो आज कांग्रेस का मेयर होता। सब जानते हैं कि मेयर के ुचनाव में कांग्रेस के कुछ पार्षदों ने ही भाजपा को वोट दिया, इसलिए कांग्रेस उम्मीदवार किरण गढ़वाल मेयर नहीं बन सकी। कांग्रेसी पार्षद अब एकजुटता दिखाकर अब पछताए होत क्या जब चिडिय़ा चुग गई खेत वाली कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं। ऐसा नहीं कि मेयर के चुनाव के समय पार्षदों को एकजुट रखने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। कांग्रेस के पार्षदों को सुरक्षित रखने के लिए कर्नाटक में छिपाया गया। कांग्र्रेस के वरिष्ठ नेता धर्मेन्द्र राठौड़ की पहल पर पार्षदों को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ नाश्ता भी करवाया। लेकिन अजमेर आकर कुछ कांग्रेसी पार्षदों के वोट के कारण ही भाजपा की उम्मीदवार को 43 वोट मिले, जबकि भाजपा के निर्वाचित पार्षदों की संख्या में 32 थी। S.P.MITTAL BLOGGER ( 09-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
हलवा-खीर-पूड़ी खाने और रिश्तेदारों पर फोन पर बात करने, किताबें पढऩे, लिखने जैसी पर्याप्त सुविधाओं के बाद भी अजमेर में हाई सिक्योरिटी जेल के कैदी अपनी मांगों को मनवाने के लिए हड़ताल करते हैं। ताजा मामला पंजाबी सिंगर सिद्ध मुसेवाला की हत्या के मुख्य आरोपी सचिन थापन का है। यह लॉरेंस गैंग का सदस्य है। ================ देश में सिर्फ दो हाई सिक्योरिटी जेल है। इनमें से एक अजमेर में है। अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में देशभर के कुख्यात और खतरनाक अपराधियों को रखा जाता हे। 7 अक्टूबर को सचिन थापन नाम के कैदी को जेल से जेएलएन अस्पताल लाया गया। यह कैदी पिछले तीन दिन से भूख हड़ताल पर था। तबीयत बिगडऩे के कारण इससे इलाज के लिए अस्पताल लाया गया। सचिन थापन की मांग है कि 22 सितंबर से पहले उसकी बैरक में जो दो कैदी रामवीर और सुमित रहते थे, उन्हें वापस मेरे साथ बैरक में रखा जाए। इन दोंनो कैदियों के बगैर बैरक में उसका मन नहीं लगता है। वही जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ का कहना है कि रामवीर और सुमित ने 22 सितंबर को बैरक में लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया था। इसलिए इन दोनों को दूसरी बैरक में शिफ्ट किया गया है। मालूम हो कि चंबल के डकैत जगन गुर्जर की कुछ माह पहले साथी कैदी ने ही बैरक में हत्या कर दी थी। हत्या से पहले कैदी विष्णु जाट ने सीसीटीवी कैरे को खराब कर दिया था। जगन गुर्जर के प्रकरण को देखते हुए ही एहतियात के तौर पर रामवीर और सुमित को सचिन थापन के बैरक से अलग किया गया। वैसे भी किसी बैरक में कौन से कैदी रहेंगे इसका निर्णय जेल प्रशासन ही करेगा। यदि कुख्यात अपराधी हाई सिक्योरिटी जेल में कैदियों के साथ रहने का निर्णय करेंगे तो फिर हाई सिक्योरिटी जेल का कोईमतलब नहीं रहेगा। किसी भी जेल में कुख्यात अपराधियों को रखा आसान नहीं होता है। मानवाधिकार के नाम पर अनेक सुविधाएं: कहने को तो अजमेर में हाई सिक्योरिटी जेल है, लेकिन इस जेल में भी मानवाधिकारों के नाम पर कुख्यात कैदियों को पर्याप्त सुविधाएं मिलती है। सुबह के नाश्ते के साथ दोनों समय 6-6 रोटी वाली भोजन की थाली प्रत्येक कैदी को मिलती है। दोनों समय दो सब्जियां भी दी जाती है। कई कैदी एक साथ 6 रोटियां नहीं खा पाते, लेकिन जेल प्रशासन को नियमों के तहत 6 रोटियां देनी ही पड़ती है। जो रोटी बच जाती है, उसकी बेकद्री होती है। सप्ताह में एक दिन हलवा और एक दिन खीर-पूड़ी की दावत कैदियों को दी जाती है। जेल की रसोई में आधुनिक मशीनें लगी हुई है, इन्हीं मशीनों पर हाटा गूंथने और रोटी बनाने का काम होता है। यानी शुद्धता का पूरा ख्याल रखा जाता हे। अजमेर को हाई सिक्योरिटी जेल में इस समय 400 से ज्यादा कैदी है। जेल परिसर में पांच-पांच बैरक के कई ब्लॉक बने हुए हैं। कैदियों को बैरक से अपने ब्लॉक में रेजानाबाहर आने की छूट भी मिलती है। 5 बैरक वाले कैदी आपस में संवाद भी कर सकते हैं। यानी कैदियों को 24 घंटे अपने बैरक में नहीं रहना पड़ता। खीर-पूडी और हलवे की सुविधा के साथ कैदियों को बैरक में पुस्तकें और अखबार पढऩे की भी सुविधा है। इसके लिए जेल परिसर में एक लाइब्रेरी भी बना रखी है। यदि कोई कैदी कुछ लिखना चाहता है तो उसे कागज और पेन भी उपलब्ध करवाया जाता है। इतना ही नहीं कैदियों की मांग पर राम नाम लिखने वाली कॉपी भी दी जाती है। कैयिों के सद्व्यवहार के लिए जेल प्रशासन जो कुछ भी कर सकता है, वह करता है। यहां तक कि फोन पर रिश्तेदारों से बात भी करवाई जाती है। जेल नियमों के तहत रिश्तेदारों से मुलाकात भी करवाई जाती है। चूंकि ऐसे कैदियों को जेल से बाहर जान का खतरा होता है, इसलिए जेल परिसर में ही वातानुकूलित वीडियो कॉन्फ्रेंस रूम बना रखा है, इसी से कैदियों की विभिन्न अदालतों में सुनवाई की जाती है। इसके साथ ही जेल परसिर में जे कैंटीन बनी हुई है उससे प्रत्येक कैदी प्रतिमाह 3500 रुपए की सामग्री खरीद सकता है। इसमें अचार से लेकर स्वादिष्ट खाने की सभी चीजें शामिल होती है। 35 सौ रुपए की राशि कैदी के रिश्तेदार जमा कराते हैं। जेल में मोबाइल के इस्तेमाल को सख्ती से रोकने के लिए हाईपवार जैमर लगाया गया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-10-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511