19 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में तपती धूप में जब कांगे्रस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी देश भर से आए मजदूर किसानों को संबोधित कर रहे थे, तब दिल्ली में एक वातानुकुलित सभागार में पीएम नरेन्द्र मोदी अपनी पार्टी के सांसदों को ज्ञान दे रहे थे। इधर, रामलीला मैदान में सोनिया, राहुल ने कहा कि मोदी सरकार किसान विरोधी और उद्योगपतियों की हितेषी है तो उधर मोदी ने कहा कि विपक्ष जो भ्रम फैला रहा है, उसका जवाब हम जनता तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। मोदी ने भाजपा सांसदों से कहा कि अब वे जनता से सीधा संवाद करें और बताए कि केन्द्र सरकार ने क्या-क्या काम किए हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि सोनिया और राहुल के मुकाबले में एक बार फिर नरेन्द्र मोदी ने राजनीतिक रंगमंच पर प्रभावी प्रस्तुति दी। लेकिन अब मोदी को यह समझना होगा कि जो सांसद उनके दम पर चुने गए वो घमंडी हो गए हैं। मोदी ने सही कहा कि सरकार की उपलब्धियां आम जनता तक नहीं पहुंच रही हैं। अच्छा हुआ कि मोदी को एक वर्ष के अंदर अंदर यह पता चल गया कि उनके सांसद आम जनता से दूर हो गए हैं। यदि सांसदों का जनता से जुड़ाव होता तो पीएम को यह नहीं कहना पड़ता कि सरकार की उलब्धियां आम जनता तक नहीं पहुंच रही है। मैं यहां अजमेर के दो सांसदों की कार्यप्रणाली को प्रस्तुत कर रहा हंू। पीएम चाहे तो इन दो सांसदों की कार्यप्रणाली के आधार पर देशभर के भाजपा सांसदों के हालातों का पता कर सकते हैं। अजमेर से लोकसभा के सांसद केन्द्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री सांवरलाल जाट हंै। राज्यसभा के सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री भूपेन्द्र सिंह यादव ने भी अपना गृह जिला अजमेर दर्ज करवा रखा है। इन दोनों सांसदों को जब यह पता चला कि पीएम मोदी 19 अप्रैल को दिल्लीमें सांसदों की कार्यशाला कर रहे हैं तो जाट और यादव को अजमेर की सुध आ गई।
यादव तो न जाने कितने माह बाद अपने गृह जिले में आए, यह पीएम की कार्यशाला का ही डर था कि यादव एक दिन पहले 18 अप्रैल को भागे भागे अपने घोषित आदर्श गांव सलेमाबाद पहुंचे। सलेमाबाद स्थित निम्र्बाक पीठ में अपने दर्शन देने के बाद यादव अजमेर के सर्किट हाऊस पर आ गए। यहां अपने चहेते भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और उसे ही जनसुनवाई का नाम दे दिया गया। यादव की मात्र आधे दिन की उपस्थिति से अजमेर में राजनीतिक विवाद भी उठ खड़ा हुआ। यादव दक्षिण विधानसभा की विधायक और प्रदेश की महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल के क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रमों में तो शामिल हुए, लेेकिन उत्तर विधानसभा क्षेत्र में कोई कार्यक्रम नहीं रखा। जबकि इस क्षेत्र के भाजपा विधायक प्रदेश के स्कूली शिक्षा राज्यमंत्री होने के साथ-साथ अजमेर के प्रभारी मंत्री भी हैं। यदि 19 अप्रैल को पीएम की कार्यशाला नहीं होती तो यादव 18 अप्रैल को भी अजमेर नहीं आते। पीएम की कार्यशाला के डर की वजह से ही 17 अप्रैल को सांवरलाल जाट ने भी कलेक्टे्रट के सभागार में एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उन योजनाओं की प्रगति की समीक्षा हुई, जो केन्द्र सरकार द्वारा अजमेर में चलाई जाती हैं। सवाल उठता है कि क्या केन्द्र की योजनाओं की समीक्षा पहले नहीं की जा सकती थी? पीएम मोदी ने केन्द्र की योजनाओं की प्रभावी क्रियान्विति के लिए देशभर में क्षेत्रीय सांसद की अध्यक्षता में ही कमेटी बना रखी है। शायद सांवरलाल जाट को तो 17 अप्रैल को ही पता चला होगा कि उनकी अध्यक्षता में जिला स्तर पर कोई कमेटी बनी हुई है। बैठक के बाद जाट ने मीडिया के सामने यह नहीं बताया कि अजमेर में केन्द्र सरकार की योजनाओं की क्या स्थिति है। जबकि जाट ने जिला परिषद और कलेक्टे्रट परिसर दोनों जगह सांसद सुविधा केन्द्र के नाम पर कमरों पर कब्जा कर रखा है। जाट जब कभी अजमेर आते हैं तो अपने चहेतों से ही घिरे रहते हैं। पीएम मोदी यदि सांवरलाल जाट और भूपेन्द्र यादव के सांसद के कामकाज का ही आंकलन कर ले, तो पता चल जाएगा कि दूसरे भाजपा सांसदों का क्या हाल है।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in) M-09829071511
Sunday, 19 April 2015
मोदीजी आपके सांसद तो घमंडी हो गए हैं
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