पीएम ने भी माना जूडिशियल सिस्टम परफेक्ट नहीं है
पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी माना है कि देश का जूडिशियल सिस्टम परफेक्ट नहीं है। 5 अप्रैल को दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों, राज्य के मुख्य न्यायाधीशों और प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि जूडिशियल सिस्टम लगातार पावरफूल हो रहा है, लेकिन इसके अनुपात में ही परफेक्ट होना भी अनिवार्य है। मोदी ने अदालतों में परेशान पक्षकारों की पीड़ा को उजागर करते हुए कहा कि आम नागरिक न्यायाधीशों को भगवान के रूप में मानता है। अब यदि भगवान की ताकत वाले न्यायाधीश गलती करेंगे तो उसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ेगा। पीएम ने कहा कि मैं लगातार कानून पर कानून बनाने के पक्ष में नहीं हूं। वर्तमान में 1700 ऐसे कानून है जिन्हें समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए मैंने एक कमेटी भी बना दी है और इस कमेटी ने 700 कानूनों को खत्म करने का मसौदा तैयार कर लिया है। पीएम ने अपने भाषण में जिस सफाई से देश के नागरिकों की भावना को न्यायाधीशों के समक्ष रखा उससे उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले दिनों में देश के जूडिशियल सिस्टम में सुधार होगा। न्यायाधीशों को भगवान का दर्जा देकर पीएम ने यह जता दिया है कि जूडिशियल सिस्टम न केवल निष्पक्ष, पारदर्शी हो बल्कि जनभावनाओं के अनुरुप भी हो। सिस्टम में नई टेक्नोलॉजी लाकर बरसों से लम्बित मुकदमों को निपटनाने की ओर भी पीएम ने संकेत दिए है। सुप्रीम कोर्ट के जज कुरियन जोसेफ का नाम लिए बगैर पीएम ने कह दिया कि किसी भी जज को किसी धर्म विशेष से नहीं जोडऩा चाहिए। जब जनता जज को भगवान मानती है तो फिर कोई जज अपने आप को हिन्दू, मुसलमान, ईसाई कैसे मान सकता है। मालूम हो कि जजों के तीन दिन के सम्मेलन पर जज कुरियन ने आपत्ति दर्ज करवाई थी। कुरियन ने कहा कि ईस्टर पर सम्मेलन नहीं होना चाहिए था। जब दीवाली और ईद का ख्याल रखा जाता है तब ईसाइयों के ईस्टर पर्व का भी ध्यान रखना चाहिए।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in) M-09829071511
Sunday, 5 April 2015
पीएम ने भी माना जूडिशियल सिस्टम परफेक्ट नहीं है
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