भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 25 अप्रैल को जयपुर में अमरूदों के बाग में राजस्थान भर के भाजपा कार्यकर्ताओं के एक महासम्मेलन को संबोधित किया। संबोधन में सीएम वसुंधरा राजे की पीठ तो थपथपाई ही गई साथ ही नरेन्द्र मोदी की केन्द्र सरकार के कार्यो की भी प्रशंसा की गई। शाह ने कहा कि कांग्रेस के शासन में जब पाकिस्तान से गोलीबारी होती थी तो भारत की ओर से कोई जवाब नहीं दिया था लेकिन अब जब पाकिस्तान से गोली आती है तो भारत से गोला जाता है। यह फर्क है भाजपा और कांग्रेस की सरकार का। नरेन्द्र मोदी के शासन में कोई देश भारत की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकता। अमित शाह ने सही कहा कि अब पाकिस्तान की ओर से सीमा पर गोली नहीं दागी जाती क्योंकि गोली दागने वाले भारत के कश्मीर में आकर बैठ गए है। अमित शाह शायद हकीकत पर आंख मूंद रहे है। पिछले दिनों कश्मीर के जो हालात देखने को मिले वे देश की एकता ओर अखण्डता के लिए बेहद खतरनाक थे। अलगाववादी नेता मुर्शरत आलम गिलानी जैसे लोगों की उपस्थिति में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए गए। इतना ही नहीं हाफिज सईद जैसे भारत विरोधी पाकिस्तानी का भी महिमा मंडन कश्मीर में किया गया। न केवल पाकिस्तान के झण्डे लहराए गए बल्कि खुलेआम कहा गया कि कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाया जाए। इसमें कोई दो राय नहीं कि अमित शाह ने अपनी पार्टी और सरकार का पक्ष हमेशा की तरह प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया लेकिन भाजपा के शासन में कश्मीर के जो हालात बद से बदतर हुए है उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह तब हो रहा है जब कश्मीर में भाजपा के समर्थन में पीडीपी की सरकार चल रही है। क्या भाजपा के समर्थन से चलने वाली सरकार कश्मीर में भारत का समर्थन करने वाले मुसलमानों को आगे नहीं ला सकती? भाजपा यह दावा कर रही है कि देशभर में 10 करोड़ कार्यकर्ता बनाकर दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी हो गई है जबकि वही हमारे ही देश के कश्मीर में भाजपा कार्यकर्ता तो दूर की बात वहां के लोग स्वयं को भारत का नागरिक मानने से भी इंकार करते है। अच्छा हो कि अमित शाह और नरेन्द्र मोदी मिलकर कोई ऐसी योजना बनाए जिसमें कश्मीर के लोग स्वयं को भारत का नागरिक माने। अमित शाह भले ही देश के मतदाताओं को भाजपा का कार्यकर्ता बना ले लेकिन जब तक कश्मीर में भारत के प्रति राष्ट्रभक्ति नहीं होगी तब तक 10 करोड़ सदस्यों का होना कोई मायने नहीं रखता है। अमित शाह माने या नहीं आज सबसे बड़ी समस्या कश्मीर की है। कश्मीर बहुत तेजी से भारत विरोधी बनता जा रहा है। यदि भाजपा ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं की तो फिर कश्मीर को भारत में बनाए रखना मुश्किल होगा।
वसुंधरा की प्रशंसा
शाह ने कहा कि राजस्थान में वसुंधरा राजे कितना अच्छा कार्य कर रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विधानसभा, लोकसभा, स्थानीय निकाय और पंचायतीराज के चुनावों में भाजपा को उम्मीद से ज्यादा सफलता मिली है। यदि सरकार का कामकाज अच्छा नहीं होता तो जनता चुनावों में वोट क्यों देती? यदि चुनाव में जीत का मापदण्ड ही सरकार के कामकाज का आंकलन है तो फिर अमित शाह को यह बताना चाहिए कि दो माह पहले दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को 70 में से मात्र 3 सीटें ही क्यों मिली? क्या नरेन्द्र मोदी की सरकार ने दिल्ली में खराब कार्य किया था। वसुंधरा राजे को शाबाशी देकर भी अमित शाह ने हकीकत से आंख मूंदने का काम किया है। राजस्थान में जिस तरह से खानों का आवंटन सीमेन्ट फैक्ट्री मालिकों को किया गया उससे प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट हुई है। अजमेर स्थित राजस्थान लोक सेवा आयोग में 14 माह बाद भी सदस्यों की नियुक्ति नहीं की गई है। सात में से वो तीन सदस्य ही काम कर रहे हैं जिनकी नियुक्ति गत कांग्रेस के शासन में हुई थी। आयोग का कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है जिससे प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवकों को नौकरी नहीं मिल पा रही है। जब इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था का इतना बुरा हाल है तो फिर भाजपा सरकार के कामकाज का आंकलन किया जा सकता है। यदि वसुंधरा राजे को बेरोजगार युवाओं की चिंता होती तो कम से कम आयोग में तो विभिन्न पदों के लिए भर्ती का काम तेजी से करवाती। अच्छा हो कि अमित शाह गोपनीय तरीके से राजस्थान की सरकार के कामकाज की जानकारी लें।
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Saturday, 25 April 2015
हकीकत से आंख मूंद रहे हैं अमित शाह
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